सिनेमा को बढ़ावा देने के लिए बनेगा फिल्म प्रोत्साहन कोष

सरकार ने अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में भारतीय सिनेमा को बढ़ावा देने के लिए एक फिल्म प्रोत्साहन कोष बनाने की नई पहल की है. इस पहल से स्वतंत्र फिल्म निर्माताओं को दुनिया भर में उनके कार्य को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी.

फिल्म प्रोत्साहन कोष अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के किसी भी प्रतियोगिता खंड में चुनी जाने वाली और प्रचार गतिविधियों के लिए विदेशी फिल्म श्रेणी के अंतर्गत अकादमी पुरस्कार के लिए भारत के आधिकारिक नामांकन में चुनी जाने वाली फिल्मों को वित्तीय सहायता प्रदान करेगा.

फिल्म समारोह निदेशालय को सरकार द्वारा गठित एक विशेषज्ञ पैनल की सिफारिशों के आधार पर इस पहल को कार्यान्वित करने के लिए एक नोडल एजेंसी के रूप में नामित किया गया है. आईएफएफआई के 47वें संस्करण में सुगम्य भारत अभियान के अंतर्गत विशेष श्रव्य वर्णित तकनीक के साथ दिव्यांग बच्चों के लिए तीन फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा. इसका प्रदर्शन यूनेस्को और सक्षम के सहयोग से किया जाएगा.

सरकार के स्वच्छ भारत अभियान से प्रेरित होकर, आईएफएफआई 2016 में स्वच्छ भारत विषय पर आधारित पुरस्कार जीतने वाली 20 लघु फिल्मों के एक विशेष पैकेज का भी प्रदर्शन किया जाएगा. इन 20 फिल्मों को 4346 प्रविष्टियों में से चुना गया है और नई दिल्ली में दो अक्टूबर को राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम द्वारा आयोजित ‘स्वच्छ भारत फिल्म महोत्सव’ में सम्मानित किया गया.

आईएफएफआई इस नई प्रतियोगिता खंड के अंतर्गत युवा प्रतिभा को मान्यता देंगे. इस खंड में दुनिया भर के सिनेमा से 2016 की निर्देशकों की पहली शानदार फिल्मों का प्रदर्शन होगा. विजेता को एक रजत मयूर और दस लाख रुपये के नकद पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा.

2016 में फिल्म, टेलीविजन और श्रव्य/दृश्य संचार अंतरराष्ट्रीय परिषद (आईसीएफटी), पेरिस और यूनेस्को भी एक ऐसी फिल्म को ‘आईसीएफटी- यूनेस्को गांधी पदक’ प्रदान करेगा जो शांति, सहिष्णुता और अहिंसा के आदर्शो को दर्शाती है.

आईएफएफआई 2016 में बारको इलेक्ट्रॉनिक्स के माध्यम से एक नए लेजर आधारित फोस्फर व्हील प्रोजेक्टर को प्रस्तुत किया जाएगा, जिसका उपयोग दुनिया भर में किसी भी फिल्म महोत्सव में पहली बार किया जा रहा है.

ताकि सर्दियों में बाल गिरने न पाएं

वैसे तो बालों के झड़ने की प्रॉब्लम हमेशा ही बनी रहती है लेकिन सर्दियों में यह कुछ बढ़ जाती है. ऐसा कहा जाता है कि एक दिन में 100 बाल गिरना समान्य बात है लेकिन अगर इनकी गिनती बहुत ज्यादा है तो यह वक्त संभलने का है. इन उपायों को अपनाकर आप अपने बेशकीमती बालों को गिरने से रोक सकते हैं.

– बाल धोने से पहले कंघी जरूर करें. बाल धोने के दौरान उलझ जाते हैं. ऐसे में पहले से ही उलझे बाल और भी बुरे हो जाएंगे. इसके साथ ही यह भी याद रखें कि गीले बालों में गलती से भी कंघी न करें. इससे बाल कमजोर हो जाएंगे.

– हर रात कंघी करके ही सोएं. इससे सुबह उठने पर आपको उलझे हुए बाल नहीं मिलेंगे. इससे बालों का गिरना भी कम होगा.

– गुगुने पानी से बाल धोएं. गर्म पानी से बाल धोना सही नहीं है. इससे बाल और ज्यादा गिरने लगेंगे. ज्यादातर लोग इन दिनों में गर्म पानी से बाल धो लेते हैं, जिससे यह समस्या बढ़ जाती है.

– बेबी शैंपू यूज करें. माइल्ड शैंपू यूज करने से बाल उलझेंगे भी कम और झड़ेंगे भी कम.

– कंडिशनर का इस्तेमाल करें लेकिन जड़ों में नहीं.

– बालों को सामान्य तरीके से सूखने दें. ड्रायर का इस्तेमाल बालों को रूखा तो बनाएगा ही साथ इससे बाल भी गिरेंगे.

इस टेंशन भरे माहौल में भी दिखें फ्रेश

घर में काम की टेंशन. फ्रेंड सर्कल और रिश्तेदारों के यहां हो रही शादियों की टेंशन. बदलते मौसम में सेहत खराब होने की टेंशन और अब ये नोटबंदी की टेंशन. सही कहा जाए तो यह मौसम ही टेंशन का है.

टेंशन के इन सब कारणों से आप किसी न किसी तरह निपट ही लेंगी, लेकिन इस दौरान चेहरे पर पड़ने वाले असर का क्या? ऐसा न हो कि दुनियाभर की टेंशन चेहरे की रौनक छीनकर उसे थका-थका कर दे. टेंशन लेने की बात नहीं है. अपनाएं कुछ टिप्स और बनाएं रखें अपनी खूबसूरती…

थकान और टेंशन की वजह से चेहरे की रौनक गायब हो जाती है. चेहरा मुरझाया सा नजर आने लगता है. यदि समस्या लंबे समय तक रहे तो इसकी वजह से चेहरे पर महीन लकीरें भी उभर आती हैं, जो बाद में झुर्रियों में बदलने लगती हैं. तनाव की वजह से यदि नींद नहीं आ रही तो इसका असर और बुरा पड़ता है. इसके कारण त्वचा संबंधी कई समस्याएं हो सकती हैं, जैसे, झुर्रियां, आंखों के नीचे डार्क सर्कल और काले धब्बे. चेहरे की थकान दूर करने के लिए आप घर पर ही कुछ उपाय कर सकती हैं.

घर पर बनाएं फेस पैक

इसमें सबसे आसान है फेस पैक तैयार करना. आप रोजवॉटर, दही, दूध और हल्दी पाउडर मिलाकर फेस पैक बना सकती हैं. यह एक तरह का हाइड्रेटिंग फेस मास्क है. इसे लगाने से चेहरे की स्किन टाइट और ग्लोइंग हो जाती है. वैसे, चेहरे की थकान दूर करने के लिए अच्छी नींद लेना सबसे ज्यादा जरूरी है.

स्क्रब से हटेंगी डेड सेल्स

टेंशन और थकान से चेहरे की स्किन डेड हो जाती है. इसे हटाने के लिए स्क्रब जरूरी है. डेड स्किन के निकलते ही चेहरे पर ग्लो नजर आने लगता है. खीरे के टुकड़े आंखों पर रखने से आंखों की सूजन कम होती है. आप आलू की स्लाइस भी आजमा सकती हैं.

हाइड्रेटिंग क्रीम करें यूज

इसके अलावा थके चेहरे को चमकदार बनाने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप रात में हाइड्रेटिक क्रीम लगाएं. इससे सुबह चेहरा चमकदार रहेगा. यह क्रीम चेहरे में नमी भरती है. इसके अलावा गुलाब जल में कॉटन बॉल्स डुबोकर त्वचा को पोंछा जाए तो वह फ्रेश दिखती है.

‘वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर होना जरूरी’

जीवन में बिना संघर्ष के कुछ हासिल नहीं होता और कठिन परिश्रम के बाद जो मिलता है उस की खुशी बयां करना मुश्किल होता है. ऐसा ही कुछ कर दिखाया है महिला उद्यमी रेवथी राय ने, जिन्होंने अपने पति के अचानक गुजर जाने के बाद 3 बेटों की परवरिश की. बेहद शांत स्वभाव की रेवथी की शुरू से व्यवसाय करने की इच्छा थी. लेकिन ऐसी स्थिति से गुजर कर उन्हें व्यवसाय में आना पड़ेगा, ऐसी कल्पना नहीं थी. उन्होंने 2007 में ‘फौर शी’ के नाम से टैक्सी सर्विस शुरू की थी, जहां 1000 से अधिक महिलाओं ने टैक्सी ड्राइविंग सीख कर इसे अपना प्रोफैशन बनाया. 2007 से ही उन का यह प्रयास उन महिलाओं के लिए अधिक कारगर सिद्ध हुआ जिन्हें अपने परिवार के लिए कुछ कमाना था ताकि वे अपने बच्चों का भविष्य संवार सकें.

रेवथी ने महिलाओं को गरीबी रेखा से ऊपर उठा कर इतना आत्मनिर्भर बना दिया कि वे महीने में कम से कम 10 हजार कमा सकें. आज भी उसी दिशा में कार्यरत हैं. जफ्फिरो लर्निंग लिमिटेड की शाखा ‘हे दीदी’ आज मुंबई में कार्यरत है. पेश हैं, उन से हुई मुलाकात के कुछ अंश:

अपने बारे में बताएं?

मैं ने अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्री ली है. मैं एक ‘रैली ड्राइवर’ हूं. करीब 75 रैलियों में भाग ले चुकी हूं. 70 रैलियां जीत चुकी हूं. शुरू से उद्यमी बनना चाहती थी, मेरे पति भी सौफ्टवेयर व्यवसाय से जुड़े थे. उन की अचानक मृत्यु ने मुझे ‘कार ड्राइविंग’ के प्रोफैशन में जाने को मजबूर किया. पति हार्टअटैक के बाद ढाई साल तक ‘कोमा’ में रहे. उन की देखभाल करतेकरते पूरी जमापूंजी खत्म हो गई.

उन के व्यवसाय को बेच कर पूरा पैसा उन पर और घर खर्च पर लगा दिया. इस से मेरी वित्तीय स्थिति खराब हो गई. पहले तीनों बच्चे छोटे थे, लेकिन धीरेधीरे उन के बड़े होने की वजह से उन की जरूरतें भी बढ़ने लगी थीं. मैं कई जगह काम के लिए गई पर काम नहीं मिला. तीनों बच्चों को बड़ा करना था. मैं कार ड्राइविंग का काम जानती थी, इसलिए उसे करने लगी. 10 महीने तक उसे करने के बाद अपनी कंपनी ‘फौर शी’ 2007 में शुरू कर अपना घर चलाया.

2010 में ‘वीरा कैब्स’ की स्थापना की. ऐसा मैं ने अपने पैसे को बढ़ाने के लिए किया. इस में भी मैं ने लड़कियों को ड्राइविंग सिखाई. यह सेवा अधिकतर बुजुर्गों और लड़कियों के लिए शुरू की थी. अपनी ऐसी स्थिति के बाद उस समय मुझे यह समझ में आया कि एक महिला का सक्षम होना कितना जरूरी है. इतना पढ़लिख कर भी मुझे कोई जौब नहीं मिली. ऐसे में जो कम पढ़ीलिखी हैं, उन्हें अगर जीवन में कोई समस्या आए तो वे क्या करेंगी. लड़कियों को सक्षम बनाना मेरा पैशन बन गया. हर महिला का वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर होना आवश्यक है. अभी मेरी कंपनी ‘जफ्फिरो लर्निंग प्राइवेट लिमिटेड’ की एक शाखा ‘हे दीदी’ है, जो टू व्हीलर चलाना सिखाने का काम करती है.

आप ने ‘ड्राइविंग’ क्षेत्र को ही क्यों अपनाया कोई और व्यवसाय क्यों नहीं?

इस के पीछे एक कहानी है. मुझे ड्राइविंग का शौक था. पहले जब पति थे, तो मैं लेट नाइट पार्टी के बाद ड्रिंक की हुई अपनी सहेलियों को घर छोड़ती थी. तभी एक दिन मेरी एक सहेली से कुछ कहासुनी हुई तो मैं ने कहा कि आप लोगों को घर छोड़ने के बजाय क्यों न मैं एक ‘टैक्सी सर्विस’ शुरू करूं ताकि आप कुछ पैसे खर्च करो और सुरक्षित घर पहुंचो. साथ ही, मुझे भी कुछ पैसा मिलेगा. आप मेरी मेहनत को याद नहीं रखतीं, क्योंकि अगली सुबह आप सब भूल जाती हैं कि किस ने आप को घर छोड़ा. तब मैं ने उन से ऐसे ही कहा था, लेकिन यही मेरा व्यवसाय बनेगा, सोचा नहीं था. जब कोई काम नहीं मिल रहा था तो मेरे एक फैमिली फ्रैंड ने ही ड्राइविंग का काम शुरू करने की सलाह दी. मुझे सलाह सही लगी और मैं ने यह व्यवसाय शुरू कर दिया. लेकिन इस के लिए गाड़ी, ड्राइवर सब कुछ चाहिए था. इसलिए मैं ने पहले खुद टैक्सी ड्राइवर बन कर 10 महीने टैक्सी चलाई. कुछ पैसे कमा कर ‘फौर शी’ कंपनी खोली और लड़कियों को ट्रेनिंग देने लगी.

उस दौरान मेरे पास 100 से भी अधिक टैक्सियां थीं. अपना व्यवसाय बढ़ाने के लिए उन्हें बेच कर मैं ने ‘वीरा कैब्स’ कंपनी 2010 में शुरू की. उस में भी काफी लड़कियों ने प्रशिक्षण लिया. लेकिन इसे भी बेचना पड़ा, क्योंकि ट्रांसपोर्ट ड्राइविंग लाइसैंस की समस्या आ गई थी. फिर मैं ने 1 साल पहले ‘हे दीदी’ की स्थापना की. इस में मैं ‘टू व्हीलर’ चलाना सिखाने का काम कर रही हूं.

ट्रांसपोर्ट लाइसैंस की समस्या क्या थी?

किसी को भी प्राइवेट गाड़ी चलाने का लाइसैंस मिलना आसान होता है, पर यलो प्लेट वाली गाड़ी चलाने के लिए ‘ट्रांसपोर्ट लाइसैंस’ का मिलना बहुत मुश्किल होता है. मैं ने तब सरकार से अपील की थी कि हमारी लड़कियों को अलग सुविधा दी जाए. सरकार ने मेरी बात मान कर ट्रांसपोर्ट लाइसैंस मिलने की अवधि 1 साल के बजाय 1 महीना कर दी, जिस में नौनट्रांसपोर्ट लाइसैंस के 1 महीने बाद उन्हें ट्रांसपोर्ट लाइसैंस मिलता था. वह मार्च 2015 तक लागू था. लेकिन अभी फिर वह नियम 1 साल का हो गया है. इस तरह गाड़ी चलाना सीखने के 15 महीने बाद उन्हें लाइसैंस मिलेगा.

ये लड़कियां बहुत गरीब घरों से होती हैं. इन्हें कुछ सीख कर कमाना है. फिर मैं ने सोचा ये लड़कियां करेंगी क्या? गाड़ी चलाना सीखने से ले कर लाइसैंस मिलने तक मैं उन से क्या करवाऊंगी? उन्हें सैलरी भी देनी पड़ेगी. कैसे ये सब हो पाएगा? इसलिए मैं ने टू व्हीलर्स चलाना सिखाने की प्लानिंग की. आजकल ‘इ कौमर्स’ का जमाना है. सब लोग औनलाइन शौपिंग करते हैं. अभी डिलिवरी लड़के करते हैं. ऐसे में अगर लड़कियां इस प्रोफैशन में आएं तो और अधिक अच्छा रहेगा. फिर मैं ने उन्हें इस की ट्रेनिंग देनी शुरू की. ये लड़कियां सभी रेस्तराओं और होटलों से जुड़ी होती हैं. अभी मैं ने ‘सबवे’ के साथ टाई अप किया है.

लड़कियों को ड्राइविंग सीखने के लिए राजी करना कितना मुश्किल था?

शुरूशुरू में यह काम करना कठिन था. लड़कियों को राजी करने के लिए मैं खुद झोंपड़पट्टी में जाती थी. उन्हें समझा कर ले आती थी. फंडिंग की समस्या प्रमुख थी. लेकिन थोड़ाथोड़ा पैसा लगा कर आगे बढ़ी. कई जगह तो उन के परिवार वाले भी राजी नहीं होते. फिर लड़कियों का गाड़ी चलाना, इस में थोड़ा रिस्क भी होता है, लेकिन इस काम में पूरी टीम होती है, जो सामाजिक कार्य करती है. वे उन जगहों पर जाती हैं जहां लड़कियां कम पढ़ीलिखी हैं, मगर कुछ करना चाहती हैं. आंगनबाड़ी, चाल आदि सभी जगहों पर वे जा कर कम्युनिटी डैवलपमैंट का काम करती हैं. फिर वे राजी होती हैं. इस काम में मुसलिम लड़कियां प्रमुखता से भाग लेती हैं. यहां हर आयु और वर्ग की लड़कियां हैं. साधारणतया लोग ट्रेनिंग देते हैं पर उन्हें काम नहीं दे पाते. यहां दोनों सुविधाएं हैं. मंच भी उन्हें मिलता है. सिखाने का खर्चा 10 हजार है पर मैं उन से केवल 1,500 लेती हूं. बाकी सरकार से मिलता है, क्योंकि ‘स्किल डैवलपमैंट’ में बहुत पैसा है और वे देने के लिए राजी होते हैं. 45 दिन में एक लड़की पूरी तरह ड्राइविंग सीख जाती है.

अभी जो लाइसैंस लड़कियां ले रही हैं, यह ‘टू व्हीलर’ के साथसाथ ‘4 व्हीलर’ का भी है जो 1 साल बाद ट्रांसपोर्ट लाइसैंस में बदल जाएगा. अभी मैं ‘टू व्हीलर’ का काम कर रही हूं आगे ‘थ्री व्हीलर’ और ‘फोर व्हीलर’ का काम भी

शुरू करूंगी, क्योंकि एक तो लड़कियां ड्राइविंग अच्छा करती हैं. साथ ही बड़ेबुजुर्ग और महिलाएं भी अपनेआप को सुरक्षित महसूस करते हैं. इस काम में महिलाएं 7,500 रुपए कम से कम कमाती हैं. इस के अलावा अगर वे निर्धारित राउंड से अधिक डिलिवरी करती हैं तो उस का पैसा अलग से मिलता है. इस तरह वे आसानी से करीब 10-11 हजार तक कमा लेती हैं.

महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में आप किस तरह पहल कर रही हैं?

इस काम में महिलाएं केवल कमाएंगी ही नहीं, बल्कि अगले 3 सालों में उस ‘टू व्हीलर’ की ओनर भी बनेंगी, क्योंकि यहां जो भी लड़कियां ड्राइविंग सीखती हैं उन्हें ‘टू व्हीलर’ खुद अपने कमाए पैसे से खरीदना पड़ता है. प्रशिक्षित महिलाओं को स्कूटर खरीदने के लिए वित्तीय सहायता भी मैं बैंक से दिलवाती हूं ताकि कुछ सालों बाद स्कूटर उन के खुद के हो जाएं. ये उन की संपत्ति बन जाते हैं. हर महीने लोन का भुगतान भी कम होता है, जो उन्हें कंपनी की तरफ से मिलने वाली सैलरी से जाता है. टू व्हीलर गर्ल्स की बहुत मांग है. अगर मैं महीने में 10 हजार लड़कियां भी तैयार करूं तो भी कम ही होंगी. इस साल के अंत तक मैं 10 हजार लड़कियां भी तैयार करूं तो भी कम ही होंगी.

इस साल के अंत तक मैं 10 हजार लड़कियों को तैयार करना चाहती हूं. मुंबई के अलावा बैंगलुरु में भी इस का काम चल रहा है. अभी तक 200 लड़कियों ने काम शुरू कर दिया है.

गृहशोभा के जरीए क्या संदेश देना चाहती हैं?

मैं उन सभी महिलाओं से कहना चाहती हूं कि अगर उन की कुछ कमाने की इच्छा है तो वे मेरे साथ जुड़ सकती हैं, साथ ही कालेज जाने वाली लड़कियां, जिन्हें पढ़ाई के साथसाथ कुछ सीखने की भी इच्छा है वे भी इस में आ सकती हैं. इस के अलावा जो लड़कियां नाइट कालेज में जाती हैं, उन के लिए इस तरह का अवसर खास फायदेमंद होता है. इस में आप एक स्कूटर की मालिक होने के साथसाथ पैसा भी कमा सकती हैं.

जलवा जयललिता का

न बच्चे, न पति, न मातापिता और न भाईबहन का रोब, फिर भी तमिलनाडु की बीमार मुख्यमंत्री महारानी जे. जयललिता का जलवा ऐसा है कि वे अस्पताल में रह कर भी राज चला रही हैं और जरूरी कागजों पर उन के हस्ताक्षरों की जगह अंगूठे का निशान लिया जा रहा है यह कह कर कि उन के दाएं हाथ में सूजन है.

आमतौर पर इस तरह बीमार औरत के चारों ओर गिद्ध जमा होने लगते हैं, जो जीते जी औरतों को तो क्या आदमियों को भी लूट ले जाते हैं. ऐसे में तमिलनाडु के विधायकों, सांसदों, पंचायत अध्यक्षों, नेताओं में से एक की भी हिम्मत दूसरी पार्टी में जाने की नहीं हो रही कि कहीं जयललिता ठीक न हो जाएं और राजपाट न संभाल लें.

जयललिता ने जब राज पाया था तो वे एम.जी. रामचंद्रन की साथिन थीं, जो उस समय मुख्यमंत्री थे पर पहले फिल्मी परदे के बादशाह रहे थे. जयललिता ने रामचंद्रन की विधिवत पत्नी से सत्ता छीन ली थी पर तमाम मुसीबतों के बावजूद वे तमिलनाडु पर राज करती रहीं भले मुख्यमंत्री नहीं रहीं या जेल में रहना पड़ा. अगर यह ताकत किसी और में है, तो शायद ममता बनर्जी और मायावती में ही है. किसी भी पुरुष नेता में ऐसा दम नहीं कि जब कोई वारिस न हो तो भी सत्ता हाथ में रहे.

यह विशेष गुण औरतों का है या 36 खास नेताओं का कहना कठिन है पर जिन्हें क्लियोपैट्रा की कहानी मालूम है वे जानते हैं कि औरतों में सर्वाइवल की विशेष इंद्री होती है और वे जान जाती हैं कि उन का भला कौन करेगा और किस तरह उस जने को लुभाया जा सकता है. औरतें शेर को बकरे की तरह रख सकती हैं जैसी सोच चाहे पुरुषवादियों ने पैदा की हो पर यह जताती है कि अगर औरतों में जरा सी चतुराई हो, जरा सा आत्मविश्वास हो, वे जरा सा सामाजिकपारिवारिक बंधनों को ढीला कर दें तो किले फतह कर सकती हैं. उन्हीं के नाम पर ताजमहल जैसी सुंदर इमारत बन सकती है और वह भी मरने के बाद.

औरतों को अपने पर विश्वास होना चाहिए. रीतिरिवाज, धर्म, संस्कार ग्लास सीलिंग, परिवार की देखभाल आदि छद्म बहानों से औरतों को सदियों से रसोई तक सीमित रखा जा रहा है. पुरुष धर्म की सत्ता थोपते ही इसलिए हैं, क्योंकि हर धर्म औरतों को दबा कर, मन मार कर, मर्दों के बनाए नियमों में रह कर जीने को मजबूर करता है. अगर धर्म के चंगुल से निकल सकें तो औरतों को मायावती, ममता बनर्जी या जयललिता बनने से कोई नहीं रोक सकता. यह पूरे समाज के लिए सुखद होगा. समाज का विकास वहीं होता है जहां औरतें आजाद होती हैं वरना तमाम हथियारों के साथ पश्चिम एशिया के मुसलिम देश या तो तेल पर जी रहे हैं या फिर पहाड़ों में कबीलाई जिंदगी जी रहे हैं.

यह हमदर्दी कोरी धार्मिक है

तिहरे तलाक के मसले पर तो प्रधानमंत्री से ले कर भगवा दुपट्टा ओढ़े सड़कछाप मजदूर तक बड़े जोरशोर से बोल रहे हैं कि यह मुसलिम महिलाओं के साथ अन्याय है और इस कानून को तुरंत कर्बला में दफना दिया जाना चाहिए. पर हिंदू धर्म के तलाक कानून पर कुछ नहीं कहा जा रहा.

जरूरत यह है कि औरतों को तलाक की सुविधा वैसी ही मिले जैसी शादी करने की मिलती है. फेरे लिए, कबूल है बोला, आई डू कहा और शादी हो गई पर यदि शादी तोड़नी हो तो औरतों को आज भी अपनी जिंदगी झोंकनी पड़ती है. फिर चाहे गलती उन की हो या न हो.

एक औरत को यह पैदाइशी हक मिलना चाहिए कि अगर वह किसी पुरुष के साथ बंध कर नहीं रहना चाहती है तो जब चाहे अपने बच्चों व सामान के साथ जहां मरजी चली जाए. हर औरत ऐसा नहीं करेगी यह पक्का है पर उस से धर्म या कानून उस का हक छीनता है और यह हक सिर्फ अदालतों को या सिर्फ पतियों को देता है तो गलत है.

अगर भगवाई समाज को मुसलिम औरतों से प्यार अनायास उमड़ा है, तो उन्हें हिंदू पतियों के जुल्म सहती करोड़ों औरतों को भी हक दिलाना चाहिए कि वे ‘तलाक देती हूं, तलाक देती हूं, तलाक देती हूं’ कह कर एक अनचाहे से छुटकारा पा सकें और अपने पैरों पर खड़ी हो कर अपनी जिंदगी अकेले या अपने मनचाहे के साथ गुजार सकें.

सरकार की मुसलिम औरतों के प्रति यह हमदर्दी कोरी धार्मिक है. हर हिंदू को यह पाठ पढ़ा दिया जाता है कि मुसलिम पति मजे में रहते हैं. वे 4-4 शादियां कर सकते हैं और जब चाहें तलाक दे सकते हैं. यह उन का कानून अवश्य है, यह गलत भी है, पर इस का इस्तेमाल व्यापक हो रहा होता, तो मुसलिम मर्दों के पास 4 तो क्या 1 भी औरत नहीं होती और सारी मुसलिम औरतें तलाकशुदा होतीं. किस घर में कभी न कभी बरतन इतने जोर से नहीं खड़कते कि पति बोल दे कि वह तलाक देना चाहता है?

पर कुछ देर बाद होश आ जाता है कि पत्नी एक नायाब तोहफा है, जो अपना तनमनधन एक पराए को सौंप कर उस के सुखदुख में शामिल हो कर एक घरौंदा बनाती है, एक सुरक्षा देती है, वक्त पड़ने पर दोस्त बनती है, सलाह देती है, सुरक्षा देती है, सुकून देती है. उसे 3 बार तलाक कह कर नहीं छोड़ा जा सकता.

तलाक का कानून बराबरी का और सभी समाजों के लिए हो, यह जरूरी है. यह आसान भी हो. औरतें वर्षों अदालतों के गलियारों में सैंडल खड़खड़ाती न रहें. जब मन में पंगा तो 2 बालटी पानी में गंगा. मुक्ति का रास्ता घाट पर ही न हो, यह औरतों की मुट्ठी में भी हो.

फिल्म 2.0 में होगा अनोखा साउंड

रजनीकांत के साथ कई हिट फिल्में दे चुके शंकर अब अपनी हिट रोबोट का दूसरा भाग यानि 2.0 लेकर आने वाले हैं जिसमें, इस तरह की साउंड डिजाइनिंग की गई है जो अब तक दुनिया में कहीं नहीं हुई.

शंकर ने बताया है कि उनकी ये फिल्म इस लिहाज से काफी टफ है कि फिल्म में साउंड डिजाइनिंग को लेकर जो एक्सपेरिमेंट किया गया है वो वर्ल्ड सिनेमा में पहली बार है. हालांकि उन्होंने इस पर विस्तार से जानकारी नहीं दी है.

उन्होंने कहा है कि इसके लिए सबको फिल्म देखनी पड़ेगी. इस फिल्म में अक्षय को नेगेटिव किरदार में लेने के पीछे की वजह को भी सस्पेंस में रखना चाहते हैं. फिल्म में श्रीनिवास मोहन वीएफएक्स का काम देख रहे हैं और ऑस्कर विजेता रसूल पुकुट्टी ने फिल्म की साउंड डिजाइनिंग की है. शंकर इस फिल्म के निर्माण को एवरेस्ट पर चढाई का काम मानते हैं.

रजनीकांत और अक्षय कुमार स्टारर फिल्म ‘ 2. 0 ‘ अगले साल दिवाली के मौके पर रिलीज होगी. फिल्म में पिछली बार रजनीकांत की हीरोइन ऐश्वर्या राय थी. इस बार फिल्म की हीरोइन एमी जैक्सन हैं.

ये बिग बॉस कंटेस्टेंट जा सकता है जेल

खुद को संन्यासी कहने वाले स्वामी ओमजी महाराज इन दिनों ‘बिग बॉस 10’ में बतौर कंटेस्टेंट नजर आ रहे हैं. हालांकि, दिल्ली पुलिस बाबा को बिग बॉस के घर में आराम करने देने के मूड में नहीं है.

दरअसल, सूत्रों की मानें तो दिल्ली पुलिस ओमजी महराज पर पहले से चल रहे चोरी और आर्म्स एक्ट के केस में उन्हें गिरफ्तार करने बिग बॉस के घर पहुंची. हालांकि ओम स्वामी ने घर से बाहर निकलने से इनकार किर दिया. इस पर पुलिस ने कुछ डॉक्युमेंट्स पर उनके साइन (दस्तखत) ले लिए हैं.

बेहद कम ही लोग जानते होंगे कि बाबा पर अपने ही भाई की दुकान से चोरी का आरोप है. उनके पास से महिलाओं के अश्लील फोटोज बरामद की जा चुकी हैं, जिनसे वह उन्हें ब्लैकमेल किया करता थे.

बाबा की कॉन्ट्रोवर्शियल लाइफ

बिग बॉस के घर में जाने से ठीक दो दिन पहले दिल्ली हाईकोर्ट में पेश न होने की वजह से ओमजी के खिलाफ गैर जमानती वारंट इश्यू हुआ था. लेकिन जब बाबा की तरफ से कोई भी पेश नहीं हुआ तो उनके खिलाफ फिर से यही वारंट जारी किया गया.

बाबा के खिलाफ यह चौथा गैर जमानती वारंट है, जो 2008 में चोरी के एक मामले में जारी किया है. 14 अक्टूबर की सुनवाई से पहले ओमजी ने कोर्ट से वकील की मांग की थी. उन्होंने कहा था कि उनके पास पैसे नहीं हैं, इसलिए वह वकील नहीं रख सकते.

यह है चोरी का पूरा मामला

ओमजी के छोटे भाई प्रमोद झा ने 2008 में उनके खिलाफ एक शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत में कहा गया था कि बाबा ने दिल्ली की लोधी कॉलोनी स्थित प्रमोद की दुकान का ताला तोड़कर 11 साइकिलों समेत कई महंगे स्पेयर पार्ट्स और कागजात चुराए हैं. प्रमोद के मुताबिक, उनके बेटे ने ओमजी को दुकान का ताला तोड़ते और चोरी करते देखा था. पुलिस ने ओमजी के खिलाफ FIR दर्ज कर ली थी.

अश्लील फोटोज से करते थें महिलाओं को ब्लैकमेल

बाबा के नाम कॉन्ट्रोवर्सीज का पूरा पिटारा है. दिल्ली पुलिस की इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट के मुताबिक, डकैती और चोरी के अलावा, बाबा पर आर्म्स एक्ट और टाडा के तहत 7 मामले दर्ज हैं. डिफेंस कॉलोनी के पुलिस ऑफिसर्स ने ओमजी के पास से कई हथियार और गोला बारूद बरामद किए थे. उनके पास से महिलाओं की कुछ अश्लील फोटोज भी मिली थीं. बताया जाता है कि इन फोटोज से वे उन महिलाओं को ब्लैकमेल किया करते थें.

दिल्ली के सीएम को गोली मारने की दी थी धमकी

दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान स्वामी ओमजी का एक विवादित बयान सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था. उन्होंने यू-ट्यूब पर जारी एक इंटरव्यू कहा था कि अगर केजरीवाल नहीं समझे तो उन्हें गोली मार दी जाएगी. उन्होंने कहा था कि ‘मैं परशुराम का वंशज हूं. कोई घंटी बजाने वाला साधू नहीं हूं. देशद्रोहियों को मैं गोली मारता हूं. आने वाले समय में जो भी देश के खिलाफ काम करेगा, उसको पहले प्यार से समझाएंगे जैसे केजरीवाल को समझा रहे हैं, नहीं समझेंगे तो उसको गोली मार देंगे.’

साध्वी के साथ लाइव शो में की थी मारपीट

‘बिग बॉस’ के पहले कंटेस्टेंट के रूप में स्वामी ओमजी महाराज ने एंट्री ली. ओमजी स्वघोषित संन्यासी है और उन्होंने खुलासा किया कि वह देश में रामराज्य लाना चाहते हैं. उनके मुताबिक, वह 24 में से 22 घंटे लोगों की सेवा में लगाते हैं . बता दें कि ओमजी महाराज सितंबर 2015 में तब खूब विवादों में रहे थें, जब उन्होंने एक न्यूज चैनल की लाइव डिबेट के दौरान एक साध्वी के साथ हाथापाई की थी.

सलमान के खिलाफ आंदोलन चलाने की दी थी धमकी

सलमान खान को जब कोर्ट ने हिट और रन केस में बरी कर दिया था, तो ओमजी महाराज ने खासी नाराजगी जताई थी. उन्होंने कोर्ट के फैसले को गलत बताते हुए सलमान के खिलाफ आंदोलन करने की चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा था कि कोर्ट ने गलत फैसला सुनाया है, लेकिन वह लोगों को न्याय दिलाएगें.

नारायण साईं की ओजस्वी पार्टी संभाल रहे हैं महाराज

विवादित संत आसाराम के बेटे नारायण साईं ने ओजस्वी पार्टी नामक दल बनाया था. वे दिल्ली विधानसभा चुनाव 2013 में चुनाव लड़ने की सोच रहे थें, लेकिन यौन उत्पीड़न के आरोप लगने बाद चुनाव लड़ना संभव नहीं हुआ. इसके बाद स्वामी ओमजी महाराज को ओजस्वी पार्टी का कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया गया था.

एंट्री के साथ ही कुबूली थी एक लड़की को लात मारने की बात

ओमजी महाराज ने ‘बिग बॉस 10’ में एंट्री लेते ही क़ुबूल किया था कि वे एक लड़की को लात मार चुके हैं. हालांकि, होस्ट सलमान भी उनके इस बयान को अनसुना कर गए.

भोपाल में भी दी थी हिंसक आंदोलन की धमकी

एक इंटरव्यू में ओमजी महाराज ने कबीरपंथी बाबा रामपाल और आसाराम बाबू के पक्ष में बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि हमारे अनुयायी भोपाल में आंदोलन कर सकते हैं. यह राष्ट्रव्यापी आंदोलन ओजस्वी पार्टी के बैनर तले होगा. इस राजनीतिक पार्टी का गठन जेल में बंद आसाराम बापू के बेटे नारायण साई ने किया था.

रिश्तेदारों के खिलाफ दर्ज करा चुके हैं झूठा केस

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ओमजी महाराज पर यह आरोप भी है कि वे अपने भाई-बहन, पड़ोसियों और रिश्तेदारों के खिलाफ झूठे मामले दर्ज करा चुके हैं. बता दें कि बाबा का पूरा नाम विवेकानंद झा है. वे खुद को स्वामी सदाचारी साई बाबा ओमजी कहलवाना पसंद करते हैं.

अब बायोपिक की रेस में अनुराग भी

सत्तर के दशक में पंजाबी साहित्य में नक्सलवादी आंदोलन के सबसे बड़े कलमकार रहे अवतार सिंह संधू यानि पाश की जिन्दगी भी अब फिल्मी परदे पर होगी. अनुराग कश्यप ने इन पर बायोपिक बनाने का जिम्मा लिया है.

अनुराग कश्यप ने बताया है कि उनकी प्रोडक्शन कंपनी काफी समय से एक फिल्म बनाने की कोशिश में लगी थी और वो है पंजाब के एक कवि पाश. हम अभी उनकी जिन्दगी से जुड़े सारे डिटेल्स ढूंढ रहें है. हमारा ये रिसर्च काफी समय से चल रहा है. अभी तक उनकी बायोपिक पर कोई कंक्रीट डेट, कलाकार और बाकी चीजें फाइनल नहीं हुई है.

जैसे ही पाश की बायोपिक से जुड़ा काम पूरा हो जाएगा घोषणा कर दी जायेगी. पाश एक क्रांतिकारी कवि रहे और लोह कथा और साड्डे शामियान विच जैसी किताबें लिखी. साल 1888 में खालिस्तान समर्थकों ने उनकी हत्या कर दी थी.

लगातार फिल्में फ्लॉप होने के बाद अनुराग ने पिछले दिनों सोनाक्षी सिन्हा स्टारर फिल्म ‘अकीरा’ में अभिनय भी किया था. अब आगे किसी फिल्म में अभिनय करने की बात पर अनुराग हंसते हुए और बात टालते हुए कहतें हैं “अभी एक्टिंग नहीं बल्कि इस ये सोच रहा हूं कि फिल्में कैसे बनाऊं.”

शाहिद-मीरा छोटे पर्दे पर करेंगे डेब्यू

शाहिद कपूर की पत्नी मीरा राजपूत बेटी मीशा को जन्म देने के बाद से अभी तक किसी बड़े इवेंट में नजर नहीं आई हैं. मीरा और शाहिद बॉलीवुड के स्वीट कपल्स में से एक हैं. लेकिन अभी तक इन दोनों को साथ में इंटरव्यू देते हुए नहीं देखा गया है. अब शाहिद और मीरा पहली बार किसी पब्लिक प्लेटफॉर्म पर साथ नजर आने वाले हैं.

मीरा जल्द ही शाहिद के साथ छोटे पर्दे पर डेब्यू कर सकती हैं. बताया जा रहा है कि करण जौहर के शो ‘कॉफी विद करण’ में अक्षय कुमार और ट्विंकल खन्ना के बाद शाहिद कपूर और मीरा राजपूत बतौर गेस्ट नजर आएंगे. ‘कॉफी विद करण’ का यह एपिसोड दिसंबर महीने के मध्य में तब प्रसारित होगा, जब शाहिद फिल्म ‘पद्मावती’ के पहले शेड्यूल की शूटिंग पूरी कर लेंगे.

करण जौहर, अक्षय कुमार और ट्विंकल खन्ना के बाद अपने शो में किसी असामान्य जोड़े को लेकर आना चाहते थे. इधर शाहिद और मीरा ने करण से शो में आने की इच्छा जाहिर की. करण यह जानकर बेहद उत्साहित हुए, अब वह शाहिद की डेट देखकर एपिसोड की शूटिंग के लिए समय तय करेंगे.

बता दें कि शाहिद अभी तक करीना कपूर, सोनाक्षी सिन्हा और प्रियंका चोपड़ा के साथ ‘कॉफी विद करण’ में आ चुके हैं. हैरानी की बात यह है कि इन तीनों के साथ ही शाहिद के अफेयर के चर्चे सुनने को मिल चुके हैं. यह पहली बार होगा जब शाहिद अपनी पत्नी मीरा के साथ किसी चैट शो में नजर आएंगे.

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