Mekhlea chador : यह परिधान आजकल नौर्थ ईस्ट में ही नहीं बल्कि पूरे भारत में स्टाइल स्टेटमैंट बन गया है. यंग लड़कियां शादीब्याह के फंक्शन में भी इसे पहनना पसंद कर रही हैं. इस का रीजन भी यही है कि उन्हें कुछ अलग हट कर चाहिए जो ट्रैडिशनल तो हो ही, साथ ही साड़ी से मिलताजुलता हो और इस के लिए मेखला चादर से बेहतर और क्या होगा.

असमिया महिलाओं द्वारा पहना जाने वाला एक यह बेहद खूबसूरत और पारंपरिक 2 हिस्सों वाला परिधान है. यह दिखने में साड़ी जैसा लगता है.

मेखला क्या है

यह नीचे पहना जाने वाला हिस्सा होता है, जो बेलनाकार या स्कर्ट की तरह होता है. इस में सामने की तरफ सुंदर प्लेट्स डाल कर कमर में टक किया जाता है.

चादर क्या है

यह ऊपर लपेटा जाने वाला लंबा कपड़ा होता है. इस का एक सिरा मेखला में दबाया जाता है और दूसरा सिरा पल्लू की तरह बाएं कंधे पर ड्रैप किया जाता है. इसे बनाने के लिए कैसा कपड़ा यूज किया जाता है

मुगा सिल्क या गोल्डन सिल्क : क्या आप जानते हैं कि इस का कपड़ा इतना अच्छा होता है कि इस के रंग कभी फीके नहीं पड़ते बल्कि धुलाई के बाद और निखर जाते हैं. इस की चमक साल दर साल बढ़ती ही जाती है. यही वजह है कि इसे धरोहर के तौर पर शादीब्याह में मां अपनी बेटी को देती है. यह दुलहन के जोड़े के लिए काफी पसंद किया जाता है.

इसे गोल्डन सिल्क इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह असम का सब से प्रीमियम और पेटेंटेड सिल्क है, जो अपनी प्राकृतिक सुनहरी चमक के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है.

पाट सिल्क यानी शहतूत रेशम : यह शुद्ध शहतूत से बनने वाला एक चमकदार और मुलायम कपड़ा है. यह आमतौर पर सफेद, औफ व्हाइट या क्रीम रंग में होता है, जिस पर लाल, हरे, नीले और सुनहरे (जरी) धागों से बारीक कढ़ाई की जाती है.

इसे खासतौर पर बिहू त्योहार, शादीब्याह, और मांगलिक अवसरों पर पहना जाता है. लेकिन आजकल जेन जी के द्वारा भी इसे काफी पसंद किया जा रहा है.

एरी सिल्क यानी अहिंसा सिल्क : अब आप सोच रहे होंगे कि क्या यह गांधीजी के द्वारा बनाई हुई सिल्क है जो इस का नाम अहिंसा सिल्क है. जी नहीं, अहिंसा यानी जीवों की हत्या न करने से इस का संबंध जरूर है. मतलब  इसे ‘अहिंसा सिल्क’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस में रेशम के कीड़े को मारे बिना धागा निकाला जाता है. इस में सिल्क का धागा निकालने के लिए किसी भी तरह की जीव हत्या नहीं होती.

यह कपड़ा छूने में बेहद मुलायम, थोड़ा मोटा और हलका गरम होता है. यह कौटन और वूल (ऊन) का मिलाजुला एहसास देता है. सर्दियों के मौसम में पहनने या रोजाना/कैजुअल मौकों के लिए बेहतरीन.

कौटन और कौटन सिल्क : यह पूरी तरह सूती कपड़े से बनी होती है, जो बहुत आरामदायक और हवादार होती है. टौस सिल्क/ कौटन सिल्क ( यह हलका और बजट फ्रैंडली विकल्प है, जिसे संभालना बहुत आसान होता है.

इसे रोजमर्रा के इस्तेमाल, औफिस/कालेज या हलकेफुलके आयोजनों के लिए उपयुक्त माना जाता है. इसे किस तरह पहना जाता है

यह 2 हिस्सों वाली रेडिमेड स्टाइल साड़ी की तरह होती है, जिसे पहनना आम साड़ी से काफी आसान है.

मेखला एक बेलनाकार खुला कपड़ा होता है. इसे ऊपर से अपने सिर/कमर से डालते हुए नीचे लाएं. इस के बाद कपड़े के दोनों किनारों को पकड़ कर सामने की ओर चौड़ी और साफ प्लेट्स बनाएं. सभी प्लेट्स को सेट कर के अपनी नाभि के ठीक सामने पेटीकोट के अंदर मजबूती से दबा लें. मेखला की लंबाई जमीन को हलकी छूनी चाहिए.

चादर कैसे ड्रेप करें

इस के लिए चादर के एक किनारे को लें और उसे नाभि के राइट साइड कमर में पेटीकोट के अंदर टक करें.

अब चादर को पीछे से घुमाते हुए लेफ्ट ओर से आगे ले कर आएं.चादर के बचे हुए हिस्से की पल्लू जैसी सुंदर प्लेट्स बनाएं. इन प्लेट्स को अपने लैफ्ट कंधे पर रखें. असमिया स्टाइल में चादर का पल्लू बहुत लंबा नहीं रखा जाता, यह आमतौर पर घुटनों या उस से थोड़ा ऊपर तक रहता है.

प्री स्टिच्ड मेखला चादर

अगर आप को यह समझ में नहीं आ रहा है और इसे बांधना झंझट लग रहा है तो आजकल मार्केट में प्री स्टिच्ड मेखला चादर भी मिलती हैं, जिन्हें जिप या हुक की मदद से 2 मिनट में आसानी से पहना जा सकता है.

कैसे तैयार हों

-मेखला चादर के बौर्डर से मैच करता हुआ या कंट्रास्ट (जैसे लाल सुनहरा, हरा सफेद) ब्लाउज चुनें.

-मेखला चादर पर लो बन (नीचा जूड़ा) सब से खास लगता है. जूड़े में कौपो फूल (और्किड) या मोगरे का गजरा जरूर लगाएं.

-अगर आप यंग/कैजुअल लुक चाहती हैं, तो साइड स्वैप्ट सौफ्ट कर्ल्स (खुले घुंघराले बाल) भी रख सकती हैं.

-आंखों पर विंग्ड आईलाइनर लगाएं.

-होंठों पर बोल्ड रैड या कोई भी डार्क लिपस्टिक लगाएं.

-माथे पर गोल लाल बिंदी इस ड्रैस के साथ खूब फबती हैं.

-इस के साथ हेवी क्लच, पोटली बैग या ऐंब्रौयडरी वाला एथनिक पर्स पेयर करें.

-पारंपरिक असमिया ज्वैलरी जैसे जोंबीरी (अर्धचंद्र हार), ढोलबारी और गामखारू (चौड़ा कंगन) पहनें.

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