‘‘मैं सोच रही हूं कि हमें अपने पहले के विचार पर पुनर्विचार करना चाहिए,’’ सोमा ने कुछ  झिझकते हुए विनोद से कहा.

‘‘किस विचार पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता महसूस हो रही है तुम्हें?’’ विनोद ने आश्चर्य से पूछा. बात उस के पल्ले नहीं पड़ रही थी.

‘‘वह बच्चे वाली. अब मु   झे लग रहा है कि हमारा जीवन नीरस हो रहा है. बिलकुल सूनासूना सा जीवन हो गया है. एक बच्चे के आ जाने से तबदीली आ जाएगी जिंदगी में,’’ सोमा ने कहा और उत्तर की आशा में विनोद को देखने लगी. वह सोच कर घबरा रही थी कि न जाने क्या प्रतिक्रिया होगी विनोद की.

‘‘क्या कह रही हो सोमा? हम ने तो इसी शर्त पर शादी की थी कि हमें बच्चा नहीं चाहिए. बच्चा पालने में बड़े    झमेले हैं, इसे तुम भी मानती थी और मैं भी. सच पूछा जाए तो हमारे विचार की समानता के कारण ही तो हम शादी के बंधन में बंधे थे,’’ विनोद ने हैरत के साथ कहा.

उस का व्यवहार सोमा की अपेक्षा के अनुरूप ही था. यह सच था कि वह भी प्रारंभ में बच्चा पालने के     झंझट में नहीं पड़ना चाह रही थी. उस ने कई महिलाओं को देखा था बच्चे के झमेले में पड़ कर अपना कैरियर और शांति नष्ट होते हुए.

‘‘बात तुम्हारी बिलकुल ठीक है. इसीलिए तो मैं पुनर्विचार की बात कर रही हूं. मैं कहां कोई एकतरफा निर्णय थोप रही हूं तुम्हारे ऊपर?’’ सोमा ने शांत स्वर में कहा.

‘‘सोचना भी मत. इसी शर्त पर हम ने शादी की थी. जब शर्त ही नहीं रहेगी तो शादी टूटने से कोई नहीं रोक पाएगा,’’ विनोद आगबबूला हो गया.

‘‘मैं तो बस पुनर्विचार के लिए कह रही हूं. दोबारा इस बात की चर्चा तब तक नहीं चलाऊंगी जब तक तुम न कहो,’’ सोमा ने मानो आत्मसमर्पण कर दिया.

बात आईगई हो गई. पर कहीं न कहीं यह विनोद के मन को मथ रही थी. आज विनोद तीस वर्ष का है. उस की पत्नी सोमा भी लगभग इसी उम्र की है. कई वर्षों से एकदूसरे को जानते थे. सोमा शादी नहीं करना चाहती थी क्योंकि वह बच्चा पालने के    झं   झट में नहीं पड़ना चाहती थी. उस ने कई लड़कियों के कैरियर को बच्चा पालने के कारण बरबाद होते देखा था और उसी राह पर नहीं चलना चाहती थी.

विनोद भी इसी विचार का था. उसे भी लगता था कि बच्चा होने के बाद इतनी जिम्मेदारियां हो जाती हैं कि अपना जीवन जी नहीं पाता आदमी. वैसे तो दोनों एकदूसरे से प्रेम करते थे. दोनों ने एकदूसरे के विचारों के मेल के कारण ही शादी करने का निर्णय लिया था. दोनों खुश थे. किसी प्रकार का तनाव न था और जिंदगी बहुत ही सुचारु गति से चल रही थी. पर सोमा के पुनर्विचार वाले प्रस्ताव से वह कुछ असहज महसूस कर रहा था. सहमति से लिए गए निर्णय पर पुनर्विचार की बात कर के बहुत बड़ा सदमा दिया था सोमा ने. पर विनोद ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी थी.

इस के बाद कई महीनों तक सोमा ने इस बारे में कोई बात नहीं की. पर कहीं न कहीं सोमा के व्यवहार से उसे लग रहा था कि बच्चे की चाहत उस के मन में बहुत अधिक है. उसे यह डर भी सता रहा था कि सोमा फिर से इस बात की चर्चा न करने लगे और उस पर कोई दबाव न बनाए. साथ ही उसे यह भी लग रहा था कि कहीं बच्चे की चाहत पूरी न होने पर वह नाराज न हो जाए और आगे चल कर तलाक न ले ले.

तो क्या एक बच्चा हो जाने दे वह? इस प्रश्न का जवाब उसे नहीं मिल पा रहा था. क्या वह इस शर्त पर बच्चा होने के लिए तैयार हो जाए कि वह बच्चे की देखभाल में कोई मदद नहीं करेगा और यह सोमा के अकेले की जिम्मेदारी होगी. पर घर में बच्चा रहेगा तो कैसे वह एकदम से उस से दूरी बना कर रख पाएगा. इस प्रश्न का कोई हल उसे नजर नहीं आ रहा था.

सिर्फ इस कारण से पिता बनना कि उस की पत्नी इस के लिए एकतरफा चाहत रखती है, उचित नहीं होगा. यह न सिर्फ उस के लिए उचित नहीं होगा बल्कि बच्चे के लिए भी उचित नहीं होगा. वैसे सोमा भी गलत नहीं है क्योंकि अगर उस का विचार बदल गया है तो वह उस के लिए स्वतंत्र है क्योंकि अपने निर्णय पर, अपने शरीर पर उस का अधिकार होना ही चाहिए. अब पतिपत्नी के विचार में ऐसा विरोध है तो फिर क्या किया जाए?

कई सप्ताह इसी उधेड़बुन में फंसा रहा विनोद. सोमा ने उस के बाद कुछ कहा नहीं और हमेशा सहज रहने की कोशिश करती रही. पर कहीं न कहीं उस के चेहरे पर उदासी के भाव दिख जाते थे. शादी इसी शर्त पर होने के कारण सोमा उस से इस बारे में बात नहीं करती थी. धीरेधीरे विनोद पर सोमा की उदासी का प्रभाव पड़ने लगा. उस का दिल कहीं न कहीं सोमा की उदासी का जिम्मेदार खुद को मानने लगा.

यह ठीक है कि शादी की शर्त पर कायम रहना चाहिए पर परिवर्तन तो जीवन का नियम है. किसी के विचार में समय के साथ परिवर्तन होना स्वाभाविक है और ऐसी कोई विशेष मांग नहीं थी सोमा की जिसे पूरा नहीं किया जा सकता और सब से बड़ी बात यह कि सोमा इस के लिए कोई जिद नहीं कर रही. पर क्या पति का दायित्व नहीं होता पत्नी की खुशी का खयाल रखने का? वैसे वह तो सोमा को खुश रखने का हरसंभव प्रयास करता रहा है.

एक रविवार को विनोद और सोमा नाश्ता करने के बाद बैठे हुए थे. थोड़ी देर टीवी देखने के बाद विनोद बैडरूम में जा कर लेट गया. टीवी पर चुनाव से संबंधित और इसराईलईरान, रूसयूके्रन के    झगड़े से संबंधित चर्चा अधिक हो रही थी जिस में दोनों की कोई रुचि नहीं थी. सोमा भी उस की बगल में आ कर लेट गई.

विनोद ने सोमा को अपनी ओर खींचते हुए कहा, ‘‘मुझ से तुम्हारा उदास चेहरा देखा नहीं जाता.’’

‘‘उदास चेहरा? मैं कब उदास रहती हूं?’’ सोमा ने विनोद के कंधे पर सिर रख कर कहा.

‘‘   झूठ मत बोलो. जब से मैं ने तुम्हारे पुनर्विचार के प्रस्ताव को ठुकराया है तुम बुझीबुझी सी रहती हो,’’ विनोद ने अपनी बांहों में सोमा को कसते हुए कहा.

‘‘अरे ऐसा कुछ नहीं है. तुम इस की बिलकुल फिक्र न करो. बस ऐसे ही मन में बात आ गई थी. बेशक बच्चा पालने में काफी    झं   झट है. मैं भी इस पचड़े में नहीं पड़ना चाहती,’’ सोमा ने अपनी बांहों में विनोद के लपेटते हुए कहा.

‘‘बच्चा पालने के  झंझट से बड़ा एक और  झंझट है,’’ विनोद ने कहा.

‘‘क्या?’’ सोमा चौंक गई.

‘‘अपनी पत्नी को उदास देखना,’’ विनोद ने मुसकरा कर कहा.

‘‘अरे ऐसा कुछ भी नहीं है,’’ सोमा ने कहा ‘‘मान लिया कुछ भी नहीं है, यदि मेरा विचार बदल कर एक बच्चा पैदा करने का हो जाए तब तो तुम मानोगी?’’ विनोद ने कहा.

सोमा ने विनोद की आंखों में    झांकते हुए हामी में सिर हिला दिया और मुसकरा पड़ी. आज कई दिनों के बाद विनोद ने सोमा के चेहरे पर उन्मुक्त हंसी देखी.

दोनों ने शादी इस शर्त पर की थी कि बच्चा नहीं चाहिए. आज दोनों इस बात पर सहमत थे कि बच्चा चाहिए. दोनों ने एकदूसरे की भावना का खयाल रख कर यह निर्णय ले लिया कि एक बच्चा होना ही चाहिए. छुट्टी का दिन था और दोनों एकदूसरे से लिपटे हुए थे. थोड़ी ही देर में दोनों उत्तेजित हो गए और फिर एकदूसरे की बांहों में खो गए. हमेशा की तरह आज विनोद को कंडोम की आवश्यकता नहीं थी.

दोनों जब एकदूसरे से अलग हुए तो हांफते हुए विनोद ने कहा, ‘‘बिना कंडोम के आनंद थोड़ा बढ़ जाता है न?’’

सोमा ने शरमा कर कहा, ‘‘धत्त.’’

इस के बाद से उन दोनों के बीच कंडोम कभी नहीं आया. पहले कभी बिना कंडोम के साथ हो भी लेते थे तो सोमा 24 घंटे के अंदर पिल ले लेती थी ताकि गर्भ न ठहरे. दोनों अब बिना किसी सावधानी के खुल कर सहवास का आनंद ले रहे थे और अपेक्षा कर रहे थे की शीघ्र ही सोमा गर्भवती हो जाएगी.

दिन, महीने, साल गुजर गए और सोमा गर्भवती नहीं हुई तब उन्हें चिंता हुई. अब तक दोनों ने एक बच्चा होने का मन बना लिया था. इशारों ही इशारों में घर वालों को भी बता दिया गया था. यह योजना भी बना ली गई थी कि प्रसव के लिए सोमा अपने मायके जा कर 2-3 महीने रहेगी और फिर यहां विनोद के मातापिता आ जाएंगे बच्चे के लालनपालन में सहायता करने के लिए.

दोनों ने अपनेअपने स्तर से गर्भ ठहरने के उपाय शुरू कर दिए. इस से संबंधित जानकारी साहित्य, गूगल आदि से लेना शुरू कर दिया. कहीं से पता चला कि मासिकधर्म के कुछ दिनों बाद संभोग करने से गर्भ ठहरता है. कई महीने यह कर के भी देख लिया. फिर चक्कर शुरू हुआ डाक्टरों का. सारे टैस्ट हुए और कहीं कोई कमी नहीं मिली. डाक्टर भी हैरान थे कि आखिर कमी कहां है. दोनों पतिपत्नी अवसादग्रस्त हो गए. सोमा को खुद से ज्यादा विनोद की चिंता होती थी. उसे लगता था कि उस ने यह बात नहीं उठाई होती तो शायद इस मानसिक अवसाद से विनोद न गुजरता.

कृत्रिम गर्भधारण, आईवीएफ? और न जाने क्या क्या उपाय किए गए पर कुछ भी काम न आया. डाक्टर न कोई कमी बता पा रहे थे, न कोई उपाय कर पा रहे थे. इस अवसाद का प्रभाव उन के सैक्स जीवन पर भी पड़ने लगा और विनोद चिड़चिड़ा होता चला गया. पहले वह सैक्स का खुल कर आनंद लेता था. अब सैक्स का एक ही मकसद रह गया था, गर्भधारण. सैक्स का आनंद जाता रहा.

कभीकभी सोमा को यह भी लगता कि बारबार पिल लेने से नुकसान हुआ है. शुरू के दिनों में अकसर बिना प्लान के सैक्स हो जाता था जिस के कारण उसे पिल लेनी पड़ती थी.

एक दिन विनोद उदास सा बैठा हुआ था. सोमा उस की बगल में आ कर बैठ गई. उस के कंधे पर सिर रख कर बोली, ‘‘सौरी विनोद, मैं ने बच्चे वाली बात उठा कर खुद को और तुम्हें नाहक परेशान कर दिया.’’

विनोद उस का सिर सहला कर रह गया. उस की आंखें डबडबा गईं. अब कोई उपाय भी तो नहीं बचा था.

आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

डिजिटल

(1 साल)
USD48USD10
सब्सक्राइब करें

गृहशोभा सब्सक्रिप्शन के फायदे

  • गृहशोभा मैगजीन का सारा कंटेंट
  • 2000+ फूड रेसिपीज
  • 6000+ कहानियां
  • 2000+ ब्यूटी, फैशन टिप्स

24 प्रिंट मैगजीन + डिजिटल

(1 साल)
USD150USD120
सब्सक्राइब करें

गृहशोभा सब्सक्रिप्शन के फायदे

  • 24 प्रिंट मैगजीन + मोबाइल पर पढ़ने की सुविधा
  • डिजिटल सब्सक्रिप्शन के बेनिफिट्स
  • गृहशोभा इवेंट्स का फ्री इन्विटेशन
(नाश्ता + लंच + ₹ 1 हजार तक का गिफ्ट हैम्पर + ₹ 2 हजार तक का बंपर प्राइज )
और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...