Home Decor : फैशन की तरह इंटीरियर डिजाइन के ट्रेंड भी समय के साथ बदलते रहते हैं. पहले लोग दादादादी के ओल्ड भारी फर्नीचर को संभाल कर रखते थे और उसी को सालोंसाल प्रयोग करते थे. वह फर्नीचर जगह भी लेता था और इंटीरियर के साथ मैच भी नहीं करता था. समय के साथ इस में बदलाव आया है. अब बड़े शहरों में जगह की काफी कमी और लोगों के लाइफस्टाइल में काफी परिवर्तन आया है. ऐसे में लोग जगह के अनुसार ही इंटीरियर करते हैं ताकि उन्हें घर हमेशा फ्रैश और नया दिखे.
क्या कहती है रिसर्च
एक रिसर्च के अनुसार हम जिस माहौल में रहते हैं उस का हमारे विचारों पर गहरा असर पड़ता है. घर का इंटीरियर बदलने से न्यूरोप्लास्टिसिटी को बढ़ावा मिलता है, जिस से दिमाग को नयापन और ताजगी महसूस होती है, साथ ही फालतू सामान हटा कर इंटीरियर को व्यवस्थित करने से कोर्टिसोल यानी तनाव बढ़ाने वाले हारमोन का स्तर कम होता है.
बिखरा घर बिखरे दिमाग का प्रतीक होता है, जबकि साफ और व्यवस्थित घर मानसिक शांति देता है. इतना ही नहीं, जब आप घर में अपनी पसंद का रंग, सुंदर सजावट या नया फर्नीचर देखते हैं तो दिमाग में डोपामाइन रिलीज होता है. इसे इंटीरियर डिजाइनिंग की भाषा में ‘डोपामाइन डैकोर’ भी कहा जाता है.
इंटीरियर बदलना जरूरी
इस बारे में मुंबई की इंटीरियर डिजाइनर विजय सिपाडिया कहते हैं कि असल में घर के इंटीरियर को समयसमय पर बदलना बेहद जरूरी है. पुराना और भारी फर्नीचर आज ट्रेंड में कम है क्योंकि जगह की कमी है. फर्नीचर बदलने पर यह न केवल घर को एक नया लुक देता है बल्कि हमारे मानसिक स्वास्थ्य, मूड और घर की उपयोगिता को भी बेहतर बनाता है. लंबे समय तक एक ही तरह के माहौल में रहने से बोरियत होने लगती है, जबकि बदलाव से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
इंटीरियर में बदलाव अधिकतर लोग 8 से 10 साल में कर लेते हैं लेकिन इस में बजट के अनुसार ही बदलाव किया जाना चाहिए.
इंटीरियर बदलने के कई फायदे हैं
सकारात्मक ऊर्जा: नया बदलाव तनाव को कम करता है और मानसिक शांति देता है, साथ ही बेहतर स्पेस मैनेजमैंट और बढ़ती जरूरतों के हिसाब से घर की जगह का सही इस्तेमाल हो पाता है.
लाइफस्टाइल के साथ फिट: समय के साथ हमारी जरूरतें और लाइफस्टाइल बदलता है जैसे वर्क फ्रौम होम के लिए घर में स्पेस या
मौडर्न किचन की आवश्यकता जिस में खाना जल्दी और बिना झंझट के बन सके आदि.
प्रौपर्टी की वैल्यू: अच्छा और आधुनिक इंटीरियर आप के घर की रीसेल वैल्यू को काफी बढ़ा देता है.
कम बजट में प्रीमियम लुक
यदि आप बिना ज्यादा खर्च किए या बिना बड़ी तोड़फोड़ के अपने घर को एक नया और प्रीमियम लुक देना चाहते हैं तो आप इन आसान तरीकों को अपना सकती हैं:
पेंट और दीवारों का रंग हर 4 से 6 साल में बदलना अच्छा होता है क्योंकि घर का पेंट अमूमन 5 सालों में फीका पड़ने लगता है. ऐसे में दीवारों पर नए ट्रेंडी और वार्म कलर्स मसलन, क्रीम कलर लगा कर आप कम बजट में घर को नया लुक दे सकती हैं.
अगर घर में वालपेपर लगा है, तो वह 5 से 7 साल में कोनों से उखड़ने लगता है, जिसे बदलना जरूरी हो जाता है.
हर 7 से 10 साल में सोफा और कुशनिंग करना जरूरी होता है. लगातार इस्तेमाल से सोफे की गद्दियां दब जाती हैं और कपड़ा गंदा या फट जाता है. अत: 7-8 साल में कपड़ा बदलना या रिप्लेस करना पड़ता है.
अच्छी क्वालिटी की प्लाई से बने बैड और डाइनिंगटेबल 9-10 साल या उस से ज्यादा समय भी आसानी से चल जाते है. अगर वह मजबूत लकड़ी की बनी हो तो उस पर बार्निश लगवा कर चमक लाई जा सकती है.
किचन में नमी और तेल के धुएं के कारण सनमाइका और चैनल खराब होने लगते हैं. अगर मौड्यूलर किचन और वार्डरोब का मैटीरियल अच्छी क्वालिटी का है तो यह 10 साल तक टिकता है, वरना बदलना सही रहता है. इस के अलावा आउटडेटेड डिजाइन को बदलने के लिए घर की लाइटिंग और परदे बदल कर भी रीफ्रैश किया जा सकता है.
इस प्रकार घर के इंटीरियर को अपनी पसंद के अनुसार ढालने से व्यक्ति को अपने जीवन पर एक सकारात्मक नियंत्रण महसूस होता है. यह घर को केवल एक मकान नहीं बल्कि एक सुरक्षित शरणस्थली बनाता है, जहां आ कर आप पूरी तरह सुरक्षित महसूस करते हैं.
यही वजह है कि आप को घर के इंटीरियर में समयसमय पर बजट के अनुसार बदलाव करते रहना चाहिए ताकि आप के सपनों का घर हमेशा आप को ताजगी और सुकून महसूस कराए.
