ऐश्वर्या राय बच्चन ने 4 साल के गैप के बाद फिल्म ‘जज्बा’ से फिर बौलीवुड में ऐंट्री की. यहां पेश हैं, पिछले दिनों उन से हुई बातचीत के खास अंश:

इतने साल फिल्मों से दूरी बनाए रखने की वजह?

मैं ने कोई दूरी नहीं बना रखी थी. बेटी की परवरिश के साथसाथ मैं विज्ञापन, ऐंडोर्समैंट व स्टेज शो करती रही. ‘जज्बा’ मेरी 4 साल बाद की पहली फिल्म है यह भी पता नहीं था, क्योंकि इस के पहले मैं ने मणिरत्नम की एक फिल्म साइन की थी, जिस की शुरुआत लेट हो गई. इसी बीच निर्देशक संजय गुप्ता ‘जज्बा’ फिल्म को ले कर मेरे पास आए. इस की कहानी ने मुझे ऐक्साइट किया, क्योंकि महिला को ले कर थ्रिलर फिल्में कम बनती हैं. फिर इस में यह संदेश भी था कि महिला शारीरिक रूप से कमजोर हो सकती है, पर दिल से स्ट्रौंग होती है. ये बातें जब इस फिल्म में दिखीं तो मैं ने हां कर दी और फिल्म बन कर रिलीज भी हो गई.

मैं शुरू से सैल्फमेड वूमन रही हूं. सारे काम खुद करती हूं. आराध्या के जन्म के बाद जब भी मैं ने काम किया, वह हमेशा मेरे आसपास रही. फिल्म ‘जज्बा’ की शूटिंग के दौरान भी वह मेरे साथ होती थी. लोग मुझ पर इस फिल्म के साथ कमबैक का टैग लगाते हैं, पर ऐसा है नहीं. दरअसल, मैं ने सोचा था कि आराध्या 6 महीने की होगी, तो फिल्म करूंगी. फिर उस के दांत निकलने का समय आया तो उस का साथ दिया. 1 साल बाद चलने लगी तो वह भी आकर्षक था. डेढ़ साल बाद उस की तोतली बोली शुरू हुई. मैं उसे मेड के पास नहीं रखना चाहती थी. उस के बड़े होने तक हर फेज को मैं ऐंजौय करती रही और अब वह 4 साल की होने वाली है.

आप एक प्राइवेट पर्सन हैं. इस में कितनी सचाई है?

मैं सोशल मीडिया पर ऐक्टिव नहीं, इसलिए कई बार अभिषेक के ट्विटर पर जा कर चाहने वालों को थैंक्स कह देती हूं. पर मैं प्राइवेट पर्सन नहीं. हां, यह जरूर है कि मैं काम के हिसाब से ही मीडिया से बातचीत करती हूं. मुझे काम और परिवार दोनों में तालमेल रखना पड़ता है. वैसे भी एक मां के लिए हर दिन नया होता है और हर दिन उस के पास बच्चे के लिए नया कमिटमैंट होता है.

गृहस्थी कैसी चल रही है?

अच्छी चल रही है. बच्चन परिवार की बहू हूं, इस से अच्छी बात और क्या होगी. मैं वर्कहौलिक हूं. बिना काम के नहीं रह सकती..

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