Tourist : हिमाचल के लाहौल में स्थित मशहूर पर्यटन स्थल सिस्सू 40 दिनों तक पर्यटकों के लिए बंद रहेगा. पंचायत ने धार्मिक कारणों से यहां पर्यटकों की एंट्री पर पूरी तरह रोक लगाई है. कहा जा रहा है उनका देवी-देवताओं के पूजन, अनुष्ठानों और पारंपरिक रीतिरिवाजों की पवित्रता बनाए रखने के उद्देश्य से सिस्सू में 40 दिनों के लिए पर्यटन गतिविधियों पर रोक लगाने का निर्णय लिया है. इस दौरान किसी भी बाहरी व्यक्ति को पर्यटन स्थल सिस्सू में एंट्री की अनुमति नहीं होगी. यह प्रतिबंध 20 जनवरी से 28 फरवरी जारी रहेगा.
ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्यूंकि टूरिस्ट वहां बहुत गंदगी फैलते है, भीड़ करते है और बहुत तेज म्यूजिक चलते है जिससे वहां के लोगों को परेशानी होती है.
माना ऐसा होता होगा लेकिन क्या इसमें सारा दोष टूरिस्ट का है. अगर कुछ टूरिस्ट लाउड म्यूजिक बजाते हैं, तो आप उन्हें गिरफ्तार क्योंनहीं कर सकते?
आप बोर्ड लगाएं कि यहां लाउड म्यूजिक अलाउड नहीं है. वहां के लोगों को बोले कि आप अपने नियम कायदे बनायें ताकि टूरिस्ट उसे पालन करने पर मजबूर हो जाएँ. उनसे पैसे लीजिए फाइन लगाइये. गलती आपके एडमिनिस्ट्रेशन में भी है. आपने 40 कमरों का होटल बनाने दिया. लेकिन आपने 40 गाड़ियों की जगह नहीं रखी ,तो यह किसकी गलती है?
पर्यटक की या आपकी?
आप टूरिस्ट को क्यों दोष दे रहें हो? टूरिस्ट को पता चला यहाँ होटल मिल रहा है. मैं रात को रह सकता हूं, तो वो आकर रह गया. बाहर छोले भठूरे की दूकान है जिसने सड़क घेर कर ठेला लगा रखा है. अब वहां बैठकर टूरिस्ट ने खाना खा लिया, तो उसकी क्या गलती है. अब दूकान वाले के कूड़े को डंप करने की जिम्मेवारी तो प्रशासन की है. अगर आपने होटल खोलने दिया है, तो उसके कूड़े के निपटारे का आप ख्याल रखों न. इसमें टूरिस्ट क्या करें?
आपने सारी जिम्मेदारी पर्यटक पर डाल दी है. अगर डस्टबीन है और उन्हें साफ़ करें और कूड़े को सही तरीके से डंप किया जाएँ, तो फिर किसी को कोई परेशानी नहीं होगी? जब पैसे कमाने होते है, तो आप इन होटल्स और होम स्टे वालों को लाइसेंस दे देते है. अगर वहां टूरिस्ट के आने से इतनी ही दिक्कत थी,तो आपने होटल का लाइसेंस क्यूँ दिया? जब एक आम आदमी टूरिस्ट प्लेस पर इन्वेस्ट कर चूका है अब आप कह रहें हो हम पर्यटक को नहीं आने देंगे. आप आसान रास्ता ढूंढ रहें हो.
दरअसल, ये वो लोग हल्ला मचा रहें है जिनकी अपनी प्रॉपर्टी नहीं है. या जिनको लगता है कि इनको बिजनस नहीं मिल रहा. ये वो लोग कर रहें है जिनके घर बने हुए है. जिनका धंधा पर्यटन से चल नहीं रहा. जिनको सरकारी या कोई और नौकरी है, वो कहते है हमे तो पर्यटन से कुछ मिल नहीं रहा. ये टूरिस्ट बेकार ही हमारी आफत कर रहे हैं. लेकिन ये आफत आपकी टूरिस्ट नहीं वहां का प्रशासन कर रहा है. अगर आपने 40 हजार कमरे बनने दिए, तो किसी न किसी दिन तो वे पूरे भरेंगे ही और तब भीड़ का बढ़ना स्वाभाविक है. फिर पहले ही उससे निपटने के पूरे इंतजाम क्यूँ नहीं किये गएँ?
पर्यटन स्थल पर गंदगी और कूड़ा होना प्रशासन की विफलता है, पर्यटकों की नहीं
कई नगर पालिकाओं के पास आज भी 20 साल पुराना कचरा उठाने का सिस्टम है. वे सिर्फ कचरा एक जगह से उठाकर दूसरी जगह फेंक देते हैं, उसे Process नहीं करते.
इसके आलावा बजट और स्टाफ की कमी भी होती है जो गंदगी बढाती है जैसे पर्यटन सीजन में आबादी 10 गुना बढ़ जाती है, लेकिन सफाई कर्मचारी और कचरा ढोने वाली गाड़ियां उतनी ही रहती हैं जितनी स्थानीय आबादी के लिए थीं.
अक्सर पर्यटन विभाग और नगर निगम के बीच तालमेल नहीं होता. काम ‘ठेके’ पर दे दिया जाता है और ठेकेदार केवल खानापूर्ति करते हैं.
पहाड़ों या संकरी गलियों में बड़ी कचरा गाड़ियां नहीं जा पातीं, जिससे कचरा जमा होता रहता है.
हद तो यह है कि ये लोग खुद सही से काम नहीं करते और दोष सारा पर्यटकों के मथे मड देते है. जोकि गलत है. मसूरी शिमला में हर थोड़ी दूरी में ढलान में कचरा मिलेगा.
टूरिस्ट प्लेस की मुन्सिपल कारपोरेशन क्या कर रही है?
बैन करने के बजाएं आप उन्हें कंट्रोल क्यूँ नहीं कर सकते.?
अगर कचरा टूरिस्ट फेक कर जा रहें है, तो उसे उठाया क्यूँ नहीं जा सकता?
क्या कचरा उठाना मुश्किल है?
अगर फलों और सब्जितयों के ट्रक शहर में आ सकते है, तो क्या उनका कूड़ा बहार फेक नहीं सकतें. इस पर एडमिनिस्ट्रेशन क्या कर रहा है? वो साफ़ क्यूँ नहीं कर सकता?
प्रशासन क्या करें-
अगर साफ़ सफाई का काम रात में होगा तो सुबह सारी सड़के साफ़ मिलेंगी. दिन में केवल Maintenance होना चाहिए.
कचरा शहर से बाहर ले जाने के बजाय, उसे वहीं छोटे-छोटे प्लांट्स में खत्म करना चाहिए.
Black Soldier Fly (BSF) तकनीक: गीले कचरे को खाद बनाने के लिए.
Plastic Shredders: प्लास्टिक को सड़क बनाने या ईंट बनाने के काम में लाना.
टूरिस्ट से पर्यावरण शुल्क इसके लिए लिया जा सकता है और उसे इसी काम की व्यवस्था में लगाना चाहिए.
डिजिटल मॉनिटरिंग (Command & Control Center)
GPS Tracking: कचरा उठाने वाली हर गाड़ी पर GPS हो.
Smart Bins: ऐसे कूड़ेदान जो भरते ही प्रशासन को मैसेज भेज दें कि “मुझे खाली करो”.
CCTV चालान: गंदगी फैलाने वालों को ढूंढकर उनके घर या होटल के पते पर चालान भेजना.
स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए एक ऐप हो जहाँ वे गंदगी की फोटो डालें और 24 घंटे के अंदर सफाई न होने पर संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई हो.
पर्यटन स्थलों के बीच सफाई की रैंकिंग हो, जिससे प्रशासन में बेहतर काम करने की प्रतिस्पर्धा (Competition) पैदा हो.
भीड़ नियंत्रण (Crowd Control) के लिए नियम बनायें
पर्यटकों के आने का Time Management करना
पर्यटकों को ऑफ-सीज़न या दिन के अलग-अलग समय पर आने के लिए प्रोत्साहित करें. अगर ज्यादा भीड़ हो जाएँ तो प्रवेश को रोक दिया जाना चाहिए. इसके आलावा प्रवेश के लिए सुबह, दोपहर और शाम के स्लॉट तय करना. इससे एक ही समय पर हजारों लोग इकट्ठा नहीं होते.
ऑफ सीजन को प्रमोट करना
इसका मतलब है जब ऑफ सीजन हो और पर्यटकों की भीड़ कम हो तब डिस्काउंट के ऑफर लगाएं जाएँ ताकि लोग ज्यादा से ज्यादा उस समय में आ सकें और जब पीक सीजन हो तो भीड़ थोड़ी कम हो सकें.
सैटेलाइट डेस्टिनेशन Satellite Destinations
मुख्य पर्यटन स्थल के 20-30 किलोमीटर के दायरे में नए छोटे केंद्र विकसित करना. उदाहरण के लिए, यदि शिमला में भीड़ है, तो पर्यटकों को नारकंडा या मशोबरा की ओर प्रेरित करना.
सर्किट टूरिज्म Circuit Tourism
जब पर्यटकों की भीड़ एक ही जगह पर बढ़ उसे संभालना मुश्किल हो जाता है इसलिए पर्यटकों को एक ही जगह रुकने के बजाय एक ‘रूट’ देना चाहिए . इससे वे अलग-अलग गांवों और कस्बों में रुकते हैं, जिससे आर्थिक लाभ भी बंटता है. जैसे अगर आप शिमला घूमने आये तो रुकने के लिए कसौल चुने. यह शिमला से सिर्फ 45 मिनट है और आप दिन में शिमला घूम कर रात को कसौल के अपने होटल जाकर रुक सकते है इससे शिमला में भीड़ थोड़ी कम होगी.
सड़कों पर डिजिटल बोर्ड लगाना
इससे यह पता चलता रहेगा कि इस समय यहाँ कितनी भीड़ है? और पार्किंग है या नहीं? यह देख लोग खुद ही यहाँ आने से कतराएंगे.
आसपास की जगह में भी अच्छी सुविधा दें
अगर मेन अट्रैक्शन से थोड़ी दूर भी थोड़ी अच्छी सुविधा होगी तो लोग वहां रुकने में हिचकिचाएंगे नहीं. इसलिए अच्छे होटल्स, कैफे और शौचालय केवल मुख्य केंद्र में न होकर दूर-दराज के इलाकों में भी होने चाहिए.
ऑनलाइन बुकिंग को अनिवार्य करना
किसी भी पर्यटन स्थल पर आने के लिए पहले से स्लॉट बुक करने को अगर अनिवार्य कर दिया जाएँ तो पता चल जायेगा कि वहां कितनी भीड़ है और जाया जा सकता है या नहीं. जैसे कि जिम कॉर्बेट घूमने जाने पर जंगल सफारी के स्लॉट पहले ही बुक हो जाते है और उसी के आधार पर लोग वाहन जाते हाँ इसलिए वहां ज्यादा भीड़ नहीं होती है.
‘इको-टैक्स’ लेना
संवेदनशील इलाकों में प्रवेश के लिए ‘इको-टैक्स’ लेना, जिसका उपयोग उसी जगह के संरक्षण में किया जाए.
प्लास्टिक बैन का सख्ती से पालन
सिर्फ बोर्ड लगाने से काम नहीं चलता, ग्राउंड लेवल पर चेकिंग और विकल्प उपलब्ध कराना जरूरी है.
नियमों का सख्ती से पालन Strict Enforcement
जुर्माना (Fines)
सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने, गंदगी फैलाने या अशोभनीय व्यवहार पर भारी जुर्माना लगाएं. इससे गंदगी भी कम होगी.
स्पॉट फाइन (Spot Fine): अधिकारियों (मार्शल या टूरिज्म पुलिस) को मौके पर ही रसीद काटने और जुर्माना वसूलने की शक्ति मिलनी चाहिए.
बढ़ता हुआ जुर्माना: पहली बार गलती पर ₹500, दूसरी बार पर ₹5000 और तीसरी बार पर उस पर्यटन स्थल से बाहर करना या बैन करना.
तेज म्यूजिक बजने पर होटल पर लगे जुर्माना टूरिस्ट पर नहीं
कई बार होटल में पर्यटक आकर पार्टी करते है और पूरी रात हुड़दंग मचाते है लेकिन उसमें जितनी गलती पर्यटकों की है उससे ज्यादा होटल वालों की जिसने ये alow किया. अगर कोई देर रात तेज म्यूजिक चलता है, तो उस होटल पर जुरमाना लगना चाहिए ताकि वह अपने गेस्ट को समझा सकें और अगली बार अपने होटल में ये सब alow ना करें.
धयान दें-
पर्यटन स्थलों पर कूड़ा प्रबंधन (Waste Management) और सुविधाओं (Public Amenities) में सुधार केवल डस्टबिन रखने से नहीं, बल्कि एक पूरी ‘इको-सिस्टम’ बनाने से होगा. जब सुविधाएं विश्वस्तरीय और आसान होती हैं, तो पर्यटक भी नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित होते हैं. जुर्माने से मिलने वाली राशि को उसी जगह के विकास और सफाई कर्मचारियों के कल्याण पर खर्च किया जाना चाहिए, जिससे स्थानीय लोगों का भी समर्थन मिले.
