संयुक्त राष्ट्र संघ यानी यूनाइटेड नेशंस और्गेनाइजेशन ने कोरोना के दौरान एक नए तरह की स्लेवरी यानी दासता के बारे में चेतावनी दी है. दासता, दरअसल, एक वायरस ही है.

यूएनओ का कहना है कि कोरोना संकट के भयानक आर्थिक व सामाजिक प्रभावों के चलते मुमकिन है कि मौडर्न स्लेवरी यानी आधुनिक दासता की समस्या बढ़ जाए. दासता कोई बीते जमाने की ही बात नहीं है, बल्कि यह आज भी दुनियाभर में कई रूपों में मौजूद है. अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन का कहना है कि दुनियाभर में लगभग 4 करोड़ लोग आज भी आधुनिक दासता के चंगुल में फंसे हुए हैं. बता दें कि जबरन मज़दूरी, क़र्ज़ के ज़रिए किसी को बांध लेना, जबरन विवाह और मानव तस्करी जैसे हालात को बयान करने के लिए आधुनिक दासता शब्द का इस्तेमाल किया जाता है.

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इस संदर्भ में संयुक्त राष्ट्र संघ के एक एक्सपर्ट टोमोया ओबोकाटा ने विश्व के विभिन्न देशों से मांग की है कि वे अपनी जनता के उस वर्ग पर विशेष ध्यान दें जिसे आधुनिक दासता का शिकार बनाया जा सकता है. चेतावनी दी गई है कि सरकारों  की लापरवाही की वजह से कोरोना के परिणाम और भी भयानक हो सकते हैं.

टोमोया ओबोकाटा ने कहा कि अगर सरकारों ने तत्काल क़दम नहीं उठाया तो बहुत अधिक लोगों को आधुनिक दासता का शिकार बना लिया जाएगा. जापान के इस विशेषज्ञ ने बताया कि कोरोना की वजह से दुनिया के अरबों लोगों का रोज़गार प्रभावित हुआ है लेकिन उसके भयानक परिणाम उन देशों के लोगों को अधिक भुगतने पड़ेंगे जहां की सरकारें लापरवाही बरतेंगी.

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