Adah Sharma interview : खूबसूरत, चुलबुली, हंसमुख अभिनेत्री अदा शर्मा से आज कोई अपरिचित नहीं. उन्होंने मुख्यरूप से हिंदी और तेलुगु फिल्मों में काम किया है. 2008 की हारर फिल्म ‘1920’ से बौैलीवुड में डेब्यू करने वाली अदा ने ‘हंसी तो फंसी,’ ‘कमांडो’ और ‘द केरल स्टोरी’ जैसी सफल फिल्मों में अभिनय किया. इस के अलावा उन्होंने टीवी शो, शौर्ट फिल्म्स, वैब सीरीज आदि सभी में अभिनय किया है.
मुंबई में जन्मी और पलीबढ़ी अदा एक प्रशिक्षित कथक डांसर और जिमनास्ट भी हैं. उन के पिता एस. एल. शर्मा मर्चेंट नेवी में कैप्टन थे और मां शीला शर्मा एक शास्त्रीय नृत्यांगना हैं. मात्र 16 साल की उम्र में अदा ने विक्रम भट्ट की फिल्म ‘1920’ से बौलीवुड में अपने अभिनय कैरियर की शुरुआत की, जिसे आलोचकों ने काफी पसंद किया.
अदा शर्मा का मूल नाम चामुंडेश्वरी अय्यर है, जिसे उच्चारण में कठिनाई के चलते उन्होंने बदल कर अदा शर्मा कर लिया ताकि सब को बोलने में आसानी रहे. अदा ने बचपन से गृहशोभा को घर में आते हुए देखा है क्योंकि उन की नानी बहुत पढ़ती थीं. अदा ने खास बातचीत के दौरान बताया कि गौडफादर न होने की वजह से उन्होंने कैसे अपनी जर्नी तय की और यहां तक पहुंची हैं.
टर्निंग पौइंट
फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ के हिट होने को वे अपने जीवन का टर्निंग पौइंट मानती हैं और आज उन के पास कई प्रोजैक्ट हैं. अभी अदा कान्हा रिजर्व फौरेस्ट में हैं और किसी प्रोजैक्ट पर काम कर रही हैं. वे कहती हैं, ‘‘अभी मैं 2-3 मूवी कर रही हूं, जिन में 2 ऐक्शन मूवी हैं और एक हारर मूवी है. सब की शूटिंग चल रही है. इन दिनों मैं कान्हा फौरेस्ट में हूं क्योंकि मैं मध्य प्रदेश के फौरेस्ट डिपार्टमैंट के साथ ‘कंजर्वेशन औफ टाइगर’ के लिए काम कर रही हूं. यहां रहने वाले फौरेस्ट औफिशियल्स के बच्चों को फौरेस्ट कंजर्व के बारे में सिखाया जाता है ताकि उन का लगाव नेचर से हो सके. इसलिए मैं सब के साथ अभी कैंप में हूं.’’
पसंद एक्शन फिल्म्स
अदा कहती हैं, ‘‘मेरी एक्शन फिल्म करने की काफी दिनों से इच्छा थी. मैं जिमनास्ट हूं तो मुझे ऐसी फिल्मों को करने में मजा आता है. इस में मुझे एक्शन की शूटिंग के बारे में कोरियोग्राफी सीखनी पड़ी है क्योंकि जिस व्यक्ति के साथ एक्शन सीन करते हैं उस के साथ बारबार मारने की प्रैक्टिस करनी पड़ती है क्योंकि जब आप रियल में मारते हैं तो उस व्यक्ति को चोट लगती है लेकिन फिल्म में एक्शन करते हुए उस व्यक्ति को लगना नहीं चाहिए ताकि सैट पर किसी प्रकार की इंजरी न हो. ऐसे में एक सैंटीमीटर की दूरी से वह पंच जानी चाहिए और औडियंस को लगना चाहिए कि मैं ने उन्हें मारा है. इस में बारबार उसे मिस करने की प्रैक्टिस करनी पड़ती है जबकि रियल लाइफ में मारने की प्रैक्टिस की जाती है.’’
मिली प्रेरणा
ऐक्टिंग में आने के बारे में मिली प्रेरणा के बारे में पूछे जाने पर अदा कहती हैं, ‘‘मेरे परिवार में सभी ऐकैडेमिक फील्ड से है, मेरी मां ने कैमिस्ट्री में मास्टर किया है, मेरे परिवार में सभी अच्छे पढ़ेलिखे हैं. दूरदूर तक किसी ने ऐक्टिंग फील्ड में कुछ भी नहीं किया है. मैं फिल्में बहुत देखती थी और वहीं से मेरे अंदर इस क्षेत्र में आने की प्रेरणा जगी. उस दौरान फिल्मों के बारे में कोई आइडिया नहीं था, लेकिन इसे करने की इच्छा थी.
‘‘जब मैं स्कूल में थी और मेरा ऐन्युअल फंक्शन था, वहां मैं ने कथक डांस की परफौर्मैंस दी थी. वहां अभिनेत्री आशा पारेख आई हुई थीं. वहां उन के मैनेजर ने मुझ से कहा था कि मुझे कोई डांस वाली फिल्म करनी चाहिए जो मुझे अच्छा लगा था. हालांकि मैं आउटसाइडर हूं लेकिन मैं इतना चाहती थी कि मैं जो भी फिल्म करूं उस में मेरी भूमिका अच्छी हो. उसी दौरान मुझे ‘1920’ फिल्म का औडिशन देने का मौका मिला. मुझे पता था कि मैं चुन ली जाऊंगी और वैसा हुआ भी. पहली फिल्म आसानी से मिल गई, जहां मैं ऐक्टिंग को प्रूव कर सकूं.’’
हुआ कैरियर शुरू
अदा का कहना है, ‘‘मैं ने अपने कैरियर की शुरुआत हारर फिल्म ‘1920’ से की है. शौर्ट फिल्म मैं ने बाद में की. मेरी पहली फिल्म को दर्शकों ने बहुत पसंद किया. आज भी लोग उस हारर फिल्म को याद करते हैं. मुझे तब फिल्म्स के बारे में कुछ भी पता नहीं था. अगर पता होता तो शायद मैं इस फिल्म को नहीं करती क्योंकि यह फिल्म कठिन थी. मु?ो ऐक्टिंग आती है क्योंकि मैं ने थिएटर में अभिनय किया था लेकिन कैमरे के आगे काम करना सहज नहीं होता. मैं उस दौरान डांस में भी ग्रैजुएशन कर रही थी लेकिन सैट का माहौल बहुत अलग होता है. आउटसाइडर को इंडस्ट्री में फिट होने में बहुत समय लगता है.’’
रहा संघर्ष
अदा कहती हैं, ‘‘बिना गौडफादर के चुनौतियां यहां अनगिनत होती हैं. जब मैं छोटी थी तो बिना समझे इस क्षेत्र में आ गई थी, फिर धीरेधीरे सारी बातें समझ में आईं. आज की ऐक्ट्रैस को सारी बातें शुरू से पता रहती हैं, कौन कितना सही है या गलत वे आसानी से समझ जाते हैं. आजकल दर्शकों को भी हर बात पता चल जाती है. सोशल मीडिया के इस दौर में आप कुछ भी किसी से छिपा नहीं सकते. इंडस्ट्री में कामयाबी के लिए सिर्फ टेलैंट नहीं, बहुत सारी दूसरी चीजों की भी जानकारी होनी चाहिए जो मेरे पास नहीं थी. धीरेधीरे मुझे अच्छा काम मिला है. असल में मेरी नैटवर्किंग स्किल्स जीरो है. मैं अधिक बाहर नहीं निकलती, लोगों से अधिक सोशलाइज नहीं करती, इस से मुझे काम मिलना मुश्किल हुआ.
‘‘इस के अलावा इंडस्ट्री में अगर आप आउटसाइडर हैं तो एक फिल्म के हिट होने पर भी आप को अधिक काम मिले यह जरूरी नहीं होता लेकिन साउथ की फिल्मों में भी काम करने का मौका मिला और कई फिल्में को दर्शकों ने पसंद भी किया. मुझे अधिकतर रुकरुक कर अभिनय करने का अवसर मिला है क्योंकि यहां कोई आप के लिए फिल्म बनाने के लिए तैयार नहीं बैठा है लेकिन इतना सबकुछ होने के बावजूद मुझे ‘द केरल स्टोरी’ जैसी फिल्म में काम करने का अवसर मिला. यह फिल्म पूरी दुनिया में देखी और सराही गई और मैं इस से बहुत खुश हूं कि मुझे इस में अभिनय करने के लिए निर्माता, निर्देशक का विश्वास भी रहा है.’’

परिवार का सहयोग
अदा के परिवार को इस फील्ड की कोई जानकारी नहीं थी, इसलिए अदा के एक बार कहने पर उन्होंने हामी भर दी. वे कहती हैं, ‘‘शुरू में मेरे परिवार वाले ऐक्टिंग में आने के लिए मुझे फोटो निकलवाने के लिए एक फोटोग्राफर के पास ले गए. उन्होंने इतना अधिक मेकअप मेरे चेहरे पर लगा दिया कि किसी को मुझे पहचानना मुश्किल हो रहा था. पूरा आईशैडो, नकली आईलैशेज, लिपलाइनर के साथ उन्होंने मेरी काली आईब्रोज को इतना अधिक डार्क कर ऐसा बना दिया कि मैं अजीब लगने लगी. खतरनाक फोटोज थे और मैं ने उन्हीं पिक्चर्स को सभी जगह भेज दिया. बाद में जब मैं उन लोगों से मिलती थी तो वे कहते थे कि आप रियल में इतने सुंदर दिखते हो, आप के फोटो आप को जस्टिस नहीं करते.
‘‘मुझे तब पता नहीं था क्योंकि सभी ने कहा कि हीरोइन के लिए इतना मेकअप करना पड़ेगा, तब समझ नहीं थी. इस के अलावा मैं ने अपना नाम भी बदला क्योंकि इंडस्ट्री के लिए इतना बड़ा नाम सही नहीं. फिर मैं ने चामुंडेश्वरी से अदा नाम रखा. पहले मेरी समझ कम थी जो लोग कहते थे, मैं सुन लेती थी. फिर मुझे पता चला कि हर व्यक्ति की जर्नी अलग होती है. किसी एक की सफलता को मैं फौलो नहीं कर सकती. मैं ने अपना डेब्यू हारर फिल्म से किया है जबकि किसी हीरोइन ने ऐसा नहीं किया है. ‘द केरला स्टोरी’ एक छोटे बजट की नए डाइरैक्टर की थी, जिसे कामयाबी मिली. इस का अर्थ यह हुआ कि सही कहानी और सही निर्देशन ही किसी फिल्म को सफल बना सकता है.
‘‘‘द केरला स्टोरी’ के बाद मुझे कई फिल्मों में काम करने का अवसर मिला. ‘रीता सान्याल,’ ‘सनफ्लावर’ आदि कई वैब सीरीज की हैं. इस के बाद ‘कमांडो 2’ और ‘बस्तर द नक्सल स्टोरी’ भी कीं. मेरे हिसाब से फिल्म बड़ी हो या छोटी, उस में मेरी भूमिका बड़ी हो और लोग मेरी भूमिका को पसंद करें, वह मेरे लिए बड़ी फिल्म हो जाती है.’’
किसी को पहचानना है मुश्किल
किसी फिल्म को चुनते समय अदा उस की स्क्रिप्ट सुनती हैं, अपनी भूमिका देखती हैं और देखती हैं कि वे जिस इंसान के साथ काम करने जा रही हैं, उस के साथ वे 3 महीने सुकून से काम कर सकती हैं या नहीं. अगर वह व्यक्ति उन्हें ठीक नहीं लगता तो फिल्म की स्क्रिप्ट कितनी भी अच्छी हो वे मना कर देती हैं. वे किसी कन्फ्यूज्ड इंसान के साथ काम करना पसंद नहीं करतीं.
अदा कहती हैं, ‘‘इंडस्ट्री से न होने पर किसी भी सही इंसान को पहचानना मुश्किल होता है. इंट्यूशन के सहारे आगे बढ़ना पड़ता है. मुझे ऐसे बहुत सिरफिरे लोग मिले हैं, जिन की वजह से समय बरबाद हुआ है. स्क्रिप्ट और औडिशन के बाद पता चलता है कि यह प्रोड्यूसर नहीं है. अच्छी बात यह है कि मैं मुंबई में अपने पेरैंट्स के साथ रहती हूं और इस का असर मुझ पर नहीं पड़ा. अब मैं इंडस्ट्री को समझ चुकी हूं लेकिन ऐसे लोगों से मिलने से फायदा यह हुआ कि मैं ने ऐसे किसी भी किरदार को नजदीक से देखा है और मैं निकम्मे, आलसी, झूठे लोगों की भूमिका को अच्छी तरह से कर सकती हूं. मुझे संतुष्टि फिल्मों से नहीं बल्कि भूमिका की सजीवता से आती है, जिसे दर्शक पसंद करें. मुझे जो रोल मिलता है उसे मैं सौ प्रतिशत कंमिटमैंट के साथ करती हूं.’’
मिली मायूसी
अदा कहती हैं, ‘‘मैं जब भी औडिशन देती थी, लगता था कि फिल्म मिल जाएगी लेकिन नहीं मिली, ऐसा कई बार हुआ. पहले 10 में शौर्ट लिस्ट, फिर 5 में 1, 3 में 1, 2 में 1, ऐसा करतेकरते आशाएं बढ़ती जाती हैं, डेट भी ब्लौक कर दी जाती हैं. फोन आता है कि डाइरैक्टर बाहर हैं, आ कर बताएंगे, ऐसे होप का पारा काफी ऊपर चढ़ जाता है. अंतिम औडिशन के लिए बुलाया जाता है. अंत में बताते हैं कि आप की आईब्रोज डाइरैक्टर को जमी नहीं, दूसरी लड़की को ले लिया. इस प्रकार 4 महीने से आप केवल आशा लगा कर बैठे रहे. ऐसे हर बार कुछ अजीब चीज लास्ट मिनट में मुझे सुनने को मिली है. रिजैक्शन होतेहोते आप को मायूसी को ऐक्सपीरिएंस करने का मौका मिलता है.
‘‘हर बार डिप्रैशन से टच हो कर आप वापस आते हैं लेकिन यह बाद में काम आता है, आप मजबूत बनते हैं. एक अच्छा ऐक्टर बनने के लिए आप को दर्द से हो कर गुजरना जरूरी होता है. रिजैक्शन की वजह से मैं कई बार रोई लेकिन एक दिन बाद ठीक हो गई क्योंकि एक नया प्रोजैक्ट आ गया. मैं ने तेलुगु और हिंदी दोनों भाषाओं में फिल्मों में काम किया है, दोनों में कोई अंतर नहीं, सिर्फ डाइरैक्टर का सही होना जरूरी होता है.’’
व्यवासायिक मानसिकता
फिल्मों की कहानियां एकजैसी होने की वजह के बारे में अदा कहती हैं, ‘‘अगर एक मारधाड़ वाली फिल्म चली तो लोग वैसी ही कई बना लेती हैं, लव स्टोरी चली तो वैसी कई बन जाएंगी. यह व्यवसाय है, इसलिए सभी सेफ चलना चाहते हैं, फ्लौप होने के बाद कुछ दूसरा सोचते हैं. इस में दर्शक ही सब से बड़े निर्णायक होते हैं. मुझे अच्छी, खराब सब फिल्में देखना पसंद है ताकि पता चले कि खराब फिल्म में कमी क्या थी.’’
इंटीमेट सीन्स
स्क्रिप्ट के हिसाब से इंटीमेट सीन्स करना अदा के लिए मुश्किल नहीं और एक कलाकार होने के नाते खुद को किसी दायरे में बांधना पसंद नहीं करतीं. फ्रंटल न्यूडिटी में अदा कभी भी कंफर्टेबल नहीं.
फैशन है पसंद
‘‘मुझे फैशन बहुत पसंद है खासकर मूवी में हर भूमिका में अलगअलग पोशाक पसंद होती है. रियल लाइफ में सस्टेनेबल कपड़े पहनना पसंद करती हूं. इस के अलावा मैं जानवरों के चमड़े से बनी हुई चीजें न पहनूं और न ही कैरी करूं क्योंकि सांप हो या मगरमच्छ उन्हें बहुत टौर्चर कर उन की स्किन उतारी जाती है और फैशन के नाम पर चीजें बनाई जाती हैं. नैचुरल चीजें मैं अधिक पहनती हूं ताकि नौर्मल लोग उन्हीं चीजों पर फोकस करें. मैं वैजिटेरियन हूं और अधिक फूडी नहीं. मां के हाथ का बनाई हुई इडली, सांबर, दोसा, खिचड़ी आदि बहुत पसंद हैं.’’
प्यार की परिभाषा
प्यार की परिभाषा के बारे में पूछे जाने पर अदा हंसती हुई कहती हैं, ‘‘आज मैं जंगल में हूं और एक शेर को नजदीक से देखा है. मुझे उस से प्यार हो गया है. मुझे ऐसी फीलिंग आई जैसा लोग सैलिब्रिटी के साथ फोटो खिंचवाने के लिए आतुर होते हैं, वैसा ही मैं शेर के साथ फोटो खिंचवाने को आतुर हो रही थी. मेरे सपनों का राजकुमार सपनों में रहे तो ही अच्छा रहेगा क्योंकि वह राजकुमार बन कर आजीवन सपनों में रह सकता है. रियल लाइफ में सपनों का राजकुमार अधिकतर शैतान सा बन जाता है.’’
