कभी-कभी औफिस में काम करतेकरते अचानक मूड औफ हो जाता है या फिर घर में कोई नईपुरानी बात याद कर मन बेचैन हो उठता है तो आप को सतर्क हो जाना चाहिए. सतर्क तो आप को उस वक्त भी हो जाना चाहिए जब खुद आप को ऐसा लगने लगे कि आप की रूटीन जिंदगी में बेवजह का खलल पड़ने लगा है.

आप वक्त पर अपने तयशुदा काम नहीं कर पा रही हैं, भूख कम या ज्यादा लग रही है, नींद पूरी नहीं हो पा रही है, आप पति, घर बच्चों पर पहले जैसा ध्यान नहीं दे पा रही हैं, बातबात पर चिड़चिड़ाहट, गुस्से या डिप्रैशन का शिकार होने लगी हैं तो तय मानिए आप अपनी ब्रैन सैल्स को मैनेज नहीं कर पा रही हैं. यह एक ऐसी वजह है जिसे हरकोई नहीं जानता, लेकिन इस का शिकार जरूर होता है.

इन लक्षणों में से आप किसी एक का भी शिकार हैं तो  तय यह भी है कि आप की ही कुछ आदतें आप की ब्रेन सैल्स को नुकसान पहुंचा रही हैं, जिस का एहसास या अंदाजा आप को जानकारी के अभाव के चलते नहीं होता. लेकिन ये सबकुछ सामान्य है और वक्त रहते आदतें सुधार ली जाएं तो सबकुछ ठीक और आप के कंट्रोल में भी हो सकता है.

क्या हैं ब्रेन सैल्स

नुकसान चाहे जिस भी वजह से हो रहा है उसे अगर वैज्ञानिक और तकनीकी तौर पर सम झ लिया जाए तो फिर कोईर् खास मुश्किल नुकसान से बचने में पेश नहीं आती. बात जहां तक ब्रेन सैल्स को सम झने की है तो उन के बारे में इतना जानना ही काफी है कि वे हमारे शरीर का महत्त्वपूर्ण हिस्सा हैं जो हमें हर फीलिंग से न केवल परिचित कराती हैं, बल्कि उन से होशियार रहने के लिए भी सचेत करती हैं.

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मनोविज्ञान की जटिल भाषा को सरल करते हुए भोपाल के वरिष्ठ मनोचिकित्सक विनय मिश्रा बताते हैं कि ब्रेन सैल्स 2 तरह की होती हैं- पहली ब्रेन सैल्स को रिसैप्टर कहा जाता है, जिन का काम रिसीव करना होता है और दूसरी को इफैक्टर कहा जाता है, जो मस्तिष्क को निर्देशित करती हैं. इसे भी सरलता से इस उदाहरण से सम झा जा सकता है कि जब हम किसी गरम चीज पर हाथ रखते हैं तो रिसैप्टर गरमी का एहसास कराती हैं और इफैक्टर हमें उस गरम चीज से तुरंत हाथ हटा लेने को कहती हैं.

नुकसानदेह आदतें

क्या हमारी आदतें ब्रेन सैल्स को प्रभावित करती हैं? इस का जवाब हां में है कि करती हैं खासतौर से बुरी आदतें, जिन के चलते ब्रेन सैल्स डैमेज हो कर हमें गड़बड़ाने लगती हैं. इन नुकसानदेह आदतों को वक्त रहते सम झ लिया जाए तो जिंदगी बहुत आसान हो जाती है.

कई बार हम खुद तनाव पाल लेते हैं और कई बार हालात की देन होता है. दौड़तीभागती लाइफ में हालांकि तनाव से खुद को बचा पाना मुश्किल है, लेकिन इसे आदत बना लिया जाए तो ब्रेन सैल्स का बैलेंस बिगड़ने लगता है. जब हम तनाव में होते हैं तो शरीर में कोर्टिसोल नाम का रसायन बनना शुरू होता है, जो ब्रैन सैल्स को काफी नुकसान पहुंचाता है.

तनाव से बचने का कारगर तरीका यह है कि हम हर वक्त तनाव से बचने की कोशिश करते रहें न कि उसे बढ़ाते रहें. एक छोटे से उदाहरण से इसे यों सम झा जा सकता है कि बच्चे की स्कूल बस तयशुदा वक्त पर नहीं आई और आप को तनाव होने लगता है कि बस जाने क्यों लेट हो रही है. कहीं ऐक्सीडैंट न हो गया हो, बस टै्रफिक जाम में न फंस गई हो या फिर कहीं ऐसा न हो कि बस निकल गई हो और बच्चा उस से उतर ही न पाया हो.

इस तरह की कई फुजूल आशंकाएं बहुत कम समय में ब्रेन सैल्स को प्रभावित करती हैं. ऐसे तनाव से बचने की कोशिश करते रहें न कि उसे बढ़ाते रहें.

ऐसे वक्त में आप को चाहिए कि धैर्य रखें, क्योंकि जब थोड़ी देर में बच्चा घर आ जाता है तो आप चंद मिनटों पहले की घबराहट या तनाव भूल जाती हैं, क्योंकि तनाव के दूर होते ही ब्रेन सैल्स संतुलित हो जाती हैं, इसलिए तनाव को आदत में शुमार न करें.

दूसरी अहम वजह है वक्त पर पर्याप्त नींद न लेना, देर से सोने की आदत ब्रेन सैल्स को गड़बड़ाती है, इसलिए देर रात तक न जागें और कम से कम 7 घंटे की क्वालिटी नींद जरूर लें. इस से ब्रेन सैल्स को अपना काम सुचारु ढंग से करने में सहूलियत रहती है.

क्या करें क्या नहीं

डाइट पर ध्यान दें: जंक और फास्ट फूड, मसालेदार भोजन और बेवक्त का खाना ब्रेन सैल्स के काम में बाधा डालता है. ज्यादातर फास्ट फूड और प्रिजर्वेटिव खाना ब्रेन सैल्स की प्रगति को बाधित करता है, क्योंकि उस में मौजूद ऐक्सोटाकिल ब्रेन सैल्स को ब्लौक करता है. इसलिए खानपान की आदतों को सुधारें.

आलस: यह एक ऐसी आदत या अवस्था है, जिस से ब्रेन सैल्स भी निष्क्रिय हो कर अपना असर स्वभाव या मूड पर जरूर दिखाती हैं. हर कोई जानता है कि ऐक्सरसाइज करने से स्ट्रैस लैवल कम होता है और न करने से बढ़ता है, इसलिए ब्रेन सैल्स की सक्रियता के लिए नियमित व्यायाम करें. ऐक्सरसाइज से दिमाग में खून की सप्लाई बढ़ती है. ब्रेन सैल्स को सुचारु रूप से काम करने देने के लिए वैज्ञानिक सब से बढि़या ऐक्सरसाइज पैदल चलने को मानते हैं. रोजाना 3-4 किलोमीटर चलने से ब्रेन सैल्स बेहतर तरीके से काम कर पाती हैं.

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उत्तेजना किसी भी तरह से हो सकती है. अगर आप भी बातबात पर उत्तेजित होने की आदत का शिकार हो चली हैं तो संभल जाएं, क्योंकि इस में भी ब्रेन सैल्स गड़बड़ाती हैं.

कम पानी पीने की आदत भी ब्रेन सैल्स के काम में बाधक बनती है, इसलिए प्रतिदिन कम से कम 8 गिलास पानी पीएं ताकि शरीर डिहाइड्रेशन का शिकार न हो. कई महिलाएं विशेष हालात में इसलिए पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीतीं, क्योंकि उन्हें यह डर सताता रहता है कि इस से बारबार यूरिन के लिए जाना पड़ेगा. लेकिन सोचें यह कि यह आजकल कोई बहुत बड़ी समस्या नहीं है. टौयलेट हर कहीं आसानी से उपलब्ध हैं. जानबू झ कर पानी न पीने से ब्रेन सैल्स किसी दूसरी वजह के मुकाबले जल्दी निष्क्रिय होने लगती हैं और कभीकभी बेहोशी के बाद मृत्यु तक हो जाती है.

यह भी ध्यान रखें

ये ऐसी नुकसानदेह आदतें या स्थितियां हैं, जिन की जिम्मेदार आप खुद होती हैं और इन से ब्रेन सैल्स को कैसेकैसे नुकसान होते हैं यह नहीं सम झ पातीं. लेकिन बात सम झ आ जाए तो कई परेशानियों से बचा जा सकता है.

ब्रेन सैल्स की सक्रियता बढ़ाने के लिए पौष्टिक भोजन लेना बहुत जरूरी है. जंक और फास्ट फूड के बजाय फल और ड्राईफू्रट्स लेना बेहद फायदेमंद साबित होता है. हरी सब्जियां और बींस भी ब्रेन सैल्स के मित्र हैं. दिन में 2-3 बार चाय पीना भी ब्रेन सैल्स के लिए फायदेमंद है.

डायबिटीज, ब्लड प्रैशर और दिल के मरीजों के लिए तो और भी ज्यादा एहतियात बरतते हुए नुकसानदेह आदतों से बचना चाहिए. फायदेमंद आदतों को अपना कर नुकसानदेह आदतों को हटाया जा सकता है और यह मुश्किल भी नहीं है. पर्याप्त नींद, पौष्टिक खाना, व्यवस्थित दिनचर्या, ऐक्सरसाइज और पर्याप्त पानी पीना अच्छी आदतें हैं.

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