Post holi care tips : होली की मौजमस्ती के बाद त्वचा, आंखों, फेफड़े और पेट से जुड़ी समस्याओं को नजरअंदाज करना ठीक नहीं होता. कैमिकल रंगों से आंखों में ऐलर्जी, पेट में संक्रमण, फेफड़े की समस्या आदि कई हो जाती हैं, जिसे समय रहते डाक्टर की सलाह लेना सही होता है क्योंकि होली के उत्सव को मनाने के बाद कई बार शारीरिक समस्याओं से गुजरना पड़ता है, जिसे ठीक होने में समय लगता है.

होली के बाद रखें खुद का ध्यान

असल में होली का त्योहार खुशियों, खिलखिलाहट और रंगों की बौछार का उत्सव है. यह वह समय है, जब हम पूरे परिवार और दोस्तों के संग संगीत की धुनों, मिठाइयों और अपनों के प्यार में पूरी तरह डूब जाते हैं। लेकिन जश्न के इस खुमार में हम अकसर यह भूल जाते हैं कि हमारी त्वचा, आंखें और फेफड़े उन बाहरी चीजों के संपर्क में आ रहे हैं, जिन्हें झेलने के लिए हमारा शरीर तैयार नहीं होता.

इस बारें में मुंबई की कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हौस्पिटल की इंटर्नल मैडिसिन कंसल्टेंट डाक्टर एनआर शेट्टी कहते हैं कि होली के बाद मेरे पास अकसर ऐसे मरीज आते हैं जिन की परेशानी एक छोटी सी बेचैनी से शुरू हुई थी, लेकिन वक्त पर ध्यान न देने के कारण वह एक गंभीर समस्या बन गई.

डाक्टर कहते हैं कि याद रखिए, रंगों की इस मस्ती के बीच आप की सेहत को नजरअंदाज करना आप पर भारी पड़ सकता है. होली की ज्यादातर समस्याओं का समाधान आसान है, लेकिन उस पर आप को शुरू में ही ध्यान देना जरूरी होता है.

अनचाहे कुछ बीमारियां

डाक्टर आगे कहते हैं कि आजकल लोग होली में अधिकतर सुरक्षित रंगों का प्रयोग करते हैं, लेकिन कई बार इन रंगों में प्रयोग होने वाले कैमिकल के बारे में जानकारी नहीं होती, जिसे लगाने के बाद व्यक्ति को ऐलर्जी या सांस की समस्या हो सकती है. मेरे पास आने वाले अधिकतर मरीज स्किन रिएक्शन और ऐलर्जी से परेशान होते हैं क्योंकि आज के दौर में मिलने वाले रंगों में छिपे सिंथेटिक डाई, कैमिकल्स और मेटल के बारीक कण त्वचा के सब से बड़े दुश्मन हैं. जब ये रंग घंटों स्किन पर टिके रहते हैं, तो ये अंदरूनी परतों को नुकसान पहुंचाते हैं.

डाक्टर बताते हैं कि मरीज अकसर चकत्ते, खुजली, लालिमा, सूखापन, जलन और कभीकभी छोटे छालों की शिकायत ले कर आते हैं. सब से ज्यादा खतरा वहां होता है जहां पसीना और रंगीन पानी जमा रह जाता है (जैसे गरदन या अंडरआर्म्स) यहां फंगल इन्फैक्शन बहुत तेजी से पनपता है. जिन लोगों को पहले से ऐक्जिमा या सैंसिटिव स्किन की समस्या है, उन की परेशानी और बढ़ सकती है.

होली के बाद स्किन को रगड़ कर साफ करने की गलती कई बार भारी पड़ जाती है. कई बार त्वचा पर पस वाले दाने दिखने लगते हैं, जिसे लोग नजरअंदाज कर घर पर ठीक करने की कोशिश करते रहते हैं.

इस के अलावा होली के बाद सब से बड़ी समस्या आंखों में गंभीर संक्रमण और जलन का होता है. रंग लगाते वक्त किसी कारणवश रंग का एक छोटा सा कण भी किसी तरह से आंखों में चला जाता है, तो आंखों का लाल होना, लगातार पानी आना, जलन, सूजन और चुभन जैसा महसूस होने लगता है. कुछ मरीजों को धुंधला तक दिखाई पड़ने लगता है.

आंखों की समस्या

कुछ लोगों को होली के त्योहार के दौरान नशीले पदार्थों के सेवन के कारण कभीकभी आंखों की पुतलियां फैली हुई भी देखी जा सकती हैं. अकसर लोग आंखों में जलन होने पर उन्हें मसलने या रगड़ने की बड़ी गलती करते हैं, जो आंखों के कौर्निया को हमेशा के लिए जख्मी कर सकता है. आंखों में कुछ भी जाने पर तुरंत उन्हें साफ और बहते पानी के छींटों से धो देना ही सब से अच्छी बात होती है.

अगर 24 घंटे के बाद भी तकलीफ कम न हो या दर्द और धुंधलापन बढ़े, तो बिना एक पल गंवाए डाक्टर के पास पहुंचना जरूरी होता है. इस में बच्चों की शिकायतों को बिलकुल भी अनसुना न करें क्योंकि उन की आंखें बहुत नाजुक होती हैं.

फेफड़े होते हैं प्रभावित

डाक्टर का आगे कहना है कि होली के उल्लास के बीच एक बड़ा खतरा हमारी सांसों पर मंडराता है, जिसे हम अकसर भूल जाते हैं. सूखे रंगों और गुलाल के बारीक कण नाक के रास्ते हमारे फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं, जो अस्थमा, साइनस या ऐलर्जी से जूझ रहे लोगों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं. लगातार छींकें आना, खांसी, गले में खराश, छाती में जकड़न और सांस फूलना आदि होने लगते हैं. इन्हें होली के बाद कभी हलके में नहीं लेना चाहिए.

अस्थमा के मरीजों के लिए तो रंग कई बार अटैक की वजह भी बन सकते हैं. साथ ही, होलिका दहन का धुआं और भीड़भाड़ वाली जगहों की घुटन इस समस्या को और भी गंभीर बना देती है.

अगर आप को सांस लेने में तकलीफ महसूस हो रही हो, लगातार खांसी आ रही हो या छाती में भारीपन लगे, तो घरेलू नुस्खों के भरोसे न रह कर, तुरंत मैडिकल परामर्श लें.

पेट की समस्या

होली पर पकवान, मिठाइयां और ढेर सारी मस्ती होती है और यही मस्ती हमारी पाचन शक्ति पर असर डालती है. बाहर का खाना, असुरक्षित तरीके से बनी मिठाइयां या दूषित पेयपदार्थ फूड पौइजनिंग का सब से बड़ा कारण बनते हैं. कुछ नशीले पदार्थ का सेवन भी लोग इस दिन करते हैं, जिस से कई बार पेट में मरोड़, उलटी, दस्त, पेट फूलना और बुखार जैसे संकेत दिखाई पड़ते हैं. शुरूआती लक्षणों में आराम और पर्याप्त पानी (ओआरएस) मददगार होते हैं, लेकिन अगर लगातार उलटी हो, मल में खून आए, तेज बुखार हो या शरीर में पानी की कमी महसूस हो, तो तुरंत अस्पताल पहुंचना जरूरी होता है. बच्चों और बुजुर्गों के मामले में तो कुछ घंटे की देरी भी खतरनाक हो सकती है.

इस के अलावा इस दिन घंटों धूप में बाहर खेलना, शारीरिक भागदौड़ और पानी की कमी आप के शरीर को अंदर से सुखा देती है. इस से डिहाइड्रेशन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है मसलन मुंह का सूखना, तेज सिरदर्द, चक्कर आना, कमजोरी, पेशाब का रंग गहरा पीला होना आदि. भांग का सेवन करने वालों में अकसर गंभीर डिहाइड्रेशन, मुंह का अत्यधिक सूखना और व्यवहार में असामान्य बदलाव देखे जाते हैं. आप को जान कर हैरानी होगी कि हर साल होली के बाद ऐसे कई मरीजों को अस्पताल में भरती करना पड़ा है. केवल पानी ही काफी नहीं होता, शरीर में इलैक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा करने के लिए नारियल पानी या ओआरएस घोल का सेवन करना आवश्यक होता है. अधिक थकान होने पर बेहोशी या हीटस्ट्रोक की वजह बन सकता है.

इस प्रकार होली का त्योहार जितना मौजमस्ती और आनंद भरा होता है, उतना ही सावधानी बरतने की भी जरूरत होती है, ताकि त्योहार को मनाने के बाद आप को किसी प्रकार की समस्या से जूझना न पड़े. वक्त पर की गई खुद की देखभाल और जागरूकता ही यह सुनिश्चित करती है कि त्योहार की खुशियां यादगार बनें.

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