Vikrant Massey interview : छोटे परदे से अपने अभिनय कैरियर की शुरुआत करने वाले और बाद में बौलीवुड में अपनी एक अलग पहचान बनाने वाले अभिनेता विक्रांत मैसी एक जानेमाने अभिनेता हैं. उन्होंने हर चरित्र को बहुत ही संजीदगी से निभाया है. जैसा वे परदे पर दिखते हैं, वैसा ही उन का व्यवहार रियल लाइफ में भी होता है.

शांत और विनम्र स्वभाव के विक्रांत ने साल 2013 में आई फिल्म ‘लुटेरा’ से बौलीवुड में कदम रखा. इस के बाद फिल्म ‘ए डेथ इन द गंज’, ‘छपाक’, ‘हसीन दिलरुबा’ और ’12th फेल’ जैसी फिल्मों और वैब सीरीज में अपने दमदार अभिनय से वाहवाही बटोरी.

फिल्म ’12th फेल’ उन के कैरियर का सब से बड़ा टर्निंग पौइंट साबित हुई, जिस के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया.

लिया था ब्रेक

पिछले दिनों विक्रांत मैसी के इंडस्ट्री छोड़ने या ऐक्टिंग से सन्यास लेने की खबरें पूरी तरह से गलत थीं. यह केवल एक अफवाह थी, जो उन के एक सोशल मीडिया पोस्ट को गलत समझने की वजह से फैली थी.

असल में दिसंबर, 2024 में विक्रांत मैसी ने एक पोस्ट साझा किया था, जिस में उन्होंने लिखा था कि वे 2025 में आखिरी बार दर्शकों से मिलेंगे और अब ‘रीकैलिब्रेट’ करने और घर वापस लौटने का समय आ गया है. इस पोस्ट को प्रशंसकों और मीडिया ने उन का संन्यास मान लिया, जिस से पूरी इंडस्ट्री में हड़कंप मच गया था. बाद में खुद विक्रांत मैसी ने स्पष्ट किया कि वे रिटायर नहीं हो रहे हैं, बल्कि उन्होंने कुछ समय का ब्रेक लिया है.

कला को सुधारना जरूरी

उन के हिसाब से एक के बाद एक कई बड़ी फिल्में देने के बाद ’12th फेल’, ‘सेक्टर 36,’ और ‘द साबरमती रिपोर्ट’ आदि करने की वजह से वे मानसिक और भावनात्मक रूप से पूरी तरह थक चुके थे और एक कलाकार के रूप में खुद को परदे पर झोंकना बेहद थका देने वाला होता है और वे लगातार काम कर के बर्नआउट महसूस कर रहे थे, ऐसे में उन्हें आराम की जरूरत थी.

इस के अलावा वे मानते हैं कि लगातार काम करने से उन के अभिनय में दोहराव आ रहा था. वे कुछ समय काम से दूर रह कर अपनी कला को सुधारना चाहते थे, ताकि जब वापस आएं, तो दर्शकों को कुछ नया और बेहतर दे सकें.

7 से 8 महीने का यह लंबा ब्रेक काटने के बाद वे दमदार तरीके से वापसी कर चुके हैं. उन्होंने विशाल भारद्वाज की फिल्म ‘ओ रोमियो’ में काम किया और हाल ही में नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई अपनी वैब सीरीज ‘मुसाफिर कैफे’ से बतौर ऐक्टर और प्रोड्यूसर एक नई शुरुआत की है. इस में उन के काम की सराहना की जा रही है.

प्रोड्यूसर बनना कठिन

उन्होंने अपनी जर्नी के बारे में बात करते हुए कहा है कि ऐक्टिंग से अधिक प्रोड्यूसर बनना कठिन होता है क्योंकि एक प्रोड्यूसर के रूप में आप को सैट पर मौजूद 200 से ज्यादा लोगों की जिम्मेदारी लेनी होती है. सब से बड़ी चुनौती यह होती है कि अलगअलग सोच, व्यवहार और इच्छाओं वाले इन सभी लोगों को एक ही दिशा में साथ ले कर चलना होता है, जो बेहद जटिल काम है.

उन्होंने हंसते हुए कहा कि जब वे केवल एक अभिनेता के तौर पर सैट पर बैठते थे, तो कई बार अन्य कलाकारों की तरह वे भी बैठ कर प्रोड्यूसर्स को गालियां दिया करते थे कि अरे यार, यह प्रोड्यूसर ऐसा है, वैसा है, लेकिन जब वे खुद इस कुरसी पर बैठे, तब उन्हें समझ आया कि यह कितना भारी काम है और अब फिल्म निर्माताओं व क्रिएटर्स के लिए उन के मन में सम्मान कई गुना बढ़ गया है.

नए कलाकारों को मिलेगा मौका

विक्रांत ने बताया कि जब वे 16 साल के थे, तब उन्होंने अपनी पढ़ाई और परिवार के खर्च के लिए एक कौफी शौप में टेबल साफ करने का काम तक किया करते थे, लेकिन आज जब उन्हें निर्माता बनने का अवसर मिला है, तो वे अपने प्रोडक्शन हाउस के जरीए नए और प्रतिभाशाली लोगों को काम के अवसर देना चाहते हैं, ठीक वैसे ही जैसे कभी किसी ने उन पर भरोसा कर के उन्हें मौका दिया था.

अच्छी कहानियां कहना हैं पसंद

अब तक की उन की जर्नी बहुत ही अच्छी रही। नैशनल अवार्ड का मिलना उन का टारगेट नहीं था। वे कहते हैं कि एवार्ड से अधिक मैं अच्छी कहानियां बोलना पसंद करता हूं और अपने टैलेंट को दर्शकों तक पहुंचाने और उन के जीवन को बदलने की इच्छा रखता हूं क्योंकि कहानियों में जो ताकत होती है, वह बहुत कम चीजों में होती है. जहां पर भी किसी प्रकार की क्रांति आई है, वह कहानियों के माध्यम से ही आई है। एक दौर था, जब प्रिंटिंग प्रेस का बोलबाला रहा है, जहां कलम और शब्दों की वजह से विश्व में क्रांति आई है और मैं कलम की ताकत को जानता हूं. इसके अलावा एक राष्ट्रीय पुरस्कार से जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं कि आप अच्छी कहानियों का हिस्सा बनें.

होती है घबराहट

इस पुरस्कार तक पहुंचने में विक्रांत को काफी साल लगे, लेकिन अब वे उन सब की आवाज को आगे लाना चाहते हैं, जिन्होंने उन्हें इतना प्यार और जिम्मेदारियां दी हैं, जिस में वे खरा उतरना चाहते हैं। वे और अच्छी कहानियां एक निर्माता, निर्देशक के रूप में आगे कहना चाहते हैं.

आज भी विक्रांत को किसी फिल्म के रिलीज पर घबराहट होती है क्योंकि उन्हें लगता है कि फिल्म दर्शकों को कितनी पसंद आएगी, इस के लिए वे काफी चिंतित होते हैं. आगे जल्दी ही वे निर्माता के रूप में आगे आएंगे और अच्छी कहानी कहेंगे, ताकि दर्शक उन के इस रूप को भी स्वीकार करें.

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