जानें कैसा था प्राची तेहलान का नैटबौल की पूर्व कप्तान से एक्ट्रेस तक का सफर

आकर्षक, आत्मविश्वास से भरपूर,  5 फुट 9 इंच लंबी, खूबसूरत प्राची तेहलान इंडियन नैटबौल की पूर्व कप्तान होने के साथसाथ जानीमानी अदाकारा भी हैं. उन की कप्तानी में 2011 में भारतीय टीम ने दक्षिण एशियाई बीच खेलों में अपना पहला पदक जीता था. 2016 में प्राची तेहलान ‘दीया और बाती हम’ सीरियल से एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा. इस के बाद उन्होंने कई साउथ की और पंजाबी फिल्में कीं.

हाल ही में प्राची को अपनी पहली फिल्म ‘ममंगम’ के लिए कलाभवन मणि मैमोरियल अवार्ड्स 2021 के तहत बैस्ट ऐक्ट्रैस का  अवार्ड मिला.

उन से हुई गुफ्तगू के कुछ अंश पेश हैं:

खिलाड़ी से ऐक्ट्रैस कैसे बनीं?

मैं उस वक्त दिल्ली में काम कर रही थी. तभी मुझे एक बहुत बड़े प्रोडक्शन हाउस से औफर आया. यह वही प्रोडक्शन हाउस था, जिन का स्टार प्लस पर आने वाला प्राइम टाइम शो ‘दीया और बाती हम’ था. उन्होंने मुझे फेसबुक से कौंटैक्ट किया और कहा कि हम आप को इस सीरियल में मौका देना चाहते हैं. मगर शर्त यह है कि आप को 3 दिन के अंदर ही मुंबई शिफ्ट होना होगा.

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मेरे लिए यह फैसला लेना आसान नहीं था, क्योंकि अपना शहर और जौब छोड़ कर अचानक नए शहर में जा कर नए क्षेत्र में काम शुरू करना कठिन था. मगर मैं ने सोचा कि मुझे एक नया मौका मिल रहा है, इसलिए ट्राई करना तो बनता ही है. पेरैंट्स की भी सपोर्ट मेरे साथ थी और सब से बड़ी बात यह कि मुंबई में मेरी मौसी रहती थीं. इसलिए मेरे लिए यह फैसला लेना कठिन नहीं था. मैं ने उसी वक्त मुंबई शिफ्ट किया और मौसी के यहां रह कर ‘दीया और बाती हम’ शो के साथ ऐक्टिंग कैरियर की शुरुआत की.

इस के बाद मैं ने 2 पंजाबी फिल्में कीं और फिर स्टार प्लस के ही एक और शो ‘इक्यावन’ में काम किया. फिर मुझे सुपरस्टार ममूटी के साथ मलयालम फिल्म करने का मौका मिला. इस तरह अचानक मेरी जिंदगी की दिशा बदली और मैं खिलाड़ी से ऐक्ट्रैस बन गई.

आप की लंबी हाइट ने सफलता की राह में कैसे आप का साथ दिया?

मैं ने जीवन में जो भी सफलता पाई वह मुख्यतया अपनी हाइट की वजह से ही पाई है. भले ही वह बास्केटबौल और नैटबौल खेलना हो या फिर ‘दीया और बाती’ में मौका मिलना, दरअसल ‘दीया और बाती’ में एक लंबी लड़की की जरूरत थी. तभी मुझे वहां मौका दिया गया और मैं ऐक्ट्रैस बन पाई.

क्या भारतीय खिलाडि़यों को विदेशियों की तुलना में कम सहूलियत मिलती है?

जी हां भारतीय खिलाडि़यों को हर तरह से बहुत कम सहूलियत मिलती है. भले ही वह इंफ्रास्ट्रक्चर की बात हो, फैसिलिटीज हो या फिर जौब औपर्च्यूनिटी की बात, हर तरीके से पिछड़े  हुए हैं. पिछले दिनों कौमनवैल्थ गेम्स से पहले  मैं 21 दिनों के लिए आस्ट्रेलिया गई थी. वहां  पर आस्ट्रेलियन इंस्टिट्यूट औफ स्पोर्ट्स में  रुकना हुआ.

अगर हम उस की तुलना अपनी ‘स्पोर्ट्स अथौरिटी औफ इंडिया’ से करें तो हमें पता चलेगा कि कितना बड़ा अंतर है. वहां सारी सैवन स्टार फैसिलिटीज, बेहतरीन सैनिटाइजेशन, वैल इक्यूपिड और प्लान्ड कमरे, कैफेटेरिया, डाइट सबकुछ था. विदेशों में खिलाडि़यों को बहुत अच्छी फैसिलिटीज मिलती है पर भारत में वह नहीं मिल पाता.

हाल ही में आप के साथ कुछ लड़कों  द्वारा बदतमीजी की जाने की घटना सामने  आई. महिलाओं की सुरक्षा के संदर्भ में क्या कहना चाहेंगी?

उस रात मैं पति के साथ एक फैमिली गैटटुगैदर से वापस आ रही थी. रास्ते में 4 युवकों ने हमारी कार का पीछा करना शुरू किया और हमारे पीछेपीछे सोसाइटी में भी घुस गए. मेरा मानना है कि दिल्ली बहुत असुरक्षित है. लोग गाडि़यों में दारू पीते हैं, छेड़खानी करते हैं. कैपिटल हो कर भी दिल्ली में कुछ लोग पता नहीं क्यों इतने गंदे हैं जबकि मुंबई में माहौल बहुत अच्छा है. कोई लड़का किसी लड़की को घूर कर देखने की भी हिम्मत नहीं करता. दिल्ली और मुंबई के लोगों की सोच में 10 साल का फर्क है.

आप खुद को खिलाड़ी देखना ज्यादा पसंद करती हैं या ऐक्ट्रैस?

मैं खुद को खिलाड़ी देखना ज्यादा पसंद करती हूं. स्पोर्ट्स के जरीए ही मेरी जिंदगी का आधार तैयार हुआ. मैं जब ऐक्ट्रैस के तौर पर काम करती हूं तो भी मेरा स्पोर्ट्स पर्सन होना काफी हैल्पफुल होता है.

कोरोना से आप ने क्या सीखा?

कोरोना ने हमें सिखाया कि जिंदगी बहुत अनिश्चित है. जिंदगी में महत्त्वपूर्ण क्या है, इस बात को समझना जरूरी है. हमें ऐंबिशियस होना चाहिए. काम करना भी जरूरी है. मगर जीवन में बैलेंस रखना भी बहुत जरूरी है. हम जिंदगी में बस दौड़े जा रहे थे. कंपीटिशन में उलझे हुए थे. मगर हमें यह समझना जरूरी है कि अपनों के साथ समय बिताना, खूबसूरत यादें सजाना और खुश रहना भी बहुत महत्त्वपूर्ण है.

स्त्रियों की स्थिति मजबूत करने के लिए सब से जरूरी क्या है?

सब से जरूरी यह है कि स्त्रियां सैल्फ डिफैंस करना सीखें. वे शिक्षित हों और यहां के सिस्टम को दुरुस्त किया जाए ताकि लोग गलत करने से पहले 10 बार सोचें. लड़कियों को बाहर निकलने से पहले यह न सोचना पड़े कि कहीं कोई दुर्घटना न घट जाए.

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