Anger control tips : गुस्सा करना कोई अच्छी बात नहीं है. लेकिन कई बार परिस्थितियां ऐसी होती हैं कि न चाहते हुए भी हम अपने गुस्से पर काबू नहीं कर पाते. ऐसी स्थिति में अगर हमें गुस्से का घूंट पीना पड़े तो किस तरह अपने अंदर की कड़वाहट को निकाल सकते हैं. आइए, जानते हैं:

आज मीरा औफिस से घर आई तो उस का मूड कुछ उखड़ा हुआ था. जैसे ही वह घर आई तो उस के बेटे रोहन ने रोज की तरह पूछा कि मम्मी क्या मैं खेलने जाऊं? तब मीरा ने

गुस्से में आ कर कहा कोई जरूरत नहीं है. चुपचाप बैठ कर अपना होमवर्क करो, जब देखो तब बस खेलनाखेलना की रट लगाए रहते हो वैगरहवैगरह.

तब रोहन अपनी मम्मी को गुस्से में देख कर चुप हो गया और सोचने लगा आज मम्मी को आखिर क्या हुआ? बिना बात मेरे ऊपर गुस्सा कर रही हैं. मैं ने तो कोई गलती भी नहीं की.

ऐसा ही कुछ यदि आप के घर भी होता है तो यह लेख आप के लिए ही है ताकि आप जान सकें कि बिना वजह अपना गुस्सा किसी और पर उतारना क्या ठीक है और इस का क्या असर पड़ता है?

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किसी भी बात पर जब हमें बहुत तेज गुस्सा आ रहा होता है तब हम अपने मन की सारी भड़ास या गुस्सा उस इंसान पर निकाल देना चाहते हैं जिस के कारण हमारा मूड खराब हुआ होता है. लेकिन जब स्थिति हमारी पहुंच से बाहर होती है तो गुस्सा हमें अंदर ही अंदर परेशान करता रहता है.

ऐसी स्थिति में इस घुटन से बचने के लिए यदि आप इन बातों को अपनाएंगे तो हो सकता है आप अपना गुस्सा बेवजह दूसरों पर नहीं उतारेंगे बल्कि अपने गुस्से के ऊपर काबू रख पाएंगे.

ध्यान कहीं और ले जाएं

किसी दिन जब आप की औफिस या घर पर या किसी दोस्त से कोई बहस या लड़ाई आदि हो जाए या कोई ऐसी बात हो जो आप को मंजूर नहीं या किसी के व्यवहार से आप आहत हो गए हों और तब अपनी बात को रख पाना संभव न हो तो मन ही मन परेशान रहने के बजाय थोड़ी देर चुपचाप बैठ जाएं और अपने ध्यान को कहीं और शिफ्ट या फोकस करने की कोशिश करें इस के लिए आप किचन में जा कर काम करने लगें या अपनी पसंद का कोई गाना या म्यूजिक सुन लें या अपनी पसंद का कोई भी काम चुन ले, कहीं घुमने चले जाएं ताकि आप पुरानी बात को भूल जाएं और अपने गुस्से को शांत कर सकें और उस पर नियंत्रण पा सकें क्योंकि जब हम गुस्से में होते हैं तो हमारा फोकस दूसरे कामों पर भी नहीं बन पाता है.

इसलिए जरूरी होता है कि हम अपने मन को हलका करें. आप चाहें तो इस के लिए मैडिटेशन की मदद भी ले सकती हैं.

मन को करें हलका

जितना बोलना है और जैसा बोलना है. सब बोल डालिए कुल मिला कर भड़ास निकाल लीजिए. घर पर, बच्चों पर या किसी और पर गुस्सा न उतारें. आप का ऐसा करना आप के अच्छे व्यवहार का परिचायक नहीं है तो आप बिना किसी बात के दूसरों से दूर हो जाएंगे क्योंकि तब लोग आप के बारे में यह सोच बना लेंगे कि यह तो हर समय बिना बात के गुस्सा करता रहता या रहती है.

करें अनदेखी

कभी ऐसा होता है जब आप अपने दोस्तों संग या औफिस अथवा परिवार में कुछ समय बिता रहे हों तब कोई आप के ऊपर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से तानेबाजी कर रहा हो या आप की बात को नाकारे जा रहा हो तब उस का ऐसा करना आप के तनाव को बढ़ा देता है. मगर यह कोई जरूरी नहीं कि हरकोई आप के मुताबिक ही बात करे. ऐसे में छोटीछोटी बातों की अनदेखी जरूरी है ताकि गुस्से से बच सकें.

करें संवाद

यदि आप किसी की बात से आहत हो जाएं तो उस से आपस में बातचीत कर अपने गुस्से को शांत या ठंडा कर लें ताकि यदि कोई गलतफहमी हो गई हो तो उसे दूर किया जा सके? सामने वाले के तर्क को सम?ा जा सके. इस के लिए आपस में संवाद या बातचीत होना आवश्यक है.

करें आकलन

कई बार हम छोटीछोटी बातों को ले कर गुस्सा करने लगते हैं. हमारा ऐसा बरताव असुरक्षा की भावना भर देता है. ऐसे में किसी भी बात पर अपनी प्रतिक्रिया देने के बजाय सामने वाले की बात को सम?ाने का प्रयास करें.

माफ करना सीखें

कभीकभी किसी का व्यवहार या अपशब्द हमें इतना विचलित कर देते हैं कि हम उस से बात करने या किसी भी तरह का व्यवहार रखना पसंद नहीं करते और जब उस इंसान से आप का आमनासामना होता है तब हम फिर से गुस्से से भर जाते हैं ऐसे में ऐसे लोगों को माफ कर देने की आदत डालना ही बेहतर होता है ताकि गुस्से को वहीं खत्म किया जा सके, रिश्तों की कड़वाहट को खत्म किया जा सके.

एक बार जरूर सोचें

यह समस्या अकसर कई बच्चों के साथ होती है कि मातापिता की औफिस की टैंशन, घर की टैंशन, बाहर की टैंशन, किसी से ?ागड़े की टैंशन, सरकारी काम न होने की टैंशन, पैसों की कमी की टैंशन और न जाने क्याक्या उन के दिमाग में चलता रहता है और ऐसे में उन की यह फ्रस्ट्रेशन अधिकतर बच्चों पर निकलती है. यह तो हम सभी जानते हैं कि बच्चे की पहले पाठशाला घर से ही शुरू होती है जैसा वे बचपन से अपने घर का माहौल देखते हैं उस का असर उन के व्यवहार पर भी देखने को मिलता है. बच्चे हमेशा मातापिता की बातों को ही कौपी करते हैं और उन्हीं से सीखते हैं.

यदि मातापिता बातबात पर गुस्सा करें

मातापिता के इस व्यवहार का बच्चों पर बहुत गहरा असर पड़ता है और वे भी समय आने पर वैसा ही करते हैं. तब मातापिता को उन का ऐसा व्यवहार नागवार गुजरता है. तब मातापिता का यह कहना होता है कि उन का बच्चा बहुत जिद्दी है. वह भी बातबात पर अपना गुस्सा उतार रहा है. लेकिन उन का ऐसा कहना क्या यह सही है? इसलिए इन परिस्थितियों से बचने के लिए किसी भी हालत में फ्रस्ट्रेशन बच्चे पर उतारना सही नहीं होता है. इस बात का ध्यान रखना मातापिता की जिम्मेदारी है ताकि घर में आप के बच्चों को अच्छा माहौल मिल सके.

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