गुजरात के प्रमुख पर्यटक स्थलों में से एक होने के साथ-साथ रानी की वाव में अपने पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए कई सारी दिलचस्प चीजें हैं. इस खूबसूरत बावली की वास्तुकला और ऐतिहासिक प्रासंगिकता निश्चित तौर पर सराहनीय हैं. अगर आप इस बार गुजरात की यात्रा पर जाने की योजना बना रहे हैं, तो इस ऐतिहासिक खूबसूरती का दीदार करना मत भूलियेगा.

सरस्वती नदी के तट पर पाटण में स्थापित इस खूबसूरत कला से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें भी हैं, जो इसके आकर्षण को और निखारती हैं. पाटण को पहले 'अन्हिलपुर' के नाम से जाना जाता था, जो गुजरात की पूर्व राजधानी हुआ करती थी.

रानी द्वारा करवाया गया निर्माण

भारत में कई ऐसे स्मारक हैं, जिन्हें किसी राजा ने अपनी पत्नी की याद में बनवाया था. इन सबसे विपरीत रानी की वाव सबसे अलग और अद्वितीय है क्योंकि इसे वर्ष 1063 में सोलंकी शासन के राजा भीमदेव प्रथम की याद में उनकी पत्नी रानी उदयामति द्वारा बनवाया गया था.

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