पिंकी बुआ छोड़ रही हैं ‘द कपिल शर्मा शो’

‘कॉमेडी नाइट्स विद कपिल’ से कपिल शर्मा की पिंकी बुआ के किरदार से मशहूर हुईं उपासना सिंह ‘द कपिल शर्मा शो’ छोड़ रही हैं. हाल ही में खबरें थी कि उपासना सिंह और उनके पति नीरज भारद्वाज का तलाक होने जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक, नवंबर 2009 में शादी के बंधन में बंधा यह कपल चार साल से अलग रह रहा है. दोनों का सिर्फ कानूनी रूप से अलग होना बाकी रह गया है.

जब कपिल की टीम ने कलर्स चैनल को छोड़ा और सोनी चैनल पर अपना शो शुरू किया, तब उपासना सिंह, कृष्णा अभिषेक के शो ‘कॉमेडी नाइट्स लाइव’ के साथ थीं. लेकिन उन्होंने जल्द ही कृष्णा की टीम को छोड़ कपिल की टीम को ज्वॉइन कर लिया था.

उपासना सिंह अपनी शादीशुदा जिंदगी में आई दिक्कतों के चलते कपिल के शो को भी छोड़ रही हैं. कपिल को अब अपने शो में उपासना द्वारा निभाए जा रहे किरदार की ज्यादा जरुरत नहीं है, इसलिए इनके वापस कपिल की टीम में आने की कोई उम्मीद नहीं है.

उपासना और नीरज चार साल से अलग रह रहे हैं लेकिन उनके बीच बातचीत हो रही थी. मगर 9 महीने से उनका एक-दूसरे से कोई संपर्क नहीं हुआ. उपासना ने नीरज को अपनी बर्थडे पार्टी में भी इनवाइट नहीं किया था. बताया जाता है कि दोनों ने शादी को बचाने की बहुत कोशिश की. लेकिन मतभेद नहीं सुलझ सके. अलग-अलग एक्सपेक्टेशन की वजह से रिश्ता तलाक तक पहुंच गया है.

मुगलों की कहानी फतेहपुर की जुबानी

फतेहपुर सीकरी परिसर में दाखिल होने के बाद आप नि:संदेह मुगलिया सल्तनत के वैभव, ताकत और सांस्कृतिक शैलियों से प्रभावित हो सकते हैं. पूरा परिसर राजस्थान से लाए गए लाल पत्थरों से बनाया गया हैं. फतेहपुर सीकरी का सीधा संबंध सम्राट अकबर से था, जिन्होंने भारतीय इतिहास में एक गहरी छाप छोड़ी. ताजमहल के करीब होने के कारण यह जगह लंबे समय तक उपेक्षित सरीखी भी रही. इसे 1986 में वर्ल्ड हेरिटेज घोषित किया गया था.

फतेहपुर सीकरी कई सवाल भी लिए हुए है, जो यहां आने वाले सैलानियों की जुबां पर स्वाभाविक तौर पर आते हैं- शहर क्यों बसाया गया? महज 14 सालों बाद यह वीरान क्यों हो गया? इस शहर का पराभव क्या इसलिए हो गया, क्योंकि यहां पानी नहीं था?

बाबर सन् 1527 में खानवा के युद्ध को फतह करने के बाद यहां आए. उसने अपने संस्मरण में इस जगह को सीकरी कहा. बाद में बादशाह अकबर संतान प्राप्ति के लिए मन्नत मांगने अजमेर के ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के लिए पैदल ही निकल पड़े थे. रास्ते में सीकरी पड़ा. वहां अकबर की मुलाकात सूफी फकीर शेख सलीम चिश्ती से हुई. फकीर ने अकबर से कहा बच्चा तू हमारा इंतजाम कर दे, तेरी मुराद पूरी होगी. कुछ समय बाद अकबर की हिंदू बेगम जोधाबाई गर्भवती हो गईं.

अकबर ने तय कर लिया था कि जहां बालक पैदा हुआ वहां एक सुंदर नगर बसाएंगे, जिसका नाम था फतेहबाद जिसे आज हम फतेहपुर सीकरी के नाम से जानते हैं. यह सही मायनों में मुगल शासनकाल की पहली योजनाबद्ध तरीके से बसाई गई स्मार्ट सिटी थी. यह सड़क मार्ग से दिल्ली और आगरा से जुड़ा हुआ है. हजारों सैलानी यहां रोज आते हैं.

जो पर्यटक ताजमहल आते हैं, वह फतेहपुर सीकरी जाना नहीं भूलते. फतेहपुर सीकरी के मुख्य द्वार से परिसर करीब एक किलोमीटर अंदर है, वहां तक ले जाने के लिए यहां कई साधन चलते हैं, जिसमें तांगा भी है. पहले अकबर की राजधानी आगरा थी, लेकिन सीकरी में नया नगर फतेहबाद के बन जाने और उस सूफी संत के सानिध्य के लिए अकबर ने अपना निवास और दरबार आगरा से सीकरी स्थानांतरित कर दिया.

खास है यह इमारत

यहां की इमारतों को दो तरह से देखा जा सकता है या तो आप नीचे से ऊपर की ओर बढ़ें या बुलंद दरवाजे से घुस कर ऊपर से नीचे आएं. बुलंद दरवाजे तक पहुंचने के लिए पत्थर की सीढ़ियों से 13 मीटर ऊपर आना होगा. प्रवेश द्वार विशाल और बुलंद है इसलिए इसका नाम ही बुलंद दरवाजा है. इसे वर्ष 1602 में अकबर की गुजरात में जीत की यादगार के तौर पर बनाया गया था. इसे दुनिया का सबसे विशालतम दरवाजा भी माना जाता है. इसकी ऊंचाई 54 मीटर है.

दरवाजे से अंदर घुसते ही सामने लाल पत्थरों का विशाल प्रांगण और इसके चारों ओर स्तंभों से गलियारे हैं, जो ढेर सारे प्रकोष्ठों से जुड़े हैं. इसी प्रांगण में एक सफेद रंग की इमारत है, जो इस पूरे परिसर में अपने रंग, नक्काशी और खूबसूरती के लिए अलग ही नजर आती है. यह शेख सलीम चिश्ती की संगमरमर की बनी दरगाह है. इसे बारीक मुगल कला का अद्भुत नमूना भी कहा जा सकता है.

बादशाही दरवाजे के करीब पहुंचने पर नीचे जाती हुई सीढ़ियां दिखती हैं, जो उस शाही रिहायशी इलाके में पहुंचाती हैं, यहां सारे आवासीय भवन, मनोरंजन की सुविधाएं बनाई गईं. यहां घूमते हुए आप दीवाने खास के सामने पहुंचेंगे. वाकई यह खास प्रकोष्ठ है. यहीं दो बेगमों के साथ अकबर न्याय करता था. बादशाह के नवरत्न-मंत्री थोड़ा हट कर नीचे बैठते थे.

यहां सामान्य जनता तथा दर्शकों के लिए चारों तरफ बरामदे बने हैं. इसमें अकबर के बैठने की व्यवस्था एक खंबे के ऊपर गोलाई लिए बनी है. यह जगह पंच महल, हवा महल और शाही हरम से लगी हुई है. जब बात हरम की हो रही है, तो यहां जोधाबाई का भी जिक्र जरूरी है.

जोधा का महल शाही हरम का महत्वपूर्ण हिस्सा था. आज भी यह हरम में अलग-सा लगता है. इसके अंदर कई हिंदू भित्त चित्रों का इस्तेमाल हुआ था. हरम के करीब पंचमहल या हवामहल है. यह पांच मंजिला भवन जोधाबाई के सूर्य को अध्र्य देने के लिए बनवाया गया था. यहीं से अकबर की मुसलमान बेगमें ईद का चांद देखती थीं. समीप ही मुगल राजकुमारियों का मदरसा है. लाल पत्थरों से ही एक अनूप ताल बनाया गया, जहां तानसेन गाया करता था. ताल के पूर्व में अकबर की तुर्की बेगम रूकैया का महल है. यह इस्तांबुल की रहने वाली थी. इस महल की सजावट तुर्की के दो शिल्पियों ने की थी. हालांकि बाद में औरंगजेब ने इसकी सुंदरता को नष्ट-भ्रष्ट कर दिया था.

यहां के अन्य महत्वपूर्ण भवनों में नौबत-उर-नक्कार खाना, टकसाल, कारखाना, खजाना, हकीम का घर, दीवान-ए-आम, मरियम निवास और बीरबल का निवास आदि शामिल हैं. सलीम और अनारकली की मोहब्बत के किस्से यूं तो बहुत मशहूर हैं, लेकिन कम लोगों को मालूम है कि अनारकली को यहीं चिनवाया गया था.

वर्ष 1584 में एक अंग्रेज व्यापारी अकबर की राजधानी आया, उसने लिखा- आगरा और फतेहपुर दोनों बड़े शहर हैं. उनमें से हर एक लंदन से बड़ा और अधिक जनसंकुल है. फतेहपुर सीकरी घूमते हुए इसकी निर्माण कला को देखते हुए लगता है कि जिस स्मार्ट सिटी की अवधारणा पर हम काम कर रहे हैं, वह अपने देश में सैकड़ों सालों से है. मुगलों की जीवनशैली का भी प्रतीक है फतेहपुर सीकरी.

बड़े पर्दे पर वापसी कर रही हैं जेनेलिया

खबर है कि शादी और बच्चों की वजह से फिल्मों से ब्रेक ले चुकीं जेनेलिया डिसूज़ा अब बड़े पर्दे पर वापसी कर रही हैं. पिछली फिल्म ‘फोर्स’ में जॉन अब्राहम की पत्नी की भूमिका निभा चुकीं जेनेलिया ‘फोर्स 2’ में गेस्ट अपीयरेंस करेंगी.

गौरतलब है कि पिछली फिल्म ‘फोर्स’ में जेनेलिया के किरदार का अंत काफी दर्दनाक दिखाया गया था. अब यह देखना काफी मजेदार होगा कि ‘फोर्स 2’ में जेनेलिया को किस अंदाज में दिखाया जाता है.

इस खबर को कन्फर्म करते हुए प्रड्यूसर विपुल शाह ने बताया, ‘जेनेलिया इस फिल्म का हिस्सा हैं. पिछली फिल्म में उनके किरदार को लोगों ने खूब पसंद किया. जॉन और जेनेलिया के रोमांस की भी खूब तारीफ रही, इसलिए हमने खासकर ऐक्ट्रेस के हिसाब से स्क्रिप्ट तैयार किया और इस कहानी में बड़ी खूबसूरती से उनके लिए जगह बनाई है. वह जॉन के किरदार की मदद करने के साथ-साथ, फिल्म की कहानी को आगे बढ़ाती नजर आएंगी.’

खास बात यह है कि जेनेलिया दो बच्चों की मां बनने के बाद भी पहले की ही तरह स्लिम ट्रिम नजर आती हैं.

ट्विंकल ने की करण की बोलती बंद

करण जौहर के सेलेब्रिटी टॉक शो ‘कॉफी विद करण’ के पांचवें सीजन की शुरुआत बेहद अच्छी रही. शो के पहले गेस्ट शाहरुख खान और आलिया भट्ट थे. करण ने शाहरुख और आलिया से उनके पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ से जुड़े कई सवाल पूछे, जिनका उन्होंने पूरी इमानदारी से जवाब दिया. शो के अगले एपिसोड में अक्षय कुमार अपनी पत्नी ट्विंकल खन्ना के साथ काफी पीते नजर आएंगे.

‘कॉफी विद करण’ में करण के सवालों पर गेस्ट सेलेब्रिटी बगले झांकते नजर आते हैं. लेकिन ट्विंकल और अक्षय ने करण से ऐसे-ऐसे सवाल पूछे कि उनकी बोलती बंदा हो गई. करण के पास इन सवालों का कोई जवाब ही नहीं था.

ट्विंकल ने रैपिड फायर राउंड में करण जौहर को क्लीन बोल्ड कर दिया. उन्होंने करण से पूछा, ‘सलमान खान, शाहरुख खान और आमिर खान में से सबसे कूल कौन है?’ इसके बाद ट्विंकल ने सीधे करण की दुखती रग पर हाथ रख दिया. उन्होंने पूछा, ‘आप एक और खान, फवाद खान को क्यों नहीं लेते हैं?’ ट्विंकल के इन सवालों पर पहले तो करण मुस्कुराए और फिर कहां कि वह क्लीन बोल्ड हो चुके हैं यानि करण के पास इन सवालों का कोई जवाब नहीं था. ऐसे में करण जौहर के चेहरे के भाव देखने वाले थे.

बता दें कि पाकिस्तानी एक्टर फवाद खान, करण के चहेते कलाकारों में से एक रहे हैं. वह फवाद के साथ ‘कपूर एंड सन्स’ और ‘ऐ दिल है मुश्किल’ में काम कर चुके हैं. करण, फवाद के साथ तीसरी फिल्म भी करने जा रहे थे, जिसमें कट्रीना कैफ को कास्ट किया गया था. लेकिन उड़ी आतंकी हमले के बाद कुछ राजनीतिक पार्टियों ने पाक कलाकरों का विरोध किया. इस वजह से पाक कलाकरों को फिल्ममेकर्स अपनी फिल्मों में कास्ट करने से बच रहे हैं.

इस दिन रिलीज होगी भंसाली की ‘पद्मावती’

रणवीर सिंह इन दिनों अपनी फिल्म ‘पद्मावती’ की शूटिंग में व्यस्त हैं. इसके साथ-साथ वो अपनी आने वाली फिल्म ‘बेफिक्रे’ के प्रमोशन में भी जुटे हैं. ‘पद्मावती’ में रणवीर के साथ दीपिका पादुकोण की रोमांटिक जोड़ी का इंतजार कर रहे फैंस के लिए अच्छी खबर है. फिल्म की रिलीज डेट सामने आ गई है.

रणवीर ने इंस्टाग्राम पर ‘पद्मावती’ की रिलीज डेट का खुलासा किया है. 17 नवंबर 2017 को फिल्म रिलीज हो रही है. डेट के साथ रणवीर ने फिल्म से अपना लुक भी शेयर किया है. ‘पद्मावती’ में वो अलाउद्दीन खिलजी का रोल प्ले कर रहे हैं, और इस फोटो में उनकी सिर्फ आंखे नजर आ रही हैं.

संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावती’ एक पीरियड ड्रामा है. जिसमें रणवीर, दीपिका के साथ शाहिद कपूर भी नजर आएंगे. फिल्म की शूटिंग का काम काफी तेजी से चल रहा है. बता दें रणवीर और दीपिका की जोड़ी आखिरी बार भंसाली की फिल्म ‘बाजीराव मस्तानी’ में नजर आई थी. फिल्म के साथ-साथ इनकी जोड़ी को भी दर्शको ने खूब पसंद किया.

क्रिटिकल बीमारी के लिए अलग पॉलिसी

जब आप जीवन बीमा पॉलिसी खरीदते हैं तो कंपनी आपकी मृत्यु हो जाने पर आपके उत्तराधिकारी या मनोनित व्यक्ति को बीमा राशि का भुगतान कर देती है. इसी तरह बीमा कंपनी आपको किसी बीमारी की वजह से अस्पताल में दाखिल होने पर स्वास्थ्य बीमा के तहत अस्पताल में आपके इलाज पर हुए खर्चे का भुगतान करती है. कभी आपने सोचा है कि अगर आपको किसी गंभीर बीमारी के निदान के बाद आपके कार्य करने और कमाने की क्षमता समाप्त या कम हो जाती है तो ऐसी परिस्थिति में न तो जीवन बीमा कंपनी आपको कुछ भुगतान करेगी और न ही स्वास्थ्य बीमा के तहत कोई भी भुगतान मिलेगा क्योंकि आप जीवित है और अस्पताल में भी भर्ती नहीं हैं.

क्या होती है क्रिटिकल इलनेस पॉलिसी?

क्रिटिकल इलनेस पॉलिसी के तहत अगर आप किसी गंभीर बीमारी से बचकर निकलते हैं और आप उसके बाद नियत समय (जो कि 30 दिन तक का होता है) तक जिंदा रहते हैं तो आप बीमा की राशि पाने के हकदार होते हैं यानी आपकी बीमा कंपनी राशि का भुगतान करेगी. क्रिटिकल इलनेस पॉलिसी में गंभीर मानी जाने वाली बीमारियों के सामने आर्थिक रक्षण प्रदान किया जाता है. इसमें कवर होने वाली बीमारियों में दिल का दौरा पड़ना, किडनी का काम करना बंद करना, पक्षाघात, हृदय का वॉल्व खराब हो जाना, कैंसर आदि प्रकार की गंभीर बीमारियां शामिल हैं.

कितनी राशि का कवर खरीदना चाहिए?

चूंकि गभीर बीमारी के निदान के पश्चात आपकी आमदनी बंद हो जाती है एवं चिकित्सा एवं उपचार पर व्यय बढ़ जाता है, इसलिए आपको आपकी सालाना आय का कम से कम 10 से 12 गुना क्रिटिकल इलनेस कवर खरीदना चाहिए.

कैसे खरीदें पॉलिसी

कई बीमा कंपनियां अपनी जीवन बीमा पॉलिसी और स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के साथ क्रिटिकल इलनेस का राइडर खरीदने की सुविधा देती हैं. पर आपको क्रिटिकल इलनेस की अलग से पॉलिसी खरीदनी चाहिए और इसके पीछे कई कारण हैं.

– आपकी क्रिटिकल इलनेस के जोखिम को कवर करने के लिए जीवन बीमा एवं स्वास्थ्य बीमा के साथ में मिलने वाले राइडर की राशि पर्याप्त नहीं होती है.

– क्रिटिकल इलनेस कवर कें अंतर्गत जो भी बीमारियां (रोग) शामिल होते हैं उससे जुड़े नियम हर एक कंपनी में अलग अलग होते हैं. यह भी जरूरी नहीं है कि जो जीवन बीमा या स्वास्थ्य बीमा आप खरीद रहे हैं उसके साथ मिलने वाले राइडर में वो सब गंभीर बीमारियां कवर हों आप चाहते हैं.

– स्वास्थ्य बीमा परिवार के हर व्यक्ति के लिए जरूरी होता है परंतु क्रिटिकल इलनेस परिवार के हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं है और जब आप स्वास्थ्य बीमा के लिए फैमिली फ्लोटर पॉलिसी खरीदते है तो आपको क्रिटिकल इलनेस का कवर भी परिवार के सभी सदस्यों के लिए खरीदना पड़ेगा.

– फैमिली फ्लोटर में लगने वाला प्रीमियम परिवार के सबसे बड़े सदस्य की आयु पर निर्भर करता है और राइडर पर लगने वाला प्रीमियम भी इसी तरह ज्यादा लग जाता है.

घर को दें विदेशी लुक

घर में कोई मेहमान आए और उन्हें लगे कि वे विदेश में आ गए हैं तो आपकी सोच और कलात्मकता की तारीफ तो जरूर होगी. अगर आप ऐसा चाहती हैं तो फिर मिड नाइट ब्लू और सुनहरे रंग को केंद्र में रखते हुए अपना लें ये टिप्स और दें अपने घर को इंटरनेशनल लुक.

– अपने घर की दीवारों पर ब्राइट और बड़ी कलाकृतियां लगाएं.

– आपने जो कलाकृतियां लगाई हैं उनका आपस में तालमेल हो.

– लाइटिंग इफेक्ट को नजरअंदाज न करें. मूड और स्टाइल के अनुसार घर को रोशन करें.

– शीशों का इस्तेमाल समझदारी से करें.

– ध्यान रहे कि जो रंग आप दीवार और छत के लिए प्रयोग कर रही हैं वे आपके स्टाइल को और बढ़ाते नजर आएं.

– कालीन का प्रयोग बेहतर लगेगा.

– लाउंज और बेडरूम्स में सुंदर कुशन अच्छे लगेंगे.

– फॉल्स सीलिंग की योजना बनाएं ताकि संगीत और रोशनी के प्रभाव से खूबसूरती बढ़े.

– कमरों में सामान कम रखें, ऐसा न लगे कि गंदगी फैली है.

– साइड और सेंटर टेबल्स पर पीतल और कांसे जैसी धातु से बने कंटेम्परेरी शो पीस रख सकती हैं.

कुदरती स्वास्थ्यवर्धक पेय नारियल रस

दुनियाभर में कुदरती स्वास्थ्यवर्धक पेयों की मांग दिनबदिन बढ़ रही है. नारियल रस या कहें नारियल के दूध ने स्वास्थ्यवर्धक पेयों में अपना स्थान बना लिया है. चूंकि नारियल के गूदे को निचोड़ कर नारियल दूध प्राप्त किया जाता है, इसलिए नारियल में निहित सारे पौष्टिक एवं स्वास्थ्यवर्धक गुण नारियल दूध में भी निहित होते हैं.

कद्दूकस की गई नारियल की गिरी में पानी डाल कर निचोड़ने से जो नारियल का दूध प्राप्त होता है, पानी की मात्रा के अनुसार उस के संघटन में अंतर आ जाता है. यह नारियल रस के नाम से भी जाना जाता है.

नारियल दूध का प्रयोग व्यंजन, मिठाई और सूप बनाने के लिए तो किया ही जाता है, इस का प्रयोग पीने के लिए भी किया जाता है. चाय, कौफी आदि में दूध की जगह भी इस का प्रयोग किया जा सकता है. नारियल दूध का उपयोग शाकाहारी लोगों द्वारा विशेष कर उन लोगों द्वारा किया जाता है, जिन्हें जानवरों के दूध से ऐलर्जी होती है. फल रस में मिलाने के लिए भी इस का उपयोग किया जा सकता है.

नारियल दूध का उत्पादन विविध जायकों में एक पौष्टिक एवं गुणकारी पेय के रूप में होता है. जानवरों के दूध से भिन्न नारियल के दूध में लैक्टोज नहीं होता है. इसलिए लैक्टोज असहिष्णु लोग भी इस का उपयोग कर सकते हैं. विविध जायकों में फ्लेवर्ड नारियल रस बनाने की टैक्नोलौजी नारियल विकास बोर्ड के इंस्टिट्यूट औफ टैक्नोलौजी में विकसित की गई है.

फ्लेवर्ड नारियल दूध बनाने के लिए9 से 10 महीने का कच्चा नारियल प्रयोग किया जाता है. इस नारियल से जो दूध मिलता है वह अधिक गाढ़ा होता है और उस में वसा की मात्राभी कम होती है. नारियल दूध की पौष्टिकता बढ़ाने के लिए उस में नारियल पानी भी मिलाया जाता है.

नारियल रस के पौष्टिक गुण

नारियल दूध में मीडियम चेन संतृप्त वसा होती है. इस में 50% लारिक अम्ल होता है. लारिक अम्ल मानव शरीर में मोनोलारिन बन जाता है. मोनोलारिन में वायरसरोधी, बैक्टीरियारोधी और फफूंदरोधी गुण होते हैं. इसलिए नारियल दूध का उपयोग करने से वायरस एवं बैक्टीरिया के प्रकोप को रोका जा सकता है और रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है.

लारिक अम्ल कोलैस्ट्रौल और ट्राइग्लीसराइड स्तर भी कम करता है, जिस से हृदयरोग और पक्षाघात का खतरा कम हो जाता है. प्राकृतिक नाममात्र आहार सामग्री में लारिक अम्ल पाया जाता है. अत: नारियल दूध नियमित प्रयोग करने से शरीर को लारिक अम्ल के स्वास्थ्यकारी गुण प्राप्त होते हैं.

नारियल दूध में निहित मध्यम शृंखला वसा अम्ल शरीर में जमता नहीं है. इस के बजाय ऐसे वसा अम्ल शरीर को विशेष कर कोशिकाओं को तुरंत ऊर्जा प्रदान करते हैं. इसीलिए मोटापा कम करने में तथा इंसुलिन प्रतिरोध की अवस्था में नारियल दूध फायदेमंद है. इन वसा अम्लों के अलावा नारियल दूध में अनिवार्य पौष्टिक तत्त्व भी होते हैं, जिन के कई स्वास्थ्य लाभ होते हैं.

विटामिन और खनिज

नारियल दूध विटामिन और खनिजों का अच्छा स्रोत है. इस में विटामिन सी, ई, के, डी और बी समूह के कई विटामिन होते हैं. विटामिन सी और ई से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. विटामिन बी से कोशिकाओं को ऊर्जा मिलती है. नारियल दूध में मैग्नीशियम, पोटैशियम, फासफोरस और आयरन बड़ी मात्रा में होते हैं.

मैग्नीशियम से हृदय की धड़कन नियमित रहती है और नाड़ी सूत्र का काम भी ठीक तरह से होता है. फासफोरस दांतों और हड्डियों को मजबूत बनाता है. एक व्यक्ति को प्रतिदिन संस्तुत आयरन का 22% नारियल दूध से प्राप्त होता है और यह लाल रक्ताणुओं के निर्माण में बड़ी भूमिका निभाता है. आयरन की कमी यानी ऐनीमिया में नारियल दूध पीना लाभकर होता है. इन के सिवा कैल्सियम, जिंक आदि भी इस में पर्याप्त मात्रा में होते हैं.

प्रतिओक्सीकारक

नारियल दूध प्रतिओक्सीकारकों से भरपूर होता है, जो शरीर को खतरनाक मुक्त रैडिकलों और कोशिकाओं व ऊतकों पर उन के हानिकारक प्रभाव से सुरक्षा प्रदान करता है. मुक्त रैडिकलों से कैंसर, हृदयरोग, अलजाइमर्स आदि होने का खतरा रहता है.

नारियल दूध में पाचनशक्ति बढ़ाने तथा पोषक तत्त्वों के अवशोषण के लिए सहायक ऐसिड फास्फेट, कैटालैस, डिहाईड्रेजनैस, पैरोक्सिडैस जैसे सारे तत्त्व होते हैं. इस संपूर्ण पेय को फंक्शनल फूड का दर्जा दिया जा सकता है. इस तरह कई गुणों से संपन्न नारियल रस को रोजाना पीना स्वास्थ्य के लिए बेहद उपयोगी है.

मराठी के बाद पंजाबी फिल्मों में डेब्यू करेंगी प्रियंका

मराठी फिल्म ‘वेंटिलेटर’ में बतौर प्रोड्यूसर डेब्यू करने के बाद अब प्रियंका चोपड़ा पंजाबी फिल्म में डेब्यू करने जा रही हैं. फिल्म का टाइटल ‘सरवन’ है. इस फिल्म में भी प्रियंका बतौर प्रोड्यूसर ही डेब्यू कर रही हैं. जिसकी जानकारी खुद प्रियंका ने ही अपने ट्विटर अकाउंट पर दी है. ये फिल्म अगले महीने दिसंबर में रिलीज होगी.

इस फिल्म में अमरिंदर गिल, रंजीत बावा और सीमि चहल लीड रोल में होंगे. वाकई में बड़े पर्दे पर इस फिल्म को देखना काफी दिलचस्प होगा. ये फिल्म प्रियंका चोपड़ा, डॉ. मधु चोपड़ा और दीपशिखा देशमुख प्रॉड्यूस करेंगे. तो वहीं इसके डायरेक्टर होंगे वासु भगनानी. फिल्म रिलीज तो दिसंबर में होगी लेकिन रिलीजिंग डेट अभी तक तय नहीं हुई है.

क्या सेफ हैं आपके माइक्रोवेव कंटेनर्स?

हम में से कई लोग माइक्रोवेव कंटेनर्स को ‘सेफ’ मार्क देखकर खरीद लेते हैं. चूंकि इनके बैक में सेफ मार्क होता है इसलिए हम निश्चिंत भी हो जाते हैं. हालांकि इन पर केवल यह लिखा होना ही सेफ होने की गारंटी नहीं है.  

कंटेनर्स में कमी

माइक्रोवेव कंटेनर्स को प्रयोग के लिए मानकों पर खरा पाए जाने के बाद ही इनका प्रयोग करें. हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि पतली प्‍लास्टिक बॉडी वाले कंटेनर्स सुरक्षित नहीं होते हैं चाहे उन पर सेफ का मार्क हो भी तो भी. कई अध्‍ययनों में सामने आया है कि इन कंटेनर्स से BPA यानी बिसेफनॉल A निकलता है और जब इन्‍हें गर्म किया जाता है तो वह भोजन में मिल जाता है. छोटी-छोटी मात्रा में BPA लेना काफी हानिकारक होता है और इसका असर लंबे समय तक बना रहता है. अब तो इसे बैन करने की मांग भी उठ रही है.

क्‍या है बेहतर

कई प्‍लास्टिक कंटेनर्स एक बार प्रयोग होने के बाद अगले प्रयोग के लिए ठीक से साफ नहीं होते. प्‍लास्टिक की कुछ मात्रा भोजन में मिलती ही है. साथ ही ऐसे कंटेनर्स, जिसमें डिटर्जेंट या पेंट आदि रखा गया हो उसे धोकर भोजन रखने के लिए कभी प्रयोग नहीं करना चाहिए.

इन्‍हें करें इस्‍तेमाल

शीशे के मोटे बर्तनों को अवन के लिए प्रयोग करें. अच्‍छे ग्‍लासवेयर में ही भोजन को दोबारा गर्म करें. डेकोरेटिव ग्‍लास प्‍लेट्स को प्रयोग करने से बचें. पेपर प्‍लेट को भी भोजन गर्म करने के लिए इस्‍तेमाल कर सकते हैं.

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