सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन पर ‘इंडिया वाला डांस’ का जश्न मनाने वाले ‘इंडियाज बेस्ट डांसर सीजन 5’ के आगामी एपिसोड में एक बेहद भावुक और यादों से भरा पल देखने को मिला.इस एपिसोड में माधुरी अपनी फिल्म ‘मां बहन’ को प्रमोट करने पहुंची , उसी दौरान जब माधुरी ने अपने जीवन और करियर का जश्न मनाने वाला एक विशेष वीडियो देखा तो उनको अपने बचपन, पारिवारिक मूल्यों और स्टारडम की यादें ताजा हो गई अपने उस सफर को याद कर माधुरी भावुक हो गईं, और उसी इमोशनल छड़ों को याद करते हुए माधुरी ने मुंबई के अपने पुराने घर जो जेबी नगर में था , वहां अपने बीते दिनों की दिल छू लेने वाली यादें साझा कीं. उन्होंने वहां के करीबी माहौल, छोटी-छोटी खुशियों और उन सीखों के बारे में बात की जो आज भी जीवन के प्रति उनके दृष्टिकोण को आकार देती हैं.शो के होस्ट हर्ष लिम्बाचिया के उनके सफर को याद करने के अनुरोध पर, माधुरी ने सबसे पहले उस गर्मजोशी और अपनेपन को याद किया जिसने उनके बचपन के पड़ोस को परिभाषित किया था.
माधुरी के अनुसार आज सब लोग अपना ज्यादा से ज्यादा समय मोबाइल पर निकालते है लेकिन हम बचपन में पड़ोसियों के घर में ही धमाल मस्ती किया करते थे उस दौरान से जुड़ी कई पुरानी यादें है
क्योंकि मैं उनके साथ ही पली बढ़ी हूँ. वो हमारे फैमिली मेंबर जैसे थे ..किसी के घर में खाना खाना है, हमारे घर में आ जाते थे.हम बच्चे किसी के घर में चले जाते थे, उस वक्त हम कहते नहीं डरते थे कि ‘आंटी, आप पकोड़े बनाइये, आपके बनाए पकोड़े बहुत पसंद हैं हमें.’ वो जो रिलेशनशिप्स थे, अमेजिंग थे. आज वह सब कुछ नहीं मिलता आज हम ऐसे घरों में रहते हैं जहां पता भी नहीं होता आपके पड़ोस में कौन हैं. तब एक फैमिली जैसा एटमॉस्फियर था जेबी नगर में, वो बहुत कमाल का था. बच्चे साथ खेलते भी थे, पिटते भी थे साथ में सब लोग इट वास अमेजिंग”
अपने बचपन के बेफिक्र दिनों को याद करते हुए, माधुरी ने सबसे साधारण चीजों में खुशी ढूंढने और बड़े होने के दौरान उनके आस-पास मौजूद कम्युनिटी की मजबूत भावना के बारे में बात की.साथ ही ये भी कहा उस वक्त, “कुछ था नहीं ज्यादा हमारे पास, लेकिन खुशी बहुत थी तब भी बोहत जोश था हममे ,एक बिल्डिंग में बारह-तेरह बच्चे थे, साथ में दूसरी बिल्डिंग में से सब मिला के तीस बच्चे एक साथ खेलते थे.मम्मी को पता भी नहीं था हम लोग सब कहां हैं. डांट पड़ती थी घर आके, ‘कहां चले जाते हो, बताते भी नहीं हो.आज मै देखती हूं घर के सदस्यों को भी आपस में बात करने के लिए टाइम नहीं होता.
माधुरी ने अपने डांस कैरियर को साझा करते हुए बताया डांस मैंने तब शुरू किया जब मैं तीन साल की थी, वहीं पे जेबी नगर में डांस स्कूल था.मेरी पहली फिल्म जब रिलीज हुई, अबोध, तब भी हम वहां जेबी नगर में ही थे ,लेकिन जब तेजाब रिलीज हुई तो तेजाब के बाद फिर हम लोग निकले वहां से, क्योंकि वहां सिक्योरिटी नहीं थी, तो फिर बाद में मुश्किल होने लगी.
एक बेहद निजी नोट पर बात समाप्त करते हुए, माधुरी ने समझाया कि उनका पालन-पोषण आज भी सफलता, खुशी और खुद जीवन को देखने के उनके नजरिए को कैसे प्रभावित करता है. माधुरी अपने बचपन के दिनों वाले पहले घर को आज भी नहीं भूली है. वो कहती है , आज भी मैं जेबी नगर के अपने पुराने घर के बारे में सोचती हूं, तो खुशी की एक फीलिंग आती है, एक स्माइल आ जाती है चेहरे पर ,मै कभी नहीं भूली कि मैं लोअर मिडिल क्लास फैमिली से जुड़ी हुई थी लेकिन फिर भी हमको जो ख़ुशी वहां मिलती थी वैसी कभी नहीं मिली.मुझे हमेशा लोग पूछते हैं कि इतनी सफलता के बावजूद आप इतने डाउन टू अर्थ और खुश कैसे हैं?’ उनसे मैंने बोला कि मुझे पता है कि कुछ नहीं हो तो भी यू कैन बी हैप्पी। और आज है सब कुछ तो खुश हैं, तो खुशी है, लेकिन नहीं है भी तो क्या है उसमें?
खुशी तो अपने ऊपर होती है. वी शुड ऑलवेज बी हैप्पी, ऑलवेज बी रिस्पेक्टफुल एंड ऑलवेज एन्जॉय लाइफ. डोंट चेंज एनीथिंग एल्स. माधुरी दीक्षित की ये बात इस बात की याद दिलाती है कि सच्ची खुशी भौतिक सफलता से नहीं, बल्कि उन रिश्तों, मूल्यों और यादों से मिलती है जो जीवन भर हमारे साथ रहते हैं.
