स्टार डौटर से कोई कौम्पिटिशन नहीं- तारा सुतारिया

ऐसा बहुत कम ही देखने को मिलता है कि किसी नौन फिल्मी बैकग्राउंड की लड़की को बौलीवुड में धमाकेदार एंट्री करने के साथ ही दो बड़ी फिल्मों के औफर मिल जाएं, और अगर वह पारसी परिवार की है तो हैरानी होना लाजिमी है. एक्ट्रेस तारा सुतारिया के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ, जब बौलीवुड के दिग्गज फिल्मकार करण जौहर ने स्वयं बुलाकर अपनी फिल्म ‘‘स्टूडेंट आफ द ईअर 2’’ में टाइगर श्राफ और अनन्या पांडे के साथ हीरोईन बना दिया. पेश हैं उनसे हुई एक्सक्लूसिव बातचीत की कुछ खास बातें..

अपनी अब तक की जर्नी पर रोशनी डालेंगी?

अब तक मैं डांस और सिंगिग व म्यूजिक के शो करती आयी हूं. पहले मेरी तमन्ना म्यूजिक व सिंगिंग के क्षेत्र में ही करियर बनाना था, पर तकदीर ने मुझे अभिनेत्री बना दिया. सच कह रही हूं. मैंने अपनी जुड़वा बहन पिया सुतारिया के साथ पांच साल की उम्र से डांस व सिंगिग की शिक्षा लेनी शुरू की थी. मैंने बैले डांस, मौडर्न डांस और लैटिन अमरिकन डांस की ट्रेनिंग भारत के अलावा लंदन में भी ली है. मैं टीन एज उम्र से ही भारत के अलावा विदेशों की यात्राएं और म्यूजिक कंसर्ट व डांस परफार्मेंस के शो करती आयी हूं. मेरे शो कई देशो में हो चुके हैं. सिंगिंग व म्यूजिक मेरा पहला प्यार है.

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क्या आप खुद गीत लिखती हैं?

-काश! मैं ऐसा कर पाती. मैंने बहुत कोशिश की,पर गीत लिख नहीं पायी. मैं सिर्फ डांस करती हूं और गाती हूं.

आपने डांस सीखा होगा?

-डांस बैलेट स्कूल भारत व इंग्लैड दोनों जगह हैं. हम दोनों बहनें गर्मियों की छुट्टी में इंग्लैड जाकर बैले डांस सीखते थे. बाकी समय मुंबई में सीखते थे. हमारी परीक्षाएं मुंबई में हो जाया करती थी. यह सिलसिला 13 वर्ष की उम्र से चला आ रहा है. मुंबई में हमने ‘स्कूल औफ क्लासिकल बैलेट एंड वेस्टर्न डांस’ से डांस सीखा. जबकि इंग्लैड में हमने ‘द रौयल अकादमी औफ डांस, यूके’ से डांस की ट्रेनिंग ली.

म्यूजिक की ट्रेनिंग कहां से ली?

-मेरी म्यूजिक की प्रारंभिक शिक्षा मुझे मेरी मां ने दी. वह बहुत अच्छी गायिका हैं. मेरी मां घर पर दूसरे बच्चों को भी म्यूजिक व गायन सिखाती हैं. पर मेरी जो म्यूजिक की गुरू हैं, वह अमेरिका में रहती हैं. हमने उनसे औनलाइन म्यूजिक की शिक्षा ली है.

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आपने अपने म्यूजिक के शो@म्यूजिक कंसर्ट कहां कहां किए हैं?

-आप जानते होंगे कि दक्षिण मुंबई में रौयल औपेरा हाउस और एनसीपीए है. इन दोनों जगह मेरे कई म्यूजिकल कंसर्ट हो चुके हैं. मैंने कई सोलो परफारमेंस दी है. हकीकत में मैं छह साल की उम्र से संगीत व डांस की सोलो परफार्मेंस एनसीपीए में देती आ रही हूं. इसके अलावा मैंने जापान के टोक्यो शहर में भी कई म्यूजिक कंसर्ट किए हैं. दुबई व इंग्लैंड में किए हैं. अब 2020 में अमेरिका में म्यूजिक कंसर्ट करने जा रही हूं.

जब आपका म्यूजिक का करियर अच्छा जा रहा था और आपको म्यूजिक व डांस के क्षेत्र में ही करियर बनाना था, तो फिर म्यूजिक को अलविदा कह अभिनय की तरफ मुड़ने के लिए क्यों विवश हुईं?

करण जौहर से मेरी मुलाकात ने मेरा करियर बदल दिया. अन्यथा मेरा मकसद सिंगर बनना ही था. इसीलिए तो मैं म्यूजिक की काफी ट्रेनिंग लेती थी. काफी म्यूजिकल कंसर्ट किया करती थी, लेकिन मेरी डांस और म्यूजिक की परफार्मेस देखकर पिछले तीन वर्षो से मेरी मां के पास तमाम फोन आ रहे थे कि क्या तारा उनकी फिल्म में अभिनय करना चाहेंगी? मां उन्हें मना करती रही. पर एक दिन मेरी मां ने मुझसे कहा, ‘म्यूजिक के अलावा अभिनय भी आपका एक करियर औप्शन हो सकता है.’ उस दिन से यह बात मेरे दिमाग के किसी कोने में कुल बुलाने लगा था. फिर एक दिन करण जौहर से मुलाकात हो गयी. उन्होने मुझे फिल्म ‘स्टूडेंट औफ द ईअर 2’ का औफर दिया, उस वक्त मैं ग्रेज्युएशन की पढ़ाई कर रही थी. मेरी पढ़ाई पूरी होने तक वह रूकने को तैयार थे. पढ़ाई पूरी करते ही मैने ‘स्टूडेंट औफ द ईअर 2’ की शूटिंग पूरी की. इस फिल्म की शूटिंग पूरी होते ही मुझे ‘मरजावां’ मिल गयी. ‘मरजावां’ की शूटिंग पूरी होते ही ‘साजिद नाड़ियादवाला की दक्षिण भारत की फिल्म ‘आर एक्स 100’ की अनाम हिंदी रीमेक फिल्म भी मिल गयी, जिसकी शूटिंग 15 मई के बाद करने वाली हूं.

फिल्म ‘‘स्टूडेंट औफ द ईअर 2’’को लेकर क्या कहेंगी?

यह 2012 की सफल फिल्म ‘स्टूडेंट आफ द ईअर’ की सिक्वअल फिल्म है. जिसमें पहली फिल्म की झलक जरूर नजर आएगी. यह फिल्म प्यार और दोस्ती के बारे में है. कौलेज की जिंदगी के बारे में है. युवाओं को लेकर यह फिल्म बहुत कुछ बात करती है. पर हमारी नयी फिल्म में अलग यह है कि हम इसमें कबड्डी का खेल भी लेकर आ रहे हैं. इस फिल्म में बहुत ही अलग तरह का डांस है. अलग तरह का एक्शन है. एक्शन में भी मार्शल आर्ट का टच है. यह सब पहली वाली फिल्म में नहीं था. इसलिए यह फिल्म पूरी तरह से पहली वाली फिल्म से अलग है. मैं तो यही चाहती हूं कि हमारी फिल्म की तुलना पहली फिल्म से ना की जाए. पहली फिल्म ने आलिया भट्ट, वरूण धवन और सिद्धार्थ मल्होत्रा को स्टार कलाकार बना दिया. यह तीनों कलाकार मेरे लिए बहुत खास हैं. हम चाहते हैं कि हमारी फिल्म भी हमें इसी तरह की पहचान दिलाए.

करण जौहर ने फिल्म का औफर दिया और आपने आंख मूंदकर यह फिल्म कर ली?

इस फिल्म को करने की मुख्य वजह यह रही कि मुझे इसकी स्क्रिप्ट बहुत पसंद आयी. मुझे सिर्फ अपना किरदार ही नहीं,बल्कि फिल्म में टाइगर श्रौफ का रोहण का जो किरदार है,उसने मुझे प्रेरणा दी. मुझे पूरा यकीन है कि फिल्म की रिलीज के बाद रोहन का किरदार हर युवा को प्रेरणा देगा. सच कह रही हूं, इस फिल्म में टाइगर श्रौफ का रोहन का जो किरदार है, वह काफी दिलेर है. काफी इज्जत वाला है. एक युवा होते हुए भी इस तरह का किरदार निभाना बहुत आसान नही कहा जा सकता. रोहन दिलदार भी है. टाइगर की तरह मीठा बोलता भी है.

फिल्म के अपने किरदार पर रोशनी डालेंगी?

हम सभी सेंट टेरीसा कौलेज के स्टूडेंट है. मैनें इसमें मृदूला का किरदार निभाया है, जो कि सेंट टेरीसा कौलेज में एडमिशन अपना नाम बदलकर ‘मिया’ कूल कर लेती है. मिया आज कल की लड़कियों की तरह है. इंडीपेंडेंट और अपनी सोच रखने वाली बहादुर लड़की है. किसी की सुनती नहीं. अपने करियर को लेकर फोकस है, कंपटेटिव है. वह स्टूडेंट औफ द ईअर की ट्रौफी अपने नाम करना चाहती है. मिया फिल्म के अंदर कुछ गलतियां भी करती है, पर वह अपनी गलतियों को पहचान कर उन्हें सुधारती भी है.

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तो यह फिल्म कहती है कि हर इंसान को अपनी गलती स्वीकार करनी चाहिए?

-जी हां! निजी जिंदगी में मेरा मानना है कि हर इंसान को गलती करने के बाद उस गलती को स्वीकार करने का साहस दिखाना चाहिए. फिर खुद आगे बढ़कर उस गलती को सुधारने की कोशिश करनी चाहिए. निजी जिंदगी में तो मैं यही करती हूं. फिल्म के अंदर मिया भी ऐसा ही करती है. मिया अपनी गलती को सुधारते हुए अपने अंदर बदलाव लाती हैं.

अब जबकि आपकी फिल्म रिलीज होने जा रही है, क्या कहना चाहेंगी?

-मेरे लिए 2018 का साल बहुत बेहतरीन और यादगार रहा. यह वर्ष मेरी जिंदगी में नई नई उपलब्धियां लेकर आया. फिल्म ‘स्टूडेंट आफ द ईअर 2’ करने के बाद अनन्या पांडे, टाइगर श्रौफ, करण जौहर और निर्देशक पुनीत मल्होत्रा के साथ हमारा जो संबंध बना है, वह कभी न बदले,यही मेरी इच्छा है. मैं ईश्वर की शुक्र गुजार हूं कि ‘स्टूडेंट औफ द ईअर 2’ मेरे करियर की पहली फिल्म है.

इस वर्ष अनन्या पांडे सहित कई फिल्मी संताने भी आ रही हैं. इनके बीच खुद को कहां पाती हैं?

-हम सभी की अपनी अलग जगह है. हम सभी की अपनी अपनी तकदीर है. हम सभी के अभिनय की अपनी अलग स्टाइल है. ऐसे में हमें एक दूसरे से कोई प्रौब्लम नहीं है. दूसरी बात हम गैर फिल्मी परिवार से हों या फिल्मी परिवार से, अंततः हमारी अपनी प्रतिभा ही हमें आगे बढ़ाती है. यह भी हो सकता है कि मैं और सारा अली खान या जान्हवी कपूर या अनन्या पांडे एक ही फिल्म में एक साथ अभिनय करते हुए नजर आएं.

सोशल मीडिया से आप कितना जुड़ी रहती हैं?

-सच कहूं, तो मुझे सोशल मीडिया कभी समझ नहीं आता था. ट्विटर क्या बला है, यह मुझे कभी समझ नहीं आया. पर अब फिल्म के प्रमोशन के लिए मैं सोशल मीडिया पर बहुत व्यस्त हो गयी हूं. ट्विटर पर कम, लेकिन इंस्टग्राम पर मैं अपनी फोटो बहुत डालती रहती हूं. इंस्टाग्राम पर मुझे लोगों के संदेश भी मिल रहे हैं. हां! जब कुछ लोग इंस्टाग्राम पर मेरे बारे में अच्छा नहीं लिखते हैं,तो दुःख होता है. इमोशनल हो जाती हूं. बुरा भी लगता है, लेकिन कुछ पाने के लिए कुछ तो सहन करना पड़ता है. वैसे ‘स्टूडेंट औफ द ईअर’ एक मशहूर फ्रेंचाइजी है. इसलिए हमें शुरू से पता था कि सोशल मीडिया पर कुछ तो ट्रोलिंग होगी. अब जो भी कमेंट आ रहे हैं, हम उन्हें अच्छे ढंग से स्वीकार कर रहे हैं. कभी कभी कुछ लोगों के बहुत घटिया और बुरे कमेंट पढ़कर हमें हंसी भी आ जाती है.

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क्या कलाकार के तौर पर आगे बढ़ने में सोशल मीडिया मदद करता है?

-मुझे लग रहा है कि अब हमारा भविष्य सोशल मीडिया ही है. पर मैं पुराने ख्यालों की हूं, इसलिए मुझे सोशल मीडिया समझ नहीं आता, लेकिन अब समझ में आ रहा है कि सोशल मीडिया से भी जुडे़ रहना चाहिए.

पर क्या इससे बौक्स आफिस पर दर्शक मिलेंगे?

-यह कहना मुश्किल है, लेकिन हम जो नए कलाकार हैं, मैं हूं या अनन्या है, जिनसे लोग परिचित नहीं है, उनसे लोग सोशल मीडिया के कारण जल्द परिचित हो रहे हैं. सोशल मीडिया हमें लोगों तक पहुंचाने में मदद करता है. पर स्टारडम हमें हमारे काम से मिलेगा, सोशल मीडिया से नहीं. यह बात हर कलाकार को समझ लेनी चाहिए. यदि दर्शकों ने मेरी फिल्म को पसंद किया, मेरे अभिनय की तारीफ की, तो ही हमें स्टारडम मिलेगा.

पसंदीदा कलाकार ?

-अनुष्का शर्मा, कंगना रानौट, रितिक रोशन और रणबीर कपूर.

अभिनय में सफल होते ही संगीत को बाय बाय कर देंगी?

-सवाल ही नहीं उठता. मैंने पहले ही कहा कि संगीत मेरा पहला प्यार है. अब मैं फिल्मो में भी गाना करने वाली हूं. मैं तो ‘स्टूडेंट आफ द ईअर 2’ में गाना चाहती थी, पर नही गा सकी लेकिन मैं अपने करियर की तीसरी फिल्म में गाना गाने वाली हूं. इसके अलावा समय निकालकर मैं अपने म्यूजिक के कंसर्ट भी करते रहना चाहती हूं. 2020 में मैं अमरिका में अपने म्यूजिक कंसर्ट को करने के लिए जाने वाली हूं.

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डिप्रेशन में करण जौहर बनें सहारा-पुनीत मल्होत्रा

करण जौहर , निखिल अडवाणी, अमोल पालेकर के साथ बतौर सहायक निर्देशक काम करने के बाद फिल्म ‘आई हेट लव स्टोरी’’ से अकेले निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखने वाले पुनीत मल्होत्रा ने  2013 में फिल्म ‘गोरी तेरे प्यार में’ निर्देशित की थी, जिसे बौक्स आफिस पर कोई सफलता नहीं मिली थी. और अब पुनीत मल्होत्रा ने फिल्म ‘‘स्टूडेंट आफ द ईअर’ का निर्देशन किया है. पुनीत मल्होत्रा 2012 से ही करण जौहर  के साथ जुड़े हुए हैं. तो स्वाभाविक तौर पर उन पर करण जौहर की एक छाप भी है. पेश है उनसे हुई एक्सक्लूसिव बातचीत के अंश..

आपके निर्देशन में करण जौहर की छाप है. अमूमन जिसकी छाप होती है, उससे कुछ अलग कर पाना बहुत मुश्किल होता है, लेकिन सिनेमा में अपनी पहचान के लिए निर्देशक को कुछ नया भी करना होता है. आपने क्या कोशिश की ?

आपका सवाल बहुत महत्वपूर्ण और बहुत ही अलग है. देखिए, आपका सवाल और बात बहुत मायने रखती है. क्योंकि सिनेमा में जिसकी छाप है, उसको बरकरार रखते हुए अपनी पहचान का सिनेमा देना बहुत जरूरी होता है. आप जानते हैं कि 2012 में जो फिल्म ‘स्टूडेंट औफ द ईअर’ बनी थी, उसे करण जौहर  ने निर्देशित किया था. अब जब उसका सिक्वअल ‘स्टूडेंट आफ द ईअर 2’ बनी है, तो निर्देशन की जिम्मेदारी उन्होंने मुझ पर डाली. अब मेरे सामने चुनौती थी कि मैं इसे किस तरह से अपने अंदाज में पेश करता हूं. मैंने वही कोशिश इस फिल्म को बनाते समय की है. आपने जो सवाल किया वह इस फिल्म के साथ बहुत सटीक बैठता है. क्योंकि मुझ पर करण जौहर  की छाप है. और यह फिल्म भी करण जौहर  की है. पर मैंने इसको अपने नजरिए से परदे पर उतारा है.

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स्टूडेंट औफ द ईअर से सिक्वअल फिल्म स्टूडेंट औफ द ईअर 2 कितनी अलग है?

-पहली फिल्म सेंट टेरीसा कौलेज पर आधारित थी. हम लोगों ने उस फिल्म के लिए सेंट टेरीसा कौलेज की दुनिया में प्रेम कहानी के साथ फैंटसी जड़ी थी. अब सिक्वअल में हमने सेंट टेरीसा कौलेज की उस दुनिया को तो रखा है, पर इसमे हमने एक दूसरी दुनिया भी गढ़ी है. इंटरवल तक तो सेंट टेरीसा कौलेज की दुनिया है, पर इंटरवल के बाद पूरी कहानी दूसरी दुनिया में पहुंच जाती है.

फिल्म में जो दूसरी दुनिया है, उस पर रोशनी डालना चाहेंगे?

-फिल्म में इंटरवल के बाद कबड्डी के खेल की दुनिया है. प्रो कबड्डी की जो दुनिया है, वह दर्शकों को बांध कर रखने वाली है.

पहली फिल्म से दूसरी फिल्म में जो अंतर आया है, वह समय के अंतराल की वजह से है या समाज में आए बदलाव के चलते आया है?

देखिए, सात वर्ष के समय का अंतराल भी है. इन सात वर्षों मे सिनेमा व समाज भी बदला है. आपको इस बात का अहसास होगा कि इन सात वर्षों में हमारे देश में स्पोर्ट्स में भी काफी बदलाव आया है. पहले हमारे देश में क्रिकेट ही सर्वाधिक लोकप्रिय खेल हुआ करता था. पर धीरे-धीरे दूसरे खेल भी लोकप्रिय हुए हैं. यह बदलाव भी हमारी फिल्म का हिस्सा है. दूसरी बात जब हम सिक्वअल बना रहे थे, तो हमारे उपर दायित्व था कि हम पहले से कुछ अच्छा और बेहतर पेश करें. हमारी तरफ से यह सारी कोशिश आपको इस फिल्म में नजर आएगी.

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आपने बिलकुल सही कहा एक सफल फिल्म के सिक्वअल को बनाते समय उसका स्तर पहले से उंचा रखना जरूरी होता है. यह आपके लिए कितनी बड़ी चुनौती रही?

देखिए, 2012 में जब इस फिल्म को करण जौहर  ने निर्देशित किया था, तब भी मैं उनके साथ जुड़ा हुआ था. अब उसी फिल्म के सिक्वअल के वह निर्माता हैं और मैं फिल्म का निर्देशक हूं. उनके साथ मेरे जुड़ाव ने उनके सिनेमा की समझ, उनके अंदर जो कुछ था, उसने मुझे आज इस फिल्म को बनाने में मदद की. इस फिल्म को करते समय हमने सोचा कि पहली फिल्म में हम यह कर चुके हैं, तो अब नई फिल्म में हमें यह करना चाहिए. इसी के चलते हमने इस फिल्म में टाइगर श्राफ को रखा है. इससे फिल्म का स्तर पहले वाली फिल्म से अपने आप उपर हो गया.

यानी कि टाइगर श्रौफ को फिल्म से जोड़ने के बाद फिल्म की कहानी में दूसरी दुनिया के रूप में कबड्डी के खेल को शामिल किया गया?

-ऐसा नहीं है. हकीकत यह है कि फिल्म की कहानी तय थी, पर उस वक्त फिल्म में कबड्डी की बजाय कोई दूसरा स्पोर्ट्स रखा हुआ था. फिल्म के साथ टाइगर श्रौफ के जुड़ने के बाद भी वही स्पोर्ट्स था. पर कुछ समय बाद जब कहानी थोड़ी बदली, तो हमें लगा कि यदि हम कबड्डी के खेल को रखें, तो ज्यादा अच्छा होगा. कबड्डी को रखने  के पीछे हमारी सोच यह रही कि परदे पर अब तक कबड्डी को इस तरह से रखा नहीं गया है. इस बात का निर्णय लेने के बाद हमने अपनी फिल्म के साथ प्रो कबड्डी के राव साहब को जोड़ते हुए उनसे राय ली.फिल्म में इंटरवल के बाद कबड्डी की जो दुनिया है, वह राव साहब ने ही डिजाइन की है.

खेल को लेकर आपकी अपनी सोच क्या रही?

मेरी राय में हर इंसान के लिए स्पोर्ट्स बहुत जरूरी चीज है. अफसोस की बात है कि हम सब लोग क्रिकेट पर ही ध्यान देते हैं. जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए.यदि मेरा वश चले, तो मैं बड़ी बड़ी इमारतों को गिरा का स्पोर्ट्स ग्राउंड बना देता. क्योंकि हर बच्चे को घर से बाहर निकलकर खंल के मैदान पर खेलना चाहिए. आज का बच्चा घर से बाहर निकलता ही नहीं. मोबाइल या आइपैड पर ही गेम खेलता रहता है,यह उनके सर्वांगीण विकास को अवरूद्ध कर रहा है. हमें अपने बच्चों को घर से बाहर निकलकर खेल के मैदान में खेलने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए. शिक्षा के साथ साथ स्पोर्ट्स को भी अहमियत दी जानी चाहिए. स्पोर्ट्स हमें ‘लूजिंग स्प्रिट’, ‘विनिंग स्प्रिट’ और टीम भावना सिखाता है.

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फिल्म के तीनों कलाकारों के किरदार क्या हैं?

टाइगर श्राफ ने रोहण का किरदार निभाया है, जो कि ‘अंडर डौग’ है, पर वह फिल्म का हीरो है. उसे चोट लगती है. पर वह किस तरह से पुनः उभर कर आता है. रोहण के किरदार में आमीर खान की फिल्म‘जो जीता वही सिकंदर’का टच है. अनन्या पांडे का श्रेया का किरदार एकदम फन है. श्रेया उन लड़कियों में से है, जिससे लोग नफरत करते हैं. तारा ने मिया का किरदार निभाया है. मिया ऐसी लड़की है, जिस पर कौलेज के सभी लड़के फिदा हो जाएंगे. इन तीनों के बीच बहुत ही जटिल रिश्ते हैं. प्रेम त्रिकोण है. आज की तारीख में युवा पीढ़ी में जिस तरह से ट्विस्टेड  रिलेशनशिप’ नजर आती है, वही हमारी फिल्म में भी नजर आएगी.

समाज में जो बदलाव है,वह आपकी फिल्म का हिस्सा कैसे है?

-मैंने पहले ही कहा कि पिछले सात वर्ष के अंतराल में सिनेमा व समाज काफी बदला है. पिछले कुछ वर्षो से ग्रास रूट@जमीन से जुड़ी कहानी वाली फिल्में बननें लगी हैं. यह वह फिल्में हैं, जिनमें रियालिटी होती है. अब मेट्रो पौलीटन सिटी के साथ साथ छोटे शहरों व गांवों को भी फिल्मों के साथ जोड़ा जाने लगा है. हमारी इस फिल्म में भी आपको दोनों दुनिया नजर आएगी. इसमें ग्रास रूट से जुड़ी कहानी भी है.

ग्रास रूट से जुड़ी एक फिल्म असफल हो चुकी थी. ऐसे में स्टूडेंट औफ द ईअर 2 में ग्रास रूट की कहानी जोड़ते समय आपको रिस्क नहीं लगा?

मैं एक ही बात कहूंगा कि ‘गोरी तेरे प्यार में’ और ‘स्टूडेंट औफ द इअर 2’ का एक दूसरे से कोई संबंध नहीं है. मेरे दिल में जो कहानी आयी, वह मैंने बतायी. यह कहानी एक ऐसे कौलेज में पढ़ने वाले लड़के की हैं, जो अपनी जिंदगी में तमाम मुसीबतों के बाद भी अपने सपने पूरे कर लेता है.

आप डिपरेशन से कैसे उबरे थे?

-देखिए, एक न एक दिन तो निराशा व हताशा से खुद को उबार कर नए सिरे से काम तो करना ही था. आगे बढ़ने के लिए यह बहुत जरुरी होता है. डिपरेशन के वक्त, मेरी निराशा के वक्त आगे बढ़ने में करण जौहर  ने मेरी बहुत मदद की. मुझे डिपे्रशन से उबारने में उनका बहुत योगदान रहा. मुझे अच्छी तरह से याद है कि वीकेंड पर मैं रो रहा था,तो करण जौहर  ने कहा था कि, ‘तू रो क्यों रहा है, हम इससे बड़ी फिल्म बनाएंगे.’

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पारसी एक्टर्स को लेकर करण की नई स्टूडेंट ने किया ये खुलासा…

आखिर पारसी मूल के कलाकार हिंदी सिनेमा से दूरी क्यो बनाकर रखते हैं? इस तरह के कई सवाल जब हमने ‘‘धर्मा प्रोडक्शन’’ की पहली फीमेल पारसी एक्ट्रेस तारा सुतारिया के सामने रखा, तो उन्होंने बड़ी बेबाकी से इसके लिए पारसियों की परवरिश को ही जिम्मेदार ठहराया. तारा नृत्य व औपेरा संगीत जगत में अपनी एक अलग पहचान राने वाली पारसी मूल की कलाकार हैं.

हाल ही में मुंबई के पांच सितारा होटल में फिल्म ‘‘स्टूडेंट औफ द ईअर 2’’ के सिलसिले में बातचीत करने के लिए तारा सुतारिया से हमारी मुलाकात हुई, तो हमने उनके सामने पारसी मूल के कलाकारों को लेकर कई सवाल रखे, जिसका तारा सुतारिया ने एक्सलूसिव जवाब हमें दिए.

हमने तारा सुतारिया से पूछा-‘‘आप खुद पारसी हैं और पारसी थिएटर की एक बहुत पुरानी परंपरा रही है.पारसी थिएटर लोगों को बहुत पसंद भी आता रहा है. इसके बावजूद इन दिनों पारसी थिएटर लप्त होता जा रहा है. इसकी वजहें क्या हैं और क्या आपने पारसी थिएटर पर कुछ काम किया है? इस पर तारा सुतायिर ने कहा-‘‘मैंने पारसी नाटक देखे जरूर हैं. दक्षिण मुंबई में तो पारसी थिएटर का अपना गढ़ रहा है. लोग पारसी थिएटर को बहुत पसंद भी करते थे.दो साल पहले मैंने एनसीपीए में ही दो पारसी नाटक देखे थे.पर धीरे धीरे पारसी थिएटर की परंपरा लुप्त हो रही है. मैं और मेरी मां अक्सर यह सोचते हैं कि जब हम पारसी लोग थिएटर में इतना अग्रणी थे,तो फिर अब डूब क्यों रहे हैं? अभी तक तो मुझे इसका जवाब नहीं मिला कि पारसी थिएटर लुप्त क्यों हो रहा है.’’

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खुलासा: इस मामले में टाइगर की बराबरी नही कर सकतीं अनन्या पांडे

जब हमने तारा सुतारिया से कहा ‘‘बौलीवुड से पारसी कलाकार बहुत कम जुड़ते हैं?’ तो तारा सुतारिया ने कहा- ‘‘आपने एकदम सही कहा. मैं और मेरी मम्मी अक्सर इस विषय पर बात करते हैं कि बॉलीवुड में पारसी कलाकार न के बराबर क्यों हैं? मैंने अपने परिवार को और अपने पारसी दोस्तों को नजदीक से देखा है, उससे मुझे जो बात समझ आयी वह यह है कि हम पारसी वेस्टर्न की तरफ ज्यादा आकर्षित हैं. हम वेस्टर्न नाइज तरीके से रहते हैं और अंगे्रजी में ही बात करना पसंद करते हैं, जबकि बौलीवुड के लिए हिंदी भाषा का ज्ञान होना जरूरी है. शायद यही वजह है कि बौलीवुड में पारसी कम हैं, पर मुझे उम्मीद है कि मैं इसे बदल कर रहूंगी. मैं बौलीवुड में सफलता के झंडे गाडूंगी, क्योंकि मुझे हिंदी बहुत पसंद है.’’

अपनी बात को जारी रखते हुए तारा सुतारिया ने आगे कहा-‘‘दूसरी वजह यह है कि पारसी बच्चे जिस माहौल में परवरिश पाते हैं,उसका भी उन पर असर होता है.इसलिए वह बौलीवुड की बजाय वेस्टर्न चीजों की तरफ ज्यादा आकर्षित होते हैं.पर मैं चाहती हूं कि दूसरे पारसी भी बौलीवुड से जुडे़ं.’’

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बता दें, बौलीवुड में पहली बोलती फिल्म ‘आलम आरा’ का निमार्णकर पारसी फिल्मकार आरदेशीर ईरानी ने एक नए इतिहास का सूत्रपात किया था. उसके बाद पारसी मूल के जेबीएच और होमी वाडिया ने भी कई फिल्में बनायी. फिर पारसी मूल के ही सोहराब मोदी ने कई फिल्मों का निर्माण व उनमें अभिनय किया.

1931 से 2019 के बीच बौलीवुड फिल्मो में अभिनय करने वाले पारसी मूल के कलाकारों में डेजी ईरानी, हनी ईरानी, अरूणा इरानी, नरगिस राबाडी उर्फ शम्मी,परसिस खंबाटा, दिनयार काट्रेक्टर,शेरनाज पटेल, पेरीजाद जोराबियन, शेरनाज टायरवाला, कुरूश डेबू, बोमन ईरानी, फ्रेडी दारूवाला, जिम सर्भ, अमारा दस्तूर जैसे चंद कलाकारों ने ही अभिनय किया है. इनमें से अरूणा ईरानी,बोमन ईरानी,शम्मी जैसे कुछ पारसी मूल के कलाकारों के ही नाम आम लोगों की जुबान पर हैं.

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