सुरेश,जिन्हें वावा सुरेश (1974 में जन्म) के अलावा और भी कई नामों से जाना जाता है-जैसे वसुर और स्नेक मास्टर. लेकिन अगर उनका सबसे अच्छा कोई नाम हो सकता है, जो उनके साथ न्याय करे,तो वह ‘भटकते साँपों का मसीहा’ ही हो सकता है. सुरेश एक ऐसे अद्भुत व्यक्ति हैं,जैसा शायद ही दुनिया में कोई दूसरा हो.वह सांपों से बहुत प्यार करते हैं.सांपों के प्रति उनके इस प्यार में माँ की ममता तथा पिता का संरक्षक भाव एक साथ शामिल है.पूरी दुनिया में अपनी सबसे कीमती पारिस्थितिकीय धरोहर जहरीले साँपों के लिए जाने जाने वाले वेस्टर्न घाट की यह धरोहर शायद लुप्त हो गयी होती या लुप्त हो जाती अगर दुनिया को बावा सुरेश जैसा सांपों का पैदाइशी मसीहा न मिला होता.

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