‘‘मेरी त्वचा से मेरी उम्र का पता ही नहीं चलता, क्योंकि मेरे साबुन में हैं हलदी, चंदन और शहद के गुण. इस साबुन में है एकचौथाई मिल्कक्रीम जो दे मुझे नर्म मुलायम त्वचा. दादी मां ने झट लौंग का तेल मला था. क्या आप के टूथपेस्ट में नमक है? क्ले शैंपू से मेरे बाल रहते हैं एकदम खिलेखिले,’’ इस तरह के जुमलों वाले न जाने कितने ही विज्ञापन हम रोज अखबार, टीवी और रेडियो पर देखतेसुनते हैं. इन व्यावसायिक विज्ञापनों में कितनी सचाई है यह तो उत्पाद बनाने और उन्हें इस्तेमाल करने वाले ही बता सकते हैं, मगर यह निरविवाद सच है कि खूबसूरती का खजाना हमारीआपकी रसोई में ही छिपा है.

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