घर पर ऐसे बनाएं बाजार से भी अच्छे कुरकुरे

मौसम कोई भी हो बच्चों और बड़ों सभी को ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर के अतिरिक्त भी बीच बीच में कुछ न कुछ स्नैक्स खाने की आवश्यकता होती ही है. इसके अलावा सफर पर जाते समय भी हम सभी को स्नैक्स खाने की इच्छा होती है. यूं तो आजकल बाजार भांति भांति के स्नैक्स से भरा पड़ा है परन्तु एक तो वे काफी महंगे दामों पर मिलते हैं दूसरे उन्हें बनाने में मैदा, अनेकों प्रिजर्वेटिव, सिंथेटिक टेस्ट इन्हेन्सर और रंगों का प्रयोग किया जाता है जो बच्चों और बड़ों सभी की सेहत के लिए बहुत नुकसानदायक होते हैं. घर पर थोड़े से प्रयास से बना लेने पर ये काफी सस्ते तो पड़ते ही हैं साथ ही हैल्दी भी होते हैं जिससे इन्हें खाने से कोई नुकसान होने की संभावना नहीं रहती. आज हम आपको चावल के आटे से बाजार के कुरकुरे के स्वाद वाला एक स्नैक्स बनाना बता रहे हैं जिसे आप बहुत आसानी से घर पर बना सकतीं हैं तो आइए देखते हैं कि इसे कैसे बनाया जाता है.

कितने लोगों के लिए            8

बनने में लगने वाला समय        30 मिनट

मील टाइप                             वेज

सामग्री

चावल का आटा                 1 कप

बेसन                                1/4 कप

मैदा                                  1 टीस्पून

बेकिंग सोडा                       1/4 टीस्पून

नमक                                 1/4 टीस्पून

अजवाइन                          1/4 टीस्पून

तेल                                  1 टेबलस्पून

पानी                                  1 कप

तलने के लिए तेल पर्याप्त मात्रा में

सामग्री (मसाले के लिये)

चाट मसाला                  1/4 टीस्पून

नमक                           1/4 टीस्पून

कश्मीरी लाल मिर्च         1/4 टीस्पून

चिली फ्लैक्स                  1/4 टीस्पून

ऑरिगेनो                     1 /2 टीस्पून

विधि

चावल का आटा, बेसन, नमक, अजवाइन, मैदा बेकिंग सोडा को एक बाउल में मिलाकर एकसार कर लें. अब एक बर्तन में पानी डालकर तेल डाल दें. जब पानी में एक उबाल आ जाये तो गैस बंद कर दें और तैयार चावल के आटे को कलछी से चलाते हुए पानी में अच्छी तरह मिलाकर 15 मिनट के लिए ढककर रख दें. 15 मिनट बाद आटे को पैन से निकालकर चकले पर रखकर चिकनाई लगाकर हाथ से मसलते हुए एकदम स्मूथ कर लें. अब इसे दो भाग में करके चकले पर लगभग रोटी की मोटाई जैसी पतली पतली रोटी बेल लें. चाकू की सहायता से 2 इंच लंबी और आधा इंच चौड़ी स्ट्रिप काट लें. जब सारी स्ट्रिप कट जाएं तो इन्हें हथेली पर रखकर हल्का सा रोल कर लें ताकि इनका आकार कुरकुरे जैसा हो जाये. इसी प्रकार दूसरी रोटी भी बेलकर काट लें. मसाले की समस्त सामग्री को एक छोटी कटोरी में एक साथ मिला लें. कटे कुरकुरे को गरम तेल में डालकर मध्यम आंच पर सुनहरा होने तक तलकर बटर पेपर पर निकाल कर तैयार मसाले को अच्छी तरह मिला लें. तैयार कुरकुरे को एयर टाइट जार में भरकर प्रयोग करें.

रखें इन बातों का ध्यान

  • चावल के आटे के स्थान पर आप गेहूं  के आटे या मैदा का भी प्रयोग कर सकतीं हैं.
  • कुरकुरे की शेप के अलावा आप अन्य किसी भी शेप में भी बना सकतीं हैं.
  • मसाले को पहले से ही तैयार करके रखें और गर्म गर्म में ही मिलाएं ठंडा होने पर मसाला ठीक तरह से कुरकुरे में कोट नहीं होगा.
  • आप इन्हें बनाने के लिए टमाटर, चुकंदर, और पालक प्यूरी का भी प्रयोग कर सकतीं हैं.
  • बेलते समय परेशानी होने पर मैदा या गेहूं के आटे के स्थान पर चावल के आटे का प्रयोग करें इससे कुरकुरे क्रिस्पी बनेंगे.
  • यदि आप कोई मसाला नहीं मिलाना चाहें तो आटा गूंथते समय नमक की मात्रा थोड़ी सी बढ़ा दें.
  • पानी की मात्रा चावल के आटे के एकदम बराबर ही लें पानी की कम या ज्यादा मात्रा आटे के टेक्सचर को सख्त या नरम कर देगी जिससे कुरकुरे को बेलने में परेशानी आ सकती है.

ऊपरी चमकदमक दिखाती इन्फ्लुएंसर

दिल्ली मैट्रो हो या मुंबई की लोकल ट्रेन, हर जगह भीड़ ही भीड़ है. इस भीड़ में एक चीज कौमन है, वह है इस भीड़ के हाथों में मोबाइल का होना. ट्रेन व बस का गेट पकड़े हुए हर शख्स के मोबाइल फोन की स्क्रीन पर शौर्ट रील्स ही स्क्रौल हो रही होती है. ऐसा लगता है मानो लोगों को कोई काम ही न हो.

इस खाली वक्त में वह अपनी स्टडी, अपने वर्क से रिलेटिड कंटैंट पढ़ या देख सकते हैं लेकिन वे घुसे होते हैं फैशन, लाइफस्टाइल, मेकअप, कपड़े या प्रोडक्ट के रिव्यू देने वाली रील्स में, जो कि उन का वक्त बरबाद करती हैं. फिर भी युवा धड़ल्ले से इन रील्स को देख रहे हैं.

ऐसा कर वे न सिर्फ अपना कीमती समय बेकार की चीजों में बरबाद कर रहे हैं बल्कि इन कंटैंट क्रिएटर का बैंक अकांउट भी अपने पैसों से भर रहे हैं.

कंटैंट क्रिएटर आखिर ऐसा क्या पेश करते हैं कि युवा दिनभर उन की रील्स देखने में लगे रहते हैं. इस का जवाब यह है कि कंटैंट क्रिएटर कंटैंट के नाम पर कुछ भी पोस्ट कर देते हैं और उन के फोलोअर्स सिर्फ उन की रील्स पर ढेरों व्यूज और लाइक देने का काम करते हैं.

ऐसे ही कुछ कंटैंट क्रिएटर हैं जो अपनी रील्स में अलगअलग शौपिंग साइट से कपड़े और प्रोडक्ट खरीद कर उन के बारे में बताते हैं. कहीं घूमने जाते हैं तो उस की रील्स बना लेते हैं और कुछ क्रिएटर तो इतने महान हैं कि उन्हें कोई कंटैंट नहीं मिलता तो वे गानों पर डांस या लिपसिंग करते हुए रील्स अपलोड कर देते हैं और यंगस्टर्स इन्हें बड़ी संख्या में देखते हैं.

राशि प्रभाकर- यूजफुल और नौट

इंस्टाग्राम पर ऐसे ही कुछ कंटैंट क्रिएटर्स हैं जो इसी तरह का कंटैंट पेश करते हैं जैसे राशि प्रभाकर. जिस की इंस्टटाग्राम आईडी है . इस के इंस्टाग्राम पर 3 लाख 28 हजार फौलोअर्स हैं. इस की बायो में डिजिटल क्रिएटर लिखा है. यह फैशन और ट्रायल की रील्स बनाती है, जिस में यह डिफरैंट शौपिंग साइट से कपड़े मंगा कर उन्हें ट्राय करती है. इस के यूट्यूब पर 1 लाख 33 हजार के आसपास सब्सक्राइबर हैं, जिस पर अब तक 233 वीडियोज पोस्ट किए जा चुके हैं.

राशि ने 4 जनवरी को एक रील अपलोड की, जिस का टाइटल था- ‘यूजफुल फाउंड अंडर 300 रुपीज’. इस में वह एक पोर्टेबल स्विच मशीन दिखाती है जिस की कीमत 300 रुपए थी. उस के बाद एक सैल्फी स्टिक जो 226 रुपए की थी. उस में 3 स्टिक थीं. फिर 262 की 3 ब्रा सैट दिखाई. उस की इस रील पर 9,610 लाइक्स और 1,026 कमैंट थे.

इसी तरह 3 जनवरी को मीशो बूट्स हौल अंडर 500 रुपए के नाम से एक रील बनाई. इस रील में 4 बूट्स दिखाए जो काले रंग के थे. ये सभी बूट्स विंटर के लिए थे.

उस ने 16 दिंसबर, 2023 को एक पोस्ट की. उस में वह ब्लू कलर की लौंग ड्रैस पहन कर खड़ी थी. जिस का टाइटल था ‘फेवरेट आउटफिट’. इस पर 11,260 लाइक्स और 187 कमैंट थे.

इसी तरह 4 दिसंबर को भी उस ने एक रील बनाई जिस में दिखाया कि किस तरह स्वेटर को जींस में टक किया जाता है. जिस से कि आउटफिट स्टाइलिस्ट लगे. रील का टाइटल था- टक इन स्वेटर. इस में 3 तरीके से स्वेटर को जींस में टक करना दिखाया गया था. जैसे, स्वेटर को ब्रा में फंसा लो, बैल्ट लगा कर अंदर की तरह स्वैटर को मोड़ लो और तीसरा स्वेटर के कोने में खड लगा कर अंदर की तरफ फोल्ड कर लो. इस पर 58,512 लाइक और 298 कमैंट थे.

अब सोचने वाली बात यह कि क्या लोग इतने फ्री हैं कि वे स्वेटर टक कर ने के तरीके पर हजारों लाइक दे रहे हैं या वे यह देखना चाहते हैं कि राशि की फेवरेट ड्रैस कौन सी है या 300 रुपए में मीशो से हम क्याक्या खरीद सकते हैं.

रौनक में कंटैंट की कमी

इस लिस्ट में सिर्फ राशि ही नहीं है बल्कि कुछ और कंटैंट क्रिएटर भी है जैसे रौनक माथुर. रौनक माथुर ने अपनी हालिया इंस्टाग्राम रील पर पार्टी वियर ब्लैक ड्रैसेज दिखाई हैं, जिस में वह 3 ब्लैक ड्रैसेस पहनी नजर आई. जिस का टाइटल था- ‘मस्ट हैव अ ब्लैक ड्रैसे अंडर 350 रुपीज’. ये सभी ड्रैसेस मीशो से और्डर की गई थीं. जिन में से एक का प्राइस 346 रुपए था. दूसरी का प्राइस 277 और तीसरी का 350 रुपए था. रौनक की इस रील पर 18 हजार लाइक्स और 3,500 हजार कमैंट थे, जिसे 3 हजार 700 लोगों ने शेयर किया था.

दूसरी वीडियो का टाइटल था, ‘स्किन केयर हैबिट दैट वर्कड फौर मी.’ इस में उस ने अपना स्किन केयर दिखाया था. जिस में पानी पीना, हाइड्रोनिक सीरम, सनस्कीन लगाना और मेकअप रिमूव करना (डबल शीट से) था. इस रील को 3 हजार 602 लोगों ने लाइक और 199 लोगों ने शेयर किया.

तीसरी वीडियो में वायरल रिबन हैक दिया था. जिस में रौनक रिबन की हैल्प से ईयररिंग बनाना सिखाती है. हालांकि एक हैक वह किसी दूसरे इन्फ्लुएंसर का ट्राई करती है और दूसरा हैक उस का खुद का होता है. इस रील पर 5 हजार 703 लोगों ने लाइक किया. वहीं 663 लोगों ने इस रील को शेयर किया.

आयशा धुले की धुली रील्स

राशि और रौनक की ही तरह आयशा धुले भी एक इन्फ्लुएंसर है. आयशा फोटो खींचने के आइडियाज देती है. वह मुंबई की है. उस की बायो में लिखा है-  आयशा ने 6 जनवरी को एक पोस्ट की जिस का टाइटल था- .

इस पर उस ने 6 फोटो अपलोड कीं. जिन पर उस ने नकली बटरफ्लाई को फेस पर लगाया है. साथ ही, लाइट पिंक मेकअप और ड्रैस का यूज किया है. इस पोस्ट पर 3 हजार 895 लाइक्स थे और हजारों लोगों ने इसे शेयर किया था.

आयशा की दूसरी पोस्ट थी-  इस में वह शीशे पर किस कर के सैल्फी क्लिक करने के आइडियाज देती है. यह एक रील थी. इस में उस ने रैड कलर की लिपस्टिक लगाई थी और ब्लैक ड्रैस पहनी थी. इस में 11 सैल्फी थीं. इस रील पर 1 लाख 21 हजार लाइक थे और 20 हजार लोगों ने इसे शेयर किया था.

तीसरी पोस्ट का टाइटल था-  इस में 5 फोटो आइडियाज थे. इन पर 15 हजार 392 लाइक्स हैं. इस पोस्ट को 13 हजार से ज्यादा लोगों ने शेयर था. यह एक रील फौर्म में पोस्ट थी.

सोशल मीडिया की दुनिया कितनी दिखावटी है, इस का एक उदाहरण हाल ही में नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई एक फिल्म ने दिया. जिस का नाम था- ‘खो गए हम कहां.’  इस फिल्म में दिखाया गया है कि सोशल मीडिया की लाइफ कितनी दिखावटी होती है. इस का असल जिंदगी से कोई लेनादेना नहीं होता.

मूवी में यह भी बताया गया है कि सोशल इनफ्लुएंसर जो लाइफ दिखाते हैं वह उन की रियल लाइफ नहीं होती. वे जिस होटल में जाते हैं, रैस्टोरैंट में खाते हैं या जो भी कपड़े पहनते हैं उन की वे ब्रैंडिंग कर रहे होते हैं. वे उन के खुद के पैसों के नहीं होते. इन इनफ्लुएंसर को देखदेख कर यंगस्टर उन की तरह बनने की चाह रखते हैं जबकि उन्हें यह नहीं पता कि वे इनफ्लुएंसर, बस, दिखावा कर रहे हैं.

ये इनफ्लुएंसर चाहते हैं कि आम लोग उन्हें देखते रहें. उन की पोस्ट और रील्स पर लाइक और कमैंट करते रहें ताकि वे इन से पैसे कमा सकें. इन्हें फौलो करने वाले लोगों को यह लगता है कि वे उन के लिए काम कर रहे हैं जबकि यह सच नहीं है, वे सिर्फ अपने लिए काम कर रहे होते हैं.

सोशल इनफ्लुएंसर की एक कड़वी सचाई यह भी है कि वे जो कपड़े पहनते हैं, उन के फौलोअर्स सोचते हैं कि हम भी वही कपड़े पहनें. उन की जैसी लाइफस्टाइल रखें. जबकि हमारे और उन की लाइफस्टाइल में काफी डिफरैंस होता है. लेकिन हम उन से इनफ्लुएंस हो जाते हैं और उन की बनाई दुनिया को अपनी दुनिया समझ लेते हैं और फिर हम उन की एक के बाद एक पोस्ट और रील्स को लाइक करते जाते हैं. यह कहीं न कहीं हमारी लाइफ को बैड इन्फ्लुएंस कर रहा है.

मेरी सास बातबेबात टोकाटाकी करती हैं, मुझे कोई उपाय बताएं

सवाल

मैं 23 वर्षीय नवविवाहिता हूं. शादी के बाद ढेरों सपने संजोए मायके से ससुराल आई, मगर ससुराल का माहौल मुझे जरा भी पसंद नहीं आ रहा. मेरी सास बातबेबात टोकाटाकी करती रहती हैं और कब खुश और कब नाराज हो जाएं, मैं समझ ही नहीं पाती. वे अकसर मुझ से कहती रहती हैं कि अब तुम शादीशुदा हो और तुम्हें उसी के अनुरूप रहना चाहिए. मन बहुत दुखी है. मैं क्या करूं, कृपया सलाह दें?

जवाब

अगर आप की सास का मूड पलपल में बनताबिगड़ता रहता है, तो सब से पहले आप को उन्हें समझने की कोशिश करनी होगी. खुद को कोसते रहना और सास को गलत समझने की भूल आप को नहीं करनी चाहिए. घरगृहस्थी के दबाव में हो सकता है कि वे कभीकभी आप पर अपना गुस्सा उतार देती हों, मगर इस का मतलब यह कतई नहीं हो सकता कि उन का प्यार और स्नेह आप के लिए कम है.
दूसरा, अपनी हर समस्या के समाधान और अपनी हर मांग पूरी कराने के लिए आप ने शादी की है, यह सोचना व्यर्थ होगा. किसी बात के लिए मना कर देने से यह जरूरी तो नहीं कि वे आप की बेइज्जती करती हैं.
आज की सास आधुनिक खयालात वाली और घरगृहस्थी को स्मार्ट तरीके से चलाने की कूवत रखती हैं. एक बहू को बेटी बना कर तराशने का काम सास ही करती हैं. जाहिर है, घरपरिवार को कुशलता से चलाने और उन्हें समझने के लिए आप की सास आप को अभी से तैयार कर रही हों.
बेहतर यही होगा कि आप एक बहू नहीं बेटी बन कर रहें. सास के साथ अधिक से अधिक समय रहें, साथ घूमने जाएं, शौपिंग करने जाएं. जब आप की सास को यकीन हो जाएगा कि अब आप घरगृहस्थी संभाल सकती हैं तो वे घर की चाबी आप को सौंप निश्चिंत हो जाएंगी.

जानें क्या है ऑक्युलर हायपरटेंशन और इससे बचाव

आज के समय में चाहे बच्चे हो या बड़े हर कोई आँखों की समस्या से परेशान है कारण है ज्यादा देर तक मोबाइल, टीवी या कंप्यूटर का इस्तेमाल करना व हमारी डाइट में पौष्टिक खानपान की कमी होना. ऐसे में आँखों के मरीजों की समस्या लगातार बढ़ रही है.

ऑक्युलर हायपरटेंशन आंखों से जुडी एक दुर्लभ बीमारी है. जब हमारी आंख के फ्रंट एरिया में
मौजूद फ्लूएड पूरी तरह से नहीं सुख पाता है तो हमें यह परे शानी हो सकती है.

तो चलिए जानते है ऑक्युलर हाइपरटेंशन की समस्या है क्या व इससे कैसे हम अपनी आँखों को बचा सकते हैं.

समस्या को जाने

इस बीमारी को आंख का हाई ब्लड प्रेशर भी कहा जाता है.  आंख की पुतली के पीछे मौजूद एक
संरचना से जलीय पदार्थ निकलता है.  यह लिक्विड जब आंख से बाहर नहीं निकलता है तब आंख के सामने के एरिया में मौजूद फ्लूइड पूरी तरह से सूख नहीं पाता है जिस वजह से आंख के भीतर मौजूद प्रेशर जिसे इंट्राकुलर प्रेशर कहते है वह नार्मल से ज्यादा हो जाता है.  नार्मल िस्थति में यह प्रेशर 11 से 21 (mmHg) होता है .  इसके बढ़ने से ग्लूकोमा जैसी बीमारी भी हो सकती है या इसकी वजह से एक या दोनों आंखे प्रभावित हो सकती हैं। आंख में चोट लगना ,अनुवांशिक बीमारी का होना या स्टेरॉयड दवाओं , अस्थमा और अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं का सेवन भी इस बीमारी का कारण हो सकती हैं.

लक्षण व बचाव

शुरुवात में इस बीमारी के लक्षण पता नहीं चल पाते लेकिन यह समस्या गंभीर होने पर मरीजों में आंख में दर्द और लालिमा जैसी समस्याएं दिखाई देती हैं.  वैसे तो यह समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है. लेकिन 40 साल के बाद इसका खतरा बढ़ सकता है.  जरूरी है कि नियमित रूप से आंखों की जांच कराएं व डॉक्टर की सलाह से ही दवाइयों का प्रयोग करें.

Valentine’s Day 2024: अनोखी- भाग 3- प्रख्यात से मिलकर कैसा था निष्ठा का हाल

‘‘अरे रुकिए तो वकील साहब. मेरे जूते मिलेंगे तभी तो,’’ सिकंदर जूते ढूंढ़ते हुए बोला.

प्रख्यात कीचड में खड़ा कभी खुद को, तो कभी अपने गंदे हो रहे पांवों को खीज कर देख रहा था. पैसे निकाल कर उसे देने ही पड़े.

‘‘हैलो पैसे मिल गए?’’ सखी का फोन था.

‘‘हां, जल्दी बता कहां हैं जूते?’’

‘‘सच बोल रही है न?’’

‘‘हां भई, अब बता न.’’

‘‘जा जूते सिकंदर की गाड़ी में रखे हैं.’’

‘‘वादा किया था कोई शरारत नहीं करेगी पर मानी नहीं शैतान… इस की शादी में सारा बदला लूंगी अच्छी तरह,’’ सुदीपा ने मुसकराते हुए कार की ओर इशारा किया.

सभी तुरंत भाग कर गाड़ी में जा बैठे. गाड़ी वकील को 33 सैक्टर छोड़ने चल पड़ी.

‘‘अनोखी सखी है आप की… कोई अनोखा ही मिलना चाहिए उन्हें,’’ प्रख्यात जूते पहनते हुए बोला.

‘‘सही में… मैं तो उस के लिए यही

कामना करती हूं… शुक्र करो बहुत कम शरारत ही की उस ने… अरे मैं तो कालेज से देख रही

हूं. कभी किसी के सीट पर गोंद चिपकाना, तो कभी किसी की चोटी चेयर से बांधना… टीचरों के अपने ही नामकरण किए थे. इंगलिश वाली मैडम को सूर्पणखा तो बौटनी वाली को मां

शारदे, कैमिस्ट्री वाली को काली खप्परवाली, फिजिक्स टीचर को दुर्गति दुर्गा… अपने बचपन के तो तमाम शरारती किस्से मजे ले कर सुनाते नहीं थकती.’’

सिकंदर और सुदीपा को कोर्ट मैरिज के बाद घर वालों के बड़े गुस्से का सामना करना पड़ा. काफी समय नाराजगी रही, खूब डांट पड़ी. प्रख्यात ने अपनी तरफ से उन्हें काफी सम झाने की कोशिश की. फिर सही में मातापिता दोबारा शादी के बाद ही उन्हें पतिपत्नी के रूप में स्वीकारने के लिए तैयार

हो गए. सब के मन में खुशी की लहर दौड़ने लगी. पूछ कर शादी की तारीख 3 महीने बाद तय की गई.

रात को प्रख्यात घर पहुंचा तो मां ने उसे उस की सगाई का कार्ड दिखाया जो अभीअभी छप कर आया था.

‘‘देख प्रख्यात कितना सुंदर है तेरी सगाई का कार्ड… दे आ अपने दोस्तों को भी.’’

‘‘आयुष्मति निष्ठा…’’ वह चौंका. उसे लाली याद आ गई. उस का नाम भी…’’

‘‘अब तो यह फोटो देख ले उस का… कितनी प्यारी है. तभी तो रिश्ता आते ही हम ने हां कर दी… तूने हमेशा मना किया देखने को, अब बाद में न कहना. देख ले अभी भी…’’ मम्मी अपनी सही और सुंदर पसंद दिखाने को बेचैन हो उठी थीं.

कुतूहलवश एक नजर उस ने देख ही लिया.

शुक्र है शक्ल उस लाली निष्ठा की नहीं. नाम से तो मैं तो घबरा ही गया था. लाली के पीछे से बौयकट, आगे से माथे को पूरा ढकते साधना कट हेयर, उस की हलकी सी भूरी आंखें… जुड़ी हुई भवें, सामने दांतों के बीच गैप… स्लाइड सी चल पड़ी प्रख्यात के दिमाग में.

‘‘क्या सोच रहा है. अच्छी नहीं लगी क्या?’’

‘‘नहीं मम्मी ऐसा कुछ नहीं. आप ने

पसंद की है तो अच्छी कैसे नहीं होगी,’’ वह मुसकराया.

सिकंदर के मातापिता ने थाईलैंड डैस्टिनेशन वैडिंग का निश्चय किया. वे सभी सहमत हुए तो उन की तैयारी शुरू हो गई. इधर रिसर्च पूरा होने के पहले ही प्रख्यात की जौब प्लेसमैंट के लिए मेल आ गया कि जल्दी थीसिस अप्रूव होते ही जौइन करें. मुंबई की नामी मल्टीनैशनल कंपनी में उसे जौब मिल गई थी. निष्ठा तो उस के लिए सही रही, यह खुशखबरी कैसे बताए उसे एक  िझ झक मन में लिए वह निकल पड़ा अपने होस्टल अपनी थीसिस जल्दी पूरी कर सबमिट करने के लिए.

‘‘मेरी सखी अंतर्ध्यान हो गई… किसी रिश्तेदार की शादी में गई है हाऊ बोरिंग… उस के साथ हर पल रोचक रहता मेरा.’’

‘‘अब मेरा सखा भी चला गया रिसर्च सबमिशन के लिए… अपनी सगाई के समय ही आएगा.’’

सही ही कहा था सिकंदर ने. प्रख्यात वाकई अपनी सगाई के दिन ही पहुंचा था.

‘‘कमाल करता है यार इतना बिजी था… अभी तक लड़की को न देखा न बात की होगी… क्या सोचती होगी वह… मम्मापापा का संस्कारी बौय,’’ सिकंदर ने थोड़ा गुस्सा किया.

‘‘अच्छा चल पहले जल्दी सैलून चल अच्छी तरह तैयार हो कर आ. फिर यह आंटी की लाई शानदार ड्रैस पहनना.’’

प्रख्यात तैयार हो कर सब के साथ वेन्यू पहुंचा तो निष्ठा के पिता व भाइयों ने स्वागत किया. निष्ठा की प्रतीक्षा में स्टेज पर बैठे प्रख्यात के दिल की धड़कनें तेज हो रही थीं. निष्ठा आई तो चेहरे पर घूंघट डाल रखा था. सिकंदर और सुदीपा ने उसे थाम लिया, बधाई दी.

सुदीपा गले मिल कर बोली, ‘‘बहुत बधाई सखी, पर ज्यादा तंग न करना बेचारे को. बात पच नहीं रही थी फिर भी हम दोनों ने कुछ नहीं बताया इसे,’’ सुदीपा ने मुसकराते हुए उस की हथेली दबा दी.

‘‘हां, बिना मु झे पहले देखे मिले. मंगनी करने का फल तो भुगतना होगा जनाब को… न कौल की न मिले,’’ वह घूंघट में हंसी.

लड़कियां तो शादी के समय भी आजकल घूंघट नहीं करतीं यह तो… मम्मी तो बता रही थीं कि बड़े मौर्डन खयालात के हैं ये लोग… प्रख्यात सोचे जा रहा था.

सखी पास आ कर बैठ गई. सब ने तालियां बजाईं.

‘‘प्रख्यात घूंघट उठा. फिर सगाई की रस्म शुरू की जाए,’’ मम्मी की आवाज थी.

‘‘मगर मम्मी…’’

‘‘यहां भी तु झे मम्मी की हैल्प चाहिए?’’ वातावरण में ठहाका गूंज उठा.

प्रख्यात ने जब घूंघट उठाया तो हैरान हो उठा. निष्ठा ने उसे चिढ़ाने के

लिए अपनी आंखें पूरी स्क्विंट कर ली थीं. उस की भवें लाली जैसी ही जुड़ी थीं. वह पसीने से नहा गया. मम्मी को देखने लगा.

दूसरे ही पल निष्ठा ने आंखें ठीक कर लीं, तो राहत हुई. सुदीपा टिशू से उस की काजल से बनी भवें साफ कर हंसने लगी.

‘‘यही सखी है, लाली भी और आप की निष्ठा भी… बोला था न शादी करूंगी तो तुम

से. पूरी नजर रख रही हूं तब से ही… बैठी रही तुम्हारे इंतजार में… आंटीअंकल को सब पता

था, पार्क में भी उस दिन मैं ही थी. जब दिल

नहीं माना तो जंगली घास की बाली घुसा दी तुम्हारी शर्ट में. मम्मी को तो पहचान लिया

होगा. बुद्धू सिंह. तुम्हें सरप्राइज का जबरदस्त  झटका देना था. इसीलिए कोर्ट में चेहरा छिपाते हुए जल्दी ही भाग गई थी. तुम्हें तंग करने

का अलग ही मजा है. अब तो जिंदगी भर ये

मजे लूंगी,’’ और फिर हंसते हुए बड़ी नजाकत

से रिंग सेरेमनी के लिए अपना हाथ आगे बढ़ा दिया.

प्रख्यात हैरान हो अनोखी लाली का

बदला रूप मंत्रमुग्ध हो देखे जा रहा था.

बचपन में वह अनोखी की अनोखी शरारतों से डरता भी था पर रोज इंतजार भी करता था.

शायद उस की नित नई रंगभरी शरारतों का

इंतजार उसे अच्छा भी लगता था. इसीलिए तो आज वह पूरा जीवन इस जीवंत रंग में रंगने

के लिए अपने को बिना डर के सहर्ष तैयार पा रहा था.

‘‘अब पहना भी दो कहां खो गए? जल्दी करो, निहारते ही रहोगे क्या?’’

‘‘पहनाओ प्रख्यात वरना अनोखी फिर

कोई शरारत न कर दे,’’ एकसाथ कई आवाजें गूंजीं.

फिर ठहाकों और तालियों के बीच

आखिर मुसकराते हुए निष्ठा को मंगनी रिंग

पहना दी.

Pregnancy में खूबसूरत दिखने के लिए अपनाएं ये 9 टिप्स

मां बनना दुनिया की हर महिला के लिए एक सुखद अहसास होता है. आने वाले बच्चे को लेकर वह कई तरह के सपने बुनने लगती है. लेकिन हर महिला के मन में इन नौ महीनों में उनकी सुंदरता को लेकर कई सवाल उठने लगते हैं. उन्हें लगता है कि उनके शरीर में होने वाला हार्मोनल बदलाव उनकी सुंदरता को कम न कर दे. हालांकि , मन में ये सवाल उठना स्वभाविक है. लेकिन हर महिला का हार्मोनल चक्र अलग होता है और उनकी प्रैग्नेंसी भी अलग होती है. इसलिए प्रैग्नेंसी के दिनों में किसी महिला के चेहरे पर प्राकृतिक चमक आती है, तो किसी को मुहांसे, ब्लैकहेड्स की समस्या होने लगती है. लेकिन अगर आपको जरा सा भी संदेह है तो यहां आपके लिए प्रेग्नेंसी में सुंदर दिखने के कुछ शानदार और प्रभावी तरीके बताए गए हैं, जिन्हें अगर आप फॉलो करेंगी, तो पूरे 9 महीने आपके चेहरे पर चमक बरकरार रहेगी.

1. ढेर सारा पानी पीएं-

प्रैग्नेंसी में सुंदरता को बनाए रखने के लिए ढेर सारा पानी पीना चाहिए. यह आपके शरीर से विषाक्त पदार्थों को फिल्टर करने में मदद करता है. इसके अलावा पानी आपके शरीर में एमनियोटिक द्रव की सही मात्रा को बनाए रखने में मददगार है. यह आपको और आपके बच्चे को स्वस्थ रखेगा. प्रेग्नेंसी के दिनों में विशेषज्ञ कम से कम 2 लीटर पानी पीने की सलाह देते हैं.

2. सही भोजन करें-

प्रैग्नेंसी के दौरान आप क्या खा रही  हैं और कितना स्वस्थ खा रही  हैं, इसके प्रति सर्तक रहना बहुत जरूरी  है. डाइट विशेषज्ञ से चार्ट बनवाएं और इसे फॉलो करें. सबसे जरूरी है कि स्वस्थ खाएं, ये आपके बच्चे के विकास के लिए बहुत जरूरी है.

3. अच्छी नींद लें-

थकान उन लक्षणों में से एक  है, जो प्रैग्नेंट महिलाओं को पहली तिमाही के दौरान महसूस होती है. आराम बहुत जरूरी है, तभी आपका शरीर और दिमाग खुद को तरोताजा महसूस करा पाएगा. इसलिए दिनभर में पर्याप्त नींद लें . सोने जाएं, तो अपने आप को सहज बनाएं. पॉश्चर सही रखें . सोते समय मेटरनिटी कुशन का सहारा लें. इससे आपको अच्छी नींद आएगी.

4. वजन पर नजर रखें-

प्रैग्नेंट  होने पर आपको अपने वजन पर नजर बनाए रखने की जरूरत है. हालांकि, प्रेग्नेंसी के दरौरान वजन बढऩा स्वभाविक  है. लेकिन इसका गलत तरीके से बढऩा स्वस्थ नहीं है. जंक फूड खाने से वजन बढ़ेगा, इसलिए स्वस्थ विकल्प चुनें.

5. व्यायाम  करें-

आप मानें या ना मानें, प्रैग्नेंसी में कुछ तरह के व्यायाम करना बेहद जरूरी  होते हैं. इसके लिए आप चाहें, तो मेटरनिटी योगा क्लासेस जॉइन कर सकती हैं, जो खासतौर से प्री-नेटल के लिए ही डिजाइन की जाती है.

6. स्ट्रेच मार्क्स से बचें-

ज्यादातर नई मांएं प्रेग्नेंसी के बाद स्ट्रेंच मार्क्स का अनुभव करती हैं. इन पूरे नौ महीनों पर इस पर ध्यान देना चाहिए. स्ट्रेच मार्क क्रीम का उपयोग करें. इसे रोजाना इस्तेमाल करें और धीरे-धीरे अपने पेट की मालिश करते रहें.

7. त्वचा की देखभाल करें-

प्रैग्नेंसी के दौरान अपनी त्वचा को नजरअंदाज न करें. हार्मोन में बदलाव के कारण त्वचा डैमेज हो सकती  है. इसलिए आप अपनी स्किन टाइप के अनुसार, स्किन केयर प्रोडक्ट्स का यूज कर सकती हैं, लेकिन ध्यान  रखें कि इंग्रीडिएंटस में कोई केमिकल वाली चीज शामिल न हो.

8. मेकअप करें-

यदि आपकी आंखों के नीचे सूजन आ रही  है तो कंसीलर का इस्तेमाल करना सबसे अच्छा है. चेहरे पर हार्मोनल चेंज के कारण  स्पॉट पड़ गए हैं, तो फाउंडेशन लगाएं. मेकअप हर चीज को कवर करता है. ऐसे ब्रांड्स को चुनें, जो अपने प्रोडक्ट में केमिकल का यूज नहीं करते.

9. आराम करें-

सबसे आखिरी और जरूरी बात है आराम करें. अपने शेड्यूल में ब्रेक को जरूर शामिल करें. प्रैग्नेंसी बहुत तनावपूर्ण होती  है, लेकिन  ध्यान रखें कि आप इससे प्रभावित न  हो. आप जितना आराम करेंगी, उतने सुंदर दिखाई देंगी.

हमें उम्मीद है कि यहां बताए गए तरीके प्रैग्नेंसी में आपकी खूबसूरती को बरकरार  रखेंगे. प्रैग्नेंट  होना कोई बीमारी नहीं है, इसलिए हमेशा खुश रहें. इससे आपकी सुंदरता में निखार आएगा.

एक सांकल सौ दरवाजे: भाग 5- सालों बाद क्या अजितेश पत्नी हेमांगी का कर पाया मान

‘समय के साथ हम में एक सहज सी दोस्ती हो गई थी. हम दोनों एकदूसरे के साथ जब कभी बैठते या 2 कप कौफी के लिए कैंटीन ही जाते, हम अच्छा सा महसूस करते, जैसे एकदूसरे के लिए हम कोई टौनिक थे.

‘कालेज से निकलते वक्त पल्लव मुझे अपना फोन नंबर और पता दे गए थे.

यह छोटा सा आदानप्रदान लगातार जारी रहा. और हम जैसेतैसे इस महीने से संपर्कसूत्र को बनाए रखने में सफल हुए. कह लो, एक सीधीसादी, अच्छी दोस्ती जहां कुछ न हो कर भी बहुतकुछ… चलो छोड़ो, तुम लोग अपनी खबर सुनाओ.’

मेरा दिल धुकपुक कर रहा था. भाई के चेहरे पर डर, कुंठा, असमंजस सब झलक आया था.

आखिर ममा हमें क्या कहते रुक गई थी.

हम दोनों मां की खुशियां चाहते थे. लेकिन कहीं यह खुशी परिवार टूटने से ही जुड़ी हो, तो?

परिवार टूटने का ग़म कम तो नहीं होता.

ममा इस बीच पल्लव जी के पास गई और रसोइए ने जो खाना पहुंचाया, उसे उन्हें खिला कर हमारे पास आ गई.

हम तीनों आज बड़े दिनों बाद साथ खाना खा रहे थे और पुराने दिनों से कहीं बेहतर मनोदशा में.

तब तो खाने पर मां के बैठते ही पापा की कटूक्ति और ताने शुरू हो जाते.

आज हमारा खाना हम दोनों भाईबहनों की अपनी पसंद का था. भाई की पसंद का छोलेभटूरे, मेरी पसंद की वेज बिरयानी, पनीर दोप्याजा.

‘ममा, यह मकान तो पल्लव जी का होगा, है न?’ मेरे इतना पूछते ही ममा ने कहना शुरू किया-

‘मेरे बच्चे, मैं अभी यहां फिलहाल 25 हजार रुपए प्रतिमाह की नौकरी करती हूं. तुम्हें लगता है कि सालभर में मैं 2 करोड़ रुपए का यह दोमंजिला मकान खरीद पाऊंगी? बच्चे, यह पल्लव जी का ही मकान है.’

‘ममा, इन की पत्नी? परिवार…?’

‘इन की कोई संतान नहीं. पत्नी है, लेकिन…’

‘लेकिन, क्या ममा?’

‘शायद इन की पत्नी के बारे में मेरा कुछ भी कहना सही नहीं होगा.’

एक कशमकश सी भर रही थी मेरी सांसों में.

आखिर पल्लव जी और मेरी मां का रिश्ता कैसा था? हमारा भविष्य क्या था? क्या हमें पापा के पास लौट कर फिर से उन्हीं जिल्लतों में जीना होगा? पल्लव जी और ममा साथ हों, तो क्या यह सही निर्णय होगा?

मैं यही सब सोच रही थी. ममा हमारे पास वाले कमरे में सोने चली गई. कुंदन ने पूछा धीरे से- ‘दीदी, ममा अगर पल्लव जी से शादी कर लें तो तुम्हें कैसा लगेगा?’

‘देख भाई, ममा को कभी वह प्यार व सम्मान मिला नहीं, जिन की वह हकदार थी. आज अगर पल्लव जी से मां को वह सब मिल सकता है जिस से उस की बाकी जिंदगी सुख से बीते, तो इस में हमें भी खुश ही होना चाहिए. हमारी ममा ऐसी नहीं कि वह हमारी फिक्र न करे.’

‘ममा तो कुछ बताएंगी नहीं. क्या कल जब ममा कालेज चली जाएं तो हम पल्लव जी से बात करें?’

सुबह ममा के कालेज जाने के बाद हम दोनों को पल्लव जी ने अपने साथ नाश्ते पर बुलाया. उन की देखभाल में शुभा और रसोइए के साथ एक और लड़का था जो शायद रात को उन के कमरे में देखभाल के लिए रहता था.

पल्लव जी उसे कविराज बुला रहे थे. मैं ने पूछा- ‘अंकल, यह कैसा नाम है?’

‘यह नाम मैं ने दिया है बेटा. वह, दरअसल, बहुत बढ़िया कविता लिखता है. मैं ने सोचा है यह मन भर कर लिख ले, फिर इस की कविताओं की किताब छपवा दूंगा. इस का नाम तो वैसे रतन है.’

‘वाकई, आप सभी का बहुत ख़याल रखते हैं अंकल. ममा आप की बहुत तारीफ कर रही थी.’

‘अच्छा, किस बारे में?’ पल्लव जी के चेहरे पर सौ दीए एकसाथ जल उठे जैसे.

‘वही, शुभा और उन की मां के बारे में,’ मैं ने अपनी झिझक संभाली.

पल्लव जी ने कुछ और सुनने की उम्मीद रखी थी शायद. उन्होंने ‘अच्छा’ कह कर अपने नाश्ते की प्लेट पर खुद को केंद्रित किया.

भाई ने अपनी कुहनी से मुझ पर दबाव बनाते हुए मुझे संकेत देना चाहा कि मैं इस मौके का जल्द सदुपयोग करूं.

‘अंकल, दरअसल, मैं आप से कुछ कहना चाहती हूं. समझ नहीं आता इतनी सारी बातें आप से…’

‘अरे बेटा, आप लोग मुझे अपने पापा की जगह पर रख कर कहो. मतलब, अंकल हूं न?’ पल्लव जी अपनी बात का मर्मार्थ समझ कर झेंपते हुए संभल से गए.

भाई का सब्र जाता रहा था. वह बिना देर किए तुरंत कह पड़ा- ‘अंकल, हमें कुछ समझ नहीं आ रहा. हम तो पापा से बिना कुछ कहे ही यहां आ गए. बाद में पापा के दीदी को संदेश भेजने पर दीदी ने कहा कि हम ममा के पास चले आए हैं. पापा ने हमें दोबारा न लौटने की धमकी दी. इधर ममा ठीक से कुछ बता नहीं रही हैं. हम बहुत परेशान हैं.’

पल्लव जी अत्यंत कुशाग्र थे. वे समझ रहे थे हम कहना क्या चाहते हैं, जानना क्या चाहते हैं.

उन्होंने शांत स्वर में कहना शुरू किया और हम उन की कहानी में डूबते चले गए.

‘मैं कई सारी बातें आप को साफ ही कहूंगा. आप अब बड़े हो गए हो, चिंतित होना वाजिब है. जिंदगी को आप समझते हो.

‘मैं अकेला अब भी हूं, तब भी था जब मेरी शादी हुई थी.’

हम दोनों की चौड़ी हुई आंखों को देख पल्लव जी कुछ पल को रुक गए. वे समझ गए थे कि हम क्यों उत्सुक हैं.

उन्होंने फिर बोलना शुरू किया- ‘मेरी पूर्व पत्नी ने मेरी खानदानी धनसंपत्ति देख मुझ से शादी की और मेरे मातापिता की मृत्यु के बाद मेरा ही अकेला वारिस रह जाना उसे बड़ा आल्हादित किया.

‘लेकिन कुछ समय बाद से ही उसे महसूस होने लगा कि उस ने अपने क्लर्क प्रेमी को छोड़ मुझ से शादी कर के बड़ी गलती कर दी है. उस का क्लर्क प्रेमी भले ही उस की शादी से पहले छोटी सी नौकरी की वजह से वर की लिस्ट से निकाला गया था, लेकिन उस की मेरे साथ 4 साल की शादी में जब मैं दुनियाभर के लोगों की मदद में उस की समझ से पैसे उड़ा रहा था, उस के प्रेमी ने अपनी नौकरी के सदुपयोग द्वारा लोगों के काम कर देने के बदले यानी पब्लिक सर्विस के एवज में उलटे हाथ से न सिर्फ दोगुने पैसे कमाए, बल्कि खुद का फ्लैट और गाड़ी भी ले ली.

‘मेरी पत्नी को खुद के ठगे जाने का ज्ञान हुआ और अपनी ग़लती सुधारने के लिए उस ने अपने पूर्व प्रेमी से धीरेधीरे संपर्क बढ़ाया. उस का प्रेमी क्लर्क कह कर दुत्कारे जाने से अब गजब की इच्छाशक्ति से भर गया था. और जब उस की पूर्व प्रेमिका ने उस के आगे नाक रगड़ी, तो मेरी पत्नी को दोबारा जीत ले जाने का लोभ वह न संभाल सका. जबकि, मैं ऐसी प्रतियोगिता वाले दृश्य में कभी था ही नहीं. मेरी पूर्व पत्नी और उस के प्रेमी को एक बार फिर से साथ हो कर मुझे सबक सिखाने का बराबर का आंनद आया. प्रेमी ने अपने चोट खाए अहं पर मलहम लगा सा लिया. और पत्नी ने मेरे पैसे उड़ाने जैसी गलत आदत के एवज में मुझे सबक सिखाया. वैसे, मैं ने सीखा नहीं सबक, मेरे लिए मेरे पैसे मेरे अकेले के सुखभोग के लिए नहीं हैं. जब भी मैं ऐसे किन्हीं को देखूंगा जिन्हें मेरी या मेरे पैसों की जरूरत होगी, मैं नहीं रुकूंगा.

मैं खुश हूं कि हेमा, माफ़ करना तुम्हारी ममा, मुझे समझती है. और वह खुद भी वैसी ही स्त्री है जिसे मैं चाह सकता हूं. मतलब…’

अधूरा सा दिल: आखिर कैसा हो गया था करुणा का मिजाज?

‘‘आप को ऐक्साइटमैंट नहीं हो रही है क्या, मम्मा? मुझे तो आजकल नींद नहीं आ रही है, आय एम सो सुपर ऐक्साइटेड,’’ आरुषि बेहद उत्साहित थी. करुणा के मन में भी हलचल थी. हां, हलचल ही सही शब्द है इस भावना हेतु, उत्साह नहीं. एक धुकुरपुकुर सी लगी थी उस के भीतर. एक साधारण मध्यवर्गीय गृहिणी, जिस ने सारी उम्र पति की एक आमदनी में अपनी गृहस्थी को सुचारु रूप से चलाने में गुजार दी हो, आज सपरिवार विदेशयात्रा पर जा रही थी.

पिछले 8 महीनों से बेटा आरव विदेश में पढ़ रहा था. जीमैट में अच्छे स्कोर लाने के फलस्वरूप उस का दाखिला स्विट्जरलैंड के ग्लायन इंस्टिट्यूट औफ हायर एजुकेशन में हो गया था. शुरू से ही आरव की इच्छा थी कि वह एक रैस्तरां खोले. स्वादिष्ठ और नएनए तरह के व्यंजन खाने का शौक सभी को होता है, आरव को तो खाना बनाने में भी आनंद आता था.

आरव जब पढ़ाई कर थक जाता और कुछ देर का ब्रेक लेता, तब रसोई में अपनी मां का हाथ बंटाने लगता, कहता, ‘खाना बनाना मेरे लिए स्ट्रैसबस्टर है, मम्मा.’ फिर आगे की योजना बनाने लगता, ‘आजकल स्टार्टअप का जमाना है. मैं अपना रैस्तरां खोलूंगा.’

ग्लायन एक ऐसा शिक्षा संस्थान है जो होटल मैनेजमैंट में एमबीए तथा एमएससी की दोहरी डिगरी देता है. साथ ही, दूसरे वर्ष में इंटर्नशिप या नौकरी दिलवा देता है. जीमैट के परिणाम आने के बाद पूरे परिवार को होटल मैनेजमैंट की अच्छी शिक्षा के लिए संस्थानों में ग्लायन ही सब से अच्छा लगा और आरव चला गया था दूर देश अपने भविष्यनिर्माण की नींव रखने.

अगले वर्ष आरव अपनी इंटर्नशिप में व्यस्त होने वाला था. सो, उस ने जिद कर पूरे परिवार से कहा कि एक बार सब आ कर यहां घूम जाओ, यह एक अलग ही दुनिया है. यहां का विकास देख आप लोग हैरान हो जाओगे. उस के कथन ने आरुषि को कुछ ज्यादा ही उत्साहित कर दिया था.

रात को भोजन करने के बाद चहलकदमी करने निकले करुणा और विरेश इसी विषय पर बात करने लगे, ‘‘ठीक कह रहा है आरव, मौका मिल रहा है तो घूम आते हैं सभी.’’

‘‘पर इतना खर्च? आप अकेले कमाने वाले, उस पर अभी आरव की पढ़ाई, आरुषि की पढ़ाई और फिर शादियां…’’ करुणा जोड़गुना कर रही थी.

‘‘रहने का इंतजाम आरव के कमरे में हो जाएगा और फिर अधिक दिनों के लिए नहीं जाएंगे. आनाजाना समेत एक हफ्ते का ट्रिप बना लेते हैं. तुम चिंता मत करो, सब हो जाएगा,’’ विरेश ने कहा.

आज सब स्विट्जरलैंड के लिए रवाना होने वाले थे. कम करतेकरते भी बहुत सारा सामान हो गया था. क्या करते, वहां गरम कपड़े पूरे चाहिए, दवा बिना डाक्टर के परचे के वहां खरीदना आसान नहीं. सो, वह रखना भी जरूरी है. फिर बेटे के लिए कुछ न कुछ बना कर ले जाने का मन है. जो भी ले जाने की इजाजत है, वही सब रखा था ताकि एयरपोर्ट पर कोई टोकाटाकी न हो और वे बिना किसी अड़चन के पहुंच जाएं.

हवाईजहाज में खिड़की वाली सीट आरुषि ने लपक ली. उस के पास वाली सीट पर बैठी करुणा अफगानिस्तान के सुदूर फैले रेतीले पहाड़मैदान देखती रही. कभी बादलों का झुरमुट आ जाता तो लगता रुई में से गुजर रहे हैं, कभी धरती के आखिर तक फैले विशाल समुद्र को देख उसे लगता, हां, वाकईर् पृथ्वी गोल है. विरेश अकसर झपकी ले रहे थे, किंतु आरुषि सीट के सामने लगी स्क्रीन पर पिक्चर देखने में मगन थी. घंटों का सफर तय कर आखिर वो अपनी मंजिल पर पहुंच गए. ग्रीन चैनल से पार होते हुए वे अपने बेटे से मिले जो उन के इंतजार में बाहर खड़ा था. पूरे 8 महीनों बाद पूरा परिवार इकट्ठा हुआ था.

आरव का इंस्टिट्यूट कैंपस देख मन खुश हो गया. ग्लायन नामक गांव के बीच में इंस्टिट्यूट की शानदार इमारत पहाड़ की चोटी पर खड़ी थी. पहाड़ के नीचे बसा था मोंट्रियू शहर जहां सैलानी सालभर कुदरती छटा बटोरने आते रहते हैं. सच, यहां कुदरत की अदा जितनी मनमोहक थी, मौसम उतना ही सुहावना. वहीं फैली थी जिनीवा झील. उस का गहरा नीला पानी शांत बह रहा था. झील के उस पार स्विस तथा फ्रांसीसी एल्प्स के पहाड़ खड़े थे. घनी, हरी चादर ओढ़े ये पहाड़, बादलों के फीते अपनी चोटियों में बांधे हुए थे. इतना खूबसूरत नजारा देख मन एकबारगी धक सा कर गया.

हलकी धूप भी खिली हुई थी पर फिर भी विरेश, करुणा और आरुषि को ठंड लग रही थी. हालांकि यहां के निवासियों के लिए अभी पूरी सर्दी शुरू होने को थी. ‘‘आप को यहां ठंड लगेगी, दिन में 4-5 और रात में 5 डिगरी तक पारा जाने लगा है,’’ आरव ने बताया. फिर वह सब को कुछ खिलाने के लिए कैफेटेरिया ले गया. फ्रैश नाम के कैफेटेरिया में लंबी व सफेद मेजों पर बड़बड़े हरे व लाल कृत्रिम सेबों से सजावट की हुई थी. भोजन कर सब कमरे में आ गए. ‘‘वाह भैया, स्विट्जरलैंड की हौट चौकलेट खा व पेय पी कर मजा आ गया,’’ आरुषि चहक कर कहने लगी.

अगली सुबह सब घूमने निकल गए. आज कुछ समय मोंट्रियू में बिताया. साफसुथरीचौड़ी सड़कें, न गाडि़यों की भीड़ और न पोंपों का शोर. सड़क के दोनों ओर मकानों व होटलों की एकसार लाइन. कहीं छोटे फौआरे तो कहीं खूबसूरत नक्काशी किए हुए मकान, जगहजगह फोटो ख्ंिचवाते सब स्टेशन पहुंच गए.

‘‘स्विट्जरलैंड आए हो तो ट्रेन में बैठना तो बनता ही है,’’ हंसते हुए आरव सब को ट्रेन में इंटरलाकेन शहर ले जा रहा था. स्टेशन पहुंचते ही आरुषि पोज देने लगी, ‘‘भैया, वो ‘दिलवाले दुलहनिया ले जाएंगे’ वाले टे्रन पोज में मेरी फोटो खींचो न.’’ ट्रेन के अंदर प्रवेश करने पर दरवाजे खुद ही बंद हो गए. अंदर बहुत सफाई थी, आरामदेह कुशनदार सीटें थीं, किंतु यात्री एक भी न था. केवल यही परिवार पूरे कोच में बैठा था. कारण पूछने पर आरव ने बताया, ‘‘यही तो इन विकसित देशों की बात है. पूरा विकास है, किंतु भोगने के लिए लोग कम हैं.’’

रास्तेभर सब यूरोप की अनोखी वादियों के नजारे देखते आए. एकसार कटी हरी घास पूरे दिमाग में ताजा रंग भर रही थी. वादियों में दूरदूर बसा एकएक  घर, और हर घर तक पहुंचती सड़क. अकसर घरों के बाहर लकडि़यों के मोटेमोटे लट्ठों का अंबार लगा था और घर वालों की आवाजाही के लिए ट्रकनुमा गाडि़यां खड़ी थीं. ऊंचेऊंचे पहाड़ों पर गायबकरियां और भेड़ें हरीघास चर रही थीं.

यहां की गाय और भेंड़ों की सेहत देखते ही बनती है. दूर से ऐसा प्रतीत होता है जैसे किसी ने पूरे पहाड़ पर सफेद रंग के गुब्बारे बिखरा दिए हों, पर पास आने पर मालूम होता है कि ये भेंड़ें हैं जो घास चरने में मगन हैं. रास्ते में कई सुरंगें भी आईं. उन की लंबाई देख सभी हैरान रह गए. कुछ सुरंगें तो 11 किलोमीटर तक लंबी थीं.

ढाई घंटे का रेलसफर तय कर सब इंटरलाकेन पहुंचे. स्टेशन पर उतरते ही देखा कि मुख्य चौक के एक बड़े चबूतरे पर स्विस झंडे के साथ भारतीय झंडा भी लहरा रहा है. सभी के चेहरे राष्ट्रप्रेम से खिल उठे. सड़क पर आगे बढ़े तो आरव ने बताया कि यहां पार्क में बौलीवुड के एक फिल्म निर्मातानिर्देशक यश चोपड़ा की एक मूर्ति है. यश चोपड़ा को यहां का ब्रैंड ऐंबैसेडर बनाया गया था. उन्होंने यहां कई फिल्मों की शूटिंग की जिस से यहां के पर्यटन को काफी फायदा हुआ.

सड़क पर खुलेआम सैक्स शौप्स भी थीं. दुकानों के बाहर नग्न बालाओं की तसवीरें लगी थीं. परिवार साथ होने के कारण किसी ने भी उन की ओर सीधी नजर नहीं डाली, मगर तिरछी नजरों से सभी ने उस तरफ देखा. अंदर क्या था, इस का केवल अंदाजा ही लगाया जा सकता है. दोनों संस्कृतियों में कितना फर्क है. भारतीय संस्कृति में तो खुल कर सैक्स की बात भी नहीं कर सकते, जबकि वहां खुलेआम सैक्स शौप्स मौजूद हैं.

दोपहर में सब ने हूटर्स पब में खाना खाने का कार्यक्रम बनाया. यह पब अपनी सुंदर वेट्रैस और उन के आकर्षक नारंगी परिधानों के लिए विश्वप्रसिद्ध है. सब ने अपनीअपनी पसंद बता दी किंतु करुणा कहने लगी, ‘‘मैं ने तो नाश्ता ही इतना भरपेट किया था कि खास भूख नहीं है.’’

अगले दिन सभी गृंडेलवाल्ड शहर को निकल गए. ऐल्प्स पर्वतों की बर्फीली चोटियों में बसा, कहीं पिघली बर्फ के पानी से बनी नीली पारदर्शी झीलें तो कहीं ऊंचे ऐल्पाइन के पेड़ों से ढके पहाड़ों का मनोरम दृश्य, स्विट्जरलैंड वाकई यूरोप का अनोखा देश है.

गृंडेलवाल्ड एक बेहद शांत शहर है. सड़क के दोनों ओर दुकानें, दुकानों में सुसज्जित चमड़े की भारीभरकम जैकेट, दस्ताने, मफलर व कैप आदि. एक दुकान में तो भालू का संरक्षित शव खड़ा था. शहर में कई स्थानों पर गाय की मूर्तियां लगी हैं. सभी ने जगहजगह फोटो खिंचवाईं. फिर एक छोटे से मैदान में स्कीइंग करते पितापुत्र की मूर्ति देखी. उस के नीचे लिखा था, ‘गृंडेलवाल्ड को सर्दियों के खेल की विश्व की राजधानी कहा जाता है.’

भारत लौटने से एक दिन पहले आरव ने कोऔपरेटिव डिपार्टमैंटल स्टोर ले जा कर सभी को शौपिंग करवाई. आरुषि ने अपने और अपने मित्रों के लिए काफी सामान खरीद लिया, मसलन अपने लिए मेकअप किट व स्कार्फ, दोस्तों के लिए चौकलेट, आदि. विरेश ने अपने लिए कुछ टीशर्ट्स और दफ्तर में बांटने के लिए यहां के खास टी बिस्कुट, मफिन आदि ले लिए. करुणा ने केवल गृहस्थी में काम आने वाली चीजें लीं, जैसे आरुषि को पसंद आने वाला हौट चौकलेट पाउडर का पैकेट, यहां की प्रसिद्ध चीज का डब्बा, बढि़या क्वालिटी का मेवा, घर में आनेजाने वालों के लिए चौकलेट के पैकेट इत्यादि.

‘‘तुम ने अपने लिए तो कुछ लिया ही नहीं, लिपस्टिक या ब्लश ले लो या फिर कोई परफ्यूम,’’ विरेश के कहने पर करुणा कहने लगी, ‘‘मेरे पास सबकुछ है. अब केवल नाम के लिए क्या लूं?’’

शौपिंग में जितना मजा आता है, उतनी थकावट भी होती है. सो, सब एक कैफे की ओर चल दिए. इस बार यहां के पिज्जा खाने का प्रोग्राम था. आरव और आरुषि ने अपनी पसंद के पिज्जा और्डर कर दिए. करुणा की फिर वही घिसीपिटी प्रतिक्रिया थी कि मुझे कुछ नहीं चाहिए. शायद उसे यह आभास था कि उस की छोटीछोटी बचतों से उस की गृहस्थी थोड़ी और मजबूत हो पाएगी.

अकसर गृहिणियों को अपनी इच्छा की कटौती कर के लगता है कि उन्होंने भी बिना कमाए अपनी गृहस्थी में योगदान दिया. करुणा भी इसी मानसिकता में उलझी अकसर अपनी फरमाइशों का गला घोंटती आई थी. परंतु इस बार उस की यह बात विरेश को अखर गई. आखिर सब छुट्टी मनाने आए थे, सभी अपनी इच्छापूर्ति करने में लगे थे, तो ऐसे में केवल करुणा खुद की लगाम क्यों खींच रही है?

‘‘करुणा, हम यहां इतनी दूर जिंदगी में पहली बार सपरिवार विदेश छुट्टी मनाने आए हैं. जैसे हम सब के लिए यह एक यादगार अनुभव होगा वैसे ही तुम्हारे लिए भी होना चाहिए. मैं समझता हूं कि तुम अपनी छोटीछोटी कटौतियों से हमारी गृहस्थी का खर्च कुछ कम करना चाहती हो. पर प्लीज, ऐसा त्याग मत करो. मैं चाहता हूं कि तुम्हारी जिंदगी भी उतनी ही खुशहाल, उतनी ही आनंदमयी हो जितनी हम सब की है. हमारी गृहस्थी को केवल तुम्हारे ही त्याग की जरूरत नहीं है. अकसर अपनी इच्छाओं का गला रेतती औरतें मिजाज में कड़वी हो जाती हैं. मेरी तमन्ना है कि तुम पूरे दिल से जिंदगी को जियो. मुझे एक खुशमिजाज पत्नी चाहिए, न कि चिकचिक करती बीवी,’’ विरेश की ये बातें सीधे करुणा के दिल में दर्ज हो गईं.

‘‘ठीक ही तो कह रहे हैं,’’ अनचाहे ही उस के दिमाग में अपने परिवार की वृद्धाओं की यादें घूमने लगीं. सच, कटौती ने उन्हें चिड़चिड़ा बना छोड़ा था. फिर जब संतानें पैसों को अपनी इच्छापूर्ति में लगातीं तब वे कसमसा उठतीं

उन का जोड़ा हुआ पाईपाई पैसा ये फुजूलखर्ची में उड़ा रहे हैं. उस पर ज्यादती तो तब होती जब आगे वाली पीढि़यां पलट कर जवाब देतीं कि किस ने कहा था कटौती करने के लिए.

जिस काम में पूरा परिवार खुश हो रहा है, उस में बचत का पैबंद लगाना कहां उचित है? आज विरेश ने करुणा के दिल से कटौती और बेवजह के त्याग का भारी पत्थर सरका फेंका था.

लौटते समय भारतीय एयरपोर्ट पहुंच कर करुणा ने हौले से विरेश के कान में कहा, ‘‘सोच रही हूं ड्यूटीफ्री से एक पश्मीना शौल खरीद लूं अपने लिए.’’

‘‘ये हुई न बात,’’ विरेश के ठहाके पर आगे चल रहे दंपतियों का मुड़ कर देखना स्वाभाविक था.

अभिनेत्री श्रुति आनंद के आंखों में आंसू आने की वजह क्या रही, पढ़ें पूरा इंटरव्यू

खूबसूरत, हंसमुख और स्पष्टभाषी श्रुति आनंद एक टीवी एक्ट्रेस है, उन्होंने शो ‘मन सुंदर’ से कैरियर की शुरुआत की है. इसके बाद उन्होंने शो ‘तेरी लाडली मैं’ और कई फिल्मों, वेब सीरीज में भी अभिनय किया है. उन्हें बचपन से ही अभिनय की इच्छा थी, इसलिए मॉस कम्युनिकेशन की पढ़ाई पूरी कर उन्होंने जॉब ज्वाइन किया और इस इंडस्ट्री की ओर मुड़ी. यहाँ उनका कोई गॉडफादर नहीं था, जिसके परिणामस्वरुप उन्हें बहुत अधिक संघर्ष करने पड़े, लेकिन उन्होंने शुरू में जो भी काम मिला करती गई. कैमरे के आगे रहना उन्हें हमेशा से पसंद था. इसलिए अभी भी ओटीटी और विज्ञापनों के लिए ऑडिशन देती रहती है. आगे उनकी एक फिल्म भी रिलीज होने वाली है, जिसमे उन्होंने अभिनेत्री साक्षी तनवर के साथ काम किया है.

इन दिनों सोनी टीवी पर उनकी शो मेहंदी वाला घर है, जिसमें उन्होंने मौली की भूमिका निभाई है, वह काफी खुश है. उन्होंने खास गृहशोभा के लिए बात की. पेश है कुछ खास अंश.

परिवार पहली पसंद

इस शो को करने की खास वजह के बारें में श्रुति कहती है कि ये कहानी एक संयुक्त परिवार की है, जिसमे संयुक्त परिवार की शक्ति को दिखाया गया है, जो बहुत सही है, क्योंकि अगर परिवार में कोई बीमार पड़ता है, तो पूरा परिवार उसके साथ खड़ा हो जाता है, जो एक अजनबी से उम्मीद नहीं की जा सकती. काम के बाद जब मैं घर जाती हूँ और पूरा परिवार मिलता है, तो एक अलग तरीके की सुकून और ख़ुशी मिलती है. इसके अलावा पूरा परिवार मिलकर किसी भी त्यौहार को मनाने की जो ख़ुशी होती है, उसे बयान करना मेरे लिए संभव नहीं. मैं अपने परिवार को मुंबई में बहुत मिस करती हूँ, क्योंकि मेरा परिवार बिहार में रहता है. वहां मुझे जाना बहुत पसंद होता है. देखा जाय तो आज कल सोशल मीडिया की दुनिया चल रही है, जो दिखावे की दुनिया है, अगर कोई उनसे जाकर बात करें, तो पता चलेगा कि उनके अंदर कितना खालीपन और खोखलापन है. बहुत सारी एक्टिविटीज को कर वे खुद को खुश दिखाने की कोशिश करते है कि वे बहुत खुश है, जबकि वे नहीं होते. शो में की चरित्र मौली का मुझसे बहुत मेल खाता है, क्योंकि मैने परिवार में भी किसी मनमुटाव को ठीक किया है और वही परिस्थिति यहाँ भी करती हूँ. परिवार मेरे लिए बहुत मायने रखती है. दोस्त और दोस्ती एक हद तक सही होती है, उसके बाद परिवार की भूमिका ही अहम् होती है.

करती हूं परिवार को मिस

इस शो से मुझे बहुत कुछ सीखने को भी मिल रहा है, क्योंकि इस शो के ऑडिशन के वक्त मेरे आँखों में आंसू आ गए थे, क्योंकि मैं परिवार को बहुत मिस करती हूँ और चाहती हूँ कि सब साथ मिलकर मुंबई में रहूं. शूटिंग से घर जाने पर बहुत अकेलापन महसूस होता है. मैंने देखा है कि आज के यूथ अकेले रहना पसंद करते है, मुझे भी पहले लगता था, अब नहीं लगता. इस शो में एक्टिंग ही सही, पर मौली की भूमिका से मुझे अच्छा महसूस होता है, जो एक परिवार में रहती है.

जौब के साथ किये अभिनय

बिहार से मुंबई आकर काम की तलाश करना श्रुति के लिए आसान नहीं था, पर वह इसे संघर्ष नहीं एक प्रोसेस मानती है. वह कहती है कि काम हो या न हो, दिल से मेहनत करना जरुरी है. मैंने जब शो नहीं मिला था, तो जॉब कर रही थी. छोटी – छोटी एक्टिंग जो भी मिले करती रहती थी. पहला शो जब मुझे मिला था, तो मैं गुडगांव से मुंबई ऑडिशन देने आई थी. वहां नाईट शिफ्ट में मैं जॉब करती और दिन में शूट करती थी. कोई सपोर्ट नहीं था, क्योंकि मैं अपने परिवार से पैसे नहीं मांगना चाहती थी, ऐसे ही मैंने कई बार जॉब छोड़ा और शो किया. कोविड का आना भी मेरे लिए बड़ी समस्या थी, लेकिन इतनी उतार – चढ़ाव के बीच मैंने अपनी जर्नी तय की है कि अब इसका कोई असर मुझपर नहीं पड़ता. मुझे पता है कि ये समस्याए आएगी और मुझे इससे निकलना पड़ेगा.

स्किन के रंग को लेकर सुनी कई बातें  

पहले जब यहाँ आई थी तो लोगों के हाँव – भाव बहुत अलग हुआ करते थे, मुझे कास्टिंग और ऑडिशन के बारें में कुछ भी जानकारी नहीं थी और मेरा रंग भी थोडा डस्की है, उन लोगों के हिसाब से मैं ऐसी थी कि मुझे काम नहीं मिल सकता या फिर वजन कम करों आदि सुनने को मिलते थे. मेरे पेरेंट्स ने हमेशा मुझे मेरे माइंड सेट को स्ट्रोंग रखने की सलाह दी है. शुरू से ही कैमरे के ऑन होते ही मैं अपने संघर्ष के सब कुछ भूल जाती हूँ. मैंने कभी सोचा नहीं था कि मैं यहाँ तक पहुँच सकती हूँ, लेकिन धीरे – धीरे थिएटर ज्वाइन करने के बाद लगा कि मैं कुछ कर सकती हूँ. पेरेंट्स ने मुझे कभी मना नहीं किया, हमेशा सहयोग दिया. मैंने जॉब कर अपना बैंक बैलेंस बनाया, फिर एक्टिग में आई, मेरे हिसाब से हर न्यू कमर को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वे एक्टिंग में अवश्य आये पर पढ़ाई पूरी कर अपना बैंक बैलेंस लेकर ही आये, तभी वे आगे बढ़ सकते है.

फूडी नहीं

श्रुति बहुत अधिक फूडी और फैशनेबल नहीं है, वह अपनी फिटनेस का बहुत ध्यान रखती है, ताकि वह मोटी न हो जाय. वह नियमित जिम जाती है, मीठा नहीं खाती, चावल पसंद है, पर नहीं खाती. इसके अलावा समय मिलने पर श्रुति डायरी लिखती है, ताकि किसी प्रकार की तनाव को कम किया जा सकें.

गणतंत्र दिवस के अवसर पर श्रुति का कहना है कि संविधान और कानून को फोलो करना हर नागरिक का कर्तव्य होता है, इससे ही देश में शांति बनी रहती है और मैं भी इसे हमेशा मानती हूँ.

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