पर्सनल लोन वह कर्ज होता है, जिस के लिए कुछ गिरवी नहीं रखना पड़ता. इसी वजह से सुरक्षित ऋण के मुकाबले इस की ब्याज दर कुछ अधिक होती है. कर्ज लेने वाले व्यक्ति का क्रैडिट स्कोर, कर्ज चुकाने का इतिहास, आय और उस की नौकरी जैसे पैरामीटरों के आधार पर तय किया जाता है कि उसे कर्ज दिया जाए या नहीं.

पर्सनल लोन की पात्रता से जुड़ी कुछ महत्त्वपूर्ण बातों को हमेशा ध्यान में रखें:

अच्छा क्रैडिट स्कोर

पर्सनल लोन हेतु अच्छा क्रैडिट स्कोर बुनियादी जरूरत है. स्त्री हो या पुरुष, कर्ज देने से पहले कर्जदाता सब से पहले क्रैडिट स्कोर ही देखते हैं. दूसरी ओर फाइनैंशियल टैक्नोलौजी (फिनटैक) युक्त स्टार्टअप कर्जदाता कंपनियां इस शर्त में थोड़ी सी राहत देते हुए कम क्रैडिट स्कोर वालों को भी ऋण दे देती हैं. फिनटैक ऋणदाता सिर्फ क्रैडिट स्कोर नहीं देखते, बल्कि अन्य पैरामीटरों का भी इस्तेमाल करते हैं और इस प्रकार आवेदकों को सबप्राइम क्रैडिट स्कोर के साथ पर्सनल लोन हेतु आवेदन करने की सुविधा देते हैं.

कर्जअदायगी का इतिहास

दूसरी अहम बात ध्यान में रखने की यह है कि जब आप पर्सनल लोन के लिए जाएं तो पुराने कर्ज की अदायगी का अच्छा इतिहास हो. किसी भी व्यक्ति की रिपेमैंट हिस्ट्री बेहद महत्त्वपूर्ण पैरामीटर है और आवेदक के क्रैडिट स्कोर में इसे सब से अधिक महत्त्व मिलता है. आवेदक की रिपेमैंट हिस्ट्री से कर्जदाता को उस का क्रैडिट बिहेवियर समझने में मदद मिलती है और साथ ही उस की कर्जअदायगी क्षमता का भी पता लगता है. जो महिलाएं पर्सनल लोन के लिए आवेदन कर रही हैं उन के पुराने कर्ज चुकाने के इतिहास को सर्वाधिक अहमियत मिलेगी.

कंपनी का स्टेटस

ऋण आवेदन की स्वीकृति या मनाही में कंपनी का स्टेटस बहुत महत्त्व रखता है. निजी बैंक केवल उन्हीं लोगों को पर्सनल लोन देते हैं जो ‘ए’ श्रेणी या कभीकभार ‘बी’ श्रेणी की कंपनी में नौकरी करते हैं. ‘सी’ और ‘डी’ श्रेणी की कंपनी में नौकरी करने वालों को अकसर अस्वीकृत कर दिया जाता है. ऐसा इसलिए, क्योंकि निजी बैंक क्रैडिट हैल्थ की जांच व कंपनियों की रिस्क प्रोफाइलिंग करते हैं और उन्हें उसी हिसाब से श्रेणियों में रखते हैं. निजी बैंक इस जानकारी का इस्तेमाल यह तय करने के लिए करते हैं कि आवेदक की कर्ज चुकाने की क्षमता क्या है. ‘सी’ और ‘डी’ श्रेणी में आने वाली कंपनियां नईनई स्टार्टअप कंपनियां होती हैं या वे होती हैं जिन के पास पर्याप्त नकद प्रवाह नहीं होता, इसलिए ऐसी कंपनियों में काम कर रहे लोगों की कर्ज चुका पाने की संभावना कम होती है.

फिनटैक कर्जदाता और पी2पी लैंडिंग प्लेटफौर्म के मामले में हालांकि कंपनी के स्टेटस की ज्यादा फिक्र नहीं की जाती और उस के बाद ही ऋण देते हैं. इसलिए अगर आप महिला हैं और आप को स्टेटस कंपनी में काम न करने की वजह से लोन नहीं मिला तो आप को फिनटैक कर्जदाता या पी2पी लैंडिंग प्लेटफौर्म के पास जाना चाहिए.

नौकरी में स्थिरता

वर्तमान संगठन में आप कितने सालों से नौकरी कर रहे हैं- यह पहलू भी पैरामीटर में शामिल होता है और लोन की स्वीकृति को प्रभावित करता है. कर्जदाता यह देखते हैं कि किसी आवेदक का नौकरी करने का रिकौर्ड कितना स्थिर है और उसी हिसाब से वे जोखिम का मूल्यांकन करते हैं. इसलिए कई वर्षों की नौकरी का अनुभव यह जताता है कि आवेदक कम जोखिम वाला है और इसीलिए कर्ज स्वीकृति की संभावना अपनेआप बढ़ जाती है.

कर्ज की रकम का इस्तेमाल

पर्सनल लोन में कई सारी ऐप्लिकेशंस शामिल होती हैं. एक महिला होने के नाते आप कर्ज की रकम का इस्तेमाल परिवार के साथ बढि़या छुट्टियां मनाने, शानदार शादी, घर को नया रूप देने या कैरियर में प्रगति हेतु अतिरिक्त शिक्षा प्राप्त करने के लिए कर सकती है.

एकसाथ बहुत सारे कर्जदाताओं के पास न जाएं

लोगों को यह बात मालूम नहीं है, लेकिन यह पहलू आप के क्रैडिट स्कोर पर गलत असर डाल सकता है, क्योंकि इस से कर्जदाताओं के पास यह छवि बनेगी कि आवेदक कर्ज का लालची है, जिस का परिणाम आवेदन की अस्वीकृति के रूप में हो सकता है. कर्ज की अस्वीकृति का भी क्रैडिट स्कोर पर गलत असर पड़ता है और एक से अधिक बार अस्वीकृति के बाद कर्ज स्वीकार होना अकसर कठिन हो जाता है.

सह आवेदक का विकल्प: यह बहुत बढि़या कदम हो सकता है. विशेषकर महिलाओं के लिए. पर्सनल लोन लेते वक्त सह आवेदक का विकल्प चुनना कोई नई बात नहीं है और सभी किस्म के कर्जदाता चाहे निजी बैंक हों या फिनटैक, लैंडर, सभी इसे अनुमति दे रहे हैं. सह आवेदक के होने से कर्ज के पुन: भुगतान का बोझ बहुत कम हो जाता है, साथ ही पारदर्शिता को भी बढ़ावा मिलता है. सह आवेदक को गारंटर चुनने के बारे में एक और अच्छी बात यह है कि प्रभावशाली क्रैडिट स्कोर के बिना भी कर्ज मिल जाता है, बशर्ते सह आवेदक का क्रैडिट स्कोर स्वीकार करने योग्य हो. खास तौर पर कामकाजी, विवाहित महिलाओं के लिए सह आवेदक का विकल्प चुनना बहुत ही लाभकारी हो सकता है. यद्यपि आवेदक के कर्ज चुकाने में नाकाम रहने पर सह आवेदक कर्ज अदायगी के लिए जिम्मेदार होगा.

जितना चाहिए उस से ज्यादा न लें

अकसर पर्सनल लोन लेने वाले इस चक्कर में फंस जाते हैं. क्रैडिट स्कोर, आय व कंपनी का स्टेटस जैसे पैरामीटरों के आधार पर कर्जदाता आवेदन की गई राशि से बहुत ज्यादा कर्ज स्वीकृत कर देते हैं. बड़े काम की बात यह है कि जितना आप को चाहिए उतना ही कर्ज लें.

वेतनभोगी होने के नाते

आजकल कर्जदाता वेतनभोगी और स्वरोजगार दोनों किस्म के लोगों को पर्सनल लोन की पेशकश कर रहे हैं. लेकिन फिनटैक कंपनियां और पी2पी लैंडिंग प्लेटफौर्म अधिकतर वेतनभोगी लोगों को ही कर्ज की पेशकश करते हैं. इसीलिए यदि आप वेतनभोगी महिला हैं और कम से कम कागजी कार्यवाही करते हुए तुरंत अपने बैंक खाते में लोन पाना चाहती हैं तो यह आप के लिए ज्यादा सरल व सुविधाजनक है.

-आदित्य कुमार

संस्थापक व सीईओ, क्यूबेरा

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