कोविड ने दूसरी लहर के दौरान अपना प्रकोप दिखाया और इसने बहुत अधिक नुकसान भी किया है. इस दौरान हमें देखने को मिला कि है यह केवल हमारे फेफड़ों को ही नहीं बल्कि बहुत से अन्य और मुख्य ऑर्गन को भी प्रभावित करता है. इसमें न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का खतरा भी शामिल है और इस खतरे में हमारा नर्वस सिस्टम डेमेज होने से लेकर हमारी सभी सेंस लॉस होने तक का खतरा शामिल है. यह सारी समस्याएं कोविड होने के दूसरे या चौथे हफ्ते में देखने को मिलती हैं.

इनमें से अधिकतर लक्षणों में. सिर दर्द, चक्कर आना, बेहोश रहना, सिजर्स आदि बीमारियां शामिल हैं. हमारा स्वाद और सूंघने की क्षमता भी चली जाती है और ऐसा 30 से 40% कोविड के मरीजों में देखने को मिला है हालांकि न्यूरो बीमारियों से कोविड संबंधी केस केवल 0.1 प्रतिशत पाए गए है. स्ट्रोक का खतरा भी 60 से 70% है.

स्ट्रोक का रिस्क डायबिटिक और हाइपर टेंशन के मरीजों में अधिक देखने को मिलता है और इसमें कोरोनरी आर्टरी डिजीज का खतरा भी शामिल होता है. इसके कारण कोविड के मरीज की 6 से 8 हफ्ते के बाद अचानक से मृत्यु भी हो सकती है. स्ट्रोक में हमारा दिमाग अचानक से काम करना बंद कर देता है और जब कोई इंफेक्शन इसके साथ शामिल हो जाती है तो स्ट्रोक और अधिक खतरनाक बन जाता है.

न्यूरोपैथी में फेस के साथ साथ हमारे हाथ और पैरों जैसे लिंब्स को भी खतरा होता है. इसे जीबी सिंड्रोम कहा जाता है और यह दवाइयों के द्वारा ठीक किया जा सकता है. सिर दर्द , चैन की नींद न आना , थकान रहना इस सिंड्रोम के कुछ मामूली से लक्षण होते है.

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