Arrogant personality disadvantages : जो लड़की ज्यादा सुंदर, छरहरी होती है थोड़ी सी मौडलिंग वगैरह कर लेती है वह ऐरोगेंट हो जाती है. उसे लगता है कि वह लड़कियों की इन भीड़ से कुछ अलग है और इसलिए उसे हर जगह अलग ही प्रिफरेंस मिलनी चाहिए. कई जगह वह इस का फायदा भी उठाती है लेकिन ज्यादातर मुंह की कहती है.
दरअसल, सच यह है कि लड़की (या किसी भी व्यक्ति) के लिए अति आत्मविश्वास या अहंकार अकसर फायदों से ज्यादा नुकसानदेह होता है क्योंकि यह रिश्तों में दरार डालता है, लोगों को दूर करता है, सही सलाह नहीं सुनने देता और विनम्रता व सीखने की क्षमता को खत्म कर देता है, जिस से व्यक्तिगत और व्यावसायिक विकास रुक जाता है, भले ही थोड़ी देर के लिए शक्तिशाली दिखे पर लंबे समय में यह अकेलापन और असफलता लाता है.
दूसरे शब्दों में कहें तो अहंकार वास्तव में एक जहर की तरह है जो केवल दूसरों को ही नहीं, बल्कि सब से पहले उसे पालने वाले इंसान को अंदर से खोखला कर देता है.
लड़की का एरोगेंस बिखर कर हर तरफ फैल जाता है. मतलब वह लड़की अपनी शांति खुद ही भंग कर लेती है.
चलिए, समझते हैं कि यह अहंकार उस की शांति कैसे भंग करता है और उसे हमेशा टैंशन में क्यों रखता है :
-यह उम्मीद करना कि हर जगह उन्हें स्पैशल ट्रीटमैंट मिले. अगर कहीं लाइन में लगना पड़े या कोई उन की बात तुरंत न माने, तो बदतमीजी से पेश आना या यह कहना कि तुम्हें पता है मैं कौन हूं?
-जानबूझकर मीटिंग्स या डेट्स पर बहुत देरी से पहुंचना और इसे अपना ‘एटीट्यूड’ या ‘स्टाइल’ समझना. यह यह दर्शाता है कि आप सामने वाले के समय को अपने से कम कीमती मानती हैं.
-अपने लुक्स, ब्रैंडेड कपड़ों या आर्थिक स्थिति को ले कर घमंड करना. दूसरों के लाइफस्टाइल या फैशन सेंस का मजाक उड़ाना भी इसी श्रेणी में आता है.
-अगर लड़की को मिडल सीट मिली हो तो वह साइड सीट वाले से कहती है कि मुझे बारबार बाथरूम जाना पड़ता है. क्या मैं साइड सीट ले लूं? वह अपनी सुंदरता का फायदा उठाने की कोशिश करती है और अगर कोई उस की बात को मना कर दें तो मुंह बनाती है.
-अगर कोई शिक्षक, बौस या बड़ा कोई सलाह दे या सुधार करने को कहे, तो उसे सीखने के अवसर के रूप में लेने के बजाय गुस्सा हो जाना या यह सोचना कि इन्हें क्या पता, मैं इन से ज्यादा स्मार्ट हूं.
-यदि सहेली बताए कि देखो, मैं ने आईफोन खरीद ही लिया. उस की बात सुन वह खुश होने के बजाए मुंह बिचकाते हुए कहती है कि इस में क्या बड़ी बात. मेरे पास तो कितने सालों से आईफोन है.
ऐसा कर के वह उसे बता रही है कि देखो, मैं तुम से कितनी ग्रेट हूं, लेकिन यह बात किसी को भी अच्छी नहीं लगेगी.
एरोगेंस वाली लड़कियां सिर्फ अपने क्लास वाली लड़कियों या लोगों से मतलब रखती हैं. जो लड़की उस के स्टेटस की न हो उसे वे घास नहीं डालतीं. सीधे मुंह बात तक नहीं करतीं.
ऐसी लङकी हर जगह एरोगेंस बिखेर कर चलती है जबकि वहां उसकी जरूरत भी नहीं होती है.
लड़कियों के एरोगेंट होने का फायदा कम और नुकसान ज्यादा है
बदतमीज और घमंडी का टैग मिल जाता है : अगर कोई लड़की हर जगह अपना रोब मारती है तो 1-2 बार तो लोग उस की सुंदरता या स्टाइल के आगे झुक जाते हैं लेकिन जल्दी ही वे लोग उसे बदतमीज कह कर पुकारते हैं.
एरोगेंस वाली लड़कियां एक दिन अकेली रह जाती हैं : ऐसी लड़कियां सोचती हैं कि कहीं भी जाओ हर जगह मुझे प्रिफरेंस मिलनी चाहिए और जब वह नहीं मिलती है तो फिर चिड़चिड़ा जाती हैं. वे दोस्तों के साथ भी ऐसा करती हैं. अगर सहेलियां कहीं जा रही होंगी तो देर से आएंगी और जल्दी चली जाएंगी और खाने का अपना शेयर नहीं दे कर जाएंगी. उन को लगता है कि वे सब लोगों के बीच आई हैं, यही ही बड़ी बात है.
यह बात किसी को भी पसंद नहीं आती है और लोग धीरेधीरे उन से दूरी बना लेते हैं और एक दिन वे अकेली रह जाती हैं.
प्रोफैशनली ग्रो नहीं कर पातीं : आज के दौर में ‘सौफ्ट स्किल्स’ और ‘नेटवर्किंग’ बहुत जरूरी हैं. अगर कोई लड़की वर्कप्लेस पर एरोगेंट है, तो उसे टीमवर्क में दिक्कत आती है. मेंटर्स और सीनियर्स ऐसे लोगों को सिखाना पसंद नहीं करते जो यह जताते हैं कि उन्हें सब कुछ पता है और वे सब से अलग हैं. उन्हें कुछ सीखने की जरूरत ही नहीं है. उन्हें लगता है कि उन की सुंदरता और स्टाइल ही उन्हें सब से अलग बनाता है जबकि जौब में काबिलियत काम आती है घमंड नहीं.
नेटवर्किंग और ब्रैंड इमेज : कोरपोरेट जगत में आप की पहचान आप की ‘पर्सनल ब्रैंडिंग’ से होती है. एक एरोगेंट इमेज की वजह से लोग आप को भविष्य के प्रोजैक्ट्स या नई नौकरियों के लिए रेफर नहीं करते. नेटवर्किंग का मतलब सिर्फ लोगों से मिलना नहीं, बल्कि एक सकारात्मक प्रभाव छोड़ना है. अहंकार इस प्रभाव को खत्म कर देता है.
इमोशनल मैच्योरिटी की कमी : हर जगह प्रिफरेंस मांगना एक बचकाना व्यवहार माना जाता है. एक मैच्योर इंसान जानता है कि कभी उसे प्राथमिकता मिलेगी और कभी किसी और को. चिड़चिड़ाना यह दर्शाता है कि उस लड़की में इमोशनल रेगुलेशन की कमी है.
एरोगेंस या घमंडी लड़कियां कभी खुश क्यों नहीं रह पातीं
-ऐसी लड़कियां हर वक्त ये दर्शाती हैं कि आई एम द बैस्ट और इस इमेज को बनाए रखने का भारी बोझ उन्हें कब तनावग्रस्त बना जाता है यह उन्हें पता भी नहीं चलता.
-अहंकारी इंसान हमेशा एक मुखौटा पहने रहता है कि मैं श्रेष्ठ हूं. उसे हर वक्त डर रहता है कि कहीं कोई उस की कमी न पकड़ ले. इस परफैक्ट दिखने की होड़ में वह कभी रिलैक्स नहीं कर पाती. उसे हर छोटी बात (जैसे किसी का उसे इगनोर करना या किसी और की तारीफ होना) एक व्यक्तिगत हमले की तरह लगती है.
-घमंडी लड़की को लगता है कि हर वक्त मेरे आगेपीछे लोग फिरने चाहिए. वह सैंटर औफ अट्रैक्शन बन कर खुश होती है. लेकिन जब लोग उसे इगनोर करते हैं, तो उस का ईगो हर्ट हो जाता है और वह गुस्से से भर कर तनाव में आ जाती है. उसे लगता है कि वह तो परफैक्ट है फिर किसी ने उसे इगनोर करने की हिम्मत कैसे की.
-ऐसी लड़कियां दूसरों से कंपीटिशन करतेकरते थक जाती हैं. उन्हें लगता है कि मुझे सब से ऊपर रखा जाए. इसी वजह से लोग इरीटेट हो जाते हैं और ऐसी लड़कियों को बिलकुल भी तवज्जो देना बंद कर देते हैं.
इस बात को एक उदहारण से समझें. जैसे, अगर आप का किसी बैंक में अकाउंट है, तो आप कोशिश करेंगी कि मेरा काम पहले हो जाए. 1-2 बार तो वे करेंगे लेकिन फिर वे चिढ़ कर व जानबूझ कर आप का काम और देर से करेंगे. वे आप के काम में जानबूझकर गड़बड़ कर देंगे फिर आप मैनेजर के पास चक्कर काटते रहें.
इस तरह लड़की को अपने एरोगेंस का जितना फायदा नहीं होता उतना नुकसान हो जाता है. बल्कि अगर वही काम वह नम्रता से करवाती तो बैंक कर्मचारी उस की मदद करते.
इसलिए इस बात को धयान रखें कि यह आप की क्वालिटी है कि आप सुंदर हैं, छरहरी हैं, स्टाइलिश हैं लेकिन यह सब उस जगह इस्तेमाल करिए जहां इस की वैल्यू है और जहां इस की जरूरत है. जहां जरूरत नहीं है वहां नौर्मल रहिए. स्टाइल तो आपका रहेगा ही लेकिन उसे हर जगह इस्तेमाल न करें.
