बहू का अवतार छोड़ ब्लैक ड्रेस में दिखीं तेजस्वी प्रकाश

टीवी एक्ट्रेस तेजस्वी प्रकाश बिग बॉस 15 के बाद से सुर्खियों में रहने लगी हैं, जिसका कारण उनका सीरियल नागिन 6 और लव लाइफ है. दरअसल, एक्ट्रेस आए दिन अपने बौयफ्रेंड करण कुंद्रा संग अपनी फोटोज और वीडियोज शेयर करती रहती हैं, जिसे फैंस काफी पसंद करते हैं. इसी बीच एक्ट्रेस तेजस्वी प्रकाश ने अपनी कुछ फोटोज शेयर की हैं, जो सोशलमीडिया पर छा गई हैं. आइए आपको दिखाते हैं तेजस्वी प्रकाश के लेटेस्ट फोटोज की झलक…

फैशन का जलवा दिखाती नजर आईं तेजस्वी

 

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बिग बॉस 15 में फैशन के जलवे दिखाने वाली एक्ट्रेस तेजस्वी प्रकाश का शो से बाहर आने के बाद भी फैशन कम नहीं हुआ है. कोई पार्टी हो या सीरियल का सेट वह इंडियन से लेकर वेस्टर्न आउटफिट में नजर आती हैं. फैंस को उनके हर लुक बेहद पसंद आते हैं. ईसी बीच नागिन एक्ट्रेस ने अपना एक कातिलाना अंदाज फैंस के साथ शेयर किया है. दरअसल, फोटोज में तेजस्वी प्रकाश ब्लैक ड्रेस पहने नजर आ रही हैं. वहीं इस ड्रैस में वह जमकर किलर पोज दे रही हैं. एक्ट्रेस का ये लुक देखकर सेलेब्स ही नहीं फैंस भी जमकर कमेंट कर रहे हैं.

 

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नागिन 6 में भी दिखता है कातिलाना अंदाज

 

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रियल लाइफ में ही नहीं सीरियल नागिन 6 में भी एक्ट्रेस तेजस्वी प्रकाश फैशन के जलवे बिखेरती नजर आती हैं.  साड़ी हो या नागिन बनकर प्रथा का अंदाज बेहद खूबसूरत लगता है. फैंस को उनका बहू अवतार काफी पसंद आ रहा है, जिसके चलते उनकी फोटोज सोशलमीडिया पर अक्सर वायरल होती रहती हैं.

 

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बता दें, एक्ट्रेस तेजस्वी बिग बॉस 15 के बाद से करण कुंद्रा के साथ रिलेशनशिप में हैं. वहीं दोनों कई बार क्वालिटी टाइम बिताते नजर आते हैं. हालांकि फैंस दोनों की शादी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.

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शेयर बाजार एक भूलभुलैया है

आम घरों की बचत को अब जम कर शेयरों में जमा किया जा रहा है और जहां मार्च 2020 में 4.08 करोड़ डीमैट खाते थे, वहीं दिसंबर 2021 में 8.06 करोड़ हो गए. शेयरों में व्यापार करने में डीमैट अकाउंट खोलना जरूरी है और जो कंपनियां यह अकाउंड खोलती है. वे पहले ही दिन बिना कारोबार किए हजारों रुपए झटक लेती है. फिर भी इन अकाउंटों की बढ़ती गिनती जनता की भूख और लालच को दर्शाता है.

अब हर शहर और कस्बे में शेयर दलालों के दफ्तर खुलने लगे है और बैंकों के ना काफी ब्याज से परेशान औरतों ने भी शेयर बाजार में पैसा लगाना शुरू किया है जबकि देश का आर्थिक विकास लगभग रूका हुआ है. जब मैन्मूफैक्चङ्क्षरग बढ़ नहीं रही हो, बेरोजगारी बढ़ रही हो, टैक्स बढ़ रहे हो, मकानों से किराए की आय घट रही हो, तब शेयर बाजार का ऊंचा होना आश्चर्य की बात है.

असल में शेयर बाजार एक सुनियोजित लौटरी बन गया है. कंपनियां जनता का पैसा लूटने का बाकायदा प्लान करती हैं और हर कंपनी कभी अपने शेयरों के दाम घटवाती है, कभी बढ़वाती है. जब घटते हैं तो लोग घबरा कर नुकसान उठा कर शेयर बेच देते हैं और फिर जब बढ़ते है तो लपक कर मंहगे दामों में खरीदने ही होड़ लगा देते हैं. नतीजा यह है कि छोटा निवेशक या तो पैसा खोता है या बहुत थोड़ा कमाता है पर कंपनियों के मालिक, ब्रोकर, एजेंट, बैंक, डीमैट अकाउंट चलाने वाले, क्वालिटी रेङ्क्षटग देने वाली कंपनियां पैसा कमाती हैं.

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शेयर बाजार एक भूलभूलैया है, किसी कंपनी को चलाने के लिए आम जनता द्वारा अपना छोटाछोटा योगदान देने वाला जरिया नहीं है. सरकारों ने इसे आय का अच्छा सोर्स माना है क्योंकि उसे ब्रोकरों से मिलने वाले इंकम टैक्स से भरपूर पैसा मिल रहा है.

शेयर बाजार दशकों से पैसे वालों का एक बहुत आसान तरीका आम लोगों को लूटने का रहा है और अब यह खेल इंटरनेशनल हो गया है और तरहतरह के एक्सपर्ट टीवी प्रोग्रामों में कंपनियों के भविष्य को उसी तरह बताते हैं जैसे पंडित हाथ देख कर सुख की गारंटी करते हैं. जो लोग धर्म भी का हैं वे शेयर बाजार पर ज्यादा भरोसा करते हैं और जो शेयर बाजार पर भरोसा करते हैं, वे साल में 10-12 बार तीर्थ यात्रा पर अवश्य जाते हैं.

यह आय है जो सब को सम्मोहित करती है और शेयर बाजार उसे आय का कोहिनूर का हीरा है जो काम का न हो पर चमकता बहुत है.

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सांवलेपन से परेशान हो गई हूं, मैं क्या करुं?

सवाल-

मैं 17 वर्षीय कालेज स्टूडैंट हूं. मैं अपने सांवलेपन से परेशान हूं. मेरी स्किन औयली है और मेरे मुंह के चारों तरफ सांवलापन है, जो कभी कम नहीं होता है. कोई क्रीम बताएं जिस से सांवलापन जल्दी हट जाए.

जवाब-

आप लैक्टिक बेस्ड चीजें इस्तेमाल करें. जैसे दूध व दही लगाने से सांवलेपन में फर्क पड़ता है. औयली स्किन में दही व बेसन को मिला कर लगाएं. कुछ देर लगा रहने के बाद सादे पानी से धो दें. अपनी डाइट में विटामिन, कैल्सियम युक्त चीजें शामिल करें. स्प्राउट्स खाने की आदत डालें.

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सवाल-

मेरी उम्र 17 वर्ष है. मेरी गरदन का पिछला हिस्सा बहुत सांवला दिखता है. उस सांवलेपन को दूर करने का कोई उपाय बताएं?

जवाब-

कभीकभी सनबर्न होने के कारण या हारमोन असंतुलन के कारण ऐसा होता है. आप सिट्रिक बेस्ड पिल्स ले सकती हैं. इस के अलावा बेसन, नीबू का रस व हलदी पाउडर को मिला कर गरदन पर लगाएं. सूखने पर दूध और पानी के घोल से इस मिश्रण को हटा दें.

इस के अलावा पपीता, केला, दूध, शहद व नीबू का रस मिला कर गरदन पर 25 मिनट तक लगाए रखें. सूखने पर सादे पानी से धो लें. बाहर जाने से पहले सनस्क्रीन लोशन जरूर लगाएं. अपना हारमोन बैलेंस भी जरूर चैक करवाएं.

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सांवली त्वचा के नाम से ही हम भारतीय अपनी सुंदरता में कमी महसूस करने लगते हैं. कई महिलाएं तो सांवले रंग को ले कर हीनभावना का शिकार हो जाती हैं, जबकि सांवलासलोना रंग अधिक आकर्षित करता है. अगर एक ब्यूटीशियन की नजर से देखा जाए तो हर तरह की रंगत खूबसूरत होती है. सिर्फ जरूरत है अपनी त्वचा को पहचानने की और उसे संवारने की.

सांवली त्वचा की देखभाल

रोज सुबह नहाने से पहले 1 चम्मच कच्चा दूध, 1 चुटकी नमक, 2 बूंदें नीबू का रस व 2 बूंदें शहद डाल कर 5 मिनट तक चेहरे पर लगाएं. बाद में साफ पानी से चेहरा धो लें.

हफ्ते में 2 बार चंदन व गुलाबजल का फेस पैक जरूर लगाएं.

धूप में सांवली त्वचा गोरी त्वचा से ज्यादा प्रभावित होती है. इसलिए हमेशा सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें.

किसी अच्छी कंपनी के वाइटनिंग फेस वाश से चेहरे को दिन में 2 बार जरूर धोएं.

रात को सोते समय अपनी त्वचा के अनुसार वाइटनिंग क्रीम लगाएं.

पूरी खबर पढ़ने के लिए- सांवली स्किन की करें देखभाल

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz   सब्जेक्ट में लिखे…  गृहशोभा-व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

किसकी कितनी गलती: नेहा बार-बार क्या सवाल पूछ रही थी

नेहा को अस्पताल में भरती हुए 3 दिन हो चुके थे. वह घर जाने के लिए परेशान थी. बारबार वह मम्मीपापा से एक ही सवाल पूछ रही थी, ‘‘डाक्टर अंकल मुझे कब डिस्चार्ज करेंगे? मेरी पढ़ाई का नुकसान हो रहा है. 15 सितंबर से मेरे इंटरनल शुरू हो जाएंगे. अभी मैं ने तैयारी भी नहीं की है. अस्पताल में भरती होने की वजह से मैं पूजा के साथ खेल भी नहीं पा रही हूं. मेरा मन उस के साथ खेलने को कर रहा है. यहां मुझे जरा भी अच्छा नहीं लगता, इसलिए मुझे जल्दी से घर ले चलो.’’

नेहा की इन बातों का कोई ज वाब उस के मम्मीपापा के पास नहीं था. मम्मीपापा को चुप देख कर उस ने पूछा, ‘‘मम्मी पूजा आ गई क्या?’’

‘‘नहीं बेटा, अभी तो 7 बजने में 10 मिनट बाकी हैं, वह तो 7 बजे के बाद आती है. आप आराम से नाश्ता कर लीजिए.’’  ‘‘जी मम्मी.’’ नेहा ने बडे़ ही इत्मीनान से कहा.

नेहा इंदौर में जीजीआईसी में 6वीं में पढ़ती थी. वह अपनी सहेली पूजा के साथ स्कूल जाती थी. पूजा उस के पड़ोस में ही रहती थी. दोनों में गहरी दोस्ती थी. कभी नेहा पूजा के घर जा कर होमवर्क करती तो कभी पूजा उस के घर आ जाती. होमवर्क के बाद दोनों साथसाथ खेलतीं.

उस दिन जब हिंदी के टीचर विनोद प्रसाद पढ़ा रहे थे तो उन की नजर नेहा पर चली गई. वह चुपचाप सिर झुकाए बैठी थी. उन्हें लगा कि नेहा को कोई परेशानी है तो उन्होंने पूछा, ‘‘क्या बात है नेहा?’’

विनोद प्रसाद के इस सवाल पर नेहा चौंकी. उस ने धीरे से कहा, ‘‘कुछ नहीं सर, थोड़ा पेट में दर्द है.’’

‘‘नेहा बेटा… आप को पहले बताना चाहिए था. अभी आप के लिए औफिस से दवा मंगवाता हूं.’’

विनोद प्रसाद ने औफिस से दवा मंगा कर खिलाई तो नेहा को थोड़ा आराम मिल गया. दोपहर एक बजे छुट्टी हुई तो वह पूजा के साथ घर आ गई. घर आ कर उस ने स्कूल बैग एक ओर फेंका और सोफे पर लेट गई. उस की मम्मी राधिका ने उस के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा, ‘‘बेटा, कपड़े बदल कर हाथमुंह धो लो, उस के बाद खाना खा कर आराम कर लेना. ‘‘मुझे भूख नहीं है मम्मी. अभी कुछ भी खाने का मन नहीं हो रहा है.’’ नेहा ने कहा.

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‘‘बेटा, थोड़ा ही खा लो. आज मैं ने आप की पसंद का खाना बनाया है.’’

‘‘कहा न मम्मी मुझे भूख नहीं है, प्लीज मम्मी जिद मत कीजिए. मेरे पेट में दर्द हो रहा है, इसलिए खाने का मन नहीं हो रहा है.’’

‘‘बेटा, जब आप के पेट में दर्द हो रहा है तो आप को स्कूल नहीं जाना चाहिए था. पापा आते ही होंगे, उन से आप के लिए दवा मंगवाती हूं.’’

‘‘मम्मी, स्कूल में विनोद सर ने दवा दी थी. दवा खाने के बाद थोड़ा आराम मिल गया था. लेकिन अभी फिर दर्द होने लगा है. मम्मी मेरे पेट में कई दिनों से इसी तरह रुकरुक कर दर्द हो रहा है. कभी हल्का दर्द होता है तो कभी अचानक बहुत तेज दर्द होने लगता है.’’ नेहा ने पेट दबा कर कहा.

नेहा अपनी बात कह ही रही थी कि उस के पापा राकेश उस के पास आ कर खड़े हो गए, ‘‘हैलो नेहा बेटा, मेरी बच्ची कैसी है?’’

‘‘लो पापा का नाम लिया और वह आ गए.’’ राधिका ने नेहा के बाल सहलाते हुए कहा.

‘‘हैलो पापा.’’ नेहा ने धीमी आवाज में पापा का स्वागत किया.

‘‘राधिका नेहा को कुछ हुआ है क्या, जो इतनी सुस्त लग रही है? परेशान होने की कोई बात नहीं है, इस के पेट में थोड़ा दर्द है.’’  राकेश ने नेहा को गोद में बिठा कर प्यार से उस की नाक पकड़ कर हिलाई तो कुछ कहने के बजाय नेहा ने मुसकरा दिया. रात को होमवर्क करने के बाद वह सिर्फ एक गिलास दूध पी कर सो गई.

अगले दिन सुबह नेहा स्कूल जाने के लिए नहीं उठ सकी. राधिका उसे जगाने आई तो वह उदास लेटी छत को एकटक ताक रही थी. नेहा के मासूम चेहरे पर आंखों से बहे आंसू सूख कर अपने वजूद की गवाही दे रहे थे. मम्मी कब उस के पास आ कर बैठ गईं, नेहा को पता ही नहीं चला था.

राधिका ने प्यार से उस के सिर पर हाथ फेरते हुए उस के मासूम चेहरे को ध्यान से देखा. उन्हें लगा कि नेहा कुछ ज्यादा ही परेशान है तो उन्होंने पूछा, ‘‘बेटा मम्मा को बताओ ना क्या बात है? आप ने होमवर्क नहीं किया क्या या फिर स्कूल के टीचर आप को डांटते हैं?’’  ‘‘मम्मी, ऐसी कोई बात नहीं है. मैं अपना सारा काम कम्पलीट रखती हूं. इसलिए मुझे कोई टीचर नहीं डांटता.’’ नेहा ने दबी आवाज में कहा.

‘‘तो फिर क्या बात है बेटा?’’

‘‘मम्मी, कुछ दिनों से मेरे पेट में दर्द रहता है. मेरा पेट भी पहले से बड़ा हो गया है.’’

राधिका ने नेहा की फ्रौक को ऊपर की ओर खिसका कर उस के पैर को गौर से देखा तो उन्हें लगा कि शायद नेहा के पेट में सूजन आ गई है. उन्होंने यह बात राकेश को बताई तो उन्होंने पत्नी को तसल्ली देते हुए कहा, ‘‘चलो, आज इसे डाक्टर को दिखा देते हैं. लापरवाही करना ठीक नहीं है. राधिका, तुम इसे नाश्ता कराओ, तब तक मैं नहाधो कर तैयार हो जाता हूं.’’

ठीक 11 बजे राकेश राधिका और नेहा को ले कर अस्पताल पहुंच गए. उन्होंने नंबर लिया और डा. राहुल जैन के चैम्बर के सामने पड़े सोफे पर बैठ गए. नंबर आने पर वह नेहा को ले कर अंदर गए, जबकि राधिका बाहर ही बैठी रही. डा. राहुल जैन ने नेहा से कई सवाल किए. इस के बाद उन्होंने कहा, ‘‘पहले आप बच्ची का सोनोग्राफी करा लीजिए. उस के बाद जो रिपोर्ट आएगी, उस के अनुसार ही इलाज होगा.’’

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डाक्टर की पर्ची और नेहा को साथ ले कर राकेश अस्पताल में उस ओर बढ़ गए, जिधर सोनोग्राफी होती थी.

सोनोग्राफी की रिपोर्ट 2 घंटे बाद मिल गई. राकेश राधिका और नेहा को सोफे पर बैठा कर अकेले ही डाक्टर की केबिन में दाखिल हो गए. रिपोर्ट देख कर डा. जैन सन्न रह गए. उन के चेहरे से लगा, जैसे रिपोर्ट पर उन्हें विश्वास नहीं हुआ हो. उन्होंने एक बार फिर रिपोर्ट को गौर से देखा. उस के बाद दबे स्वर में कहा, ‘‘मि. राकेश, नेहा इज प्रेग्नेंट.’’

यह सुन कर राकेश अवाक रह गए. वह जिस तरह बैठे थे, उसी तरह बैठे रह गए. मानो कुछ सुना ही न हो. वह डा. जैन को बिना पलक झपकाए देखते रह गए. जबकि उन्हें कुछ दिखाई नहीं दे रहा था. उन की आंखों के सामने अंधेरा छा गया था.

‘‘मिस्टर राकेश, खुद को संभालिए.’’ डा. जैन ने उन्हें दिलासा देते हुए कहा.

राकेश पसीने से पूरी तरह तर हो चुके थे. एकबारगी उठ कर बाहर आ गए. उन का हाल देख कर राधिका सहम उठी. डरतेडरते उन्होंने पूछा, ‘‘रिपोर्ट देख कर क्या बताया डाक्टर ने.’’

राकेश किस तरह बताते कि उन की कली जैसी बेटी मां बनने वाली है. वह निढाल हो कर सोफे पर बैठ गए.

‘‘क्या बात है जी?’’ राधिका ने बेचैनी से पूछा, ‘‘आप बताइए न, क्या हुआ है मेरी बच्ची को, आप बताते क्यों नहीं हैं?’’

राकेश की खामोशी राधिका के दिल में नश्तर की तरह चुभ रही थी. पत्नी को बेचैन देख कर राकेश ने रुंधी आवाज में कहा, ‘‘घर चल कर बताता हूं.’’

2 किलोमीटर का सफर पूरा होने में जैसे युग लग गया. इस बीच राधिका के मन में न जाने कितने खयाल आए. तरहतरह की आशंकाएं उसे परेशान करती रहीं. घर पहुंच कर राकेश ने नेहा को बिस्तर पर लिटा कर आराम करने को कहा.

लेटने के बाद नेहा ने पूछा, ‘‘पापा, डाक्टर अंकल ने क्या बताया, मेरे पेट का दर्द कब ठीक होगा? मेरे टेस्ट होने वाले हैं. आप डाक्टर अंकल से कहिए कि मुझे जल्दी से ठीक कर दें, वरना पूजा के नंबर मुझ से ज्यादा आ जाएंगे.’’

राकेश ने नेहा के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा, ‘‘बेटा, आप जल्दी ठीक हो जाओगी. घबराने की कोई बात नहीं है.’’

राधिका बड़ी बेसब्री से राकेश का इंतजार कर रही थी. जैसे ही राकेश उन के पास आए, उन्होंने बेचैनी से पूछा, ‘‘डा. साहब ने क्या बताया है, क्या हुआ है मेरी बच्ची को?’’

राधिका की बांह पकड़ कर राकेश ने कहा, ‘‘आप को किस मुंह से अपनी बरबादी की कहानी सुनाऊं. हम लोग लुट गए राधिका. बर्बाद हो गए. हम किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहे. डाक्टर ने बताया है कि नेहा 6 महीने की गर्भवती है.’’

राकेश का इतना कहना था कि राधिका को ऐसा लगा कि सब कुछ घूम रहा है. आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा है. वह गिरी और बेहोश हो गई.

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राकेश उस के मुंह पर पानी के छींटे मारते हुए उसे होश में लाने की कोशिश करने लगे. कभी वह उन का मुंह पकड़ कर हिलाते तो कभी कहते, ‘‘उठो राधिका, उठो खुद को संभालो. वरना नेहा का क्या होगा?’’

कुछ देर में राधिका उठी और पति के गले लग कर फफकफफक कर रोने लगी, पतिपत्नी की समझ में नहीं आ रहा था कि यह सब कैसे हुआ, किस ने नेहा के साथ यह गंदा काम किया? रोतेरोते राधिका ने कहा, ‘‘हमारी बेटी के साथ यह नीच हरकत किस ने की, किस ने मासूम कली को बेरहमी से मसल दिया? उस कमीने को हमारी मासूम बेटी पर जरा भी तरस नहीं आया. उस ने हमें समाज में मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ा.’’

इस के बाद आंचल से आंखें साफ कर के राधिका नेहा के पास आ गई. प्यार से उस के सिर हाथ फेरते हुए कहा, ‘‘बेटी नेहा, अब तबीयत कैसी है?’’

‘‘मम्मी अब थोड़ा ठीक है, लेकिन बीचबीच में दर्द होने लगता है.’’ नेहा ने मासूमियत से कहा.

‘‘डाक्टर अंकल ने कहा है कि नेहा बहुत जल्दी ठीक हो जाएगी.’’ राकेश ने दिल पर पत्थर रख कर मुश्किल से बेटी को समझाया.

पतिपत्नी में से किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी कि नेहा से किस तरह से इस मुद्दे पर बात करें. लेकिन बात तो करनी ही थी. आखिर राधिका ने नेहा से बड़े प्यार से पूछा, ‘‘बेटा, आप के साथ स्कूल में किसी ने गलत काम किया है क्या?’’

‘‘नहीं मम्मी, किसी ने मेरे साथ कोई गलत काम नहीं किया है.’’

एक मांबाप के लिए शायद दुनिया में सब से बुरा सवाल यही होगा. खैर, काफी समझानेबुझाने पर नेहा ने बताया, ‘‘पवन भैया मेरे साथ गंदा काम करते थे.’’

पवन नेहा की बुआ यानी राकेश की बहन का बेटा था. इसलिए उस के घर आनेजाने में किसी तरह की कोई पाबंदी नहीं थी. नेहा के इस जवाब से पतिपत्नी सिर थाम कर बैठ गए. घर का भेदी लंका ढाए. नेहा को गले लगा कर राधिका ने उस के कान के पास अपना मुंह ले जा कर लगभग फुसफुसाते हुए पूछा, ‘‘बेटा, आप के साथ पवन कब से यह गंदा काम कर रहा था? आप ने मम्मीपापा को यह बात पहले क्यों नहीं बताई.’’

नेहा के आंसू नाजुक गालों से होते हुए राधिका के कंधे को भिगो रहे थे. उस ने सिसकते हुए कहा, ‘‘मम्मी, आप को कैसे बताती. पवन भैया मुझे मार देते. वह मेरे साथ गलत काम करते थे. उस के बाद कहते थे कि किसी को कुछ बताया तो तेरा गला दबा कर जान ले लूंगा.’’

नेहा अभी भी उस वहशी को भइया कह रही थी. राधिका ने पूछा, ‘‘बेटा, आप के साथ यह गंदा काम कब से हो रहा था?’’

‘‘मम्मी जब आप घर का सामान लेने बाजार जाती थीं, उसी बीच भैया आ कर मेरे साथ जबरदस्ती करते थे. उस के बाद चौकलेट देते. मैं चौकलेट लेने से मना करती तो मुझे मारने की धमकी देते. किसी से कुछ बताने को भी मना करते थे. मम्मी, मैं बहुत डर गई थी, इसलिए आप लोगों को कुछ नहीं बता पाई.’’

‘‘कोई बात नहीं बेटा.’’ राकेश ने खुद को झूठी दिलासा देते हुए कहा.

‘‘सुनिए जी, अब क्या किया जाए?’’ राधिका ने पूछा.

‘‘अब क्या होगा. कुछ भी हो मैं इस वहशी को जिंदा नहीं छोड़ूंगा, इस के लिए चाहे मुझे जेल ही क्यों न जाना पड़े.’’ राकेश ने कहा.

‘‘नहीं, पहले आप नेहा के बारे में सोचिए. चलो डा. जैन को एक बार और दिखाएं और नेहा का अबौर्शन कराना जरूरी है. उस के बाद आगे की काररवाई करेंगे.’’

‘‘यह भी ठीक रहेगा,’’ राकेश ने मरजी के विपरीत हामी भरी.

इस के बाद अस्पताल जा कर डा. जैन से नेहा का गर्भ गिराने के लिए कहा तो डा. जैन ने कहा, ‘‘देखिए, मिस्टर राकेश, यह पुलिस केस है, इसलिए पहले आप एफआईआर कराएं, उस के बाद ही कुछ हो सकता है.’’

‘‘डाक्टर साहब, ऐसा अत्याचार मुझ पर मत कीजिए. मैं वैसे ही बहुत परेशान हूं, अब आप भी परेशान न करें.’’ राकेश ने गिड़गिड़ाते हुए कहा.

‘‘देखिए, आप समझने की कोशिश कीजिए राकेशजी. आप की बेटी 6 महीने की गर्भवती है. इसलिए उस का अबौर्शन नहीं किया जा सकता. उस की जान को खतरा हो सकता है.’’

‘‘डाक्टर साहब, अब हम इस पाप का क्या करें. हम तो किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहे.’’

‘‘राकेशजी, आप समझने की कोशिश कीजिए. ऐसा करने से नेहा की जान जा सकती है. फिर यह गैरकानूनी भी है, सो आई एम सौरी.’’ डा. राहुल जैन ने हाथ खड़े कर दिए.

नेहा 3 दिनों से अस्पताल में भरती थी. वह मम्मीपापा से बारबार पूछ रही थी कि अस्पताल से उसे कब छुट्टी मिलेगी. उस की पढ़ाई का नुकसान हो रहा है. 15 तारीख से उस के इंटरनल शुरू होने वाले हैं. जबकि उस ने अभी तैयारी भी नहीं की है. उसे पूजा के साथ खेलना है.

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राकेश ने कोर्ट से नेहा का गर्भपात कराने की इजाजत मांगी, लेकिन फिलहाल अभी उन्हें इस में कामयाबी नहीं मिली है. पवन के खिलाफ थाने में विभिन्न धाराओं के अंतर्गत मुकदमा दर्ज करा दिया गया है, उस की धरपकड़ के लिए पुलिस जगहजगह छापे मार रही है. लेकिन अभी वह पकड़ा नहीं जा सका है. पुलिस ने उस की गिरफ्तारी के लिए उस का फोन नंबर ही नहीं, उस के दोस्तों, रिश्तेदारों और घर वालों के फोन नंबर सर्विलांस पर लगा रखे हैं.

अब देखना यह है कि क्या कोर्ट राकेश की फरियाद पर नेहा का गर्भपात कराने की इजाजत देता है. इस के लिए कोर्ट पहले डाक्टरों के पैनल से रिपोर्ट मांगेगा कि गर्भपात कराने से 12 साल की बच्ची को कोई नुकसान तो नहीं पहुंचेगा. इस रिपोर्ट के बाद कोर्ट कोई फैसला देगा. लेकिन फैसला आने तक राकेश और राधिका के लिए एकएक पल गुजारना वर्षों गुजारने के बराबर है, जो उन्हें हर एक पल बर्बादी का अहसास दिलाता है.

राधिका ने राकेश से उलाहना देते हुए कहा, ‘‘मैं आप से हमेशा कहती थी कि पवन पर आंख मूंद कर के इतना भरोसा मत करो, लेकिन आप को उस पर बड़ा नाज था. आप हमेशा मेरी बातों को नजरअंदाज करते थे.’’

‘‘राधिका अब बस भी करो, मैं वैसे ही बहुत परेशान हूं, मुझे क्या पता था कि वह मेरे भरोसे का इतना बुरा सिला देगा. चलो, मैं तुम्हारी बात मानता हूं कि अगर पवन को इतनी छूट न देता तो आज हमें यह दिन देखना न पड़ता.’’

इस के बाद एक लंबी सांस ले कर राकेश ने आगे कहा, ‘‘चलो, मान लिया मेरी गलती से यह हुआ, लेकिन तुम्हारी भी गलती कम नहीं है. नेहा को प्रैग्नेंट हुए आज पूरे 6 महीने हो गए हैं और तुम्हें इस की जरा भी भनक नहीं लग सकी. राधिका, मैं तो पूरा दिन औफिस में रहता हूं, लेकिन तुम भी तो नेहा का ध्यान नहीं रख पाईं. उस दरिंदे के भरोसे नेहा को अकेली छोड़ कर क्यों बाजार चली जाती थीं? तुम्हें नेहा से हर तरह की पूछताछ करनी चाहिए थी. तुम उस की मां होेने के साथ, उस की सखीसहेली भी हो, सुनो राधिका, होनी को कोई नहीं टाल सकता, लेकिन सावधानी जरूरी है. हर किसी पर भरोसा नहीं करना चाहिए चाहे कोई कितना ही सगा रिश्तेदार क्यों न हो.’’

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अनाम रिश्ता: भाग 1- क्या मानसी को मिला नीरस का साथ

एयरपोर्ट के अंदर जाने से पहले बकुल ने मां मानसी के पैर छुए तो वे भावुक हो उठीं.

उन्होंने देखा ही नहीं था कि अपनी बाइक से पीछेपीछे नीरज भी बकुल को सी औफ करने के लिए आए हैं. वे उन्हें देख कर चौंक पड़ीं.

बकुल ने नीरज के भी पैर छुए और बोला, ‘‘सर मौम का खयाल रखिएगा.’’

‘‘नीरज तुम?’’ वे आश्चर्य से बोलीं.

‘‘बकुल जा रहा था, तो मुझे उसे छोड़ने तो आना ही था.’’

‘‘आ जाओ मेरे साथ गाड़ी में चलना.’’

‘‘नहीं, मैं अपनी बाइक से आया हूं.’’

उन की निगाहें काफी देर तक बकुल का पीछा करती रहीं, फिर जब वह अंदर चला गया तो अपने युवा बेटे की सफलता की खुशी के साथसाथ उस के बिछोह का सोच कर आंखें छलछला उठीं. वे गाड़ी के अंदर गुमसुम हो कर बैठ गईं. सूनी आंखों से खिड़की के बाहर देखने लगीं.

घर पहुंचीं तो रूपा से कौफी बनाने को कह कर बालकनी में खड़ी हो गई थीं. वह अपने में ही खोई हुई सी थीं.

तभी रूपा बोली, ‘‘मैडम कौफी.’’

वे भूल गई थीं कि उन्होंने रूपा से कौफी के लिए कहा था. वे कप उठा ही रही थीं कि डोरबैल बज उठी. वे समझ गई थीं कि नीरज के सिवा इस समय भला कौन हो सकता है.

‘‘रूपा एक कौफी और बना दो,’’ मानसी बोली.

नीरज जिस ने उन के अकेलेपन में, उन के कठिन समय में, कहा जाए तो हर कदम पर उन का साथ दिया था.

‘‘अकेलेअकेले कौफी पी जा रही है… एयरपोर्ट पर आप का उदास चेहरा देख कर अपने को नहीं रोक पाया और बाइक अपनेआप इधर मुड़ गई.’’

‘‘आज स्कूल नहीं गए?’’

‘‘कहां खोई हुई हैं आप? आज तो संडे है,’’ कह कर आदत के अनुसार हंस पड़ा.

‘‘आज बकुल गया है तो मन भर आया.’

चलो, तुम्हारी इतने दिनों की तपस्या सफल हो गई. तुम्हारा बेटा पढ़ लिख कर लायक बन गया, अब कुछ दिनों में अपनी किसी गर्लफ्रैंड के साथ शादी करने को बोलेगा, फिर अपनी दुनिया में रम जाएगा. यही तो दुनिया की रीति है.’’

‘‘हां वह तो तुम ठीक कह रहे हो, लेकिन जो मेरे जीवन का ध्येय था कि बेटे को कामयाब बनाऊं, वह तो तुम्हारी मदद से पूरा कर ही लिया.’’

‘‘मानसी कभी अपनी खुशी के बारे में भी तो सोचा करो.’’

‘‘तुम मेरे दोस्त हो तो, जो हर समय मेरी खुशी के बारे में ही सोचते रहते हो. अभी देखो बकुल गया इसलिए मन उदास हो रहा था, तो मुझे सहारा देने के लिए आ गए.’’

‘‘हां दोस्ती की है तो जिंदगीभर निभाऊंगा,’’ कह कर वे जोर से हंस पड़े.

नीरज की हंसी उन्हें बहुत मोहक लगती थी. वे भी हंस पड़ी थीं.

‘‘फिर पकड़ो मेरा हाथ,’’ कहते हुए उन्होंने अपना हाथ उन की तरफ बढ़ा दिया.

मानसी ने झिझकते हुए उन के हाथ पर अपना हाथ रख दिया. पुरुष के स्पर्श से उन का सर्वांग कंपकंपा उठा और वे उठ खड़ी हो गईं.

‘‘मानसी, चलो आज हम दोनों लंच के लिए कहीं बाहर चलते हैं… अभी 10 बजे हैं मैं 1 बजे तक आऊंगा.’’

‘‘बैठो. क्यों जा रहे हो?’’

‘‘अरे यार समझ करो अभी नहाया भी नहीं हूं, फिर आप के साथ लंच पर जाना है तो जरा ढंग से कपड़े वगैरह पहन कर आऊंगा. अभी तो बस बाइक उठाई और आ गया था.’’

नीरज चले गए थे. रूपा गाने की शौकीन थी. उस के मोबाइल पर गाना बज रहा था…

‘‘महलों का राजा मिला कि रानी बेटी

राज करे…’’

इस गीत के शब्दों नें उन्हें उन के अतीत में पहुंचा दिया और उन के अतीत का 1-1 पन्ना खुलता चला गया.

कितने सुनहरे सपनों को अपने मन में संजो कर वे अपने घर की देहरी से बाहर निकली थीं. 19 वर्ष की मानसी करोड़पति पिता की लाड़ली थीं. उन्होंने बीए में एडमिशन लिया ही था कि पिता मनोहर लाल ने उन की शादी तय कर दी. पैसे को मुट्ठी में पकड़ने वाले पापा ने बेटी की खुशियों के लिए अपनी तिजोरी का मुंह खोल दिया था. वे भी राजकुमार से स्वप्निल के सपनों में खो गई थीं. जब हाथी पर सवार हो कर स्वप्निल दूल्हे के वेष में आए तो बांके से सलोने युवक की तिरछी सी मुसकान पर वे मर मिटी थीं.

‘‘वाह मानसी, जीजू तो बिलकुल फिल्मी हीरो हैं,’’ जब उन की सहेलियों ने कहा तो वे शरमा उठी थीं.

तभी शीला मौसी आ गई और कहने लगी, ‘कुंवरजी को नजर मत लगा देना छोरियों.’

‘‘जीजाजी ने दामाद तो हीरा जैसा ढूंढ़ा है, राज करेगी मेरी मानसी.’’

सिर से पैर तक जेवरों से लदी हुईं, भारी लहंगे में सजीधजी मानसी ने ससुराल में कदम रखा था, तो वहां पर उन का भव्य स्वागत हुआ. सास मालतीजी और ननदों ने मिल कर उन के सपने साकार कर दिए थे. उन लोगों का लाड़प्यार पा कर वे अभिभूत हो उठी थीं.

स्वप्निल की बांहों में उन्हें जीवन की सारी खुशियां मिल गई थीं. कश्मीर में गुलमर्ग और पहलगाम की वादियों में बर्फ के गोलों से खेलती हुई वहां के सौंदर्य में खो गई थीं. स्वप्निल को घूमने का शौक था, कभी मुंबई के जुहू चौपाटी तो कभी महाबलीपुरम का बीच. कितने खुशनुमा दिन और रातें थीं.

फिर जब उन की जिंदगी में जुड़वां गोलूमोलू आ गए तो उन की जिम्मेदारियां बढ़ गईं और स्वप्निल भी पापा के साथ बिजनैस में बिजी हो गए.

गोलूमोलू 3 साल के थे तब एक दिन स्वप्निल घबराए हुए आए और बोले, ‘‘मानसी अपना बैग पैक कर लेना, सुबह हम लोगों को आगरा पहुंचना है. वन्या दी हौस्पिटल में एडमिट हैं, उन की हालत खराब है.’’

‘‘स्वप्निल, प्लीज सुबह चलिएगा, रात में यदि ड्राइवर को नींद का झंका आ गया.’’

‘‘फालतू बात मत करो. रात में 11-12 बजे निकलेंगे सुबह पहुंच जाएंगे. रात में रोड खाली मिलता है.’’

वे सहम कर चुप हो गई थीं. उन्होंने जल्दीजल्दी कुछ कपड़े बच्चों के और अपने व स्वप्निल के रखे और निकल पड़ी थीं. स्वप्निल की आंखें थकान के मारे नींद से बो?िल हो रही थीं. वे बारबार आंखों पर पानी डाल रहे थे. नियति को दोष दे कर हम सब अपने को दोषमुक्त कर लेते हैं परंतु दुर्घटना के लिए दोषी तो हम भी होते ही हैं.

जीवन में सुख और दुख उसी तरह से सुनिश्चित और संभाव्य हैं जैसे दिन

और रात. खुशियों के झले में झलने वाली मानसी नहीं जानती थीं कि भविष्य उन्हें जीवन के दुखद क्षणों की ओर खींच कर ले जा रहा है. गाड़ी में बैठते ही दोनों बच्चे और वे गहरी नींद में सो गए थे. शायद थके हुए स्वप्निल को भी नींद आ गई. कुछ ही देर में जोर का धमाका हुआ और उन्हें लगा कि कोई पिघला शीशा उन के ऊपर डाल रहा है. फिर कुछ पलों में ही वे मूर्छित हो गई थीं. अफरातफरी का माहौल, रात के गहरे अंधेरे में एक ट्रक ने जोर की टक्कर मार दी थी. सारे सपने तहसनहस हो गए. स्वप्निल उन्हें अकेला छोड़ गए. मोलू भी उन के साथ विदा हो गया.

गोलू को खरोंच भी नहीं आई थी, लेकिन उन का एक हाथ और एक पैर बुरी तरह कुचल गया था इसलिए वे 2 महीने तक नर्सिंगहोम में एडमिट रहीं. पापा आया करते और जरूरी कागजों पर साइन करवाते. न ही वे कहते कि कागज पढ़ लो और न ही वे कोई रुचि दिखातीं. अब तो यही लोग उन के जीवनदाता थे. कभी ईशा दी, कभी मम्मीजी गोलू को ले कर आया करतीं, लेकिन उन्हें बैड पर लेटे देख कर मम्मीजी की गोद में छिप जाता. उन की आंखों से अविरल आंसू बहते रहते. उन के दिमाग ने काम करना ही बंद कर दिया था.

गोलू का नाम स्वप्निल ने बकुल रखा था, इसलिए अब सब लोग उसे बकुल ही पुकारा करते थे. उन के मम्मीपापा उन्हें अपने साथ आगरा ले जाना चाहते थे, लेकिन यहां पापाजी का कहना था कि जब तक औफिशियल काम न पूरे हों, तब तक यहीं रहो. बारबार कौन जाएगा साइन करवाने.

उन की अपनी मां दिनरात उन के साथ बनी रहतीं और पापा डाक्टरों से संपर्क में रहते. उन की कई बार प्लास्टिक सर्जरी भी होती रही. जब तक ये सब चलता रहा मम्मीजी खूब प्यार से बोलतीं और उन का ध्यान रखा करतीं.

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Summer Special: बची खिचड़ी-चावल से बनाएं ये टेस्टी रेसिपी

चावल एक सुपाच्य अनाज है जो भांति भांति की वैरायटीज बाजार में उपलब्ध है. दक्षिण भारत और बंगाल का चावल प्रमुख खाद्य पदार्थ है. दाल चावल, कढ़ी चावल, राजमा चावल और छोले चावल तो अपने स्वाद के लिए मशहूर हैं. कई बार हमारे किसी परिचित के यहां सम्पन्न हुए किसी कार्यक्रम में चावल बच जाते हैं ऐसे में यदि आप वहां से चावल लेकर आईं है तो उसे एक ऐसा रूप दीजिए कि घर के सदस्य पहचान ही न पाएं कि अमुक डिश उन्हीं पुराने चावलों से बनी है. तो आइए देखते हैं कि इन्हें कैसे बनाते हैं-

-शेजवान स्क्वायर

कितने लोंगों के लिए           6

बनने में लगने वाला समय      30 मिनट

मील टाइप                           वेज

सामग्री

बचे चावल                 1 कटोरी

मैदा                          1 कटोरी

शेजवान चटनी           1 टेबलस्पून

बेसन                         1 टेबलस्पून

कलौंजी                       1/4 टीस्पून

नमक                           स्वादानुसार

चिली फ्लैक्स               1/4 टीस्पून

प्याज कटा                    1

अदरक                         1 इंच

हरी मिर्च                       2

लहसुन                         4 कली

तेल पर्याप्त मात्रा में

चावलों को प्याज, अदरक, हरी मिर्च, 1 टेबलस्पून पानी और लहसुन के साथ बारीक पीस लें. अब इस पिसे मिश्रण में तेल को छोड़कर सभी सामग्री को मिलाएं. 1 टेबलस्पून तेल डालकर कड़ा गूंथ लें. आवश्यकतानुसार पानी मिलाएं. तैयार आटे को 20 मिनट के लिए ढककर रखें. 20 मिनट बाद आधा इंच मोटा बेलकर कांटे से प्रिक कर दें. चौकोर टुकड़ों में काटकर गर्म तेल में मध्यम आंच पर सुनहरा होने तक तलें. ठंडा होने पर एयरटाइट जार में भरकर प्रयोग करें.

-मिंट खिचड़ी कबाब

बची खिचड़ी                1कप

उबले आलू                   2

ब्रेड क्रम्ब्स                 2 टेबलस्पून

बारीक कटा प्याज         1

बारीक कटी शिमला मिर्च   1

बारीक कटी हरी मिर्च          2

अदरक कटा                    1 इंच

कटे पोदीना के पत्ते           1/2 कप

नमक स्वादानुसार

अमचूर पाउडर               1 टीस्पून

लाल मिर्च पाउडर           1/4 टीस्पून

गर्म मसाला                   1/4 टीस्पून

भुना जीरा पाउडर          1/4 टीस्पून

बारीक कटा हरा धनिया 1 टीस्पून

तलने के लिए तेल

कॉर्नफ्लोर                    2 टेबलस्पून

कश्मीरी लाल मिर्च         1 टीस्पून

विधि

खिचड़ी को एक गहरे बर्तन में डालकर उबला आलू, 1 टेबलस्पून ब्रेड क्रम्ब्स, कटी सब्जियां, पोदीना पत्ता, तथा सभी मसाले डालकर हाथ से अच्छी तरह मिलाएं. तैयार मिश्रण से छोटी छोटी बॉल्स लेकर हथेली पर चपटी करें और कबाब का गोल आकार दें. कॉर्नफ्लोर को आधा कप पानी और कश्मीरी लालमिर्च के साथ अच्छी तह घोल लें. तैयार कबाब को कॉर्नफ्लोर के घोल में डुबोकर बचे ब्रेड क्रम्ब्स में अच्छी तरह रोल करें. अब इन्हें एक नॉनस्टिक पैन में डालें और ऊपर से 1 टेबलस्पून तेल डालें. मध्यम आंच पर दोनों तरफ से सुनहरा होने तक तलें. पुदीने की चटनी के साथ सर्व करें.

इंसाफ: कौन था मालती और कामिनी का अपराधी

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4 Tips: डेयरी प्रोडक्ट्स को ऐसे रखें सेफ

कई बार ऐसा होता है कि आप बाहर से दूध का पैकेट खरीदकर लाते हैं और जब अगले दिन उसे इस्तमाल करने के लिए उबालने जाते हैं तो दूध फट जाता है. ये बहुत ही सामान्य बात है. खासकर गर्मियों में दूध और दूध से बनीं चीजें खराब हो जाती हैं. ऐसे में ये बहुत जरूरी हो जाता है कि हमें दूध और दूसरे डेयरी प्रोडक्ट्स को स्टोर करने का सही तरीका पता हो.

1. तापमान का हमेशा ख्याल रखें

डेयरी प्रोडक्ट्स को कूल टेंपरेचर में ही स्टोर करना चाहिए. हालांकि डेयरी प्रोडक्ट्स को नमी से बचाकर ही रखें. कूल एंड ड्राई जगह पर रखने से डेयरी प्रोडक्ट्स और दूध लंबे समय तक सही रहते हैं. इसी तरह गर्म तापमान में भी ये चीजें आसानी से खराब हो जाती हैं. दरअसल, नमी और गर्मी में बैक्टीरिया ज्यादा पनपते हैं, जिससे डेयरी प्रोडक्ट खराब हो जाते हैं.

2. उबालकर ही करें इस्तेमाल

अगर आप रोजाना दूध पीते हैं तो ये सुनिश्चि‍त करें कि उबाले बिना दूध न पिएं. दूध को उबालकर पीने से इसमें मौजूद बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं. हल्का गुनगुना दूध पीना, ठंडा दूध पीने से कहीं अधि‍क फायदेमंद है.

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3. मैन्युफेक्चरिंग डेट देखकर ही खरीदें

ये बात न केवल दूध ओर डेयरी प्रोडक्ट्स पर लागू होती है बल्क‍ि हर चीज पर लागू होती है जो बाहर से खरीदी जाती है. दूध और दूसरे डेयरी प्रोडक्ट्स खरीदते समय हमेशा उस पर लिखी तारीख देख लें. बेस्ट बीफोर में तारीख चेक कर लें. साथ ही अगर पैकेट कहीं से फटा हो तो उसे गलती से भी न खरीदें.

4. धूप से बचाकर रखें

दूध को धूप से बचाकर रखें. इससे दूध में मौजूद पौष्ट‍िक तत्व नष्ट हो जाते हैं. विटामिन डी और रिबोफ्लेविन जैसे पोषक तत्व सूरज की रोशनी में नष्ट हो जाते हैं.

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दिल के रिश्ते- भाग 1: कैसा था पुष्पा और किशोर का प्यार

फूलपुर गांव के एक तरफ तालाब के किनारे मंदिर था तो दूसरी तरफ ऐसा स्थल जहां साल में एक बार 9 दिनों का मेला लगता था. मंदिर के आगे गांव वालों के खेत शुरू हो जाते थे. खेतों की सीमा जहां खत्म होती थी वहां से शुरू होता था एक विशाल बाग. इस बाग के दूसरी तरफ एक पतली सी नदी बहती थी. आमतौर पर बाग के बीच के खाली मैदान का प्रयोग गांव वाले खलिहान के लिए किया करते थे पर साल में एक बार यहां बहुत बड़ा मेला लगता था. मेले की तैयारी महीनों पहले से होने लगती. मेला घूमने लोग बहुत दूरदूर से आते थे.

आज बरसों बाद पुष्पा मेले में कदम रख रही थी. तब में और आज में बहुत फर्क आ गया था. तब वह खेतों की मेंड़ पर कोसों पैदल चल के सखियों के साथ मेले में घूमती थी. आज तो मेले तक पहुंचने के लिए गाड़ी की सुविधा है. पुष्पा पति व बच्चों के साथ मेला घूमने लगी. थोड़ी देर घूमने के बाद वह बरगद के एक पेड़ के नीचे बैठ गई. पति व बच्चे पहली बार मेला देख रहे थे, सो, वे घूमते रहे.

पुष्पा आराम से पेड़ से पीठ टिका कर जमीन की मुलायम घास पर बैठी थी कि उस की नजर ऊपर पेड़ पर पड़ी. उस ने देखा, पेड़ ने और भी फैलाव ले लिया था, उस की जटाएं जमीन को छू रही थीं. बरगद की कुछ डालें आपस में ऐसी लिपटी हुई थीं जैसे बरसों के बिछड़े प्रेमीयुगल आलिंगनबद्ध हों. पक्षियों के झुंड उन पर आराम कर रहे थे. उस ने अपनी आंखें बंद करनी चाहीं, तभी सामने के पेड़ पर उस की नजर पड़ी जो सूख कर ठूंठ हो गया था. उस की खोह में कबूतरों का एक जोड़ा प्रेम में मशगूल था. उस ने एक लंबी सांस ले कर आंखें बंद कर लीं.

आंखें बंद करते ही उस के सामने एक तसवीर उभरने लगी जो वक्त के साथ धुंधली पड़ गई थी. वह तसवीर किशोर की थी जिस से उस की पहली मुलाकात इसी मेले में हुई थी और आखिरी भी. किशोर की याद आते ही उस से जुड़ी हर बात पुष्पा को याद आने लगी.

उस दिन वह 4 सहेलियों के साथ सुबह ही घर से निकल पड़ी थी ताकि तेज धूप होने से पहले ही सभी मेले में पहुंच जाएं. सुबह के समय मंदमंद चलती ठंडी हवा, आसपास पके हुए गेंहू के खेत और मेला देखने की ललक, बातें करती, हंसतीखिलखिलाती वे कब मेले में पहुंच गईं, उन्हें पता ही न चला.

वे मेला घूमने लगीं. मेले में घूमतेघूमते पुष्पा को लगा कि कोई उस का पीछा कर रहा है. थोड़ी देर तक तो उस ने सोचा कि उस का वहम है पर जब काफी समय गुजर जाने के बाद भी पीछा जारी रहा तब उस ने पीछे मुड़ कर देखा. एक पतलादुबला, गोरा, सुंदर सा युवक उस के पीछेपीछे चल रहा था. उस ने किशोर को कड़ी नजरों से देखा था लेकिन जवाब में किशोर ने हलके से मुसकरा आंखों ही आंखों से अभिवादन किया था. उस का मासूम चेहरा देख कर क्षणभर में ही पुष्पा का गुस्सा जाता रहा. किशोर की आंखों की भाषा पुष्पा के दिल तक पहुंच गई थी. एक अजीब सा एहसास उस के दिल को धड़का गया था. शाम तक किशोर पुष्पा के साथसाथ घूमता रहा बिना किसी बातचीत किए हुए.

पुष्पा जहां जाती, वह उस के पीछेपीछे जाता. पुष्पा को अच्छे से एहसास था इस बात का पर उसे भी न जाने क्यों उस का साथ अच्छा लग रहा था. पूरा दिन घूमने के बाद शाम को वापसी के समय वह अपनी सहेलियों से थोड़ा अलग हट कर चूडि़यों की दुकान पर खड़ी हो गई. इतने में उस ने आ कर भीड़ का फायदा उठाते हुए एक कागज का टुकड़ा पुष्पा की हथेली में पकड़ा दिया. पुष्पा का दिल जोर से धड़क उठा. उस ने उस की आंखों में देखते हुए अपनी मुट्ठी बंद कर ली. दोनों ने आंखों ही आंखों में एकदूसरे से विदा ली और वापस अपनेअपने घर की तरफ चल दिए. पर अकेला कोई भी नहीं था, दोनों ही एकदूसरे के एहसास में बंध गए थे. एकदूसरे के खयालों में खोए दोनों अपनी मंजिल की तरफ बढ़े जा रहे थे.

घर पहुंचतेपहुंचते अंधेरा हो चुका था. सभी सहेलियां अपनेअपने घर चली गईं. मां ने हलकी सी डांट लगाई, ‘कितनी देर कर दी पुष्पी, मेले से थोड़ा पहले नहीं निकल सकती थी? पर तुझे समय का खयाल कहां रहता है, सहेलियों के साथ घूमने को मिल जाए, बस.’ अब पुष्पा कैसे बताती मां को कि सच में उसे समय का खयाल नहीं रहा. उसे तो लग रहा था कि थोड़ी देर और रह जाए मेले में उस अजनबी के साथ. मां कमरे के बाहर चली गईं. पुष्पा ने दरवाजा बंद किया और वह मुड़ातुड़ा कागज का टुकड़ा निकाल कर पढ़ने लगी जिस में लिखा था :

‘मुझे नहीं पता आप का नाम क्या है, जानने की जरूरत भी नहीं समझता, क्योंकि शायद ही हम दोबारा मिल पाएं. पर हां, अगर परिस्थितियों ने साथ दिया तो अगले साल इसी दिन मैं मेले में आप का इंतजार करूंगा. किशोर.’

पत्र पढ़ कर पुष्पा की आंखें न जाने क्यों भीग गईं. उस से तो उस की बात भी नहीं हुई, सिर्फ कुछ घंटों का साथभर था. पर उस के एहसास से वह भीतर तक भर गई थी. ऊपर से उस के शब्दों में एक कशिश थी जिस में वह बंधी जा रही थी. उसे तो यह भी नहीं पता था कि वह किस गांव का है? कौन है? उसी के खयालों में डूबी हुई वह न जाने कब सो गई. सुबह उठ कर उस ने सब से पहले वह पर्चा अपनी डायरी में दबा कर डायरी को बक्से में छिपा दिया.

धीरेधीरे समय बीतने लगा. पर्चा डायरी में दबा रहा और किशोर का एहसास दिल में दबाए पुष्पा अपनी 12वीं की पढ़ाई पूरी करने लगी.

कभीकभी अकेले में डायरी निकाल कर वह पर्चा पढ़ लेती. अब तक न जाने कितनी बार पढ़ चुकी थी. 12वीं के बाद घर में उस की शादी की चर्चा चलने लगी थी. जब भी वह मांबाबूजी को बात करते सुनती, उसे किशोर की याद आ जाती और उस का दिल रो पड़ता. तब वह खुद ही खुद को समझाती कि  किशोर से उस का क्या नाता है? मेले में ही तो मिला था. न जाने कितने लोग मिलते हैं मेले में. न जाने कौन है. अब वह जाने कहां होगा. मैं क्यों सोचती हूं उस के बारे में. उसे मैं याद हूं भी कि नहीं? उस का एक पर्चा ले कर बैठी हूं मैं. नहीं, अब नहीं सोचूंगी उस के बारे में, कभी नहीं सोचूंगी.

पुष्पा ने अपने मन में सोचा पर यह सब इतना भी आसान न था. उस ने अनजाने में ही अपने दिल के कोरे कागज पर किशोर का नाम लिख लिया था. अब यह नाम मिटाना आसान नहीं था उस के लिए.

देखतेदेखते साल बीत गया और मेले का समय नजदीक आ गया. जैसेजैसे वह दिन नजदीक आ रहा था, पुष्पा के दिल की धड़कनें बढ़ती जा रही थी. उसे किशोर से मिलने की ललक मेले की ओर खींच रही थी.

मेले में जाने की तैयारी हो गईर् थी पुष्पा की. इस साल उस के साथ सिर्फ

2 ही सहेलियां थी, क्योंकि 2 सहेलियों की शादी हो गई थी. इन दोनों की भी शादी तय हो चुकी थी. घर वालों ने भी इजाजत दे दी कि न जाने शादी के बाद फिर कब मेला घूमना नसीब हो इन्हें. तीनों सुबह ही निकल पड़ीं मेले के लिए.

मेले में पहुंचने के बाद दोनों तो अपनी शादी के लिए शृंगार का सामान खरीदने में लग गईं जबकि पुष्पा की निगाहें किसी को ढूंढ़ रही थीं. उस का मेला घूमने में मन नहीं लग रहा था. मन बेचैन था. वह सोचने लगी, ‘पता नहीं उसे याद भी है कि नहीं. बेकार ही मैं परेशान हो रही हूं. इतनी छोटी सी बात उसे क्यों याद होगी? उसे तो मेरा नाम भी नहीं पता.’ पुष्पा को अपनी बेबसी पर रोना आ गया. उसे लगा कि  वह अभी रो देगी.

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REVIEW: जानें कैसी है मोरबियस

रेटिंगः दो स्टार

निर्माताःकोलम्बिया पिक्चर्स,मार्वल और सोनी पिक्चर्स

निर्देशकः डेनियल एस्पिनोसा

कलाकारःजैरेड लेटो, मैट स्मिथ, एड्रिया अर्जोना, माइकल कीटन,जैरिड हैरिस,अल मैड्गिल,टायरिस गिब्सन व अन्य.

निर्देशकः डेनियल एस्पिनोसा

अवधिः एक घंटा 45 मिनट

पूरे विश्व में मार्वल कौमिक्स और उसके किरदार काफी लोकप्रिय हैं. इन पर कई फिल्में बन चुकी हैं. मार्वल का अपना सिनेमाई संसार है. मार्वल कौमिक्स के अति लोकप्रिय किरदार मोरबियस पर अब ‘‘कोलम्बिया पिक्चर्स’’ व ‘‘मार्वल’’ ने फिल्म ‘‘मोरबियस’’ का निर्माण किया है.  फिल्म डॉक्टर माइकल मॉर्बियस पर आधारित है, जो एक दुर्लभ रक्त रोग के उपचार के प्रयास में स्वयं को एक प्रकार के राक्षस@ पिशाच में बदल देते हैं. डेनियल एस्पिनोसा निर्देशित यह अमरीकन सुपर हीरो वाली फिल्म एक अप्रैल को पूरे विश्व के साथ भारत में भी सिनेमाघरों मंे प्रदर्शित हुई है. फिल्म की कहानी का मुख्य केंद्र ‘‘विज्ञान ः अभिशाप या वरदान’’ही है. इस फिल्म की कमजोर कड़ी यह है कि यह मुख्य संघर्ष से इतर हर चीज पर ध्यान केंद्रित करती है.

कहानीः

अधिकांश मार्वल फिल्मों की तरह ‘मोरबियस’ भी अच्छाई बनाम बुराई की कहानी है. वैज्ञानिक व डॉक्टर माइकल मोरबियस (जैरेड लेटो) का दिल काफी कमजोर है. वह बचपन से ही अपंग और दुर्लभ रक्त रोग से पीड़ित हैं. बचपन में वह अपने दोस्त लोसिअल क्राउन उर्फ मिलो(मैट स्मिथ ) से वादा करते हैं कि वह उसकी बीमारी का इलाज अवश्य खोजने में सफल होंगे. फिर अपने गुरू (जैरेड हैरिस ) की सलाह पर डाक्टरी की पढ़ाई करने के लिए ब्रिटिश विश्वविद्यालय में जाते हैं,जहंा उन्नीस साल की उम्र में वह डाक्टरी की डिग्री हासिल कर लेते हैं. उन्हे नोबल पुरसकार से भी नवाजा जाता है. फिर वह अपनी बीमारी का इलाज ढूढ़ने की बजाय दोस्त के साथ  किए गए वादे को पूरा करने के लिए दोस्त की बीमारी का इलाज खोजने में पूरी जिंदगी लगा देते हैं. इतना ही नही वह अपनी खुद की बीमारी का इलाज खोजने में सफल होते हैं,जो लाखों लोगों की मदद कर सकता है, लेकिन यह जल्द ही एक अभिशाप बन जाता है, क्योंकि यह उसे खून के प्यासे पिशाच यानी कि वैम्पायरवाद में बदल देता है. सुपर हीरो जैसी शक्तियां हासिल करने के बाद एक जहाज पर मौजूद हर किसी की हत्या कर देते हैं. हालाँकि डॉ. मोरबियस इस संबंध में अधिक जागरूक हैं कि वह कौन है. लेकिन मोरबियस जैसी ही बीमारी से पीड़ित मिलो (मैट स्मिथ) इतना विकसित नहीं हुआ है. बचपन में अपने साथ हुए दुब्र्यवहार ये नाराज मिलो नए ‘इलाज‘ की राक्षसी शक्तियों को गले लगाता है और शहर में आतंक का शासन शुरू करता है. मिलो इस खोज का दुरूपयोग कर पूरी दुनिया का विनाश करना चाहता है,पर मोरबियस ऐसा नही होने देना चाहते. आखिर होगा क्या?मिलो को रोकने की ताकत महज डॉ.  मोरबियस में हैं.

लेखन व निर्देशनः

बेहतरीन प्रोडक्शन वैल्यू के बावजूद फिल्मकार कहानी को बांधने में असफल रहे हैं. उनका सारा ध्यान घटनाक्रम के इर्द गिर्द माहौल को गढ़ने में ही रहा. जी हॉ!फिल्म ‘‘मोरबियस’’की कहानी में मूल भावनाएं चरम पर हैं. क्योंकि उसका प्यार दांव पर है.  लेकिन लेखक और निर्देशक इस भावना को उकेरने पर ध्यान केंद्रित करने की बजाय अन्य चीजों को गति देने की कोशिश करते हैं,जो कि फिल्म का कमजोर बनाती है. फिल्म की कहानी के केंद्र में दो दोस्त हैं. दोस्त को किए गए वायदे को पूरा करने के लिए मोरबियस का जीवन ही बदल जाता है,मगर अफसोस फिल्मकार इन दोनों दोस्तों के वयस्क होने पर इनके बीच दोस्ती व प्यार को चित्रित नहीं कर पाए. यानी कि कहानी की नींव ही कमजोर है. मोरबियस अपनी असीमित शक्तियों के बल पर कई अजूबे कारनामे करते हैं. मगर फिल्मकार इस बात को उकेरने में असफल रहे हैं कि मोरबियस को यह असीमित शक्तियां कैसे मिली? इतना ही नही जब वह पिशाच बन जाता है तो उसका चेहरा खोपड़ी में तब्दील हो जाता है,ऐसा क्यों होता है,इसे बताने में भी लेखक व निर्देशक असफल रहे हैं. फिल्म में बेवजह का एक्शन व खूनखराबा परोसा गया है.  फिल्म में कई ऐसे दृश्य हैं जो कि तर्क की कसौटी पर बहुत ही गलत हैं.  डॉ.  मोरबियस और मिलो अपनी पिशाच शक्तियों के साथ चमगादड़ की तरह धुएँ के रंग के साइकेडेलिक निशान छोड़ते हुए जिस तरह से छतों पर कूदते हैं और ऊंची इमारतों से गिरते हैं,वह सब बच्चों को जरुर पसंद आ सकता है. इसमें कुछ रोमांचकारी क्षणों के अलावा  गुरुत्वाकर्षण-विरोधी स्टंट भी हैं.

कुल मिलाकर कमजोर लेखन व कमजोर निर्देशन ने इस रोमाचंक,एक्शन फिल्म का पूरा बंटाधार कर दिया.

अभिनयः

डॉक्टर मारबियस के किरदार में जैरेड लेटो ने कई दृश्यों में कमाल का अभिनय किया है.  भ्रमित कर देने वाली पटकथा के बावजूद जैरेड लेटो ने अपनी तरफ से फिल्म में जान फॅूंकने की पूरी कोशिश की है. लेकिन नीरस लेखन व निर्देशन के चलते जैरेड लेटो की सारी मेहनत जाया हो जाती है. \ लालची मिलो के किरदार को मैट स्मिथ ने पूरे दृढ़ विश्वास के साथ निभाया है. पैसे का लालच एक मानव स्वभाव है,जिसे अभिव्यक्त करने में वह सफल रहे हैं. एड्रिया अर्जोना मॉर्बियस के आसपास के माहौल को बहुत अच्छे तरीके से संतुलित करती है.

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