फिल्म ‘मिमी’ में सरोगेटेड मदर के रोल में नजर आएंगी कृति सैनन, ट्रेलर हुआ वायरल

पिछले 15 वर्षों से बॉलीवुड में कार्यरत निर्माता दिनेश वीजन  ठोस पारिवारिक मनोरंजन वाली फिल्में परोसते आए हैं. जिनमें ‘बीइंग सर्कस’,  ‘हाईजैक’, ‘लव आज कल’, ‘कॉकटेल’,  ‘लेकर हम दिल दीवाना’,  ‘हैप्पी एंडिंग’, ‘बदलापुर’, ‘हिंदी मीडियम’,  ‘लुका छुपी’जैसी कई सफल फिल्मों का समावेश है. अब ‘जियो स्टूडियो’’के साथ मिलकर दिनेश वीजन एक फिल्म ‘‘मिमी’’लेकर आ रहे हैं, जिसका ट्रेलर आज जारी किया जा चुका है.

फिल्म‘‘मिमी’की कहानी सरोगेट मदर’के इर्द गिर्द घूमती है. यह फिल्म सफल मराठी फिल्म‘‘मला आई व्हायच’’का हिंदी रूपांतरण है, जिसे लक्ष्मण उतेकर ने निर्देशित किया है और इसमें मुख्य किरदार में कृति सैनन हैं. इसके अलावा इसमें पंकज त्रिपाठी व साई ताम्हणकर भी हैं. ,

इस अद्भुत कहानी में हास्य और भावनाओं का एक दिलकश मिश्रण है. फिल्म का ट्रेलर हमें ना सिर्फ गुदगुदाता है, बल्कि हंसाकर लोट-पोट भी करता है. फिल्म के ट्रेलर में पंकज त्रिपाठी और कृति सैनन के बीच कुछ दमदार कॉमिक टाइमिंग का अहसास होता है. इनके बीच की नोकझोक और केमिस्ट्री आपको उत्साहित होने पर मजबूर कर देती है. यह हमें कहानी की एक दिलचस्प झलक भी देता है. ट्ेलर के अनुसार यह कहानी एक उत्साही और बेपरवाह लड़की की अद्वित्यीय कहानी है,  जो जल्दी पैसा कमाने के लिए सरोगेट मदर बन जाती है. जब उसकी योजना अंतिम क्षण में बिगड़ जाती है, तो क्या सब कुछ खत्म जाता है? आगे क्या होता है? मिमी का ट्रेलर हमें निश्चित रूप से फिल्म के बारे में  कई अनुमान लगाने के लिए मजबूर कर देता है!

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फिल्म‘‘मिमी’’की चर्चा करते हुए निर्माता दिनेश विजन कहते है- “यह ट्रेलर फिल्म ‘मिमी’ की तरह ही गर्मजोशी,  उत्साह और हंसी से भरा है. यह हमारी पहली एक्सक्लूसिव ओटीटी रिलीज है, और सिनेमाघरों में परिवार के संग लौटने के लिए कुछ समय लग सकता है. ‘मिमी’ के साथ हम परिवारों के लिए उनके घरों में आराम से बैठकर देखने वाला एक अच्छा सिनेमा लाए हैं. हमें उम्मीद है कि कृति सैनन का प्यारा और हास्यपूर्ण अवतार ज्यादा से ज्यादा दर्शकों को खुशी देगा. इस फिल्म को ‘जियो सिनेमा’और ‘नेटफ्लिक्स’दो ओटीटी प्लेटफार्म एक साथ तीस जुलाई से स्ट्रीम करने वाले हैं. ’’

कृति सैनन अपने इंस्टाग्राम पर रिलीज की तारीख की घोषणा के साथ फिल्म का एक नया पोस्टर साझा कर चुकी हैं.  कृति सैनन कहती हैं-‘‘यह उपदेशात्मक या गंभीर नहीं है. ऐसा नहीं है कि आप सरोगेसी पर फिल्म देखने जा रहे हैं और यह एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म होगी. यह एक बहुत ही मनोरंजक फिल्म है,  जो हास्य से भरपूर है,  और बहुत सारे उतार-चढ़ाव से भरी है. मैंने जिस महिला की भूमिका निभाया है, उसकी तमन्ना फिल्म अभिनेत्री बनने की है. ’’

फिल्म‘‘मिमी’’में शामिल कई लोगों के पुनर्मिलन का प्रतीक है.  इस फिल्म में कृति सैनन,  पंकज त्रिपाठी,  निर्देशक लक्ष्मण उटेकर और निर्माता दिनेश विजान सफलतम रोमांटिक-कॉमेडी ‘लुका छुप्पी’ के बाद एक साथ आए हैं.

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‘जियो स्टूडियो ’ और दिनेश विजान की कंपनी मैडॉक फिल्म्स प्रोडक्शन निर्मित तथा लक्ष्मण उटेकर  निर्देशित फिल्म‘‘मिमी’’में कृति सैनन,  पंकज त्रिपाठी,  साई तम्हंकर,  सुप्रिया पाठक और मनोज पाहवा ने अभिनय किया है. लक्ष्मण उटेकर ने रोहन शंकर के साथ ‘मिमी’की कहानी और पटकथा लिखी है,  जिन्होंने संवाद भी लिखे हैं. यह फिल्म  30 जुलाई 2021 से जियो सिनेमा और नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम होगी.

REVIEW: पंजाब की पृष्ठभूमि में लड़की के जन्मते ही हत्या पर सवाल करती फिल्म ‘काली खुही’

रेटिंगः ढाई स्टार

निर्माताः रमन छिब,  संजीव कुमार नायर, अंकु पांडे, श्रीराम रामनाथन

निर्देशकः तेरी सॉन्मुद्रा

कलाकारः शबाना आजमी, संजीदा शेख, रीवा अरोड़ा, सत्यदीप मिश्रा, लीला सैम्सन,  हेतकी भानुशाली, रोज राठौड़, सैम्युअल जॉन, पूजा शर्मा, अमीना शर्मा व अन्य

अवधिः एक घंटा तीस मिनट

ओटीटी प्लेटफार्मः नेटफ्लिक्स पर, तीस अक्टूबर, दोपहर बाद

पंजाब के गांवों में अब भी लड़कियों को जन्मते ही मार देने की सदियों से चली आ रही प्रथा है. लड़की के पैदा होते ही मां के हाथ से नवजात शिशु को लेकर उन्हें काला जहर चटाकर मार देने की घटनाएं सिर्फ कबीलों और गांवों में ही नहीं बल्कि शहरों में भी खूब होती हैं. उसी को हॉरर फिल्म् का जामा पहनाकर निर्देशक टेरी समुंद्र ने कुछ कहने का प्रयास किया है. इस डेढ़ घंटे की फिल्म को ‘नेटफ्लिक्स’पर देखा जा सकता है.

कहानीः

पंजाब की पृष्ठभूमि पर यह कहानी दस वर्षीय लड़की शिवांगी (रीवा अरोड़ा)  के इर्द गिर्द घूमती है. शिवांगी के कंधे पर पूरे गांव को श्रापमुक्त करने की जिम्मेदारी है. और उसके लिए जीवन मरण की. फिल्म शुरू होती है शहर से, जहां शिवांगी के पिता दर्शन (सत्यदीप मिश्रा) को खबर मिलती है कि शिवांगी की दादी (लीला सैम्सन)  बीमार हैं. दर्शन रात में ही बेटी शिवांगी और पत्नी प्रिया (संजीदा शेख) को लेकर रवाना होते हैं. गांव मे दर्शन की मां के पास सत्या मौसी (शबाना आजमी)  बैठी हुई हैं. सत्या मौसी की नाती चांदनी (रोज राठौड़)व शिवांगी सहेली हैं. चंादनी, शिवांगी को बताने का प्रयास करती है कि गांव में भूत का साया है. लोगो की जान ले रहा है. हर इंसान बीमार होता है, फिर उसे काली उलटी होती है और वह मर जाता है. इसके पीछे एक अतीत भी है, जिसका गवाह कुंआ है, जिसके अंदर कई नवजात लड़कियों के साथ ही कई औरतें दफन हैं. इस गुप्त अतीत की जानकारी दर्शन की मौसी सत्या मौसी(शबाना आजमी) हैं, जिन्होंने अपने अनुभवों को एक पुस्तक में दर्ज किया है. अतीत यह है कि यह एक ऐसी फिल्म है, जिसमें पंजाब के गांवों में अब भी लड़कियों को जन्मते ही मार देने की सदियों से चली आ प्रथा है. लड़की के पैदा होते ही मांओं के हाथों से बच्चियां ले लेने और फिर उन्हें काला जहर चटा देने की घटना है. अतीत में दर्शन की छोटी बहन की भी जन्मते ही हत्या की गयी थी.  शिवांगी के माता-पिता दर्शन (सत्यदीप मिश्रा) और प्रिया (संजीदा शेख) के बीच का घनिष्ठ संबंध अतीत की भयावहता का एक और सुराग प्रदान करता है जो खुले में अपना रास्ता बना रहे हैं.

लेखन व निर्देशनः

लेखक द्वय टेरी समुद्र और छेविड वाल्टर तथा निर्देशक टेरी समुद्र ने शुरुआती दृश्यों में ही भूत की अवधारणा स्पष्ट कर दी है. इसलिए रहस्य तो रह नहीं जाता. फिर भी कुछ कमजोरियों के बावजूद फिल्म अपनी गतिशीलता को बरकरार रखती है. पर हॉरर के नाम पर ऐसा कुछ नही है कि लोगों को डर लगे. हां डराने का प्रभाव संगीत जरुर कुछ पैदा करता है. इसके अलावा शिवांगी के माता पिता के गांव पहुंचने,  शिवांगी का बचपन की सहेली चांदनी से मिलना,  गांव,  तालाब,  नदी,  नाले,  बरसात,  मेंढक,  भैंस,  कीचड़ और घना कोहरा, सब कुछ मिलाकर निर्देशक ने हॉरर का पूरा माहौल बनाने का प्रयास जरुर किया है. कुछ दृश्य अच्छे ढंग से फिल्माए गए हैं. निर्देशन प्रभावशाली है. जन्मते ही बेटियों की हत्या से लेकर  भ्रूण हत्या पर यह फिल्म बिना किसी भाषण के कई सवाल खड़े कर जाती है. सबसे बड़ी कमजोर कड़ी इसका संगीत है. पंजाबी पृष्ठभूमि की इस फिल्म में पंजाब की लोकसंस्कृति और वहां के भूले बिसरे लोकगीत लाकर इसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर दिया जा सकता था. संवाद प्रभाव पैदा नही करते. कई दृश्य स्पष्ट नही है.

कैमरामैन सेजल शाह की तारीफ करनी ही पड़ेगी.

अभिनयः

संजीदा शेख व सत्यदीप मिश्रा ने बेहतरीन अभिनय किया है. संजीदा शेख के हिस्से संवाद कम हैं, मगर वह अपनी आंखों से बहुत कुछ कह जाती है. कमाल का अभिनय है. वेब सीरीज‘तैश’की तरह यहां भी चुप रहकर वह अपने अभिनय को नया आयाम देते हुए नजर आती हैं. दस साल की लड़की शिवांगी के किरदार में बाल कलाकार रीवा अरोड़ा के साथ ही चांदनी के किरदार में बाल कलाकार रोज राठौड़ ने शानदार अभिनय किया है. लीला सैम्सन का किरदार काफी छोटा है, पर उसमें भी वह अपना प्रभाव डालने में सफल रही. भयानक बोझ वाली महिला सत्या मौसी के किरदार में प्रोस्थेटिक मेकअप का सहारा लेकर शबाना आजमी भयानक ही नजर आती हैं, मगर जब बात रिश्ते निभाने की हो, तो उनके चेहरे पर करूणा भी आ ही जाती है. अंततः वह एक शानदार अभिनेत्री हैं.

REVIEW: परदे के पीछे पनपते रिश्तों की गाथा ‘ए सूटेबल ब्वॉय’

रेटिंग: चार स्टार

निर्माताः लुक आउट प्रोडक्शंस और बीबीसी स्टूडियो

कार्यकारी निर्माताः मीरा नायर,  विक्रम सेठ,  एंड्रो डालीस,  फेथ पेनहले,   लोरा लंका ट्रीरी,  अराधना सेठ.

निर्देशकः मीरा नयर, लेकिन एपीसोड नंबर चार के निर्देशक शिमित अमीन

कलाकारः तब्बू, ईशान खट्टर, तान्या मनिकताला,  रसिका दुग्गल, माहिरा कक्कर, राम कपूर.

अवधिः छह घंटे. एक-एक घंटे के छह एपिसोड

ओटीटी प्लेटफार्मः नेटफ्लिक्स

मशहूर लेखक विक्रम सेठ का अंग्रेजी भाषा में एक उपन्यास‘‘ए सूटेबल ब्वॉय’’1993 प्रकाशित हुआ था. जिसे काफी पसंद किया गया था. इसमें आजादी के ठीक बाद 1951 की पृष्ठभूमि में एक मां द्वारा अपनी सुशिक्षित बेटी लता के लिए योग्य वर की तलाष के साथ ही उस वक्त देश मंे आ रहे सामाजिक. राजनीतिक बदलाव. आम इंसान के साथ ही नेताओं की सोच व विचारों का सटीक चित्रण है. इसी उपन्यास पर इसी नाम से फिल्मसर्जक मीरा नायर छह एपीसोड की वेब सीरीज‘‘ए सूटेबल ब्वाॅय’’लेकर आयी हैं. जिसके एपीसोड नंबर चार को छोड़कर सभी एपीसोड मीरा नायर ने स्वयं निर्देशित किए हैं. मगर एपीसोड नंबर चार का निर्देशन शिमित अमीन ने किया है.  यॅूं तो अंग्रेजी में यह बीबीसी पर अगस्त माह में प्रसारित हो चुका है. पर अब 23 अक्टूबर से इसे हिंदी में ‘नेटफ्लिक्स’पर देखा जा सकता है.

कहानीः

1951 की पृष्ठभूमि में इसकी कहानी के केंद्र में उत्तर भारत के गंगा नदी किनारे बसे शहर ब्रम्हपुर के मूलतः तीन परिवार हैं. एक परिवार रूपा मेहरा (माहिरा कक्कर) का है. उनके दो बेटे अरुण मेहरा (विवेक गोम्बर) व वरुण मेहरा (विवान शाह) तथा दो बेटियां सविता मेहरा कपूर (रसिका दुग्गल) व लता (तान्या मनिक ताला) है. अरूण मेहरा की षादी मीनाक्षी चटर्जी मेहरा (शहाना गोस्वामी)से हुई है. मीनाक्षी के दादा अंग्रेजों के जमाने में जज थे. मीनाक्षी का भाई अमित चटर्जी (मिखैल सेन) अंग्रेजी में कविताएं लिखता है. अरूण मेहरा अपनी पत्नी मीनाक्षी के साथ कलकत्ता में रहते हैं. मीनाक्षी ने अरूण पर अपना जादू चला रखा है और अपनी मनमानी करती रहती है. वह अक्सर अपने प्रेमी बिल्ली इरानी (रणदीप हुड्डा)के घर जाकर यौन संबंध बनाती रहती है. लता की खास सहेली हैं मालती (शरबरी देशपांडे).

जबकि दूसरा परिवार सरकार में रेवेन्यू मिनिस्टर महेश कपूर(राम कपूर) का है. उनके दो बेटे प्राण कपूर (गगन देवरियार)  और मान कपूर (ईशान खट्टर) हैं. प्राण कपूर की षादी रूपा मेहरा की बेटी सविता मेहरा से हुई है. प्राण कपूर ब्रम्हपुर युनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं. महेश कपूर के अजीज दोस्त हैं बैटर के नवाब (आमीर बशीर). जिनका बेटा है फिरोज खान (शुभम सराफ). नवाब का नौकर है वारिस (रणवीर शोरी). मान और फिरोज खान अच्छे दोस्त हैं.

‘‘ए सूटेबल ब्वॉय’’के पहले एपीसोड की शुरूआत होती है सविता मेहरा की प्राण कपूर संग शादी से. जहां धीरे धीरे दोनो परिवारों के सदस्यों से भी परिचय होता है. इस शादी के दौरान रूपा बार बार लता से कहती है कि अब अगला नंबर उसका है. लता कहती है कि उसे तो शादी नहीं करनी है. वह तो नन बनना चाहती है. यहीं पर लता व मान कपूर की दोस्ती भी सामने आती है. कुछ दिन बाद युनिवर्सिटी में लता की मुलाकात इतिहास के विद्यार्थी कबीर दुर्रानी (दवेश रजवी) से होती है. धीरे धीरे लता. कबीर दुर्रानी को चाहने लगती है. मगर समस्या यह है कि कबीर दुर्रानी मुस्लिम है. जिसे उसकी मां स्वीकार नही करेंगी. उधर रेवेन्यू मिनिस्टर महेश कपूर सदन में जमींदारी को खत्म करने का कानून संदन में लाकर पास करा लेते हें. इससे गृृहमंत्री एल एन अग्रवाल (विनय पाठक) उनसे नाराज हो जाते हैं. माड़ के राजा(मनोज पाहवा) जमींदारी बिल के खिलाफ अदालत जाते हैं. पर अदालत कानून को सही ठहराती है. शाम को महेश कपूर के घर पर तवायफ साईदा बाई (तब्बू) का नाच गाना होता है. जिस पर मान फिदा हो जाते हैं और फिर मान कपूर अक्सर साईदा बेगम की कोठी पर जा उनके साथ यौन संबंध बनाने लगते हैं. इसे वह प्यार का नाम देते हैं.

दूसरे एपीसोड में लता व कबीर की मुलाकातों के बारे में रूपा मेहरा को पता चल जाता है. लता. कबीर से छिपकर मिलती है और साथ में भागने के लिए कहती है. पर कबीर दुर्रानी इंकार कर देता है. तब लता अपनी मां रूपा के साथ कलकत्ता चली जाती है. जहां पर उसे कबीर का पत्र मिलता है. जो कि उससे माफी मांगने के लिए कहता है. मान. साईदा की बहन तस्नीम (जोएता दत्ता) के उर्दू शिक्षक रशीद (विजय वर्मा) से साईदा के कहने पर उर्दू सीखने लगते हैं. पर एक दिन साईदा केा पता चलता है कि रशीद. तस्नीम पर प्यार के डोरे डाल रहा है. तो वह रशीद को उसके गांव भेज देती हैं. इधर महेश कपूर को मान व साईदा के संबंधों के बारे में पता चलता है. तो वह मान को घर से निकाल देते हैं. मान. साईदा की कोठी पर पहुंचता है. तो साईदा उसे उर्दू सीखने के लिए रशीद के साथ उसके गांव रूदिया भेज देती है. उधर मीनाक्षी. लता को एक पार्टी मे अपने भाई अमित चटर्जी से मिलवाती है. वह चाहती है कि लता की शादी उसके भाई अमित से हो जाए.

तीसरे एपीसोड में रूदिया गांव में पता चलता है कि रशीद शादीशुदा है और रशीद के पिता(विजय राज). महेश कपूर से जमींदारी प्रथा खत्म करने को लेकर नाराज हैं. पर रषीद के साथ मान कपूर गांव वालों का दिल जीत लेता है. यहीं उसे वारिस का भी साथ मिलता है. रूपा बेटी लता के लिए लड़का ढूढ़ने के लिए लखनउ सहगल के यहां जाती है. जहां कल्पना कई लडकों से मिलवाती है और जूता कंपनी में काम करने वाले हरेश खन्ना (नमित दास)को वह पसंद करती है. इधर कलकत्ता में अमित चटर्जी. लता पर डोरे डाल रहा है. मान का पत्र साईदा बेगम को देने फिरोज जाता है. तो उसकी नजर तस्नीम पर पड़ती है और उसे दिल दे बैठता है.

चैथे एपीसोड में गंगा दषहरा के मेले में भगदड़ में भास्कर खो जाता है. जिसे कबीर दुर्रानी सुरक्षित रूपा तक पहुंचाता है. लता युनिवर्सिटी के विद्यार्थियों द्वारा किए जाने वाले शेक्सपिअर के नाटक का हिस्सा बनती है. जहां एक बार फिर कबीर से मुलाकात होती है. रामलीला और मुहर्ररम के जुलूस के वक्त दंगा भड़क जाता है. हिंदू कट्टरपंथियों से मान. फिरोज को बचाता है. लता अपनी सहेली मालती से कह देती है कि वह कबीर से रिष्ता जोड़गी. ऐसा उसे नहीं लगता. अब कबीर दुर्रानी के भागने के प्रस्ताव को लता ठुकरा देती है. इधर. मान को साईदा बेगम ने निराष कर दिया है.

पांचवे एपीसोड में माड़ के राजा व गृहमंत्री अग्रवाल की बेरूखी को देखते हुए नवाब. 1952 के आम चुनाव में कपूर को अपने क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए कहते हैं. उन्ही के क्षेत्र में रूदिया गांव भी है. जहां के लोग मान के भक्त बन चुके हैं. मान अपने पिता के साथ जाकर प्रचार करता है. इधर कई घटनाक्रम तेजी से बदलते हैं. साईदा. फिरोज को बुलाकर बताती है कि तस्नीम का कड़ा सच बयां करती है. वहीं पर गलतफहती के चलते मान . फिरोज के पेट मंे चाकू भोप देता है.

छठे एपीसोड में मान कपूर खुद पुलिस के सामने आम्मसमर्पण कर अपना जुर्म कबूल कर लेता है. उसे लगता है कि फिरोज मर गया. मगर फिरोज बच जाता है. पर इसका फायदा उठाकर वारिस खान . महेश कपूर के खिलाफ चुनाव में खड़ा हो जाता है और जीत जाता है. इससे नवाब को तकलीफ होती है. अदालत में फिरोज व साईदा बेगम इसे महज हादसा बताते हैं. मान बरी हो जाता है. कई घटनाक्रम तेजी से बदलते हैं. अंततः लता सभी को ठुकराते हुए हरेष खन्ना संग षादी कर लेती है.

निर्देशनः

मीरा नायर न सिर्फ बेहतरीन फिल्मकार हैं. बल्कि उन्हे सिनेमा व भारत की अच्छी समझ भी हैं. इस बार उन्होने आजादी और नया संविधान लागू होने के बाद के माहौल पर विक्रम सेठ के उपन्यास पर यह वेब सीरीज निर्देषित की है. जिसमें कुछ दृष्य जरुर हमें उनकी पुरानी फिल्मों की भी याद दिलाते हैं. मगर यह एक बेहतरीन तरीके से निर्देषित वेब सीरीज है. इसमें उन्होने राजीति सोच व कट्टरपंथी सोच पर भी कुठाराघाट किया है. नया संविधान लागू होने के ठीक बाद के समय में एक मस्जिद के सामने किसी माड़ के राजा जो अपनी जमींदारी के खोने से तिलसे हुए हैं. वह मस्जिद के सामने सिर्फ इसलिए षंकर का मंदिर बनवा देना चाहते हैं जिससे नमाज के वक्त वह काबा की तरफ रुख करें. तो उन्हें सामने शिवलिंग नजर आए. जिसका गृहमंत्री का साथ भी मिलता है. फिर हिंदू मुस्लिम दंगो का भड़कना. यह दृष्य अपने आप में बहुत कुछ कहता है. इस सीरीज में 1951 के माहौल के अनुरूप पुरानी हवेलियां.  डिजाइनर कपड़े.  पर्दे के पीछे पनपते जिस्मानी रिश्ते.  घर में चलने वाली कूटनीतियां स्थापित करने में  मीरा नायर कामयाब हैं. मान की कहानी में नवाब के बेटे से उसकी दोस्ती को समलैंगिक इशारा देने की कोशिश भी पटकथा लेखक ने की है.  लेकिन इसका विस्तार बाद में गायब मिला. मीरा नायर ने इस बात को भी रेखांकित किया है कि आजादी के बाद कांग्रेस पार्टी किस तरह सामाजिक बदलाव के साथ ही हिंदू मुस्लिम के बीच भेदभाव पैदाकर दंगे की संस्कृति को बढ़ावा दे रही थी.

कैमरामैन की भी तारीफ करनी पड़ंगी. कैमरा जिस तरह से घूमता है. उसे देखते हुए दर्षकों को अहसास होता है कि उसके साथ ही कैमरा घूम रहा है.

अभिनयः

इस वेब सीरीज की सबसे बड़ी खूबी तब्बू और ईषान खट्टर की आॅन स्क्रीन केमिस्ट्ी है. दोनों ने अपने अपने किरदारों को षानदार तरीके से निभाया है. एक उम्रदराज तवायफ के किरदार में तब्बू ने अपने से आधी उम्र के लड़के इषान खट्टर संग रूहानी और जिस्मानी रिश्ते बनाने के दृष्यों में शानदार अभिनय किया है. उनका अभिनय उनकी आंखों से बोलता है. वहीं मान कपूर उर्फ दाग साहब के किरदार में इषान खट्टर भी अपनी आंखों से बहुत कुछ कह जाते हैं. इषान खट्टर ने साबित कर दिया कि अभी तक किसी ने उनकी प्रतिभा का उपयोग ही नहीं किया था. तो लता के किरदार में तान्या मनिकताला भी प्रभावित करती हैं. वह कई दृष्यों में काफी खूबसूरत लगी हैं और कई दृष्यों में वह अपनी आंखों व चेहरे के भावों से बहुत कुछ कह जाती हैं. राम कपूर बेहतरीन अभिनेता हैं. इसमें कोई दो राय नहीं. कुलभूषण खरबंदा ने महज एक दृष्य का यह किरदार क्यों निभाया. यह तो समझ से परे है. सबसे बड़ी कोफ्त तो बिल्ली ईरानी के किरदार में रणदीप हुडडा को देखकर होती है. एक बेहतरीन कलाकार सिर्फ सेक्स करते नजर आते हैं. इसके अलावा उनके दृष्य ही नही है. विजय वर्मा ने ठीक ठाक अभिनय किया है. विजय राज. रसिका दुग्गल. गगन को जाया किया गया है. अपनी बेटी के उज्ज्वल भविष्य व उसकी षादी को लेकर चिंतित मां रूपा मेहरा के किरदार में माहिरा कक्कड़ अपना प्रभाव छोड़ जाती हैं.  षहाना गोस्वामी तो लगभग एक ही तरह के किरदारों में नजर आने लगी हैं.

REVIEW: जानें कैसी है यामी गौतम और विक्रांत मेस्सी की फिल्म ‘गिनी वेड्स सनी’

रेटिंगः दो स्टार

निर्माताः विनोद बच्चन
निर्देशकः पुनीत खन्ना
कलाकारः विक्रांत मेस्सी,  यामी गौतम, आएशा रजा मिश्रा,  संचिता पुरी,  सुनील नायर.
अवधि: 2 घंटे 5 मिनट
ओटीटी प्लेटफॉमर्ः नेटफ्लिक्स


 स्वतंत्र निर्देशक की हैसियत से पुनीत खन्ना पहली रोमकॅाम फिल्म ‘‘गिन्नी वेड्स सनी’’लेकर आए हैं. कोरोना के माहौल में वह दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान लाने का असफल प्रयास करते हैं.

कहानीः

फिल्म की कहानी दिल्ली में रह रहे पंजाबी परिवारों की है. एक पंजाबी परिवार की मुखिया शोभा जुनेजा(आएशा रजा मिश्रा) हैं, जो कि मैच मेकर यानीकि कुंवारे लड़के व लड़कियों की शादियां करवाती हैं. उनकी इकलौटी बेटी गिन्नी(यामी गौतम)को प्रेम विवाह करना है, उसके कई दोस्त हैं. पर वह खुद कफ्यूज्ड है. पहले वह सुमित(गुरप्रीत सैनी)के संग शादी के सपने देखती थी, मगर फिर बात नही बनी. इन दिनों वह निशांत के साथ घूमती है. निशंात धनवान है. नई गाड़ी खरीदी है, मगर जब भी गिन्नी उससे शादी की बात करती है, तो वह टाल जाता है. उसके माता पिता रोहतक में रहते हैं.

उधर एक हार्डवेअर दुकान के मालिक सेठी(राजीव गुप्ता)हैं, उनकी एक बेटी निम्मी सेठी(मजेल व्यास) व बेटा सनी(विक्राम मैसे)हैं. सनी बहुत अच्छा शेफ है, यानी कि बहुत अच्छा भोजन पकाता है. सनी अपना रेस्टारेंट खोलना चाहता है. सनी के माता पिता चाहते हैं कि सनी जल्दी से शादी कर ले, फिर वह उसकी रूचि के अनुरूप रेस्टारेंट खुलवा देंगे. सेठी जी एक दिन शोभा जुनेजा से कहते हैं कि वह उनके बेटे सनी की शादी करवाने में मदद करें. शोभा कहती हैं कि वह अपने बेटे सनी को उनके पास मिलने के लिए भेजें. सनी से मिलते ही शोभा जुनेजा को लगता है कि यह लड़का तो उनकी बेटी गिन्नी के उपयुक्त है. मगर उन्हें पता है कि उनकी बेटी गिन्नी जिद्दी है और उस पर प्रेम विवाह का भूत सवार है. इसलिए शोभा जुनेजा, सनी को राह दिखाती है कि वह किस तरह पहले गिन्नी से दोस्ती करे, फिर उसे प्रभावित  कर उसे शादी के लिए राजी करे. षुरूआत में सनी के हाथ असफलता ही लगती है. पर इसी बीच सनी का उठना बैठना गिन्नी के साथ ही गिन्नी के दोस्त निशांत व प्रेरणा(संचिता पुरी) वगैरह के संग होने लगती है. गिन्नी से प्रेरणा कहती है कि सनी अच्छा लड़का है. इसी बीच गिन्नी के सभी दोस्त मसूरी जा रहे है, मगर ऐन वक्त पर निशांत नहीं जा पाता, तब उसकी जगह पर गिन्नी,  सनी को साथ में ले जाती है. मसूरी में दोनो काफी नजदीक आ जाते हैं. गिन्नी व सनी एक दूसरे को ‘किस’ करने वाले होते हैं कि तभी वहां पर अपनी गाड़ी से निशांत पहुंच जाता है और गिन्नी को सगाई की अंगूठी पहना देता है. सनी को निराशा होती है. वह मायूस हो जाता है. पर फिर गिन्नी की मां उसका हौसला बढ़ाती है. एक दिन निशांत व गिन्नी में झगड़ा हो जाता है. तब गिन्नी, सनी संग शादी के लिए तैयार होकर सनी को अपनी मां से मिलवाने के लिए घर पर रात्रिभोज के लिए बुलाती है. मगर सनी के पहुंचने से पहले ही निशांत अपने माता पिता के साथ गिन्नी के घर पहुंच जाता है. सनी भी पहुंचता है और सुमित भी पहुंच जाता है. काफी कुछ ड्रामा होता है. अंततः गिन्नी , सनी, निशांत और सुमित से संबंध खत्म कर देती है. तब हार कर  सनी नेहा संग शादी के लिए तैयार हो जाता है, पर फिर कई घटनाक्रम तेजी से बदलते हैं. अंततःगिन्नी व सनी की शादी हो जाती है.

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लेखनः

अति कमजोर पटकथा के चलते प्रतिभाशाली कलाकारों की मेहनत ही बेकार हो गयी. इस तरह की कहानी पर‘मनमर्जियां’सहित सैकड़ों फिल्में बन चुकी हैं. लेखकद्वय को पंजाबी रहन, सहन वगैरह की भी कोई खास समझ नही आती. क्लायमेक्स बहुत घटिया है. संवाद भी अजीब से हैं. . मसलन-‘‘दिल्ली की सड़के फिलाॅसफी सिखा देती हैं’’

निर्देशनः
जब पटकथा कमजोर हो, तो निर्देशक भी बहुत संभाल नहीं पाता है. इसमें हास्य व रोमांस कहीं नजर ही नही आता. फिल्म की गति बहुत धीमी है.

अभिनयः
विक्रांत मैसे व यामी गौतम दोनो ही बेहतरीन कलाकार है, मगर इस फिल्म के किरदारों मे ंवह फिट नही बैठते. दोनों के बीच केमिस्ट्री भी नही जमती. आएषा रजा मिश्रा, राजीव गुप्ता ने ठीक ठाक अभिनय किया है.

REVIEW: समाज के कड़वे सच को उभारती नवाजुद्दीन सिद्दिकी की फिल्म ‘सीरियस मेन’

रेटिंग: साढे़ तीन स्टार

निर्माता व निर्देशक: सुधीर मिश्रा
लेखक: भावेश मंडालिया
कलाकारः नवाजुद्दीन सिद्दिकी,  इंदिरा तिवारी, अक्षत दास, श्वेता बसु प्रसाद,  नासर, संजय नार्वेकर व अन्य
अवधिः एक घंटा 54 मिनट
ओटीटी प्लेटफार्मः नेटफ्लिक्स

जून 2010 में मनु जोसेफ का एक उपन्यास ‘‘सीरियस मेन’’ प्रकाशित हुआ था और देखते ही देखते यह काफी लोकप्रिय हो गया था. अब इसी उपन्यास पर इसी नाम से फिल्मकार सुधीर मिश्रा फिल्म लेकर आए हैं, जो कि दो अक्टूबर से ‘‘ओटीटी’’प्लेटफार्म नेटफ्लिक्स पर देखी जा सकती है. भारत के भविष्य को लेकर जो सपने दिखाए जा रहे हैं, उस पर यह फिल्म अति तीखा व्यंग है.

यह एक आम भारतीय की कहानी है, जो बेहतर जीवन जीने की आस को पूरा करने के लिए सारे नैतिक सिद्धांतो व मापदंडों की परवाह किए बगैर किसी भी हद तक जा सकता है.

कहानीः

फिल्म की कहानी के केंद्र में मुंबई के सिद्धांत और अनुसंधान संस्थान में एक ब्राह्मण खगोलशास्त्री डाॅ. अरविंद आचार्य (नासर)के सहायक के रूप में काम करने वाले मध्यम आयु के तमिल दलित अय्यन मणि(नवाजुद्दीन सिद्दिकी) के इर्द गिर्द घूमती है. जो कि मुंबई के वर्ली इलाके की बीडीडी चाल में किराए की खोली में अपनी पत्नी ओजा(इंदिरा तिवारी)और बेटे आदि के साथ रहता है. दलित होने के चलते उसने खेतों में काम करने वाले अपने माता पिता की तकलीफांे को देखा है. अपने समुदाय में वह पहला बालक था, जिसे पढ़ने का मौका मिला था. अब वह तय करता है कि जो कुछ उसके माता पिता या उसने इस समाज में झेला है,  वह सब वह अपने बेटे आदि(अक्षत दास)के जीवन में नही आने देगा.

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मुंबई के सिद्धांत और अनुसंधान संस्थान में अय्यान अपने ब्राह्मण बाॅस डाॅ. आचार्य को खुश करने के लिए जितना अधिक प्रयास करता है, उतना ही उसे अप्रिय व्यवहार मिलता है. अय्यान इसे डाॅ.  आचार्य की बेवकूफी मानता है.

अय्यन एक अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में अपने बेटे के प्रवेश के लिए डाॅ.  आचार्य का पत्र लेकर जाता है, मगर पता चलता है कि डाॅ. आचार्य ने स्कूल के प्रबंधक से कह दिया कि पत्र को नजरंदाज कर मैरिट पर ही प्रवेश दिया जाए. परिणामतः आदि को स्कूल मंे प्रवेश नही मिलता है. अय्यन को लगता है कि वह दलित है,  इसलिए ब्राम्हण कुल के डाॅ. आचार्य ने इस तरह उसका अपमान किया है. अपने अपमान में जल रहे अय्यन अपनी अपमान जनक कहानी विकसित कर अपने 10 वर्षीय साधारण बुद्धि के बेटे आदि को झूठ का सहारा लेकर एक गणितीय प्रतिभा के रूप में समाज के सामने लाता हैै. आदि को सिंगापुर के विज्ञान संस्थान से पुरस्कृत किया जाता है, तब उसी स्कूल की प्रिंसिपल खुद आदि को बुलाकर अपने स्कूल में प्रवेश देती है. अय्यन अपने बेटे आदि को हथियार बना, उसे रटाते हुए शिक्षकों को भी मात देता रहता है, तो वहीं आदि अपने आश्चर्यजनक गणित- सुलझाने के कौशल के साथ प्रिंसिपल का संरक्षण प्राप्त करता है. इधर अय्यन अपने तरीके से आदि को गणित व विज्ञान में महारथी साबित करता रहता है,  जिसके चलते एक दिन स्कूल की प्रिंसिपल, अय्यान से कहती है कि वह अपने संस्थान के चपरासी की तरह क्रिश्चियन धर्म को स्वीकार कर ले, तो उसे कई तरह की आर्थिक व अन्य सुविधाएं मिल सकती हैं. पर अय्यन इसे ठुकरा देता है.  अच्छी शिक्षा और प्रतिभा इंसान को न सिर्फ बेहतर जीवन जीने योग्य बनाती है, बल्कि उसे जातिवाद के चक्रब्यूह को भी तोड़ने में मदद करती है. मगर अय्यन तो कुछ और ही सोच के साथ कदम आगे बढ़ता है.

अय्यन को पता है कि पीड़ित कार्ड को खेलकर वह क्या कर सकता है,  पर इसी खेल में वह खुद को कब वास्तविकताओं से कोसो दूर लेकर चला जाता है, इसका अहसास उसे भी नहीं हो पाता. आदि की बनावटी प्रतिभा कौशल का प्रभाव मीडिया और राजनेताओ पर भी है. क्षेत्र के नेता केशव(संजय नार्वेकर) और उनकी एमबीए पास बेटी अनुजा (श्वेता बसु प्रसाद )अपने निजी स्वार्थ के चलते आदि के कौशल का उपयोग करते हैं. एक दिन ऐसा आता है, जब अय्यन,  बदले की आग में जलते हुए डां आचार्य को नौैकरी से निकलवाने में कामयाब हो जाते हैं. क्योंकि डाॅं आचार्य का माइक्रो एलियन व ब्लैक होल की खोज भी झूठ का पुलंदा ही होता है.  उसके बाद कहानी में कई मोड़ आते हैं. अंततः एक दिन यह झूठ अय्यन मणि व आदि दोनांे के नियंत्रण से बाहर हो जाता है.

निर्देशनः

बतौर निर्देशक सुधीर मिश्रा ने लंबे सम बाद पुनः वापसी की है और वह एक बार फिर इस बात को साबित करने में सफल हो रहे हैं कि उनके अंदर की आगे ठंडी नही हुई है. उन्हे आज भी सामाजिक बुराइयों और भेदभाव का अहसास है, जिस पर वह कटाक्ष करने से नहीं चुकेंगे. सुधीर मिश्रा उन फिल्म फिल्मकारों में से हैं, जिन्हे राजनीति की अच्छी समझ है. जाति-आधारित आरक्षण, पिता पुत्र का संबंध, राजनीति सहित हर मुद्दे पर सुधीर मिश्रा ने अपनी विचारधाराओं को अच्छी तरह से गढ़ने में सफल रहे हैं. अपनी पिछली फिल्मों के ही तर्ज पर ‘‘सीरियस मेन’’उन्होने एक बार फिर गरीब व बीडीडी चाल की खोली में रहने वालों की महत्वाकांक्षाओं और उनके दमन को रेखांकित किया है. वहीं निर्देशक ने अपनी फिल्म के माध्यम से सवाल उठाया है कि अपनी महत्वाकांक्षाओ व खुशी को पाने के लिए अपने बेटे के बचपन को हथियार के तौर पर उपयोग करना कितना जायज है?यह सुधीर मिश्रा के निर्देशन की ही खूबी है कि फिल्म संदेश देेने के साथ ही मनोरंजन भी करती है.

फिल्म की एक खासियत यह है कि क्रूर समाज का सर्वाधिक प्रभाव झेलने वाला आदि अंततः लड़खड़ाने लगता है, पर वह अपने चरित्र दोष को बचाने का प्रयास नही करता.

फिल्म में अनावश्यक रूप से सेक्स दृश्य व कुछ अवांछित अश्लील संवादों को पिरोया गया है, यदि फिल्मकार इससे ख्ुाद को बचा लेते तो यह फिल्म पूरे परिवार के साथ देखी जा सकती.
फिल्म में कुछ प्रतीकात्मक दृश्य काफी बेहतरीन बन पड़े हैं. मसलन-अय्यन द्वारा कब्जा किए हुए कबूतरों को पिंजड़े से मुक्त करना, पर भारी बारिश के चलते कबूतरों का पुनः वापस आ जाना. यह दृष्श् इस बात का प्रतीक है कि कैसे खुद को मुक्त करने के बावजूद अय्यन मणि अभी भी फंसे हुए हैं.

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अभिनयः

नवाजुद्दीन सिद्दीकी बेहतरीन अभिनेता हैं, इसमें कोई षक नही रहा. अय्यान के गुस्से को जिस तरह से वह परदे पर उकेरते हैं, उससे हर किसी को उनसे हमदर्दी हो जाती है. ओजा के किरदार में इंदिरा तिवारी का अभिनय भी अच्छा है. वैसे इंदिरा तिवारी के हिस्से फिल्म में करने के लिए बहुत कम आया है. बाल कलाकार अक्षय दास ने आदि के किरदार में जान डाल दी है. फिल्म का असली स्टार तो वही है.  डाॅ. अरविंद आचार्य के किरदार में नासर याद रह जाते हैं. राजनेता केशव के किरदार में संजय नार्वेकर और उनकी बेटी अनुजा के किरदार में श्वेता बसुप्रसाद अपने अभिनय की छाप छोड़ जाते हैं.

नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी विक्रांत मैसे और यामी गौतम की फिल्म ‘गिन्नी वेड्स सनी’

यामी गौतम और विक्रांत मैसे के अभिनय से सजी फिल्म ‘गिन्नी वेड्स सनी’ को लेकर लंबे समय से कई तरह की अफवाहें गर्म रही हैं. पर अब तय हो गया है कि इस फिल्म का भी विश्व प्रीमियर 9 अक्टूबर को दोपहर 12:30 बजे ओटीटी प्लेटफॉर्म ‘नेटफ्लिक्स’ पर होगा.

‘नेटफ्लिक्स’ ने इसके प्रदर्शन की तारीख जारी करते हुए फिल्म को टीजर के साथ ही एक गाना “लोल”( LOL ) जी रिलीज किया है. इस गाने में पंजाबी धुनों पर यामी और विक्रांत ठुमके लगाते हुए नजर आ रहे हैं. गीतकार कुणाल वर्मा के इस गीत को संगीत से संवारा है पायल देव ने. जबकि इस गीत को पायल देव ने स्वयं देव नेगी के साथ स्वर बध्द किया है .

रोमांटिक कॉमेडी फ़िल्म की कहानी के केंद्र में दिल्ली की लड़की गिन्नी (यामी गौतम) है. गिन्नी के सिर पर प्यार का भूत सवार है. उनकी मां ने गिन्नी की शादी सनी(विक्रांत मैसे) से तय की है, पर यह जोड़ी साधारण नहीं है. इसमें कई मोड़ आने वाले हैं .क्योंकि मां द्वारा शादी तय किए जाने पर गिन्नी, सनी से मिलती है, पर गिन्नी, सनी को अस्वीकार कर देती हैं. फिर सनी, गिन्नी की मां के साथ मिलकर कैसे गिन्नी का प्यार जीतता है.

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रोमांटिक कॉमेडी फिल्म “गिनी वैसे सनी” के गाने के शीर्षक “लोल”( LOL) से ही पता चलता है कि यह बहुत ही मजेदार और हास्यप्रद गाना होगा. फिल्म की कहानी और स्थिति को ध्यान में रखते हुए पायल देव ने इस गाने को कंपोज किया है, जो इस गाने को और भी धमाकेदार बनाता है.

सोनी म्यूजिक इंडिया के सीनियर डायरेक्टर – मार्केटिंग, सानुजीत भुजबल कहते हैं -” फिल्म ‘गिन्नी वेड्स सनी’ एक फील गुड फिल्म है और संगीत फिल्म की कहानी का एक अभिन्न हिस्सा है. हम इस फिल्म का पहला गाना ‘ LOL ‘ रिलीज कर दर्शकों और श्रोताओं का मूड सेट करना चाहते हैं, ताकि वह इस फिल्म के म्यूजिक एल्बम से उम्मीद बनाए रखें. मैं पायल देव, कुनाल और देव की सराहना करता हूं कि उन्होंने मिलकर इतना बेहतरीन गाना बनाया है.”

वही गाने के रिलीज़ से उत्साहित पायल देव ने कहा- ” मुझे ‘लोल’ गाने की धुन बनाने में बहुत मज़ा आया. कुणाल ने इसे बहुत ही बेहतरीन तरीके से लिखा है. युवा पीढ़ी इस गाने से ज़रूर रिलेट कर पाएंगे. इस तरह की क्रिएटिव कंपोजिशन पर नियंत्रण रखने की सबसे खास बात यह है कि आपको रोकने टोकने वाला कोई नहीं. मुझे इस गाने को बनाने के लिए पूरी छूट दी गई थी. ताकि मैं एक अच्छा और मज़ेदार गाना बना सकूं. मुझे लोगों की प्रतिक्रिया का बेसब्री से इंतज़ार है.”

पुनीत खन्ना निर्देशित इस फिल्म में पहली बार यामी गौतम और विक्रांत मैसे की जोड़ी नजर आएगी.फिल्म का निर्माण ‘सौंदर्य प्रोडक्शन’ के बैनर तले विनोद बच्चन ने किया है. विनोद बच्चन इससे पहले ‘तनु वेड्स मनु’, ‘जिला गाजियाबाद’ और ‘शादी में जरूर आना’ जैसी फिल्मों के निर्माण से जुड़े रहे हैं.

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फिल्म ‘गिन्नी वेड्स सनी’ का फिल्मांकन 20 सितंबर 2019 से नवंबर 2019 के बीच मनाली, दिल्ली, नोएडा ,गाजियाबाद में किया गया था.

FILM REVIEW: जानें कैसी है जान्हवी कपूर की फिल्म गुंजन सक्सेना

रेटिंग : साढे़ तीन स्टार

निर्माता:  करण जोहर, ज़ी स्टूडियो, हीरू यश जोहार, अपूर्वा मेहता

निर्देशक: शरण शर्मा

कलाकार: जान्हवी कपूर, पंकज त्रिपाठी, अंगद बेदी, विनीत कुमार सिंह, मानव विज, आएशा रजा मिश्रा व अन्य

ओटीटी प्लेटफॉर्म: नेटफ्लिक्स

अवधि: 1 घंटा 57 मिनट
1999 कारगिल युद्ध में पहली महिला वायुसेना पायलट के रूप में शरीक होकर भारत को विजयश्री दिलाने वाली गुंजन सक्सेना के जीवन  पर बनी फिल्म “गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल” महज एक बायोपिक फिल्म नहीं है, बल्कि फिल्मकार शरण  शर्मा की इस फिल्म में देशभक्ति और नारी उत्थान की भी बात की गयी है. यह फिल्म फ्लाइट लेफ्टिनेंट गुंजन सक्सेन की कहानी है, जिन्होंने 24 वर्ष की उम्र में कारगिल युद्ध के दौरान अद्भुत साहस का परिचय देते हुए तमाम घायल सैनिकों को अस्पताल तक पहुंचाया था .2004 में उन्होंने  स्क्वार्डन लीडर के रूप में अवकाश लिया था. यह फिल्म 12 अगस्त, बुधवार से ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर देखी जा सकती है.

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कहानी:

फिल्म की कहानी लखनऊ में रह रहे पूर्व आर्मी ऑफिसर अनूप सक्सेना (पंकज त्रिपाठी) के घर से शुरू होती हैं. अनूप सक्सेना की बेटी गुंजन सक्सेना और गुंजू (जान्हवी कपूर) की अपने बड़े भाई (अंगद बेदी) के संग नोकझोंक चलती रहती है. गुंजू का सपना है पायलट बनकर हवाई जहाज उड़ाना .उसके इस सपने के साथ उसका भाई और मां (आयशा रजा मिश्रा) नहीं है, मगर उसके पिता का उसे पूरा समर्थन हासिल है. गुंजन तीन बार पायलट बनने के लिए दिल्ली के ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट में जाती है ,मगर हर बार शैक्षणिक योग्यता बढ़ जाती है.ग्रेजुएशन करने के बाद जब वह पहुंचती है ,तो पता चलता है कि फीस 5 लाख से बढ़कर 10 लाख हो गयी तथा पायलट बनने में 6 से 7  वर्ष लगेंगे .अब उसका परिवार इतना धन देने में असमर्थ है.  गुंजन मन मसोसकर रह जाती है. लेकिन कहते हैं कि जहां चाह हो, वहां राह निकल आती है,.अचानक एक दिन अखबार में पहली बार भारतीय वायु सेना में महिलाओं की भर्ती का विज्ञापन छपता है और गुंजन के सपनों को पंख मिल जाते हैं.

ट्रेनिंग के दौरान बार-बार पुरुष अफसर उसे एक लड़की होने के नाते कमजोर होने का अहसास कराते रहते हैं .पर वह  उनसे लड़ते हुए अपने आप को सशक्त बनाते हुए उधमपुर बेेस की सर्वश्रेष्ठ वायुसेना पायलट अफसर बनती है .यूनिट के प्रमुख कमांडर (मानव विज) का भी उसे साथ मिलता है. अंततः 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान गुंजन सक्सेना को भी देश की सेवा करने का अवसर मिलता है.
जहां पर उसका भाई सैन्य अधिकारी है, कारगिल युद्ध में देश को विजय दिलाने में गुंजन का भी योगदान होता है. और युद्ध भूमि पर उतरने वाली पहली भारतीय महिला वायुसेना पायलट बनती है .

लेखक व निर्देशन

एक  बेहतरीन पटकथा पर बनी यह फिल्म है. जिसमें पहली वायुसेना महिला पायलट की तैयारियों व संघर्ष के साथ पुरुषों  के साथ नारी की बराबरी के संघर्ष के मुद्दे को भी उठाया गया है. निर्देशक शरण शर्मा ने बड़ी खूबसूरती से इसका चित्रण किया है कि एक महिला को वहां ना पहुंचने दिया जाए कि उससे आदेश लेना पड़े, इसके लिए पुरुष क्या-क्या करता है . इसमें पुरुष की मर्दानगी पर भी कटाक्ष किया गया है, इसी के साथ देशभक्ति का जज्बा भी जगाती है.

निर्देशक शरण शर्मा की स्वतंत्र निर्देशक के रूप में यह पहली फिल्म है, पर वह एक मंजे हुए निर्देशक का परिचय देने में सफल रहे हैं. कारगिल युद्ध के दृश्य छोटे समय के लिए भले ही हो, मगर वह कैरीकेचर नहीं लगते ,बल्कि फिल्म देखते समय अहसास होता है कि 1999 कारगिल युद्ध के वक्त ऐसा ही हुआ होगा.

फिल्म के कुछ दृश्य बहुत अच्छे बन पड़े हैं. जिसमें गुंजन व उसके पिता के बीच के कुछ दृश्यों के अलावा एक दृश्य वह है, जिसमें गुंजन का भाई अपने पिता के साथ बहन की सुरक्षा की चिंता व्यक्त करता है.

तो वहीं कुछ संवाद काफी बेहतरीन बने हैं. जैसे “डर अक्सर गलती करवाता है”अथवा “जो मेहनत का साथ नहीं छोड़ते भाग्य उनका साथ नहीं छोड़ता”.

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अभिनय:

पूरी फिल्म को अनूप सक्सेना के किरदार को निभाते हुए पंकज त्रिपाठी अपने कंधे पर लेकर चलते हैं.पंकज त्रिपाठी ने काफी सधा हुआ अभिनय किया है. पंकज त्रिपाठी के साथ जान्हवी कपूर के कई दृश्य काफी अच्छे बन पड़े हैं. गुंजन सक्सेना की शीर्ष भूमिका मैं जान्हवी कपूर हैं ,यह उनके कैरियर की ‘धड़क’,  ‘घोस्ट स्टोरीज’ के बाद तीसरी फिल्म है . पर अभी उन्हें काफी मेहनत करने की जरूरत है .’घोस्ट स्टोरीज’ के छोटे किरदार में उन्होंने बेहतरीन अभिनय किया था , पर यहां कुछ कमी रह गयी.कुछ भावनात्मक दृश्यों के साथ साथ कारगिल युद्ध के दौरान पायलट की सीट पर बैठे हुए जब वह एक सख्त निर्णय लेती है, उस वक्त यह भाव ठीक से उनके चेहरे पर  नहीं उभरता. बहन की सुरक्षा के प्रति सचेत भाई के किरदार में अंगद बेदी ने ठीक-ठाक अभिनय किया है. विनीत कुमार सिंह, आयशा रजा मिश्रा, मानव विज ने ठीक-ठाक अभिनय किया है.

Bulbbul Twitter Review: जानें कैसी है अनुष्का शर्मा की नई Netflix रिलीज

लॉकडाउन के कारण इन दिनों बौलीवुड की ज्यादातर फिल्मों को ओटीटी प्लैटफार्म पर रिलीज किया जा रहा है. वहीं एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा (Anushka Sharma) की फिल्म बुलबुल को भी नेटफ्लिक्स पर रिलीज किया गया है. हौरर फिल्म ‘बुलबुल’ (Bulbul) को भले ही क्रिटिक्स ने खास अच्छा रिस्पॉन्स नहीं दिया है. लेकिन दर्शकों को अनुष्का की ये हौरर फिल्म बेहद पसंद आ रही है. अनुष्का शर्मा (Anushka Sharma) के प्रोडक्शन में बनी फिल्म बुलबुल को ट्विटर फैंस का बेताहाशा प्यार देखने को मिल रहा है. आइए आपको बताते हैं क्या कहते फिल्म की तारीफ में फैंस…

बंगाली परिवार की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म

हॉरर जौनर पर बनी फिल्म बुलबुल(Bulbul), एक चुड़ैल की कहानी है और एक कपल की जिंदगी के ईर्द-गिर्द बनी हुई है. इस फिल्म को अन्विता दत्त ने डायरेक्ट किया है. अन्विता दत्त के निर्देशन में बनी ये कहानी बंगाली परिवार की पृष्ठभूमि और बाल विवाह के कॉन्सेप्ट पर केंद्रित है जिसमें अहम भूमिका निभाती है पास के जंगल में रहने वाली चुड़ैल.

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औडियंस ने बताया शानदार

जहां एक तरफ क्रिटिक्स ने फिल्म को बेकार बताया है तो वहीं फिल्म के बारे में लिखते हुए दर्शकों ने इसे शानदार होने की बात कही है.  कुछ दर्शक तो फिल्म की एक्ट्रेस तृप्ति डिमरी की जमकर तारीफ कर रहे हैं. जबकि कुछ दर्शकों ने इसे नेटफ्लिक्स की अब तक की बेस्ट प्रोडक्शन फिल्म तक बता दिया है.

बता दें कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अनुष्का शर्मा (Anushka Sharma)की ये दूसरी फिल्म है. इससे पहले अनुष्का शर्मा (Anushka Sharma) की अमेजॉन प्राइम वीडियो पर वेब सीरीज पाताल लोक रिलीज हुई थी, जिसे भी फैंस का शानदार रिस्पॉन्स मिला था. वहीं अनुष्का शर्मा (Anushka Sharma) साल 2018 में अपने प्रोडक्शन क्लीन स्लेट फिल्मस के तहत हौरर फिल्म ‘परी’ लेकर आई आई थीं.

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