प्यारा सा रिश्ता: परिवार के लिए क्या था सुदीपा का फैसला

12 साल की स्वरा शाम को खेलकूद कर वापस आई. दरवाजे की घंटी बजाई तो सामने किसी अजनबी युवक को देख कर चकित रह गई.

तब तक अंदर से उस की मां सुदीपा बाहर निकली और मुसकराते हुए बेटी से कहा, ‘‘बेटे यह तुम्हारी मम्मा के फ्रैंड अविनाश अंकल हैं. नमस्ते करो अंकल को.’’

‘‘नमस्ते मम्मा के फ्रैंड अंकल,’’ कह कर हौले से मुसकरा कर वह अपने कमरे में चली आई और बैठ कर कुछ सोचने लगी.

कुछ ही देर में उस का भाई विराज भी घर लौट आया. विराज स्वरा से 2-3 साल बड़ा था.

विराज को देखते ही स्वरा ने सवाल किया, ‘‘भैया आप मम्मा के फ्रैंड से मिले?’’

‘‘हां मिला, काफी यंग और चार्मिंग हैं. वैसे 2 दिन पहले भी आए थे. उस दिन तू कहीं गई

हुई थी?’’

‘‘वे सब छोड़ो भैया. आप तो मुझे यह बताओ कि वह मम्मा के बौयफ्रैंड हुए न?’’

‘‘यह क्या कह रही है पगली, वे तो बस फ्रैंड हैं. यह बात अलग है कि आज तक मम्मा की सहेलियां ही घर आती थीं. पहली बार किसी लड़के से दोस्ती की है मम्मा ने.’’

‘‘वही तो मैं कह रही हूं कि वह बौय भी है और मम्मा का फ्रैंड भी यानी वे बौयफ्रैंड ही तो हुए न,’’ स्वरा ने मुसकराते हुए कहा.

‘‘ज्यादा दिमाग मत दौड़ा. अपनी पढ़ाई कर ले,’’ विराज ने उसे धौल जमाते हुए कहा.

थोड़ी देर में अविनाश चला गया तो सुदीपा की सास अपने कमरे से बाहर आती हुई थोड़ी नाराजगी भरे स्वर में बोलीं, ‘‘बहू क्या बात है, तेरा यह फ्रैंड अब अकसर घर आने लगा है?’’

‘‘अरे नहीं मम्मीजी वह दूसरी बार ही तो आया था और वह भी औफिस के किसी काम के सिलसिले में.’’

‘‘मगर बहू तू तो कहती थी कि तेरे औफिस में ज्यादातर महिलाएं हैं. अगर पुरुष हैं भी तो वे अधिक उम्र के हैं, जबकि यह लड़का तो तुझ से भी छोटा लग रहा था.’’

‘‘मम्मीजी हम समान उम्र के ही हैं. अविनाश मुझ से केवल 4 महीने छोटा है. ऐक्चुअली हमारे औफिस में अविनाश का ट्रांसफर हाल ही में हुआ है. पहले उस की पोस्टिंग हैड औफिस मुंबई में थी. सो इसे प्रैक्टिकल नौलेज काफी ज्यादा है. कभी भी कुछ मदद की जरूरत होती है तो तुरंत आगे आ जाता है. तभी यह औफिस में बहुत जल्दी सब का दोस्त बन गया है. अच्छा मम्मीजी आप बताइए आज खाने में क्या बनाऊं?’’

‘‘जो दिल करे बना ले बहू, पर देख लड़कों से जरूरत से ज्यादा मेलजोल बढ़ाना सही नहीं होता… तेरे भले के लिए ही कह रही हूं बहू.’’

‘‘अरे मम्मीजी आप निश्चिंत रहिए. अविनाश बहुत अच्छा लड़का है,’’ कह कर हंसती हुई सुदीपा अंदर चली गई, मगर सास का चेहरा बना रहा.

रात में जब सुदीपा का पति अनुराग घर लौटा तो खाने के बाद सास ने अनुराग को  कमरे में बुलाया और धीमी आवाज में उसे अविनाश के बारे में सबकुछ बता दिया.

अनुराग ने मां को समझाने की कोशिश की, ‘‘मां आज के समय में महिलाओं और पुरुषों की दोस्ती आम बात है. वैसे भी आप जानती ही हो सुदीपा कितनी समझदार है. आप टैंशन क्यों लेती हो मां?’’

‘‘बेटा मेरी बूढ़ी हड्डियों ने इतनी दुनिया देखी है जितनी तू सोच भी नहीं सकता. स्त्रीपुरुष की दोस्ती यानी घी और आग की दोस्ती. आग पकड़ते समय नहीं लगता बेटे. मेरा फर्ज था तुझे समझाना सो समझा दिया.’’

‘‘डौंट वरी मां ऐसा कुछ नहीं होगा. अच्छा मैं चलता हूं सोने,’’ अविनाश मां के पास से तो उठ कर चला आया, मगर कहीं न कहीं उन की बातें देर तक उस के जेहन में घूमती रहीं. वह सुदीपा से बहुत प्यार करता था और उस पर पूरा यकीन भी था. मगर आज जिस तरह मां शक जाहिर कर रही थीं उस बात को वह पूरी तरह इग्नोर भी नहीं कर पा रहा था.

रात में जब घर के सारे काम निबटा कर सुदीपा कमरे में आई तो अविनाश ने उसे छेड़ने के अंदाज में कहा, ‘‘मां कह रही थीं आजकल आप की किसी लड़के से दोस्ती हो गई है और वह आप के घर भी आता है.’’

पति के भाव समझते हुए सुदीपा ने भी उसी लहजे में जवाब दिया, ‘‘जी हां आप ने सही सुना है. वैसे मां तो यह भी कह रही होंगी कि कहीं मुझे उस से प्यार न हो जाए और मैं आप को चीट न करने लगूं.’’

‘‘हां मां की सोच तो कुछ ऐसी ही है, मगर मेरी नहीं. औफिस में मुझे भी महिला सहकर्मियों से बातें करनी होती हैं पर इस का मतलब यह तो नहीं कि मैं कुछ और सोचने लगूं. मैं तो मजाक कर रहा था.’’

‘‘आई नो ऐंड आई लव यू,’’ प्यार से सुदीपा ने कहा.

‘‘ओहो चलो इसी बहाने ये लफ्ज इतने दिनों बाद सुनने को तो मिल गए,’’ अविनाश ने उसे बांहों में भरते हुए कहा.

सुदीपा खिलखिला कर हंस पड़ी. दोनों देर तक प्यारभरी बातें करते रहे.

वक्त इसी तरह गुजरने लगा. अविनाश अकसर सुदीपा के घर आ जाता. कभीकभी दोनों बाहर भी निकल जाते. अनुराग को कोई एतराज नहीं था, इसलिए सुदीपा भी इस दोस्ती को ऐंजौय कर रही थी. साथ ही औफिस के काम भी आसानी से निबट जाते.

सुदीपा औफिस के साथ घर भी बहुत अच्छी तरह से संभालती थी. अनुराग को इस मामले में भी पत्नी से कोई शिकायत नहीं थी.

मां अकसर बेटे को टोकतीं, ‘‘यह सही नहीं है अनुराग. तुझे फिर कह रही हूं, पत्नी को किसी और के साथ इतना घुलनमलने देना उचित नहीं.’’

‘‘मां ऐक्चुअली सुदीपा औफिस के कामों में ही अविनाश की हैल्प लेती है. दोनों एक ही फील्ड में काम कर रहे हैं और एकदूसरे को अच्छे से समझते हैं. इसलिए स्वाभाविक है कि काम के साथसाथ थोड़ा समय संग बिता लेते हैं. इस में कुछ कहना मुझे ठीक नहीं लगता मां और फिर तुम्हारी बहू इतना कमा भी तो रही है. याद करो मां जब सुदीपा घर पर रहती थी तो कई दफा घर चलाने के लिए हमारे हाथ तंग हो जाते थे. आखिर बच्चों को अच्छी शिक्षा दी जा सके इस के लिए सुदीपा का काम करना भी तो जरूरी है न फिर जब वह घर संभालने के बाद काम करने बाहर जा रही है तो हर बात पर टोकाटाकी भी तो अच्छी नहीं लगती न.’’

‘‘बेटे मैं तेरी बात समझ रही हूं पर तू मेरी बात नहीं समझता. देख थोड़ा नियंत्रण भी जरूरी है बेटे वरना कहीं तुझे बाद में पछताना न पड़े,’’ मां ने मुंह बनाते हुए कहा.

‘‘ठीक है मां मैं बात करूंगा,’’ कह कर अनुराग चुप हो गया.

एक ही बात बारबार कही जाए तो वह कहीं न कहीं दिमाग पर असर डालती है. ऐसा ही कुछ अनुराग के साथ भी होने लगा था. जब काम के बहाने सुदीपा और अविनाश शहर से बाहर जाते तो अनुराग का दिल बेचैन हो उठता. उसे कई दफा लगता कि सुदीपा को अविनाश के साथ बाहर जाने से रोक ले या डांट लगा दे. मगर वह ऐसा कर नहीं पाता. आखिर उस की गृहस्थी की गाड़ी यदि सरपट दौड़ रही है तो उस के पीछे कहीं न कहीं सुदीपा की मेहनत ही तो थी.

इधर बेटे पर अपनी बातों का असर पड़ता न देख अनुराग के मांबाप ने अपने पोते और पोती यानी बच्चों को उकसाना शुरू का दिया. एक दिन दोनों बच्चों को बैठा कर वे समझाने लगे, ‘‘देखो बेटे आप की मम्मा की अविनाश अंकल से दोस्ती ज्यादा ही बढ़ रही है. क्या आप दोनों को नहीं लगता कि मम्मा आप को या पापा को अपना पूरा समय देने के बजाय अविनाश अंकल के साथ घूमने चली जाती है?’’

‘‘दादीजी मम्मा घूमने नहीं बल्कि औफिस के काम से ही अविनाश अंकल के साथ जाती हैं,’’ विराज ने विरोध किया.

‘‘ भैया को छोड़ो दादीजी पर मुझे भी ऐसा लगता है जैसे मम्मा हमें सच में इग्नोर करने लगी हैं. जब देखो ये अंकल हमारे घर आ जाते हैं या मम्मा को ले जाते हैं. यह सही नहीं.’’

‘‘हां बेटे मैं इसीलिए कह रही हूं कि थोड़ा ध्यान दो. मम्मा को कहो कि अपने दोस्त के साथ नहीं बल्कि तुम लोगों के साथ समय बिताया करे.’’

उस दिन संडे था. बच्चों के कहने पर सुदीपा और अनुराग उन्हें ले कर वाटर पार्क जाने वाले थे.

दोपहर की नींद ले कर जैसे ही दोनों बच्चे तैयार होने लगे तो मां को न देख कर दादी के पास पहुंचे, ‘‘दादीजी मम्मा कहां हैं… दिख नहीं रहीं?’’

‘‘तुम्हारी मम्मा गई अपने फ्रैंड के साथ.’’

‘‘मतलब अविनाश अंकल के साथ?’’

‘‘हां.’’

‘‘लेकिन उन्हें तो हमारे साथ जाना था. क्या हम से ज्यादा बौयफ्रैंड इंपौर्टैं हो गया?’’ कह कर स्वरा ने मुंह फुला लिया. विराज भी उदास हो गया.

लोहा गरम देख दादी मां ने हथौड़ा मारने की गरज से कहा, ‘‘यही तो मैं कहती आ  रही हूं इतने समय से कि सुदीपा के लिए अपने बच्चों से ज्यादा महत्त्वपूर्ण वह पराया आदमी हो गया है. तुम्हारे बाप को तो कुछ समझ ही नहीं आता.’’

‘‘मां प्लीज ऐसा कुछ नहीं है. कोई जरूरी काम आ गया होगा,’’ अनुराग ने सुदीपा के बचाव में कहा.

‘‘पर पापा हमारा दिल रखने से जरूरी और कौन सा काम हो गया भला?’’ कह कर विराज गुस्से में उठा और अपने कमरे में चला गया. उस ने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया.

स्वरा भी चिढ़ कर बोली, ‘‘लगता है मम्मा को हम से ज्यादा प्यार उस अविनाश अंकल से हो गया है,’’ और फिर वह भी पैर पटकती अपने कमरे में चली गई.

शाम को जब सुदीपा लौटी तो घर में सब का मूड औफ था. सुदीपा ने बच्चों को समझाने की कोशिश करते हुए कहा, ‘‘तुम्हारे अविनाश अंकल के पैर में गहरी चोट लग गई थी. तभी मैं उन्हें ले कर अस्पताल गई.’’

‘‘मम्मा आज हम कोई बहाना नहीं सुनने वाले. आप ने अपना वादा तोड़ा है और वह भी अविनाश अंकल की खातिर. हमें कोई बात नहीं करनी,’’ कह कर दोनों वहां से उठ कर चले गए.

स्वरा और विराज मां की अविनाश से इन नजदीकियों को पसंद नहीं कर रहे थे. वे अपनी ही मां से कटेकटे से रहने लगे. गरमी की छुट्टियों के बाद बच्चों के स्कूल खुल गए और विराज अपने होस्टल चला गया.

इधर सुदीपा के सासससुर ने इस दोस्ती का जिक्र उस के मांबाप से भी कर दिया. सुदीपा के मांबाप भी इस दोस्ती के खिलाफ थे. मां ने सुदीपा को समझाया तो पिता ने भी अनुराग को सलाह दी कि उसे इस मामले में सुदीपा पर थोड़ी सख्ती करनी चाहिए और अविनाश के साथ बाहर जाने की इजाजत कतई नहीं देनी चाहिए.

इस बीच स्वरा की दोस्ती सोसाइटी के एक लड़के सुजय से हो गई. वह स्वरा से 2-4 साल बड़ा था यानी विराज की उम्र का था. वह जूडोकराटे में चैंपियन और फिटनैस फ्रीक लड़का था. स्वरा उस की बाइक रेसिंग से भी बहुत प्रभावित थी. वे दोनों एक ही स्कूल में थे. दोनों साथ स्कूल आनेजाने लगे. सुजय दूसरे लड़कों की तरह नहीं था. वह स्वरा को अच्छी बातें बताता. उसे सैल्फ डिफैंस की ट्रेनिंग देता और स्कूटी चलाना भी सिखाता. सुजय का साथ स्वरा को बहुत पसंद आता.

एक दिन स्वरा सुजय को अपने साथ घर ले आई.  सुदीपा ने उस की अच्छे से आवभगत की. सब को सुजय अच्छा लड़का लगा इसलिए किसी ने स्वरा से कोई पूछताछ नहीं की. अब तो सुजय अकसर ही घर आने लगा. वह स्वरा की मैथ्स की प्रौब्लम भी सौल्व कर देता और जूडोकराटे भी सिखाता रहता.

एक दिन स्वरा ने सुदीपा से कहा, ‘‘मम्मा आप को पता है सुजय डांस भी जानता है. वह कह रहा था कि मुझे डांस सिखा देगा.’’

‘‘यह तो बहुत अच्छा है. तुम दोनों बाहर लौन में या फिर अपने कमरे में डांस की प्रैक्टिस कर सकते हो.’’

‘‘मम्मा आप को या घर में किसी को एतराज तो नहीं होगा?’’ स्वरा ने पूछा.

‘‘अरे नहीं बेटा. सुजय अच्छा लड़का है. वह तुम्हें अच्छी बातें सिखाता है. तुम दोनों क्वालिटी टाइम स्पैंड करते हो. फिर हमें ऐतराज क्यों होगा? बस बेटा यह ध्यान रखना सुजय और तुम फालतू बातों में समय मत लगाना. काम की बातें सीखो, खेलोकूदो, उस में क्या बुराई है?’’

‘‘ओके थैंक यू मम्मा,’’ कह कर स्वरा खुशीखुशी चली गई.

अब सुजय हर संडे स्वरा के घर आ जाता और दोनों डांस प्रैक्टिस करते. समय इसी तरह बीतता रहा. एक दिन सुदीपा और अनुराग किसी काम से बाहर गए हुए थे.

घर में स्वरा दादीदादी के साथ अकेली थी. किसी काम से सुजय घर आया तो स्वरा उस से मैथ्स की प्रौब्लम सौल्व कराने लगी. इसी बीच अचानक स्वरा को दादी के कराहने और बाथरूम में गिरने की आवाज सुनाई दी.

स्वरा और सुजय दौड़ कर बाथरूम पहुंचे तो देखा दादी फर्श पर बेहोश पड़ी हैं. स्वरा के दादा ऊंचा सुनते थे. उन के पैरों में भी तकलीफ रहती थी. वे अपने कमरे में सोए थे. स्वरा घबरा कर रोने लगी तब सुजय ने उसे चुप कराया और जल्दी से ऐंबुलैंस वाले को फोन किया. स्वरा ने अपने मम्मीडैडी को भी हर बात बता दी. इस बीच सुजय जल्दी से दादी को ले कर पास के अस्पताल भागा. उस ने पहले ही अपने घर से रुपए मंगा लिए थे. अस्पताल पहुंच कर उस ने बहुत समझदारी के साथ दादी को एडमिट करा दिया और प्राथमिक इलाज शुरू कराया. उन को हार्ट अटैक आया था. अब तक स्वरा के मांबाप भी हौस्पिटल पहुंच गए थे.

डाक्टर ने सुदीपा और अनुराग से सुजय  की तारीफ करते हुए कहा, ‘‘इस लड़के ने जिस फुरती और समझदारी से आप की मां को हौस्पिटल पहुंचाया वह काबिलेतारीफ है. अगर ज्यादा देर हो जाती तो समस्या बढ़ सकती थी यहां तक कि जान को भी खतरा हो सकता था.’’

सुदीपा ने बढ़ कर सुजय को गले से लगा लिया. अनुराग और उस के पिता ने भी नम आंखों से सुजय का धन्यवाद कहा. सब समझ रहे थे कि बाहर का एक लड़का आज उन के परिवार के लिए कितना बड़ा काम कर गया. हालात सुधरने पर स्वरा की दादी को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई.

घर लौटने पर दादी ने सुजय का हाथ पकड़ कर गदगद स्वर में कहा, ‘‘आज मुझे पता चला कि दोस्ती का रिश्ता इतना खूबसूरत होता है. तुम ने मेरी जान बचा कर इस बात का एहसास दिला दिया बेटे कि दोस्ती का मतलब क्या है.’’

‘‘यह तो मेरा फर्ज था दादीजी,’’ सुजय ने हंस कर कहा.

तब दादी ने सुदीपा की तरफ देख कर ग्लानि भरे स्वर में कहा, ‘‘मुझे माफ कर दे बहू. दोस्ती तो दोस्ती होती है, बच्चों की हो या बड़ों की. तेरी और अविनाश की दोस्ती पर शक कर के हम ने बहुत बड़ी भूल कर दी. आज मैं समझ सकती हूं कि तुम दोनों की दोस्ती कितनी प्यारी होगी. आज तक मैं समझ ही नहीं पाई थी.’’

सुदीपा बढ़ कर सास के गले लगती हुई बोली, ‘‘मम्मीजी आप बड़ी हैं. आप को मुझ से माफी मांगने की कोई जरूरत नहीं. आप अविनाश को जानती नहीं थीं, इसलिए आप के मन में सवाल उठ रहे थे. यह बहुत स्वाभाविक था. पर मैं उसे पहचानती हूं, इसलिए बिना कुछ छिपाए उस रिश्ते को आप के सामने ले कर आई थी.’’

तभी दरवाजे पर दस्तक हुई. सुदीपा ने दरवाजा खोला तो सामने हाथों में फल और गुलदस्ता लिए अविनाश खड़ा था. घबराए हुए स्वर में उस ने पूछा, ‘‘मैं ने सुना है कि अम्मांजी की तबीयत खराब हो गई है. अब कैसी हैं वे?’’

‘‘बस तुम्हें ही याद कर रही थीं,’’ हंसते

हुए सुदीपा ने कहा और हाथ पकड़ कर उसे अंदर ले आई.       

IND VS NZ: मैच के बाद स्पॉट हुए Virat Kohli-Anushka Sharma

किक्रेट वर्ल्ड कप 2023 का बीते दिन सेमी फाइनल का मुकाबला भारत और न्यूजीलैंड के बीच था. भारतीय टीम ने जबरदस्त प्रर्दशन किया उन्होंने न्यूजीलैंड को 70 रन से हरा के फाइनल में जगह बना लीं है. इन दिनों किक्रेट वर्ल्ड कप 2023 की धूम चारों तरफ फैली हुई है. वहीं इंडिया ने न्यूजीलैंड को हराकर फाइनल में जगह बनाई. इस मैच के बाद विराट कोहली काफी चर्चा में है. इस दौरान विराट कोहली का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है. इस वीडियो में विराट कोहली के साथ-साथ उनकी पत्नी बॉलीवुड एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा भी नजर आ रही हैं. विराट कोहली का ये वीडियो सोशल मीडिया पर आते ही छा गया. इस वीडियो में विराट कोहली और अनुष्का शर्मा काफी कूल अंदाज में दिखाई दिए.

मैच के बाद साथ नजर आए अनुष्का- विराट

न्यूजीलैंड से हुए किक्रेट वर्ल्ड कप 2023 के सेमीफाइनल में विराट कोहली ने शतक मारकर सबका दिल जीत लिया है. इसी के साथ विराट कोहली सबसे ज्यादा 50 शतक लगाने वाले खिलाड़ी बन गए. किंग कोहली सोशल मीडिया पर छाए हुए है. इस बीच विराट और अनुष्का का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. इस वायरल वीडियो में अनुष्का- विराट साथ में होटल से बाहर आते हुए दिखाई दे रहे है. विराट कोहली ने अपने हाथ में सामान लिया हुआ है, तो वहीं अनुष्का शर्मा अपने साथ बैग कैरी किए हुए दिखाई दीं. इस वीडियो में विराट कोहली और अनुष्का शर्मा दोनों ही कूल लुक में नजर आए.

 

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फैंस ने किए वीडियो पर कई कमेंट

विराट कोहली और अनुष्का शर्मा के वीडियो पर फैंस जमकर कमेंट कर रहे है. इस वीडियो पर कमेंट करते हुए लोगों ने विराट पर खूब प्यार लुटाया. वहीं कई यूजर्स को अनुष्का शर्मा का ये सादगी भरा अंदाज पसंद आया.

 

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अब गोदी मीडिया पर सख्ती संभव

जो काम इंगलैड में टैबलायड साइज के अखबार करते हैं उसी काम में हमारे देश के हिंदी न्यूज चैनल बढ़चढ़ कर के नए पैमाने तय कर रहे हैं. झूठ, सफेद झूठ, भ्रामक झूठ, हानिकारक झूठ में इन चैनलों ने फर्क ही मिटा दिया और जैसे इंगलैंड में टैबलायड हिटलर को कभी जिंदा कर देते हैं, कभी किंग चार्ल्स की 2 और बीवियां खोज लाते हैं, हमारे चैनल क्व2 हजार के नोट में चिप्स से ले कर हर मुसलिम में कोई न कोई खामी ढूंढ़ सकते हैं और सीधीसादी जनता को बहका सकते हैं.

इन चैनलों को दोष नहीं दिया जाना चाहिए, इन के दर्शकों को दिया जाना चाहिए जिन्होंने बचपन से ही झूठ और चमत्कार की इतनी कहानियां पढ़ीसुनी हैं और इतने गलत तथ्यों को सनातन सत्य माना है कि उन के लिए ये चैनल दर्शनीय है और दूरदर्शन टाइप के बुलेटिन बोरिंग बन कर रह गए चैनल बेकार.

मामला आर्यन खान के ड्रग लेने का हो, तबलीगी जमात के कोविड फैलाने का हो, रिया चक्रवर्ती और सुशांत सिंह के आपसी संबंधों का हो, ये चैनल बिना सही झूठ परखे कुछ भी कर सकते हैं.

इन का हाल तो यह है कि जब मोदी की पार्टी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी बंगाल, केरल में हार रही हो तो ये बड़ी खबर बनाते हुए घंटों त्रिपुरा की 2 सीटों की बातें करते रहेंगे कि शायद कुछ चमत्कार हो जाए जिस में समाजवादी, तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस हार जाए.

यह एक तरह की वही भावना है जो हमारा हर अंधविश्वासी पाले रखता है जो पहाड़ पर बने अपने 4 मंजिले मकान को गिरते देख कर उस चमत्कार की कामना करने के लिए भगवद भजन शुरू कर देता है कि मकान 45 के कोण पर झुक जाए पर गिरे नहीं.

सरकार के बारे में कड़वे सच को छिपाने और बाकी दुनिया को छोटा, नीचा, बेईमान दिखाने के लिए हर झूठ का सहारा लेने वाले चैनलों की अपराध रिपोर्टिंग पर अब सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई है और कहा है कि हर जिले का पुलिस अफसर सूचनाएं देने से पहले 4 बार सोचे. ऐसा होगा या नहीं, पता नहीं पर जो बकबकिए ऐंकर हिंदी चैनलों ने पाल रखे हैं उन पर अंकुश उन के दर्शकों की सेहत के लिए अच्छा है.

इन चैनलों के भ्रामक समाचारों के कारण बहुत से साधारण लोग गुस्से में भरे रहते हैं, कुछ अनापशनाप दवाएं खा लेते हैं, कुछ हिंसक हो जाते हैं, कुछ मायूस भी हो जाते हैं. सरकार और सुप्रीम कोर्ट इन पर स्पीड ब्रेकर लगा सकेगा, इस की गुंजाइश कम है पर कोशिश ही संतोषजनक है.

सच्चाई: क्या सपना सचिन की शादी के लिए घरवलों को राजी कर पाई- भाग 2

‘‘हम ने तो इस संभावना के बारे में सोचा ही नहीं था,’’ सब सुनने के बाद सलिल ने कहा.

‘‘अगर ऐसा कुछ है तो हम उस का इलाज करवा सकते हैं. आजकल कोई रोग असाध्य

नहीं है, लेकिन अभी यह सब सचिन को मत बताना वरना अपने मम्मीपापा से और भी ज्यादा चिढ़ जाएगा.’’

‘‘उन का ऐतराज भी सही है सलिल, किसी व्याधि या पूर्वाग्रस्त लड़की से कौन अभिभावक अपने बेटे का विवाह करना चाहेगा? बगैर सचिन या सिमरन को कुछ बताए हमें बड़ी होशियारी से असलियत का पता लगाना होगा,’’ सपना ने कहा.

‘‘सिमरन के घर जाने के बजाय उस से पहले कहीं मिलना बेहतर रहेगा. ऐसा करो तुम कल लंचब्रेक में सचिन के औफिस चली जाओ. कह देना किसी काम से इधर आई थी, सोचा लंच तुम्हारे साथ कर लूं. वैसे तो वह स्वयं ही सिमरन को बुलाएगा और अगर न बुलाए तो तुम आग्रह कर के बुलवा लेना,’’ सलिल ने सु झाव दिया.

अगले दिन सपना सचिन के औफिस में पहुंची ही थी कि सचिन लिफ्ट से एक लंबी, सांवली मगर आकर्षक युवती के साथ निकलता दिखाई दिया.

‘‘अरे दीदी, आप यहां? खैरियत तो है?’’ सचिन ने चौंक कर पूछा.

‘‘सब ठीक है, इस तरफ किसी काम से आई थी. अत: मिलने चली आई. कहीं जा रहे हो क्या?’’

‘‘सिमरन को लंच पर ले जा रहा था. शाम का प्रोग्राम बनाने के लिए…आप भी हमारे साथ लंच के लिए चलिए न दीदी,’’ सचिन बोला.

‘‘चलो, लेकिन किसी अच्छी जगह यानी जहां बैठ कर इतमीनान से बात कर सकें.’’

‘‘तब तो बराबर वाली बिल्डिंग की ‘अंगीठी’ का फैमिलीरूम ठीक रहेगा,’’ सिमरन बोली.

चंद ही मिनट में वे बढि़या रेस्तरां पहुंच गए.

‘‘बहुत बढि़या आइडिया है यहां आने का सिमरन. पार्किंग और आनेजाने में व्यर्थ होने वाला समय बच गया,’’ सपना ने कहा.

‘‘सिमरन के सु झाव हमेशा बढि़या और सटीक होते हैं दीदी.’’

‘‘फिर तो इसे जल्दी से परिवार में लाना पड़ेगा सब का थिंक टैंक बनाने के लिए.’’

सचिन ने मुसकरा कर सिमरन की ओर देखा. सपना को लगा कि मुसकराहट के साथ ही सिमरन के चेहरे पर एक उदासी की लहर भी उभरी जिसे छिपाने के लिए उस ने बात बदल कर सपना से उस के विदेश प्रवास के बारे में पूछना शुरू कर दिया.

‘‘मेरा विदेश वृतांत तो खत्म हुआ, अब तुम अपने बारे में बताओ सिमरन.’’

‘‘मेरे बारे में तो जो भी बताने लायक है वह सचिन ने बता ही दिया होगा दीदी. वैसे भी कुछ खास नहीं है बताने को. सचिन की सहपाठिन थी, अब सहकर्मी हूं और नेहरू नगर में रहती हूं.’’

‘‘अपने पापा के शौक से बनाए घर में जो लाख परेशानियां

आने के बावजूद इस ने बेचा नहीं,’’ सचिन ने जोड़ा, ‘‘अकेली रहती है वहां.’’

‘‘डर नहीं लगता?’’

‘‘नहीं दीदी, डर

तो अपना साथी है,’’ सिमरन हंसी.

‘‘आई सी…इस ने तेरे बचपन के नाम डरपोक को छोटा कर दिया है सचिन.’’

सिमरन खिलखिला कर हंस पड़ी, ‘‘नहीं दीदी, इस ने बताया ही नहीं कि इस का नाम डरपोक था. किस से डरता था यह दीदी?’’

‘‘बताने की क्या जरूरत है जब रातदिन इस के साथ रहोगी तो अपनेआप ही पता चल जाएगा,’’ सपना हंसी.

‘‘रातदिन साथ रहने की संभावना तो बहुत कम है, मैं मम्मीजी की भावनाओं को आहत कर के सचिन से शादी नहीं कर सकती,’’ सिमरन की आंखों में उदासी, मगर स्वर में दृढ़ता थी.

सपना ने घड़ी देखी फिर बोली, ‘‘अभी न तो समय है और न ही सही जगह जहां इस विषय पर बहस कर सकें. जब तक मेरा नर्सिंगहोम तैयार नहीं हो जाता, मैं तो फुरसत में ही हूं, तुम्हारे पास जब समय हो तो बताना. तब इतमीनान से इस विषय पर चर्चा करेंगे और कोई हल ढूंढ़ेंगे.’’

‘‘आज शाम को आप और जीजाजी चल रहे हैं न इस के घर?’’ सचिन ने पूछा.

‘‘अभी यहां से मैं नर्सिंगहोम जाऊंगी यह देखने कि काम कैसा चल रहा है, फिर घर जा कर दोबारा बाहर जाने की हिम्मत नहीं होगी और फिर आज मिल तो लिए ही हैं.’’

मैं जिस लड़के से प्यार करती हूं उसे खोना नहीं चाहती, मुझे कोई उपाय बताएं

सवाल 

मैं 12वीं में पढ़ती हूं, अगले साल एग्जाम्स के बाद कालेज में जाने की तैयारी शुरू हो जाएगी. मेरा स्कूल में बौयफ्रैंड है, मैं आर्ट स्टूडैंट हूं और वह साइंस का. वह बहुत एंबीशियस है. लाइफ में बहुतकुछ करना चाहता है. कहता है वह यह सब इसलिए भी चाहता है क्योंकि मुझ से बहुत प्यार करता है और मुझे लाइफ की सारी खुशियां देना चाहता है. मैं भी उसे बहुत प्यार करती हूं, जानती हूं कि स्कूल के बाद हायर स्टडीज के लिए हम दोनों अलगअलग हो जाएंगे. डरती हूं कि दूर जा कर? कहीं वह मुझ से दूर हो गया तो? उसे कोई और लड़की पसंद आ गई तो? मैं उसे किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहती, बहुत प्यार करती हूं उस से. मैं ने हम दोनों को ले कर कितने सपने देखे हैं. उस से दूर होने की बात सोच कर ही दिल बैठ जाता हैं. यही सोचसोच कर आजकल मैं बहुत बेचैन रहने लगी हूं. पढ़ाई में भी दिल नहीं लग रहा. मम्मीपापा मेरी हालत देख कर परेशान हैं. उन्हें कुछ बताना नहीं चाहती, अभी कुछ भी. जानती  हूं, वे यही कहेंगे कि अभी पढ़ाई पर ध्यान दो. प्लीज, मुझे गाइड करें कि मैं कैसे अपने मन को समझऊं?

जवाब

आप की बातों से स्पष्ट है कि आप समझदार हैं, स्थितियों को समझती हैं. दूसरे, आप जैसे स्कूलगोइंग बच्चों को हमारी सलाह हमेशा से यही रही है कि यह उम्र कैरियर बनाने की, पढ़नेलिखने की होती है. इस का मतलब यह हरगिज नहीं कि प्यार करना गलत है. बिलकुल नहीं. लेकिन प्यार में होश नहीं खोना है.

आप का बौयफ्रैंड भी समझदार है, लाइफ में कुछ बनना चाहता है. आप भी पढ़ाई में ध्यान लगाइए और कैरियर की तरफ फोकस कीजिए. दूर रह कर भी रिश्ते निभाए जा सकते हैं. आप दोनों को एकदूसरे पर भरोसा है तो क्यों घबरा रही हैं. प्रेम है तो दूरियों के बावजूद भी रिश्ता मजबूत बना रहेगा. प्यार नहीं हो तो पास रह कर भी दूरियां आ जाती हैं.

आप को तो बौयफ्रैैंड को लाइफ में और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए. इस से आप दोनों का फ्यूचर ब्राइट होगा. चिंता में अपना टाइम बरबाद मत कीजिए. खुश रहिए और पढ़ाई में ध्यान दीजिए. यह आप ने पढ़ा ही होगा कि यदि आप किसी से प्यार करते हैं तो उन्हें आजाद कर दें. यदि वे वापस आते हैं तो वे आप के हैं.

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स्रूस्, व्हाट्सऐप मैसेज या व्हाट्सऐप औडियो से अपनी समस्या 9650966493 पर भेजें.

कितनी भरोसेमंद होती है क्रेडिट रेटिंग

बाजार की दूरी, दुकानें खुली मिलने का निर्धारित सीमित समय, बाजार जाने में बढ़ता पैट्रोल का खर्च, औफलाइन खरीदारी में चुनाव की सीमित संभावना आदि कई कारण हैं, जो औनलाइन खरीदारी के लिए प्रेरित करते हैं. कपड़े खरीदने हों तो मंत्रा, नायिका, इलैक्ट्रानिक्स के लिए अमेजन, फ्लिपकार्ट, दवाइयों के लिए ट्रू मेड, फार्म इजी. फर्नीचर लेना हो तो पेपर फ्राई या वेकफिट, किराना के लिए बिग बास्केट, जियोमार्ट सहित अनेक स्थानीय प्लेटफौर्म सीधे मोबाइल पर ही ऐप्स के जरीए उपलब्ध हैं.

जोमैटो, स्विगी आदि ऐप्स के जरीए होटलों से बनाबनाया भोजन हम जहां चाहें वहां मंगा सकते हैं. इन प्लेटफौर्म्स पर कंपीटिटिव कीमतों में अच्छा सामान उपलब्ध होता है, जो सीधे आप के घर पर आ जाता है. भुगतान के भी कई विकल्प होते हैं जिस में कैश औन डिलिवरी की सुविधा शामिल है. पसंद न आने पर निर्धारित अवधि के भीतर सामान वापसी की सुविधाएं भी यह वैब साइट देती है. जो सब से बड़ी कठिनाई औनलाइन खरीदी में है वह है सामान को भौतिक रूप से देखे बिना चित्र देख कर पसंद करने की होती है.

सच बयां करें

इसी से प्रोडक्ट के फोटो के साथ उपभोक्ताओं द्वारा की गई रेटिंग का महत्त्व बहुत बढ़ जाता है. नए ग्राहक, पुराने उपयोगकर्ताओ के अनुभव के आधार पर उन के द्वारा की गई स्टार रेटिंग तथा अन्य उपभोक्ताओं के रिव्यू देख कर अपनी खरीदारी का निर्णय ले सकते हैं. कस्टमर रिव्यू पढ़ कर आप को प्रोडक्ट की क्वालिटी का एक अंदाजा हो जाता है. ई कौमर्स में रिव्यू बड़ी भूमिका निभाता है. रिव्यू की संख्या जितनी अधिक होती है, रिव्यू उतना ही विश्वसनीय होता है. लेकिन यह तभी संभव है जब कस्टमर रिव्यू वास्तविक उपभोक्ता ही लिखें और फीडबैक में सच बयां करें.

रिव्यू के महत्त्व को देखते हुए विक्रेता इन दिनों फेक रिव्यू का जाल बुन रहे हैं. प्राय: कंपनियां खुद ही औनलाइन फर्जी रिव्यू करवाती हैं और नए ग्राहकों को रिव्यू के आधार पर आकर्षित कर रही हैं. अमेजन से ही खरीदे गए कुछ प्रोडक्ट्स के साथ मु?ो कुछ कूपन प्राप्त हुए जिन में स्पष्ट उल्लेख है कि यदि मैं प्रोडक्ट की फाइव स्टार रेटिंग कर के उस का स्क्रीन शौट भेज दूं तो मु?ो सौ रुपए का कैश बैक दिया जाएगा, जबकि मूल सामान ही कुल 4 सौ रुपए का था. यूपीआई से पेमैंट की सुविधा के चलते इस तरह का लेनदेन बड़ा सरल हो चुका है. उपभोक्ता हित में रिव्यू के इस तरह के फर्जीवाड़े पर नियंत्रण बहुत जरूरी हो गया है.

बढ़ रहा घपला

एक और तरह का घपला इन दिनों चल रहा है. फेसबुक प्रमोशनल पेज के जरीए स्टाक क्लीयरेंस के नाम पर अति उच्च गुणवत्ता के मेवे, फर्नीचर या अन्य किसी सामान के फोटो लगा कर औनलाइन और्डर लिए जाते हैं. 5-6 दिनों में जैसे ही कुछ राशि इकट्ठी हो जाती है ये पेज गायब हो जाते हैं. कुछ दिन और्डर की प्रतीक्षा के बाद जब ठगे गए व्यक्ति को अपनी गलती का एहसास होता है तब वह पुलिस में शिकायत तक नहीं करता क्योंकि जिस व्यक्ति के साथ यह घटना होती है, उस के लिए दी गई रकम ज्यादा बड़ी नहीं होती.

दरअसल, यह एक तरह का ई कौमर्स के नाम पर किया जा रहा साइबर अपराध है. इस से बचने का सब से बेहतर तरीका थोड़ी सी सजगता है. इस तरह की वैब साइट कभी भी कैश औन डिलिवरी का औप्शन नहीं देती. आशय यही है कि ई कौमर्स हमेशा ट्रस्टेड वैब साइट से किया जाना चाहिए.

ई कौमर्स सैक्टर के लिए प्रथक सरकारी रेगुलेटर आवश्यक है. वर्तमान में इन शिकायतों को ले कर उपभोक्ता नैशनल कंज्यूमर हैल्पलाइन पर ही निर्भर हैं. वाणिज्य और उपभोक्ता मंत्रालय ने ई कौमर्स के लिए नई गाइड लाइन बनाई है जिस के अनुसार प्रोडक्ट फेक या डैमेज हुआ तो विक्रेता के साथ ई कौमर्स पोर्टल को भी जिम्मेदार बनाया गया है. गलत या टूटा सामान पहुंचने पर 14 दिन के भीतर ग्राहक को रिफंड देना होगा. 30 दिन के भीतर ग्राहक की शिकायत पूरी तरह दूर करनी होगी. डिटेल्स के मुताबिक सामान नहीं होने पर ग्राहक को सामान लौटने का अधिकार होगा. अनफेयर बिजनैस प्रैक्टिस के तहत कंपनी द्वारा करवाए गए फर्जी रिव्यू पाए जाने पर कानूनी कदम उठाए जाएंगे.

ताकि उपभोक्ता सतर्क रहें

पोर्टल पर विक्रेता का पूरा पता और कौंटैक्ट नंबर देना जरूरी हो. रिफंड और रिटर्न पौलिसी स्पष्ट रूप से पठनीय हो तो उपभोक्ता खरीदारी से पहले ही सतर्क होगा.

पिछले वर्षों में औनलाइन उपभोक्ता लगातार बढ़ रहे हैं. साथ ही ई कौमर्स कंपनियों के खिलाफ शिकायतों में भी बढ़ोतरी हुई है. आमतौर पर डिलिवरी में देरी, गलत प्रोडक्ट, रिटर्न और रिप्लेसमैंट के साथ रिफंड को ले कर शिकायतें होती हैं. इसलिए समय के साथ चलते हुए अपनी सतर्कता से औनलाइन शौपिंग को मजेदार, सुविधाजनक अनुभव बनाएं न कि विवादों में उल?ा कर अपना समय बरबाद कर और तनाव बढ़ाएं. हर सिक्के के 2 पहलू होते हैं.

औनलाइन प्लेटफौर्म्स को शोरूम या दुकान के खर्च से छुटकारा मिल जाती है, उन की बिक्री चौबीसों घंटे चलती रहती है. अत: वे अपेक्षाकृत सस्ता सामान उपलब्ध करवा सकते हैं, किंतु पैकिंग एवं डिलिवरी का अतिरिक्त व्यय भी उन्हें उठाना पड़ता है.

तो ठगी से बच सकते हैं

उपभोक्ता की दूरिज्ट से यदि हम और्डर करने से पहले फेक रेटिंग और रिव्यूज की जांच कर लें तो हम ठगी से बच सकते हैं. द्घड्डद्मद्गह्यश्चशह्ल.ष्शद्व वैब साइट की मदद से किसी भी सामान की फेक रेटिंग और रिव्यूज पढ़ सकते हैं. सभी यूजर्स के लिए यह वैब साइट मुफ्त उपलब्ध है. फेक चैक करने के लिए इस वैब साइट पर लौगइन करने की जरूरत नहीं होती.

जो भी सामान खरीदना चाहते हैं वह लिंक कापी करें और फिर लिंक को इस वैब साइट पर पेस्ट कर एनालाइज बटन पर क्लिक कर दें. इस के बाद आप नीचे फेक रेटिंग और रिव्यू देख सकते हैं. औनलाइन शौपिंग प्लेटफौर्म साल में 1 या 2 बार सेल के शौपिंग फैस्टिवल मनाते हैं, जिन में कम समय में ज्यादा विक्रीय होने के कारण कुछ कम कीमत पर सामान उपलब्ध हो जाता है, इसलिए जागरूग बने रहिए और औनलाइन शौपिंग के मजे उड़ाते रहिए. नई मोबाइल डिपैंडैंट पीढ़ी के साथसाथ दुनियाभर में औनलाइन शौपिंग का क्रेज बढ़ता जा रहा है.

मिनटों में बनाएं ये 3 खूबसूरत नेलआर्ट

नाखूनों की सजावट ना केवल आपके हाथों को सुंदर दिखाती है बल्कि आपकी खूबसूरती में भी चार चांद लगाती है. आजकल शादी-पार्टी से लेकर आफिस में भी नेल आर्ट बहुत खूबसूरत लगते हैं. ये आपको कूल लुक देते हैं. तो आइए एक नजर डालते हैं कुछ ऐसे ही ‘नेल आर्टस’ पर, जिन्हें आप मिनटों में घर पर ही बना सकती हैं.

पहली डिजाइन

काले चटक रंग और ट्रांसपेरेंट नेलपालिश लें. इसके बाद काली नेलपालिश को बेस कोट की तरह अपने नाखूनों पर लगा लें. जब यह सूख जाए तो बीच वाली ऊंगली पर एक लाईन में अलग-अलग रंगों से डौट्स रखें. वहीं दूसरी ऊंगलियों पर कुछ दो या तीन डौट्स रखें. सूख जाने पर इसके उपर ट्रांसपेरेंट नेलपालिश लगा लें.

दूसरी डिजाइन

अब दूसरा नेलआर्ट बनाने के लिए गुलाबी, ट्रांसपेरेंट और ग्लिटर नेलपालिश लें. नाखूनों पर ट्रांसपेरेंट नेलपालिश लगाकर सूखने दें. सूखने पर काले रंग से नेलआर्ट टूल या सेफ्टी पिन की मदद से बारीक लाइन खींचे. गुलाबी रंग से उस लाइन के दायीं ओर दो सुंदर पत्तियां बनाएं. काले रंग से पत्तियों की आउट लाइन बनाएं. पत्तियां सूख जाएं तो उनपर ग्लिटर नेलपालिश लगाएं. ये आपके नाखूनों पर बेहद जचेंगी.

तीसरी डिजाइन

इसके लिए पांच चटक रंग की नेलपालिश, पुराना टूथ ब्रश, काली और ट्रांसपेरेंट नेलपालिश लें. अब अपने पांचों नाखूनों पर अलग-अलग रंग की नेल पालिश लगा लें. सूखने पर एक प्लेट में इनसे अलग रंग की नेल पालिश लें. टूथ ब्रश में इन नेलपालिश को लगाकर बारी-बारी से हर एक नाखून पर स्प्रे करें. नेलपेंट अगर आसपास की स्किन पर लग जाए तो इसे रिमूवर की मदद से छुड़ा लें. आखिर में ट्रांसपेरेंट नेल पालिश से फिनिशिंग दें.

आप चाहे तो इसी तरह और भी कई नए डिजाइन के नेल आर्ट ट्राई कर सकती हैं.

घर पर बनाएं स्मोकी कैलिफोर्निया वौलनट सूप

अगर आप अपने बच्चों के लिए हेल्दी और टेस्टी सूप बनाना चाहते हैं तो कैलिफोर्निया के वौलनट सूप की रेसिपी ट्राय करें. आजकल के बदलते मौसम में ये रेसिपी आपके लिए काम की है.

हमें चाहिए

– 500 ग्राम पार्सनिप कटे

– 1 बड़ा चम्मच औलिव औयल

– थोड़ी सी थाइम की पत्तियां

– थोड़ा सा नमक और कालीमिर्च

– 1 प्याज कटा

– 1 बड़ा चम्मच मक्खन

– 2 नाशपाती छिली व कटी

– 800 एमएल वैजिटेबल स्टाक

– 600 एमएल दूध

– 75 ग्राम कैलिफोर्निया वॉलनट्स.

स्मोकी वॉलनट्स के लिए

– 2 छोटे चम्मप मैपल सीरप

– 1 छोटा चम्मच स्मोक्ड चिली

– 2 छोटा चम्मच सोया सौस

– 50 ग्राम कैलिफोर्निया वॉलनट्स

– 1 बड़ा चम्मच प्याज कटा और गार्निश के लिए वॉलनट्स औयल.

बनाने का तरीका

ओवन को 180 डिग्री सेंटिग्रेट पर गरम कर  बेकिंग ट्रे पर पार्सनिप रख कर उस पर औलिव औयल लगाएं. अब थाइम, थोड़ा सा नमक व कालीमिर्च डाल कर मिलाएं. अब ओवन में तब तक पकाएं जब तक वे सुनहरे न हो जाएं. इस बीच स्मोकी कैलिफोर्निया वालनट्स बनाने के लिए मैपल सीरप, चिली और सोया सौस को अच्छी तरह से मिला कर फेंटें और कैलिफोर्निया वॉलनट्स पर डाल कर कोटिंग करें. फिर इसे छोटी बेकिंग ट्रे में रख कर ओवन में 8-10 मिनट तक पकाएं.

ठंडा कर काटें. एक बड़े सौस पैन को हलकी आंच पर रख कर उस में मक्खन डाल कर प्याज को नर्म होने तक चलाती रहें. अब नाशपाती डाल कर 8-10 मिनट तक पकाएं. फिर पार्सनिप और वैजिटेबल स्टाक डाल कर पुन: 15 मिनट तक ढक कर पकाएं. फिर इस में दूध डाल कर स्मूद होने तक चलाती रहें. अब कौलिफोर्निया वॉलनट्स मिला कर स्वादानुसार नमक व कालीमिर्च मिलाएं. सूप को बाउल में निकाल कर उस पर स्मोकी कैलिफोर्निया वॉलनट्स व प्याज डालें. कुछ बूंदें वॉलनट्स औयल की डाल कर सर्व करें.

डाइबिटीज को हराना चाहती हैं तो आज ही अपनाएं ये डाइट

आज लोगों के बीच तेजी से फैलने वाली बीमारियों में से एक है डायबिटीज. समय के साथ इसका रूप भयावह होता जा रहा है, ये एक जानलेवा बीमारी के तौर पर सामने आई है. ये बीमारी शरीर में इंसुलिन का अच्छे से प्रोड्कशन ना होने के कारण होती है. जानकारों की माने तो अगर डायबिटीज को नियंत्रण में न रखा जाए तो इससे किडनी और दिल की बीमारी होने के साथ व्यक्ति का वजन भी बढ़ने लगता है.

इस खबर में हम आपको कुछ घरेरू चीजों के बारे में बताएंगे जिसके नियमित प्रयोग से आप इस बीमारी से निजात पा सकती हैं.

तांबे के बर्तन में पिएं पानी

जानकारों की माने तो डाइबिटिक मरीजों को तांबे के बर्तन में पानी पीना पेट के लिए काफी असरदार होता है. इसके लिए तांबे के बर्तन में पानी भरकर रातभर रख दें, सुबह उठकर उस पानी को पीलें. इससे तांबे के एंटीऔक्सीडेंट और एंटी इंफ्लामेट्री गुण पानी में आ जाते हैं, जो डायबिटीज को कंट्रोल में रखने में मदद करते हैं.

मेथी का दाना

कई स्टडीज में ये बात स्पष्ट हुई है कि डाइबिटीज को कंट्रोल करने में मेथी का दाना काफी लाभकारी है. इस पर हुए शोधों के मुताबिक , रोजाना गर्म पानी में भीगी हुई 10 ग्राम मेथी दाने का सेवन करने से टाइप-2 डायबिटीज कंट्रोल में रहती है. मेथी दाने में मौजूद फाइबर धीरे-धीरे ही ब्लडस्ट्रीम में शुगर को रिलीज करता है.

डाइबिटीज मरीजों को केवल मीठी चीजों को छोड़ना ही काफी नहीं होता, बल्कि उन्हें अपनी डाइट में बहुत सी चीजें जोड़नी होती हैं. इस रोग के मरीजों को करेला, आंवला और एलोवेरा जैसे खाद्य पदार्थों को अपनी डाइट से जोड़ना चाहिए. डाइबिटीज में ये तत्व काफी असरदार होते हैं. आंवला में मौजूद फाइबर डायबिटीज के मरीजों को बहुत फायदा पहुंचाता है.

महंगे ख्वाब: भाग 3- रश्मि को कौनसी चुकानी पड़ी कीमत

राहुल और रश्मि इधरउधर बाइक से घूमने लगे. आज रश्मि काफी खुश थी, हो भी क्यों न, आज उस के सपनों के पर निकल आए थे. काफी देर घूमने के बाद राहुल ने रश्मि से कहा, ‘‘ऐसा है, इधरउधर घूमने से बेहतर है कि तुम आज मेरे रूम चलो, वहीं बैठ कर ढेर सारी बातें करेंगे.’’

रश्मि ने मारे खुशी के इस बात की तरफ जरा भी ध्यान नहीं दिया कि शहर में किसी लड़के के रूम में जाने के क्या माने होते हैं.

रश्मि पहली बार राहुल के रूम में आई थी. राहुल किराए के मकान में रहता था और भी कई लड़के उसी मकान में किराएदार थे. इन सब बातों से बेपरवा रश्मि वहां आ गई थी. राहुल रूम में अकेला रहता था, इसलिए उसे किसी के आने का कोई डर नहीं था. राहुल का कमरा देखने में अच्छा था, लेकिन सारा सामान इधर से उधर तक बिखरा था.

‘‘राहुल, तुम्हारा रूम कितना गंदा है, लगता है कभी इस की सफाई नहीं करते?’’

‘‘अब कौन रोजरोज सफाई अभियान चलाए,’’ राहुल एकदम पास आ कर बोला. थोड़ी देर बात करते हुए राहुल रश्मि से एकदम सट कर बैठ गया और उस के कंधे पर अपने हाथों को रख लिया.

रश्मि के कुछ न कहने पर उस का हौसला बढ़ गया और अचानक से रश्मि के नाजुक गालों को चूम लिया.

‘‘यह क्या कर रहे हो,’’ रश्मि उस के पास से हटते हुए बोली. लेकिन उसी पल राहुल ने पागल आशिकों की तरह उस का हाथ पकड़ कर खींच लिया, रश्मि उस के ऊपर आ गिरी. अब रश्मि उस की मजबूत बांहों में समा चुकी थी.

ऐसा नहीं है कि रश्मि ने राहुल से छूटने की कोशिश न की हो, लेकिन राहुल उसे अपने फौलादी हाथों से जकड़े हुए था. रश्मि उस की बांहों में शिकार बने परिंदे की तरह छटपटा रही थी, लेकिन उस की सारी कोशिशें नाकाम रहीं. इस का दूसरा पहलू यह भी था, रश्मि खुद ही राहुल की बांहों में प्यार के गोते लगाना चाहती थी. रश्मि अब राहुल के जिस्म में लता की तरह लिपटी हुई थी और रेगिस्तान में मछली की तरह प्यार में तड़प रही थी. राहुल भी सारी सरहदें पार कर के हद से गुजर जाना चाहता था. प्यार की तड़प, जज्बातों की प्यास और जिस्म की आग दोनों तरफ से इस कदर लगी थी कि उन्हें अच्छेबुरे की सुध ही न रही.

रफ्तारफ्ता यह सिलसिला चलता रहा और प्यार करने की चाहत दिनबदिन बढ़ती गई. लेकिन क्या यह प्यार था या सिर्फ चाहत या जो जिस्मों की प्यास बुझाने के लिए था? इस रिश्ते का नाम कुछ भी हो, एक बात तो तय थी कि इन में से कोई भी ईमानदार नहीं था. रश्मि को मौडल बनना था और राहुल को जिस्म की आग ठंडी करनी थी. रश्मि अपने ख्वाबों को हकीकत बनाने के लिए अपना सबकुछ दांव पर लगा चुकी थी, उसे सिर्फ कामयाबी चाहिए थी, फिर चाहे जैसे मिले. इस से रश्मि को कोई फर्क नहीं पड़ता था.

अकसर सुनने में आता है कि झूठ को इतनी बार बोलो कि वह सच लगने लगे, लेकिन आखिर कब तक? कब तक आप किसी से इस तरह से फरेब करते रहेंगे. एक दिन तो सचाई दुनिया के सामने आनी ही है और यह सचाईर् रश्मि के सामने बहुत भयानक रूप में आई.

रश्मि मौडल बनने के लिए कुछ भी कर सकती थी, इसलिए राहुल ने उसे उंगलियों पर नचाना शुरू कर दिया था. वह उसे आजकल में टालता रहा, फिर एक दिन उसे स्टूडियो में ले जा कर उस का फोटोशूट करवाया. विकास सर बोले ‘‘रश्मि, आप को मौडल बनना है?’’

‘‘जी सर,’’ रश्मि बोली.

‘‘तो आप कल से इस तरह के गांव वाले कपड़े पहन कर मत आना.’’

‘‘जी सर,’’ रश्मि ने हामी भरी.

अगले दिन रश्मि काफी भड़कीला सूट पहन कर आई और फोटोशूट के लिए तैयार हो गई. कैमरामैन शौट लेने के लिए रेडी था. उस ने कई एंगल से शौट लिए. लेकिन विकास जिस तरह का शौट चाहते थे, उन्हें नहीं मिल पा रहा था. वे उठ खड़े हुए और रश्मि को डांटते हुए बोले कि तुम्हें इतना भी नहीं मालूम की कैसे कपड़े पहन कर आया जाता है.

फिर उन्होंने कैमरामैन से डिजाइन किए ड्रैसेज लाने को कहा. उस ने एक बौक्स से कुछ ड्रैसेस निकालीं और रश्मि को पहनने को दीं. रश्मि जब चेंजिंग रूम में गई और एक ड्रैस पहनी और वहीं लगे आईने में देखा तो शरमा गई. जो ड्रैस पहनी थी, उस से बमुश्किल ही जिस्म छिप पा रहा था. लेकिन यह सब तो करना ही था. इसी तरह कई ड्रैसेज में उस ने पोज दिए, रश्मि आज काफी नर्वस थी, उस की हालत देख कर राहुल उसे करीब कर के बोला, ‘‘रश्मि, यह सब तो करना ही पड़ेगा, अब मौडल जो बनना है.’’

‘‘हां राहुल, फिर भी मुझे कुछ अच्छा नहीं लग रहा,’’ रश्मि उदासी से बोली.

रात को रश्मि काफी देर तक छत से लटकते पंखे को निहारती रही, ‘क्या मैं जो कर रही हूं, वह ठीक है? या मौडल बनने के चक्कर में किसी दलदल में फंस गई हूं.’ काफी रात तक वह जागती रही, लेकिन उस के लिए किसी नतीजे पर पहुंचना मुश्किल था. एक तरफ बचपन से पाला हुआ ख्वाब था, तो दूसरी तरफ ख्वाबों को हकीकत में बदलने का मौका और इस मौके में कई तरह के खौफनाक मोड़. आज रश्मि का फोटोशूट भोपाल से बाहर एक फार्महाउस में होना था. इसलिए थोड़ी देर बाद रश्मि तैयार हो कर राहुल की बाइक पर शहर से दूर किसी हाइवे पर फर्राटा भरते हुए चली जा रही थी. करीब 40 मिनट बाद उन की बाइक हाइवे से उतर कर एक ऊबड़खाबड़ सड़क पर हिचकोले खाते हुए मंजिल की तरफ बढ़ी.

बा?इक एक आलीशान फार्महाउस के सामने आ कर रुकी. राहुल ने हौर्न बजाया. गेट खुला. फिर दोनों अंदर साथ गए. वहां जा कर रश्मि ने देखा कि फार्महाउस काफी बड़ा है. सामने ही उसे विकास सर नजर आ गए. रश्मि ने नमस्ते कहा. इस के जवाब में विकास सर ने भी.

अंदर जा कर रश्मि ने देखा तो खानेपीने का इंतजाम पहले से ही था. वहीं टेबल पर कुछ बोतलें शराब की थीं. यह सब देख कर रश्मि को अजीब लगा, लेकिन फिर सोचा कि यह सब आज के दौर में चलता है. थोड़ी देर बाद सभी एक बड़े डाइनिंग टेबल पर बैठ कर खानेपीने लगे.

‘‘रश्मि,’’ सक्सेना सर ने उसे शराब पीने का औफर दिया. लेकिन रश्मि ने साफ मना कर दिया. ‘‘यह सब चलता है,’’ राहुल पीते हुए बोला. इस बार रश्मि ने जाम को हाथों से थाम लिया. शराब पीते ही रश्मि को बड़ा अजीब लगा, जैसे कोई तीखी चीज गले को चीर कर अंदर उतर गई हो.

विकास सर और राहुल पर शराब का सुरूर चढ़ा तो उन्होंने इधरउधर की भद्दी बातें करनी शुरू कर दीं. थोड़ी ही देर में विकास सर ने रश्मि को अपने पास बुलाया और हाथ पकड़ कर उसे अपनी गोद में बैठा लिया और छेड़खानी करने लगे.

‘‘सर, आप क्या रहे रहे हैं, यह सब गलत है,’’ रश्मि ने कहा. लेकिन सही और गलत की किसे परवा थी.

‘‘तुम्हें मौडल नहीं बनना क्या, देखो रश्मि, जिंदगी में कुछ बड़ा करना है तो यह सब गलत नहीं है, और मेरे कुछ करने से तुम्हारी खूबसूरती में कोई कमी नहीं आ जाएगी,’’ यह कहते हुए सक्सेना के हाथ रश्मि के गालों से होते हुए उस के सीने पर आ कर थम गए.

‘‘सर, यह तो मेरे बचपन का शौक है,’’ रश्मि धीमी आवाज में बोली.

‘‘फिर क्यों मना कर रही हो, हम कोई गैर नहीं हैं, हमें अपना ही समझो,’’ विकास सर कहते हुए बदहवास उस पर टूट पड़े.

रश्मि मौडल बनने के लिए अपनी इज्जत दांव पर लगाने से गुरेज करने वालों में नहीं थी, वह जिस्म को मंजिल हासिल करने का सिर्फ जरिया मानती थी और आज उस ने वही किया. यह बात और है कि एक औरत होने के नाते उसे भी थोड़ीबहुत झिझक थी, जो अब टूट चुकी थी.

मन में बाराबर यही आ रहा था कि बचपन से संजोए ख्वाब शायद अब हकीकत बन जाएं. लेकिन यह ख्वाब महंगे साबित होंगे, उस ने सोचा न था. लेकिन महंगे ख्वाब आसानी से पूरे नहीं होते हैं, इस बात का एहसास उसे अब तक हो चुका था. तभी तो अब रश्मि इस खेल में मंझी हुई खिलाड़ी की तरह विकास का साथ दे रही थी. यह सब करते हुए अब उसे कोई पछतावा नहीं हो रहा था, बल्कि जिंदगी का अहम हिस्सा मान कर अपने सपनों के साथ सैक्स का भी मजा लेने लगी. उसे अपनी मंजिल मिल गई थी.

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