बॉलीवुड से डांस गायब होता जा रहा है: फरहा

बॉलीवुड की जानी मानी कोरियोग्राफर फरहा खान का मानना है कि इन दिनों फिल्मों में डांस का निर्देशन करने वाले कोरियोग्राफर गानों को अच्छे से कोरियोग्राफ नहीं कर रहे हैं. इसकी वजह से गानों में अच्छा डांस देखने को नहीं मिलता है. डांस की जगह छोटे छोटे बीट पर शॉट्स एडिट किए जाते हैं.

दरअसल गुजरे जमाने में किसी भी गाने में कुछ डांस के मूवमेंट होते थे जो पूरी तरह से दिखाए जाते थे मगर अब फास्ट एडिट हो गया है. बॉलीवुड की सबसे लोकप्रिय कोरियोग्राफर में से एक फरहा कहती हैं कि आज के बहुत सारे कोरियोग्राफर को गाना एडिट करना नहीं आता है. वो एक मूवमेंट के 4 अलग-अलग शॉट्स लेते हैं और छोटे-छोटे कट मारकर लगा देते हैं. पहले गाने में स्टार या डांसर का पूरा स्टेप दिखाते थे.”

फरहा अब कोरियोग्राफी के कुछ ऐसे ही तरीके सिखाने के लिए इंडियन टेलीविजन अकादमी (ITA)के साथ जुड़ी हैं. यहां भारत का पहला कोरियोग्राफी स्कूल खोला गया है. इससे फरहा बतौर डीन जुड़ी हैं. फरहा यहां डांसर को कोरियोग्राफर बनाएंगी.

फरहा ने कहा कि यहां डांसर की कमी नहीं है. एक से बढ़कर एक डांसर हैं मगर उन्हें कोरियोग्राफी नहीं आती और हम कोरियोग्राफी सिखाएंगे. 12 हफ्ते के इस कोर्स में एक गाने में डांस, लोकेशन, कॉस्ट्यूम, एडिटिंग, लाइट और कैमरे का इस्तेमाल सिखाएंगे.”

अनुपम के लिए क्या है ‘पर्सनैलिटी’ का मतलब

500 से भी ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर अपने शानदार अभिनय के लिए जाने जाते हैं. लेकिन इसके अलावा दूसरी चीज जिसके लिए वह खास तौर से प्रचलित हैं वह है उनका स्वभाव.

अनुपम एक बेहद सकारात्मक सोच और प्रबल इच्छा शक्ति वाले व्यक्ति हैं. उनके बारे में लोगों को सबसे ज्यादा जानने का मौका उनके शो ‘द अनुपम खेर शो- कुछ भी हो सकता है’ में मिला. इस शो में अनुपम जनता से सीधे-सीधे रूबरू हुए. लेकिन ऐसा नहीं है कि शो खत्म हो जाने के बाद वह अपने फैन्स से कट गए हैं.

अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स के माध्यम से अनुपम लगातार अपने फैन्स से जुड़े रहते हैं. हाल ही में अनुपम ने अपने फेसबुक अकाउंट से मॉर्निंग वॉक के दौरान रिकॉर्ड किया गया एक वीडियो पोस्ट किया है जिसमें वह लोगों को ‘पर्सनैलिटी’ शब्द के बारे में बताते नजर आ रहे हैं.

अनुपम के मुताबिक, “पर्सनैलिटी शब्द का इस बात से कोई लेना-देना नहीं कि आप कैसे दिखते हैं, इसका लेना-देना इस बात से है कि आप कैसा महसूस करते हैं. पर्सनैलिटी का मतलब है खुद को वैसे स्वीकार करना जैसे आप हैं और चार्म का मतलब है अपनी कमजोरियों को स्वीकार करना और उनसे मजे लेना.”

उन्होंने कहा कि “बहुत से लोग आपको यह बता कर कमजोर महसूस कराने की कोशिश करेंगे कि वे सोचते हैं कि आप कमजोर हैं. लेकिन यदि आप ऐसा नहीं सोचते हैं कि आप कमजोर हैं तो उनके पास हंसने का कोई मौका नहीं है.”

अनुपम कहते हैं, “यदि आप लंबे हैं तो इसका मजा लीजिए, यदि आप नाटे हैं तो इसका मजा लीजिए, अगर आप काले हैं तो इसका मजा लीजिए. सोशल मीडिया पर बहुत से लोग मुझे टकला और गंजू कहकर मेरा मजाक बनाते हैं. और मैं उनसे कहता हूं कि मैं अपने बालों की वजह से कुछ ज्यादा ही सेक्सी हो जाता हूं इसलिए वह मेरे पास नहीं हैं. जय हो. तनक धिन-धिन…” और इसके बाद अनुपम अपनी जॉगिंग फिर से शुरू कर देते हैं.

अब 35 साल पीछे जाएंगे रितिक

रितिक रोशन, फिल्म ‘जोधा अकबर’ में मुगल काल में चले गए थे, फिल्म ‘मोहंजो दारो’ में हड़प्पा काल में पहुंच गए थे और अब वो ‘बच्चन काल’ में जाने वाले हैं. और ऐसा होगा उनकी फिल्म उनकी आने वाली एक फिल्म में.

रितिक रोशन इन दिनों फिल्म ‘काबिल’ की शूटिंग कर रहे है. निर्देशक संजय गुप्ता ने शूटिंग का एक हिस्सा पूरा कर लिया है लेकिन अब उन्हें 35 साल पीछे जाना है. दरअसल संजय गुप्ता फिल्म काबिल में फिल्म ‘ याराना ‘ के गाने ‘ सारा जमाना हसीनों का दीवाना ‘को री-क्रिएट करना चाहते हैं. राकेश कुमार की 1981 में रिलीज हुई ‘याराना’ में रितिक के चाचा राजेश रोशन ने संगीत दिया था.

सूत्रों कि मानें तो संजय गुप्ता ने काबिल के निर्माता राकेश रोशन को जब ये आइडिया सुनाया तो उन्हें काफी पसंद आया.

बताया जा रहा है कि फिल्म में अमिताभ बच्चन पर फिल्माया गया ये गाना ‘काबिल’ में एक स्पेशल अपीयरेंस के रूप में होगा जिसमे और भी सितारे नजर आएंगे. फिलहाल कौन कौन नए सिरे से उस दौर का हिस्सा बनेंगे, इसको लेकर विचार चल रहा है.

हाथ धोकर ही खाएं खाना

बचपन में हम सभी को कई अच्छी आदतें सिखायी जाती हैं. खाने से पहले हाथ धोना, रात को सोने से पहले ब्रश करना, नाखून छोटे रखना…और ऐसी ही कई छोटी-बड़ी बातें. बचपन में तो मां-बाप के डर से हम ये सारे काम कर लिया करते थे लेकिन बड़े होने के साथ ही इनमें से ज्यादातर आदतें छूटती चली जाती हैं.

लेकिन क्या आप जानते हैं बचपन की इन बातों को आदत बनाकर हम कई बीमारियों से बच सकते हैं. शायद आपको यकीन न आए लेकिन सिर्फ हाथ धोकर खाना खाने भर से ही आप कई जानलेवा बीमारियों से सुरक्षित रह सकते हैं. हाथ धोकर खाना खाना एक अच्छी और सेहतमंद आदत है.

हम दिनभर न जाने कितनी ही चीजों को छूते हैं, लोगों से हाथ मिलाते हैं, जिसकी वजह से कई तरह के बैक्टीरिया और कीटाणु हमारे हाथों में चिपक जाते हैं. जब बिना धोए इसी हाथ से हम खाना खाते हैं तो ये सारे बैक्टीरिया हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं, जो कई बीमारियों का कारण बनते हैं. ऐसे में बेहतर यही होगा कि आप जब भी कुछ खाएं, हाथ धोकर ही खाएं. ये एक सेहतमंद आदत है.

हाथ धोकर खाना खाने से इन बीमारियों से रह सकते हैं सुरक्षित:

1. थ्रोट इंफेक्शन

बिना हाथ धोए खाना खाने से थ्रोट इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है. इससे कफ और खराश की शिकायत हो जाती है.

2. डायरिया

डायरिया जैसी खतरनाक बीमारी से भी हम सिर्फ इस एक आदत को अपनाकर दूर रह सकते हैं. डायरिया, हमारे डाइजेस्ट‍िव सिस्टम से जुड़ी हेल्थ प्रॉब्लम है.

3. फूड इंफेक्शन

गंदे हाथों से खाना खाने से फूड इंफेक्शन होने का खतरा सबसे अधि‍क होता है. हमारे हाथों में कई ऐसे रोगाणु चिपके रहते हैं जो फूड इंफेक्श का कारण बन सकते हैं.

4. दस्त की प्रॉब्लमदे हाथों से खाना खाने से पाचन क्रिया पर भी असर पड़ता है. पाचन क्रिया दुरुस्त न हो तो कई समस्याएं जैसे दस्त, कब्ज, पेट दर्द और गैस की तकलीफ हो जाती है.

श्रद्धा कपूर का 8 साल पुराना सपना हुआ सच

‘रॉकऑन-2’ की हीरोइन बनकर श्रद्धा कपूर का 8 साल पुराना एक सपना पूरा हो गया है. 2008 में ‘रॉकऑन’ रिलीज हुई थी और तभी श्रद्धा कपुर ने इस फिल्म के सीक्वल में काम करने का सपना देखा था, जो पूरा हो चुका है.

फिल्म ‘रॉकऑन-2’ 2008 कि म्यूजिकल हिट फिल्म ‘रॉकऑन’ का सीक्वल है. इस फिल्म में श्रद्धा कपूर के साथ फरहान अख्तर और अर्जुन रामपाल मुख्य भूमिका निभा रहे हैं.

‘रॉकऑन-2’ के एक प्रमोशनल इवेंट पर श्रद्धा इस फिल्म से जुड़ने पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि “जब मैंने पहली ‘रॉकऑन’ देखी थी तभी मैंने एक ख्वाब देखा था कि मैं इसके सीक्वल में काम करूंगी. आज मेरा सपना पूरा हो चुका है. खुशकिस्मत हूं कि मैंने जो सपना देखा था वह सच में पूरा हो गया और मैं ‘रॉकऑन-2’ का हिस्सा हूं.

श्रद्धा कपूर का फिल्मी सफर 2010 में फिल्म ‘तीन पत्ती’ से शुरू हुआ था और ‘रॉकऑन’ 2008 में रिलीज हुई थी. यानी फिल्मों में आने से पहले ही श्रद्धा ने सीक्वल में आने का सपना देख लिया था. अगर यह बात सच है तो वाकई एक हसीन इत्तेफाख है, जो शायद फिल्मों और फिल्मी दुनिया में ही पूरा हो सकता है.

ये तेरा चेहरा खिला-खिला..

हम सुंदर और जवां चेहरा पाने के लिए क्या नहीं करते हैं. जिससे कि हमारे चेहरे पर निखार आ जाए. आप निखार पाने के लिए सप्ताह में एक बार पार्लर तो जरुर जाती होंगी. जिससे कि आप सबसे खूबसूरत दिखें. लेकिन क्या आप जानती हैं कि आपके किचन में ऐसी-ऐसी चीजें होती है जो आपको प्राकृतिक निखार दे सकती हैं. ऐसे ही आपके किचन में मौजूद चावल भी आपके सेहत और सौंदर्य दोनो के लिए फायदेमंद है.

उबला चावल का पानी यानी कि जिसे हम मांड कहते है. चावल से निकलने वाला पानी हमारे लिए काफी फायदेमंद है. हां जी चावल आपकी खूबसूरती में चार-चांद लगा सकता है. अगर आप इसका इस्तेमाल सप्ताह में एक बार भी करें तो आपको पार्लर जाने की जरुरत नहीं पड़ेगी.

चावल के पानी में अधिक मात्रा में प्रोटीन, विटामिन और एंटी-ऑक्सीडेंट पाया जाता है जो हमारे स्किन की नमी हमेशा बरकरार रखता है. इसके इस्तेमाल से आपके चेहरे के दाग-धब्बों के साथ-साथ झुर्रिया भी गायब हो जाती है. साथ ही इससे आपके चेहरे में कसावट और बंद पोर्स भी खुल जाते है. यह एक अच्छा क्लींजर साबित हो सकता है. जानिए इसका इस्तेमाल कैसे करें.

एक कप में चावल लेकर अच्छी तरह से साफ करके भिगों दे. आधे घंटे बाद इन्हें एक पैन में डालकर पकने के लिए रख दे. इसके बाद जब चावल पक जाए तो इसका पानी या मांड निकाल लें और इसे ठंडा होने के लिए रख दें.इसके बाद जब यह ठंड़ा हो जाए तो इसे अपने चेहरे में लगाकर हल्के हाथों से मसाज करें. मसाज करने के बाद कम से कम 10 मिनट ऐसे लगा रहने दे. फिर एक साफ कपड़े से इसे अच्छी तरह से पोछ लें. इससे आपके त्वचा में तुंरत बदलाव नजर आएगा.

इतना ही नहीं यह हमारे बालों के लिए भी काफी फायदेमंद है. इसके इस्तेमाल से आपके बेजान और रुखे बाल फिर से चमकदार हो जाएगे. इसे आपके कंडीशनर की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए इसके पानी को अपने बालों में लगाए और कम से कम  20 मिनट लगाए रहने के बाद शैम्पू और कंडीशनर से अपने बालों को धो लें. इससे आपके बाल सुंदर और चमकदार हो जाएंगे. 

क्या आंखों में काजल लगाते ही फैल जाता है?

 

हम लोग अपने बचपन की बात करें, तो हमारी मां हमारी आंखो में स्कूल जाने से पहले काजल लगाती थी. फिर चाहें वो लड़का या फिर लड़की. ताकि किसी की बुरी नजर न लगे. इसमें कितना सच है ये नहीं बोल सकते है, लेकिन इसको लगाने से आपकी आंखे जरुर सुंदर हो जाती हैं. साथ ही ये आंखो में होने वाली बीमारियों से भी बचाता है.

आज के समय की बात करें तो काजल फैशन के साथ-साथ मेकअप में शामिल हो गया. इसके बिना तो लड़कियों का श्रृंगार ही अधूरा लगता है. इसको लगाने से आपकी आंखो काफी सुंदर और बड़ी दिखने लगती है.

आजकल मार्केट में कई तरह के काजल आसानी से उपलब्ध हैं. लेकिन इन्हें लगाते ही आपकी आंख के नीचे पूरा काजल फैल जाता है. जिसके कारण आपका पूरा चेहरा खराब हो जाता हैं. साथ ही यह बहुत ही भद्दा भी लगता है.

अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, जिसके कारण आप काफी परेशान भी रहती हैं. कई उपाय अपनाए आपने लेकिन आंखो का काजल फैलना नहीं कम हुआ, तो आप इन उपायों को अपनाकर इस समस्या से निजात पा सकती हैं.

– जब आप काजल लगाए, तो उससे पहले अपनी आंखो के नीचें थोड़ा सा बेबी पाउडर लगा लें. इससे आपके आंखो का काजल नहीं फैलेगा.

– आप चाहें तो मार्केट में मिलने वाला वॉटर प्रूफ काजल का इस्तेमाल कर इसे  फैलने से रोक सकते है. यह लंबे समय तक आंखों में टिका भी रहता है.

– अगर आपके आंखो का काजल फैल जाता है, तो इसके लिए आप आईलाइनर का भी इस्तेमाल कर सकते है. ऐसा करने के लिए सबसे पहले आईलाइनर को आंखो में लगाकर फिर काजल लगाएं. इससे काजल फैलेगा नहीं.

– काजल लगाने से पहले टोनर से आंखो के नीचे अच्छी तरह से साफ कर लें. जिससे कि वहां मौजूद ऑयल खत्म हो जाएं. इसके बाद ही काजल लगाएं. इससे वह फैलेगा नहीं.

राजनीति में परिवारवाद सही या गलत

राजनीति भी धंधा ही है और जो लोग गांधी परिवार की आज भी सत्ता पर पकड़ से चिढ़ कर परिवारवाद को राजनीति का काला धब्बा मानते हैं, गलत ही हैं. जवाहर लाल नेहरू की मृत्यु के बाद लगा था कि नेहरू परिवार नाम की चीज न रहेगी पर फिर इंदिरा गांधी आ गईं. 1977 में हारने के बाद लगा कि अब परिवार समाप्त हो गया पर 1981 में फिर आ गईं.

पहले संजय गांधी और फिर इंदिरा गांधी की असामयिक मौत के बाद लगा कि परिवार का राज गया पर फिर राजीव गांधी आ गए. 1989 में हारने के बाद लगा कि लो अब तो अंत हो गया पर 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद नरसिंह राव की जो सरकार बनी वह गांधी परिवार की ही थी.

1998 में सोनिया गांधी राजनीति में आ गईं पर लगा कि वे केवल मुखौटा रहेंगी पर 2004 में जीत गईं और अब 2014 में हारने के बाद भी वे जमी हुई हैं और शायद प्रियंका गांधी भी राहुल गांधी के साथ मिल कर परिवारवाद का कलश चमकाए रखें.

यह यहीं नहीं हो रहा. अमेरिका में बिल क्लिंटन की 8 साल की प्रैजीडैंसी का लाभ उठा कर हिलेरी क्लिंटन राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार हैं. दूसरी ओर सिरफिरे दिखने वाले डोनाल्ड ट्रंप के चारों ओर 2 बेटे, 1 बेटी और पत्नी चुनाव का भार संभाले हुए हैं. 8-10 साल बाद मिशेल ओबामा राजनीति में कूद पड़ें तो आश्चर्य न होगा. वहां कैनेडी परिवार तो जानामाना परिवारवादी था पर अब चूंकि एकएक कर के बहुत से मौत के शिकार हो गए, अब यह नाम भुला दिया गया है.

राजनीति में परिवारवाद नहीं चलेगा, ऐसा नहीं हो सकता. रामायण की कहानी परिवारवाद से भरी पड़ी है. महाभारत का युद्ध विदेशियों में नहीं परिवार में हुआ. मुगलों का इतिहास परिवार में सत्ता की लड़ाई से भरा है. सभी देशों में राजा के पुत्र का राजा बनना स्वाभाविक लगता है. लोकतंत्र और वोटतंत्र उसे समाप्त नहीं कर पाया है.

इसे सहज स्वीकारने में हिचक नहीं होनी चाहिए. लोगों को अनुभवी शासक चाहिए जिस के बारे में वे जानते हों. जैसे विवाह से पहले वरवधू के गुण कम उन के मातापिताओं के गुण ज्यादा देखे जाते हैं, वैसे ही राजनीति में नए नेता को परखने के लिए उस के मातापिता का इतिहास काम में आता है.

डोनाल्ड ट्रंप या हिलेरी क्लिंटन में कौन राष्ट्रपति बनता है यह दूसरी बात है पर राज परिवार का चलेगा, यह पक्की बात है.

शरीर मेरा, हक मेरा

उत्तेजक, झीने कपड़ों में डांस करना एक पेशा हो सकता है पर इस का अर्थ यह कतई नहीं हो सकता कि कोई डांसर 1 नहीं 4-4 आदमियों को गनपौइंट पर अपने बदन से खिलवाड़ करने की इजाजत भी दे रही है. औरतों का अपना शरीर दिखाने या उसे चला कर मोहित कर देने का हक वैसा ही है जैसा एक पहलवान का कुश्ती में दांवपेंचों को दिखाना या एक प्रवचनकर्ता का लाखों की भीड़ को मुग्ध कर देना.

लखनऊ में एक कंपनी ने अपने किसी उत्सव में एक डांसर को भी मनोरंजन के लिए बुलाया पर बाद में 4 लोगों ने उसे कमरे में बुला कर बलात्कार कर डाला. मामला तो बन गया और सजा होगी या नहीं यह पता नहीं पर मुख्य सवाल यह है कि डांसर से साथ सोने की पेशकश करना ही कैसे संभव है?

औरत का शरीर बिकाऊ नहीं है. सैक्स बेचने की नहीं प्रेम की चीज है. जिसे डांस करना आता है वह सैक्स बेच कर वैसे भी पैसा नहीं कमाएगी. जो औरतें शरीर बेचती हैं वे दरअसल, कोठा मालकिनों, दलालों, माफिया की गुलाम होती हैं. सैक्स में प्रेम आवश्यक है और पैसा प्रेम का केवल प्रतीक भर है.

यह खेद की बात है कि दुनिया भर का लोकतंत्र देहव्यापार को रोक नहीं पाया है. औरतों को बताया जाता है कि वे देह बेच कर भी पैसा बना सकती हैं और पुरुषों को सिखाया जाता है कि खरीदी हुई देह भी प्रेम का प्रतीक है जबकि दोनों वहशीपन, जंगलीपन और पशुता के प्रतीक हैं.

यदि एक पैसे वाली कंपनी अपने किसी उत्सव के लिए कर्मचारियों के लिए डांस का प्रोग्राम रख सकती है तो स्पष्ट है कि वहां काम करने वाले गंवार, गुंडे तो नहीं होंगे. सभ्य, शिक्षित और सफल औरतों के प्रति ऐसे विचार रखें कि जिसे नचाया जा सकता है उसे जबरन बिस्तर पर ले जाना सभ्यता और शिक्षा पर कलंक है.

विरोध सैक्स की आजादी का नहीं, सैक्स को जबरन पाने की सोच का होना चाहिए और यह नियम ठीक उस तरह होना चाहिए जैसे सड़क पर चलते हुए लोग गाड़ी बाईं ओर ही चलाते हैं. यह जीवन का अंग होना चाहिए कि औरत का शरीर, पुरुष के शरीर की तरह उस की अपनी संपत्ति है और वह अपना सर्वस्व किसी को सौंपती है तो वह प्रेम का प्रतीक है चाहे 1 साल का हो या जीवन भर का.

औरत का शरीर उस का व्यक्तित्व है और उस की गरिमा का आदर करना समाज का कर्तव्य है. वह जमाना नहीं रहा जब औरत लूटी जाती थी, खरीदी जाती थी, दान में दी जाती थी. अब औरतों को हर काम करने की इजाजत है, देह दिखाने और सैक्स बेचने की भी पर अपनी शर्तों पर, जोरजबरदस्ती से नहीं. समाज व कानून को यह मानना होगा. इस में कंप्रोमाइज नहीं हो सकता. हक तो हक है. बराबर का, पहलवान का भी और प्रधानमंत्री का भी.

क्रिस्पी हैल्दी वैज रोल्स

सामग्री आटे की

– 2 कप मैदा

– 1 छोटा चम्मच बेकिंग पाउडर

– 1 छोटा चम्मच ओरिगैनो

– 1 छोटा चम्मच तेल

– स्वादानुसार नमक

सामग्री फिलिंग की

– जरूरतानुसार मटर, आलू कटे, शिमलामिर्च कटी, गाजर कटी, धनियापत्ती कटी – 1 छोटा चम्मच मक्खन

– 1/2 कप स्वीट कौर्न

– थोड़ी सी बींस कटी

– थोड़ी सी पत्तागोभी कटी

– 1 प्याज कटा

– 1 छोटा चम्मच अदरकलहसुन का पेस्ट

– मिर्च पाउडर स्वादानुसार द्य चाटमसाला पाउडर स्वादानुसार

– नमक स्वादानुसार

सामग्री कौर्नफ्लोर कोटिंग की

2 छोटे चम्मच कौर्न स्टार्च 1/2 कप पानी में घुला हुआ

– 1 कप ब्रैडक्रंब्स

विधि

सब से पहले आटा गूंध कर 2 घंटों के लिए अलग रख लें. अब फिलिंग तैयार करने के लिए एक पैन में 1 छोटा चम्मच मक्खन डालें और 1/2 चम्मच अदरक-लहसुन का पेस्ट डालें. फिर 1 मिनट बाद प्याज और बाकी सारी सब्जियां डालें. इस के बाद पानी डालें और पैन को ढक कर सब्जियों को पकाएं. अब इस में सारे मसाले और धनियापत्ती डालें और अच्छी तरह तब तक मिक्स करें जब तक पानी सूख न जाए. इस के बाद आटे की चौकोर रोटियां बनाएं और उन में फिलिंग कर अच्छी तरह रोल करें. अब रोल को कौर्न स्टार्च के घोल में डिप करें और फिर ब्रैडक्रंब्स में लपेट कर हैवल्स एअरफ्रायर में 15 मिनट तक 200 डिग्री तापमान पर पकाएं. सुनहरा होने पर हरी चटनी के साथ गरमगरम रोल्स सर्व करें.

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