GHKKPM: सेट पर बेबी बंप में ‘पाखी’ का ये क्यूट वीडियो हुआ वायरल

सीरियल गुम हैं किसी के प्यार में (Ghum Hai Kisikey Pyaar Meiin) की कहानी दर्शकों को परेशान कर रही है. जहां एक तरफ शो में कुछ महीनों का लीप दिखने वाला है तो वहीं पाखी की डिलीवरी के चलते मेकर्स सीरियल में नए ट्विस्ट लाने वाले हैं. इसी सीरियल माहौल के बीच पाखी यानी एक्ट्रेस ऐश्वर्या शर्मा (Aishwarya Sharma) सेट पर मस्ती करते हुए नजर आईं. वहीं अपने बेबी बंप (Pakhi Baby Bump) को फ्लौंट करती दिखीं. आइए आपको दिखाते हैं क्यूट वीडियो…

बेबी बंप के साथ ऐसे की मस्ती

 

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हाल ही में पाखी यानी एक्ट्रेस ऐश्वर्या शर्मा ने अपना एक वीडियो फैंस के साथ शेयर किया है, जिसमें वह बेबी बंप में सीरियल के सेट पर मस्ती करती हुई नजर आ रही हैं. फैंस को एक्ट्रेस का ये क्यूट वीडियो बेहद पसंद आ रहा है और वह जमकर वीडियो पर कमेंट करते दिख रही हैं. इसके अलावा एक्ट्रेस ने बेबी बंप को फ्लौंट करते हुए भी फोटोज शेयर की हैं.

 

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पति को किया बर्थडे विश

 

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सीरियल के सेट पर मस्ती की वीडियो और फोटोज शेयर करने के साथ-साथ एक्ट्रेस ऐश्वर्या शर्मा ने विराट यानी अपने पति और एक्टर नील भट्ट को बर्थडे विश किया है, जिसके साथ एक प्यारा कैप्शन लिखते हुए पति को बर्थडे की बधाई दी है. वहीं नील भट्ट ने इस फोटो पर कमेंट करते हुए पत्नी को शुक्रिया अदा किया है. फैंस को कपल का ये क्यूट अंदाज काफी पसंद आ रहा है.

 

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सीरियल में आएगा नया ट्विस्ट

 

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सीरियल की बात करें तो  गुम हैं किसी के प्यार में की कहानी में कुछ महीनों का लीप देखने को मिला है, जिसके चलते सीरियल में पाखी की गोदभराई होती हुई दिख रही है. वहीं इस गोदभराई में सई और विराट को खुश होते देख पाखी जलती हुई दिख रही हैं. इसी के चलते वह सई के सामने खुलासा करेगी कि वह डिलीवरी के बाद उसे बच्चा नहीं देगी और यह भी कहेगी कि विराट खुद उसे बच्चा देगा, जिसे सुनकर सई के पैरों तले जमीन खिसक जाएगी. वहीं खबरों की मानें तो सीरियल में नए शख्स की एंट्री होने वाली है, जो पाखी की चैन की नींद को बर्बाद कर देगा.

अच्छा इंटीरियर मुनाफे का सौदा

मिठाई की दुकान से ले कर परचून की दुकान तक का इंटीरियर अब पहले से काफी बेहतर होने लगा है. जिन दुकानों में पहले इंटीरियर पर बिलकुल ध्यान नहीं दिया जाता था वहां भी अब मौडर्न स्टाइल का इंटीरियर होने लगा है. कपड़ों की शौप्स पहले से बदल गई हैं. फर्श हो या छत अब हर जगह का इंटीरियर अलग दिखने लगा है. सैलून के नाम पर पहले केवल महिलाओं के ब्यूटीपार्लर ही सजेधजे नजर आते थे पर अब पुरुषों के सैलूनों में भी इंटीरियर डिजाइन होने लगा है. सोशल मीडिया के जमाने में लोग जहां जाते है वहां के फोटो अपडेट करने की कोशिश करते हैं. अच्छा इंटीरियर मुफ्त में प्रचार का भी काम करता है.

इस बदलाव के क्या कारण हैं? यह जानने के लिए हम ने लखनऊ की रहने वाली मशहूर इंटीरियर डिजाइनर और और्किटैक्ट अनीता श्रीवास्तव से बात की:

शौप्स का मैनेजमैंट अच्छा हो जाता है

अनीता श्रीवास्तव कहती हैं, ‘‘सुंदर और सुव्यवस्थित माहौल हर किसी को पसंद आता है. ऐसा माहौल मन पर सुंदर छाप छोड़ता है. पहले शौप्स में सामान इधरउधर फैला होता था, जिस की वजह से गंदगी दिखती थी, सफाई करना मुश्किल हो जाता था. चूहे और कीडे़मकोडे़ सामान को नुकसान पहुंचाते थे. लाइटिंग की सही व्यवस्था नहीं होती थी. बिजली के उल?ो तारों से दुकानों में दुर्घटना हो जाती थी.

शौर्ट सर्किट से आग लग जाती थी. काम करने वालों को सही तरह से बैठने या खडे़ होने की जगह नहीं मिलती थी. हवा और रोशनी नहीं मिलती थी. अब इंटीरियर डिजाइनर शौप्स की जरूरत और वहां आने वाले कस्टमर की सुविधा को देखते हुए शौप्स को अच्छे से डिजाइन करते हैं. इस से काम करने वाले को सुविधा और कस्टमर को देखने में अच्छा लगता है.’’

बिजली का डिजाइनर सामान

इंटीरियर डिजाइनिंग में पहले बिजली का प्रयोग जरूरत के लिए होता था. आज के दौर में बिजली का ऐसा सामान आ गया है जो जरूरत के साथसाथ सुंदर भी लगता है. जहां जिस तरह की हवा और रोशनी की जरूरत होती है वहां उस का उपयोग किया जाने लगा है. बिजली के ऐसे उपकरण आ गए हैं जो कम वोल्टेज पर चलते हैं. इस से बिजली की बचत होने लगी है. हवा के लिए पंखे के साथसाथ एसी का प्रयोग होने लगा है. पीने का साफ पानी भी बिजली के प्रयोग से मिलता है.

इस का उपाय भी सही जगह होने लगा है. कम और ज्यादा रोशनी का प्रयोग जरूरत के हिसाब से हो इंटीरियर डिजाइन करते समय इस बात का खयाल रखा जाता है. बिजली चली जाए तो इनवर्टर, सोलर ऐनर्जी या जनरेटर का प्रयोग कैसे कमज्यादा हो इस का प्रबंध भी पहले से किया जाने लगा है.

अर्श से फर्श तक सब बदल गया

अनीता श्रीवास्तव कहती हैं, ‘‘आज इंटीरियर के लिए बहुत अच्छाअच्छा मैटीरियल मिलने लगा है, जो सस्ता भी है और अच्छी तरह तैयार हो जाता है, साथ ही हलका भी होता है. भले ही यह लकड़ी जैसा मजबूत और टिकाऊ न हो पर आज इंजीनियरवुड और प्लाई का उपयोग इंटीरियर में होने लगा है. सस्ता होने के कारण इसे जल्दी बदला जा सकता है.

‘‘कैमिकल का प्रयोग होने से दीमक नहीं लगती है. इंटीरियर में पेपर कार्डबोर्ड का प्रयोग होने लगा है. महंगी टाइल्स की जगह आकर्षक फ्लोरिंग मिलने लगी है. यह मैचिंग और मनचाहे रंग व डिजाइन की होने लगी है. फर्श से ले कर छत तक को नए रंगरूप में बदला जा सकता है.’’

बजट इंटीरियर

इंटीरियर डिजाइनर पहले डिजाइन तैयार कर लेता है उस के बाद वह बजट के अनुसार मैटीरियल चुनता है. डिजाइन का अब थ्रीडी फौर्मेट बन जाता है, जिस से पूरा इंटीरियर कैसा लगेगा यह पहले ही पता चल जाता है. जो अच्छा नहीं लगता उस को बदला जा सकता है. इंटीरियर में कुछ ऐसा शामिल किया जाता है जो पूरे इंटीरियर को हाईलाइट करता है. जैसे म्यूरल आर्ट का प्रयोग बढ़ गया है. ग्रीन माहौल दिखाने का प्रयास रहता है. स्पेस रहता है तो माहौल बेहतर होता है. लोग कंफर्टेबल फील करते हैं.

कार्यक्षमता को बढ़ाता है

इंटीरियर की उपयोगिता इसलिए बढ़ रही क्योंकि यह देखने वाले का आकर्षित करती है. कस्टमर यहां आने में कंफर्टेबल फील करता है. यहां काम करने वालों को जब साफ हवा, पानी, खुशनुमा माहौल मिलता है तो उन की कार्यक्षमता बढ़ती है.

पत्नियों की सफलता पर विवाद

वैवाहिक विवादों में पति क्याक्या आर्गूमैंट पत्नी का कैरेक्टर खराब दिखाने के लिए ले सकते हैं इस का एक उदाहरण अहमदाबाद में किया. 2008 में जोड़े का विवाह हुआ पर 2010 में पत्नी अपने मायके चली गई. बाद में पति दुबई में जा कर काम करने लगा. पत्नी ने जब डोमेस्टिक वौयलैंस और मैंनटेनैंस का मुकदमा किया तो और बहुत सी बातों में पति ने यह चार्ज भी लगाया कि उस की अब रूठी पत्नी के पौलिटिशयनों से संबंध है और वह लूज कैरेक्टर की है. सुबूत के तौर पर उस ने फेसबुक पर पत्नी और भाजपा के एक विधायक के फोटो दर्शाए.

कोर्ट ने पति की औब्जैक्शन को नकार दिया और 10000 मासिक का खर्च देने का आदेश दिया पर यह मामला दिखाता है कि कैसे पुरुष छोड़ी पत्नी पर भी अंकुश रखना चाहते हैं और उस के किसी जाने चले जाने के साथ फोटो को उस का लूज कैरेक्टर बना सकते हैं.

पत्नियों की सफलता किसी भी फील्ड में हो, पतियों को बहुत जलाती है क्योंकि सदियों से उन के दिमाग में ठूंसठूंस कर भरा हुआ है कि पत्नी तो पैर की जूती है. कितनी ही पत्नियां आज भी कमा कर भी लाती हैं और पति से पिटती भी हैं. ऐसे पतियों की कमी नहीं है जो यह सोच कर कि पत्नी आखिर जाएगी कहां, उस से गुलामों का सा व्यवहार करते हैं. जो पत्नी काम करने की इजाजत दे देते हैं, उन में से अधिकांश पत्नी का लाया पैसा अपने कब्जे में कर लेते हैं.

यह ठीक है कि आज के अमीर घरों की पत्नियों के पास खर्चने को बड़ा पैसा है, वे नईनई ड्रेसें, साडिय़ां, जेवर खरीदती हैं, किट्टी पाॢटयों में पैसा उड़ाती हैं पर यह सब पति बहलाने के लिए करने देते हैं ताकि पत्नी पूरी तरह उन की गुलाम रहे. ऐशो आराम की हैविट पड़ जाए तो पति की लाख जबरदस्ती सुननी पड़ती है.

गनीमत बस यही है कि आजकल लड़कियों के मातापिता जब तक संभव होता है, शादी के बाद भी बेटी पर नजर रखते हैं, उसे सपोर्ट करते हैं, पैसा देते हैं, पति की अति से बचाते है. यहां पिता ज्याद जिम्मेदार होते हैं मां के मुकाबले. मांएं साधारण या अमीर घरों में गई बेटियों को एडजस्ट करने और सहने की ही सलाह देती है.

पति को आमतौर पर कोई हक नहीं चाहिए कि वह अपनी पत्नी के कैरेक्टर पर उंगली भी उठाए, खासतौर पर जब पत्नी घर छोड़ चुकी हो और पति देश. पति ने अगर 10000 रुपए मासिक की मामूली रकम दे दी तो कोई महान काम नहीं किया.

Raksha bandhan Special: घर पर ऐसे करें मैनीक्योर और पैडीक्योर

खूबसूरत चेहरे के साथसाथ हाथों और पैरों का सुंदर होना भी बहुत जरूरी होता है. कोमल, नाजुक, खूबसूरत हाथों और पैरों की खातिर महिलाएं कितना कुछ करती हैं. कभी क्रीम, कभी उबटन, कभी सनस्क्रीन और अकसर ब्यूटीपार्लर जाना. मगर बारबार ब्यूटीपार्लर जा कर अपने हाथपैरों की खूबसूरती के लिए पैडीक्योरमैनीक्योर कराना काफी खर्चीला हो जाता है. इस से समय और पैसे दोनों की बरबादी होती है. इसलिए बेहतर है कि घर पर ही मैनीक्योरपैडीक्योर करती रहें ताकि आप अपने पूरे शरीर की खूबसूरती हमेशा बरकरार रख सकें.

मैनीक्योर क्यों जरूरी

सफाई के लिए जरूरी मैनीक्योर:

कोई भी काम करने में हमें अपने हाथों का उपयोग करना होता है जिस से उन में धूल और गंदगी लगना स्वाभाविक है. हम अपने हाथ नियमित रूप से साबुन से धो कर साफ करते हैं लेकिन यह हमारे नाखूनों में छिपी गंदगी को दूर नहीं करता. ऐसी गंदगी समय के साथ इकट्ठा होती जाती है और संक्रमण का कारण बन सकती है. नियमित मैनीक्योर नाखूनों में छिपी गंदगी और कीटाणुओं को दूर करने में मदद करती है.

मैनीक्योर से हाथ मुलायम बनते हैं:

मैनीक्योर के बाद हाथ इतने कोमल और मुलायम हो जाते हैं और रंग में निखार आता है कि आप को अपने ही हाथों से प्यार हो जाएगा. मैनीक्योर के दौरान होने वाली मसाज में स्क्रबिंग और ऐक्सफौलिएटिंग शामिल होती है जो आप के हाथों को एक बच्चे के हाथों की तरह नर्म और साफ कर देती है.

मैनीक्योर क्यूटिकल्स को पोषण देता है:

क्यूटिकल्स वह डैड स्किन है जो आप के नाखूनों के किनारे वाली स्किन के पास इकट्ठा होती है. यह आप के नाखूनों के आसपास की स्किन की मोटी परतों के बीच कीटाणुअवरोधक के रूप में कार्य करती है. यदि नियमित रूप से आप घर पर मैनीक्योर करती हैं तो यह क्यूटिकल्स को नर्म, पोषित और उन्हें अच्छे आकार में रखेगी.

रिलैक्सेशन के लिए मैनीक्योर:

नियमित मसाज आप को रिलैक्स रखने के लिए बहुत आवश्यक है. खासतौर पर आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में इस से पूरे शरीर को आराम मिलता है.

मैनीक्योर ब्लड सर्कुलेशन में सुधार करती है:

मात्र 15-20 मिनट की मालिश जोकि किसी भी मैनीक्योर का एक आवश्यक स्टैप है यह हमारे हाथों में रक्त के प्रवाह को उत्तेजित करती है और उंगलियों और कलाइयों के जोड़ों में गतिशीलता प्रदान करती है.

आइए, जानते हैं सिंपल तरीके से आप घर पर मैनीक्योरपैडीक्योर कैसे कर सकती हैं:

मैनीक्योर के लिए जरूरी टूल्स

नेलपौलिश रिमूवर, नेल फाइलर और कटर, कौटन पैड्स, क्यूटिकल क्रीम, क्यूटिकल पुशर, नेलपौलिश, हाथों को भिगो कर रखने के लिए एक बड़ा बाउल, शैंपू या बौडी वाश, नींबू का रस, शहद, घर पर मैनीक्योर स्क्रब बनाने के लिए चीनी, जैतून का तेल, नीबू का रस.

मैनीक्योर करने का तरीका

नेलपौलिश हटाएं और नाखूनों को ट्रिम करें:

सब से पहले अपने हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं और फिर एक अच्छे नेल पेंट रिमूवर और कौटन की मदद से पुराने नेल पेंट को हटा दें. लंबाई को कम करने के लिए नेल फाइलर से नाखूनों के कोनों को सैट करते हुए नाखूनों को ट्रिम करें. आप चाहें तो अपने नाखूनों को गोल, चौकोर या ओवल शेप दे सकती हैं.

हाथों को थोड़ी देर भिगो कर रखें:

एक बाउल में कुनकुना पानी भर लें. इस पानी में थोड़ा सा शैंपू डाल कर हाथों को 3-4 मिनट के लिए भिगो कर रख सकती हैं या फिर उस में 2 बड़े चम्मच शहद और 1 चम्मच नींबू का रस डालें. नीबू एक बेहतरीन डी-टैनिंग और व्हाइटनिंग एजेंट के रूप में काम करता है जबकि शहद एक अच्छा मौइस्चराइजर है. इस घोल में अपने हाथों को 5 मिनट के लिए भिगोएं और उन्हें सौफ्ट होने दें. एक सौफ्ट ब्रश से नाखून और क्यूटिकल्स साफ करें.

इस के बाद अपने नाखूनों में फाइलर के हैंडल का उपयोग कर के क्यूटिकल्स को प्रैस कर पीछे की तरफ करें.

स्क्रब करें:

वैसे तो आप घर पर कई तरह के मैनीक्योर स्क्रब बना सकती हैं, लेकिन सब से सरल और असरदार तरीका है नीबू, चीनी और जैतून के तेल का स्क्रब जो सभी प्रकार की स्किन के लिए उपयुक्त होता है. एक छोटी कटोरी में 2 चम्मच चीनी, 1/2 चम्मच जैतून का तेल और एक चम्मच नीबू का रस मिलाएं. जैतून का तेल आप के हाथों में नमी को बरकरार रखने में मदद करता है. अपने हाथों को 2 मिनट तक स्क्रब करें और फिर कुनकुने पानी से धो लें. फिर उन्हें एक नर्म तौलिए से सुखाएं.

क्लीयर नेलपौलिश लगाएं:

अब अपने नाखूनों पर नेलपौलिश लगाएं. पहले क्लियर नेलपौलिश से बेस कोट लगाएं. आप बेस कोट के लिए व्हाइट नेलपौलिश भी लगा सकती हैं. इस से आप का नेल कलर पौप होगा. बेस कोट लगाने से नेलपौलिश लंबे समय तक चलती है.

टौप कोट अप्लाई करें:

जब बेस कोट सूख जाए तो अपनी पसंद की नेलपौलिश का एक पतला कोट लगाएं. इसे सूखने के बाद एक और कोट लगाएं. इसे अच्छी तरह से सूखने दें और फिर इस के ऊपर क्लीयर नेलपौलिश की एक लेयर और लगाएं.

पैडीक्योर

हम दिन भर इतने सारे काम करते हैं, कितनी जगह जाते हैं, सीढि़यां चढ़ते हैं, दौड़तेभागते हैं, इन सारी गतिविधियों में सब से ज्यादा प्रभावित पैर ही होते हैं. इसलिए इन का खयाल रखना भी हमारी जिम्मेदारी बनती है. साफसुथरे और कोमल पैर शरीर की खूबसूरती बढ़ा देते हैं. पैरों की देखभाल का सब से अच्छा तरीका है पैडीक्योर. इस से न सिर्फ गंदगी दूर होती है बल्कि पैरों को आकर्षक भी बनाया जा सकता है.

पैडीक्योर के फायदे

पैडीक्योर एक कारगर ऐक्सफौलिएट के रूप में काम करता है, जिस से पैरों खासकर एडि़यों की मृत त्वचा आसानी से हट जाती है. साथ ही यह नाखूनों की पौलिशिंग भी करता है.

एडि़यों में दरार और सूखी त्वचा के लिए भी यह उपचार फायदेमंद है. पैडीक्योर दरारों को भरने और सूखी त्वचा से मृत कोशिकाओं को हटा कर आराम पहुंचा सकती है.

पैडीक्योर की प्रक्रिया में मसाज भी आती है. मसाज से पैरों खासकर तलवों और एड़ियों को आराम मिलता है. पैडिक्योर में की जाने वाली फुट मसाज से रक्तप्रवाह में सुधार होता है.

घर पर पैडीक्योर करने का तरीका

यह जरूरी नहीं है कि पैडीक्योर के लिए हमेशा पार्लर ही जाया जाए. कम समय और कम पैसे में घर पर भी पैडीक्योर कर सकती हैं.

घर पर पैडीक्योर करने की सामग्री:

एक टब में कुनकुना पानी, फुट स्क्रब, नेल क्लिपर, क्यूटिकल पुशर, नेल फाइल, प्यूमिक स्टोन/फुट फाइल, नेल स्क्रबर, नेलपौलिश रिमूवर, क्यूटिकल क्रीम, एक साफ तौलिया, मौइस्चराइजर, कौटन पैड, शहद, मौइस्चराइजिंग क्रीम, नीबू कटे हुए.

नाखूनों को ट्रिम और फाइल करें:

नाखूनों को साफ करने के बाद अतिरिक्त बाहर निकले नाखूनों के हिस्सों को नेल कटर से काटें. नाखून को बराबर तरीके से काटें ताकि ये देखने में भद्दे न लगें. नाखूनों को खास शेप भी दे सकती हैं जैसे चौकोर, अंडाकार, नुकीला. नाखून काटने के बाद नेल फाइलर से धीरेधीरे नाखूनों को फाइल कर अच्छी शेप दें.

पैरों को पानी में डुबोएं:

नाखूनों को काटने के बाद अब पैरों को आराम देने के लिए उन्हें हलके गरम पानी में कुछ देर डुबा कर रखें. इस के लिए एक टब को हलके गरम पानी से भर दें और इस में थोड़ा सौल्ट या माइल्ड क्लींजर डाल दें. यह पैरों को भरपूर आराम देने का काम करता है, जिस से पैरों की सूजन व जलन ठीक हो जाती है और पैर मुलायम नजर आते हैं. आप इस पानी में नीबू का रस या ऐसैंशियल औयल की कुछ बूंदें भी पानी में डाल सकती हैं. नीबू और ऐसैंशियल औयल ऐंटीबैक्टीरियल व ऐंटीफंगल गुणों से समृद्ध होते हैं जो किसी भी तरह के बैक्टीरियल या फंगल के प्रभाव को कम कर सकते हैं. गरम पानी में पैरों को डुबो कर रखने की प्रक्रिया पैरों को आराम देने के साथसाथ रक्तसंचार को बढ़ावा देने में भी सहायक है. पैरों को पानी में कम से कम 15 मिनट तक रखें और बाद में साफ तौलिए से पोंछ लें.

पैरों को स्क्रब करें:

पैर सूख जाने के बाद नाखूनों पर क्यूटिकल क्रीम लगाएं और कुछ देर धीरेधीरे मसाज करें. जब मृत त्वचा नर्म हो जाए तो क्यूटिकल पुशर की मदद से क्यूटिकल्स को हटा कर साफ करें. अब पैरों की मृत त्वचा को हटाने के लिए फुट स्क्रब का इस्तेमाल करें. लगभग 3-4 मिनट तक एडि़यों, तलवों, पैरों की उंगलियों और बाकी जगह को धीरेधीरे स्क्रब करें.

पैरों को मौइस्चराइज करें:

अब पैर बिलकुल साफ हैं, लेकिन इन को मौइस्चराइज करना बहुत जरूरी है. मौइस्चराइजर लगाने से पहले लगभग 10 मिनट तक पैरों, एडि़यों और नाखूनों की हलकी मसाज करें. अगर मौइस्चराइजर नहीं है तो जैतून तेल का प्रयोग कर सकती हैं.

दिल को सेहतमंद रखेंगे ये 5 सुपर हैल्दी औयल

जब भी हम कुकिंग औयल खरीदने जाते हैं तो यही देखते हैं कि उस का प्राइस क्या है. जिस औयल का दाम हमें कम लगता है हम अकसर उसे ही खरीदते हैं बिना यह जाने कि यह हमारी हैल्थ के लिए ठीक है भी या नहीं. जबकि औयल का सीधा संबंध हमारी हैल्थ व हार्ट से जुड़ा होता है. इसलिए यह सम झना बहुत जरूरी है कि कुकिंग औयल का चयन सावधानी से करें ताकि आप का खाना टेस्टी बनने के साथसाथ आप के दिल की सेहत भी ठीक रहे.

आप को यह जान कर हैरानी होंगी कि भारत में हर साल 12 लाख के करीब यंगस्टर्स को हार्ट अटैक के कारण जान जान चली जाती है, जो काफी चिंताजनक आंकड़ा है. इसलिए समय रहते संभलने की जरूरत है.

तो आइए, जानते हैं कि कौन सा कुकिंग औयल हमारी सेहत के लिए अच्छा है:

सैचुरेटेडअनसैचुरेटेड औयल

हारवर्ड मैडिकल स्कूल की एक रिसर्च के अनुसार, अगर हमें अपने हार्ट को दुरुस्त रखना है, तो हमें अनसैचुरेटेड औयल यानी गुड फैट, जिसे पोली अनसैचुरेटेड फैट और मोनो अनसैचुरेटेड फैट में कहा जाता है, का सेवन कर सकते हैं. यह रूम टैंपरेचर पर लिक्विड होता है. ओमेगा 3 फैटी ऐसिड्स, जो अनसैचुरेटेड फैट्स होते हैं, वे हमारी हैल्थ के लिए काफी अच्छे माने जाते हैं. ये फैट्स हार्ट अटैक और स्ट्रोक के खतरे को काफी कम कर देते हैं, साथ ही ये शरीर में ट्रिग्लीसेरिडेस लैवल को भी काफी कम कर देते हैं.

इस के अलावा शरीर में बैड कोलैस्ट्रौल की मात्रा को कम कर के गुड कोलैस्ट्रौल की मात्रा को बढ़ाने का काम करते हैं. इस के साथ ही यह हमारे ब्लड प्रैशर लैवल को कंट्रोल करने व हमारी आर्टरीज को हार्ड नहीं होने देते. वहीं दूसरी तरफ सैचुरेटेड फैट्स, जिन्हें बैड फैट्स भी कहते हैं, हमें इन्हें खाने से परहेज करना चाहिए और अगर खाएं भी तो काफी कम मात्रा में खाएं क्योंकि ये हमारे कोलैस्ट्रौल को बढ़ाने का काम करते हैं.

ये फैट्स रूम टैंपरेचर पर सौलिड होते हैं. आप को आर्टिफिशियल ट्रांस फैट्स से एकदम दूरी बना कर रखनी चाहिए क्योंकि ये हार्ट अटैक, स्ट्रोक, कैंसर, मोटापा आदि को बढ़ाने का काम करते हैं.

इन्फौर्मेटिव फैक्ट

अगर आप के शरीर को रोजाना 2000 कैलोरीज की जरूरत है तो आप को उस की 20-25% कैलोरीज फैट से लेनी चाहिए और कोशिश करनी चाहिए कि यह फैट अनसैचुरेटेड फैट ही हो और अगर सैचुरेटेड फैट ले रहे हैं तो उस की लिमिट तय करे यानी सिर्फ 5-6% ही लें.

कौन सा औयल है हार्ट के लिए सेहतमंद

औलिव औयल:

विशेषज्ञ व न्यूट्रिशनिस्ट्स की सलाह के अनुसार औलिव औयल सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है. इसलिए आप इसे कुकिंग के लिए बिना सोचेसम झे चुन सकते हैं. असल में यह औयल मोनोअनसैचुरेटेड होता है और औलिव औयल में ओलिक ऐसिड नाम का प्रमुख फैटी ऐसिड होता है, जो शरीर में सूजन, कैंसर और हार्ट की बीमारी से बचाने में मदद करता है. साथ ही इस में बड़ी संख्या में पावरफुल ऐंटीऔक्सीडैंट्स होते हैं, जो आप के ब्लड कोलैस्ट्रौल को औक्सिडेशन से बचा कर दिल की बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम करने का काम करते हैं.

दुनिया में स्ट्रोक से मृत्यु होना दूसरा बड़ा कारण है. एक रिसर्च में करीब डेढ़ लाख लोगों को शामिल किया गया, जिस में पाया गया कि जिन लोगों ने लगातार औलिव औयल का सेवन किया, उन में स्ट्रोक का खतरा काफी कम देखा गया.

औलिव औयल ब्लड प्रैशर व बैड कोलैस्ट्रौल को कंट्रोल करने के साथसाथ ब्लड वैसल्स के फंक्शन को इंपू्रव कर के आप के दिल को भी सेहतमंद बनाने का काम करता है. इस में एंटीकैंसर प्रौपर्टीज कैंसर के खतरे को भी काफी हद तक टालने में मददगार होती हैं. इसलिए कुकिंग में औलिव औयल का इस्तेमाल है फायदेमंद.

कैनोला औयल:

अगर आप हार्ट या कोलैस्ट्रौल की बीमारी से ग्रस्त हैं या फिर खुद को इस से बचाना चाहते हैं, तो केनोला औयल आप के लिए सब से सेफ व हैल्दी औप्शन है क्योंकि इस में है गुड फैट्स के साथसाथ विटामिन ए और विटामिन के की खूबियां और ये कोलैस्ट्रौल फ्री भी हैं. इन में अनसैचुरेटेड फैट्स होने के साथसाथ इन में बड़ी मात्रा में ओमेगा 3 फैटी ऐसिड अल्फा लिनोलेनिक ऐसिड होता है, जो आप के ब्लड प्रैशर, कोलैस्ट्रौल सूजन को कंट्रोल कर के आप के हार्ट का खास ध्यान रखने का काम करता है.

बहुत सारी हैल्थ और्गेनाइजेशन ने कैनोला औयल को हार्ट स्मार्ट औयल बताया है क्योंकि इस में 0% ट्रांस फैट होने के साथसाथ हाई लैवल औफ मोनोअनसैचुरेटेड फैट होता है, जो आप को दिल व डायबिटीज जैसी जानलेवा बीमारियों से दूर रखने का काम करता है.

एवोकाडो औयल:

इस में बहुत ज्यादा मात्रा में मोनोअनसैचुरेटेड फैट होता है यानी इस में हैल्दी फैट्स के साथसाथ ऐंटीऔक्सीडैंट्स होते हैं, जिन का सीधा संबंध बैड कोलैस्ट्रौल के लैवल को कम करने के साथसाथ गुड कोलैस्ट्रौल के लैवल को बढ़ाने का भी काम करता है. 70% एवोकाडो औयल में हार्ट की हैल्थ का ध्यान रखने वाला ओलिक एसिड होता है. कोलैस्ट्रौल का स्तर सामान्य रहने से हार्ट सही ढंग से कार्य करने में सक्षम हो पाता है.

साथ ही इस औयल की खासीयत यह है कि इस में काफी मात्रा में मोनोअनसैचुरेटेड फैट होता है, जो पोषण तत्त्वों के अवशोषण में मदद करता है, साथ ही इस में पौलीफिनोलिस नामक ऐंटीऔक्सीडैंट फ्री रैडिकल्स से शरीर को सुरक्षा प्रदान करने में भी सहायक होता है. यह औयल न सिर्फ हार्ट के लिए बल्कि आप की ओवरऔल हैल्थ के लिए फायदेमंद होता है.

सनफ्लौवर औयल:

अनेक स्टडीज में पाया गया है कि सनफ्लौवर औयल में 80% अनसैचुरेटेड फैट्स होते हैं, जो हार्ट के लिए काफी अच्छे माने जाते हैं. इस में सैचुरेटेड फैट्स नहीं होते हैं. जिन से ये शरीर में कोलैस्ट्रौल लैवल को भी कंट्रोल करने में मददगार होते हैं. ये सैचुरेटेड फैट्स के मुकाबले में तुरंत शरीर को ऊर्जा प्रदान करने का भी काम करते हैं. साथ ही इस में मौजूद ऐंटीऔक्सीडैंट्स इम्यून सिस्टम को मजबूती प्रदान करते हैं, जिस से बैक्टीरिया व वायरस आसानी से शरीर में प्रवेश नहीं कर पाते हैं. इस में मौजूद प्रोटीन टिशूज की रिपेयर करने व बनाने में सहायक होते हैं.

सीसम औयल:

सीसम औयल ऐंटीऔक्सीडैंट्स से लोडेड होने के साथसाथ इस में विटामिन ई, फीटोस्टेरोल्स होने, सेसमोल और सेसमिनोल तत्त्व होते हैं, जो आप के शरीर में फ्रीरैडिकल्स से लड़ने में मदद करते हैं. इस में संतुलित मात्रा में ओमेगा 3, ओमेगा 6 व ओमेगा 9 फैटी ऐसिड्स होते हैं. ये हार्ट डिजीज को बढ़ने से रोकने का काम करते हैं.

स्टडीज के अनुसार, सीसम औयल हाई कोलैस्ट्रौल लैवल को कम करता है, जिस से दिल से संबंधित बीमारियों का खतरा कम हो जाता है. इस में 41% पोलीअनसैचुरेटेड फैट 39% मोनोअनसैचुरेटेड फैट होता है. तभी इस औयल को दिल के लिए काफी अच्छा माना जाता है. साथ ही यह मैग्नीशियम का अच्छा स्रोत होने के कारण ब्लड प्रैशर को कंट्रोल करने का काम भी करता है.

शिकस्त: क्या दोबारा रिश्तों पर भरोसा कर पाई रेहाना

family story in hindi

आगाज- भाग 1: क्या हुआ था नव्या के साथ

शिकागो में एक बड़ी कंपनी में ब्रांच मैनेजर के पद पर कार्यरत नव्या अपने स्टूडियो अपार्टमैंट में बीन बैग पर एक मुलायम कंबल में दुबकी टीवी पर अपना

पसंदीदा टौक शो देख रही थी कि तभी बैल बजी. उस ने अलसाते हुए उठ कर दरवाजा खोला.

उस के सामने दुनिया के 8वें अजूबे के रूप में उस का एक जूनियर

सेल्स ऐग्जिक्यूटिव हाथों में सुर्ख ट्यूलिप्स का एक बुके लिए खड़ा था. ‘‘हाय नैवेद्य, तुम यहां? तुम्हें मेरे घर का पता किस ने दिया?’’ नव्या के स्वर में तनिक तुर्शी घुल आई थी.

वह अपनी व्यक्तिगत और प्रोफैशनल लाइफ अलगअलग रखने में विश्वास रखती थी. अपने जूनियर ट्रेनी को अपने दरवाजे पर यों शाम के वक्त

देख वह तनिक खीज सी गई, लेकिन अगले ही क्षण अपनी इरिटेशन को छिपाते हुए वह अपने स्वर को भरसक सामान्य बना उस से बोली, ‘‘आओ… आओ…

भीतर आओ.’’

‘‘थैंक्यू नव्या,’’ कहते हुए नैवेद्य उस के ठंडे लहजे से तनिक हिचकिचाते हुए कमरे में घुसा.

‘‘बैठोबैठो. बताओ कैसे आना हुआ?’’ उस की

असहजता भांपते हुए नव्या ने इस बार तनिक नर्मी से पूछा.

उस के सामान्य लहजे से नैवेद्य की अचकचाहट खत्म हुई और वह उस की ओर अपने हाथों में थामा

हुआ बुके बढ़ाता हुआ अपने चिरपरिचित हाजिरजवाब अंदाज में एक नर्वस सी मुसकान देते हुए बोला, ‘‘यह तुम्हारे लिए नव्या.’’

‘‘मेरे लिए? अरे भई किस

खुशी में? मैं कुछ समझी नहीं.’’

‘‘बताऊंगा नव्या, बहुत लंबी कहानी है.’’

‘‘व्हाट? लंबी कहानी है, अरे भई, यह सस्पेंस तो क्त्रिएट करो मत. बता डालो जो भी

है,’’ लेकिन नैवेद्य इतनी जल्दी मन की बात जुबान पर लाने में हिचक  रहा था.

तभी नव्या का कोई जरूरी फोन आ गया और वह उसे अटैंड करने अपार्टमैंट में

लगे पार्टीशन के पार चली गई.

नैवेद्य अपने खयालों की दुनिया में खो गया…

वह और नव्या एक ही कंपनी में सेल्स विभाग में थे. नव्या उस की ब्रांच मैनेजर थी और

वह उस के मातहत एक सेल्स ऐग्जिक्यूटिव. उन दोनों का साथ लगभग 1 साल पुराना था.

नैवेद्य अपनी नौकरी की शुरुआत से उस के प्रति एक तीव्र खिंचाव महसूस करता आ रहा था. जब भी वह उस के साथ होता, उस से बातें करना, उस के इर्दगिर्द रहना बेहद अच्छा लगता. औफिस में उस की उपस्थिति मात्र से वह मानो खिल जाता. पहली नजर में उस से प्यार तो नहीं हुआ था, लेकिन हां पहली बार में ही उस से नजरें मिलाने पर न जाने क्यों उस के हृदय की धड़कन तेज हो आईं. वक्त

के साथ उस का सौम्य, सलोना, संजीदा चेहरा दिल की गहराइयों में उतरता गया.

पिछले सप्ताह ही कंपनी की सेल्स ट्रेनिंग कौन्फ्रैंस खत्म हुई थी. उस में उस के साथ

कुछ दिनों तक निरंतर रहने का मौका मिला. नव्या ने ही उस के ग्रुप की ट्रेनिंग ली थी.

ट्रेनिंग खत्म होतेहोते वह पूरी तरह से नव्या के प्यार में डूब चुका था. इतना

कि शाम को ट्रेनिंग से घर लौटता, तो एक अबूझ से खालीपन की अनुभूति से भर जाता. उस का दिल उस के बस में नहीं रहा था. उस का मन करता कि नव्या हर

समय उस की आंखों के सामने रहे. जबजब वह उस के पास होता, मन में जद्दोजहद चलती रहती कि वह उस के प्रति अपनी फीलिंग का उस से खुलासा कर दे,

लेकिन औफिस में नव्या का उस के समेत सभी ट्रेनीज के प्रति उस का पूरी तरह से प्रोफैशनल रवैया देख उस की उस से इस मुद्दे पर कुछ कहने की हिम्मत नहीं

होती.

मगर उस दिन सेल्स ट्रेनिंग कौन्फ्रैंस के आखिरी दिन कुछ ऐसा हुआ कि वह उस से

अपने प्यार का इजहार करने आज उस के घर तक चला आया.

उस दिन

दोपहर लंच होने से पहले ही कौन्फ्रैंस औपचारिक रूप से खत्म हो गई

थी और औफिस कैंटीन में सब हलकेफुलके माहौल में एकसाथ लंच करने लगे.

लंच करते वक्त

एक साथी ट्रेनी ने अपनी शादी का कार्ड नव्या और सभी ट्रेनीज को दिया.

उस की शादी से बातों का रुख मैरिज, प्यार, मुहब्बत, अफेयर की ओर मुड़ गया.

उस दिन

नव्या भी खासे रिलैक्स्ड मूड में

थी और सब के साथ हंसतेमुसकराते हुए बातें कर रही थी.

उसी चर्चा के दौरान नव्या ने एक साथी ट्रेनी से पूछा, ‘‘तुम्हारी शादी नहीं

हुई अभी तक?’’

‘‘नहीं नव्या. अभी तक मैं उस खास की तलाश में हूं, जिस के साथ पूरी जिंदगी बिता सकूं.’’

‘‘ओह, अभी तक तुम्हें कोई भी लड़की ऐसी

नहीं मिली, जिस ने तुम्हारे दिल के तारों को छुआ हो?’’

‘‘नव्या, बहुत पहले जब मैं बस 17-18 साल का था, एक लड़की को अपना बनाने की शिद्दत से

तमन्ना हुई थी, लेकिन तभी मुझे पता चला कि उस का औलरेडी कोई बौयफ्रैंड है. बस तब जो मेरा दिल टूटा, तो आज तक नहीं जुड़ पाया. आज तक टूटा दिल ले

कर घूम रहा हूं.’’

‘‘ओह, अभी तक… वैरी सैड.’’

तभी अचानक नव्या ने अभी के साथ बैठे उस से भी अपना प्रश्न कर डाला, ’’और भइ नैवेद्य, तुम भी तो

कुछ अपनी सुनाओ? तुम

अभी तक सिंगल हो या किसी के साथ

कमिटमैंट में?’’

‘‘नव्या मुझे लड़की तो मिल गई है, लेकिन उस से अपने प्यार का इजहार करने

की हिम्मत नहीं होती मेरी.’’

‘‘क्यों, कोई हिटलर है क्या, जो तुम उस से इतना डरते हो?’’

‘‘नहीं, हिटलर तो नहीं है वह. मेरा लगभग रोजाना ही उस से

काफी मिलनाजुलना होता रहता है, पर पता नहीं क्यों उस से कभी मन की बात कह ही नहीं पाया. इस स्थिति में मुझे क्या करना चाहिए, तुम ही बताओ.’’

उस की

ये बातें सुन वह हो हो कर जोर से हंस पड़ी.

उसे यों हंसता देख कर उस की हिम्मत बढ़ी और वह उस से पूछ बैठा, ‘‘बताओ न नव्या. मैं भी अपने इस एकतरफा

प्यार से बेहद परेशान हो गया हूं.’’

‘‘अरे भई, मेरा तो मानना है, जो डर गया, वह मर गया. तो आज ही उस से अपनी फींिलग शेयर कर डालो और हां, अगर

लड़की पट जाए तो मुझे मिठाई खिलाना मत भूलना.’’

‘‘नहींनहीं, बिलकुल नहीं. थैंक यू सो मच नव्या,’’ और नव्या ने फिर से खिलखिलाते हुए उसे जवाब

दिया, ‘‘मोस्ट वैलकम नैवेद्य, माई प्लेजर.’’

बस उसी दिन उस ने मन ही मन सोच लिया कि वह आज ही उस के घर जाएगा और उस से अपने मन की बात

शेयर करेगा और इसीलिए वह अभी नव्या के घर पर था.

तभी नव्या फोन पर अपनी बातचीत खत्म कर उस के पास आ गई.

‘‘हां नैवेद्य, तुम मुझे कुछ बताने वाले

थे.’’

नव्या की इस बात पर वह बेहद नर्वस महसूस कर रहा था कि तभी जेहन में उसी के उस दोपहर को हुए शब्द गूंजे कि जो डर गया, वह मर गया और बहुत हिम्मत जुटा कर तनिक घबराते हुए वह बोला, ‘‘नव्या… नव्या मुझे तुम से प्यार हो गया है.’’

‘‘क्या…क्या… क्या बोला तुम ने? तुम्हें मुझ से प्यार हो गया है.

व्हाट रबिश,’’ और यह कहते हुए वह जोर से खिलखिला उठी. ‘‘सीरियसली? आर यू किडिंग?’’

सालते क्षण: दिनेश भाई के साथ क्यों थी मां

पुराने सालते क्षण जीवनभर के लिए रह जाते हैं, खासकर तब, जब ऐसे पारिवारिक रिश्ते हों जो उन क्षणों को घटाने की जगह एक ऐसा क्षण और जोड़ दें जो ताउम्र कचोटता रहे. ऐसे ही सड़ेगले रिश्तों के पसोपेश की उधेड़बुन है यह कहानी 5 वर्षों के निर्वासन के बाद मैं फिर यहां आया हूं. सोचा था, यहां कभी नहीं आऊंगा लेकिन प्राचीन सालते क्षणों को नए परिवेश में देखने के मोह का मैं संवरण न कर पाया था. जीवन के हर निर्वासित क्षण में भी इस मोह की स्मृति मेरे मन के भीतर बनी रही थी और मैं इसी के उतारचढ़ाव संग घटताबढ़ता रहा था. फिर भी आज तक मैं यह न जान पाया कि यह मोह क्यों और किस के प्रति है? हां, एक नन्ही सी अनुभूति मेरे मन के भीतर अवश्य है जो मु झे बारबार यहां आने के लिए बाध्य करती रही है. यह अनुभूति मां के प्रति भी हो सकती है और अमृतसर की इस धरती के प्रति भी जिस की मिट्टी में लोटपोट कर मैं बढ़ा हुआ.

इसे ले कर मैं कभी एक मन नहीं हो पाया था. यदि हो भी पाता तो भी मु झे बारबार यहां आना पड़ता. बस से मैं बड़ी बदहवासी में उतरा. बदहवासी यहां आने की कि वे क्षण जिन के लिए मैं यहां आया हूं, अपने परिवेश में यदि ज्यों के त्यों हुए तो जो निरर्थकता मन के भीतर आएगी, उस का सामना कैसे कर पाऊंगा? बाद में हाथ में पकड़े ब्रीफकेस में सहेज कर रखी नोटों की गड्डी से मु झे बल मिलता है. थोड़ी देर के लिए मैं इस एहसास से मुक्त हो जाता हूं कि अब मैं मां का निखट्टू पुत्र नहीं हूं. निखट्टू मेरा उपनाम है. इस के साथ ही मु झे याद हो आते हैं मेरे दूसरे उपनाम भी. सीधा और भोला होने के वश रखा गया ‘भलोल’ उपनाम. सदा नाक बहती रहने के वश रखा ‘दोमुंही’ उपनाम. इन उपनामों से बारबार चिढ़ाने से मेरा जो रुदन निकलता तो मां से ले कर छोटे भाई तक को गली में लड़ती कौशल्या की आवाज का आभास होता था. 9वीं में मेरे कौशल्या उपनाम की बड़ी चर्चा थी.

मेरे मन में यह प्रश्न उस समय भी था और आज भी है कि अगर मैं भलोल हूं या मेरी नाक बहती है तो इस में मैं कहां दोषी हूं? और यह भी कि, मेरी दुर्दशा करने वाले मेरे अपने कहां हुए? अब सोचता हूं मेरा इन के साथ केवल रोटीकपड़े तक का संबंध रहा है. वह भी इस घर में पैदा हुआ हूं शायद इसलिए. मु झे पता ही नहीं चला कि कब संगम सिनेमा से गुजर कर पिंगलबाड़े तक पहुंच गया था. पिंगलबाड़े से मुड़ने पर पहले तहसील आती है. छुट्टी के रोज भी यहां भीड़ रहती है. जमघट लगा रहता है. मुकदमे ही मुकदमे. मुकदमे अपनों पर जमीनों के लिए. कत्लों के मुकदमे. तारतार होते रिश्ते. बेहिसाब दुश्मनी, कोई अंत नहीं. मैं जल्दी से आगे बढ़ जाता हूं. आगे वह क्रिकेट ग्राउंड आता है जिस पर मैं बचपन में अपने साथियों संग क्रिकेट खेला करता था. मां कहती, क्रिकेट ने मेरी पढ़ाई ले ली.

मैं कैसे कहता कि बड़े भाई की नईनई शादी, एक ही कमरे में परदे लगा कर उन के सोने का बंदोबस्त, रातभर चारपाई की चरमराहट, परदे के पीछे के दृश्यों की परिकल्पनाओं ने मु झे पढ़ने नहीं दिया था. पढ़ने के लिए मैं मौडल टाउन चाचाजी के पास और चालीस कुओं पर भी जाता पर परदे के पीछे की परिकल्पनाएं मेरा पीछा नहीं छोड़ती थीं. धीरेधीरे मैं पढ़ने में खंडित होता गया था. परीक्षा परिणाम आया तो मैं फेल था. पढ़ने के लिए जब फिर दाखिला भरा तो बड़े भाई का मत बड़ा साफ था, ‘तुम्हें अब की बार याद रखना होगा. व्यक्ति कारखाने में पैसा तब लगाता है जब उसे लाभ दिखाई दे.’ विडंबना देखें, जब यही बात राजू भाई ने इन्हें कही थी तो सब के सम झाने और मनाने पर भी पढ़ाई छोड़ दी थी. राजू भाई केवल यही चाहते थे कि कुक्कु का चक्कर छोड़ कर अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे. आज वही शब्द कहने से वे बिलकुल नहीं हिचकचाए थे. राजू भाई ठीक कहते थे, जिस बात का विरोध आज हम अपनी जान दे कर करते हैं, कोई समय आता है हम परिस्थितियों द्वारा इतने असहाय होते हैं कि उसी बात को बिना शर्त स्वीकार कर लेते हैं. उस समय उन की यह बात सम झ में नहीं आई थी.

आज समझ में आती है. मैं ने भी पढ़ाई छोड़ दी थी. इसलिए नहीं कि मु झे उन की बात सम झ में आ गई थी, बल्कि इसलिए कि बड़े भाई के शब्द मु झ से सहन नहीं हुए थे. बड़े भाई को भी शायद राजू भाई के यही शब्द सहन नहीं हुए होंगे. हम दोनों एकदूसरे की बात सहन कर लेते तो शायद हालात दूसरे होते. देखता हूं क्रिकेट ग्राउंड भी अब वहां नहीं है. सोचा था, जब मैं वहां पहुंचूंगा तो बच्चे पहले की तरह खेलते मिलेंगे. उन को खेलते देख मैं अपने बचपन के दिनों को याद कर लूंगा. वहां एक सुंदर बंगला हुआ करता था. और भी कई सुंदर बंगले बन गए थे. मैं किसी को कुछ कह नहीं सकता था. बच्चों के उल्लास तो आएदिन खत्म किए जाते हैं. बड़े भारी मन से मैं अपनी गली की ओर बढ़ता हूं. गली के मोड़ तक आतेआते मेरे पांव ढीले पड़ जाते हैं. आगे बढ़ने की इच्छा नहीं होती. गली के लोग मु झे निखट्टू नाम से जानते हैं. मु झे देखते ही आग की तरह यह खबर फैल जाएगी. न जाने समय के कौन से क्षणों में मेरा नाम निखट्टू पड़ा.

इस नाम से पीछा छुड़ाने के लिए मैंने मोटर मैकेनिकी, कुलीगीरी, रिक्शा चलाने से ले कर होटल में बरतन मांजने तक के काम किए. पर इस निखट्टू नाम से पीछा नहीं छूटा, चाहे तन के सुंदर कपड़े और नोटों से भरा ब्रीफकेस मु झे एहसास दिलाता है कि अब मैं मां का निखट्टू पुत्र नहीं रहा हूं. जानता हूं मैं मन की हीनभावना से छला गया हूं. यही भावना मु झे बल देती है. गली में झांक कर देखता हूं कि जिस बात की अपेक्षा थी वैसा कुछ नहीं था. गली में मु झे कोई दिखाई नहीं दिया था. सबकुछ बदल गया था. महाजनों का घर और बड़ा हो गया था. पहले हौजरी की एक मशीन हुआ करती थी, अब बहुत सी मशीनें लग गई हैं. गली भी पक्की हो गई है. मंसो की भैंसों के कारण जहां गंदगी फैली रहती थी, मु झे गली में कहीं भैंस दिखाई नहीं दी थी. घर के समीप पहुंचा तो मैं चकरा गया. हमारा घर कहां गया? उस की जगह खूबसूरत दोमंजिला मकान खड़ा था. मैं ने इधरउधर देखा कि कोई पहचान वाला मिले तो पूछूं कि दिनेश साहनी का घर यही है? एकाएक ऊपर लिखे ‘साहनी विला’ पर मेरी नजर पड़ी. दरवाजे पर एक ओर बड़े भाई के नाम की तख्ती भी दिखाई दे गई. भाई के नाम के नीचे लगी घंटी दबाने पर किसी अंजान महिला ने दरवाजा खोला. वह कपड़ों से नौकरानी लग रही थी. मु झे देख कर शायद वह यह पूछती कि आप को किस से मिलना है कि इतने में ‘‘कौन है?’’ कहती हुई मां दरवाजे तक चली आईं. मु झे देख कर आश्चर्य के भाव उन के चेहरे पर आए, फिर सामान्य हो गईं. मुख से निखट्टू निकलतेनिकलते रह गया पर निकला नहीं.

मां को देख कर नौकरानी सी लगने वाली भीतर चली गई. मां ने दरवाजा पूरा खोल दिया. मैं उस को प्रणाम करने के बाद बड़े अनमने भाव से भीतर चला आया. कदम रखते ही आंखें चुंधिया गईं. पूरे कमरे में ईरानी कालीन, एक ओर बड़ी सी डाइनिंग टेबल, दरवाजे के पास चमकदार फ्रिज, एक तरफ सोफा व बैड, गद्देदार कुरसियां और टीवी. टीवी के पीछे वाली दीवार पर मोतियों से बनाई गई एक औरत की आकृति फ्रेम की गई थी. मैं आगे नहीं बढ़ पाया. न ही मां ने मु झे बढ़ने के लिए कहा. बैठने के लिए भी नहीं कहा. मैं ने महसूस किया कि मु झे बैठाने से ज्यादा उस को यह बताने की चिंता है कि सारा सामान जिसे देख कर हैरान हूं, कहां से और कैसे आया है? मां बोली, ‘‘ये सारा सामान दिनेश ने फौरेन से मंगवाया है. यह ईरानी कालीन अभी पिछले महीने ही आया है. टीवी और फ्रिज बहुत पहले आ गया था.

पूरे 10 लाख रुपए लगे हैं.’’ मैं ने महसूस किया, मेरे ब्रीफकेस में पड़ी रकम एकदम छोटी है. जो रकम मां ने बताई थी, उस से दोगुनी छोटी. इन 5 वर्षों में जो क्षण मु झे सालते रहे हैं वे और बड़े हो गए हैं. जाने कहां से पीड़ा की एक तीखी अनुभूति भीतर से उठी और भीतर तक चीरती चली गई. पीड़ा इसलिए कि निखट्टू उपनाम से मुक्ति पाने की जो इच्छा ले कर यहां आया था, वह जाती रही. बैठक और ड्योढ़ी मिला कर ड्राइंगरूम में इतनी कीमत की चीजें हैं तो भीतर के कमरों में जाने क्याक्या देखने को मिले. मां ने बताया, ‘‘अपनी पत्नी के सारे गहने बेच कर जिस होटल में तुम बरतन मांजते थे उसी होटल को खरीद लिया था. यह उसी की करामात है कि हमें कोई कमी नहीं है.’’ ऐसे कहा जैसे अब भी उसी होटल में बरतन मांजता होऊं. ‘‘गांव की जमीन उस ने छेड़ी तक नहीं. कहता था जिस में सब हिस्सेदार हों उस में वह कुछ नहीं करेगा.’’ मां को भय हुआ कि कहीं मैं होटल में अपने हिस्से का दावा न करने लगूं. इसलिए साफ बात करना ठीक सम झी. मैं कहने को हुआ कि इस मकान में भी तो मेरा हिस्सा है, पर चुप रहा. बाद में मां ने महसूस किया कि उन्होंने मु झे बैठने को नहीं कहा. ‘‘बूट उतार कर सोफे पर बैठ जाओ.’’ यह सुन कर मैं संकुचित हो उठा कि उस का अपना बेटा, अपने भाई की ईरानी कालीन पर बूट पहन कर बैठ नहीं सकता.

कालीन पर तो बूट पहन कर ही बैठा जाता है. मैं ने यह भी महसूस किया कि घर छोड़ते समय जिस तरह मु झे ले कर मां भावशून्य थी उस में और वृद्धि हो गई है. न मैं बैठा और न ही मैं ने बूट उतारे. कहा, ‘‘चलूंगा मां. देखने आया था कि शायद तुम्हें मेरा अभाव खटकता हो. पर नहीं, यहां सबकुछ उलट है. तुम्हें मेरा अभाव नहीं था बल्कि मु झे तुम्हारा अभाव था. कितना विलक्षण है कि बेटे को मां का अभाव है पर मां को नहीं.’’ वहां से निकलने के बाद भी पीछे से मां की आवाज आती रही, ‘‘कुछ खातेपीते जाओ. भाई से नहीं मिलोगे? होटल नहीं देखोगे?’’ मु झे मां की आवाज किसी कुएं से आती सुनाई दी. मां, दिनेश भाई के साथ इसलिए है कि दोनों एक ही वृत्ति के हैं. बेईमान और धोखेबाज. मैं ने तो यह महसूस किया कि अब तक के सालते क्षणों में कुछ और क्षण समावेश कर गए हैं. और यह भी कि क्षण यदि खुद में बदल भी जाएं तो निरथर्कता और बढ़ जाती है जो आदमी को जीवनभर सालती है.

मिरगी के दौरे का क्या कोई इलाज नहीं है?

सवाल-

मेरी बेटी की उम्र 8 साल है. उसे पिछले कुछ महीनों से मिरगी के दौरे पड़ रहे हैं. मैं बहुत परेशान हूं. मैं ने सुना है यह बीमारी लाइलाज है?

जवाब-

अब मिरगी लाइलाज बीमारी नहीं रही है. दवा और सर्जरी के द्वारा इस का उपचार संभव है. मिरगी के लगभग 80% मामलों को दवा से ठीक किया जा सकता है. बहुत ही कम मामलों में जहां दवा या दूसरे उपचारों से मरीज की स्थिति में सुधार नहीं आता तब सर्जरी की जरूरत पड़ती है. रीसैक्टिव सर्जरी मिरगी का उपचार करने के लिए सब से अधिक प्रचलित सर्जरी है. इस सर्जरी से दौरे पड़ने की संख्या में काफी कमी आ जाती है. डीप ब्रेन स्टिम्युलेशन (डीबीएस) थेरैपी एक अन्य सर्जिकल उपचार है. यह उन मरीजों के लिए इस्तेमाल की जाती है जिन्हें एक दिन में कई बार दौरे पड़ते हैं.

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मिरगी एक आम मस्तिष्क संबंधी विकार है, जिसका इलाज संभव है. कुल मिला कर प्रति 1000 लोगों में 7-8 लोगों को मिरगी का रोग बचपन में हो जाता है. अनुमान तो यह भी लगाया गया है कि दुनिया भर में 50 लाख लोग मिरगी के रोग से पीडि़त हैं.

मिरगी की अभिव्यक्ति के अलग अलग तरीके होते हैं, जिनमें से कुछ नाम नीचे दिए गए हैं:

शरीर के पूरे या आधे भाग में मरोड़ और अकड़न.

दिन में सपने देखना.

असामान्य अनुभूतियां जैसे डरना, अजीब सा स्वाद महसूस करना, गंध और पेट में झनझनाहट महसूस करना

अत्यधिक चौंकना

फिट आने के बाद रोगी नींद या उलझन महसूस करने लगता है, साथ उसे सिरदर्द की शिकायत भी हो सकती है

क्या हैं मिरगी के कारण?

मस्तिष्क कई तंत्रिका कोशिकाओं से मिल कर बना हुआ है, जो शरीर के विभिन्न कार्यों को विद्युत संकेतों द्वारा नियंत्रित करता है. यदि ये संकेत बाधित होते हैं, तो व्यक्ति मिरगी के रोग से पीडि़त हो जाता है (इसे ‘फिट’ या ‘आक्षेप’ कहा जा सकता है.) मिरगी के जैसे कई अन्य रोग भी होते हैं. मसलन, बेहोश (बेहोशी), सांस रोग और ज्वर आक्षेप.

पूरी खबर पढ़ने के लिए- बचपन में ही हो जाता है मिरगी का रोग

Raksha bandhan Special: मीठे में बनाएं रवा केसरी

रक्षाबंधन के मौके पर अगर आप मीठ के लिए हेल्दी और टेस्टी रेसिपी ढूंढ रहे हैं तो रवा केसरी की ये रेसिपी ट्राय करना ना भूलें.

सामग्री

1/2 कप रवा,

मुठ्ठी भर काजू,

मुठ्ठी किशमिश,

2 से 3 बड़ा चम्मच घी,

1 छोटा चम्मच फ्राई काजू और किशमिश,

चुटकी भर केसर पाउडर,

2 लौंग,

1 कप चीनी.

विधि

एक बड़ा चम्मच घी पैन गरम करें. इस घी में रवा तब तक भूने जब तक वह हल्का गुलाबी न हो जाए. इस के बाद भुने रवा को अलग रख दें.  अब पैन में 2 कप पानी और केसर पाउडर डालें और उसे उबाल लें. इस पानी में भुना रवा डालें औै अच्छे मिलाएं. समयसमय पर इस मिश्रण को हिलाते रहें ताकि रवा पैन में चिपके न. इस मिश्रण में चीनी मिलाएं और 5 से 10 मिनट तक पकाएं . जब रवा और अतिरिक्त घी अलगअलग हो होने लगें तो पैन को आंच पर से हटा लें. अब दूसरे पैन में घी डालें और काजू किश्मिस को भून लें. इन भुने काजू किशमिस को रवा वाले मिश्रण के ऊपर डालें और खाने के लिए परोसें.

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