ब्रेकफस्ट में बनाएं फ्रेंच सैंडविच

अकसर हम सुबह की शुरुआत एक कप चाय से करते हैं. कई बार एक अच्छे चाय के कप से अगर दिन की शुरुआत हो तो पूरा दिन अच्छा बीतता है. पर अगर शुरुआत टेस्टी ब्रेकफस्ट से हो तो भी दिन खुशनुमा रहता है. ब्रेकफस्ट में बनाएं फ्रेंच सैंडविच, आप भी खुश और बच्चे भी खुश.

सामग्री

– 1 बड़ा पैकेट सैंडविच ब्रेड

– 100 ग्राम चीज

– 250 ग्राम खीरा (छोटे आकार का)

– 250 ग्राम टमाटर

– धनिया पत्ती बारीक कटी हुई

– टोमेटो सॉस

कितने लोगों के लिए : 6

विधि

टमाटर, खीरे को पतले-पतले स्लाइस में काट लें. ब्रेड के एक स्लाइस पर सॉस लगाएं. इस पर टमाटर खीरे की सलाइस लगाएं. ऊपर से बारीक कटा धनिया छिड़क लें. इसके ऊपर ब्रेड का दूसरा स्लाइस रखें. इस के ऊपर चीज के पतले-पतले स्लाइस रखकर ब्रेड की तीसरी स्लाइस रखें.

अब इस पर या तो टोमैटो सॉस लगाएं और 4 या 6 स्लाइस करके खायें. आपका फ्रेंच सैंडविच तैयार है.

प्रेग्नेंसी के बाद बढ़े वजन को ऐसे करें कम

प्रेग्नेंसी के बाद वजन घटाना एक बड़ी चुनौती होती है. आमतौर पर प्रेग्नेंसी के बाद महिलाओं का वजन बढ़ जाता है और आपकी लाख कोशिशों के बाद भी वो अपना वजन कम नहीं कर पाती. इस खबर में हम आपको उन तरीकों के बारे में बताएंगे जिनकी मदद से आप प्रेग्नेंसी के बाद भी अपना वजन कम कर सकेंगी.

खाना और नींद रखें अच्छी

आपको बता दें कि तनाव और नींद पूरी ना होने से कई तरह के रोग हो जाते हैं. इसके अलावा आप बाहर का खाना बंद कर दें. घर का बना खाना खाएं और पर्याप्त नींद लें. स्ट्रेस ना लें. खुद को कूल रखें.

बच्चे को कराएं ब्रेस्टफीड

मां का दूध बच्चों के लिए अमृत रसपान

आपको ये जान कर हैरानी होगी पर ये सच है कि ब्रेस्टफीड कराने से महिलाओं के वजन में तेजी से गिरावट आती है. और इस बात का खुसाला कई शोधों में भी हो चुका है. ब्रेस्टफीड कराने से शरीर की 300 से 500 कैलोरी खर्च होती है. कई जानकारों का मानना है कि स्तमपान कराने से महिलाओं का अतिरिक्त वजन कम होता है.

 खूब पीएं पानी

diet to loose weight

पानी पीना वजन कम करने का सबसे आसान तरीका है. अगर आप सच में अपना वजन कम करना चाहती हैं तो अभी से रोजाना 10 से 12 ग्लास पानी पीना शुरू कर दें.

टहला करें

प्रेग्नेंसी के बाद वजन कम करने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप वौक शुरू करें. कई रिपोर्टों में भी ये बाते सामने आई है कि प्रेग्नेंसी के बाद वजन घटाने के लिए जरूरी है टहलना.

गहराता शक: भाग 3-आखिर कुमुद को पछतावा क्यों हुआ?

कुमुद कुछ नहीं बोली. बोलने को अब बचा ही क्या था. विवाह के बाद वर्षों तक प्रत्येक नारी के अचेतन मन में जिस स्थिति के आ धमकने का सतत भय समाया रहता है, वही शायद आ पहुंची है.

अपनी समस्त कुंठाओं और प्लावन के साथ, जिस में सबकुछ बह जाता है. उसे अपनी शक्तियां बटोरनी चाहिए. पर किस के विरुद्ध. रघु के? सोमेन के या स्वयं अपने? इस मूर्ख, बेहूदे छोकरे सोमेन को यह क्या सूझ. क्यों निरर्थक बकवास करने आ धमका? रत्तीभर अक्ल नहीं है उसे. पर उस का भी क्या दोष.

पासपड़ोस का कोई बचपन की मुंहबोला दोस्त अपनी बचपन के दोस्त की ससुराल जा कर मिले ही नहीं. खुल कर बचपन की बातें न करे. यह कैसी विकृति है कि इस संबंध को सदैव गलत ही समझ जाए. दोषी रघु है. वही अपने मन में विकृतियां पाले हुए है. उसे अपने पुरुष भाव का बड़ा अहंकार है. वह इतने संकीर्ण मन का है, यह कुमुद को पहले क्या पता था.

और तुम? महामूर्ख हो, कुमुद. जब कोई बात ही नहीं तो यह अपराधियों सा सहमना, बिना पूछे रघु को सफाई देने की चेष्टा, यह सब क्या है? क्या सचमुच तुम्हारे मन में भी चोर है? रघु ने चोर की दाढ़ी में तिनका देखा तो वह क्या करे? वह भी तो आदमी है, पति है.

हम लाख आधुनिक बनें, दोनों कमाऊ हों नरनारी का रिश्ता वही आदिम बना रहेगा. पुरुष अपनी जागीर में किसी का रत्तीभर हस्तक्षेप सहन नहीं कर सकता, उसे भड़का देने में कैसीकैसी अजीब सी स्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं, चाहे बात कुछ भी न हो, पर…

उसे विवशताजन्य क्रोध चढ़ आया. सब पर, अपने पर, रघु, सोमेन, नीता, सब पर. ग्लानि हुई अपनी कमजोरी पर, असुरक्षा पर. दैन्य दिखाने की जरूरत थी ही कहां.

रात की धुंधली ओस लान पर उतरने लगी. मलगजा सा प्रकाश फाटक के आसपास सड़क पर फैल गया.

तभी सामने गेट पर कोई भीतर आता देखा. रघु नहीं हो सकता. वह तो कार में आता है. कुमुद को बरामदे में बैठना ठीक नहीं लगा. वह ड्राइंगरूम में टीवी के पास आ बैठी जहां कोई बेकार सा सासबहू वाला सीरियल चल रहा था.

नीता के कमरे से हलकी, मीठी आवाज में टेपरिकौर्डर का संगीत आ रहा था, ‘‘नाहि आए घनश्याम घिर आई बदरी… हां… आ… आ. फिर आई बदरी…’’

कुमुद के होंठ विद्रूप से मुड़ गए. बड़ी व्याकुलता हो रही है, घनश्याम नहीं आए तो. आएंगे तो क्या यह पूछताछ नहीं करेंगे कि बोल, मेरे पीछे यहां कौन आया था? वह तेरा कौन लगता है? क्याक्या बातें हुईं? उस ने तुझे छुआ भी? यदि हां, तो कहां? कैसे?

एक हलकी हंसी की आवाज से वह चौंक पड़ी. देखा सामने सोमेन खड़ा था. उसे आघात सा लगा कि यह यहां कैसे आ टपका.

सोमेन सदा की तरह हंसता हुआ बोला, ‘‘किस के ध्यान में हैं, देवीजी?’’

कुमुद ने नीता के कमरे की ओर दृष्टिपात किया. गला दबा कर कटु स्वर में बोली, ‘‘सोमेन, तुम्हें मु?ा से क्या दुश्मनी है?’’

सोमेन की हंसी में एकाएक जैसे ब्रेक लग गया. सालभर पहले का दब्बू सोमेन जैसे फिर से सामने आ खड़ा हुआ. कुछ हकलाता सा बोला, ‘‘कैसी दुश्मनी? क्या कह रही हो?’’

‘‘तुम्हें जिंदगी में कभी भी अक्ल नहीं आएगी क्या?’’ कुमुद का सारा दबा क्षोभ अवसर पा कर उमड़ने लगा, ‘‘यहां क्यों आते हो. बाजार में एक बार भेंट होना काफी नहीं था क्या?’’

सोमेन अवाक खड़ा रहा.

कुमुद का दबा क्षोभ उफन कर निकलता रहा, ‘‘तुम्हें, मुझे यहां वाले नहीं जानतेसमझाते.

मैं ने तो तुम्हें सदैव अपना भाई सा समझ है. पर संसार ऐसी भावना को मान कर नहीं चलता. वह इसे भी अपने अनोखे चश्मे से देखता है.

क्या इतनी सी बात नहीं समझते तुम? यहां से चले जाओ और फिर कभी मत आना. अपनी बेकार की बातों से शंका के जो बीच बो गए हो देखूं रघु के मन से उन्हें दूर कर पाती हूं या नहीं.’’

सोमेन चुपचाप लौटने लगा. बोला, ‘‘ठीक कहती हो, मेरी गलती से तुम्हें कष्ट हुआ, माफ करना. मैं जाता हूं.’’

कुमुद ने जरा विगलित कंठ से कहा, ‘‘सुनो, सोमेन. इस में मेरा दोष न समझना. मेरे लिए तो तुम वही भाई के बराबर हो.’’

सोमेन बाहर निकल गया. थोड़ी देर बाद कुमुद बाहर आई. बरामदे में अंधेरा था. बल्ब कैसे बुझ गया. उस

ने स्विच दबाया. बत्ती जलते ही वह चौंक पड़ी. यह कौन है. देखा रेघु बरामदे की आरामकुरसी पर बैठा मोबाइल से खेल रहा था. कुमुद काठ हो गई.

रघु ने बिना आंखें उठाए जैसे मोबाइल से कहा, ‘‘हो गया डायलौग खत्म. संवाद तो बड़े शानदार, चुटीले और विश्वासजनक रहे. किस मुंबइया सीरियल से चुने? पर आश्चर्य है, तुम लोगों को कैसे पता लगा कि मैं यहां आ कर बाहर बैठ गया हूं?’’

मम्मियां: आखिर क्या था उस बच्चे का दर्द- भाग 1

स्कूल वैन का ड्राइवर कनुभाई शायद अपनी नींद पूरी न हो पाने की खी?ा गाड़ी का हौर्न बजाबजा कर उतार रहा था. सुबह के 6 बज कर 10 मिनट हो चुके थे, दांत किटकिटा देने वाली ठंड थी और अंधेरा छंटा नहीं था. किंतु पूर्व में क्षीण लालिमा सूर्य के आने पूर्व सूचना दे रही थी. आकाश गहरा नीला था जिस में चंद्रमा और हलके होते तारे अब भी देखे जा सकते थे.

इतना सुंदर दृश्य और ये हौर्न की कर्कश आवाज, सोचते हुए तनूजा गेट की ओर जाने लगी, तो फिर हौर्न की तेज आवाज कानों में पड़ी. वह वैन के पास पहुंचते ही बोली, ‘‘अरे कनुभाई, क्यों सुबहसुबह इतनी जोरजोर से हौर्न बजा रहे हो? आ रहे हैं बच्चे.’’ ‘‘क्या करूं मैडम. अभी 5 अलगअलग जगहों से बच्चों को लेना है और 7 बजे से पहले उन्हें स्कूल पहुंचना है. नहीं तो मेन गेट बंद हो जाएगा.’’

उस का कहना भी सही था. देर से आने वाले बच्चों को पूरा 1 पीरियड, सजा के तौर पर बाहर ही खड़े रहना पड़ता है. इस से तो बेहतर है कि हौर्न से कर्णभेदी ध्वनि पैदा की जाए जिस से चौंक कर उनींदे बच्चे भी दौड़ें. तनूजा के बच्चे तन्मयी व तनिष्क फुरती से दौड़ कर वैन में बैठ
गए.

‘‘बाय मम्मी.’

‘‘बाय बच्चो, हैव ए नाइस डे.’’

फिर हाथ हिलाते हुए तनूजा वैन के ओ?ाल हो जाने तक वहीं खड़ी रही.

तन्मयी और तनिष्क ने जब से स्कूल जाना शुरू किया है तभी से तनूजा के हरेक दिन का शुभारंभ यहीं से होता है. इस के बाद 45-50 मिनट की मौर्निंग वाक और फिर वापस घर. 6.20 हो गए थे, डीपीएस की स्कूल बस के आने का समय हो गया था.

सामने से शांतिजी आ रहीं थीं, अपने पुत्र का लाल, भारीभरकम बैग दाएं कंधे पर लादे. कमर आगे को इतनी ?ाकी हुई मानो मन भर वजन रखा हो पीठ पर. गले में सामने की ओर टंगी वाटर बौटल और दूसरे हाथ में बेटे बिल्लू का हाथ कस कर पकड़े हुए.

बिल्लू को आप 3-4 साल का मुन्ना राजा सम?ाने की भूल कतई न कीजिएगा. वह 9वीं कक्षा में है और बस 3 माह बाद ही 10वीं में होगा. हलकीहलकी मूंछें आ रही हैं और डीलडौल ऐसा कि बैग सहित अपनी मम्मी को भी उठा ले. किंतु क्या करें, शांतिजी का मातृप्रेम बिल्लू की साइज से कहीं अधिक विशाल है.
वैसे शांतिजी सिर्फ नाम की ही शांति हैं. बोलती तो वे इतना हैं कि पूछिए मत.

बस 2 मिनट के अंतराल पर ही आएंगी उन की परम सखी नमिता अपनी दोनों पुत्रियों को छोड़ने के लिए जो डीपीएस में ही पढ़ती हैं. बड़े प्यारे नाम हैं दोनों के, चंद्रकला और चंद्रलक्ष्मी. नमिताजी पहले ही आ जाती हैं और बस को आता देख पूरी ताकत से अपनी बेटियों का नाम ले कर चिल्लाती हैं कि बस आ गई. मानना पड़ेगा कि दम है उन की आवाज में. नीचे से चौथी मंजिल तक आवाज पहुंच जाती है और छोटे कद की, छोटीछोटी आंखों और बड़े से चेहरे वाली, गोरीगोरी उन की बेटियां नीचे आ जाती हैं.

लेकिन नमिता शांति की तरह अपने बच्चों के बैग लादे नहीं आतीं. सिर्फ वाटर बौटल पकड़े आती हैं. उन की छोटीछोटी आंखों में काजल की गहरी रेखाएं खिंची होती हैं. साथ ही पाउडर की एक पतली परत और विचित्र सी गंध वाला डिओ जिस से पास से गुजरती तनूजा को छींक आने लगती है, तो वह तेज गति से चलने लगती है.

नमिता और शांति की गहरी मित्रता है. बच्चों को बस में बैठा कर वे निकल पड़ती हैं अपनी गप यात्रा पर, जिस के लिए उन्हें मंथर गति से मौर्निंग वाक करनी होती है. समयसमय पर उन की गति मंद से मंदतर होती रहती है.

अब तेज गति से चलेंगी तो बातें पूरी कैसे होंगी 2 राउंड लगाने में? उन्हें ऐडजस्ट भी तो करना है.
कभीकभी उन के वार्तालाप से कुछ शब्द अपने क्षेत्र से बाहर निकल तनूजा के कानों में चले आते. अभी परसों ही शांति नमिता से कह रही थीं, ‘‘हम ने तो बिल्लू के लिए ट्यूशन टीचर के यहां बुकिंग करा दी है, तुम ने करा ली?’’

‘‘बुकिंग उन के पास बुकिंग करानी पड़ती है क्या?’’ नमिता ने अचरज से पूछा. ‘‘और नहीं तो क्या, अब तो भइया बुकिंग सिस्टम है, जब बच्चा 9वीं में हो तभी से 10वीं के ट्यूशन के लिए टीचर के पास बुकिंग करानी
पड़ती है. मैं ने मैथ्स के लिए थौमस सर, साइंस के लिए हांडा मैडम और इंगलिश के लिए गौड़ मैडम के पास बिल्लू के लिए बुकिंग करा ली है,’’ शांतिजी धाराप्रवाह बोल रही थीं.

नमिता थोड़ी हताश लग रही थीं. आखिर कैसे पीछे रह गईं वे शांति से? चंद्रकला बिल्लू की ही कक्षा में थी. इतने में ही नहीं रुकी शांतिजी, ‘‘अब खाली हिंदी और सोशल साइंस का रह गया है, वह भी करा दूंगी. तुम भी चंद्रकला के लिए जल्दी से बुकिंग करा लो वरना सीट नहीं मिलेगी किसी भी ट्यूटर के पास.’’
‘‘हां शांति, आज ही जाऊंगी मैं.’’

ट्यूशन में भी सीट का रोना है सोचते हुए हंसी आ गई थी तनूजा को. यों तो ट्यूशनों से उसे कोई शिकायत नहीं थी, किंतु जिस तीव्र गति से ये ट्यूशनें बच्चों का खेलनेकूदने का समय खाए जा रहीं थीं, उन की कल्पनाशक्ति का विकास कुंद बनाए दे रहीं थीं, इस की वह घोर विरोधी थी. बच्चा 6-7 घंटे पढ़ कर स्कूल से थकामांदा लौटे, जल्दीजल्दी किसी तरह भोजन के निवाले मुंह में ठूंसे, तभी मम्मियों की चीखपुकार शुरू
हो जाती है कि जल्दी करो… ट्यूशन का टाइम हो गया. औटो वाला आता ही होगा.

बेचारे बच्चे सांस भी नहीं ले पाते. ट्यूशन पढ़ कर जब वे लौटते हैं तो शाम के 7-8 बज जाते हैं. फिर होमवर्क, ट्यूशन का होमवर्क कभीकभी कोई प्रोजेक्ट. और भी बहुत कुछ. इस सब के बाद मातापिता की ऊंची अपेक्षाओं का दबाव.

आज की जेनरेशन तो बहुत मैटीरियलिस्टिक है. बस इन्हें मोबाइल, आईपौड या लैपटौप दे दो फिर इन्हें किसी की जरूरत नहीं. ओहो, ये सब क्या सोचने लगी मैं फिर से, सिर ?ाटकते हुए कहा तनूजा ने फिर तेजी से चलने लगी.

6.45 हुआ ही चाहते थे. अब आएगी डिवाइन बड्स की पीली मिनी बस. सामने से आ रहा था प्यारा सा अक्षय अपनी मम्मी की उंगली थामे व टैडीबियर के आकार का बैग अपनी पीठ पर टांगे. गोरा, गोलमटोल, घुंघराले बालों वाला अक्षय बहुत आकर्षक था. अपनी चमचमाती सफेद यूनिफौर्म और पौलिश से दमकते काले जूतों में और भी प्यारा लगता.

अक्षय की मम्मी अर्चना ऊपर बताई गई दोनों मम्मियों से भिन्न थी. वेशभूषा से आधुनिक, गंभीर संभ्रांत महिला. तनूजा और उस के बीच एक मुसकराहट के आदानप्रदान का रिश्ता है. कभीकभी प्यार से अक्षय का कंधा थपथपा कर तनूजा कहती, ‘‘गुड मौर्निंग अक्षय,’’ तो वह शरमा कर मम्मी से लिपट जाता.
बस में बैठ अक्षय स्कूल चला गया और अर्चना घर. शांति और नमिता की मंदगति की सैर अभी चल रही थी, जिसे देख कर तनूजा को हंसी आ गई. लेकिन हंसी को बीच में ही रोकना पड़ा, क्योंकि दोनों पास आ गई थीं.

बस अब 10 मिनट ही बचे हैं तनूजा की सैर के. इस में वह ब्रिस्क वाक करती है.
6.55 हो चुके हैं, अब चिल्ड्रेंस ऐकेडमी की बस आने का समय हो गया है. सामने से आ रहे थे जुड़वां भाईबहन सुरभि व समरेश अपनी मम्मी हेमा के साथ. दोनों छठी में पढ़ते हैं. हेमा व्यस्त कामकाजी महिला है और बमुश्किल 33 साल उम्र की होगी. बच्चों को बस में बैठा उसे भी औफिस जाने की तैयारी करनी होती होगी. शायद इसीलिए कभी गाउन, कभी मिडी तो कभीकभी नाइटसूट में ही नीचे आ जाती. कभीकभी नाइटसूट पर ऐप्रन बांधे ही आ जाती. सांस लेने की भी फुरसत नहीं है, उसे देख कर यही लगता था.

सुरभि, समरेश दोनों हाथों में कभी टोस्ट, कभी सैंडविच, कभी परांठा पकड़े आते और चलतेचलते खातेखाते बस में बैठ जाते. अभी परसों ही सुरभि की बहती नाक हेमा ने बड़े ही प्रेम से अपनी स्वैटर की बांह से साफ कर दी थी. लंबे, रेशमी बालों की चोटी, तीखे नाकनक्श और सुनहरे फ्रेम का चश्मा लगाने वाली हेमा तनूजा को बहुत भाती थी. कोई दिखावा नहीं, कोई कृत्रिमता नहीं, सहज, सरल. साइड से कटे गाउन में से टांग दिख रही है तो दिखती रहे, कोई देख रहा है तो देखता रहे. रुमाल नहीं मिल रहा तो स्वैटर या दुपट्टे से भी नाक साफ हो सकती है.

शाम को औफिस से आ कर बच्चों का होमवर्क, डिनर निबटातेनिबटाते रात के 12 बज जाते हैं. नींद देर से खुलती है तो बच्चों को तैयार करने में देर हो जाती है. अब नाश्ता टेबल पर करें या चलतेचलते क्या फर्क पड़ता है, अकसर उस के ये अनकहे शब्द तनूजा को सुनाई दे जाते. और चिल्ड्रेंस ऐकेडमी अन्य स्कूलों से विपरीत दिशा में था, अत: सड़क पार जाना होता था उन्हें. अपनेअपने बैग अपनी पीठ पर लादे उन दोनों का हाथ पकड़ कर सड़क पार कराती हेमा बीच में रहती थी और गले में भोलेनाथ के सर्प सी लिपटी पानी की 2 बोतलें डाले रहती थी.

7 बज चुके हैं. अब अंतिम राउंड तनूजा की वाक का. और अब सिर्फ भूमिका का आना शेष था. 12वीं की छात्रा भूमिका हीरामणि विद्यालय की छात्रा. जितनी खूबसूरत उतनी ही मोटी भी. बड़ी नाइंसाफी थी ये. धीरे से तनूजा के पास से गुजरती और मुसकराते हुए ‘नमस्ते आंटीजी’ कह कर निकल जाती. उस के नमस्ते के बाद तनूजा की वाक को पूर्णविराम और वह अपने घर.

पिछले कई हफ्तों से तनूजा के इस दैनिक अध्याय में एक अधूरापन सा आ गया था. नन्हा अक्षय कई दिनों तक स्कूल जाने के लिए नहीं आया. डिवाइन बड्स की पीली मिनी बस रोज आती हौर्न बजाती 5 मिनट उस की प्रतीक्षा करती फिर उस के न आने पर चली जाती. एक दिन अक्षय आता दिखा कमजोर, पीला सा. अर्चना साथ नहीं थी. एक धीरेधीरे चल रही बुजुर्ग महिला थी साथ में. शायद उस की दादी थीं. कुछ
गुमसुम सा अक्षय उन से भी धीमी चाल से चल रहा था. उस की चमचमाती यूनिफौर्म और दमकते जूते, जिस में वह और भी प्यारा लगता था कुछ अलग ही स्थिति में थे. यूनिफौर्म मुड़ीतुड़ी बिना इस्तिरी की और धूलधूसरित जूते. शायद अर्चना बीमार है, तनूजा ने सोचा.

फिर अक्षय की पीठ थपथपा कर पूछा, ‘‘मम्मी ठीक हैं आप की?’’ प्रत्युत्तर में वह चुपचाप देखता रहा. न पहले की तरह शरमाया, न कुछ बोला. उस की दादी ने हाथ पकड़ कर खींच लिया, ‘‘छेत्ती चल पुत्तर, नई ते बस छुट जानी है,’’ कुछ अजीब व्यवहार लगा तनूजा को उन का.

फिर कई सुबहें बीत गईं. सभी बच्चे क्रमानुसार आते, अपनी मम्मियों की उंगली थामे किंतु अर्चना दिखाई नहीं दी. अक्षय कभी दादी, कभी दादाजी, तो कभी अपने पापा के साथ नीचे आता. कभीकभी 2-3 दिन स्कूल आता ही नहीं. जब भी आता अकेले ही चलता. बिना किसी की उंगली थामे. चेहरे पर खुशी नहीं, चाल में कोई उत्साह नहीं. एकदम मुर?ाया सा. उस का टैडीबियर वाला बैग मानो बहुत भारी हो गया था,
जिस का बो?ा वह उठा नहीं पा रहा था. उस की आंखों में कई प्रश्नों के साथ बहुत पीड़ा भी नजर आती. किसी के पास इतना समय नहीं था कि उस बच्चे में हो रहे परिवर्तनों पर ध्यान देता. सभी अपने में व्यस्त थे, दूसरे के विषय में कौन सोचे.

तनूजा एक संवेदनशील महिला है इसलिए अकसर सोच कर दुखी होती कि क्या हो गया है अक्षय को. अर्चना के विषय में भी कुछ पता नहीं चल रहा. धीरेधीरे 2 महीने हो गए थे. तनूजा की अब न तो शांति और नमिता की बातचीत में कोई दिलचस्पी थी न ही गांगुलीजी के विचित्र ड्रैसिंग सैंस में. तनूजा का सारा ध्यान अब अक्षय पर ही केंद्रित था. शाम को सभी छोटेबड़े बच्चे पार्क में खेलते थे. उन का खेलना, ?ागड़ना, फिर मनाना तनूजा अकसर देखा करती थी अपनी बालकनी से.

स्पैनिश फिल्म ‘‘चैम्पियन’’ की रीमेक से आमीर खान की अभिनय में होगी वापसी…??

बौलीवुड में ‘मिस्टर परफैक्शनिस्ट’ कहे जाने वाले अभिनेता आमीर खान हर फिल्म व किरदार का चयन काफी सावधानी से करते हैं.इसीलिए उनकी ज्यादातर फिल्में सफल होती रही हैं.उनकी कुछ फिल्मों को कुछ वजहों से सफलता नसीब नहीं हुई,मगर 2018 में प्रदर्शित तीन सौ करोड़ से अधिक के बजट की फिल्म ‘‘ठग्स आफ हिंदुस्तान’’ ने जब बाक्स आफिस पर पानी नहीं मांगा और फिल्म आलोचकों ने भी इस फिल्म की कटु आलोचना की,तो आमीर खान ने अभिनय से दूरी बना लेने का ऐलान कर दिया.

मगर वह छह माह भी अपने इस ऐलान पर कायम न रह पाए और 2019 में कहा कि वह ‘लाल सिंह चड्ढा’ में नजर आएंगे.अपने सहायक अद्वैत चंदन के निर्देशन में आमीर खान ने स्वयं इस फिल्म का निर्माण भी किया. 180 करोड़ की लागत से बनायी गयी यह फिल्म 11 अगस्त 2022 को सिनेमाघरों में पहुॅची, तो यह फिल्म अपनी लागत से आधी रकम ही इकट्ठा कर पायी. तब एक बार फिर आमीर खान ने ऐलान किया कि वह अब कुछ समय के लिए फिल्म इंडस्ट्री से दूर रहेंगे. जबकि वह अंदर ही अंदर नई फिल्मों की तैयारी करते रहे.अचानक एक साल बाद अगस्त 2023 में आमीर खान ने सोशल मीडिया पर घोषणा की कि वह राज कुमार संतोषी के निर्देशन में ‘‘लाहौर 1947’’ के अलावा अन्य चार फिल्मों का निर्माण करने की योजना पर काम कर रहे हैं.

अब खबर है कि आमीर खान 29 जनवरी 2024 को स्पैनिश फिल्म ‘‘चैंम्पियन’’ की आधिकारिक रीमेक फिल्म से अभिनय में कदम रखेंगें.

स्पैनिश फिल्म ‘‘चैम्पियन’’ स्पैन में 6 अप्रैल 2018 को प्रदर्शित हुई थी. इस स्पोर्ट्स फिल्म ने अपनी लगात से छह गुना ज्यादा कमायी की थी. जिसका निर्देशन जावियर फेसर ने किया था. बाद में हौलीवुड निर्देशक बाबी फारेल्ली ने इसका अंग्रेजी भाषा में रीमेक किया,जो कि अमरीका में  दस मार्च 2023 को प्रदर्शित हुई थी. अब इसका हिंदी वर्जन भारत प्रसन्ना निर्देशित करेंगें. इसमें आमीर खान एक गुस्सैल कोच का किरदार निभाने वाले हैं. इसकी शूटिंग 29 जनवरी 2024 से मुंबई में शुरू होगी. मजेदार बात यह है कि पहले इस फिल्म में सलमान खान के होने की खबरें गर्म थीं. उसके बाद रणबीर कपूर के नाम की चर्चा हुई थी. पर बात नही बनी तब यह फिल्म फरहान अख्तर को आफर हुई थी.सूत्र बताते हैं कि इन तीनों कलाकारों ने इस किरदार को निभाने से मना कर दिया.

तब इस फिल्म से आमीर खान जुड़े.सूत्र बता रहे हैं कि अब इस फिल्म की पटकथा पर नए सिरे कस काम किया जा रहा है,तो वहीं अन्य किरदार के उपयुक्त कलाकारों का चयन करने के लिए औडीशन भी लिए जा रहे हैं. फिल्हाल इस फिल्म की अभी तक आधिकारिक घोषणा नही की गयी है. सूत्र बताते हैं कि पटकथा को अंतिम रूप देने और सभी कलाकारों का चयन किए जाने के बाद ही इस फिल्म के शुरू होने की आधिकारिक घोषणा की जाएगी.

आमीर खान के ‘चैंम्पियन’ का हिस्सा बनने पर बौलीवुड में कई तरह की चर्चांएं हो रही हैं. एक तबका सवाल उठा रहा है कि जिस किरदार के लिए सलमान खान,फरहान अख्तर व रणबीर कपूर से बात की गयी हो,क्या उस किरदार में आमीर खान फिट बैठेंगे? कुछ लोग सवाल कर रहे हैं कि आमीर खान इससे पहले  अमरीकन फिल्म ‘‘फारेस्ट गम’ का हिंदी रीमेक ‘‘लाल सिंह चड्ढा’ का निर्माण और उसमें शीर्ष भूमिका निभाकर सब कुछ गुड़ गोबर कर चुके हैं. कहीं वह इस बार भी ऐसा न कर दें,क्योकि सभी जानते हैं कि आमीर खान निर्देशक के काम में हस्तपक्षेप करने से बाज नही आने वाले.

जबकि एक तबका दावा कर रहा है कि ‘मिस्टर परफैक्शनिस्ट’ आमीर खान किसी भी किरदार में खुद को ढालने में सक्षम हैं.

Jaggery Benefits: सर्दियों में इस तरह से खाएं गुड़, मिलेंगे ये 5 जबरदस्त के फायदे

Jaggery Benefits in winter: गुड़ स्वाद का ही नहीं बल्कि सेहत का भी खजाना है ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि अक्सर डॉक्टर मीठे खासतौर पर चीनी खाने से मना करते है लेकिन गुड़ के साथ ऐसा बंधन नहीं है. गुड़ खाने मे टेस्टी होता है साथ ही इसमें कई पोषक तत्व पाए जाते है. गुड़ स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है. गुड़ में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट और भी कई गुड़ मौजूद होते है जो शरीर को हेल्दी रखने में मदद करते है. ठंड के मौसम में खाली पेट गुड़ खाने से कई फायदे होते हैं. आइए जानते हैं.

  1. ब्लड प्रेशर

ब्लड प्रेशर मरीजों के लिए सर्दियों में गुड़ का सेवन करना बेहद फायदेमंद होता है. इसमें कैल्शियम, फास्फोरस, मैग्नीशियम, पोटेशियम, आयरन समेत कई सारे पोषक तत्व पाए जाते हैं. रोज खाली पेट गुड़ खाने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल होता है.

2. एनिमिया

गुड़ में काफी मात्रा में आयरन और फॉलेट पाया जाता है. जिन लोगों के शरीर में खून की कमी रहती है उनकों खाली पेट गुड़ खाना जरुरी है. इसके खाने से शरीर में कभी भी आयरन की कमी नहीं होती.

3. हड्डियों के लिए

गुड़ में प्रचुर मात्रा में कैल्शियम और आयरन पाया जाता है जो हड्डियों को स्ट्रांग करता है. हड्डियों से जुड़ी कई बीमारियों से परेशान लोगों को इसका सेवन करना चाहिए. इससे हड्डियां मजबूत होती है और जोड़ो के दर्द में भी राहत होती है.

4. आलस होता है दूर

ठंड के मौसम में हम सभी बेहद आलसी हो जाते है. ठंड की वजह से बिस्तर में ही पड़े रहते है और काम करने में आलस आता है. गुड़ में भरपूर मात्रा में कार्बोहाइड्रेट होते हैं जो शरीर का आलस और थकान दूर कर इंस्टेंट एनर्जी देते हैं. रोज खाली पेट गुड़ का सेवन करने से पूरे दिन एनर्जी बनी रहती है और खुद तरोताजा महसूस करते है.

5. पेट संबंधी बीमारियां होती है दूर

बता दें कि, गुड़ में फ्रुकटोज नामक नेचुरल शुगर पाई जाती है जो पेट के लिए काफी अच्छी होती है इसके सेवन से पेट के एंजाइम एक्टिव होते हैं. रोज गुड़ खाने से पेट संबंधी बीमारियों जैसे – अपच, कब्ज, पेट दर्द दूर रहता है.

Winter special: अपनी स्किन की परेशानी को समझते हुए करें सही बॉडी लोशन का प्रयोग

सर्दियाँ शुरू होते ही हमारी स्किन हमसे रूठने जैसा व्यवहार करने लगती है क्योंकि हम अपनी त्वचा को मौसम के हिसाब से  सही पोषण नहीं दे रहे होते. जिस तरह हम  मौसम के हिसाब से अपने खान पान में बदलाव करते हैं उसी तरह हमारी त्वचा को भी मौसम के अनुसार देखभाल की जरूरत होती है सर्दियों की सर्द हवाओं से  हमारे शरीर की नमी खोने  लगती है जिस कारण हमारी त्वचा रूखी व बेजान सी हो जाती है इसलिए जरूरी है कि  हमें अपनी त्वचा की जरूरत को समझते हुए सही लोशन का इस्तेमाल करना चाहिए. स्वस्थ स्किन के लिए अच्छे खान पान के साथ साथ हमें अच्छे कॉस्मेटिक प्रोडक्ट का प्रयोग बहुत जरूरी है  जिसमें से एक है बॉडी लोशन. लोशन ना सिर्फ स्किन को मुलायम बनता हैं बल्कि आपकी स्किन टोन में सुधार करता हैं और बॉडी को ग्लोइंग बनता है.

जांचे अपनी स्किन टाइप

आमतौर पर हमारी स्किन ड्राई, सेंसिटिव, ऑयली, लाइट या डार्क होती है लेकिन इसके आलावा किसी को  ऐक्ने की परेशानी तो किसी  की स्किन, पिंपल युक्त ,ब्लैक और वाइटहेड्स प्रोन स्किन इत्यादि कि समस्या रहती है. जिसे सही पोषण देने के लिए हमें  बॉडी मॉश्चराइजर की मदद लेनी होती है ये  मॉइश्चराइज बड़ी ही आसानी से मार्किट में उपलब्ध मिलते हैं. ध्यान रखें की  दिन के लिए लाइट मॉश्चराइज़र और रात के लिए हैवी मॉश्चराइज़र का इस्तेमाल करना चाहिए.

 स्किन टाइप के लिए परफेक्ट

ऑयली स्किन के लिए -ऐसी स्किन के लिए लाइटवेट या फिर वॉटर बेस्ड क्रीम और बॉडी लोशन का इस्तेमाल करना चाहिए.  ये बॉडी लोशन आपके रंग को भी निखारते हैं लोशन खरीदते समय ध्यान दे की वह अल्फा-हाइड्रॉक्सी एसिड युक्त हो यह आपकी त्वचा पर तेल का बैलेंस बनाने व स्किन को बैक्टीरिया फ्री रखने में सहायक होते हैं. जिस कारण  जल्दी से कील मुहासे भी नहीं हो पाते ।ऑयली स्किन के लिए जेल बेस्ड मॉश्चराइज़र बेस्ट होते हैं।वैसलीन इंटेंसिव केयर कोको ग्लो ,सेंट डी’वेंस विंटर एडिशन ,वाओ स्किन साइंस एलोवेरा बॉडी लोशन हैं आपके लिए  बेस्ट.

 ड्राय स्किन के लिए

ड्राय स्किन के लिए  लोशन का चयन करते समय  ध्यान रखें की लोशन ऐसा हो कि जल्दी से स्किन में एब्जॉर्ब हो जाए. ऐसे  लोशन में हायल्यूरोनिक एसिड और डाइमेथिकॉन होता है जिससे स्किन हाइड्रेट रहती है इसके लिए आप ग्लिसरीन, प्रोपलीन ग्लाइकोल, प्रोटीन और यूरिया युक्त बॉडी मॉश्चराइजर का चुनाव कर सकते हैं.

काया स्किन क्लिनिक डेली लोशन ,निविया स्मूथ मिल्क लोशन,VLCC आलमंड नरीशिंग ब्राइटनिंग लोशन,वैसलीन एलो फ्रेश हाइड्रेटिंग लोशन,जॉय प्योर मल्टी परपस बॉडी लोशन देंगे आपको सॉफ्ट स्किन.

सेंसिटिव स्किन के लिए

अगर स्किन संवेदनशील है, तो हाइपोएलर्जेनिक, विटामिन-ई और सुगंध युक्त लोशन का उपयोग करें. सेरावे डेली मॉइस्चराइजिंग लोशन,शाबेस प्लस मॉइश्चराइजर, मामा अर्थ लोशन एंड क्रीम हैं आपके लिए बेस्ट.

नॉर्मल स्किन के लिए

नॉर्मल स्किन वालो के लिए यह बहुत अच्छी बात होती है की वे किसी भी तरह के लोशन का प्रयोग कर  सकते हैं लेकिन यदि आप अपने लिए बेस्ट लोशन का चयन कर  रही हैं तो आप MyGlamm ग्लो ब्राइटनिंग बॉडी लोशन,पैराशूट एडवांस्ड बॉडी लोशन वैसलीन इंटेंसीव केयर कोकोवा लोशन किसी भी तरह का प्रोडक्ट इस्तेमाल कर सकते हैं.

टिप्स

  • अच्छे  रिजल्ट के लिए नहाने के तुरंत बाद ही लोशन लगाएं क्योंकि उस वक़्त स्किन पौर्स  खुले   रहते हैं जिससे स्किन को अच्छा पोषण मिलता हैं.
  • अगर बॉडी लोशन में मौजूद किसी भी तरह की सामग्री से आपको एलर्जी  है तो इस्तेमाल करने से बचें.
  • अगर आपको फुट कॉर्न की समस्या है तो उस जगह पर प्रतिदिन बॉडी लोशन का इस्तेमाल करें.
  • लोशन लगते समय अच्छे से मसाज करें.
  • यदि आपको पिम्पल, ब्लैकहेड या स्किन से संबंधित कोई समस्या हैं तो पहले किसी भी लोशन के प्रयोग से पहले अपने डॉक्टर् से सलाह अवश्य लें.

 

चक्कर हारमोंस का: मंजु के पति का सीमा के साथ चालू था रोमांस

कालेज की सहेली अनिता से करीब 8 साल बाद अचानक बाजार में मुलाकात हुई तो हम दोनों ही एकदूसरे को देख कर चौंकीं.

‘‘अंजु, तू कितनी मोटी हो गई है,’’ अनिता ने मेरे मोटे पेट में उंगली घुसा कर मुझे छेड़ा.

‘‘और तुम क्या मौडलिंग करती हो? बड़ी शानदार फिगर मैंटेन कर रखी है तुम ने, यार?’’ मैं ने दिल से उस के आकर्षक व्यक्तित्व की प्रशंसा की.

‘‘थैंक्यू, पर तुम ने अपना वजन इतना ज्यादा…’’

‘‘अरे, अब 2 बच्चों की मां बन चुकी हूं मोटापा तो बढ़ेगा ही. अच्छा, यह बता कि तुम दिल्ली में क्या कर रही हो?’’ मैं ने विषय बदला.

‘‘मैं ने कुछ हफ्ते पहले ही नई कंपनी में नौकरी शुरू की है. मेरे पति का यहां ट्रांसफर हो जाने के कारण मुझे भी अपनी अच्छीखासी नौकरी छोड़ कर मुंबई से दिल्ली आना पड़ा. अभी तक यहां बड़ा अकेलापन महसूस हो रहा था पर अब तुम मिल गई हो तो मन लग जाएगा.’’

‘‘मेरा घर पास ही है. चल, वहीं बैठ कर गपशप करती हैं.’’

‘‘आज एक जरूरी काम है, पर बहुत जल्दी तुम्हारे घर पति व बेटे के साथ आऊंगी. मेरा कार्ड रख लो और तुम्हारा फोन नंबर मैं सेव कर लेती हूं,’’ और फिर उस ने अपने पर्स से कार्ड निकाल कर मुझे पकड़ा दिया. मैं ने सरसरी निगाह कार्ड पर डाली तो उस की कंपनी का नाम पढ़ कर चौंक उठी, ‘‘अरे, तुम तो उसी कंपनी में काम करती हो जिस में मेरे पति आलोक करते हैं.’’

‘‘कहीं वे आलोक तो तेरे पति नहीं जो सीनियर सेल्स मैनेजर हैं?’’

‘‘वही मेरे पति हैं…क्या तुम उन से परिचित हो?’’

‘‘बहुत अच्छी तरह से…मैं उन्हें शायद जरूरत से कुछ ज्यादा ही अच्छी तरह से जानती हूं.’’ ‘‘इस आखिरी वाक्य को बोलते हुए तुम ने अजीब सा मुंह क्यों बनाया अनिता?’’ मैं ने माथे में बल डाल कर पूछा तो वह कुछ परेशान सी नजर आने लगी. कुछ पलों के सोचविचार के बाद अनिता ने गहरी सांस छोड़ी और फिर कहा, ‘‘चल, तेरे घर में बैठ कर बातें करते हैं. अपना जरूरी काम फिर कभी कर लूंगी.’’

‘‘हांहां, चल, यह तो बता कि अचानक इतनी परेशान क्यों हो उठी?’’

‘‘अंजु, कालेज में तुम्हारी और मेरी बहुत अच्छी दोस्ती थी न?’’

‘‘हां, यह तो बिलकुल सही बात है.’’

‘‘उसी दोस्ती को ध्यान में रखते हुए मैं तुम्हें तुम्हारे पति आलोक के बारे में एक बात बताना अपना फर्ज समझती हूं…तुम सीमा से परिचित हो?’’

‘‘नहीं, कौन है वह?’’

‘‘तुम्हारे पति की ताजाताजा बनी प्रेमिका माई डियर फ्रैंड. इस बात को सारा औफिस जानता है…तुम क्यों नहीं जानती हो, अंजु?’’

‘‘तुम्हें जरूर कोई गलतफहमी हो रही है, अनिता. वे मुझे और अपनी दोनों बेटियों से बहुत प्यार करते हैं. बहुत अच्छे पति और पिता हैं वे…उन का किसी औरत से गलत संबंध कभी हो ही नहीं सकता,’’ मैं ने रोंआसी सी हो कर कुछ गलत नहीं कहा था, क्योंकि सचमुच मुझे अपने पति की वफादारी पर पूरा विश्वास था.

‘‘मैडम, यह सीमा कोई औरत नहीं, बल्कि 25-26 साल की बेहद सुंदर व बहुत ही महत्त्वाकांक्षी लड़की है और मैं जो बता रही हूं वह बिलकुल सच है. अब आंसू बहा कर यहां तमाशा मत बनना, अंजु. हर समस्या को समझदारी से हल किया जा सकता है. चल,’’ कह वह मेरा हाथ मजबूती से पकड़ कर मुझे अपनी कार की तरफ ले चली. उस शाम जब आलोक औफिस से घर लौटे तो मेरी दोनों बेटियां टीवी देखना छोड़ कर उन से लिपट गईं. करीब 10 मिनट तक वे दोनों से हंसहंस कर बातें करते रहे. मैं ने उन्हें पानी का गिलास पकड़ाया तो मुसकरा कर मुझे आंखों से धन्यवाद कहा. फिर कपड़े बदल कर अखबार पढ़ने बैठ गए. मैं कनखियों से उन्हें बड़े ध्यान से देखने लगी. उन का व्यक्तित्व बढ़ती उम्र के साथ ज्यादा आकर्षक हो गया था. नियमित व्यायाम, अच्छा पद और मोटा बैंक बैलेंस पुरुषों की उम्र को कम दिखा सकते हैं. उन का व्यवहार रोज के जैसा ही था पर उस दिन मुझे उन के बारे में अनिता से जो नई  जानकारी मिली थी, उस की रोशनी में वे मुझे अजनबी से दिख रहे थे.

‘‘मैं भी कितनी बेवकूफ हूं जो पहचान नहीं सकी कि इन की जिंदगी में कोई दूसरी औरत आ गई है. अब कहां ये मुझे प्यार से देखते और छेड़ते हैं? एक जमाना बीत गया है मुझे इन के मुंह से अपनी तारीफ सुने हुए. मैं बच्चों को संभालने में लगी रही और ये पिछले 2 महीनों से इस सीमा के साथ फिल्में देख रहे हैं, उसे लंचडिनर करा रहे हैं. क्या और सब कुछ भी चल रहा है इन के बीच?’’ इस तरह की बातें सोचते हुए मैं जबरदस्त टैंशन का शिकार बनती जा रही थी. अनिता ने मुझे इन के सामने रोने या झगड़ा करने से मना किया था. उस का कहना था कि मैं ने अगर ये 2 काम किए तो आलोक मुझ से खफा हो कर सीमा के और ज्यादा नजदीक चले जाएंगे. रात को उन की बगल में लेट कर मैं ने उन्हें एक मनघड़ंत सपना संजीदा हो कर सुनाया, ‘‘आज दोपहर को मेरी कुछ देर के लिए आंख लगी तो मैं ने जो सपना देखा उस में मैं मर गई थी और बहुत भीड़ मेरी अर्थी केपीछे चल रही थी,’’ पूरी कोशिश कर के मैं ने अपनी आंखों में चिंता के भाव पैदा कर लिए थे.

‘‘अरे, तो इस में इतनी नर्वस क्यों हो रही हो? सपने सपने होते हैं,’’ मेरी चिंता कम करने को उन्होंने मुसकराते हुए कहा.

‘‘आप मेरे सपने की बात सुन कर हंसना मत, जी. जिन लोगों ने मेरी अर्थी उठा रखी थी, वे बेचारे कुबड़ों की तरह झुके होने के साथसाथ बुरी तरह हांफ भी रहे थे. आप का छोटा भाई कह रहा था कि भाभी को तो ट्रक में श्मशानघाट ले जाना चाहिए था.

‘‘और आप की आंखों में आंसू कम और गुस्से की लपटें ज्यादा दिख रही थीं. मुझे उस वक्त भी आप ऊंची आवाज में कोस रहे थे कि मैं ने हजार बार इस मोटी भैंस को समझाया होगा कि वजन कम कर ले नही तो तेरी अर्थी उठाने वालों का बाजा बज जाएगा, पर इस ने मेरी कभी नहीं सुनी. भाइयो, हिम्मत न हाराना. मैं तुम सब को 5-5 सौ रुपए इसे ढोने के दूंगा.’’

‘‘आप के मुंह से अपने लिए बारबार मोटी भैंस का संबोधन सुन मैं अर्थी पर लेटीलेटी रो पड़ी थी, जी. फिर झटके से मेरी आंखें खुलीं तो मैं ने पाया कि मेरी पलकें सचमुच आंसुओं से भीगी हुई हैं. अब मुझे आप एक बात सचसच बताओ. मुंह से तो आप ने मुझे कभी मोटी भैंस नहीं कहा है पर क्या मन ही मन आप मुझे मोटी भैंस कहते हो?’’ मैं ने बड़े भावुक अंदाज में पूछा तो वे ठहाका मार कर हंस पड़े. मैं फौरन रोंआसी हो कर बोली, ‘‘मैं ने कहा था न कि मेरी बात सुन कर हंसना मत. आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते हो कि मैं दोपहर से मन ही मन कितनी दुखी और परेशान हो रही हूं. लेकिन आज मैं आप से वादा करती हूं कि जब तक अपना वजन 10 किलोग्राम कम न कर लूं, तब तक बच्चों के कमरे में सोऊंगी.’’

‘‘अरे, यह क्या बच्चों जैसी बातें कर रही हो?’’ वे पहले चौके और फिर नाराज हो उठे.

‘‘मुझे झिड़को मत, प्लीज. मेरी इस प्रतिज्ञा को पूरी कराने में आप को मेरा साथ देना ही पड़ेगा, जी.’’

‘‘लेकिन…’’

‘‘प्लीज,’’ मैं ने उन के माथे को एक बार प्यार से चूमा और अपना तकिया उठा कर अपनी बेटियों के पास सोने उन के कमरे में चली आई. वजन कम करना आसान काम नहीं है, ये हम सभी मोटे लोग जानते हैं, लेकिन तनमन में आग सी लगी हो तो वजन यकीनन कम हो जाता है. अनिता ने इस मामले में मेरी पूरी सहायता की थी. उस की देखरेख में मेरा वजन कम करो अभियान जोरशोर से शुरू हुआ. वह रोज मुझ से रिपोर्ट लेती और मेरा मनोबल ऊंचा रखने को मुझे खूब समझाती. आलोक के औफिस चले जाने के बाद मैं उस जिम में पहुंची जिस का ट्रेनर अनिता की पहचान का था. उस ने मेरे ऊपर खास ध्यान दिया. मैं ने जीजान से मेहनत शुरू कर दी तो मेरे वजन में हफ्ते भर में ही फर्क दिखने लगा.

‘‘तुम तो कुछकुछ फिट दिखने लगी हो, अंजु,’’ आलोक के मुंह से अपनी तारीफ सुन मेरा मन खुशी से नाच उठा.

‘‘अभी तो कुछ खास फर्क नहीं पड़ा है, सरकार. आप बस देखते जाओ. मैं ने आप की खातिर अपने को फिल्मी हीरोइन की तरह खूबसूरत न बना लिया, तो कहना,’’ यह डायलौग मैं ने उन की गोद में बैठ कर बोला था. काफी लंबे समय के बाद मैं ने उन की आंखों में अपने लिए वैसे चाहत के भावों की झलक देखी जैसी शादी के शुरू के दिनों में देखी थी. वे मेरा चुंबन लेने को तैयार से दिखे तो मैं उन की गोद से उठ कर शरारती अंदाज में मुसकराती हुई रसोई में चली आई. 2 सप्ताह की मेहनत के बाद मेरा वजन पूरे 3 किलोग्राम कम हो गया. मैं अपने को ज्यादा फिट महसूस कर रही थी, इसलिए मेरा मूड भी अच्छा रहने लगा और आलोक व मेरे संबंध ज्यादा मधुर हो गए. अगले रविवार की शाम हम फिल्म देखने गए. उस के अगले रविवार को हम ने डिनर बाहर किया. फिर उस से अगले रविवार को हम ने फिल्म भी देखी और चाइनीज खाना खाया. वैसे मेरा उन के साथ घूमने जाना बहुत कम हो गया था, क्योंकि घर के कामों से ही मुझे फुरसत नहीं मिलती थी. लेकिन अब मैं किसी भी तरह से उन्हें तैयार कर के हर संडे घूमने जरूर निकल जाती. दोनों बेटियां कभी हमारे साथ होतीं तो कभी मैं उन्हें अपनी पड़ोसिन निशा के पास छोड़ देती. बेटियां उस के यहां आराम से रुक जातीं, क्योंकि उस की बेटी की वे पक्की सहेलियां थीं.

अपने वजन घटाओ अभियान के शुरू होने के डेढ़ महीने भर बाद मैं ने 4 नए सूट सिलवा लिए. जिस दिन शाम को मैं ने पहली बार नया सूट पहना उस दिन मैं ब्यूटीपार्लर भी गई थी. ‘‘वाह, आज तो गजब ढा रही हो,’’ मुझ पर नजर पड़ते ही औफिस से लौटे आलोक का चेहरा खुशी से खिल उठा.

‘‘सचमुच अच्छी लग रही हूं न?’’

मैं ने छोटी बच्ची की तरह इतराते हुए पूछा तो उन्होंने मुझे अपनी बांहों में कैद कर के चूम लिया.

‘‘सचमुच बहुत अच्छी लग रही हो,’’ मेरे ताजा शैंपू किए बालों में उन्होंने अपना चेहरा छिपा लिया और मस्त तरीके से गहरीगहरी सांसें भरने लगे.

‘‘आज मैं ने आप के पसंदीदा कोफ्ते बनाए हैं. खाना जल्दी खा कर बच्चों के साथ आइसक्रीम खाने चलेंगे.’’

‘‘और उस के बाद क्या करेंगे?’’

‘‘सोएंगे.’’

‘‘करैक्ट, लेकिन आज तुम मेरे पास सोओगी न?’’

‘‘अभी पहले 4 किलोग्राम वजन और कम कर लूं, स्वीटहार्ट.’’

‘‘नहीं, आज तुम बच्चों के कमरे में नहीं जाओगी और यह मेरा हुक्म है,’’ उन्होंने मुझे अपनी बांहों में भींच लिया. मैं ने उन का हुक्म न मानने का कारण बताया तो वे बहुत झल्लाए पर अंत में उन्होंने अपने साथ सुलाने की जिद छोड़ दी. अनिता के मार्गदर्शन और मेरी मेहनत का कमाल देखिए कि 3 महीने पूरे होने से पहले ही मैं ने अपना 10 किलोग्राम वजन कम कर लिया.

‘‘थैंक्यू वैरी मच, सहेली,’’ अपने घर में रखी वजन करने वाली मशीन से उतर कर जब मैं अनिता के गले लगी तब मेरी आंखों में खुशी के आंसू थे.

‘‘2 दिन बाद यानी शनिवार की रात को तुम आलोक के साथ अपने बैडरूम में सो सकती हो,’’ उस ने मुझे छेड़ा तो मैं शरमा उठी. ‘‘मुझे डर है कि कहीं वह भूखा शेर जोश में कहीं मेरी कोई हड्डीपसली न तोड़ डाले,’’ मेरे इस मजाक पर हम दोनों सहेलियां हंसतीहंसती लोटपोट हो गईं. फिर अचानक गंभीर हो कर उस ने मुझ से पूछा, ‘‘सीमा से मुलाकात करने को पूरी तरह से तैयार हो न?’’

‘‘हां,’’ मेरी मुट्ठियां भिंच गईं.

‘‘तुम चाहो तो मैं तुम्हारे साथ चल सकती हूं.’’

‘‘नहीं, उस से मैं अकेली निबट लूंगी.’’

‘‘गुड,’’ मेरी पीठ थपथपा कर वह चली गई. उस गुरुवार की शाम 7 बजे के करीब मैं आलोक की प्रेमिका सीमा से पहली मुलाकात करने उस के फ्लैट पहुंच गई. वह फ्लैट में अपनी विधवा मां के साथ रहती थी. मेरे घंटी बजाने पर दरवाजा उसी ने खोला. मुझे सामने देख कर उस की आंखों में जो हैरानी के भाव उभरे, उन से मैं ने अंदाजा लगाया कि वह मुझे पहचानती है.

‘‘मैं अंजु हूं, तुम्हारे सहयोगी आलोक की पत्नी,’’ मैं ने उसे अपना परिचय दिया तो वह अपनी हैरानी को छिपा कर स्वागत करने वाले अंदाज में मुसकराने लगी.

‘‘आइए, प्लीज अंदर आइए, अंजुजी,’’ उस ने दरवाजे के सामने से हटते हुए मुझे अंदर आने की जगह दे दी. रसोई में काम कर रही उस की मां ने मेरी तरफ कुतूहल भरी निगाहों से देखा जरूर पर हमारे पास ड्राइंगरूम में नहीं आई.

‘‘मैं आज पहली बार तुम्हारे घर आई हूं, लेकिन…’’ मैं ने जानबूझ कर अपना वाक्य अधूरा छोड़ दिया.

‘‘लेकिन क्या, अंजुजी?’’ वह अब पूरी तरह चौकन्नी नजर आ रही थी.

‘‘लेकिन मैं चाहती हूं कि मेरा आज का यहां आना आखिरी बाद का आना बन जाए.’’

‘‘मैं कुछ समझी नहीं, अंजुजी,’’ उस की आंखों में सख्ती के भाव उभर आए.

‘‘मैं अपनी बात संक्षेप में कहूंगी, सीमा. देखो, मुझे तुम्हारे और आलोक के बीच में कुछ महीनों से चल रहे लव अफेयर के बारे में पता है. मेरी जानकारी बिलकुल सही है, इसलिए उस का खंडन करने की कोशिश बेकार रहेगी.’’ मेरी सख्त स्वर में दी गई चेतावनी को सुन कर सफाई देने को तैयार सीमा ने अपने होंठ सख्ती से भींच लिए. उस के चेहरे की तरफ ध्यान से देखते हुए मैं ने आगे बोलना शुरू किया, ‘‘देखो, मेरे पति के साथ तुम्हारा लव अफेयर अब किसी भी हालत में आगे नहीं चल सकता है. तुम अगर उन की जिंदगी से अपनेआप निकल जाती हो तो बढि़या रहेगा वरना मैं तुम्हें इतना बदनाम कर दूंगी कि तुम घर से बाहर सिर उठा कर नहीं चल सकोगी.’’

‘‘मेरे घर में आ कर मुझे ही धमकी देने की तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई? आप प्लीज इसी वक्त यहां से चली जाएं और आप को मुझ से जो भी बात करनी हो औफिस में आ कर आलोकजी के सामने करना.’’ उस ने मेरे साथ गुस्से से बात करने की कोशिश की जरूर पर मन में पैदा भय के कारण इस कोशिश में ज्यादा सफल नहीं हो पाई. मैं झटके से उठ खड़ी हुई और कू्रर लहजे में बोली, ‘‘मेरे पति की जिंदगी से हमेशा के लिए निकल जाने की मेरी सलाह तुम ने मानी है या नहीं, इस का पता मुझे इसी बात से लगेगा कि तुम हमारी आज की मुलाकात की चर्चा आलोक से करती हो या नहीं.

‘‘अगर तुम में थोड़ी सी भी अक्ल है तो आलोक से मेरे यहां आने की बाबत कुछ मत कहना और एक झटके में उस के साथ अपने प्रेम संबंध को भी समाप्त कर डालो. तब मेरा आज यहां आना पहली और अंतिम बार होगा.’’ ‘‘लेकिन तुम्हें अपनी इज्जत प्यारी न हो, तो जरूर आलोक से मेरी शिकायत कर देना. तब मैं तुम्हारी फजीहत करने के लिए यहां बारबार लौटूंगी, सीमा. हो सकता है कि मैं आलोक को तब सदा के लिए खो दूं, पर मैं तब तक तुम्हें इतना बदनाम कर दूंगी कि फिर कोई अन्य इज्जतदार युवक तुम्हारा जीवनसाथी बनने को कभी तैयार न हो.’’ उसे चेतावनी देते हुए मैं ने मेज पर रखा शीशे का भारी फूलदान हाथ में उठा लिया था. मेरी इस हरकत से डर कर वह झटके से उठ खड़ी हुई. उस के हाथपैर कांपने लगे. मैं ने फूलदान सिर से ऊपर उठाया तो उस की चीख पूरे घर में गूंज गई. उसे जरूर ऐसा लगा होगा कि मैं वह फूलदान उस के सिर पर मार दूंगी. मैं ने उस के सिर को तो बख्शा पर फूलदान जोर से फर्श पर दे मारा. कांच के टूटने की तेज आवाज में सीमा के दोबारा चीखने की आवाज दब गई थी.

‘‘गुड बाय ऐंड गुड लक, सीमा. अगर मुझे फिर यहां आना पड़ा तो तुम्हारी खैर नहीं,’’ मैं ने उसे कुछ पलों तक गुस्से से घूरा और फिर दरवाजे की तरफ बढ़ गई. उस की मां भी ड्राइंगरूम में खड़ी थरथर कांप रही थी. ‘‘अपनी बेटी को समझाना कि वह मेरे रास्ते से हट जाए नहीं तो बहुत पछताएगी,’’ अपनी चेतावनी सीमा की मां के सामने दोहरा कर मैं उन के फ्लैट से बाहर निकल आई. आज हमारी उस पहली मुलाकात को 2 महीने बीत चुके हैं और आलोक ने  कभी इस बाबत कोई जिक्र मेरे सामने नहीं छेड़ा. अनिता का कहना है कि सीमा ने आजकल आलोक से साधारण बोलचाल भी बंद कर रखी है. जब करीब 5 महीने पहले अनिता से मेरी अचानक मुलाकात हुई थी, तो उस ने मुझे उस दिन एक महत्त्वपूर्ण बात समझाई थी, ‘‘अंजु, हर समझदार पत्नी के लिए अपने पति के सैक्स हारमोंस का स्तर ऊंचा रखने के लिए खुद को आकर्षक बनाए रखना बहुत जरूरी है. दांपत्य प्रेम की जड़ें मजबूत बनाने में इन हारमोंस से ज्यादा अहम भूमिका किसी और बात की नहीं होती. तब पति की जिंदगी में किसी सीमा के आने की संभावना भी बहुत कम रहती है.’’ मैं ने उस की वह सीख गांठ बांध ली है. 3 महीने से दूर रहने के कारण आलोक के सैक्स हारमोंस का स्तर जिस ऊंचाई तक पहुंच गया था, मैं ने उसे वहां से रत्ती भर भी गिरने नहीं दिया.

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