आखिर पारसी मूल के कलाकार हिंदी सिनेमा से दूरी क्यो बनाकर रखते हैं? इस तरह के कई सवाल जब हमने ‘‘धर्मा प्रोडक्शन’’ की पहली फीमेल पारसी एक्ट्रेस तारा सुतारिया के सामने रखा, तो उन्होंने बड़ी बेबाकी से इसके लिए पारसियों की परवरिश को ही जिम्मेदार ठहराया. तारा नृत्य व औपेरा संगीत जगत में अपनी एक अलग पहचान राने वाली पारसी मूल की कलाकार हैं.

हाल ही में मुंबई के पांच सितारा होटल में फिल्म ‘‘स्टूडेंट औफ द ईअर 2’’ के सिलसिले में बातचीत करने के लिए तारा सुतारिया से हमारी मुलाकात हुई, तो हमने उनके सामने पारसी मूल के कलाकारों को लेकर कई सवाल रखे, जिसका तारा सुतारिया ने एक्सलूसिव जवाब हमें दिए.

हमने तारा सुतारिया से पूछा-‘‘आप खुद पारसी हैं और पारसी थिएटर की एक बहुत पुरानी परंपरा रही है.पारसी थिएटर लोगों को बहुत पसंद भी आता रहा है. इसके बावजूद इन दिनों पारसी थिएटर लप्त होता जा रहा है. इसकी वजहें क्या हैं और क्या आपने पारसी थिएटर पर कुछ काम किया है? इस पर तारा सुतायिर ने कहा-‘‘मैंने पारसी नाटक देखे जरूर हैं. दक्षिण मुंबई में तो पारसी थिएटर का अपना गढ़ रहा है. लोग पारसी थिएटर को बहुत पसंद भी करते थे.दो साल पहले मैंने एनसीपीए में ही दो पारसी नाटक देखे थे.पर धीरे धीरे पारसी थिएटर की परंपरा लुप्त हो रही है. मैं और मेरी मां अक्सर यह सोचते हैं कि जब हम पारसी लोग थिएटर में इतना अग्रणी थे,तो फिर अब डूब क्यों रहे हैं? अभी तक तो मुझे इसका जवाब नहीं मिला कि पारसी थिएटर लुप्त क्यों हो रहा है.’’

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