आज की जेन जी के सामने बड़े सवाल तब खड़े होते हैं जब उन का कई सालों का लगभग एक सी फाइनैंशियल पोजीशन वाला एक फ्रैंड दूसरे से ज्यादा स्ट्रौंग होने लगे. सालों की डेटिंग, प्यार भरी रातें, ढेरों मैसेजों का ऐक्सचेंज, तरहतरह के ऐडवैंचर, सब मनी डिसपैरिटी के दबाव में आने लगते हैं.

शुरुआत आमतौर पर कमजोर रह गए पार्टनर के साथ होती है. उसे सहन नहीं होता कि कल तक जो बराबर का था और आसपास पटरी वाले की भेलपूरी से खुश हो जाता था अब स्टारबक्स की 400 रुपए की कौफी क्यों पीना चाहता है? जो साथ में पटरी पर रैमनैंट्स के कपड़े चुन कर 300 रुपए का टौप और 400 रुपए की जींस खरीद कर खुश होता था, अब ब्रैंडेड कपड़े क्यों ले रहा है?

यह स्टेटस डिफरैंस वीक पार्टनर को खाने लगता है. आजकल लड़केलड़की में से कोई भी दूसरे से आगे बढ़ सकता है क्योंकि अब जैंडर डिफरैंस कम होते जा रहे हैं. लोग लिव इन में या मैरिज के बाद बरसों एकसाथ रहते हैं चाहे अलगअलग कमाते हों. अब वह जमाना नहीं रहा जब फीमेल पार्टनर खुश हो कि मेल पार्टनर की प्रोग्रैस हो रही है और वह अपनी लाइफ ईजी कर सकती है. अब इक्वैलिटी का जमाना है और यह जेन जी कंप्रोमाइज नहीं कर रही, न अपने कैरियर में और न पौलिटिक्स अथवा गवर्नैंस में.

दिक्कत यह है कि पिछड़ गए पार्टनर को कब तक ढोएं और क्या सच में यह रिलेशनशिप टिक सकती है? सैडली, यह रिलेशनशिप जो कभी इक्वैलिटी पर टिकी थी, अनइक्वल होने पर चल नहीं सकती. यह जल्द ही टौक्सिक हो जाएगी. इस में फालतू की बातों में बहस हो जाएगी, इनसल्टिंग कमैंटों की ऐक्सचेंज शुरू हो जाएगी.

अच्छा यही है कि पिछली मैमोरीज को भुला कर आगे की सोचें. जिंदगी बहुत लंबी है और पार्टनर का बोझ हमेशा नहीं ढोया जा सकता. जो आज थोड़ा सा डिपैंड हो रहा है कल और ज्यादा डिमांडिंग होने लगता. वह ऐसा बैगेज है जो पुराने परफ्यूम की तरह ऐक्सपायरी आने के बाद बैड स्मैल देने लगते हैं.

उन सालों को मत गिनें जो साथ बिताए गए. उन सालों की फिक्र करें जो बाद में बिताने हैं. पास्ट अच्छा था पर फ्यूचर रैडी होना ही प्रैक्टिल है. यह सैल्फिशनैस नहीं है. जिंदगी में उतारचढ़ाव आते ही हैं. पेरैंट्स से अलग होना पड़ता है. सिबलिंग अलगअलग रोडमैप ले कर चलते हैं. क्लासमेट्स, रूममेट्स आतेजाते हैं. पिछड़ गए पार्टनर को डंप करने में हिचकिचाएं नहीं, यह दोनों के लिए अच्छा है.

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