Mrunal Thakur : खूबसूरत, हंसमुख, विनम्र अभिनेत्री मृणाल ठाकुर महाराष्ट्र के धुले से है. उन्होंने हिंदी के अलावा मराठी फिल्मों और धारावाहिकों में भी अभिनय किया है. उन्होंने पहले टीवी शो ‘कुमकुम भाग्य’ में काम किया. ‘लव सोनिया’ फिल्म में उनकी भूमिका को आलोचकों ने काफी सराहा, जिसमें लड़कियों की तस्करी पर उनके साथ हुई दुर्दशा के बारें में दिखाने की कोशिश की गई थी. इस फिल्म को विदेश में कई पुरस्कार मिले और कई संस्थाए इस अभियान से जुड़कर लड़कियों को उद्धार करने का काम भी किया है.

मृणाल अभी भी कई संस्थाओं के साथ जुड़ी है. मृणाल को बचपन से ही फिल्में देखना और उसके बारें में सोचना अच्छा लगता था, लेकिन कभी अभिनेत्री बनने के बारें में नहीं सोचा था. उनकी रूचि खेल में भी थी, वह एक एथलीट भी रही है. उनकी फिल्म ‘दो दीवाने सहर में’ रिलीज हो चुकी है, जिसने काफी अच्छा व्यवसाय नहीं किया, लेकिन मृणाल के अभिनय को दर्शकों ने पसंद किया. यह एक शहरी प्रेम कहानी है, इस फिल्म का संगीत भी लोगों को पसंद आया है.

मृणाल ने अपनी जर्नी के बारें में बात की पेश है कुछ खास अंश.

फिल्म में मृणाल ने एक इनसिक्योर लड़की की भूमिका निभाई है और रियल लाइफ में भी कई बार उन्होंने असुरक्षित महसूस किया है, वह कहती है कि मैँने कई बार स्कूल के दिनों में किसी प्रश्न का जवाब आने पर भी हाथ ऊपर कर इसका जवाब नहीं दे पाती थी, क्योंकि मेरी भाषा उसमें बड़ी अड़चन थी, जिसमें मराठी एकसेन्ट आते थे और मेरा नाम भी यूनिसेक्स के अंदर आता है, जिससे काफी लड़के इसे लेकर मज़ाक उड़ाते थे और कहते थे कि ये लड़के का नाम है. इसके अलावा जब मैँ इंडस्ट्री में आई थी तब भी मेरे एकसेन्ट को लेकर मुझे कई बार असुरकक्षा की भावना पैदा हुई. अब ये लगता है कि जब आप खुद इन चीजों को महत्व देने लगते है, तब ये असुरक्षा की भावना बढ़ती है, नहीं तो सब ठीक ही रहता है.

मुंबई मेरे लिए है खास.

हालांकि मृणाल महाराष्ट्र के धुले से है और अब मुंबई में रह रही है, पर उन्हे ये शहर बहुत पसंद है. उनका कहना है कि मैँ स्कूटी चलाती हूं और इस फिल्म को करते हुए मैंने पूरी मुंबई की सैर किया और नजदीक से फ़ील किया है. ये शहर हर सिटी से अलग है. यहाँ से अगर मैँ कही बाहर जाती हूं, तो यहाँ जल्दी पहुचने की इच्छा होती रहती है, ये वाकई मायानगरी है और हर किसी को खुद से बांधे रखती है.

संघर्ष हमेशा रहती है

मृणाल कहती हैं कि जब आप इंडस्ट्री में काम करते हैं तो दूर से सबको लगता है कि कलाकारों की जिंदगी बहुत खूबसूरत होती है, सब आसानी से उन्हे मिल जाता है, जबकि ऐसा नहीं होता. किसी अच्छे काम के लिए हमेशा संघर्ष करना पड़ता है. मैं खूबसूरत हूं इतना एक कलाकार के लिए काफी नहीं होता, इसके साथसाथ कई सारी चीजें होती है, जो एक अच्छे काम के लिए जरूरी होता है. मैं कभी सोचती हूं कि शायद मैं एक नैर्मल लड़की की तरह होती, तो अच्छा होता, क्योंकि मैं अपने परिवार के साथ कही भी घूमने जा नहीं सकती. मुझे याद आता है कि किसी की फ्यूनरल में मुझे जाना था, लेकिन मैं नहीं जा पाई, क्योंकि वहाँ कैमरा रहता है और मैँ कैमरे के आगे इस अवस्था में नहीं रहना चाहती थी. मेरी विश है कि मैं भी अपने परिवार के साथ एक नॉर्मल लड़की की तरह रह पाती, तो बहुत अच्छा होता, जिसे मैँ मिस करती हूं.
खूबसूरती केवल चहरे से नहीं कई सारी चीजों से आती है.

स्टार से अधिक पहचान

मृणाल ने कई बड़ेबड़े कलाकारों के साथ काम किया है और कुछ हद तक सफल रही. इसमें उन्होंने संजय लीला भंसाली की फिल्म में काम किया और बहुत खुश है, क्योंकि हर एक्ट्रेस को उनकी फिल्म में काम करने की इच्छा होती है, जिसका मौका उन्हे मिला. वह कहती है कि किसी बड़े स्टार के साथ काम करने पर बहुत सारी बातें सीखने को मिलती है, जिससे आप अभिनय में बारीकियों को सीख सकते है. इसमें मैंने संजय लीला भंसाली की फिल्म में काम किया है, जो इंडस्ट्री के एक मास्टर है. जब मैं घर जाती हूं तो ये फ़ील होता है कि मैँ भंसाली की हीरोइन बन चुकी हूं.

मेरे लिए सफलता सबकी राय या सोच से अधिक मेरी जर्नी है, जिसे मैंने अगर ख़ुशी से बिताई है, तो मैं सफल हूँ. इसके अलावा मैं हम्बल और ग्राउंडेड रहना पसंद करती हूं. मैं स्टार बनना नहीं चाहती, लेकिन मैं अपनी भूमिका से पहचानी जाने की कोशिश करती हूं. सफलता से अधिक मैँ किसी फिल्म की प्रोसेस को पसंद करती हूं. मैं पिता की पुत्री बनकर घर में रहना चाहती हूं. सफलता मुझे कभी बदल नहीं सकती.

स्टार फैक्टर का बदला है रूप

स्टार फैक्टर के खत्म हो जाने को लेकर मृणाल का कहना है कि स्टार कही गया नहीं है. मेरे एक फिल्म की एक बड़ी पोस्टर अमेरिका के न्यूयार्क टाइम स्कवायर पर लगाया गया था. किसी भी कलाकार का एक सपना होता है कि उसकी फोटो टाइम स्क्वायर पर लगे. पहले स्टार फैक्टर को मनाने का तरीका अलग था, मसलन रेड कार्पेट पर स्टार अपना हाथ हिलाते हुए जाता था, लेकिन आज ये छोटी सी मोबाइल फ़ोन ही बहुत बड़ा हथियार है. सोशल मीडिया पर सब अपनी प्रतिक्रिया देते है. चीजें पहले से बदल चुकी है, इसे सकारात्मक रूप में लिया जाना चाहिए. मैं एक ऐसी एक्ट्रेस हूँ जिसने हॉलीवुड फिल्म से काम शुरू किया था और मैं खुद को एक स्टार ही समझने का प्रयास करती हूँ.

टीवी से फिल्मों में आने का दौर

टीवी से फिल्मों में मृणाल के लिए आना आसान नहीं था, इस जर्नी में बहुतों ने उन्हे कहा कि वह फिल्म नहीं कर पाएगी. ये उनके लिए एक चुनौती थी, जिसे उन्होंने साकार किया. इसमें उनके पेरेंट्स और दोस्तों ने हमेशा साथ दिया और प्रेरणा देते रहे. अस दौरान उनके पिता ने कहा था कि फिल्में अगर करनी है, तो पूरी तरह से उसमें रम जाओं, क्योंकि लड़कियों के जीवन में बाधाये बहुत आती है, जैसे कभी उम्र का निकल जाना, जल्दी शादी हो जाना, जिम्मेदारी बढ़ जाना, वित्तीय प्रेशर पड़ जाना आदि होता है, ऐसे में महिला की ड्रीम अधूरी रह जाती है.

फैशन है पसंद

मृणाल अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा और रेहाना के फैशन सेंस से बहुत प्रभावित है, क्योंकि वे जो भी पहनती है, स्टाइलिस्ट लगती है. फैशन डिज़ाइनर में तानिया, आस्था, देवकी आदि ऐसे कई डिज़ाइनर है, जिनकी पोशाक उन्हे पहनना पसंद है, क्योंकि वह मृणाल को सूट करती है.

सही पार्टनर का होना शादी के लिए जरूरी

हालांकि उनकी फिल्म अधिक नहीं चली, लेकिन इस फिल्म में प्यार की गहराई को बताने की कोशिश की गई. आजकल के यूथ का मैरिज को लेकर रुझान कम होने के बारें में मृणाल बताती है कि विवाह सभी को करना चाहिए, लेकिन आज की जेनरेशन का प्यार सोशल मीडिया है और सही प्यार को वे खो चुके है, जो बहुत जरूरी है.

इसके अलावा शादी के लिए एक सही पर्सन का होना जरूरी होता है, क्योंकि पहले लड़कियों के लिए आदर्श शादी की उम्र 18 वर्ष से 23 और लड़कों 21 से 24 होता था, लेकिन आज ये बदल चुका है. मुझे शादी एक ऐसे के साथ करनी है, जो मेरी हर बात को माने, आगे बढ़ने में मदद करें, मेरी कमी को भी अपनाए, तभी मैँ उनके साथ पूरी जिंदगी खुश रह सकती हूं. सभी को शादी आज सोच समझ कर धीरज के साथ करना आवश्यक है. मेरे लिए सही पर्सन वही होगा, जिसमें लीडरशिप क्वालिटी हो, दोनों परिवारों को साथ लेकर चले और मेरी कला को आगे बढ़ने में मदद करें.

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