सिरदर्द को न करें नजरअंदाज

बदलती जीवनशैली, काम का तनाव, डिप्रेशन, खराब लाइफस्टाइल और एंग्जाइटी की वजह से सिरदर्द की समस्या आजकल  काफी बढ़ गई है. कई बार मानसिक तनाव की वजह से भी सिर में दर्द रहता है, लेकिन अगर लगातार सिरदर्द बना रहे और हर दिन ये समस्या महसूस हो तो लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए. इस प्रकार का सिरदर्द ब्रेन ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारी का लक्षण भी हो सकता है.

इसके अलावा जो लोग माइग्रेन जैसी समस्या से पीड़ित हैं. उसमें ब्रेन ट्यूमर होने की जोखिम रहती हैं. कई बार माइग्रेन का दर्द समझकर लोग ध्यान नहीं देते हैं लेकिन बार-बार सिरदर्द की समस्या हो, तो उसे नजरअंदाज न करें. इसलिए समय रहते विशेषज्ञ की सलाह लेना काफी जरूरी होता हैं

मुंबई की झायनोव्हा शाल्बी मल्टिस्पेशालिटी रुग्णालय के न्यूरोलॉजिस्ट, डॉ आकाश छेडा कहते है कि देशभर में ब्रेन ट्यूमर के मामले बढ़ते जा रहे हैं. इस बीमारी का समय रहते निदान और इलाज नहीं हुआ, तो जानलेवा साबित हो सकता हैं. ब्रेन ट्यूमर के मरीजों में सिरदर्द एक सामान्य लक्षण है, अक्सर सामान्य सिरदर्द वाले मरीजों को ब्रेन ट्यूमर होने का खतरा रहता हैं, लेकिन लोगों के  लिए यह पहचान करना मुश्किल होता हैं कि उनको जो सिरदर्द हो रहा है, वह सामान्य दर्द है, माइग्रेन का दर्द है या ब्रेन ट्यूमर के कारण दर्द हो रहा हैं. इस बारें में लोगों में जागरूकता पैदा करना काफी जरूरी हैं. ब्रेन ट्यूमर आमतौर पर उन लोगों को प्रभावित करता हैं, जो 40 से 60 वर्ष की आयु वर्ग में आते हैं.

ब्रेन ट्यूमर और माइग्रेन के दर्द को पहचानने के लक्षण

ये लक्षण कुछ इस प्रकार है,

माइग्रेन में सिर के एक तरफ दर्द होता है, ये किसी भी समय हो सकता है. माइग्रेन अक्सर युवावस्था में शुरू होता है और 35 से 45 वर्ष की आयु के लोगों को सबसे अधिक प्रभावित करता है, लेकिन अगर किसी को सुबह-सुबह बहुत तेज सिरदर्द होना और इसके ही साथ उल्टी भी आना, तो यह ब्रेन ट्यूमर का लक्षण हो सकता हैं. इसके अलावा ब्रेन ट्यूमर के लक्षणों में मतली, उल्टी, नींद न आना, मिजाज में बदलाव, बोलने और सुनने में असमर्थता, गंध में बदलाव की समस्या होती हैं. किसी भी व्यक्ति में ऐसे लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लेना काफी जरूरी होता हैं,

दे सकता है सिरदर्द, ब्रेन ट्यूमर का संकेत

सिरदर्द तब होता है, जब एक बढ़ता हुआ ब्रेन ट्यूमर मस्तिष्क के आसपास की निरोगी कोशिकाओं पर दबाव डालता है या ब्रेन ट्यूमर मस्तिष्क में सूजन पैदा कर सकता है, जिससे सिर में दबाव बढ़ जाता है और सिरदर्द होने लगता है. इसके अलावा, सुबह के समय सिरदर्द होना, कुछ लोगों को नींद के वक्त भी असहनीय दर्द का सामना करना पडता है और यह सिरदर्द भी माइग्रेन के दर्द की तरह महसूस होता है. इतना ही नहीं सिर के पिछले हिस्से में गर्दन में ब्रेन ट्यूमर के कारण गर्दन में भी दर्द हो सकता है. ब्रेन ट्यूमर अगर सिर के अगले हिस्से में हो, तो सिर दर्द भी आंखों में दर्द या साइनस के दर्द जैसा महसूस होता हैं.

इसके आगे डॉ. आकाश कहते है कि ब्रेन ट्यूमर दो तरह के होते है, जैसे

मैलिग्नेंट ट्यूमर

इस ट्यूमर में कैंसर की कोशिकाएं होती हैं. कैंसर के कारण सिर में असहनीय दर्द होता हैं. यह कैंसर कोशिका सिर के अन्य हिस्से में भी  फैलती हैं. कई बार कैंसर जेनेटिक होता है, ऐसे में अगर परिवार में से किसी को ब्रेन ट्यूमर या कैंसर है, तो यह बच्चों में भी ट्रांसफर हो सकता है.

बिनाइन ट्यूमर 

यह ट्यूमर कैंसर का नही होता हैं. इस ट्यूमर के फैलने का खतरा भी नहीं होता, लेकिन समय रहते इलाज होना काफी जरूरी है, अन्यथा बीमारी का खतरा बढ सकता हैं.

असल में ब्रेन ट्यूमर का कोई निश्चित कारण अभी तक नहीं पता चल पाया हैं. हालांकि स्वस्थ जीवनशैली,  इस परेशानी से व्यक्ति को कुछ हद तक दूर रख सकती है. साथ ही इसके लक्षणों के प्रति भी जागरूक होना आवश्यक है. ब्रेन ट्यूमर की बीमारी अधिक उम्र या ज्यादा चिंता करने वालों को हो, ऐसा जरुरी नहीं. यह बीमारी किसी को भी हो सकती हैं. इसलिए अगर आपको लगातार सिर दर्द और उल्टी की शिकायत है, तो इसे नजरअंदाज ना करें. तुरंत डॉक्टर की सलाह ले और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं.

घंटों स्क्रीन देखना हो सकता है खतरनाक

हममें से ज्यादातर लोग अपने दिन के ज्यादातर घंटे स्क्रीन के सामने बैठकर बिताते हैं. वो चाहे कंप्यूटर स्क्रीन हो या फिर मोबाइल स्क्रीन. घंटों डिजिटल स्क्रीन के सामने बैठने का सबसे बुरा असर हमारी आंखों पर पड़ता है. जिससे तनाव, अनिद्रा और कई दूसरी बीमारियों के होने की आशंका बढ़ जाती है. आंखों से जुड़ी इस तकलीफ को Digital Eye Strain कहते हैं.

Digital Eye Strain को ही पहले computer vision syndrome के नाम से जाना जाता था. यह बीमारी दिन-प्रतिदिन लोगों में बढ़ती ही जा रही है.

पहले सिर्फ कंप्यूटर पर काम होता था लेकिन अब लैपटॉप, टैबलेट्स, स्मार्ट फोन भी हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं. इन चीजों के बहुत अधिक इस्तेमाल से Digital Eye Strain की प्रॉब्लम हो जाती है.

इसकी शुरुआत आंखों में हल्के दर्द से हो सकती है. लेकिन समय रहते इलाज नहीं कराया जाए तो भविष्य में आंखों की रोशनी भी जा सकती है.

Digital Eye Strain के शुरुआती लक्षण

आंखों में खिंचाव महसूस होना, आंखों में पानी आना, दर्द होना, धुंधला दिखना, लाला होना, इसके शुरुआती लक्षण हैं. इसके साथ ही सिरदर्द और घबराहट भी हो सकती है. कई बार ये चिड़चिड़ेपन का कारण भी हो सकता है. हो सकता है सुबह उठकर आपको तकलीफ कम हो लेकिन दिन बढ़ने के साथ ही ये तकलीफ बढ़ने लगती है.

रोकथाम और उपचार

1. डिजिटल प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना हमारी जरूरत बन चुकी है. ऐसे में हमें उनके इस्तेमाल का सही तरीका भी पता होना चाहिए. इन चीजों को आंखों के बहुत पास या दूर रखकर यूज करना खतरनाक हो सकता है.इन चीजों को एक न‍ि‍श्च‍ि‍त दूरी पर रखकर ही इस्तेमाल  करना चाहिए.

2. जिस कमरे में बैठकर आप इन चीजों का इस्तेमाल कर रहे हैं वहां पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए. वरना आंखों पर जोर पड़ेगा.

3. ऑफिस में एसी वेंट के सामने नहीं बैठना चाहिए. इससे आंखों का पानी सूख जाता है. 20-20-20 का नियम फॉलो करना चाहिए. जो लोग ऑफिस में कंप्यूटर और लैपटॉप में देर तक काम करते हैं, उन्हें हर 20 मिनट पर 20 फीट दूर पर रखी चीज को 20 सेकंड के लिए देखना चाहिए. ये आंखों के तनाव को कम करता है.

4. स्क्रीन ज्यादा ब्राइट नहीं होनी चाहिए और फॉन्ट साइज बहुत छोटे नहीं होने चाहिए.

5. जब आप देर तक कंप्यूटर पर काम करते हैं तो आपकी पलकें एक मिनट में 6-8 बार ही झपकती हैं जबकि 16-18 बार पलकों का झपकना नॉर्मल होता है. ऐसे में आवश्यक रूप से हर छह महीने में एकबार आंखों की जांच करा लें.

क्या है कौंटैक्ट पौइंट सिरदर्द

कौंटैक्ट पौइंट सिरदर्द एक प्रकार से सब माइग्रेन है. इस के चलते सिर में भयंकर दर्द होता है, जिस से मरीजों को असहनीय और लंबे समय तक रहने वाली पीड़ा का सामना करना पड़ता है. इस के अलावा इस दर्द की वजह से चेहरे के एक सीमित हिस्से में घाव या पीड़ा का भी अनुभव होता है. आमतौर पर मरीज सालों तक इस माइग्रेन पर ध्यान न दे कर इलाज नहीं कराते हैं.

सामान्यतया लोग इस समस्या के लिए न्यूरोलौजिस्ट, डैंटिस्ट, स्पैशलिस्ट आदि के पास जाने की सलाह देते हैं, हालांकि कोई भी इस पीड़ा की असली वजह का पता नहीं लगा सकता है. यहां तक कि दर्द निवारक, संक्रमण रोधी एजेंट भी इस दर्द में आप को बहुत आराम नहीं पहुंचा सकते हैं. ईएनटी विशेषज्ञ द्वारा इस का विश्लेषण किया जा सकता है. वही इस का कारण बता सकता है और आप की मदद कर सकता है.

आमतौर पर कौंटैक्ट पौइंट सिरदर्द का एक इतिहास होता है, जिस में बाद में अन्य कारण भी शामिल हो सकते हैं जैसे आमतौर पर यह दर्द ऊपरी श्वसन संदूषण के कारण होता है. यह दर्द चेहरे के एक तरफ सीमित क्षेत्र में होता है. यह पीड़ा ऊपरी दांतों और मुंह के ऊपरी भाग तक सीमित रहती है. सिरदर्द के निर्धारण के लिए सर्दीखांसी की दवा अच्छा काम करती है, मगर ऐसा संयोग से होता है.

दर्द शुरू करने वाले कारक

शीत लहर, हाइपोग्लेसिमिया, भावनात्मक सदमा, अत्यधिक चाय या कौफी का सेवन, नींद की कमी, असंतुलित खानपान.

कारण

वास्तव में नाक के भीतर एक जगह होती है जहां एक शिरा (तंत्रिका) 2 हिस्सों के बीच पैक होती है. यह बहुत हद तक पैर के कटिस्नायुशूल जैसा होता है, मगर यह नाक और चेहरे के बीच होता है, जो शिरा 2 हिस्सों से घिरी होती है, वह या तो सामने से बंद शिरा होती है जोकि ट्राइजैमिनल शिरा के आंख वाले भाग की शाखा होती है या उन शिराओं में से एक होती है, जो स्पेनोप्लेटाइन केंद्र को अलग करती हैं.

इस कारण से पीड़ा उन हिस्सों में होती है जहां ये शिराएं दबी होती हैं. नाक की साइड प्रोफाइल में दोनों शिराएं पाई जाती हैं. दोनों शिराएं उस झिल्ली के भीतर होती हैं, जो नाक के दाएं और बाएं हिस्से को अलग करती हैं और नाक के आगे के हिस्से में स्थित होती हैं. पैट्रीगोपलेटाइन केंद्र इस से आगे मुंह और ऊपरी दांतों में जाता है.

अगर सभी चीजों पर विचार करें, तो ऊपरी दांतों और मसूड़ों में दर्द या मुंह के ऊपरी हिस्से में परेशानी के साथ कौंटैक्ट पौइंट माइग्रेन का अनुभव करने वाले मरीजों के स्पेनोप्लेटाइन केंद्र में शिकायत होती है, हालांकि सामने की एथमौइस शिरा में ऐसा नहीं होता है.

नाक के भीतर मौजूद गिल्टी पार्टी जोकि लगातार शिरा पर दबाव डालती है, एक झिल्ली होती है, जो नाक के किनारे पर गड्ढा या उभार सा बना देती है. इसे नाक के भीतर गोखरू की तरह समझें. झिल्ली एक विभाजक होती है, जो प्रिविलिज और नाक के बाएं दबाव को विभाजित करती है. उसे सीधा होना चाहिए. फिर भी जब इस में विसंगति आती है, तो यह एक साइड में सिकुड़ सकती है. अत्यधिक गंभीर स्थिति में यह क्षैतिज नैजल विभाजक में जा सकती है, जहां केंद्र और सर्पिल के कारण पिनपौइंट दिमागी दर्द होता है.

झिल्ली के अलावा अन्य संरचनाएं भी हैं, जो कभीकभी शिराओं पर दबाव बनाती हैं, जिस से कौंटैक्ट पौइंट दिमागी दर्द हो सकता है. इस में कोंच बुलोसा केंद्रीय सर्पिल से प्रवाहित वायु या अनियमित स्थिर सर्पिल की समस्या शामिल है. सर्पिल नाक के भीतर की विशिष्ट संरचना होती है, जो नाक में जाने वाली हवा को गरम और नम करती है.

उपचार

कौंटैक्ट पौइंट माइग्रेन शुरू करने वाले ये कारण संरचना से संबंधित हैं, इसलिए ऐसी कोई गोली या नैजल शौवर नही है जो इस समस्या का आसानी से समाधान कर दे, बिलकुल उसी तरह जैसे टूटी हड्डी को सिर्फ दवा खा कर ठीक नहीं किया जा सकता है. नैजल स्प्लैश और सर्दीखांसी की दवा से थोड़ी राहत मिल सकती है (कुछ घंटों से 1-2 दिन तक) क्योंकि ये सौल्यूशन उस सूजन को कम कर देते हैं, जो जगह बनाने और शिरा के दबाव को कम करने से रोकती है जैसे ही म्यूसोकल सूजन फिर से बढ़ती है, दर्द शुरू हो जाता है.

दर्द का जड़ से उपचार करने का मानक तरीका सर्जरी है, जिस में शिरा पर दबाव डालने वाली संरचनाओं को ठीक किया जाता है. इस सर्जरी में झिल्ली को ठीक करना या सैप्टल गोड को अपरूट किया जाता है. असामान्य स्थिति में सर्जरी की आवश्यकता भी पड़ सकती है. इस का उद्देश्य नाक में जितनी संभव हो सके उतनी जगह बनाना है, जिस से शिरा पर दबाव न पड़े और म्यूसोकल सूजन न हो.

असाधारण मामलों में कुछ अन्य चीजें भी हैं, जिन पर विचार किया जा सकता है जैसे इन्फ्यूजन, हालांकि इस से भी कुछ समय के लिए ही राहत मिलती है (सब कुछ ठीक रहने पर कुछ महीने, आमतौर पर कुछ सप्ताह). इस से होने वाली राहत अस्थाई होने के कारण अब हम इस विकल्प की अनुशंसा नहीं करते हैं.

क्या मैरिड लाइफ में सिरदर्द किसी गंभीर बीमारी का संकेत तो नहीं है?

सवाल-

मैं 26 साल की विवाहित युवती हूं. विवाह 6 महीने पहले हुआ है. मैं तभी से एक विचित्र परेशानी से गुजर रही हूं. जबजब हम सैक्स करते हैं, उस के तुरंत बाद मुझे सिर में जोर का दर्द होने लगता है. मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि ऐसा क्यों हो रहा है? कहीं यह किसी गंभीर भीतरी रोग का लक्षण तो नहीं है? इस से बचने के लिए मुझे क्या करना चाहिए? कोई घरेलू नुसखा हो तो बताएं?

जवाब-

आप जरा भी परेशान न हों. यह समस्या कई युवकयुवतियों में देखी जाती है. इस का संबंध शरीर की जटिल रसायनिकी से होता है. यों समझें कि यह एक तरह का कैमिकल लोचा है. जिस समय सैक्स के समय कामोन्माद यानी और्गेज्म प्राप्त होता है, उस समय शरीर की रसायनिकी में आए परिवर्तनों के चलते सिर की रक्तवाहिकाएं कुछ देर के लिए फैल जाती हैं. धमनियों में आए इस अस्थाई फैलाव से उन के साथसाथ चल रही तंत्रिकाओं पर जोर पड़ता है, जिस कारण सिर में दर्द होने लगता है. आप आगे इस दर्द से परेशान न हों, इस के लिए आप एक छोटा सा घरेलू नुसखा अपना सकती हैं. सहवास से 40-45 मिनट पहले आप पैरासिटामोल की साधारण दर्दनिवारक गोली लें. साइड इफैक्ट्स के नजरिए से पैरासिटामोल बहुत सुरक्षित दवा है. इसे लेने से कोई नुकसान नहीं होता. जिन्हें पैरासिटामोल सूट नहीं करती, उन्हें अपने फैमिली डाक्टर से सलाह लेनी चाहिए. यदि डाक्टर कहे तो नियम से प्रोप्रानोलोल सरीखी बीटा ब्लौकर दवा लेते रहने से और्गैज्म के समय सिर की धमनियों में फैलाव नहीं आता और सिरदर्द से बचाव होता है.

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कोरोना काल में सेक्स सबसे बडी परेशानी का सबब बन गया है. बिना तैयारी के सेक्स से गर्भ ठहरने लगाहै. उम्रदराज लोगों के सामने ऐसी परेशानियां खडी हो गई है. स्कूल बंद होने से बच्चों के घर पर रहने से पति पत्नी को अपने लिये समय निकालना मुश्किल होने लगा. बाहर आना जाना बंद हो गया. कभी पति के पास समय है तो कभी पत्नी का मूड नहीं. कभी पत्नी का मूड बना तो पति को औनलाइन वर्क से समय नहीं. ऐसे में आपसी तनाव, झगडे और जल्दी सेक्स की आदत आम होने लगी है. जिस वजह से आपसी झगडे बढने लगे है. ऐसे में जरूरी है कि आपस में समय तय करके सेक्स करे. जिससे आपसी झगडे कम होगे तालमेल बढेगा.

रीना की शादी को 5 साल हो गये थे. उसका पति सुरेश देर रात में काम से लौटता था. शादी के शुरूआती दिनों में तो सब कुछ ठीकठाक चल रहा था. कुछ समय से दोनो के बीच परेशानी आ गयी थी. परेशानी कीवजह यह थी कि घर के काम से थक कर रीना जल्दी सो जाती थी. आफिस से देर से लौटने के बाद भी सुरश को नींद नही आती थी. ऐसे समय पर वह नेहा के साथ प्यार और हमबिस्तर होने की कोशिश करता थ.पति का यह काम रीना को बहुत खराब लगता था. वह कहती कि उसको नींद आ रही है. सोने के बाद उसे सेक्स करने का मन नही करता  वह पति से कहती कि सोने के पहले इस काम को करने में क्या परेशानी आती है. इस बात को लेकर रीना और सुरेश की अक्सर झिकझिक होती थी. इस कारण कई बार तो चाहतेहुये भी दोनो महीनों तक सेक्स संबंध ही नही बना पाते थे सुरेश कहता कि मेरा तो मन रात में ही सेक्स करने का होता है.

मेरे सिर में लगातार दर्द हो रहा है, मैं क्या करूं?

सवाल-

मैं 52 वर्षीय कामकाजी महिला हूं. पिछले कुछ महीनों से मुझे लगातार सिरदर्द हो रहा है. थोड़े दिनों से रात में भी इतना तेज दर्द होता है कि नींद खुद जाती है. मैं क्या करूं?

जवाब-

कभीकभी सिरदर्द हो तो कोई बात नहीं, लेकिन अगर आप को लगातार कई दिनों से सिरदर्द हो रहा हो, रात में तेज सिरदर्द होने से नींद खुल रही हो, चक्कर आ रहे हों, सिरदर्द के साथ जी मिचलाने और उलटियां होने की समस्या हो रही हो तो समझिए कि आप के मस्तिष्क में प्रैशर बढ़ रहा है. मस्तिष्क में प्रैशर बढ़ने का कारण ब्रेन ट्यूमर हो सकता है. अगर आप पिछले कुछ दिनों से इस तरह की स्थिति का सामना कर रही हैं तो सतर्क हो जाएं और तुरंत डायग्नोसिस कराएं.

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अगर आपको अक्सर ही सिरदर्द और सुस्ती की शिकायत रहती है या फिर देखने बोलने में भी समस्या होती है, तो सावधान हो जाइये क्योंकि हो सकता है कि आपके ऊपर ब्रेन ट्यूमर का खतरा मंडरा रहा हो. बता दें कि ट्यूमर दो तरह का होता है. एक जिसे ब्रेन कैंसर कहा जाता है और दूसरा सामान्य ट्यूमर. ब्रेन कैंसर स्वास्थ्य के लिए घातक होता है. हालांकि दोनों ही तरह के ट्यूमर में दिमाग की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होती हैं.

दिमाग में किसी एक या अधिक कोशिकाओं के असामान्य रूप से बढ़ने की वजह से ब्रेन ट्यूमर होता है. ब्रेन ट्यूमर किसी भी उम्र में हो सकता है और जैसे जैसे आपकी उम्र बढ़ती है बढ़ती ट्यूमर का खतरा भी बढ़ता जाता है. ब्रेन ट्यूमर के लक्षणों को पहचानना बहुत मुश्किल है. ऐसे में कई बार मरीज को पता ही नहीं चलता कि उसे ब्रेन ट्यूमर है.

आज हम आपको ब्रेन ट्यूमर के कुछ सामान्य लक्षणों के बारे में बताने जा रहे हैं जिससे आप समय रहते इसकी पहचान कर उपचार करा सकती हैं.

लगातार सिरदर्द का बने रहना

सिरदर्द के वैसे तो कई सारे कारण हो सकते हैं, लेकिन लगातार सिरदर्द होने का एक कारण ब्रेन ट्यूमर भी है. अन्य कारणों से सिरदर्द और ब्रेन ट्यूमर की वजह से होने वाले सिरदर्द में अंतर कर पाना डाक्टर्स के लिए भी काफी मुश्किल होता है. ऐसे में अगर आपको सर्दी, खांसी और छींक के साथ लगातार सिरदर्द हो रहा हो और उपचार करने के बावजूद ठीक नहीं हो रहा हो तो यह ब्रेन ट्यूमर का लक्षण हो सकता है. ऐसा होने पर जल्द ही डाक्टर के पास जाए और उसका परामर्श लें.

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अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
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सिरदर्द को चुटकियों में दूर करेंगे ये 16 तरीके

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में काम का दबाव, तनाव आदि कारणों से सिरदर्द होना एक बहुत सामान्य समस्या है. पर कई बार ये इतना तेज होता है कि बर्दाश्त कर पाना मुश्‍क‍िल हो जाता है. पर इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं कि आप दर्द निवारक दवाओं का सेवन करें. इस बारे में जीवा आयुर्वेद के निदेशक डॉक्टर प्रताप चौहान का कहना है कि सिरदर्द में ज्यादा दवाएं लेना भी आपको नुकसान पहुंचा सकता है, क्योंकि दर्द निवारक दवाओं के साइड इफेक्ट भी होते हैं. ऐसे में जरूरी नहीं कि सिरदर्द होने पर आप दवा ही लें, आप घरेलू उपायों से भी सिर के दर्द को दूर कर सकते हैं. यहां हम आपको कुछ ऐसे घरेलू नुस्खों के बारे में बता रहे हैं, जो आपको सिरदर्द से राहत देंगे.

1. अदरक

थोड़े से अदरक के रस में नींबू का रस उतनी ही मात्रा में मिलाकर दिन में दो बार पीएं. ऐसा करने से बहुत आराम मिलेगा. आप चाहे तो अदरक के पाउडर या कच्चे अदरक को उबालकर इसकी भांप भी ले सकते हैं.

2. सेब

सिरदर्द में राहत पाने के लिए ये एक बहुत कारगर उपाय है.सुबह उठने के साथ ही एक सेब काट लें और उस पर नमक डालकर खाली पेट खाएं. सिरदर्द में आराम मिलेगा.

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3. दालचीनी

दालचीनी पाउडर में पानी मिलाकर पेस्ट बना लें.इस पेस्ट को अपने माथे पर करीब 30 मिनट तक लगाकर लेट जाएं. इसके बाद इसे धो डालें. सिरदर्द से जल्दी आराम मिलेगा.

4. लौंग

एक तवे पर लौंग की कुछ कलियों को गर्म कर लें.इन गर्म लौंग की कलियों को एक रूमाल में बांध लें और कुछ-कुछ देर पर इस पोटली को सूंघते रहें. इससे सिरदर्द में राहत मिलेगी.

5. कालीमिर्च और पुदीना

सिरदर्द होने पर आप कालीमिर्च और पुदीने की चाय भी बना कर पी सकते हैं. इसे पीने से आपको सिरदर्द से राहत मिलती है.

6. नींबू

कई बार पेट में गैस बढ़ने के कारण भी सिरदर्द होता है. ऐसे में एक गिलास गुनगुने पानी में नींबू का रस मिलाएं और इसका सेवन करें. आप चाहें तो इसमें थोड़ा शहद मिला सकते हैं.अगर आप इसका सेवन रोज सुबह खाली पेट करेंगे तो स्थायी फायदा होता है.

7. लहसुन

लहसुन की एक कली छीलकर आराम से चबाइए और धीरे-धीरे निगल जाइए. कुछ ही देर में सिरदर्द छूमंतर हो जाएगा.

8. बादाम

रात को बादाम की गिरी भिगोकर रखें. सुबह उसे पीसकर व घी में भूनकर गर्म पानी में मिलाकर पी लें. इससे सिरदर्द भी ठीक हो जाएगा.

9. तुलसी

सिरदर्द होने पर अक्सर लोग चाय या कॉफी पीते हैं लेकिन अगर आप सिरदर्द में तुलसी की पत्तियों का पानी पिएंगे तो इससे दर्द से राहत मिलेगी. इस पानी को बनाने के लिए पानी में तुलसी की पत्तियों को पकाएं.जब पक जाए तो उसे चाय की तरह पिएं. ये किसी भी चाय और कॉफी से कहीं अधिक फायदेमंद होती है.

10. एक्यूप्रेशर

सिरदर्द होने पर आप अपनी दोनों हथेलियों को सामने लाएं. फिर एक हाथ से दूसरे हाथ के अंगूठे और इंडेक्स फिंगर के बीच की जगह पर हल्के हाथ से मसाज करें.
सिरदर्द में ये सबसे कारगर नुस्खा है. ये प्रक्रिया दोनों हाथों में दो से चार मिनट तक दोहराइए.

11. पानी

कई बार शरीर में पानी की कमी होने से भी सिरदर्द होता है इसलिए कुछ-कुछ देर पर पानी की थोड़ी-थोड़ी मात्रा का सेवन करें, क्योंकि जब आपका शरीर हाइड्रेटेड हो जाएगा तो सिरदर्द धीरे-धीरे कम होने लगेगा.इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि शरीर में पानी की संतुलित मात्रा बनी रहे.

12. तेल मालिश

सिरदर्द के सबसे आसान उपायों में शामिल है तेल मालिश. इसलिए आप अपनी पसंद के अनुसार सरसों, नारियल बादाम या फिर जैतून के तेल से मालिश करें. मालिश सिर के चारों तरफ और गर्दन तक करें. मालिश करने से सिर की मांसपेशियों को आराम मिलता है.

13. नींद

सिरदर्द में दर्द का सबसे बड़ा कारण होता है नींद की कमी. नींद पूरी नहीं होने से सिरदर्द होना बहुत सामान्य है इसलिए पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करें.

14. तकिया

सोते समय तकिये की स्थिति भी सिरदर्द का कारण बनती है इसलिए इस बात का ध्यान रखें कि तकिया नर्म हो और सोते समय सीधा रखा हो.

15. चंदन

चंदन का पेस्ट सिरदर्द का बहुत पुराना इलाज है. चंदन की लकड़ी को घिसकर पेस्ट बना लें और माथे पर लगाएं. तत्काल आराम मिलेगा.

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16. बर्फ

एक तौलिए में कुछ बर्फ लपेट कर उसे सिर पर 15 मिनट रखें और फिर 15 मिनट का ब्रेक लें. सिर पर बर्फ रखने से काफ़ी राहत मिलती है.

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