दो माह पहले जब नवाजुद्दीन सिद्दिकी से हमारी लंबी बातचीत हुई थी, तब खुद की आलोचना सुनने के संदर्भ में नवाजुद्दीन सिद्दिकी ने कहा था- ‘‘मैं अपनी आलोचना सुनना पसंद करता हूं, बशर्ते कि मेरी आलोचना करने वाला इंसान उस काबिल हो. जो इंसान किसी काबिल नहीं, वह इंसान किसी को भी गाली दे देता है. जब मेरी कोई आलोचना करता है, तो मैं उसकी शिक्षा के बारे में जानकारी हासिल करता हूं. वह मेरे जितना शिक्षित या मेरे जितना अनुभव रखता है या नहीं. यदि एक इंसान समझदार, जानकारी रखने वाला व अनुभवी है, तो वह मुझे दस गाली दे सकता है. मैं उसकी हर गाली को स्वीकार करुंगा, उस पर विचार करुंगा. उससे सीखूंगा, क्योंकि वह काबिल है. काबिल इंसान की बात सुननी चाहिए. जो नालायक हैं, घर पर बैठे रहते हैं, काम कुछ करते नहीं हैं, सिर्फ सोशल मीडिया पर शेखी बघारते रहते हैं, उनको मैं कोई तवज्जो नहीं देता. ट्वीटर पर बेवजह गाली देने वालों की कौन सुनता है? ’’

यदि हम उनकी इस बात पर यकीन करें, तो उनकी आत्मकथा रूपी किताब को लेकर जब उनकी आलोचना शुरू हुई, तो आलोचकों की काबीलियत को समझने में उन्हें एक सप्ताह का वक्त लग गया, क्योंकि अब उन्होने ट्वीट कर अपनी किताब को वापस लेने का ऐलान कर दिया है. इस तरह वह मान रहे है कि एक विवाद का अंत हो गया.

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