न्यू बौर्न के Hygiene से जुड़ी बातों का रखें ख्याल

नए बच्चे के आगमन के साथ पूरे परिवार में खुशी की लहर दौड़ जाती है. मातापिता के लिए अपने बच्चे की मुसकान से अधिक कुछ नहीं होता. यह मुसकान कायम रहे, इस के लिए जरूरी है बच्चे का स्वस्थ रहना. शिशु जब 9 माह तक मां के गर्भ में सुरक्षित रह कर बाहर आता है तो एक नई दुनिया से उस का सामना होता है, जहां पर हर पल कीटाणुओं के संक्रमण के खतरों से उस के नाजुक शरीर को जू झना पड़ता है. ऐसे में जरूरी है, उस के खानपान और रखरखाव में पूरी तरह हाईजीन का खयाल रखना.

स्नान

डा. बी.एल. कपूर मेमोरियल हास्पिटल की चाइल्ड स्पेशलिस्ट डा. शिखा महाजन बताती हैं, ‘‘नवजात शिशु को शुरुआत में स्पंज बाथ कराना चाहिए, खासकर तब तक जब तक नाभिनाल गिर न जाए. आमतौर पर 4 से 10 दिनों में नाभिनाल सूख कर गिर जाती है. इस से पूर्व उसे नहलाएं नहीं, हलके गरम पानी में तौलिया भिगो कर पूरे शरीर को पोंछें. नाभिनाल को दिन में 2 बार डाक्टरों द्वारा बताए गए स्प्रिट से साफ करें. जहां तक हो सके, उस जगह को सूखा रखें. पाउडर, घी या तेल न लगाएं. ध्यान रखें कि इस में इन्फेक्शन या दर्द न हो. यदि आप को खून, लाली या पस दिखे तो तुरंत डाक्टर से संपर्क करें.’’

बच्चा थोड़ा बड़ा हो जाए तो उसे प्लास्टिक के बाथटब में नहला सकती हैं. नहलाते वक्त त्वचा की सलवटों (स्किन क्रीजेज), अंडरआर्म्स, गले, उंगलियोें के बीच, घुटनों के नीचे और यूरिनरी पार्ट्स की अच्छी तरह से सफाई करें, पर साबुन का ज्यादा प्रयोग न करें. सिर और पौटी वाली जगह पर ही साबुन लगाएं. बच्चों को आम साबुन या शैंपू से न नहलाएं बल्कि बेबीसोप व शैंपू से नहलाएं. घर का बना उबटन व कच्चे दूध से भी बच्चे को नहला सकती हैं. पर इस बात का ध्यान रखें कि उबटन, साबुन या दूध के कण बच्चे के शरीर पर लगे न रहें. नहला कर उसे वार्मरूम में ले जाएं और सौफ्ट टौवल से धीरेधीरे पोंछते हुए पूरा शरीर सुखा दें.

मालिश

चाइल्ड स्पेशलिस्ट डा. शिखा महाजन कहती हैं, ‘‘मालिश की जितनी उपयोगिताएं गिनाई जाती हैं उतनी होतीं नहीं. पर मुख्य लाभ है, मांबच्चे का भावनात्मक जुड़ाव. स्पर्श संवेदना के जरिए बच्चे और मालिश करने वाले व्यक्ति के बीच रिश्ता गहरा होता है. इसलिए बेहतर होगा कि मालिश बच्चे का कोई निकट संबंधी करे. नौकरानी को यह काम न सौंपें, क्योंकि हो सकता है उस के हाथ गंदे हों या फिर वह कड़े हाथ से मालिश कर दे.

‘‘मालिश हमेशा वेजीटेबल आयल से करें. नारियल, तिल या बादाम तेल से हफ्ते में 2 दिन मसाज करें. पर इस के लिए सरसों के तेल का प्रयोग न करें. यह हार्ड होता है. बच्चे को इस से एलर्जी हो सकती है.’’ बच्चे की मालिश का एक फायदा यह भी होता है कि इस से उसे अच्छी नींद आती है. शिशु की टांगों की मालिश करने से उसे बड़ा आराम मिलता है और वह रात को चैन से सोता है.

मसाज करते वक्त ध्यान रखें

कमरा गरम और आरामदेह हो.

हाथों की चूडि़यां व अंगूठियां उतार दें.

वैक्सिनेशन वाले हिस्से पर मालिश न करें.

बच्चे की नाक या कानों में तेल न डालें.

मालिश करने के कुछ समय बाद बच्चे को नहला दें.

यदि शिशु को बुखार हो तो मालिश न करें.

नेल कटिंग

बच्चों को अपनी उंगली चूसने की आदत होती है खासकर तब जब उन के दांत निकल रहे होते हैं. ऐसे में यदि उन के नाखून गंदे हों तो इन्फेक्शन पेट में चला जाता है. इस के अलावा नाखूनों से बच्चा दूसरों को और कभीकभी अपनी स्किन को भी नोच लेता है. इसलिए जरूरी है कि उस के नाखूनों को काटा जाए. शुरू में नाखून बहुत ही कोमल होते हैं. नेलफाइलर से क्लीन कर के उस से नाखून काट सकती हैं. बेबीसीजर/क्लिपर का प्रयोग भी कर सकती हैं. बच्चा सो रहा हो, उस वक्त नाखून काटना आसान होता है. नहलाने के बाद बच्चे के नाखून नरम हो जाते हैं. नवजात शिशु के नाखून उस समय हाथ से भी तोड़े जा सकते हैं.

काजल

बच्चे की आंखें खूबसूरत और बड़ी दिखाने के चाव में उसे रोज काजल न लगाएं. ‘काजल से आंखें बड़ी होती हैं’ यह एक मिथ है. इस से इन्फेक्शन का खतरा रहता है. घर में बना काजल भी नुकसानदेह होता है. बाजार के काजल में लेड और अन्य कई हानिकारक केमिकल होते हैं, जिन से बच्चों की आंखों की रोशनी जा सकती है. इसी तरह बच्चे को ज्यादा पाउडर भी न लगाएं.

कपड़ों की सफाई

बच्चों के कपड़े साफ पानी में किसी गुणवत्ता वाले माइल्ड प्रोडक्ट से धोएं, क्योंकि डिटरजेंट में मौजूद हार्ड केमिकल्स कपड़ों से पूरी तरह साफ नहीं होते और बच्चों की नाजुक स्किन में खुजली, लाली जैसी समस्याएं पैदा करते हैं. जब भी कपड़े धोएं, पानी से उन्हें अच्छी तरह साफ करें ताकि केमिकल्स का थोड़ा सा भी असर न रहे. कपड़े धो कर उन्हें धूप या हवा में सुखाएं. धूप में इन के कीटाणु मर जाते हैं. बच्चे की नैपी को साबुन से धोने के बाद डेटोल के पानी से धोएं. शिशु के कंबल, बिछावन, ओढ़ने की चद्दर आदि को भी हर दूसरे दिन धूप में सुखाएं.

पौटी ट्रेनिंग

बच्चों में निश्चित समय पर पौटी करने की आदत डलवाएं. जब बच्चे बहुत छोटे होते हैं तो सुसकारने (शी…शी…) की आवाज के द्वारा उन्हें सूसू, पौटी कराने की कोशिश की जाती है. दूध पीने के बाद बच्चा जल्दी सूसू करता है, इसलिए दूध पिलाने के 15-20 मिनट बाद बच्चे को सूसू कराएं. यदि सर्दी का मौसम है तो हर आधेपौने घंटे बाद सूसू कराएं. बच्चों के लिए छोटी पौटी चेयर मिलती है. बच्चे को इस पर बैठा कर सूसू, पौटी कराएं ताकि वह पौटी मैनर्स सीख सके. बीमारी की स्थिति में यदि बच्चा 5 घंटे तक पेशाब न करे तो फौरन डाक्टर के पास ले जाएं. जब वे थोड़े बड़े हो जाएं तो उन्हें समय पर टायलेट में बैठाएं. यदि बच्चे ने पैंटी में ही पौटी कर दी हो तो तुरंत सफाई करें. पौटी उस के शरीर से अच्छी तरह साफ कर दें. फिर उस जगह को अच्छी तरह तौलिए से पोंछ कर सुखा दें ताकि उस की स्किन में कोई प्रौब्लम न हो.

नैपी चेंज करना

बच्चों की स्किन नाजुक होती है. भीगी नैपी देर तक रह जाए तो रैशेज हो सकते हैं. इस से बचने के लिए नैपी गीली होते ही बदल दें. यदि डायपर पहनाती हैं तो जल्दीजल्दी डायपर बदलें. दिन में 7-8 बार डायपर चेंज करना जरूरी होता है. डायपर हमेशा अच्छी कंपनी का और सौफ्ट होना चाहिए.

दूध

मां का दूध छोटे बच्चे के लिए संपूर्ण आहार है. 6 माह तक बच्चे को मां का ही दूध दें. यदि ऐसा न हो सके तो पाश्चराइज्ड दूध दें. कच्चा दूध कभी न दें, इस से इन्फेक्शन हो सकता है. बच्चे को पिलाए जाने वाले दूध की बोतल की सफाई का भी ध्यान रखें. बोतल में दूध डालने से पहले बोतल को पानी में उबाल कर उस की सफाई करें. हर 6 महीने में बोतल का निप्पल बदलें. खिलौने वगैरह भी अच्छी तरह साफ कर के दें और खिलौने अच्छी क्वालिटी के प्लास्टिक से बने हुए ही खरीदें.

ओरल हाईजीन

मुंह में दूध की बोतल रखेरखे सुलाने की आदत छोटे बच्चों के दांतों पर भारी पड़ सकती है. दूध मीठा होता है, इस से उन के दांतों में कैविटी की शिकायत हो सकती है. दूध पीने और सोने से पहले हलके से उन के दांत पोंछ दें या उन्हें खुद ब्रश करने को प्रेरित करें.

दानों की समस्या

कई बार गरमी, लार या दूध उगलने की वजह से छोटे बच्चों की स्किन पर दानों की समस्या हो जाती है. गलत दवा या स्किन को सूट न करने वाले कपड़े भी इस की वजह बन सकते हैं. आवश्यक सावधानी और सफाई का खयाल रखने से यह समस्या खुद ठीक हो जाती है. गरमी के मौसम में दानों पर बेबी पाउडर बुरकें. यदि 2-3 माह तक दाने ठीक न हों तो डाक्टर से संपर्क करें.

कुछ और बातों का खयाल जरूरी

कुछ नवजात बच्चों की ब्रेस्ट को दबाने पर दूध निकलता है. यह मां के हारमोन का असर होता है. ऐसी स्थिति में बारबार उसे छुएं या दबाएं नहीं. इस से इन्फेक्शन या जख्म होने का डर रहता है. कुछ दिनों में यह समस्या स्वयं ठीक हो जाती है.

बच्चे के शरीर पर ज्यादा बाल हैं तो इन्हें हटाने की कोशिश में आटे की लोई, उबटन, क्रीम वगैरह न लगाएं. ये खुद हट जाएंगे.

गंदे हाथों से बच्चे को न छुएं.

बाहर से आ कर एकदम बच्चे को न गोद में  उठाएं और न ही उसे तत्काल दूध पिलाएं.

नवजात शिशु के सिर पर यदि बाल हैं तो उन्हें कंघी न करें. थोड़ा बड़ा होने पर उस के लिए सौफ्ट हेयर ब्रश या बेबी कांब लाएं.

शिशु को बारबार चूमना ठीक नहीं, इस से उसे संक्रमण होने का खतरा रहता है.

कुछ भी खाने से पहले हाथ धोने की आदत बच्चे में डालें.

बच्चे को कभी भी गिरी हुई चीज उठा कर खाने न दें.

खयाल रखें

बच्चे को रोज नहलाएं. जाड़े के दिनों में आमतौर पर मांएं नहलाने से हिचकिचाती हैं, ऐसा करना ठीक नहीं. बच्चा बीमार है तो भी उस के शरीर को भीगे तौलिए से पोंछ जरूर दें.

बच्चे के नहाने का टब वगैरह रोज साफ करें. उस के बाथटब को दूसरे काम में न लें. नहलाने के लिए माइल्ड/बेबी सोप का प्रयोग करें. ध्यान रखें, उस के लिए प्रयुक्त तौलिया भी सौफ्ट हो और इसे घर के दूसरे सदस्य प्रयोग में न लाएं.

बच्चे को जहां तक हो सके, सौफ्ट कपड़े पहनाएं खासकर गरमी में कौटन के हलके कपड़े ही अच्छे रहते हैं. टेरीकोट मिक्स कपड़ों से उस की कोमल त्वचा पर रैशेज हो सकते हैं.

बच्चे को खिलाते वक्त नैपकीन/बिब बांधना न भूलें. यदि वह दूध उलट दे या कपड़े भीग जाएं तो तुरंत उन्हें बदल दें.

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जानें न्यू बोर्न बेबी केयर से जुड़ें ये 6 खास मिथ

किसी महिला के पहली बार गर्भधारण करते ही आसपास से सबके सुझाव आने शुरू हो जाते है, कभी माँ, कभी सास, दादी, नानी, चाची आदि, परिवार की सारी महिलाओं के पास सुझाव के साथ नुस्खे भी तैयार रहते है, जिसे वह बिना पूछे ही उन्हें देती रहती है और गर्भधात्री इन सभी सुझावों को शांति से सुनती है,क्योंकि एक नए शिशु के आगमन की ख़ुशी नए पेरेंट्स के लिए अनोखा और अद्भुत होता है. ये सुख मानसिक और शारीरिक दोनों रूपों में होती है.

इस बारें में सुपर बॉटम की एक्सपर्टपल्लवी उतागी कहती है कि बच्चे के परिवार में आते ही बच्चे के पेरेंट्स बहुत अधिक खुश हो जाते है और उनका हर मोमेंट उनकी जिज्ञासा को बढ़ाता है. जबकि बच्चे की असहजता की भाषा उस दौरान एक पहेली से कम नहीं होती, जिसे पेरेंट्स नजदीक से समझने की कोशिश करते रहते है, जबकि परिवार, दोस्त और ऑनलाइन कुछ अलग ही सलाह देते है, ऐसे में न्यू मौम को कई प्रकार की मिथ से गुजरना पड़ता है, जिसकी जानकारी होना आवश्यक है, जो निम्न है,

अपने बच्चे की ब्रेस्ट फीडिंग का समय निर्धारित करें

न्यू बोर्न बेबी को जन्म के कुछ दिनों तक हर दो घंटे बाद स्तनपान करवाने की जरुरत होती है, इसकी वजह बच्चे के वजन को बढ़ाना होता है, इसके बाद जब बच्चे को भूख लगे, उसे ब्रैस्ट फीडिंग कराएं, कई बार जब बच्चे की ग्रोथ होने लगती है, तो उसे अधिक बार स्तनपान कराना पड़ता है, जिसके बाद बच्चा काफी समय तक अच्छी नींद लेता है. बच्चे में स्तनपान की इच्छा लगातार बदलती रहती है. बच्चा हेल्दी होने पर उसकी ब्रैस्ट फीडिंग अपने आप ही कम हो जाती है. जरुरत के अनुसार ही ब्रैस्ट फीडिंग अच्छा होता है.

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फीडिंग के बाद भी बच्चा रोता है, क्योंकि वह अब भी भूखा है

कई बार भरपेट स्तनपान करने के बाद भी बच्चा रोता है. बहुतों को लगता है कि बच्चे का पेट पूरा नहीं भरा है और उन्हें ऊपर से फार्मूला मिल्क या गाय की दूध पिलाने की सलाह दी जाती है, जो सही नहीं है. भूख के अलावा बच्चे कई दूसरे कारणों से भी रो सकते है मसलन असहज कपडे, गीला डायपर, डायपर रैशेज, अधिक गर्मी या अधिक सर्दी, माँ की गर्भ से अलग होने के बाद की असहजता आदि कई है, जिसे सावधानी से समझना पड़ता है. समय के साथ पेरेंट्स शिशु की असहजता को अपने हाथ और लिप्स से समझ जाते है.

एक अच्छी माँ बच्चे को बार-बार गोंद नहीं उठाती

एक न्यू बोर्न बेबी अपने सुरक्षित माँ की कोख से अचानक नई दुनिया में जन्म लेता है, बच्चा आराम और गर्माहट को माँ के स्पर्श से महसूस करता है. बच्चा केवल उसी से परिचित होता है और उसे बार-बार अपने आसपास महसूस करना चाहता है. ये बच्चे की एक नैचुरल नीड्स है, जिसे माँ को देना है. इसके अलावा आराम और गर्माहट बच्चे की इमोशनल, फिजिकल और दिमागी विकास में सहायक होती है. एक्सपर्ट का सुझाव ये भी है कि शिशु को कंगारू केयर देना बहुत जरुरी है,जिसमे पेरेंट्स की स्किन टू स्किन कांटेक्ट हर दिन कुछ समय तक करवाने के लिए प्रोत्साहित करते रहना चाहिए.इसके अलावा पहले 2 से 3 महीने तक शिशु को बेबी स्वेड्ल में रखने से उन्हें माँ की कोख का एहसास होता है और वह एक अच्छी नींद ले पाता है.

गोलमटोल होना है हेल्दी बच्चे की निशानी

हर बच्चे का आकार अलग होता है, जिसमें उसकी अनुवांशिकी काफी हद तक निर्भर करती है, जहाँ से उसे पोषण मिलता है. बच्चे की स्वास्थ्य को उसकी आकार के आधार पर जज नहीं की जानी चाहिए. उनके स्वास्थ्य की आंकलन के लिए पेडियाट्रीशन से संपर्क करन आवश्यक है, जो शिशु का वजन, उसकी ग्रोथ, हाँव-भाँव आदि सबकुछ जांचता है और कुछ कमी होने पर सही सलाह भी देता है.

न्यू बोर्न के कपडे कीटाणु मुक्त करने के लिए एंटीसेप्टिक से धोना

न्यू बोर्न बेबी की इम्युनिटी जन्म के बाद विकसित होती रहती है, ऐसे में बच्चे के कपडे को साफ़ और हायजिन रखना आवश्यक है. अधिकतर न्यू पेरेंट्स एंटीसेप्टिक लिक्विड का प्रयोग कर कपडे और नैपीस धोते है. एंटीसेप्टिक अच्छे और ख़राब दोनों बेक्टेरिया को मार डालते है,इसके अलावा इसमें कई हार्श केमिकल भी होते है, जो बच्चे की स्किन में रैशेज पैदा कर सकते है. जर्मफ्री करने के लिए बच्चे के कपड़ों को धूप में सुखाएं.

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न्यू बोर्न के पेट में दर्द से राहत के लिए ग्राइप वाटर देना

अभी तक ये सिद्ध नहीं हो पाया है कि ग्राइप वाटर बच्चे कोपेट दर्द में देना सुरक्षित है या अच्छी नीद के लिए ग्राइप वाटर सही है, इसलिए जब भी बच्चा पेट दर्द से रोये, तो तुरंत बाल और शिशु रोग विशेषज्ञ से संपर्क कर दवा दे.

अब शिशु का ध्यान रखना होगा आसान

लेखक- पूजा भारद्वाज 

ज्वौइंट फैमिली में जहां बच्चे को पालना आसान है, वहीं एकल फैमिली में यह उतना ही मुश्किल है. अकेले मांबाप के लिए बच्चे को पालने जैसा कठिन कार्य कैसे हो आसान, आइए जानें:

बेबी केयर प्रौडक्ट

बच्चे को अकेले पालना एक साहसी और चुनौतीपूर्ण कार्य है. खासतौर पर तब जब आप सिंगल फैमिली में रहते हों और यह आप की पहली संतान हो. ऐसे में मां-बाप को समझ नहीं आता है कि वे बच्चे की उचित परवरिश कैसे करें. अभिभावकों की इसी समस्या का समाधान करने के लिए कई कंपनियों ने बाजार में कुछ नायाब व ऐडवांस बेबी केयर प्रोडक्ट्स ला कर अभिभावकों को राहत की सांस देते हुए पेरैंटिंग को आसान बनाया ताकि वे अपने बच्चे को सिर्फ प्यार करें बाकी ये बेबी प्रोडक्ट्स संभाल लेंगे.

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ब्रैस्ट पंप

जब मां को नौकरी या काम से बाहर जाना हो और वह चाह कर भी अपने बच्चे को स्तनपान न करवा पाए, तो ऐसे में बै्रस्ट पंपिंग मां के लिए एक वरदान है, जिस के जरीए वह जितना चाहे उतना दूध स्टोर कर सकती है. जिस से उस के चले जाने के बाद भी उस का बच्चा आराम से फीड कर सकता है. यह ब्रैस्ट पंप मां की जिंदगी आसान बनाता है और बच्चे के पालन में भी उस की मदद करता है.

फोल्डेबल बाथटब

जन्म के बाद बच्चे को नहलाने में अकसर मातापिता को डर लगता है, क्योंकि उन्हें न तो इस का अनुभव होता है और न ही इस बारे में कोई जानकारी. लेकिन फोल्डेबल बाथटब नहलाने की इस प्रक्रिया को असान बनाता है, क्योंकि इसे बच्चे के कंफर्ट को ध्यान में रख कर बनाया गया है. फोल्डेबल टब सुविधाजनक होते हैं और खासकर तब जब आप सफर पर हों, क्योंकि यह फोल्ड हो जाता है और कम जगह में आसानी से आ जाता है. यह इन्फैंट से ले कर टोडलर सभी उम्र के बच्चों के लिए बहुत अच्छा है. जब बच्चा बड़ा हो जाए, तो इस के अंदर मौजूद मौड्यूल को हटा कर बच्चे को बैठा कर भी नहलाया जा सकता है.

प्रैम कम स्ट्रोलर

यह हलका टिकाऊ बेबी स्ट्रोलर यात्रा करते समय उपयोग करने का सब से अच्छा साधन है. आप अगर खरीदारी कर रही हैं या किसी काम में व्यस्त हैं, तो आप बच्चे को स्ट्रोलर में रख अपना जरूरी काम निबटा सकती हैं. अगर आप बाहर घूमने जा रही हैं, तो भी प्रैम कम स्ट्रोलर आप के लिए काफी सुविधाजनक है.

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कई बार मां पर्याप्त क्षमता न होने के कारण बच्चे को उठा नहीं पाती है, लेकिन बच्चे को प्रैम में बैठा या लेटा कर आसानी से बाहर ले जा सकती हैं. वैसे भी लंबे समय तक इस का प्रयोग होता है. प्रैम को आप स्ट्रोलर के रूप में भी उपयोग कर सकती हैं. इस में टोडलर को आसानी से बैठाया जा सकता है और गाड़ी की सीट पर रखा जा सकता है, जो बिलकुल सुरक्षित है. लेकिन इसे खरीदते वक्त कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है. इसे खरीदते समय इस में सीट बैल्ट, लौक, ब्रेक, किनारे आदि की अच्छी तरह जांच कर लें.

टोडलर बूस्टर

शिशु बूस्टर सीटें आप के बच्चे को सुरक्षित रखने के सर्वोत्तम तरीकों में से एक हैं. ड्राइविंग के समय अपने बच्चे को सुरक्षित रखना बेहद आवश्यक है. वे बच्चे जिन की उम्र 3 साल या उस से कम है, को कार की सीट पर बैठाने के बजाय बूस्टर सीट पर बैठाएं. सुपर मार्केट में जा रही हों या वैकेशन पर बूस्टर सीट खरीदना आप के लिए सुविधाजनक हो सकता है.

कई बार मार्केट में खरीदारी करते वक्त बच्चा सो जाता है, जिस से सामान उठाने में दिक्कत होती है, ऐसे में आप बच्चे को बूस्टर पर बैठा कर गाड़ी में छोड़ सकती हैं और फटाफट अपना काम निबटा सकती हैं. यह सभी उम्र व वजन के बच्चों के लिए उपयुक्त है.         

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न्यू बौर्न बेबी के लिए बेस्ट है टच थेरैपी

बच्चे को नहलाने से पहले तेल मालिश उस की हड्डियों को मजबूत और स्किन को सुंदर बनाती है. यही वजह है कि अधिकांश घरों में  तेल, क्रीम और लोशन से बच्चे की मालिश की जाती है. मगर बच्चे की मालिश से पहले डाक्टर की सलाह लेना बहुत जरूरी है ताकि आप बच्चे को सही तेल की मसाज दे सकें. बच्चे की स्किन बेहद नाजुक और संवेदनशील होती है. अत: थोड़ी सी लापरवाही भी उस की स्किन के लिए खतरा बन सकती है.

इस बारे में नवी मुंबई के मदरहुड हौस्पिटल के डा. सुरेश बिराजदार बताते हैं कि मालिश बच्चे के लिए लाभदायक होती है. इस से बच्चे में चुस्ती और फुरती आती है, शरीर का ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है, जिस से उस का अच्छा विकास होता है.

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दरअसल, मालिश एक टच थेरैपी है, जिसे अधिकतर माएं करती हैं. मां के मालिश करने से उस का प्रभाव बच्चे पर अधिक रहता है, धीरेधीरे बच्चे का मां से संबंध प्रगाढ़ होता है. यही नहीं मालिश से कई बीमारियां भी दूर होती हैं. रोजाना मालिश से शिशु खुश रहता है.

आजकल कई घरों में मालिश मेड से करवाई जाती है, जिस का फायदा तो है पर मां को आसपास रह कर शिशु से इमोशनल बौंडिंग को मजबूत करने की जरूरत होती है. वैसे तो मां के साथ बच्चे का जुड़ाव जन्म से ही होता है, क्योंकि बच्चा उस की कोख से जन्म लेता है, लेकिन मसाज एक शारीरिक स्पर्श है, जो उसे और अधिक सिक्योर महसूस कराती है.

कब तक करें

डाक्टर सुरेश कहते हैं कि पहले साल बच्चे को मसाज देने की अधिक आवश्यकता होती है, क्योंकि इस के बाद वह खुद अधिक ऐक्टिव होने लगता है, इधरउधर की चीजें ऐक्स्प्लोर करने लगता है. वह सोना नहीं चाहता. ऐसे में अधिक मसाज की जरूरत नहीं होती. इन्फैंट को मसाज देने की अधिक आवश्यकता होती है, क्योंकि वे अधिक देर तक बिस्तर पर लेटे रहते हैं. अगर बच्चा मसाज को ऐंजौय करता है, तो ढाई साल तक मसाज करना अच्छा रहता है. इस के निम्न फायदे हैं:

– मालिश से रक्तसंचार बढ़ता है.

– शिशु की हड्डियां और मसल्स मजबूत होती हैं.

– शारीरिक विकास सही होता है.

– मसाज के बाद बच्चे को भूख लगती है.

– उस की पहचानशक्ति बढ़ती है.

– अच्छी नींद आती है.

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– वजन सही रहता है.

– बच्चा चिड़चिड़ेपन से दूर रहता है.

– रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है.

– बच्चा अधिक ऐक्टिव रहता है.

– मां के साथ उस का भावनात्मक संबंध मजबूत होता है.

चुनें सही तेल

मसाज के लिए औयल का सही चुनाव बहुत आवश्यक है. सरसों का तेल, नारियल का तेल और औलिव औयल या बादाम का तेल ये तीनों बच्चों की मसाज के लिए अच्छे होते हैं.

अधिकतर मांएं तेल में आटा या बेसन मिला कर बच्चे की मालिश करती हैं, जिस से उस की स्किन के रोमछिद्र बंद हो जाते हैं और इन्फैक्शन का खतरा बढ़ जाता है. इस के अलावा कानों के पीछे, जांघों, आर्मपिट आदि जगहों में कई बार औयल रह जाता है, जिस से वहां नमी होने की वजह से इन्फैक्शन हो जाता है. इसलिए बच्चे के शरीर से औयल अच्छी तरह साफ कर लें. बच्चे की हलके हाथों से मालिश करें.

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मालिश के लिए सही समय चुनें. बच्चे को कुछ खिलाने या स्तनपान कराने के बाद मालिश कतई न करें. मालिश के बाद बच्चे के शरीर से तेल पोंछ दें और उसे कुछ देर यों ही खेलने दें. फिर नहलाएं.

6 टिप्स: ऐसे करें न्यू बौर्न बेबी की सुरक्षित देखभाल

बच्चे की सुरक्षा की बात करें, तो यह शब्द हर माता-पिता की लिस्ट में सबसे पहले नंबर पर आता है, अब सुरक्षा किस चीज से और कैसे है, यह अलग-अलग अवस्था पर निर्भर करता है. दुनिया के सभी माता-पिता अपने बच्चे के लिए बेहतर से बेहतर उत्पाद चाहते हैं, चाहे वो खिलौने हों, कपड़े हों या फिर बेबी केयर प्रोडक्ट्स ही क्यों न हों. लेकिन आज के समय वे कैमिकल युक्त मौजूदा बेबी केयर उत्पादों को उपयोग करते हुए डरते हैं और उसे लेने से पहले दस बार सोचते हैं कि क्या ये हमारे बच्चे के लिए सुरक्षित हैं.

ऐसा ही कुछ वरूण और गजल के साथ भी हुआ, जिन्होंने मार्केट में मौजूद बेबी केयर उत्पादों पर गहराई से रिसर्च किया और शिशु के लिए मौजूद लोशन, शैम्पू, पाउडर आदि में भरपूर टॉक्सिन को पाया जो शिशु के लिए हानिकारक होते हैं. इसे देख दोनों को अपने बच्चे के साथ उन तमाम बच्चों की चिंता होने लगी जिन्हें ये जानते थे और तब इन्होंने इन बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को देखते हुए ऐसे बेबी केयर प्रोडक्ट्स बनाने का फैसला किया जो पूरी तरह से सुरक्षित और टौक्सिन फ्री हैं और इस तरह से ममाअर्थ का जन्म हुआ.

ममाअर्थ हर अभिभावक का एक ऐसा साथी है, जो आपको समझता है, आपकी परेशानियों को जानता है और उन्हें हल करने का प्रयास करता है. इसलिए आप हम पर भरोसा कर सकते हैं, क्योंकि हम आपके बच्चे की फिक्र करते हैं.

ममाअर्थ एक ऐसा ब्रांड है, जो शिशुओं के लिए स्वस्थ और सुरक्षित उत्पाद बनाता है और प्रत्येक अभिभावक की उम्मीदों पर खरा उतरता है, जो अपने बच्चे की देखभाल के लिए कुछ खास व सुरक्षित चाहते हैं वो हम विश्वास करते हैं.

1. क्यों है खास

ममा अर्थ आपके बच्चे के लिए सुरक्षित, प्राकृतिक रूप से तैयार किए गए उत्पाद बनाता है, जो 8000+टौक्सिन मुक्त हैं और सिलिकॉन, पराबेन, खनिज तेल, रंगों और कृत्रिम सुगंध जैसे हानिकारक रसायनों से पूरी तरह मुक्त हैं.

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ममाअर्थ की शुरूआत 5 मेड सेफ सर्टिफाइड बेबी प्रोडक्ट्स के साथ हुई थी, लेकिन आज हमारे 65 से अधिक उत्पाद हैं, जिनमें से 23 बेबी केयर रेंज हैं. हमारे उत्पाद आपके बच्चे का पूरी तरह से ख्याल रखते हैं. आप अपने शिशु के लिए स्किन, बाल या ओरल से जुड़े कोई भी उत्पाद चुन सकते हैं. हमें उम्मीद है कि इनके इस्तेमाल के बाद आप निराश नहीं होंगे.

2. माइल्ड हो साबुन

शिशु के लिए साबुन ऐसा होना चाहिए, जो स्किन को शुष्क नहीं बल्कि उसे साफ करने के साथ मौइश्चराइज भी करे और ममाअर्थ मौइश्चराइजिंग बाथिंग बार में वे सारे गुण हैं, जो आपके शिशु के साबुन में होने चाहिए. बकरी के दूध, दलिया और शिया बटर से बने साबुन में भरपूर नमी है, जो सिर से पैर तक के लिए सुरक्षित है. इससे नहाने के बाद आपके बच्चे की स्किन रूई जैसी कोमल बन जाएगी.

3. मुलायम स्किन के लिए

टैल्क-फ्री डस्टिंग पाउडर, ऐसा पाउडर है, जो फेफड़ों के काम को बंद नहीं होने देता क्योंकि इस डस्टिंग पाउडर में आरारोट और ओटमील पाउडर होता है, जो स्किन को शुष्क और चिकना बनाए रखने में मदद करता है. कैमोमाइल स्किन की समस्याओं को ठीक करता है. इस पाउडर की खास बात है कि यह रसोई में मौजूद सामग्री से बनाया गया है.

4. बैक्टीरिया को करें खत्म

बच्चों के कपड़े धोने के लिए ममाअर्थ डिटर्जेन्ट पाउडर ही इस्तेमाल करें क्योंकि इसमें प्राकृतिक तत्व और बायो-एंजाइम हैं, जो गंदगी और तेल को निकालते हैं. बैक्टीरिया को जड़ से खत्म करते हैं और प्लांट-बेस्ड सर्फेक्टेंट दाग को बड़े ही आराम से निकाल देते हैं और यह बच्चे के कपड़े और स्किन के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है. इसलिए जिद्दी दाग के बारे में नहीं, बल्कि अपने बच्चे को खाना खिलाने पर ध्यान दीजिए.

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5. स्किन रहे सुरक्षित

मच्छर पसीने की गंध से आकर्षित होते हैं और मच्छरों से बचने का एकमात्र तरीका है पसीने की गंध को छिपाना. ममाअर्थ बच्चों को मच्छरों से बचाने में सक्षम है. आप चाहे तो फैब्रिक रोल औन को कपड़ों या बच्चों के प्रैम पर लगाएं या उनके कपड़ों पर पैच चिपकाएं जो पूरी तरह से सुरक्षित हैं और डीट फ्री है. मच्छर भगाने वाले स्प्रे में नीलगिरी तेल है, जो एक प्राकृतिक मौइश्चराइजिंग एजेंट है, जो स्किन को पोषण देता है.

6. दर्द में तुरंत आराम

हींग तेल शिशुओं को आसानी से गैस पास करने में मदद करता है. यह पेट में दर्द और बेचैनी से राहत दिलाता है. इसमें मौजूद सौंफ का तेल, पेपरमिंट तेल, अदरक का तेल और डिल सीड तेल का विशेष मिश्रण पेट के दर्द और सूजन से राहत देता है. यह ईजी टमी रोल औन 1.5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए है, अगर बच्चे के पेट में दर्द है, तो उसे रोकने के लिए हर बार कुछ खिलाने के बाद इसे देना चाहिए.

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