कंचन अवस्थी ने लखनऊ में गायकी से करियर की शुरुआत की थी. उस वक्त तक कंचन अवस्थी ने कभी नहीं सोचा था कि वह एक दिन अभिनय को अपना करियर बनाएंगी. मगर संयोग व उन्हें संत गाड़गे आडीटोरियम, लखनऊ में एक दिन नाटक ‘‘यहूदी की बेटी’’ में राहिल की भूमिका निभाना पड़ा और फिर उनके अभिनय करियर की शुरुआत हो गयी. उन्होंने ‘पिया परदेशी’, ‘त्रिया चरित्र’, ‘उपर की मंजिल खाली’, जयशंकर प्रसाद के नाटक ‘बनारस का गुंडा’ के साथ साथ सलीम आरिफ के निर्देशन में पृथ्वी थिएटर पर ‘‘चंपा की चिट्ठी’’ सहित कई नाटकों में अभिनय किया.

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