प्यार खुद से और लाइफ पार्ट्नर से

‘योर बैस्ट ईयर एट’ की लेखिका जिन्नी डिटजलर कहती हैं कि अगर आप चाहते हैं कि आप का प्रत्येक वर्ष विशेष व अच्छा हो, तो अपने आप से प्रेम करने एवं आनंद प्राप्ति हेतु सब से पहले अपने प्रति दयावान बनो. जब तक आप चिंतामुक्त रहने का तरीका नहीं सीखोगे तब तक अपने आप को खुश नहीं रख सकते और दूसरों के साथ उदार व्यवहार नहीं कर सकते. इसलिए स्वयं से प्रेम करो और स्वयं को असंतोष और पछतावे से मुक्त रखो.

अपने आप को स्वीकार करो

जब आप स्वयं से बिना शर्त प्रेम करते हो, तो यह गुण आप की औरों से प्रेम करने की योग्यता में वृद्धि करता है. योग गुरु गुरमुख और खालसा कहती हैं कि स्वयं से प्रेम करना सांस लेने की भांति है. जबकि आमतौर पर होता यह है कि हम स्वयं से और अपने सपनों से अलग हो जाते हैं, इसलिए दुखी रहते हैं.

जिन्नी कुछ व्यावहारिक तरीके स्वयं से जुड़ने के लिए बताती हैं, जो हैं अच्छा खाना, ध्यान, नए चलन के कपड़े पहनना, दान देने की कला और जीवन के उद्देश्य प्राप्त करना इत्यादि.

100 दिन के नियम

मोनिका जांडस, जिन्होंने ‘स्वयं से प्रेम करें’ नाम से प्रचार अभियान चलाया है, कहती हैं कि स्वयं को प्रेम भरा आलिंगन दो. स्वयं से प्रेम करोगे तो आजीवन प्रेम मिलेगा. जब मैं ने प्रचार शुरू किया तो मैं लोगों से चाहती थी कि वे स्वयं को 100 दिन 100 तरीकों से प्रेम करें. मैं चाहती थी लोग स्वयं की देखभाल करें. जीवन के प्रति लगाव रखें और अपनी भावनाओं को व्यक्त करें. आप विभिन्न चीजों को विभिन्न तरीकों से प्रतिदिन व्यवहार में लाने से स्वयं से प्रेम करना शुरू कर सकते हो. साथ ही अपना जीवन उद्देश्य तय कर के अपना लक्ष्य प्राप्त कर सकते हो.

पूर्वाग्रह को न कहो

पूर्वाग्रह का कभी पुलिंदा न बांधो. जहां भी संभव हो क्षमादाता बनो. माइकल डिओली, जो ‘आप के लिए उत्तम संभावनाएं’ के लेखक भी हैं, कहते हैं कि जीवन में सुगम यात्रा के लिए व्यक्ति को पूर्वाग्रहों के अतिरिक्त भार से समयानुसार मुक्त हो जाना चाहिए. केवल जरूरत पड़ने पर ही व्यक्ति को एक स्थान पर रुकना चाहिए. आप का द्वेष, आप का नकारात्मक आचरण, आप की सनक, द्वंद्व, क्रोध और आप की उदारता की कमी, आप को अच्छे संबंध बनाने से रोकती है.

अनीता मोरजानी, जो नैतिक उत्थान परामर्शदाता एवं लेखिका भी हैं, कहती हैं कि वास्तव में स्वयं के शत्रु हम स्वयं हैं और स्वयं के कठोर आलोचक भी. यदि औरों के प्रति भी हम इसी तरह का रवैया रखते हैं, तो हम हर व्यक्ति का आकलन एक ही दृष्टिकोण से करते हैं. हमें अपने जीवन के प्रत्येक पहलू को स्वीकार करना चाहिए, चाहे वह अच्छा हो या बुरा.

दूसरों के अधीन न बनो

सामान्य जीवन जीते हुए भी अगर मौका मिले तो पूर्ण आनंद लेने से खुद को मत रोको. मनोवैज्ञानिक रोहित जुनेजा, जो ‘दिल से जियो’ के लेखक भी हैं, कहते हैं कि हम स्वयं के सुख और विवाद के मुख्य स्रोत हैं. हम सभी मानव हैं और गलती करना मानवीय प्रवत्ति है. श्रेष्ठता के लिए दूसरों के अधीन न बनो और स्वयं के बारे में गलत राय भी न बनाओ. जरूरतमंद व्यक्तित्व प्रभावशाली नहीं होता. जीवन के उतारचढ़ाव के कारण स्वयं को जीवन के आनंदमयी क्षणों का आनंद लेने से वंचित न रखो.

स्वयं से प्रेम कैसे मुमकिन

स्वयं से प्रेम करने के लिए दिन में कम से कम 5 मिनट ध्यान करो जो रक्तचाप को कम कर जठराग्नि प्रणाली मजबूत करता है और साथ ही जीवन को प्रभावशाली तरीके से जीने योग्य बनाता है. ध्यान आप की स्मरण शक्ति में भी वृद्धि करता है, दुखों से लड़ना सिखाता है और आप के आवेश को रोकता है. तब आप स्वयं को प्रेम करने लगते हैं क्योंकि ध्यान आप की मानसिकता और स्वास्थ्य में वृद्धि करता है. यह खुशी प्रदान करने वाले हारमोंस का भी संचार करता है.

पारिवारिक समस्याएं

आप के निरंतर याद दिलाने और टोकने पर भी अगर आप का जीवनसाथी, घर के बिल, चाबी और घर के अन्य जरूरी सामान सही जगह पर नहीं रखता है, तो समस्या है कि खत्म ही नहीं होती और आप की परेशानी का कारण भी बन जाती है.

ऐसा कछ होने पर परेशानी में उलझे रहने के बजाय यह सोचो कि आप ने जिस व्यक्ति से विवाह अपना सुखदुख साझा करनेके लिए किया है, उस के साथ आप को असमानता का साझा भी करना है. आप अपनी चिंता को सहज रूप से जीवनसाथी के समक्ष रखो और घर की व्यवस्था एवं निजी जरूरतों के बारे में भी बात करो.

इसी प्रकार कई बार थकावट के कारण कुछ पुरुष संभोग के इच्छुक नहीं होते, जिस के कारण संबंध बनाते समय उन में गर्मजोशी की कमी रहती है. ऐसे में उन की इच्छा के विरुद्ध अगर उन की जीवनसंगिनी उन से यौन संबंध बनाती है तो वे असहज महसूस करते हैं. जिस से जीवनसंगिनी असंतुष्ट रह जाती है.

इस संबंध में यौन विशेषज्ञों का कहना है कि हर 3 में से 1 युगल तब यौन संतुष्टि न होने की समस्या का सामना करता है जब एक साथी इच्छुक होता है और दूसरा इच्छुक नहीं होता. कई बार ऐसी दुशवारियों के कारण आप के दांपत्य जीवन की डोर टूटने की कगार पर आ जाती है. संभोग आप के लिए मात्र औपचारिकता नहीं है, बल्कि एक महत्त्वपूर्ण आवश्यकता है. यदि आप का साथी संभोग हेतु इच्छुक नहीं है तो यौन इच्छा जाग्रत करने के कई कई उपाय हैं. आप उसे गुदगुदाएं तथा प्रेम भरी व कामुक वार्त्ता करें. इस से आप के साथी की यौन इच्छा जाग्रत होगी और वह यौन क्रिया हेतु तत्पर हो कर आप से सहयोग करने लगेगा. इस से आप दोनों ही यौन संतुष्टि पा सकोगे.

कामकाजी समस्याएं

औफिस से घर लौटने पर आजकल कई पुरुष लैपटौप या डिनर टेबल पर काम से संबंधित फोनकाल में व्यस्त रहते हैं, जो उन की जीवनसंगिनी की नाराजगी का कारण बनता है क्योंकि पूरे दिन के बाद यह समय आपसी बातचीत का होता है.

जब आप का जीवनसाथी लैपटौप या फोनकाल में व्यस्त हो, तो उसी समय समस्या पर तर्कवितर्क करने के बजाय मुद्दे को सही समय पर उठाएं और उसे प्रेमपूर्वक बताएं कि हम दोनों को साथ समय बिताने की सख्त आवश्यकता है. इस में किसी भी प्रकार का व्यवधान नहीं होना चाहिए. यदि आप को रोज समय नहीं मिलता तो हफ्ते का एक दिन भी सिर्फ मेरे लिए रखो.

जीवन को रसीला बनाए रखने हेतु चुंबन की सार्थकता से इनकार नहीं किया जा सकता. इस संबंध में किए गए सर्वे का निष्कर्ष यह है कि नौकरी, बच्चे, आदत और पारिवारिक उत्तरदायित्व के कारण विवाहित युगल दिन में केवल 4 मिनट साथ होते हैं. वह वक्त वे चुंबन या प्रेमवार्त्ता को देते हैं तो दांपत्य जीवन में खुशहाली बनी रहती है.

एक आम युगल साल में 58 बार संभोग करता है यानी औसतन सप्ताह में एक बार. इसलिए सिर्फ सैक्स नहीं मित्रता, हासपरिहास, उदारता, क्षमापूर्ण स्वभाव व संभोग से बढ़ कर दंपती के बीच आपसी विश्वास सुखद  वैवाहिक जीवन के लिए महत्त्वपूर्ण आवश्यकता है. इस के साथ ही जो व्यक्ति अपनी जीवनसंगिनी का सुबह के समय चुंबन लेते हैं, वे चुंबन न लेने वालों की तुलना में 5 वर्ष दीर्घ आयु वाले होते हैं. इसलिए चुंबन व प्रेमवार्त्ता हेतु समय अवश्य निकालें.

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कैसे निभाएं जब लाइफ पार्टनर हो इमोशनल

मेघा की नईनई शादी हुई थी. एक दिन जब वह औफिस से घर आई, तो देखा उस का पति रजत सोफे पर बैठा फूटफूट कर रो रहा है. मेघा की समझ में नहीं आया कि क्या हुआ. वह परेशान हो गई कि उस का पति ऐसे क्यों रो रहा है. मेघा के कई बार पूछने पर रजत ने बताया, ‘‘मैं ने तुम्हें फोन किया था, लेकिन तुम ने फोन नहीं उठाया. बस बिजी हूं का मैसेज भेज दिया.’’

मेघा हैरान हो गई. उसे समझ नहीं आया कि क्या जवाब दे. जिस समय रजत का फोन आया उस समय वह बौस के साथ मीटिंग में थी. उस समय तो मेघा ने रजत को सौरी कह कर किसी तरह मामला दफादफा कर दिया. लेकिन जब यह रोजरोज की बात बन गई, तो उस के लिए रजत के साथ रहना मुश्किल हो गया.

इस बाबत जब मेघा ने अपनी सास से बात की, तो वे बोलीं, ‘‘रजत बचपन से ही बहुत ज्यादा भावुक है. छोटीछोटी बातों का बुरा मान जाता है.’’

रजत की तरह बहुत सारे ऐसे लोग होते हैं, जो बेहद भावुक होते हैं. उन के साथ जिंदगी बिताना कांटों पर चलने के समान होता है. कब कौन सी बात उन्हें चुभ जाए पता ही नहीं चलता. पतिपत्नी का संबंध बेहद संवेदनशील होता है. संबंधों की प्रगाढ़ता के लिए प्यार के साथसाथ एकदूसरे की भावनाओं को समझने और अपने साथी पर भरोसा बनाए रखने की भी जरूरत होती है. सच तो यह है कि पतिपत्नी का रिश्ता तभी खूबसूरत बनता है, जब आप अपने साथी को पूरी स्पेस देते हैं. मशहूर लेखक खलील जिब्रान का कहना है कि रिश्तों की खूबसूरती तभी बनी रहती है, जब उस में पासपास रहने के बावजूद थोड़ी सी दूरी भी बनी रहे. आज रिश्तों की सहजता के लिए दोनों के बीच स्पेस बेहद जरूरी है.

आमतौर पर तो पतिपत्नी एकदूसरे को पूरा समय देते हैं, लेकिन कभीकभार स्थिति उलट हो जाती है. अगर आप का जीवनसाथी बेहद इमोशनल है, तो उस की यही डिमांड रहती है कि हर समय आप उस के आसपास ही घूमती रहें. आप की प्राइवेसी उस की भावनाओं के आहत होने का सबब बन जाती है. बहुत ज्यादा भावुक पति के साथ जीवन बिताना सच में बेहद मुश्किल होता है. आप समझ नहीं पाती हैं कि आप की कौन सी बात आप के पति को बुरी लग रही है.

इस संबंध में वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक डाक्टर तृप्ति सखूजा का कहना है कि बेहद संवेदनशील या यों कहें भावुक व्यक्ति के साथ निर्वाह करने में दिक्कत होती है. अगर दूसरा साथी समझदार न हो, तो कई बार संबंध टूटने के कगार पर भी पहुंच जाते हैं. अगर आप के पति जरूरत से ज्यादा इमोशनल हैं, तो आप को उन के साथ बहुत सावधानी बरतने की जरूरत है. उन की भावनाओं का खयाल रख कर ही आप उन्हें अपने प्यार का एहसास दिला सकती हैं. पति की भावनाओं को ठीक तरह से समझ न पाने के कारण संबंधों में दूरी आने लगती है. कारण यह है कि इमोशनल व्यक्ति की सब से बड़ी कमी यह होती है कि अगर आप उस से कोई सही बात भी कहेंगी, तो उसे ऐसा महसूस होगा कि आप उस की अवहेलना कर रही हैं. वह अपने संबंधों को ले कर हमेशा असुरक्षित रहता है, इसलिए उस के साथ रहने के लिए छोटीछोटी बातों का भी ध्यान रखना होगा ताकि आप उस के साथ अपने संबंधों को मजबूती दे सकें.

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बात को तरजीह दें

आप के पति भावुक हैं, तो यह बेहद जरूरी है कि आप उन की कही सारी बातों को ध्यानपूर्वक सुनें. इस से आप को पता चलेगा कि उन के मन में क्या चल रहा है. पति की बातों को सुन कर आप यह निर्णय ले पाएंगी कि उन के साथ आप को कैसा व्यवहार करना है. जब भी आप के पास फुरसत हो, उन के साथ बैठ कर बातचीत करें. बात करते समय इस बात का ध्यान रखें कि जब वे कुछ कहें, तो आप बीच में टोकें नहीं. उन की बात को सुन कर आप को इस बात का एहसास हो जाएगा कि वे परेशान क्यों हैं.

सच जानने की कोशिश करें

अगर आप के पति हर समय भावुक बातें करते हैं और यह चाहते हैं कि आप हर समय उन के आसपास ही रहें, तो उन के पास बैठ कर उन के इस तरह के व्यवहार का कारण पूछें. अगर वे कोई तार्किक जवाब न दे पाएं, तो आप उन्हें प्यार से समझाएं कि आप उन के साथ हर समय हैं. जब भी उन्हें कोई दिक्कत होगी, तो वे आप को अपने करीब पाएंगे. आप के आश्वासन से आप के पति के मन में आप के साथ अपने रिश्ते को ले कर सुरक्षा का भाव आएगा. यकीन मानिए आप के प्रयास से धीरेधीरे उन की अनावश्यक भावुकता कम होने लगेगी.

उन के करीब आएं

आप पति के जितना ज्यादा करीब जाएंगी, आप को उन के व्यवहार के बारे में

उतना ही ज्यादा पता चलेगा. आप की नजदीकी से आप के पति को इस बात का एहसास होगा कि आप उन्हें प्यार करती हैं. जब वे आप के प्यार को महसूस करेंगे, तो उन की भावनात्मक असुरक्षा कम होगी. ऐसे में वे अपने मन की सारी बातें आप के साथ शेयर करेंगे. उस समय आप उन की भावुकता का कारण जान कर उन्हें उस से छुटकारा दिला सकती हैं. आप उन्हें हर समय इस बात का एहसास दिलाती रहें कि अच्छीबुरी हर स्थिति में आप उन के साथ हैं.

कारण जानने की कोशिश

आप के पति इतने ज्यादा इमोशनल क्यों हैं, इस के पीछे का कारण जानने की कोशिश करें. इस के लिए आप परिवार के सदस्यों मसलन, अपनी सासूमां और ननद की सहायता ले सकती हैं. कोई भी पुरुष विवाह पूर्व अपनी मां और बहन के सब से ज्यादा करीब होता है. अगर उन की यह भावुकता किसी लड़की के कारण है, जो उन्हें छोड़ कर चली गई है, तो आप उन्हें समझाएं कि उन के साथ जो हुआ अच्छा नहीं हुआ, लेकिन अब उन के जीवन में कुछ भी बुरा नहीं होगा. आप उन के साथ हमेशा रहेंगी. आजीवन उन्हें प्यार करेंगी.

स्थिति का धैर्यपूर्वक सामना करें

आप के पति भावुक हैं, तो उन के साथ अपने संबंधों को पटरी पर लाने के लिए आप को उत्तेजना नहीं धैर्य की जरूरत है. भले ही उन की बातों से आप को गुस्सा आता हो. उन्हें पलट कर जवाब देने की बजाय उन की बातों को ध्यानपूर्वक सुन कर उन्हें सांत्वना दें.

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पति को प्यार का एहसास कराएं

भावुक पति को मानसिक तौर पर संतुष्ट और सुरक्षित रखने के लिए यह बेहद जरूरी है कि आप उन्हें इस बात का एहसास दिलाएं कि आप उन्हें बहुत प्यार करती हैं. उन की पसंदनापसंद आप के लिए बहुत माने रखती है. इस के लिए आप उन्हें समयसमय पर उपहार दें या फिर उन की पसंद का काम कर के उन्हें इस बात का एहसास दिला सकती हैं कि आप को उन की परवाह है और आप उन की भावनाओं का खयाल रखती हैं.

ये 8 चीजें आप के पार्टनर में तो नहीं

जल्दबाजी में न लें कोई फैसला

बढ़ती उम्र में एकदूसरे के प्रति आकर्षण होना आम बात है. यह आकर्षण कब सैक्स संबंधों में परिवर्तित हो जाता है पता ही नहीं चलता. ऐसे में जरूरी है कि आप अपने पार्टनर को परखने में जल्दबाजी न करें, बल्कि देखें कि वह आप की कद्र करता है, ईमानदार है, उस के विचारों में परिपक्वता है, ओपन माइंडेड है, कूल है, आप को दिल से प्यार करता है, हमेशा आप पर अपना हक नहीं जताता है, आप पर भरोसा करता है, आप को बराबर का महत्त्व देता है, आप को अपने तरीके से जीने का मौका देता है, अगर ये सब गुण उस में हैं तो आप उसे अपना लाइफ पार्टनर बनाने के बारे में सोच सकते हैं.

आजकल जितनी तेजी से प्रेम संबंध बनते हैं, उतनी ही तेजी से टूटते भी हैं, क्योंकि इस रिश्ते में अधिकतर प्यार को पाने, एकदूसरे को समझने, एकदूसरे की भावनाओं की कद्र करना, अपना हर पक्ष अपने पार्टनर को बताने से ज्यादा उस के साथ संबंध बनाने की जल्दी होती है और फिर एक बार मतलब निकल जाने के बाद रिश्ते में कुछ नहीं बचता है और संबंध टूट जाता है.

यही कारण है कि आज प्रेम संबंध ज्यादा टिकते नहीं हैं. ऐसा आप के साथ न हो, इसलिए हम आप को बताते हैं ऐसी 8 बातों के बारे में, जिन्हें जान कर आप समझ जाएंगी कि आप का प्रेमी आप से प्यार नहीं बस टाइम पास कर रहा है.

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जिस्मानी संबंध बनाने की जल्दी

आप की दोस्ती को अभी महीना भी नहीं हुआ है और आप अभी एकदूसरे को अच्छी तरह जाने भी नहीं हैं. लेकिन आप का पार्टनर जब भी मिलता हो तो आप से हमेशा सैक्स की ही बात करता हो कि यार हम कब सैक्स करेंगे, मेरे फ्रैंड ने तो अपनी गर्लफ्रैंड के साथ कई बार संबंध बना लिए हैं. तुम बताओ कब तक इंतजार करवाओगी.

ऐसे में आप के कुछ नहीं बोलने पर पार्टनर द्वारा मुंह बना लेता है, आप से बात करना बंद कर देता है और समझने पर भी नहीं समझता है तो समझ जाएं कि आप का पार्टनर आप से सिर्फ जिस्मानी संबंध बनाने के लिए ही दोस्ती किए  हुए है.

बातबात पर शक

किसी भी रिश्ते की नींव विश्वास पर टिकी होती है और जब एक बार किसी भी रिश्ते से विश्वास खत्म हो जाता है तो उस रिश्ते को टूटने में देर नहीं लगती. आप का पार्टनर अगर आप पर छोटीछोटी बातों को ले कर शक करे, जैसे जब मैं तुम्हें कौल कर रहा था तब तुम किस से बात कर रही थीं, तुम्हारा फोन अकसर बिजी क्यों आता है, कहीं तुम्हारा किसी और के साथ अफेयर तो नहीं चल रहा, मैं जब भी तुम्हें बुलाता हूं तो तुम्हें आने में इतनी देर कैसे हो जाती है.

अगर इस पर आप के सफाई देने के बाद भी वह बारबार आप पर शक करे तो समझ जाएं कि यह रिश्ता ज्यादा दिन नहीं चलेगा. इसलिए समय रहते छोड़ने में ही समझदारी है, क्योंकि जिस रिश्ते में विश्वास नहीं उस रिश्ते की नींव हमेशा ही कमजोर रहती है.

अंकुश लगाने की कोशिश

यह सच है कि प्रेमी के लिए अपने बाकी दोस्तों को नहीं छोड़ा जा सकता. लेकिन अगर आप का पार्टनर आप से आप के बाकी दोस्तों को छोड़ने के लिए कहे, उन के साथ मूवी देखने पर रोक लगाए, उन के साथ आउटिंग पर जाने से रोके, यहां तक कि उन से फोन पर बात करना भी उसे अच्छा न लगे तो समझ जाएं कि वह आप को अपने हाथों की कठपुतली बना कर रखना चाहता है, जबकि यही सब चीजें वह खुद करता है और तब आप उसे नहीं रोकती हैं.

ऐसे में आप उसे प्यार से समझ दें कि मैं अपने प्यार और अपने दोस्तों के बीच बैलेंस बना कर चलना जानती हूं और अगर तुम्हें मेरे दोस्तों पर एतराज है तो मैं शायद इस रिश्ते को और आगे न बढ़ा पाऊं. ऐसे में अगर उसे अपनी गलती का एहसास हो जाए तो ठीक है वरना उसे बाय कहने में ही समझरी है.

आप के पैसों में रखे इंटरैस्ट

हो सकता है कि आप के पार्टनर ने आप से प्यार का नाटक सिर्फ आप से पैसे ऐंठने की खातिर ही किया हो. ऐसे में अगर पार्टनर आप से बारबार कोई न कोई बहाना बना कर पैसे लेने की कोशिश करे, आप को महंगे रैस्टोरैंट में ले जा कर आप से ही बिल पे करवाए, आप से ही महंगेमहंगे गिफ्ट्स वसूले, बातोंबातों में आप के नाम क्या प्रौपर्टी है व आप का बैंक बैलेंस कितना है पूछने की कोशिश करे और जब देने की बारी आए तो पैसों का रोना रोने लगे तो समझ जाएं कि उस ने आप से दोस्ती ही पैसों के लिए की है.

ऐसे में जो रिश्ता सिर्फ पैसों पर टिका होता है उस में न ही प्यार होता है और न ही रिश्ते की अहमियत का एहसास. इसलिए ऐसे रिश्ते को ढोने से अच्छा है छोड़ देना.

तुलना कर के नीचा दिखाने की कोशिश

अधिकांश लड़कों की यह आदत होती है कि उन्हें खुद की चीजों से संतुष्ट न हो कर दूसरों की चीजें ज्यादा अच्छी लगती हैं. यही बात उन की गर्लफ्रैंड पर भी लागू होती है. भले ही उन की गर्लफ्रैंड काफी स्मार्ट हो, लेकिन फिर भी उन्हें दूसरी लड़कियां ही ज्यादा स्मार्ट लगती हैं. इतना ही नहीं वे यह बात अपनी गर्लफ्रैंड से कहने से भी नहीं हिचकिचाते कि यार देखो तुम उस की तरह हौट क्यों नहीं रहती, देखो वह कितने सैक्सी कपड़े पहनती है और एक तुम हो कि हमेशा आंटी लुक में ही रहती हो.

अगर आप ने उस के लिए अपने लुक को बदल भी लिया, फिर भी यही बातें आप को सुनने को मिल रही हैं तो समझ जाएं कि ऐसा कर के वह आप को बस नीचा ही दिखाने की कोशिश करता है. इसलिए ऐसे इंसान के साथ रह कर अपने कौन्फिडैंस को लूज करने से अच्छा है कि उस से दूर हो जाएं.

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सीरत से ज्यादा सूरत से प्यार

अगर रिश्ते में सिर्फ सूरत ही देखी जा रही है और सीरत नहीं यानी आप की अच्छाइयों की जरा भी परवाह न हो तो समझ जाएं कि यह रिश्ता सिर्फ तब तक ही टिका है जब तक आप के पार्टनर को आप से ज्यादा सुंदर कोई और नहीं मिल जाता.

फिर जिस रिश्ते में सिर्फ और सिर्फ सुंदरता को ही महत्त्व दिया जाता है, उस रिश्ते की नींव पक्की नहीं होती है, जिस के कारण उसे ढहने में देर नहीं लगती. इसलिए आप सिर्फ खुद की सुंदरता के कारण ही किसी के साथ खुद को शेयर न करें वरना बाद में चोट लगने पर खुद को संभालना मुश्किल हो जाएगा.

कैरियर के लिए प्रमोट नहीं करना

सच्चा प्यार वही होता है, जिस में मस्ती के साथसाथ कैरियर जैसे गंभीर विषयों पर भी चर्चा होती हैं ताकि एकदूसरे के दिशानिर्देशों से आगे बढ़ने में सहायता मिल सके. लेकिन अगर आप का पार्टनर सिर्फ और सिर्फ आप के साथ मस्ती करना चाहता है और उसे आप के कैरियर से कोई मतलब नहीं है और आप की राय मांगने के बाद भी आप को सिर्फ यही जवाब दे कि यार पढ़लिख कर क्या करोगी, तुम तो सिर्फ किचन और हमें खुश करने के लिए बनी हो तो समझ जाएं कि आप का पार्टनर आप के कैरियर को ले कर बिलकुल भी सीरियस नहीं है. उसे सिर्फ अपनी मस्ती से मतलब है.

परवाह नहीं करना

प्यार में रूठनामनाना चलता रहता है. लेकिन आप का पार्टनर अगर आप की खुशी के समय साथ दे और आप के परेशान होने पर आप का हालचाल भी न पूछे तो आप के लिए यह इशारा काफी है कि यह रिश्ता सिर्फ आप की खुशी तक आप के साथ है.

इसलिए ऐसे रिलेशन से अच्छा है कि आप बाकी चीजों पर अपना फोकस कर के इस तरफ से अपना ध्यान हटा लें.

जब पति या प्रेमी हो Narrow Minded

कहीं आप भी तो किसी संकीर्ण मानसिकता को डेट नहीं कर रहीं? क्या आप अपने पार्टनर यानि की प्रेमी के साथ पूरा दिन टाइम स्पेंड करने के बाद भी अच्छा फील नहीं करती? तो समझ जाइए कि आपका पार्टनर संकीर्ण मानसिकता है. संकीर्ण मानसिकता इंसान हमेशा सिर्फ खुद की तारीफ ही सुनना पसंद करता है. वो समझता है कि वह सबसे श्रेष्ठ है. शोध के मुताबिक संकीर्ण मानसिकता कोई अचानक या एकदम से आई बीमारी नहीं होती. ये बचपन से ही होती है. इसमें इंसान अपनी कमियों को दूर करने के लिए खुद को प्यार करने लगता है और खुद को पैम्पर करने लगता है. संकीर्ण मानसिकता समस्या तब बनती है जब, वो आत्मकेन्द्रित हो जाता है और दूसरों की भावनाएं उसके लिए कोई मायने नहीं रखती. इन्हें सिर्फ अपनी तारीफ ही सुनना पसंद होती है. आज का हमारा ये लेख खास इस विषय पर आधारित है. जहां हम आपको संकीर्ण मानसिकता से निपने के तरीके बताएंगे जो आपके रिलेशन शिप में काफी काम आने वाले हैं.

1. दें अच्छी सीख-

आप इस बात को अच्छे से समझ लें कि संकीर्ण मानसिकता किसी की भी अचानक से नहीं होती. ये बचपन से ही पनपने लगती है. ऐसे में आप उउनके प्रति अपना व्यवहार संतुलित रखें. जब वो कोई अच्छा काम करे तो उसकी तारीफ करें, लेकिन गलती पर उसे उसकी गलती का एहसास भी दिलाएं. उसे जितना तैयार आप जीत के लिए करती हैं, उतना ही तैयार हार को अपनाने के लिए भी करें. अच्छी जिन्दगी की अच्छाई और बुराई के बीच सही संतुलन की सीख दें.

2. काउंसलिंग आएगी काम-

अगर आप रिलेशनशिप में हैं. और अगर आपको अपने पार्टनर के अंदर संकीर्ण मानसिकता की भावना नजर आने लगे तो उसे इग्नोर ना करें उनकी बेहतरी के लिए उन्हें काउंसलिंग के लिए ले जाएं. अगर समय रहते इसका उपचार शुरू किया गया तो इस समय पर काबू पाना भी आसान हो जाएगा.

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3. भावनाओं का रखें ख्याल-

संकीर्ण मानसिकता इंसान के साथ किसी भी रिश्ते में रहना आसान नहीं होता. आपका साथी हमेशा आपकी भावनाओं को अनदेखा करता है. उसकी सोच काफी छोटी लग सकती है. ऐसी स्थिति में आप अपनी भावनाओं को ना खोएं. बेबाकी से अपनी बात को उसी तरह रखें. जिस तरह आपका पार्टनर रखता है. यही एक मात्र ऐसा जरिया है, जिसकी मदद से आप अपनी भावनाएं व्यक्त कर सकती हैं.

4. सीमाएं करें निर्धारित-

रिश्ता कैसा भी हो उसमें कहीं ना कहीं एक सीमा का निर्धारित होना जरूरी है. इसकी जरूरत तब और भी ज्यादा हो जाती है जब आपका पार्टनर संकीर्ण मानसिकता वाला हो. वो सिर्फ अपनी ही चलाने की कोशिश करता हो. सिर्फ अपनी इच्छाओं की ही बात करता हो. आप इसे खुद पर थोपे ना. आप खुद को इससे दूर रखने के लिए सीमाओं को निर्धारित करें. साथ ही उन्हें इस बात का भी एहसास दिलाएं की आपका भी कुछ पर्सनल स्पेस है. जिसके अंदर किसी को भी आने की परमीशन नहीं है.

5. बहस से रहें दूर-

हम इस बात से इनकार नहीं कर सकते कि संकीर्ण मानसिकता वाले इंसान के साथ रहना ये उससे किसी भी तरह की बहस करनी काफी मुश्किल हो सकती है. आपको जब भी लगे कि आपके पार्टनर से आपकी बहस शुरू होने वाली है तो आप उस बहस से खुद को साइड में रखकर दूरी बना लें. आप इसका मतलब ये बिलकुल भी ना समझें कि आप हार गयीं या आपकी गलती है. आप इसे समझदारी समझें. क्योंकि संकीर्ण मानसिकता का इंसान हर हाल में आपको गलत साबित करेगा. जिससे आपका आत्मबल भी टूट सकता है.

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6. ना करें माफ़ी की उम्मीद-

संकीर्ण मानसिकता इंसान सिर्फ अपनी केयर करता है. ऐसे में कई बार वो आपकी भावनाओं को भी ठेस पहुंचा सकता है. जिसके बाद भी वो आपसे माफ़ी नहीं मांगता. लगातर झूठ बोलना उसकी आदत होती है. तो आपके लिए ये सबसे ज्यादा जरूरी है कि आप उनके इस व्यवहार को लेकर कोई भी उम्मीद ना लगाएं. आप उन्हने यूं ही माफ़ी करने के बजाय उनकी गलतियों का उन्हें एहसास दिलाएं.

तो ये कुछ ऐसी टिप्स हैं, जिनकी मदद से आप खुद को संकीर्ण मानसिकता इंसान से बचा सकती हैं. अगर आप किसी संकीर्ण मानसिकता के साथ डेट कर रही हैं तो पीछे हटने के बजाए आप खुद के व्यवहार में बदलाव करें. जो आपके लिए भी सही रहेगा.

जब छूट जाए जीवनसाथी का साथ

पहले के समय में 50 वर्ष के बाद वानप्रस्थ का नियम घर में सही तालमेल व पारिवारिक शांति के दृष्टिकोण से बनाया गया होगा. बेटे का गृहस्थाश्रम में प्रवेश और बहू के आगमन के साथ ही परिवार की सत्ता का हस्तांतरण स्वाभाविक समझ कर वानप्रस्थ की कल्पना की गई होगी.

लेकिन, आज परिस्थितियां बदल चुकी हैं. आधुनिक मैडिकल साइंस ने विभिन्न बीमारियों से नजात दिला कर उत्तम स्वास्थ्य का विकल्प दिया है. उस ने मनुष्य को स्वस्थ जीवन दे कर उस की आयु बढ़ा दी है. आज पुरुष हो या स्त्री, स्वस्थ जीवनशैली अपना कर 80-85 वर्ष की आयु में भी वे खुशहाल जीवन जी रहे हैं.

समाज में आजकल एकल परिवारों का चलन बढ़ गया है. मांबाप बच्चे को अच्छी शिक्षा के लिए बचपन से ही होस्टल या अपने से दूर दूसरे शहर में भेज देते हैं. उच्च शिक्षा के लिए तो उसे घर से दूर जाना ही होता है, यहां तक कि महानगरों में रहने पर भी बच्चों को होस्टल में रखा जाता है. नौकरी करने के लिए तो उन्हें अपने घरों से दूर जाना ही होता है.

नतीजतन, मांबाप लंबे समय तक स्वतंत्र रूप से अपना जीवन जीते हैं. घर से दूर रह कर बच्चों का भी स्वतंत्र रूप से जीने का स्टाइल और अपना अलग तौरतरीका बन जाता है.

ऐसी स्थिति में दोनों के लिए एकदूसरे की जीवनशैली के साथ सामंजस्य बिठाना कठिन होता है. इसलिए न तो मांबाप और न ही बच्चे अपनेअपने जीवन में हस्तक्षेप पसंद करते हैं. यही कारण है कि जब पतिपत्नी में से कोई एक अकेला बचता है तो अब वह क्या करे या कहां जाए जैसी समस्या उठ खड़ी होती है.

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गोंडा के सतीश और उन की पत्नी विमला खुशहाल जीवन जी रहे थे. फलताफूलता व्यापार था. 1 बेटी पूजा, 2 जुड़वां बेटे. संपन्न परिवार का समाज में मानसम्मान भी खूब था. दोनों बेटों की आंखें बचपन से कमजोर थीं.

16 वर्ष की उम्र तक आतेआते दोनों बेटे आंखों की रोशनी खो बैठे. वे बेटों के इलाज को ले कर दिल्लीमुंबई भागदौड़ कर रहे थे, तभी दबे पांव पत्नी कैंसर से पीडि़त हो गई और शीघ्र ही उन की दुनिया उजड़ गई.

23 वर्ष की पूजा मां, भाई और गृहस्थी सबकुछ संभाल रही थी. उस की शादी की उम्र हो चुकी थी. बेटी की विदाई हुई तो वे फूटफूट कर रो पड़े थे. उस समय उन की उम्र 62 वर्ष थी. वे शरीर से स्वस्थ थे. 2 बेटे जवान परंतु उन का दृष्टिहीन जीवन व्यर्थ सा था. मेड के सहारे किसी तरह दिन बीतने लगे. जीवन अव्यवस्थित था. हर नया दिन नई उलझन और परेशानी ले कर आता.

तभी उन की बहन एक 50 वर्षीय अपनी परिचित महिला को ले कर उन के घर आई और एक हफ्ते उन के घर में साथ रही. महिला के पास अपने 2 बच्चे थे. वह तलाकशुदा थी. बहन सुधा ने उन के सामने उस महिला के साथ शादी का प्रस्ताव रखा था. काफी सोचविचार कर के सतीश ने अपनी बहन के सुझाव को स्वीकार कर लिया. शादी हो गई.

उन की बेटी पूजा ने नाराज हो कर उन से रिश्ता तोड़ लिया. सगेसंबंधियों ने भी समाज में उन का मजाक बनाया परंतु वे अपने निर्णय पर दृढ़ रहे और आज प्रसन्नतापूर्वक अपना जीवन जी रहे हैं. उन के  जीवन में फिर खुशियां लौट आई हैं. दूसरी पत्नी ने अपने अच्छे व्यवहार से टूटे रिश्तों को जोड़ लिया. उन की बेटी को भी उस ने अपने लाड़प्यार के बंधन में बांध कर अपना बनाया.

जिंदगी को मिली राह

इलाहाबाद की नीरजा बैंक मैनेजर की पत्नी थीं. वे दिमाग से थोड़ी कमजोर थीं और कभीकभी उन्हें हिस्टीरिया के दौरे पड़ जाते थे. पति नवीन ने प्यार से देखभाल की थी, इसलिए नीरजा की बीमारी के विषय में कोई कुछ नहीं जानता था. खुशहाल परिवार, 1 बेटी और 2 बेटे. सबकुछ सुखमय. बेटे, बेटी की शादियां संपन्न परिवारों में धूमधाम से हो चुकी थीं.

पति नवीन कैंसर रोग की गिरफ्त में आ गए और जल्द ही इस दुनिया से विदा हो गए. नीरजा को उन के छोटे बेटे ने संभाला. दोनों एकदूसरे का सहारा बन गए. 2 साल बीततेबीतते बेटे की शादी हुई. बहू के आते ही घर और रसोई के अधिकार उन के हाथ से फिसलने लगे. वे अवसाद से ग्रस्त होने लगीं. वे फुटबौल की तरह कभी बेटी, तो कभी बड़े बेटे, तो कभी छोटे बेटे के सहारे दिन गुजारने लगीं. उन को फिर से दौरा पड़ा. डाक्टर ने उन्हें अकेले न छोड़ने की सलाह दी. छोटी बहू को किसी प्रोजैक्ट के सिलसिले में सालभर के  लिए अमेरिका जाना था. वैसे भी नीरजा दिनभर घर में अकेली रह कर अपने जीवन से परेशान एवं निराश हो चुकी थीं.

उन्होंने स्वयं ही वृद्धाश्रम जाने का निश्चय किया. सब ने आपस में विचारविमर्श कर उन के निर्णय को स्वीकार कर लिया. अब वे वहां अन्य वृद्धों के बीच अधिक प्रसन्न व स्वस्थ हैं. उन के बच्चे आजादी से अपना जीवन जी रहे हैं. वे स्वयं भी अपने निर्णय से खुश व संतुष्ट हैं. अपने बच्चों के साथ अब उन के रिश्ते बहुत अच्छे हैं.

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फर्रूखाबाद के श्रीनिवास पेशे से इंजीनियर थे. नौकरचाकर, बंगला सबकुछ था. 2 बेटियों की शादी कर चुके थे. तीसरी बेटी की शादी की तैयारी में लगे थे. बेटा 16 वर्ष का ही था.

तभी पत्नी गीता को हृदयरोग हो गया. उसी वर्ष वे रिटायर हो कर अपने पुश्तैनी घर लौटे परंतु पत्नी को ससुराल की चौखट नहीं भायी. अच्छे से अच्छे इलाज के बाद भी 6 महीने में ही उन की मृत्यु हो गई.

श्रीनिवास अपने अकेलेपन को ले कर मानसिक रूप से तैयार थे क्योंकि डाक्टरों ने उन्हें पहले ही आगाह कर दिया था कि उन की पत्नी कुछ ही दिनों की मेहमान है. उन्होंने मेड के सहारे अकेले अपनी गृहस्थी चलाई. अपनी कंसल्टैंसी शुरू की. अपने स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए मौर्निंग वाक, कसरत, नाश्ता आदि सबकुछ समय से करते. अपने शौक पूरे किए.

वे दैनिक समाचारपत्र में शहर की समस्याओं के विषय में पत्र लिखते थे. दवाइयों पर उन की अच्छी पकड़ थी, इसलिए छोटेमोटे मर्जों के लिए लोगों को मुफ्त दवा भी दिया करते थे. उन्हें अपने अकेलेपन से कोई शिकायत नहीं थी. उन्होंने प्रसन्न मन से जीवन को जिया.

सच को स्वीकारें

ग्वालियर की सुनीता वर्मा का जीवन पलभर में बदल गया. तीनों बच्चों की शादी कर के वे पति के साथ आजाद जिंदगी जी रही थीं. बच्चे अपने जीवन में सुखी एवं व्यस्त थे और अपने घरौंदों में थे. सुनीता बड़ी सी कोठी की मालकिन थीं. आखिर, पति किसी समय में एक बड़ी कंपनी के वाइसप्रैसिडैंट रह चुके थे. सुखीसंपन्न जीवन था उन का.

पति उन पर जान छिड़कते थे. वे स्वयं अकसर बीमार रहने लगी थीं, तो बेटे को दिल्ली से भागभाग कर आना पड़ता. ढलती उम्र और बीमारी को देखते हुए बेटे ने दोनों को अपने साथ दिल्ली ले जाने का निर्णय कर लिया. बेटा सीनियर इंजीनियर था, बड़ा सा फ्लैट, वहां कोई परेशानी नहीं थी. परंतु अपनी इतनी प्यार से संजोई हुई गृहस्थी को छिन्नभिन्न होते देख वे मन ही मन बहुत आहत हो उठी थीं.

मजबूरी के कारण वे उदास मन से बेटे के घर में शिफ्ट हो गईं. वे वहां एडजस्ट होने का प्रयास कर ही रही थीं कि साल बीतने के पहले ही एक रात पति को दिल का दौरा पड़ा और लाख प्रयास करने पर भी वे उन का साथ छोड़ कर दुनिया से विदा हो गए.

सुनीता के लिए दुनिया सूनी हो गई थी. जो पति हर समय उन के आगेपीछे घूमते रहते थे उन की सारी इच्छाओं, आवश्यकताओं को बिना कहे समझ लेते थे, उन के बिना वे कैसे जिएं. वे नकारात्मक विचारों से घिर गई थीं. यद्यपि कि उन की उम्र 72 वर्ष थी परंतु सही इलाज से पूर्णतया स्वस्थ हो गई थीं.

धीरेधीरे बहू संध्या ने उन्हें अपने साथ कभी मौल, कभी फंक्शन, कभी किटी पार्टी आदि के बहाने घर से बाहर निकलने को पे्ररित किया. जल्दी ही उन्होंने सच को स्वीकार कर लिया कि अब उन्हें अकेले मजबूत बन कर जीवन जीना है.

बचपन से ही उन्हें पढ़ने व जानकारी हासिल करने का शौक था. अब वे रोज सुबह घंटों समाचारपत्र, पत्रिकाएं पढ़तीं और शाम को 5 बजे नजदीक के एक महिला क्लब में जातीं जहां महिलाएं सामाजिक विषयों पर चर्चा करती हैं. महिलाएं अपने लेख या कहीं से कुछ अच्छा विषय पढ़ कर एकदूसरे को सुनाती हैं. जीवन की इस नई पारी में वे व्यस्त एवं प्रसन्न हैं.

बेटे, बहू और बेटियां उन की व्यस्त दिनचर्या से खुश हैं. परिवार में कोई तनाव या नोकझोंक नहीं, बल्कि सबकुछ व्यवस्थित है.

चलती रहे जिंदगी

फतेहपुर के किशनपुर गांव के मदनमोहन पांडे पेशे से अध्यापक थे. अपनी पत्नी राधा के साथ सुखी जीवन जी रहे थे. दोनों एकदूसरे को पूर्णतया समर्पित थे. बच्चे हुए नहीं, परंतु उन के मन में कोई अफसोस नहीं था. अचानक एक दुर्घटना में पत्नी इस दुनिया से विदा हो गई. उसी साल उन का रिटायरमैंट हुआ था. न कोई कामकाज, न कोई जिम्मेदारी. उन की दुनिया सूनी हो गई थी.

उस समय उन के घर की मेड ने घर को संभाला. महल्ले के बच्चों के प्यारभरे अनुरोध को वे नहीं टाल सके थे और घर पर निशुल्क कोचिंग शुरू कर दी. बच्चों को अच्छी पुस्तकों के लिए यहांवहां भटकते देख उन्होंने साथी अध्यापकों और परिचितों की मदद से अपने घर में ही लाइब्रेरी बनाने का निर्णय किया.

उन का छोटा सा प्रयास जन आंदोलन बन गया. आज 75 वर्ष की अवस्था में वे अपने कार्य में लीन हैं. छोटे से गांव में समाज के विरोध को नकारते हुए उन्होंने अपनी मेड सरोज को अपने घर में रखा, उस के बेटे को पढ़ालिखा कर इंजीनियर बनाया और उसे ही अपने घर का उत्तराधिकारी बना कर वसीयत कर दी.

दैनिक समाचारपत्र, पत्रिकाओं आदि के लिए लोगों की भीड़ उन के सूने घर को रौनक से भर देती है. आज समाज में वे सम्मानित दृष्टि से देखे जाते हैं.

निष्कर्ष यह है कि यदि आप का जीवनसाथी इस दुनिया से विदा हो गया है और अब आप अकेले रह गए हैं तो इस सच को स्वीकार करना होगा कि सबकुछ समाप्त नहीं हुआ है बल्कि आगे जाना है. हमें अपने जीवन को रचनात्मकता देनी है. यदि हमें अपने बेटे या बेटी के साथ ही रहना है तो उस से अनावश्यक अपेक्षा एवं कदमकदम पर टोकाटाकी के स्थान पर स्वयं को उस की परिस्थिति पर रख कर विचार करने की जरूरत है. आज स्थितियां बदल चुकी हैं.

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जीवन के संघर्ष एवं आपाधापी में हमारे बच्चे अपने झंझावातों से गुजर रहे हैं. उन्हें अपने कार्यक्षेत्र में, अपने परिवार में हर क्षण नई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. यह सही है कि आप के पास अनुभव अधिक है परंतु अपने समय को याद करें जब आप को भी अपने बुजुर्गों का अनावश्यक हस्तक्षेप या मीनमेख रुचिकर नहीं लगता था. संभवतया आप ने चुप रह कर उन्हें अनसुना कर दिया था. परंतु आज की पीढ़ी चुप रहने वाली नहीं है, मुंहफट है.

यदि जीवन में नई शुरुआत करनी है तो कभी देर नहीं होती. उम्र के हर पायदान पर जीवन की खुशियां झोली फैला कर आप की राह देखती रहती हैं.

 

लाइफ पार्टनर चुनने से पहले ध्यान रखें ये 8 बातें

जब तक 2 इंसान अकेले होते हैं वे अजनबी कहलाते हैं. फिर जब इन अजनबियों में जान-पहचान होती है, तो यह परिचय कहलाता है. धीरेधीरे परिचय दोस्ती की ओर कदम बढ़ाता है. फिर जब घनिष्टता बढ़ कर प्रगाढ़ हो जाती है तब इस घनिष्टता को संबंध में बदलने के वादे किए जाते हैं. लेकिन दोस्ती तक तो काफी कुछ सहन और नजरअंदाज किया जा सकता है, लेकिन जब बात इस सीमा को लांघ कर पतिपत्नी बनने की दहलीज पर आ रुके तो बहुत से गंभीर निर्णय लेने पड़ते हैं. आइए, उन की चर्चा कर ली जाए.

1. जन्मकुंडली कहां तक मान्य

हिंदू समाज में रिश्ता तय करने से पहले पंडितजी से लड़केलड़की की कुंडली मिलान कराने की आदत बढ़ रही है. मान्यता है कि 36 या कम से कम 20 गुणों का मेल हो जाए तो बात आगे बढ़ाई जाती है. किंतु क्या गुणों का मिलान रिश्ते की सफलता का पैमाना है? कदाचित नहीं. गुण नहीं स्वभाव अधिक महत्त्वपूर्ण है. कहते हैं यदि एक को अग्नि और दूसरे को जल मान लिया जाए तो भी जोड़ी समझबूझ के साथ जम जाती है. यदि दोनों जल हैं तब भी चिंता की कोई बात नहीं. लेकिन यदि दोनों अग्नि तत्त्व हैं तो जीवन नरक बन सकता है, क्योंकि समझौता दोनों को मान्य नहीं होता. यह कुंडली का पाखंड है, जिसे पंडितों ने अपना हित साधने के लिए हिंदू समाज पर थोपा है ताकि विवाह जैसे नितांत व्यक्तिगत मामले में भी दखल दे कर मोटी कमाई की जा सके.

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2. क्या है आय का साधन 

जीवननैया जिस बल के आधार पर चलती या खिसकती है वह है पैसा. अत: यह जानना बेहद जरूरी होता है कि भावी वर काम क्या करता है? किस ओहदे पर है और कमाता कितना है? भावी तरक्की के क्या आसार हैं? यह वह पक्ष है जिसे किसी भी सूरत में हलके में नहीं लिया जा सकता. क्या वह सरकारी नौकर है? क्या वह प्राइवेट कौरपोरेट सैक्टर का कर्मचारी है या फिर अपना कामधंधा है?

3. पति-पत्नी की आयु में अंतर

हालांकि बहुत से मामलों में (क्योंकि वे अपरिहार्य होते हैं) वरवधू के बीच आयु के अंतर को गंभीरता से नहीं लिया जाता, लेकिन ऐसा करना सरासर गलत है. अधिक से अधिक 3 से 5 वर्ष का अंतर मान्य होता है, इस से अधिक समझौता और 10 या अधिक वर्षों का अंतर मजबूरी और या फिर जबरदस्ती कही जाएगी. यदि दोनों युवा हैं और आयु में अंतर भी अधिक नहीं है तो आपसी तालमेल जल्दी और सरलता से हो सकता है. यह भी आवश्यक है कि पुरुष स्त्री से शारीरिक रूप से अधिक पुष्ट हो.

4. शादी मनोरंजन नहीं जिम्मेदारी है

आमतौर पर युवामन विवाह को स्वच्छंदता, यौन स्वतंत्रता और मनोरंजन का लाइसैंस मान लेता है. लेकिन यह बात अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए कि विवाह एक जिम्मेदारी है, जो जीवन के अंत तक निभानी होती है. शादी से पहले का और बाद का जीवन परिवर्तन की पराकाष्ठा का चरम है. पतिपत्नी एक ही रात में (फेरों के बाद) वयस्क हो जाते हैं. इस बिंदु पर जीवन में गंभीरता आ जानी चाहिए.

5. पारिवारिक सजगता

यह अलग बात है कि लाइफपार्टनर को जीवन भर आप का साथ देना है, आप के साथ ही रहना है, लेकिन उस के पारिवारिक संस्कार क्या हैं, रीतिरिवाज क्या हैं, भावी सोच कैसी है, यह सब कुछ जानना भी आवश्यक है.

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6. पार्टनर कितना स्वस्थ

विवाह जैसे गंभीर विषय पर चर्चा, भागदौड़, लेनदेन व अन्य कार्यकलापों के बीच संभवतया किसी का इस बात पर ध्यान नहीं होता कि भावी दंपती का स्वास्थ्य कैसा है? विवाह से पूर्व ब्लड टैस्ट (एच.आई.वी. टैस्ट भी), ब्लड ग्रुप व अन्य परीक्षण जरूर करवाएं ताकि वैवाहिक जीवन निर्बाध चल सके.

7. लाइफस्टाइल कैसा है

वह किसी बुरी आदत जैसे धूम्रपान, शराब अथवा अन्य किसी नशे का आदी तो नहीं है? दूसरी महिलाओं के विषय में क्या सोचता है? बुजुर्गों की इज्जत करता है या नहीं? अपने कैरियर के प्रति कितना गंभीर है? भावी बच्चों को ले कर क्या सोच है? ये सब बातें सुनने में भले अटपटी लगती हैं, लेकिन है गंभीर.

8. कान का कच्चा है या समझदार

शादी के बाद कभीकभी यह समस्या शुरुआती दिनों में ही उठ खड़ी होती है कि अमुक लड़की का तो बौयफ्रैंड था. लड़के की गर्लफ्रैंड थी. ऐसा कोई एकतरफा इश्क के चलते भी कह सकता है, तो कोई द्वेषवश भी ऐसा जहर उगल सकता है. अत: किसी की बात पर ध्यान न दें और अपना परिवार अपने तरीके से चलाएं.

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Short Story: लाइफ पार्टनर- क्या थी अभिजीत के प्रति अवनि के अजीब व्यवहार की वजह?

लेखक-प्रेमलता यादू

अवनि की शादी को लगभग चार महीने बीत चुके थे, परंतु अवनि अब तक अभिजीत को ना मन से और ना ही‌ तन‌ से‌ स्वीकार कर पाई थी. अभिजीत ने भी इतने दिनों में ना कभी पति होने का अधिकार जताया और ना ही अवनि को पाने की चेष्टा की. दोंनो एक ही छत में ऐसे रहते जैसे रूम पार्टनर .

अवनि की परवरिश मुंबई जैसे महानगर में खुले माहौल में हुई थी.वह स्वतंत्र उन्मुक्त मार्डन विचारों वाली आज की वर्किंग वुमन (working woman) थी. वो चाहती थी कि उसकी शादी उस लड़के से हो जिससे वो प्यार करे.अवनि शादी से पहले प्यार के बंधन में बंधना चाहती थी और फिर उसके बाद शादी के बंधन में, लेकिन ऐसा हो ना सका.

अवनि जिसके संग प्यार के बंधन में बंधी और जिस पर उसने अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया, वो अमोल उसका लाइफ पार्टनर ना बन सका लेकिन अवनि को इस बात का ग़म ना था.उसे इस बात की फ़िक्र थी कि अब वो अमोल के संग अपना संबंध बिंदास ना रख पाएगी.वो चाहती थी कि अमोल के संग उसका शारीरिक संबंध शादी के बाद भी ऐसा ही बना रहे.इसके लिए अमोल भी तैयार था.

अवनि अब तक भूली‌ नही ‌अमोल से उसकी वो पहली मुलाकात.दोनों ऑफिस कैंटीन में मिले थे.अमोल को देखते ही अवनि की आंखों में चमक आ गई थी.उसके बिखरे बाल, ब्लू जींस और उस पर व्हाईट शर्ट में अमोल किसी हीरो से कम नहीं लग रहा था.उसके बात करने का अंदाज ऐसा था कि अवनि उसे अपलक निहारती रह गई थी. उसे love at first sight वाली बात सच लगने लगी. सुरभि ने दोनों का परिचय करवाया था.

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अवनि और अमोल ऑफिस के सिलसिले में एक दूसरे से मिलते थे.धीरे धीरे दोनों में दोस्ती हो गई और कब दोस्ती प्यार में बदल गई पता ही नही चला.प्यार का खुमार दोनों में ऐसा ‌चढ़ा की सारी मर्यादाएं लांघ दी गई.

अमोल  इस बात से खुश था की अवनि जैसी खुबसूरत लड़की उसके मुठ्ठी में है‌ और अवनि को भी इस खेल में मज़ा आ रहा  था.मस्ती में चूर अविन यह भूल ग‌ई कि उसे पिछले महीने पिरियड नहीं आया है जब उसे होश आया तो उसके होश उड़ गए.वो ऑफिस से फौरन लेडी डॉक्टर के पास ग‌ई. उसका शक सही निकला,वो प्रेग्नेंट थी.

अवनि ने हास्पिटल से अमोल को फोन किया पर अमोल का फोन मूव्ड आउट आफ कवरेज एरिया बता रहा था.अवनि घर आ गई.वो सारी रात बेचैन रही. सुबह ऑफिस पहुंचते ही वो अमोल के सेक्शन में ग‌ई जहां सुरभि ने उसे बताया कि अमोल तो कल‌ ही अपने गांव के लिए निकल गया.उसकी पत्नी का डीलीवरी होने वाला है,यह सुनते ही अवनि के चेहरे का रंग उड़ गया.अमोल ने उसे कभी बताया नहीं कि वो शादीशुदा है. इस बीच अवनि के आई – बाबा ने अभिजीत से अवनि की शादी तय कर दी.अवनि यह शादी नहीं करना चाहती थी.

पंद्रह दिनों बाद अमोल के लौटते ही अवनि उसे सारी बातें बताती हुई बोली-“अमोल मैं किसी और से शादी नहीं करना चाहती तुम अपने बीबी,बच्चे को छोड़ मेरे पास आ जाओ हम साथ रहेंगे ”

अमोल इसके लिए तैयार नही हुआ और अवनि को पुचकारते हुए बोला-“अवनि तुम  एबार्शन करा लो और जहां तुम्हारे आई बाबा चाहते हैं वहां तुम शादी कर लो और बाद में तुम कुछ ऐसा करना कि कुछ महीनों में वो तुम्हें  तलाक दे दे और फिर हमारा संबध यूं ही बना रहेगा”.

अवनि मान गई और उसने अभिजीत से शादी कर ली.शादी के बाद जब अभिजीत ने सुहाग सेज पर अवनि के होंठों पर अपने प्यार का मुहर लगाना‌ चाहा तो अवनि ने उसी रात अपना मंतव्य साफ कर दिया कि जब ‌तक वो अभिजीत को दिल से स्वीकार नही कर लेती, उसके लिए उसे शरीर से स्वीकार कर पाना संभव नही होगा.उस दिन से अभिजीत ने अविन‌ को कभी छूने का प्रयास नही किया.केवल दूर से उसे देखता.ऐसा नही था की अभिजीत देखने में बुरा था.अवनि जितनी खूबसूरत ‌थी.अभिजीत उतना ही सुडौल और आकर्षक व्यक्तित्व का था.

अभिजीत वैसे तो माहराष्ट्र के जलगांव जिले का रहने वाला था,लेकिन अपनी नौकरी के चलते नासिक में रह रहा था.शादी के ‌बाद अवनि को भी अपना ट्रांसफर नासिक के ब्रान्च ऑफिस में परिवार वालों और अमोल  के कहने पर करवाना पड़ा.अमोल ने वादा किया था कि वो नासिक आता रहेगा.अवनि के नासिक‌ पहुंचने की दूसरी सुबह,अभिजीत ने चाय‌ बनाने से पहले अवनि से कहा-” मैं चाय बनाने जा रहा हूं क्या तुम चाय पीना पसंद करोगी .

अवनि ने बेरुखी से जवाब दिया-“तुम्हें तकल्लुफ करने की कोई जरुरत नहीं.मैं अपना ध्यान स्वयं रख सकती हूं.मुझे क्या खाना‌ है,पीना है ,ये मैं खुद देख लुंगी”.

अवनि के ऐसा कहने पर अभिजीत वहां से बिना कुछ कहे चला गया.दोनों एक ही छत में ‌रहते हुए एक दूसरे से अलग ‌अपनी‌ अपनी‌ दुनिया में मस्त थे.

शहर और ऑफिस दोनों ही न‌ए होने की वजह से अवनि ‌अब तक ज्यादा किसी से घुलमिल नहीं पाई थी.ऑफिस का काम और ऑफिस के लोगों को समझने में अभी उसे  थोड़ा वक्त चाहिए था.अभिजीत और अवनि दोनों ही सुबह अपने अपने ऑफिस के लिए निकल जाते और देर रात घर लौटते.सुबह का नाश्ता और दोपहर का खाना दोनों अपने ऑफिस कैंटीन में खा लेते.केवल रात का खाना ही घर पर बनता.दोंनो में से जो पहले घर पहुंचता खाना बनाने की जिम्मेदारी उसकी होती.ऑफिस से आने के बाद अवनि अपना ज्यादातर समय मोबाइल पर देती या फिर अपनी क्लोज  फ्रैंड सुरभि को,जो उसकी हमराज भी थी और अभिजीत को अवनि का room partner संबोधित किया करती थी. अभिजीत अक्सर न्यूज या फिर  एक्शन-थ्रिलर फिल्में देखते हुए बिताता.

अवनि और अभिजीत दोनों मनमौजी की तरह अपनी जिंदगी अपने-अपने ढंग से जी रहे थे, तभी अचानक एक दिन अवनि का पैर बाथरूम में फिसल गया और उसके पैर में मोच आ गई. दर्द इतना था ‌कि अवनि के लिए हिलना डुलना मुश्किल हो गया. डॉक्टर ने अवनि को पेन किलर और कुछ दवाईयां दी साथ में पैर पर मालिस करने के लिए लोशन भी, साथ ही यह हिदायत भी दी कि वो दो चार दिन घर पर ही रहे और ज्यादा चलने फिरने से बचे.

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अवनि को इस हाल में देख अभिजीत ने भी अवनि के साथ अपने ‌ऑफिस से एक हफ्ते की छुट्टी ले ली और पूरे दिन अवनि की देखभाल करने लगा.उसकी हर जरूरतों का पूरा ध्यान रखता.अवनि के मना करने के बावजूद दिन में दो बार उसके पैरों की मालिश करता.अभिजीत जब उसे छूता ‌अवनि को अमोल के संग बिताए अपने अंतरंग पलों की याद ताज़ा हो जाती और वो रोमांचित हो उठती.अभिजीत भी तड़प उठता लेकिन फिर संयम रखते हुए अवनि से दूर हो जाता.अभिजीत सारा दिन अवनि को खुश रखने का प्रयास करता उसे हंसाता उसका दिल बहलाता.

इन चार दिनों में अवनि ने यह महसूस किया की अभिजीत देखने में जितना सुंदर है उससे कहीं ज्यादा खुबसूरत उसका दिल है.वो अमोल से ज्यादा उसका ख्याल रखता है. अभिजीत ने अपने सभी जरूरी काम स्थगित कर दिए थे.इस वक्त अवनि ही अभिजीत की प्रथमिकता थी. इन्हीं सब के बीच ना जाने कब अवनि के मन में अभिजीत के लिए प्रेम का पुष्प पुलकित होने लगा पर इस बात ‌से अभिजीत बेखबर था.

अवनि अब ठीक हो चुकी थी.एक हफ्ते गुजरने को थे.अवनि अपने दिल की बात  कहना चाहती थी, लेकिन कह‌ नही पा रही थी.अवनि चाहती थी अभिजीत उसके करीब आए उसे छूएं लेकिन अभिजीत भूले से भी उसे हाथ नहीं लगाता बस ललचाई आंखों से उसकी ओर देखता.एक सुबह मौका पा अवनि, अभिजीत से बोली-“मैं तुमसे कुछ कहना चाहती हूं”

” हां कहो,क्या कहना है ?”अभिजीत न्यूज पेपर पर आंखें गढ़ाए अवनि की ओर देखे बगैर ही बोला.

अवनि गुस्से में अभिजीत के हाथों से न्यूज पेपर छीन उसके दोनों बाजुओं को पकड़ अपने होंठ उसके होंठों के एकदम करीब ले जा कर जहां दोनों को एक-दूसरे की गर्म सांसें महसूस होने लगी अवनि बोली-“मैं तुमसे प्यार करने लगी हूं मुझे तुम से प्यार हो गया है”.

यह सुनते ही अभिजीत ने अवनि को अपनी बाहों में भर लिया और बोला-“तुम मुझे अब प्यार करने लगी हो,मैं तुम्हें उस दिन से प्यार करता हूं जिस दिन से तुम मेरी जिंदगी में आई हो और तब से तुम्हें पाने के लिए बेताब हूं. तभी अचानक अवनि का मोबाइल बजा.फोन पर सुरभि थी.हाल चाल पूछने के बाद सुरभि ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा-“and what about your room partner”

यह सुनते ही अवनि गम्भीर स्वर में बोली- “No सुरभि he is not my room partner.now he is my life partner”.

ऐसा कह अवनि अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर सब कुछ भूल अभिजीत की बाहों में समा गई.

आपकी स्लीपिंग पोजीशन खोलती है आपके रिश्तों का राज

क्या आपने कभी सोचा है कि पार्टनर के साथ बेड शेयर करते वक्त जब आप और आपका पार्टनर दोनों गहरी नींद में होते हैं तो आपका स्लीपिंग पोजीशन कैसा होता है? शायद नहीं, क्योंकि आपको इससे फर्क नहीं पड़ता. लेकिन क्या आप जानती हैं कि बाकी हर चीजों की तरह आपके सोने का तरीका भी आपके रिश्ते के बारे में कई राज खोलता है.

जी हां एक शोध से पता चला है कि सोते वक्त आपकी बौडी लैंग्वेज आपके रिश्ते के बारे में बहुत सी बातें बताती है. ये आपके आपसी संबंध और एक दूसरे की फीलिंग को भी बयां करती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आपका सबकोंशियस(अवचेतन) आपके सोने के तरीके को नियंत्रित करता है. तो देर किस बात की चलिए जानते हैं इसके बारे में.

1. लिबर्टी लवर्स

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लिबर्टी लवर्स एक दूसरे की तरफ कमर करके सोते हैं और इस दौरान उनके बीच स्पेस भी होता है. यह पोजीशन उन कपल्स के बीच सामान्य है जो काफी समय से रिश्ते में हैं. इस पोजीशन का मतलब है कि आप बिना छुए भी एक-दूसरे से जुड़े हो सकते हैं और आप अलग रहकर भी एक-दूसरे को उतना ही प्यार करते हैं. आपको अकेले बहुत सी चीजें करना अच्छा लगता है साथ ही आप अपने साथी से सारी चीजें शेयर करना भी पसंद करते हैं.

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2. द चेजिंग स्पून

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इस पोजीशन में एक व्यक्ति अपने बिस्तर के एक ओर सोता है जबकि दूसरा व्यक्ति शारीरिक तौर पर उससे जुड़ने के लिए उसे चेंज करता है. इस पोजीशन का मतलब है कि आपके रिश्ते में एक व्यक्ति अधिक स्पेस चाहता है जबकि दूसरा व्यक्ति अपने साथी के साथ अधिक समय चाहता है. इस पोजीशन को देखकर आपको एकतरफा कनेक्शन का एहसास होता है.

3. बैक किसर्स

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ज्यादातर कपल्स इस पोजीशन को पसंद करते हैं. इस स्लीपिंग पोजीशन में कपल्स एक दूसरे की तरफ कमर करके सोते हैं. इस दौरान उनकी स्पाइन आपस में कौन्टेक्ट करती है. अगर आप इस पोजीशन में सोती हैं तो इसका मतलब है कि आप एक-दूसरे के साथ को महत्व देने के साथ ही आप अपने निजी स्पेस को भी अहमियत देती हैं.

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4. द अनरेवलिंग नौट

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द अनरेवलिंग नौट स्लीपिंग पोजीशन में दोनों व्यक्ति नौट बनाते हैं लेकिन वो इस नौट में अधिक समय के लिए नहीं रहते और कुछ समय के बाद नौट को खोल देते हैं. सम्बंध विशेषज्ञ कहते हैं कि यह पोजीशन अधिकतर उन कपल्स में होती है जो कुछ समय के लिए साथ होते हैं. जो कपल्स इस पोजीशन में सोते हैं उन्हें इंटिमेसी के साथ-साथ अपनी आजादी भी पसंद होती है. हालांकि केवल 8 प्रतिशत लोग ही इस पोजीशन को पसंद करते हैं.

जब पार्टनर की आदतें हों नापसंद

बंटी और रोशनी कुछ समय पहले ही दोस्त बने थे. हर मुलाकात के दौरान रोशनी को बंटी का व्यक्तित्व और साथ बहुत भला लगता. हर मुलाकात में बंटी वैलडै्रस्ड दिखता, जिस से रोशनी बहुत प्रभावित होती. धीरेधीरे दोनों का प्रेम परवान चढ़ा और फिर उन के बीच शारीरिक संबंध भी बन गए. बंटी हमेशा रोशनी से स्त्रीपुरुष समानता की बातें करता. अंतत: रोशनी ने बंटी से शादी करने का फैसला कर लिया.

शादी हुए साल भर भी नहीं बीता था कि रोशनी के सामने बंटी की कई बुरी आदतें उजागर होने लगीं. उसे पता चला कि बंटी तो रोज नहाता भी नहीं है और जब नहाता है, तो नहाने के बाद गीले तौलिए को कभी दीवान पर तो कभी सोफे पर फेंक देता है. रात को सोते समय ब्रश भी नहीं करता है. रोशनी को बंटी से ज्यादा फोन करने की भी शिकायत रहने लगी. अब बंटी की स्त्रीपुरुष समानता की बातें भी हवा हो गईं. शादी के तीसरे ही साल दोनों अलग हो गए.

जब भी लव मैरिज की बात होती है तो उस के समर्थन में सब से बड़ा और ठोस तर्क यही दिया जाता है कि इस में दोनों पक्ष यानी लड़कालड़की एकदूसरे को अच्छी तरह जान लेते हैं. लेकिन क्या हकीकत में ऐसा हो पाता है? वास्तव में दूर रह कर यानी अलगअलग रह कर किया जाने वाला प्रेम बनावटी, अधूरा और भ्रमित करने वाला हो सकता है. ऐसा प्रेम करना किसी भी युवा के लिए काफी आसान होता है, क्योंकि इस में उसे अपने व्यक्तित्व का हर पक्ष नहीं दिखाना पड़ता. वह बड़ी आसानी से अपनी बुरी आदतें छिपा सकता है. इस प्रकार के प्रेम में ज्यादातर मुलाकातें पहले से तय होती हैं और घर से बाहर होती हैं, इसलिए दोनों ही पक्षों के पास तैयारी करने और दूसरे को प्रभावित करने का काफी समय होता है.

असली परीक्षा साथ रह कर

घर से बाहर प्रेमीप्रेमिका को एकदूसरे की अच्छी बातें ही नजर आती हैं. विभिन्न समस्याओं के अभाव में कुछ तो नजरिया भी सकारात्मक होता है, तो सामने वाला भी अपना सकारात्मक पक्ष ही पेश करता है. प्रेमी सैंट, पाउडर लगा कर इस तरह घर से निकलता है कि प्रेमिका को पता ही नहीं चल पाता कि वह आज 2 दिन बाद नहाया है. प्रेमिका को यह भी नहीं पता चलता कि उस का प्रेमी अपने अंडरगारमैंट्स रोज बदलता भी है या नहीं. और पिछली मुलाकात में उस के प्रेमी ने जो शानदार ड्रैस पहनी थी वह उसी की थी या किसी दोस्त से मांग कर पहनी थी.

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कुल मिला कर लव मैरिज हो या अरेंज्ड मैरिज, किसी भी जोड़े की असली परीक्षा तो साथ रह कर ही होती है. इस लिहाज से विवाह के स्थायित्व की गारंटी को ले कर लव मैरिज या अरेंज्ड मैरिज में ज्यादा अंतर नहीं है, क्योंकि दोनों ही मामलों में साथी का असली रूप तो साथ रह कर ही पता चलता है. दोनों ही तरह की शादियों में यह दावा नहीं किया जा सकता कि जीवनसाथी कैसा निकलेगा?

सामंजस्य भी जरूरी

हम यहां इस बहस में नहीं पड़ रहे कि दोनों तरह की शादियों में कौन सी शादी सही है, लेकिन इतना जरूर कह रहे हैं कि शादी से पहले किया गया प्रेम शादी के बाद किए जाने वाले प्रेम से आसान होता है. शादी के बाद जोड़े को एकदूसरे के बारे में सब पता चल जाता है. एकदूसरे की असलियत खुल जाती है. अच्छीबुरी सब आदतें पता चल जाती हैं. जिंदगी की छोटीबड़ी समस्याएं भी साथ चलने लगती हैं.

इस के बाद भी यदि उन में प्रेम बना रहता है तो हम उसे असली प्रेम कह सकते हैं. बेशक कुछ लोग इसे समझौता भी कहते हैं, मगर हर रिश्ते का यह अनिवार्य सच है कि कुछ समझौते किए बिना कोई भी, किसी के भी साथ, लंबे समय तक या जिंदगी भर नहीं रह सकता.

अंत में घर के अंदर और बाहर के इसी प्रेम के बारे में चुनौती सी देतीं ये लाइनें भी गौर करने लायक हैं:

घर से बाहर तो प्रेमी सब बन लेते हैं,

घर से बाहर तो प्यार सब कर लेते हैं,

करो घर में, घरवाली से तो जानें.

दाल खाते वक्त कंकड़ जो मुंह में आ जाए,

या रोटी में बाल लंबा तुम्हें दिख जाए,

तब आई लव यू बोलो तो जानें.

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बुरा नहीं लाइफ पार्टनर से लड़ना

रिलेशनशिप में पार्टनर्स के बीच झगड़ा होना आम बात है लेकिन झगड़ा होने के बाद आप दोनों का ही मन उदास हो जाता है. साथ ही यह भी जरुरी है कि आप किस तरह से इस झगड़ें को सुलझाते हैं और वापस अपने रिश्ते को खुशमिजाज बनाते हैं. हर रिश्ते में उतार-चढ़ाव तो आते ही रहते हैं. अच्छी और बुरी परिस्थितियों का असर आपके रिश्तों पर भी पड़ता है. लेकिन उस समय गलती चाहें किसी की भी हो झगड़ा खत्म होने के बाद आप और आपके पार्टनर सुलह कर ही लेते हैं और यही रिश्ते को मजबूत बनाता है. हालांकि अगर हम कहें कि पार्टनर से झगड़ा होना अच्छी बात है तो क्या आप मानेंगी? हम जानते हैं कि आपका जवाब ना ही होगा. लेकिन हम बता दें कि ऐसा हम नहीं कह रहे. यह दावा एक रिसर्च ने किया है. आइए जानते हैं क्या है मामला.

हाल ही में आए एक शोध में पता चला है कि किसी रिश्ते में होने पर लोग जब झगड़ा करते हैं तो उन्हें अपने मन की सभी नाराजगी को जाहिर कर देना चाहिए. अगर वो नाराजगी और गुस्से को मन में दबाकर रखते हैं इससे उनका स्वास्थ्य खराब हो सकता है साथ ही वो तनाव में रहते हैं.

शोध में कहा गया है कि जो लोग विवाद के दौरान पार्टनर से अपने गुस्से को बयां कर देते हैं वो लोग कम बीमार होते हैं. हालांकि रिसर्चर का कहना है कि इसके लिए जरुरी है कि आप विवाद से समान रूप से निपटें.

यह रिसर्च एरिजोना यूनिवर्सिटी के मनोविज्ञान विभाग के शोधकर्ताओं ने किया है. शोध में यह भी कहा गया है कि जो लोग पार्टनर से झगड़े के बाद अपने गुस्से को दबा लेते हैं उनमें बीमारियां होने का खतरा अधिक होता है साथ ही इसके जोखिम जानलेवा तक हो सकते हैं.

इस शोध के लिए 192 कपल्स के रिश्तों पर 32 साल से अधिक समय के लिए विश्लेषण किया गया था. विश्लेषण के दौरान शोधकर्ताओं ने इस बात पर ध्यान दिया कि झगड़े के दौरान अपने गुस्से को जाहिर करने या दबाव कर रखने से पार्टनर की जिंदगी पर क्या असर होता है.

शोध के अनुसार, अगर दंपति में से पुरुष अपने गुस्से को जाहिर नहीं करते हैं और महिलाएं अपने गुस्से को जाहिर करती हैं तो पुरुषों में मौत की संभावनाएं 51 प्रतिशत और महिलाओं में मौत की संभावनाएं 36 प्रतिशत बढ़ जाती हैं. इसलिए अगली बार जब आप पार्टनर से झगड़ा करें तो बा करके सुलझाएं नाकि चुप रहें.

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