लता मंगेशकर को मिलेगी ‘नाम रह जाएगा’ में श्रद्धांजलि, पढ़ें खबर

सुर सम्राज्ञी लता मंगेशकर के गाने हमेशा से ही पूरे विश्व में प्रचलित है, उनके गानों की लिस्ट को गिनना असंभव है, 25 हज़ार से अधिक गीत गाने वाली मृदुभाषी और शांत स्वभाव की लता को ट्रिब्यूट देना अपने आप में एक बड़ी बात है, जिसे सभी बड़े-बड़े गायकों ने उनके गानों को गाकर श्रद्धांजलि देने की कोशिश की. स्टार प्लस पर इस शो को ‘नाम रह जाएगा’ के तहत किया जाएगा. इस शो की ज़ूम प्रेस कांफ्रेंस में सभी ने बहुत ही संजीदगी से भाग लिया और लता मंगेशकर के साथ बिताये उनके अनुभव और सीख को शेयर किया. इसमें 18 जाने-माने गायक कलाकार उनके गीतों को गाकर अपने तरीके से श्रद्धांजलि देंगे, जिसमें सोनू निगम, अरिजीत सिंह, शंकर महादेवन, नितिन मुकेश, नीति मोहन, अलका याज्ञनिक, साधना सरगम, उदित नारायण, शान, कुमार शानू, अमित कुमार, जतिन पंडित, जावेद अली, ऐश्वर्या मजूमदार, स्नेहा पंत, पलक मुच्छल और अन्वेषा मंच पर साथ मिलकर लता मंगेशकर के सबसे प्रतिष्ठित गीत गाकर श्रद्धांजलि देंगे.

 

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प्रेस कांफ्रेंस के दौरान संगीतकार जतिन पंडित ने कहा कि संगीत के इसी दौर को गोल्डन पीरियड कहा जाता है और ये दौर अब चला गया है, उनकी प्योरिटी उनके संगीत में थी, जो आज भी सुनने पर सुकून देती है. लता जी की डिक्शन, गानों में जगह को भरना, र और श को इतनी अच्छी तरीके से प्रयोग करती थी, जो आज तक मैंने कहीं देखा नहीं है. इसके अलावा उनकी लो नोट्स, हाई नोट्स आदि को सहजता के साथ कर लेती थी. मैंने कभी कोई परेशानी उन्हें गाते हुए नहीं देखा है, यहाँ ये भी कहना जरुरी है कि उनकी आवाज के साथ-साथ उनके साथ में रहने वाले कम्पोजर, राइटर भी बहुत अच्छा काम करते थे, उस दौर की संगीतकार सलिल चौधरी, मदन मोहन, शंकर जयकिशन आदि सभी उनके सुर को एक अलग दिशा दी है.आज वैसी कोम्पोजीशन देना, उसे तराशना बहुत मुश्किल है. सारी चीजें जब एक साथ इकट्ठी हुई, तब एक बुनियाद बनी, जिसको हम सारी जिंदगी चलने पर भी नहीं पा सकते. मैंने लता जी के साथ कई काम किये है, संगीत के अलावा उन्हें ह्यूमर बहुत पसंद है. मैंने 9 साल की उम्र में उनके साथ गाना गया है. बचपन में मैं अपने पिता के साथ उनके घर जाया करता था, क्योंकि इनका पूरा परिवार संगीत को लेकर चर्चा करते थे. गानों के साथ-साथ उन्हें सेंस ऑफ ह्यूमर भी बहुत अच्छा था और कई खुबसूरत म्यूजिकल जोक्स सुनाया करती थी. मेरा अहो भाग्य है कि मैंने लताजी की संगीत को सुना और उनके साथ गाया भी है.

साधना सरगम कहती है कि मैं जब भी उनके साथ मिली हूँ, वह दिन मेरे लिए स्पेशल था. मेरे पाँव छूते ही वह मेरी हाल-चाल पूछती रहती थी. उनका प्यार हमेशा मेरे ऊपर रहा और जनसे भी मिलती थी उन्हें आशीर्वाद देती थी. रहमान के एक कॉन्सर्ट में वह मुझसे मिली और रियाज करने के बारें में पूछी थी, उन्होंने रियाज को सफलता का मूल मन्त्र माना है.

 

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सिंगर शान कहते है कि आज जब गाना गाते है तोलोग उसे याद नहीं रखते, जबकि पुराने गीत आज सभी सुनते है. मेरे  मेरे पिता का लताजी के साथ बहुत अच्छा सम्बन्ध थे, लताजी को गाते वक्त सांस की आवाज कंट्रोल करने की क्षमता अद्भुत थी. मैं इसे सीखने की कोशिश कर रहा हूँ. गाना गाते समय साँस को छुपाकर लेना और उसकी आवाज माइक में न आना एक अद्भुत कला है.

नितिन मुकेश भावुक होकर कहते है कि कोविड में उन्होंने मुझे सहारा दिया मेरा ख्याल रखा, क्योंकि मुझे कोविड हो गया था. इसके बाद उन्होंने मुझे एक गिफ्ट देने की बात कही थी,  लेकिन मैं उनसे मिल नहीं पाया, क्योंकि वे पूरी तरह से आइसोलेशन में थी. उनका प्यार, स्नेह हमेशा रहा है, जिसे हम भूल नहीं सकते. संगीत लताजी के साथ शुरू होता है और उनके साथ ही ख़त्म हो गया है, क्योंकि संगीत और लताजी दोनों ही आम है.

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दरबदर- भाग 1: मास्साब को कौनसी सजा मिली

इस बार मायके गई तो छोटी बहन ने समाज की खासखास खबरों के जखीरे में से यह खबर सुनाई, ‘‘बाजी, आप के सईद मास्साब की मृत्यु हो गई.’’

‘‘कब? कैसे?’’

पिछले महीने की 10 तारीख को. बड़ी तकलीफ थी उन्हें आखिरी दिनों में. पीठ में बैडसोर हो गए थे. न लेट पाते थे न सो पाते थे. रातरातभर रोतेरोते अपनी मौत का इंतजार करते पूरे डेढ़ साल बिताए थे उन्होंने.

इस दर्दनाक मौत की खबर ने मुझे रुला दिया. मैं ने आंसू पोंछते हुए पूछा, ‘‘लेकिन उन की तो 4-4 बीवियां, 6 बच्चे और एक छोटा भाई भी तो था न?’’

‘‘बाजी, जब बुरे दिन आते हैं न, तो साया भी साथ छोड़ देता है. उन की पहली बीवी तो 3 साल पहले ही

दुनिया से चली गई थी. दूसरी, तीसरी, चौथी बीवियों ने झांक कर भी नहीं

देखा. आखिरी वक्त में भाई ही भाई के काम आया.’’

यह सुन कर मुझे दिली तकलीफ पहुंची.

सईद मास्साब 10वीं क्लास में अंजुमन स्कूल में मेरे इंग्लिश के टीचर थे. लंबेचौड़े सांवले रंग के मास्साब के फोटोजैनिक चेहरे पर मोटे फ्रेम के चश्मे के नीचे बड़ीबड़ी आंखों में चमक हमेशा सजी रहती. अपने हेयरस्टाइल आर ड्रैसिंग सैंस के लिए स्टूडैंट्स के बीच बेहद लोकप्रिय थे वे. लड़कियां अकसर आपस में शर्त लगातीं, ‘देखना, सईद मास्साब आज कुरतापजामा के साथ कोल्हापुरी चप्पल पहन कर आएंगे.’ सुन कर दूसरी लड़की झट बात काटती हुई कहती, ‘नहीं, आज मास्साब जरूर पैंटशर्ट के साथ बूट पहन कर आएंगे.’ कोईर् कहती, ‘नहीं, मास्साब आज सलवारकुरते के साथ काली अचकन और राजस्थानी जूतियां पहन कर आएंगे चर्र…चूं करने वाली.’

जो लड़की शर्र्त हार जाती वह इंटरवल में पूरे ग्रुप को गोलगप्पे खिलाती. मास्साब इतने खुशमिजाज थे कि दर्दीली पोयम पढ़ाते वक्त भी उन के होंठों पर मुसकान की लकीर दिखाई पड़ती. लेकिन जब हम डिक्शनरी में वर्डमीनिंग देखते और गाइड में उस का अनुवाद पढ़ते तो मास्साब की मुसकान के पीछे छिपे गूढ़ अर्थ को समझने में महीनों सिर खपाते रहते.

‘मास्साब, आज मैं घर से बटुआ लाना भूल गई. घर वापस जाने के लिए रिकशे के पैसे नहीं…’ कोई लड़की कहती.

‘कोई बात नहीं, ये लीजिए 5 रुपए, ठीक से जाइएगा, समझीं,’ कहते हुए अपने पर्स की जिप खोलने लगते.

‘मास्साब, मेरे अब्बू के गैरेजमालिक की मां मर गई. मेरे अब्बू को तनख्वाह नहीं मिल सकी, इसलिए फीस नहीं ला सका.’ कोई लड़का हकलाते हुए यह कहता तो मास्साब कौपियों से सिर उठाए बिना, उस की सूरत देखे बगैर ही कहते, ‘कोई बात नहीं, मैं भर दूंगा, आप की फीस. नाम क्या है?’

‘फैयाज मंसूरी.’

‘ठीक है, जब अब्बू को तनख्वाह मिले तब ले आना,’ कह कर मास्साब चपरासी को बुला कर उस लड़के की फीस औफिस में उसी वक्त जा कर जमा करने के लिए नोट थमा देते. लेकिन पूरे साल लड़के के अब्बू को न तो तनख्वाह मिलती, न मास्साब को कभी अपने दिए गए पैसे याद रहते.

इंग्लिश के अच्छे टीचर के अलावा सईद मास्साब स्कूल की कल्चरल, स्पोर्ट्स और सोशल ऐक्टिविटीज में हमेशा आगे रहते. नौजवान खून में ऊंचे ओहदे की बुलंदियां छू लेने के लिए मेहनतकशी को हथियार बनाने की पुख्ता सोच उन के हर काम के लिए तत्पर रहने वाले किरदार से साफ झलकती. साइंस एग्जीबिशन में अपने मौडल ले कर दूसरे स्कूल जाना है बच्चों को, तो सईद मास्साब बस के इंतजाम से ले कर मौडल्स पैक करने, उन के डिटेल्स को टाइप कराने तक के पूरे काम अपने सिर ले लेते.

बच्चों को किसी टुर्नामैंट में जाना है तो सईद मास्साब बच्चों के स्पोर्ट्स ड्रैस, किट्स, फर्स्टएड बौक्स खरीदते हुए घर आने में लेट हो जाते तो मुंह फुला कर बैठी बीवी की तानाकशी भी झेलते. ‘पिं्रसिपल के बराबर तनख्वाह मिलती तो भी सब्र आ जाता. चौबीसों घंटे, घरबार, बच्चे सौदासुलूफ को भूले… आप बस, अंजुमन स्कूल के ही हो कर रह गए हैं. घर, बच्चों का तो खयाल ही नहीं.’

जुलाई के महीने में एक नई टीचर ने जौइन किया था. वह कुंआरी थी. कुछ महीनों के बाद पता चला उस की शादी तय हो गई. स्कूल में वह हाथ भरभर कर हरी रेशमी चूडि़यां और कुहनी तक मेहंदी लगा कर आईर् थी.

सालभर भी नहीं गुजरा, दुबई गए उस के शौहर ने दुबई से स्काईप पर ही टीचर को तलाक कह दिया तीन बार. रोतीबिलखती टीचर को सईद मास्साब जैसे हमदर्द का ही कंधा मिला पूरे स्कूल में दर्द का पहाड़ पिघलाने के लिए.

स्टाफरूम में अब सईद मास्साब को देख कर कानाफूसी शुरू होने लगी. ‘सुना है सईद सर जुलेखा मैडम से निकाह करने वाले हैं.’

‘तभी तो उन्हें रोज स्कूल से घर लाते, ले जाते हैं. कमाने वाली औरत पर ही सईद मास्साब पूरी हमदर्दी लुटाते हैं.’

‘क्या कह रहीं है आप?’ नसरीन मैडम चौंकी. ‘हां, सच कह रही हूं,’ आयशा मैडम बोली, ‘देखिए उन की पहली बीवी सरकारी स्कूल में टीचर हैं. दोनों की कमाई है. घर में हर तरह का ऐशोआराम है. अब मजहब के नाम पर बेसहारा को सहारा देने के बहाने सईद मास्साब को फिर एक कमाऊ औरत मिल गई है. और दूसरी बीवी पर खर्च तो करना नहीं पड़ेगा, बल्कि जरूरत पर जुलेखा मैडम उन के अकाउंट में पैसे डाल देगी.’

मुझे नजमा मैडम ने स्टाफरूम में मेरी क्लास की नोटबुक लाने भेजा था, तभी टीचर्स की ये बातें मेरे कानों में पड़़ीं तो सहज विश्वास नहीं हुआ. आता भी कैसे? हमारे बालमन पर सईद मास्साब की छवि आदर्श टीचर की छपी हुई थी.

मैं ने 12वीं पास कर ली. मेरी 2 छोटी बहनें, उस के बाद एक भाई है. मेरे अब्बू की मनिहारी की दुकान है. घर की खस्ता माली हालत ने मुझे एक प्राइवेट स्कूल में नर्सरी की टीचर बना दिया. उन्हीं दिनों मेरी स्कूल में लीव वैकैंसी पर नई टीचर आयरीन सहर ने जौइन किया. घुंघराले बालों वाली छरहरे बदन की भोले से चेहरे पर खड़ी नाक और सुडौल जिस्म वाली यह टीचर इतनी कमाल की आर्टिस्ट थी कि मिनटों में शिक्षापयोगी सहायक सामग्री बना कर क्लासरूम के शीशे वाली अलमारी में सजा देती. हम दोनों हमउम्र थे, इसलिए हाफटाइम में दोनों टिफिन के साथसाथ दिल की बातें भी शेयर करते. कुछ महीनों के बाद मैं ने गौर किया कि वह अपने पहनावे और जिस्मानी खूबसूरती के लिए बतलाए गए टिप्स पर संजीदगी से अमल करती और उस के फायदे बतला कर मुझे भी वैसा करने को कहती.

एक दिन वह स्कूल में नौर्मल दिनों से कहीं ज्यादा सजधज कर आईर् थी. मिलते ही चहकने लगी, ‘आज मेरा बौयफ्रैंड मुझे पिक करने आ रहा है,’ आयरीन ने बताया.

छुट्टी के बाद मुझे हैडमिस्ट्रैस ने बुलवा लिया. छुट्टी के आधे घंटे बाद मैं अपना बैग ले कर सड़क की तरफ बढ़ने लगी. तभी सामने का दृश्य देख कर आश्चर्यचकित रह गई. आयरीन जिन की मोटरसाइकिल पर बैठ रही थी, वे सईद मास्साब थे.

क्या ब्रेन स्ट्रोक दोबारा आने का खतरा होता है?

सवाल-

मेरी सास को एक बार ब्रेन स्ट्रोक हो चुका है. वे बहुत कमजोर हो गई हैं. क्या उन का दोबारा इस की चपेट में आने का खतरा है?

जवाब- 

उपचार के बाद भी आवश्यक सावधानियां बरतने जरूरी हैं क्योंकि एक बार स्ट्रोक की चपेट में आने पर पुन: स्ट्रोक का हमला होने की आशंका पहले सप्ताह में 11% और पहले 3 महीनों में 20% तक होती है. उन के खानपान का ध्यान रखें, उन्हें संतुलित और पोषक भोजन खिलाएं. हलकीफुलकी ऐक्सरसाइज करने या टहलने के लिए कहें. डाक्टर द्वारा सुझई दवाइयां समय पर दें.

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पक्षाघात यानी ब्रेन स्ट्रोक दिमाग के किसी भाग में ब्लड सप्लाई बाधित होने या कम होने से होता है. दिमाग में औक्सीजन और पोषक तत्त्वों की कमी से ब्लड वैसेल्स यानी रक्त वाहिकाओं के बीच ब्लड क्लोटिंग की वजह से उस की क्रियाएं बाधित होने लगती है, इस कारण दिमाग की पेशियां नष्ट होने लगती है जिस से दिमाग अपना नियंत्रण खो देता है, जिसे स्ट्रोक सा पक्षाघात कहते हैं. यदि इस का इलाज समय पर नहीं कराया जाए तो दिमाग हमेशा के लिए डैमेज हो सकता है. व्यक्ति की मौत भी हो सकती है.

आज विश्व में करीब 80 मिलियन लोग स्ट्रोक से ग्रस्त हैं, 50 मिलियन से ज्यादा लोग स्थाई तौर पर विकलांग हो चुके हैं. ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ के अनुसार 25% ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों की उम्र 40 वर्ष है. इस बात को ध्यान में रखते हुए हर साल 29 अक्तूबर को ‘वर्ल्ड स्ट्रोक डे’ मनाया जाता है, जिस का उद्देश्य स्ट्रोक की रोकथाम, उपचार और सहयोग के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना है.

मुंबई के अपैक्स सुपर स्पैश्यलिटी हौस्पिटल के वरिष्ठ मस्तिष्क रोग स्पैशलिस्ट एवं न्यूरोलौजिस्ट डा. मोहिनीश भटजीवाले बताते हैं कि दुनियाभर में ब्रेन स्ट्रोक को मौत का तीसरा बड़ा कारण माना जा रहा है. केवल भारत में हर 1 मिनट में 6 लोगों की मौत हो रही है, क्योंकि यहां ब्रेन स्ट्रोक जैसी मैडिकल इमरजैंसी की स्थिति में इस के लक्षणों, कारणों, रोकथाम और तत्काल उपायों के प्रति जनजागरूकता का बहुत अभाव है जबकि ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों को तत्काल उपचार से उन के अच्छे होने के चांसेस 50 से 70% तक बढ़ जाते हैं.

पूरी खबर पढ़ने के लिए- जानें क्या है ब्रेन स्ट्रोक और क्या है इसका इलाज

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz   सब्जेक्ट में लिखे…  गृहशोभा-व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

12 Tips: छोटी-छोटी तारीफों में होंगे बड़े फायदे

अपनी तारीफ सुनना भला किसे अच्छा नहीं लगता? तारीफ के 2 मीठे बोल कानों में मिठास घोल देते हैं. तारीफ छोटेबड़े सभी में ऊर्जा का संचार करती है. बात पुरुषों की की जाए तो वे स्वभाव से थोड़े कड़क जरूर होते हैं पर उन के भीतर भी कहीं एक नन्हा सा दिल छिपा होता है, जो अपनी प्रशंसा सुनते ही तेजी से धड़कने लगता है.

आइए जानें कि पुरुष किस तरह की तारीफ सुनना पसंद करते हैं:

1. आज खूब जम रहे हैं:

लुक्स की तारीफ महिलाओं को ही नहीं पुरुषों को भी पसंद है. अपने ड्रैसिंग सैंस, अपने हेयरस्टाइल, अपने ब्रैंडेड जूतों को ले कर मिला कोई भी कौंप्लीमैंट पुरुषों को बेहद पसंद आता है. कपड़े खरीदने आदि में अगर कोई उन का सहयोग मांगे तो वे उसे बहुत अच्छा मानते हैं

2. यू आर वैरी सपोर्टिव:

कौंप्लीमैंट कंसीडिरेट होना, सहयोगियों के प्रति कोऔपरेटिव होना पौरुष की निशानी है. यह कौंप्लीमैंट यदि पुरुष सहकर्मियों से मिले तो सिर्फ अच्छा लगता है पर यदि महिलाएं यह कौंप्लीमैंट दें तो पुरुषों का स्वाभिमान कई गुना बढ़ जाता है, सीना गर्व से फूल जाता है.

3. आप का सैंस औफ ह्यूमर बहुत अच्छा है:

चतुर, हाजिरजवाब, खुशमिजाज पुरुष सभी को अच्छे लगते हैं. हर महफिल की वे शान होते हैं. यदि यह कौंप्लीमैंट अपने जानने वालों, मिलने वालों से मिले तो पुरुष गद्गद हो उठते हैं.

4. लविंग ऐंड केयरिंग:

जीवनसाथी या बच्चे, फ्रैंड्स अथवा कुलीग्स लविंग और केयरिंग कहें तो पुरुषों का आत्मबल बढ़ जाता है. परिवार के लिए वे जो कुछ भी करते हैं उस के लिए उन्हें यदि घर के सदस्य केयरिंग मान लें तो बस इतना ही काफी है.

5. ऐक्सीलैंट इन वर्क:

अपनी फील्ड में यदि पुरुष को उस का बौस, सहकर्मी या कोई सीनियर सर्वश्रेष्ठ कह दे या उस के प्रयासों की सराहना करे तो वह प्रफुल्लित हो उठता है. अपने कार्य की सराहना हर पुरुष में स्वाभिमान व कौन्फिडैंस भर देती है.

6. यू आर रीयली वैरी टैलेंटेड:

नौकरी, व्यापार के अतिरिक्त यदि कोई गुण आप में है और उस में आप उम्दा हैं, तो कोई उसे रेकगनाइज करे तो बहुत अच्छा लगता है. समाजसेवा, गाना, लिखना, खेलना किसी भी क्षेत्र में अपनी प्रतिभा की स्वीकृति न केवल पुरुषों को खुशी देती है, बल्कि उन्हें और अच्छा करने को भी लालायित करती है.

7. लुकिंग वैरी हौट टुडे:

महिलाओं की तरफ से खासतौर पर गर्लफ्रैंड की ओर से मिला यह कौंप्लीमैंट पुरुषों को घंटों, हफ्तों, महीनों तक खुश रख सकता है. आज के जमाने में यदि यह तारीफ सहकर्मियों से भी सुनने को मिले तो पुरुष उसे बेहद अच्छा मानते हैं.

8. आप अपनी उम्र से कम दिखते हैं:

पुरुषों को भी अपनी उम्र से कम दिखना अच्छा लगता है और यह कौंप्लीमैंट अगर महिलाओं से मिले तो सोने में सुहागा. किसी भी उम्र के पुरुष को अपनी उम्र से छोटा दिखना हमेशा पसंद होता है.

9. आप को तो बहुत लोग पसंद करते हैं:

कहने वाला न केवल इस से अपनी चाहत दर्शाता है, बल्कि वह खास व्यक्ति कितना प्रसिद्ध है यह भी बताता है. पुरुषों को ऐसे जुमले बहुत पसंद होते हैं. इस से उन की काम करने की शक्ति दोगुनी हो जाती है.

10. आप बड़े टैक्नोसेवी हैं:

गैजेट्स पर मास्टरी आज के जमाने में एक अतिरिक्त टैलेंट है. यदि पुरुष कंप्यूटर, लेटैस्ट ऐप्लीकेशंस, कैमरा, मोबाइल के विषय में कौंप्लीमैंट पाते हैं, तो इस से वे अच्छा फील करते हैं और उन की कार्यक्षमता भी निखरती है.

11. आप विश्वास के योग्य हैं:

किसी भी पुरुष को यह सुन कर बेहद अच्छा लगता है कि लोग उस पर विश्वास करते हैं. फिर चाहे बात चरित्र की हो या काम की, रिश्ते निभाने की हो या सहयोग करने की.

12. यू आर वैरी कूल:

कूल कहलाना आज के जमाने में कौंप्लीमैंट है. यह स्मार्टनैस और धैर्य को दर्शाता है. वर्कप्लेस पर, घर पर, कहीं भी यदि आप कूल कहे जाते हैं तो इस का मतलब आप में कोई बात है.

अकेले में पति की तारीफ पत्नी करे तो अच्छा लगता है, पर यदि सोसाइटी में सब के सामने पत्नी पति की तारीफ करे तो समझिए जीवन सुधर गया.

मेरा पति सिर्फ मेरा है: भाग-2

तब तक ससुरजी उसे समझाने आ गए, “सच कहूं बहू तो उस ने काफी कुछ किया है हमारे लिए. मेरे हार्ट की सर्जरी कराने में भी पानी की तरह पैसे बहाए. इन सब के बदले भुवन का थोड़ा वक्त ही तो लेती है. सुबह भुवन 1 घंटे जल्दी चला जाता है ताकि उस के साथ समय बिता सके और रात में थोड़ा अधिक रुक जाता है. बस, इतनी ही डिमांड है उस की.”

“यदि टीना को भुवन इतना ही पसंद था तो उसी से शादी क्यों नहीं करा दिया आप लोगों ने? मेरी जिंदगी क्यों खराब की?”

“बेटा टीना शादीशुदा है. उस की शादी भुवन से हो ही नहीं सकती.”

शादी के दूसरे दिन ही अपनी जिंदगी में आए इस कड़वे अध्याय को पढ़ कर अनुषा विचलित हो गई थी. सोचा मां को हर बात बता दे और सब कुछ छोड़ कर मायके चली जाए. मगर फिर मां की कही बातें याद आ गईं कि हमेशा धैर्य बनाए रखना.

आधे घंटे में भुवन वापस लौट आया. खापी कर और बरतन निबटा कर जब अनुषा अपने कमरे में पहुंची तो देखा भुवन टीना से बातें कर रहा है. अनुषा को देखते ही उस ने फोन काट दिया और अनुषा को बांहों में भरने लगा. अनुषा छिटक कर अलग हो गई और उलाहने भरे स्वर में बोली,” मेरी सौतन से बातें कर रहे थे?”

भुवन हंस पड़ा,”अरे यार सौतन नहीं है वह. बस मुझ पर मरती है और मैं भी उस के साथ थोड़ाबहुत हुकअप कर लेता हूं. बस और क्या. खूबसूरत है साथ चलती है तो अपना भी स्टैंडर्ड बढ़ जाता है. ”

बेशर्मी से बोलते हुए भुवन सहसा ही सीरियस हो गया,” देखो अनुषा, जीवनसाथी तो तुम ही हो मेरी. मेरे जीवन का हर रास्ता लौट कर तुम्हारे पास ही आएगा.”

‘वह तो ठीक है भुवन मगर ऐसा कब तक चलेगा? इस टीना को तुम में इतनी दिलचस्पी क्यों है ? कहीं न कहीं तुम भी उसे भाव देते होगे तभी तो उसे आगे बढ़ने का मौका मिलता है.”

“देखो यार, मेरा तो एक ही फंडा है, थोड़ी खुशी मुझे मिल जाती है और थोड़ी उसे. इस में गलत क्या हैऔफिस में मेरा पोजीशन बढ़ाती है और मैं उसे थोड़ा प्यार दे देता हूं. बस, इस से ज्यादा और कुछ नहीं. दिल में तो केवल तुम ही हो न…” कह कर भुवन ने लाइटें बंद कर दीं और न चाहते हुए भी अनुषा को समर्पण करना पड़ा.

समय इसी तरह निकलने लगा. लगभग रोजाना ही टीना घर आ धमकती.

वह जब भी आती भुवन के साथ फ्लर्ट करती, अदाएं बिखेरती और अनुषा पर व्यंग कसती.

एक दिन भुवन के बालों को अपनी उंगली में घुमाते हुए शोख आवाज में बोली,” एक राज बताऊं अनुषा, तुम्हारे काम आएगा. ”
अनुषा ने कोई जवाब नहीं दिया.

मगर टीना ने बोलना जारी रखा,” पता है, भुवन कब खुद पर काबू नहीं रख पाता?”

“कब?” भुवन ने टोका तो हंसते हुए टीना बोली, “जब कोई लड़की हलके गुलाबी रंग की नाइटी पहन कर उस के करीब जाए. फिर तो भुवन का खुद पर भी वश नहीं चलता.”

सुन कर भुवन सकपका गया और टीना हंसती हुई बोली, “वैसे अनुषा, एक बात और बताऊं,” भुवन के बिलकुल करीब पहुंचते हुए टीना ने कहा तो अनुषा का चेहरा गुस्से से लाल हो उठा.

अनुषा को और भी ज्यादा जलाती हुई टीना बोलने लगी,” काले टीशर्ट और ग्रे जींस में तुम्हारा पति इतना हैंडसम लगता है कि बस फिर दुनिया का कोई भी पुरुष तुम्हारे पति के आगे पानी भरे. ”

अनुषा ने कोई जवाब नहीं दिया मगर टीना ने अपने फ्लर्टी अंदाज में बोलना जारी रखा,” जानते हो भुवन, तुम्हारी कौन सी अदा और कौन सी चीज मुझे अपनी तरफ खींचती है?”

अनुषा का गुस्सा देख भुवन टीना के पास से उठ कर दूर खड़ा हो गया तो नजाकत के साथ उस के करीब से गुजरती हुई टीना बोली,” यह तुम्हारा सब जान कर भी अंजान बने रहने की अदा. तोबा दिल का सुकून छिन जाता है जब तुम्हारी निगाहों में अपनी मोहब्बत देखती हूं. चलो अब चलती हूं मैं वरना कोई गुस्ताखी न हो जाए मुझ से…”

इस तरह की बेशर्मियां टीना अकसर करती.

हनीमून पर जाने से 2 दिन पहले की बात है. उस दिन रविवार था. भुवन सुबह से ही अपने कंप्यूटर पर कुछ काम कर रहा था. अनुषा दोपहर के खाने की तैयारियों में लगी थी. तभी दरवाजे पर दस्तक हुई तो अनुषा ने जा कर दरवाजा खोला. सामने टीना खड़ी थी. खुले बाल, स्लीवलैस बौडीहगिंग टौप और जींस के साथ डार्क रैड लिपस्टिक में उसे देख कर अनुषा का चेहरा बन गया.

टीना नकली हंसी बिखेरती अंदर घुस आई और पूछा,” नई दुलहन आप के श्रीमान जी कहां हैं?

“वे अपने कमरे में काम कर रहे हैं.”

“ओके मैं मिल कर आती हूं.”

“आप बैठिए मैं बुला कर लाती हूं.”

अनुषा के इस कथन पर टीना ठहाके मार कर हंसती हुई बोली,” आंटी, सुना आप ने? आप की बहू तो मुझ से औपचारिकताएं निभा रही है. उसे पता ही नहीं कि मैं इस घर में किसी भी कमरे में किसी भी समय जा सकती हूं,” कहते हुए वह भुवन के कमरे की तरफ बढ़ गई.

अनुषा ने सवालिया नजरों से सास की तरफ देखा तो सास ने नजरें नीची कर लीं. टीना ने भुवन के कमरे में जा कर दरवाजा अंदर से बंद कर लिया. करीब 1 घंटे बाद उस ने दरवाजा खोला. उतनी देर अनुषा के सीने में आग आग जलती रही. उसी समय जा कर उस ने हनीमून के टिकट फाड़ डाले. रात तक अपना कमरा बंद कर रोती रही.

सास ने उसे समझाते हुए कहा,” देख बहू, पुरुषों द्वारा 2 स्त्रियों के साथ संबंध बना कर रखना कोई नई बात तो है नहीं. सदियों से ऐसी बातें चली आ रही है. यहां तक कि देवीदेवता भी इस से विमुख नहीं. कृष्ण का ही उदाहरण ले जिन की 16 हजार रानियां थीं. रानी रुक्मणी के साथसाथ राधा से भी उन के संबंध थे. पांडु और राजा दशरथ की 3-3 पत्नियां थीं तो इंद्र ने भी अहिल्या के साथ…”

“मांजी आप प्लीज अपनी दलीलें मुझे मत दीजिए. मुझे मेरे दर्द के साथ अकेला रहने दीजिए. एक बात बताइए मांजी, आप को इस में कुछ भी गलत नहीं लग रहा? अगर ऐसा है और यह घर टूटता है तो आप इस का इल्जाम मुझ पर मत लगाइएगा ”

आगे पढ़ें- रोती हुई अनुषा बाथरूम में जा कर मुंह धोने लगी तो…

रेतीली चांदी: क्या हुआ था मयूरी के साथ

आपको समझ आते हैं ये 8 गाने?

बॉलीवुड की फिल्मों में यदि गाने न हों, तो फिल्म अधूरी-सी लगती है. कभी-कभी फिल्म हिट नहीं होती, मगर उसके गाने जरूर हिट हो जाते हैं. कई बार तो गानों से ही फिल्म का नाम पहचाना जाने लगता है. कई बार ये गाने गैर हिंदी होने हमारी समझ से परे होने के बावजूद, हमारे मन में इतना बस गए हैं कि उनकी धुन पर हम मगन होकर नाचने लगते हैं.

आज हम कुछ ऐसे गानों की बात कर हैं, जो हिंदी में ना हो कर भी हिंदी फिल्मों में और बॉलीवुड के अन्य गानों की तरह धूम मचा चुके हैं.

1. कोलावेरी डी (Kolaveri Di)

इस गाने के रिलीज के दौरान ये नॉन-हिंदी गानों की लिस्ट में टॉप पर था. इस गाने के शुरुआती बोल कुछ इस तरह से हैं ‘Why this Kolaveri Kolaveri Di’. यहां हम आपको बता देना चाहते हैं कि रजनीकांत के दामाद धनुष ने इस गाने को गाया था. ये लोगों के बीच काफी प्रचलित हुआ था. इसे लोग आज भी खूब पसंद करते हैं.

2. आ अंटे अमला पुरम (Aa Ante Amla Puram)

ये गाना एक आइटम सांग है, जो साल 2012 में लोगों के बीच खूब छा हुआ था. उस वक्त तो आलम ये हो गया था कि जब भी इस गाने को बजाया जाता था लोग बिना डांस किये नहीं मानते थे. इस गाने में आई अदाकारा को भी लोगों ने खूब पसंद किया था.

4. सेन्योरीटा (Senorita)

एक स्पेनिश गाना जो बॉलीवुड में काफ़ी फ़ेमस हुआ. ये गाना ऋतिक रोशन की फिल्म ‘ज़िन्दगी न मिलेगी दुबारा’ का है. आज भी इस गाने को सुनते ही लोग सर के बल डांस करने लगते हैं.

5. बोरो-बोरो (Boro Boro)

ये एक पार्शियन गाना है, इसके बावजूद ये बॉलीवुड में खूब पॉपुलर हुआ था. अभिनेता अभिषेक बच्चन ने भी इस गाने में कमाल का डांस कर, दर्शकों को खूब आकर्शित किया था. इस गाने के इतने पुराने होने के बावजूद, ये आज भी लोगों को बीच काफी मशहूर है और इस गाने पर लोग खूब थिरकते हैं.

6. माशाअल्लाह- माशाअल्लाह (Mashalla)

अभिनेता सलमान खान और कैटरीना कैफ की फिल्म ‘एक था टाइगर’ का ये गाना अरेबिक और हिंदी का मिश्रण है. हर कोई इस गाने पर सलमान और कटरीना के अंदाज में ही डांस करने की कोशिश करता है. ये गाना एक गैर हिन्दी होने के बावजूद आज तक लोगों के बीच यादगार बना हुआ है.

7. अपनी पोड़े (Apni Pode)

13 साल पहले आई तमिल फिल्म ‘घिलि’ (Ghili) का ये गाना आज भी लोगों के दिलों और दिमाग में बसा हुआ है.

8. नवराई माझी (Navrai Majhi)

ये गाना साल 2012 में आई फिल्म इंग्लिश विंग्लिश का एक मराठी सॉन्ग है. भले लोग इसे समझते न हों, लेकिन जब ये गाना चलता है, तो इस पर नाचना खूब पसंद करते हैं.

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बॉलीवुड की पौपुलर और क्यूट जोड़ियों में से एक आलिया भट्ट और रणबीर कपूर की वेडिंग फोटोज और वीडियोज इन दिनों सोशलमीडिया पर छाई रहती हैं. हालांकि दोनों एक बार फिर अपनी प्रौफेशनल लाइफ में बिजी होते हुए नजर आ रहे हैं. हालांकि दोनों की लव स्टोरी जानने के लिए फैंस आए दिन बेताब रहते हैं. इसीलिए आज हम आपके लिए लेकर आए हैं इस सेलिब्रिटी कपल की लव स्टोरी…

 ऐसी थी रणबीर-आलिया की पहली मुलाकात

 

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रणबीर कपूर और आलिया भट्ट अक्सर सीक्रेट वेकेशन पर जाने से लेकर फैमिली गेट-टुगेदर अटेंड करते हुए नजर आती रही हैं. वहीं सोशलमीडिया के जरिए आलिया भट्ट अपने प्यार का इजहार करती दिखती हैं. हालांकि बेहद कम लोग जानते हैं कि 9 साल की उम्र में ही आलिया रणबीर कपूर को दिल दे बैठी थीं. दरअसल, 2005 की फिल्म ब्लैक के लिए ऑडिशन देने के दौरान उनकी पहली मुलाकात रणबीर कपूर से हुई थी, जो कि संजय लीला भंसाली के साथ सहायक निर्देशक के रूप में काम कर रहे थे. वहीं रणबीर पर क्रश के चलते आलिया, फिल्म बालिका वधू की शूटिंग के दौरान शर्मा रही थीं.

रणबीर संग है फोटो

अपनी लव स्टोरी का ये किस्सा आलिया भट्ट एक इंटरव्यू में शेयर करते हुए कहा था कि संजय सर मेरे साथ बालिका वधू के साथ एक और फिल्म बनाना चाहते थे, इसलिए हमने तैयारी के चलते एक फोटोशूट किया. वहीं इस दौरान रणबीर वहां मौजूद थे. इसके अलावा मेरे पास रणबीर के साथ एक फोटो है.  मुझे नहीं पता कि उस उम्र में यह कैसे हुआ, जो कुछ भी हो, मुझे बहुत शर्म आ रही थी. वैसे भी, किसी कारण से यह काम नहीं कर सका. मुझे लगता है कि सर उस फिल्म को बनाने के लिए तैयार नहीं थे.”

पहली फिल्म के दौरान हुआ प्यार

 

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क्रश से प्यार तक के सफर की बात करें तो साल 2017 में अयान मुखर्जी द्वारा निर्देशित फिल्म ब्रह्मास्त्र की शूटिंग के दौरान आलिया भट्ट और रणबीर कपूर को प्यार हुआ. बुल्गारिया में शूटिंग के दौरान दोनों एक दूसरे के करीब आए, जिसके चलते नजदीकियों की खबरें मीडिया में छा गई थीं.

पहली बार साथ आए नजर

प्यार की शुरुआत होने के बाद रणबीर और आलिया की अक्सर चोरी छिपे मिलने की खबरें आईं. लेकिन मई 2018 में सोनम कपूर और आनंद आहूजा की शादी के रिसेप्शन में दोनों पहली बार मीडिया के सामने साथ नजर आए. जहां दोनों ने जमकर पोज देते नजर आए. वहीं लुक की बात करें तो आज भी आलिया भट्ट की सब्यसाची मुखर्जी के हरे रंग के लहंगे में और रणबीर कपूर की क्रीम कलर की शेरवानी पहने फोटो सोशलमीडिया पर वायरल होती रहती हैं.

डेट का रणबीर कपूर ने किया था ऐलान

मीडिया के सामने कपल की तरह एंट्री लेने के बाद दोनों की डेटिंग की खबरों पर मोहर लग गई थी. हालांकि दोनों में से किसी ने इस पर औफिशियल तौर पर कोई बात नहीं कही थी. लेकिन एक मैगजीन को दिए इंटरव्यू में रणबीर कपूर ने अपनी लव लाइफ पर मोहर लगाई थी.

परिवार ने दी मंजूरी

 

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रणबीर और आलिया के ऐलान के बाद कपूर और भट्ट परिवार ने दोनों के रिश्ते को खुशी खुशी मंजूरी दी थी. एक इंटरव्यू में महेश भट्ट ने आलिया और रणबीर के बढ़ते प्यार के बारे में बात करते हुए शेयर किया था कि वह रणबीर से प्यार करते हैं और वह एक महान व्यक्ति हैं. वहीं खबरों की मानें तो रणबीर की दूसरी गर्लफ्रेंड के से परे  नीतू कपूर ने आलिया भट्ट को अपना महसूस किया था. इसी के चलते दोनों साथ में डिनर डेट से लेकर फैमिली टाइम बिताते नजर आ चुके हैं.

नीतू कपूर का दिया था साथ

अच्छे पलों के अलावा आलिया भट्ट, रणबीर कपूर और उनकी फैमिली का बुरे वक्त में भी साथ देते हुए नजर आ चुकी हैं. 30 अप्रैल, 2020 को जब लौकडाउन के दौरान ऋषि कपूर का कैंसर से जूझने के बाद निधन हुआ था तो आलिया भट्ट परिवार के साथ मौजूद नजर आईं थीं, जिसकी फोटोज और वीडियोज सोशलमीडिया पर काफी वायरल हुई थीं, जिसमें वह नीतू कपूर को सांत्वना औऱ रिद्धिमा कपूर, पिता की आखिरी छवि दिखाती नजर आईं थीं.

कपल बना रहा है सपनों का घर

 

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आलिया भट्ट और रणबीर कपूर के रिश्ते मजबूत होते जा रहे हैं, जिसके चलते दोनों की शादी की खबरें भी मीडिया में छाने लगी हैं. वहीं हाल ही में रणबीर कपूर और आलिया भट्ट अपने नए घर की तैयारियों में जुटे हुए नजर आए. इसके अलावा खबरे हैं कि दोनों के घर का नाम रणबीर की दादी कृष्णा राज के नाम पर रखा जाएगा. वहीं कपल अक्सर अपने परिवार के साथ घर को देखने पहुंचते हैं.

आलिया भट्ट और रणबीर कपूर की ये लव स्टोरी किसी सपने से कम नहीं है. क्रश से लेकर प्यार तक का सफर आगे बढ़ गया है. वहीं साल 2022 यानी इस साल ये रिश्ता शादी के बंधन में बंध गए हैं.

मीरा और शाहिद के तरह आप भी ऐसे बनें Ideal Couple

एक्टर शाहिद कपूर और उनकी वाइफ मीरा राजपूत (Shahid Kapoor And Mira Rajput) की जोड़ी बॉलीवुड के पौपुलर कपल में से एक हैं. दोनों सोशलमीडिया पर अपनी फोटोज और वीडियो शेयर करते रहते हैं. एयरपोर्ट हो या कोई डिनर आउटिंग दोनों अक्सर रोमांटिक अंदाज में साथ नजर आते हैं. इस सेलेब कपल की बौंडिग देखकर फैंस दोनों के रिश्ते से रिलेशनशिप टिप्स भी ले सकते हैं.

पति के साथ करें दोस्ती…

 

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मीरा राजपूत और शाहिद कपूर की लव स्टोरी से हर कोई वाकिफ है. दोनों कई बार अपनी लव स्टोरी शेयर कर चुके हैं. दरअसल, एक इंटरव्यू में शाहिद कपूर ने बताया था कि वह शादी से पहले मीरा से केवल 3 या 4 बार मिले हैं. हालांकि दोनों की बौंडिग देखकर ऐसा लगता नहीं है, जिसका कारण है दोनों की दोस्ती. शाहिद और मीरा की दोस्ती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह भले ही कम वक्त साथ में बिताएं. लेकिन एक दूसरे को समझने की पूरी कोशिश करते हैं ताकि उनका रिश्ता और भी ज्यादा मजबूत हो सके.

 

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फैमिली के साथ बिताएं वक्त…

 

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पति पत्नी के रिश्ते में परिवार की अहम भूमिका होती है. अगर परिवार के साथ वक्त बिताया जाए और उन्हें समझा जाए तो शादी का रिश्ता निभाना आसान हो जाता है. मीरा राजपूत भी ऐसा ही करते हैं. वह अपनी ननद, देवर और सास-ससुर के साथ क्वालिटी टाइम स्पैंड करना कभी नहीं भूलती, जिसकी फोटोज और वीडियोज वो फैंस के साथ भी शेयर करती रहती हैं.

बच्चों के साथ करें दोस्ती…

 

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एक्टर शाहिद कपूर अक्सर शूटिंग में बिजी रहते हैं, जिसके कारण वह फैमिली के साथ वक्त नहीं बिता पाते. हालांकि उनकी वाइफ मीरा इस बात को समझती हैं, जिसके चलते वह बच्चों के साथ ज्यादा से ज्यादा वक्त बिताती हैं. बच्चों के साथ खेलना या मस्ती करना हो या उन्हें पढ़ाना, मीरा राजपूत इस बात का पूरा ख्याल रखती हैं कि वह बच्चों के साथ हमेशा रहें.

बता दें, शाहिद कपूर और मीरा राजपूत की साल 2015 में अरेंज्ड मैरिज हुई थी, जिसके बाद दोनों एक बेटा और एक बेटी के पेरेंट बनें. दोनों अक्सर अपनी फैमिली के साथ क्वालिटी टाइम बिताते नजर आते हैं.

Breast feeding से संभव Cancer की रोकथाम

यह तो सभी को पता है कि नवजात के लिए स्तनपान जरूरी है. खासकर शुरू के 6 महीनों तक. लेकिन यह कम ही लोग जानते होंगे कि स्तनपान करने वाले शिशुओं की मौत की आशंका स्तनपान न करने वाले शिशुओं के मुकाबले 14 गुना कम होती है. मां के दूध में मौजूद कोलोस्ट्रम बच्चे का प्रतिरक्षण बेहतर करता है, जबकि दूध में मौजूद पोषक तत्त्व उसे बीमारियों से बचाते हैं. यह भी देखा गया है कि इस प्रक्रिया से मां में अल्जाइमर्स विकसित होने की आशंका कम होती है और बच्चे के विकसित होते फेफड़े मजबूत होते हैं. इस से बच्चे को दमा होने का खतरा भी कम होता है. इस के अलावा इस से बच्चे डायरिया और निमोनिया के भी कम शिकार होते हैं. हाल ही में वैज्ञानिक स्तनपान और स्तन कैंसर में सीधा संबंध जानने में सफल हुए हैं. स्तनपान कराना न सिर्फ बच्चे के लिए फायदेमंद है, बल्कि मां के लिए भी, क्योंकि इस से अंडाशय को कैंसर और स्तन कैंसर होने का जोखिम भी काफी कम हो जाता है. खासतौर से युवा महिलाओं के मामले में.

जीवनशैली में बदलाव

कोलंबिया यूनिवर्सिटी के मेलमैन स्कूल औफ पब्लिक हैल्थ में किए गए एक अध्ययन के अनुसार स्तनपान कराने से ऐस्ट्रोजन रिसैप्टर नैगेटिव और प्रोजेस्टेरौन रिसैप्टर नैगेटिव ब्रैस्ट कैंसर का खतरा न्यूनतम होता है.
वैसे तो भारत में पहले स्तन कैंसर के मामले अपेक्षाकृत कम रहे हैं पर अब ऐसा नहीं है. भारतीय महिलाएं खासतौर से शहरी महिलाएं अपनी जीवनशैली के कारण बेहद प्रभावित हैं. देर से मां बनने की प्रवृत्ति और स्तनपान कराने से बचने के लिए सामाजिक और पेशेवर तनाव का शिकार होना इन कारणों में शामिल है.
महिलाओं में कैंसर के जितने मामले होते हैं उन में 25 से 32% स्तन कैंसर के होते हैं और मुख्यरूप से 50 साल से कम उम्र की महिलाएं प्रभावित होती हैं. इस का मतलब यह हुआ कि 20 से 50 साल के बीच की 48% महिलाएं इस का शिकार हो सकती हैं. पश्चिमी देशों में देखा गया है कि 100 में से 89 महिलाएं इस से बच जाती हैं. अत: भारत में भी स्तनपान कराने के महत्त्व के बारे में महिलाओं को जागरूक करने की आवश्यकता है. इस के लिए अभियान चलाए जाने की जरूरत है ताकि संदेश ज्यादा से ज्यादा महिलाओं तक पहुंचे. वर्ल्ड कैंसर रिसर्च फंड द्वारा किए गए कैंसर के आंकड़ों के अध्ययन के मुताबिक जो महिलाएं कम से कम 1 साल तक स्तनपान कराती हैं उन्हें स्तन कैंसर होने की आशंका 5% कम होती है. जो महिलाएं जितने लंबे समय तक स्तनपान कराती हैं उन्हें कैंसर होने की आशंका उतनी ही कम हो जाती है.

ज्यादा गर्भपात भी जिम्मेदार

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद द्वारा हाल ही में किए गए एक अध्ययन के मुताबिक शहरी कामकाजी महिलाएं ज्यादा गर्भपात कराती हैं, बच्चे देर से पैदा करती हैं और उन की स्तनपान कराने की अवधि भी कम होती है, जबकि गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन ज्यादा मात्रा में करती हैं. ऐसी महिलाओं को स्तन और अंडाशय के कैंसर की आशंका ज्यादा रहती है. भारतीय महिलाएं जो गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करती हैं उन में कैंसर का यह जोखिम 9.5 गुना बढ़ गया है.
स्तन कैंसर का उपचार कराने वाली कोई महिला अगर प्रजनन के लिहाज से स्वस्थ है और उस की आयु भी सीमा के अंदर है तो उसे मां बनने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए. एक अध्ययन से यह खुलासा हुआ है कि गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान बनने वाले हारमोन स्तन कैंसर की शुरुआत या उन्हें पुनर्जीवित करने का काम नहीं करते हैं.

– डा. शची बावेजा   कंसल्टैंट, बीएलके सुपरस्पैश्ययलिटी हौस्पिटल, दिल्ली

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