फिल्म: स्टूडेंट आफ द ईयर-2

निर्देशक: पुनीत मल्होत्रा

कलाकार: टाइगर श्रौफ, अनन्या पांडे और तारा सुतारिया

रेटिंग: दो स्टार

कहानीः

फिल्म की कहानी शुरू होती है कौलेज के नए सत्र के प्रारंभ होने से. पिछले 12 सालों से एक साथ पढ़ रहे रोहन सचदेव (टाइगर श्राफ) और मृदुला चावला (तारा सुतारिया) अब अलग-अलग कौलेज में हैं. मृदुला ने पिता के पैसे की बदौलत सेंट टेरीसा कौलेज में प्रवेश पा लिया है. उसने अपना नाम बदलकर मिया कर लिया है. उसका मानना है कि उसके अपने सपने हैं, जिन्हे वह अपने तरीके से पूरा करना चाहती है. इसलिए वह रोहन को अपनी जिंदगी से अलग कर देती है. वह सिर्फ अपने बारे में सोचती है, जबकि रोहन उसे अपनी प्रेमिका मानता है और मृदुला को पाने के लिए वह भी पिरोसी कौलेज की बजाय सेंट टेरीसा कौलेज में ही पढ़ना चाहता है. पर गरीब ज्योतिषी के बेटे रोहन के पास इतना पैसा नहीं है. लेकिन स्पोटर्स कोटे में रोहन को सेंट टेरीसा कौलेज में प्रवेश मिल जाता है. इस कौलेज में कौलेज के ट्रस्टी का बेटा मानव रंधावा (आदित्य सील) और उसकी बहन श्रेया रंधावा (अनन्या पांडे) भी पढ़ती हैं. मानव रंधावा बहुत मीठा बोलता हैं, मगर गुस्सैल और दूसरों का बुरा करना उसका स्वभाव है. उसने कौलेज में अपने दोस्तो की एक टीम बना रखी है. रेस और कबड्डी में उसी की जीत होती है. वह पिछले दो साल से रेस और कबड्डी में जीत हासिल करने के अलावा स्टूडेंट आफ द ईअर की ट्राफी भी जीतता आया है. जबकि उसकी बहन श्रेया डांस में नाम कमाना चाहती है. कौलेज की पहली रेस प्रतियोगिता में जब रोहन, मानव को हरा देता है. तो मानव उसे अपमानित कर कौलेज से बाहर करने के लिए व्यूह रचना करते हुए मिया के साथ प्यार का नाटक करता है. मानव के कहने पर मिया एक डांस कौम्पटीशन में रोहन की पार्टनर बन जाती है. स्टेज पर अंत में मिया ऐसा नाटक करती है कि रोहन हार जाता है और मानव और उसकी बहन श्रेया की जीत होती है. पर रात में जब रोहन, मिया के घर जाता है, तो सच उसके सामने आ जाता है. वह मानव और मिया को प्यार में खोए हुए पाता है. गुस्से में वह मानव को थप्पड़ जड़ देता है, जिसकी शिकायत कर मानव, रोहन को कौलेज से निकलवा देता है और कौलेज के साथियों की मदद से रोहन की पिटाई भी करता है. अब रोहन की जिंदगी का एक ही मकसद है ‘स्टूडेंट आफ द ईअर’ की ट्राफी हासिल करना और वो ये कैसे करता है यहीं फिल्म की बाकी कहानी है.

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बेदम कहानीः

‘स्टूडेंट आफ द ईअर’ की ही तरह ‘स्टूडेंट आफ द ईअर 2’ में भी त्रिकोणीय प्रेम कहानी है. मगर प्रेम कहानी ठीक से उभर नही पाती. जिस टीनएजर रोमांस को देखने की आस में युवा पीढ़ी सिनेमाघर जाएगी, उसे कुछ नही मिलने वाला.

निर्देशनः

बतौर निर्देशक पुनीत मल्होत्रा एक बार फिर मात खा गए. पुनीत मल्होत्रा ने इससे पहले 2013 में ‘गोरी तेरे प्यार में’ जैसी असफल फिल्म का निर्देशन कर चुके हैं. फिल्म ‘‘स्टूडेंट आफ द ईअर 2’ देखकर कहीं से यह अहसास नही होता कि पुनीत मल्होत्रा ने अपनी पिछली फिल्म की असफलता से कोई सबक सीखा है. टाइगर श्राफ हीरो है, इसलिए मार्शल आर्ट होना चाहिए, अब एक्शन में कहीं मार्शल आर्ट नहीं आया, तो कबड्डी के खेल में सिनेमाई स्वतंत्रता के नाम पर मार्शल आर्ट को पिरोकर कबड्डी के खेल का मजाक बनाकर रख दिया गया. हकीकत में लेखक व निर्देशक दोनो बुरी तरह से कन्फ्यूज्ड नजर आते हैं. इतना ही नहीं फिल्म देखते समय लोगों को बार-बार आमिर खान की फिल्म ‘‘जो जीता वही सिकंदर’ की याद आती है.

डिजायनर कपड़े पहने हुए सेक्सी लड़कियां, महंगी गाड़ियां, रंग-बिरंगा कौलेज देखने की चाहत वाले शायद इसे पसंद करें. कौमेडी सीन भी हंसाने में कामयाब नहीं होते. सच तो यह है कि कौमेडी के नाम पर फूहड़ता परोसी गयी है.

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अभिनयः    

टाइगर श्राफ ने अपने आपको दोहराने के अलावा कुछ नहीं किया. अनन्या पांडे और तारा सुतारिया की यह पहली फिल्म हैं, इसलिए इनके साथ कुछ तो नरम होना चाहिए. मगर इन दोनों को अपने अभिनय को निखारने के लिए कड़ी मेहनत करने की जरुरत है. सिर्फ खूबसूरत चेहरे के बल पर आगे बढ़ना मुश्किल है. आदित्य सील जरुर अपनी उपस्थिति बेहतर ढंग से दर्ज कराते हैं. महज ग्लैमर के बल पर बौलीवुड में लंबी रेस का घोड़ा बनना बहुत मुश्किल है.

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Edited by- Nisha Rai

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