Impact of drugs on career : हम अपनी शर्तों पर जीना चाहते हैं. समय बहुत बदल गया है. हमारे मातापिता हमें हर वक्त रोकतेटोकते हैं. क्या हर समय हम उन के अनुसार अपना जीवन जीएंगे? अब हम बालिग हैं और यह हमारी जिंदगी है जिसे हम जैसे चाहें वैसे जीएं.
आजकल यह समस्या हर युवावर्ग की है कि कैसे इन बंदिशों से छुटकारा पाएं? निशा का कहना है कि आजकल की जैनरेशन पुरानी बातों में यकीं नहीं रखती है. शादी ही आखिरी विकल्प नहीं है. यदि हम अपने पार्टनर से खुश नहीं है तो तलाक ले सकते हैं. आजकल डेटिंग ऐप भी बने हैं. डेट करना बहुत नौर्मल सी बात है. हम किसी अनजान व्यक्ति के साथ अपनी जिंदगी नहीं गुजार सकते हैं इसीलिए डेट से एकदूसरे को समझना बहुत आसान हो जाता है.
सही बात है वक्त के साथ बदलना जरूरी है. मगर बढ़ते कदम कभी सार्थक सिद्ध होते हैं या फिर हमें गर्त में भी धकेल सकते हैं? जिसे हम मौजमौजमस्ती व अपनी जिंदगी का नाम दे रहे हैं क्या वह हमारे भविष्य के लिए सही दिशा निर्माण करेगी?
हमारे पेरैंट्स का हमें बारबार टोकना कि यह मत करो, ऐसे मत रहो हमें नागवार गुजरता है. आखिर वे समझते क्यों नहीं हैं कि वक्त बदल गया है. यह हमारे जीने का तरीका है क्योंकि हम उन बंधनों को नहीं मानते हैं जिन में उन्होंने अपना जीवन समझौता कर के गुजारा है. शायद यही जैनरेशन गैप है.
मादक पदार्थ का सेवन
समय के साथ हमें बदलना चाहिए लेकिन अपने बड़ों के अनुभव का लाभ लेने में कोई हरज नहीं है. आजकल सैक्स, ड्रग, ड्रिंक लेना बहुत आम बात हो गई है. यदि हम अपने दोस्तों की उन पार्टियों का हिस्सा नहीं बनते हैं तो वे हमें छोड़ देते हैं. सैक्स ड्रिंक और ड्रग आज के समय में हमारी पढ़ाई का हिस्सा बन गए हैं.
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