Benefits of open kitchen : सीमा एक आम गृहिणी है. उसे अपने बेटे औ पति की खाने की फरमाइशों से कोई दिक्कत नहीं है और न कोई शिकायत. उसे बस शिकायत है तो सिर्फ रसोई की चारदीवारी और उस में नैचुरल लाइट के न आने से. कभीकभी जी भारी करने वाला पूअर वैंटिलेशन उस के मन को बेचैन कर देता है. एक दिन इसी बंद रसोई की बेचैनी उस के मन को इतना भारी कर गई कि उस का शरीर स्वस्थ्य होते भी मन के भार से थक कर एक कोने में बैठ गया. उसे यों बैठे काफी समय हो गया लेकिन कोई उस का हाल पूछने नहीं आया और वह इसलिए नहीं कि कोई सीमा से प्यार नहीं करता बल्कि इसलिए कि किसी की नजर सीमा तक पहुंची ही नहीं. दरअसल, रसोई एक कोने में एक बंद कमरे की तरह थी, जो सब की नजरों से दूर रहती.
किचन घर का सब से खास हिस्सा होता है. पूरे घर में जिस हिस्से को सब से ज्यादा प्राथमिकता दी जानी चाहिए वह किचन है. किचन सिर्फ एक खाना पकाने की जगह नहीं होती बल्कि खाना पकाने वाले की पूरे दिन की दिनचर्या में एक अच्छाखासा बड़ा समय बिताने वाली जगह भी होती हैं. नाश्ता, लंच, डिनर और दिनभर में कोई न कोई फरमाइश पूरा करने के लिए किचन में बारबार जाना, वहां अपना निजी समय और मेहनत लगाना, एक लंबा पारिश्रमिक समय होता है. अगर अनुमान भी लगाया जाए तो एक दिन में एक गृहिणी का कम से कम 3 से 4 घंटे सिर्फ किचन में निकलते हैं. इसलिए किचन और किचन में बीता समय एक महिला के जीवन, उस के स्वास्थ्य खासकर उन के मानसिक स्वास्थ्य पर सीधा असर डालता है.
रसोई मानसिक स्वास्थ्य को महवपूर्ण रूप से प्रभावित करती है क्योंकि यह आप के मूड, स्ट्रैस और डेली रूटीन और उस से जुड़े काम को भी प्रभावित करती है. कई बार अपनी किचन के स्ट्रैस से आप का मन इतना कुंठित होता है कि अपने व्यावहारिक कामों में मन नहीं लगता या किया गया कार्य स्ट्रैस की वजह से सही से नहीं हो पाता. बहुत बार रसोई से मिला स्ट्रैस एक गृहिणी के काम करने की क्षमता और कुशलता को भी प्रभावित करता है. यह स्ट्रैस उस का साथ उस के बैडरूम, औफिस, मार्केट यहां तक कि किसी फंक्शन में भी पीछा नहीं छोड़ता.
मगर यह स्ट्रैस है क्या कहां. खाना बनाने का स्ट्रैस, बरतन का स्ट्रैस या रसोई की सफाई का स्ट्रैस. नहीं इन में से कोई नहीं बल्कि यह स्ट्रैस है एक साइकोलौजिकल स्ट्रैस, एक उदासीनता. यह उदासीनता कई तरह का मिश्रण लिए होती है. इस उदासीनता के मिश्रण में रसोई की चारदीवारी में बंद रहने वाले कैदी का एहसास है, अलगाव और अकेलेपन का डर है और गुलामी का आभास शामिल है.
बंद किचन की मुख्य खामियां जो हमारे दिमाग से खेलती हैं:
नजरबंद कैदी: आप नजरबंद या कैद सा फील करते है. बंद रसोईकमरे में कई बार काम करतेकरते आप की बौडी और माइंड इतना थक जाते है, इतने स्ट्रैस में चला जाता है कि रसोई की बंद चारदीवारी आप को एक कैद की तरह महसूस होती है. रसोई के कमरे में होने की वजह से कई बार स्ट्रैस में पड़ी गृहिणी पर परिवार के किसी सदस्य की नजर भी नहीं जा पाती और वह वहां परेशान बैठी होती. कई बार तो बेहोश भी हो जाती है और परिवार को पता भी नहीं चलता.
नैचुरल लाइट की कमी: जिस तरह हम बैडरूम और लिविंगरूम के लिए नैचुरल लाइट के महत्त्व और उपयोगिता पर जोर देते हैं ठीक वैसे ही हमे इस का महत्त्व किचन के लिए भी रखना चाहिए क्योंकि किचन में होना आप को एक बंद कमरे के उदासीपने, एक फीकेपने से पैदा हुए दिमागी अंधकार से निकालता है. नैचुरल लाइट का किचन में न होना एक तरह का अवसाद पैदा कर देता है और यह अवसाद है दिमागी स्ट्रैस जो रसोई में काम करने वाली की एकाग्रता और भावना, उस के मैंटल इमोशन पर प्रभाव डालता है क्योंकि एक डल माहौल एक डल मूड ही क्रिएट करता है.
ओपन किचन यानी आज की आधुनिक किचन का एक शानदार नमूना है: ओपन किचन छोटी हो या बड़ी, यह चारदीवारों से नहीं घिरती. न किसी दरवाजे के भीतर की एक कोठरी की तरह होती है. साथ ही ओपन किचन में कुछ ऐसी विशेषताएं हैं जो एक गृहिणी के लिए स्ट्रैस रिलीफ, रिलैक्सेशन और फैमिली इंटरैक्शन को रसोई में रह कर भी बढ़ावा देती हैं. यह घर का एक खुला हिस्सा होता है.अब वह हिस्सा चाहे आप के लिविंगरूम से जुड़ा हो या डाइनिंगरूम से.
ओपन किचन की कुछ विशेषताएं जो एक गृहिणी के मैंटल पीस और फैमिली बौंडिंग में सहायक हैं:
एक कैद से छुट्टी: जैसा हम ने पहले ही बात की एक चारदीवारी की रसोई कभीकभी एक कैद का अनुभव कराती है. ओपन किचन में कम से कम एक कमरे में बंद होने का खयाल तो नही खाएगा क्योंकि कुछ नकारात्मक खयाल ही काफी हैं आप को मैंटल स्ट्रैस देने के लिए.
संपर्क और साथ: घर में किचन ओपन हो तो परिवार के सदस्यों से सीधा संपर्क बना रहता है. रसोई में काम कर रही महिला अपनी मदद के लिए परिवार के सदस्यों को बुला सकती है या परिवार के सदस्य स्वयं रसोई का बड़ा काम देख उस की मदद के लिए आगे बढ़ सकते हैं जो कई बार बंद रसोई से नजरअंदाज हो जाता है.
वैंटिलेशन: एक प्रौपर वैंटिलेशन यानी वायु प्रभावआप के स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है. एक अच्छा वायु वातावरण, औक्सीजन का आवागमन हैल्थ के लिए, आप के दिमाग में प्रौपर औक्सीजन के लिए बहुत जरूरी है. बंद रसोई में अकसर खुली और ताजा हवा का बहाव बहुत कम होता है, जिस वजह से दिमागी मांसपेशियों में तनाव आता है और मैंटल फौग या स्ट्रैस बढ़ता है.
नजर हर तरफ : ओपन किचन होने का एक और फायदा यह भी है कि किचन में रहते भी आप अपनी नजर चारों ओर के परिवेश यानी सराउंडिंग पर रख सकती हैं. आसपास अगर बच्चे खेल रहे हैं तो उन नजर बना सकती हैं कि वे क्या खेल रहे हैं, कैसे खेल रहे हैं, किसी को कुछ चाहिए तो नहीं या खेल में कोई चोट लगने की गुंजाइश तो नहीं दिख रही. ठीक वैसे ही कौन घर में बाहर से आ रहा है या जा रहा है जो कई बार बंद रसोई से नहीं दिखता.
मन का विभोर: ओपन किचन का जुड़ाव अगर लिविंगरूम से हो तो आप रसोई में रह कर लिविंगरूम के टीवी पर चल रही किसी फिल्म या सीरियल का लुत्फ भी उठा सकेंगी. वहीं अगर किचन का जुड़ाव बालकनी से हो तो आप बाहर की ताजा हवा, हरियाली, पेड़पौधों पर बैठी चिडि़यां या पासपड़ोस में चल रही हलचल का भी मजा ले सकती हैं. इस तरह से ओपन किचन से मिलने वाला व्यू या दृश्य आप को कई बार ऐंटरटेन करने के साथसाथ स्ट्रैसफुल होने से भी बचाता है.
इंटरैक्शन ऐंड इन्वौल्वमैंट: किचन अगर ओपन रहती है तो आसपास बैठे लोग जैसे अगर कोई लिविंगरूम में बैठा हो या गैलरी में उस से बिना किसी अड़चन के बातचीत चलती रहती है. हंसीमजाक या कोई सलाहसु झाव आसानी से चलता रहता है. इस से रसोई में काम करने वाला किसी विशेष बात से अलगथलग नहीं रहता. अगर किचन के सामने परिवार कोई ऐक्टिविटी कर रहा हो जैसे बच्चे खेल रहे हों, कोई गानाबजाना चल रहा हो तो रसोई से आप भी उस खेल, गाने या मूवी का मजा ले सकती हैं, उस में अपना हिस्सा दे सकती हैं.
परफौर्मर फीलिंग: ओपन किचन में परिवार की नजर आप के काम पर पड़ती रहती है तो वे आप को इतना मेहनत करते देख आप को सराहते हैं, आप के हार्डवर्क अधिक नोटिस करते हैं, परिवार का कोई हाथ बंटाने भी आ जाता है, कोई आप का मनोरंजन कर देता है, जिस से आप में उत्साह उमड़ पड़ता है. आप उदासी से बाहर निकल अपने काम और नए जोश से पूरा करती हैं. आप को यह काम, यह मेहनत एक और्डर बजाने वाले नौकर की फील से तो बचाता ही है आप में एक परफौर्म वाली फीलिंग भी आती है.
सब की भागीदारी बंध जाती है: ओपन किचन में अपनेआप ही सब की भागीदारी बंध जाती है. जब सब का आनाजाना ओपन किचन की ओर से होता है तो अपनेआप ही सब की नजर किचन की व्यवस्था और काम पर पड़ती रहती है. इसलिए कोई यह नहीं कह सकता कि मेरी नजर नहीं पड़ी इसलिए यह काम खराब हो गया. जैसे मैं ने नहीं देखा कि दूध बाहर रखा था, नहीं तो मैं फ्रिज में रख देता और वह फटता नहीं या रात को लाइट औन रह गई या गैस का बटन औन रह गया क्योंकि किसी की नजर नहीं गई. मगर ओपन किचन सब की नजर में रहती है, इसलिए भागीदारी भी सब में बंट जाती है.
इन्फौर्मड ऐंड अलर्ट: जब किचन में सब की भागीदारी रहेगी, हरकोई किचन में हाथ बंटाने आएगा तो जाहिर है वह किचन में रखी चीजों, सामान के रखरखाव और जगह से वाकिफ हो जाएगा. इस तरह कोई किसी सामान के लिए किसी एक पर आश्रित नहीं होगा अर्थात जैसे अकसर बच्चे पूछते रहते हैं, ‘‘मम्मी वह नए वाले बिस्कुट कहां रखे हैं?’’ या पति कभी चाय बनाने किचन में गए तो अपनी पत्नी से पूछते हैं, ‘‘सुनो चीनी कहां रखी हैं.’’
इस के साथ एक और फायदा होगा कि वे भी सामान की खपत, उसे रखने का सही ढंग और उपयोग के बारे में जागरूक रहेंगे जोकि अकसर एक ही महिला यानी गृहिणी के सिरमथे होता है. इस तरह गृहिणी हर बार सामान ढूंढ़ कर देने के फिजिकल और मैंटल स्ट्रैस से दूर रहेगी.
अब एक और तथ्य जिसे कुछ लोग विशेषता में गिनते हैं और कुछ अगुण में. वह है क्लटर और बू. कुछ लोग कहते हैं कि किचन यों ओपन होगी तो रसोई में फैला क्लटर, कूड़ा और खाना पकाते वक्त निकला हुआ तड़के मसालों की गंध या बासी हुए भोजन की स्मैल भी पूरे घर में फैल जाती है जो बिलकुल सही नहीं.
वहीं कुछ लोग यह कहते है कि प्रौपर वैंटिलेशन किसी भी गंध को ज्यादा देर एक जगह नहीं रहने देता और वायु प्रभाव धुएं को बाहर कर देता है. दूसरा रसोई पर सब की निगाह रहेगी तो हरकोई समयसमय पर उस की साफसफाई कर दिया करेगा, जिस से रसोई में गंदगी नहीं दिखेगी. रसोई के लिए कहा गया है कि किचन एक ऐसी जगह है, जहां दोस्त, परिवार साथ आते है और यादों को पकाते और उन्हें प्यार से सजाते हैं तो क्यों न यादों और प्यार को पकाने और सजाने की जगह को घर में एक अच्छी, खुली और स्ट्रैस फ्री जगह दें. क्यों न एक कोठरी की जगह ओपन किचन का चयन करें.
गुलामी की अनुभूति
रसोई की चारदीवारी में अधिक समय से बंद रहने पर वहां एक कोने में काम करते रहने पर मन कभीकभी इतना भारी होने लगता है कि मानों आप कोई पोषक नहीं बल्कि कोई नौकर हो और किसी की गुलामी कर रहे हो. गुलामी की अनुभूति ही अपनेआप में इतना बड़ा भय और दुख होता है कि एक क्षण में ही आप के मन को बुरी तरह से आहत कर जाए.
इस तरह का मिलाजुला कुंठित आभास एक व्यक्ति खासकर एक गृहिणी, एक महिला, चाहे वह फुलटाइम हाउस मेकर हो या वर्किंग महिला जो अपने प्रोफैशन के साथ अपनी गृहस्थी भी संभालती है, के लिए घातक होता है. इन सभी महिलाओं के लिए किचन सिर्फ एक खाना पकाने की जगह नहीं होती है बल्कि एक ऐसी जगह होती है, जहां उन के जीवन का एक बड़ा हिस्सा, एक बहुत सारा समय निरंतर बीतता है. इसलिए इस की बनावट, इस का परिवेश ऐसा होना चाहिए जो उस की मैंटल हैल्थ पर कोई बुरा प्रभाव न डाले. उलटा अपनी विशेषताओं से उस का स्ट्रैस कम करने में एक अच्छी भूमिका निभाएं.
