बच्चों को शुरू से साफसफाई और हाइजीन के बारे में बताया जाना चाहिए. यह आदत बचपन से डालने पर ही बच्चे इस पर अमल करते हैं. सिर्फ बच्चों को ही नहीं, मातापिता को खुद भी इस की आदत होनी चाहिए. बच्चे केवल कहने से इस का पालन नहीं करते, बल्कि वे मातापिता को देख कर ही अपनेआप इसे अपना लेते हैं. साफसफाई और हाइजीन बच्चों को कई बीमारियों से राहत दिलाती है. समर और मौनसून में संक्रमण वाली बीमारियां अपने पैर ज्यादा पसारती हैं. ऐसे में इन मौसमों में हाइजीन का ध्यान रखना बहुत ही जरूरी है.

एक सर्वे के अनुसार भारत में 47% बच्चे कुपोषण के शिकार होते हैं. इस की वजह पेट का इन्फैक्शन है, क्योंकि लगातार इन्फैक्शन होने से उन के शरीर से पोषक तत्त्व नष्ट होने लगते हैं, जिस का असर उन के मस्तिष्क पर पड़ता है. इतना ही नहीं, पुअर हाइजीन की वजह से 5 साल से कम उम्र के बच्चों में मृत्यु दर भी अधिक है.

मुंबई के एसआरवी हौस्पिटल के बालरोग विशेषज्ञ डा. विशाल बालदुआ का कहना है कि हमेशा स्वस्थ शरीर में स्वस्थ दिमाग रहता है

और यह सही भी है, क्योंकि हाइजीन कई प्रकार के होते हैं, जिन में खास हैं डैंटल, नेल्स, हेयर ऐंड फुलबौडी.

साफसफाई से जुड़े ये टिप्स मातापिता बच्चों को दे सकते हैं:

- जब बच्चा बड़ा हो जाए तो उसे ब्रश और पेस्ट दें. ब्रश करने की विधि भी बताएं. साथ में खुद भी ब्रश करें ताकि आप को देख कर उसे में भी ऐसा करने की इच्छा पैदा हो. ऐसा न करने से कम उम्र में कैविटी होने की संभावना रहती है. अगर कैविटी मसूढ़ों तक चली जाती है, तो दूध के दांत निकल जाने के बाद भी समस्या नए दांतों में आ सकती है. इस के अलावा कुछ बच्चे बड़ी उम्र तक बोतल से दूध पीते हैं. इस से भी कैविटी होती है. ऐसे में जरूरी है कि दूध पीने के बाद उन्हें थोड़ा पानी पिलाएं.

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