धुआं-धुआं सा: भाग 2- क्या था विशाखा का फैसला

अगले दिन मैं ने औफिस से छुट्टी ले ली. बच्चों के स्कूल चले जाने के बाद मैं ने एक बार फिर विशाखा से बात करने की सोची, “क्या तुम्हें पहले से शक था, पर कैसे?”

“हर औरत के मन में यह डर होता है कि कहीं उस का पति भटक न जाए. कहीं उस का कोई अफेयर न हो जाए. लेकिन मैं इस बात से सदा आश्वस्त रही क्योंकि मैं ने तुम्हारी दृष्टि को कभी किसी औरत का पीछा करते नहीं पकड़ा. तुम ने कभी किसी स्त्री के लिए कोई भद्दा मज़ाक, स्त्रीअंगों को ले कर कोई अश्लील टिप्पणी या फिर दूसरों की पत्नियों की प्रशंसा नहीं की. कई वर्ष मैं इस बात से खुश रही. शुरू में मुझे अक्ल भी कहां थी. लेकिन फिर समय बदला. समाज में एलजीबीटी जैसे पारिभाषिक शब्द सुनाई देने लगे. इन के बारे में पढ़ने पर मुझे ज्ञात हुआ कि कितनी तरह की सैक्सुएलिटी होती हैं. फिर कुछ जाननेसमझने के साथ ही मुझे तुम्हारे कृत्यों पर संदेह होने लगा. नहीं जानती कैसे… शायद मैं ने तुम्हारी दृष्टि को अकसर दूसरी महिलाओं तो नहीं, पर दूसरे पुरुषों को अजीब-सी निगाहों से ताकते हुए पाया. हम जिस पार्टी में जाते, मैं तुम्हें वहां उपस्थित आदमियों की ओर एक अलग ढंग से देखते हुए देखती. तब मुझे अपने मन में उठते प्रश्नों के उत्तर न मिलते. लेकिन कल रात से सबकुछ समझ आने लगा है,” कह विशाखा हलके से हंसी, “जानते हो, कल रात मैं काफी देर तक चुपचाप आंसू बहाती रही. इतनी खामोशी से कि कहीं तुम सुन न लो. पर अब हंसी आ रही है. सबकुछ साफ नज़र आ रहा है.

“वो एक खिलौना होता है न, जैक इन द बौक्स, जिस में एक कठपुतले को डब्बे से बाहर आने से रोकने के लिए हर बार डब्बे का ढक्कन ज़ोर से बंद करना पड़ता है. हम दोनों अपनी शादीशुदा ज़िंदगी में अब तक वही करते आ रहे थे,” विशाखा के यह कहते ही मेरी आंखों से कुछ बूंदें छलक गईं. जिस सचाई को मैं सारी ज़िंदगी नकारता आया, जिस को मैं ने कभी नहीं स्वीकारा, उस सच को विशाखा ने कितनी सहजता से अपना लिया. यह उस का मेरे प्रति प्रेम नहीं तो क्या है.

“तुम रोते क्यों हो?” विशाखा ने फौरन मेरे आंसू पोंछे, “मुझे तो तुम्हारे लिए कष्ट हो रहा है. ज़िंदगी का कितना लंबा अरसा तुम ने एक झूठ का आवरण ओढ़ कर गुज़ार दिया. और मैं खुश हूं कि जब तुम ने इस सचाई को स्वीकारा, तो सब से पहले यह बात मुझे बताई,” विशाखा अब भी हौले से मुसकरा रही थी, फिर आगे बोली, “शादी के बाद जब मैं पहली बार 2 हफ्तों के लिए मायके गई थी और लौटने पर मैं ने तुम से पूछा था कि क्या तुम ने मुझे मिस किया, तब तुम ने बेहद ईमानदारी से कहा था कि नहीं. तब मेरे अंदर कुछ चटक गया था. मुझे लगने लगा था कि तुम्हारी ज़िंदगी में शायद मेरी वह जगह नहीं जो मेरी ज़िंदगी में तुम्हारी है.”

विशाखा उस दिन को याद कर काफी कुछ कहती रही और मैं पुराने ख़यालों में खो गया. वही दिन था जब मुझे भी इस बात से हैरत हुई थी कि मैं ने विशाखा को याद नहीं किया. न जवानी का उफान, न कोई शारीरिक ज़रूरत – पत्नी को वापस अपने पास पा कर भी मेरे भीतर कोई व्याकुलता नहीं हुई थी. उस दिन मेरे अंदर एक आवाज़ ने कहा था कि यह झूठी ज़िंदगी कब तक जीता रहेगा… विशाखा की गैरमौजूदगी ने मेरे अंदर ज़रा भी तृष्णा पैदा नहीं की थी और न ही उस की समीपता ने मेरे मन में कोई हलचल मचाई थी. लेकिन मैं उस से प्यार करता हूं.

मैं अपनी शादी, अपनी गृहस्थी नहीं तोड़ना चाहता. आज विशाखा ने जिस प्रकार मेरे सच को स्वीकार लिया, उस से मुझे अपने भीतर एक तड़कन अनुभव होने लगी है. मानो, मेरे पेट में एक गहरी खाई खुल गई है और मेरे स्कंधों पर एक वज़नी पत्थर रख दिया गया है. एक खालीपन और एक बोझ, गिर जाने का डर और संभाल न सकने की विवशता. मेरा दिल कह रहा था कि मैं अपनी सचाई को सिरे से काट कर कहीं दूर फेंक आऊं. मैं वैसा क्यों नहीं हूं जैसा सब मुझे समझते आए हैं. संभवतया मेरे जैसा हर व्यक्ति इस कटीली डगर से गुज़र चुका होगा.

“आगे क्या करना चाहती हो?” मेरे प्रश्न पर विशाखा बोली, “जैसा चल रहा है, चलने देते हैं. हम ने शादी की है. हमारे बच्चे हैं जिन की अभी यह सब समझने की न तो स्थिति है और न ही उम्र. तुम से शादी कर के वैसे भी मुझे शारीरिक सुख बहुत कम मिला. मैं ने इसे ही अपनी नियति मान लिया. मैं इस बात से ही खुश रही कि तुम मुझ से प्यार करते हो, मेरा ध्यान रखते हो, मेरी भावनाएं समझते हो और उन की कद्र करते हो. बच्चों के पालनपोषण में तुम ने हमेशा मेरा साथ निभाया. घर के कामकाज में भी तुम ने हमेशा मेरा हाथ बंटाया. एक पत्नी को और क्या चाहिए होता है? हमारे देश में ये सब बातें शारीरिक सुख की कमी भरने के लिए पर्याप्त होती हैं. वैसे भी हमारे समाज में कहां ऐसी इच्छाओं की बात करने की स्वतंत्रता है. जो कुछ है उसे घर की चारदीवारी के अंदर ही रहने देते हैं.”

विशाखा की बात मुझे जंच गई. मैं ने अपनी असलियत बयान कर दी. मगर किसी को कुछ पता नहीं चलेगा. मेरे व्यक्तित्व पर जो मुखौटा लगा हुआ है, वह भी बरकरार रहेगा. जब विशाखा को कोई आपत्ति नहीं तो मेरे लिए भी सबकुछ वैसा ही चलता रहेगा. समाज में जो मेरी एक छवि है- सफल व्यक्ति, सुंदर पत्नी, प्यारे बच्चे- वह भी बनी रहेगी और गृहस्थी यथावत चलती रहेगी.

मैं यही सोच कर आगे बढ़ा कि मेरे जीवन में कुछ नहीं बदलेगा. परंतु मेरी सचाई को अपनाने के बाद मेरे अंतर्मन में खुद ही परिवर्तन आने आरंभ हो गए. आज तक के वैवाहिक जीवन में जो फर्ज़ मैं विशाखा के प्रति निभाता आया था, अब उसे निभाने के लिए मुझे मानसिक दबाव लगना बंद हो गया. अब मैं किसी मजबूरी के अंतर्गत विशाखा के नज़दीक न जाता. उसे मेरी असलियत ज्ञात है, सोच कर मैं ने बड़े ही सुविधाजनक रूप से उस से दैहिक दूरी बना ली.

इधर औफिस में राघव की ओर अब मेरा दिल और तीव्रता से धावने लगा. दिल अब स्वच्छंद पंछी सा उड़ता. लगता जैसे उस के पंख पूरी उड़ान भरने को मचल रहे हैं. मस्तिष्क भी क्या चीज़ है, कब क्या खेल खेलने लगे, हमें खुद भी पता नहीं चलता. अब मेरे लिए मेरी शादी केवल एक आवरण बन कर रह गई थी. एक ऐसा खोल जिस में सब का नफा निश्चित था – मेरा, विशाखा का और मेरे बच्चों का. सब को उन की सुविधानुसार वह मिल रहा था जो उन्हें चाहिए था. मुझे सामाजिक स्टेटस, विशाखा को बिना कमाने की चिंता किए एक आरामदेह ज़िंदगी और बच्चों को मातापिता का प्यार व संरक्षण. जब सबकुछ ठीक तरह से चल रहा है तो मैं अपने मन को मसोस कर क्यों रखूं? क्यों न मैं वह सब पा लूं जिस की कल्पनामात्र कर के मैं ने आज तक का जीवन बिताया. मैं ने राघव के नेत्रों में भी वही कशिश अनुभव की थी, इसलिए अब की बार उस के सामने आने पर नज़रें चुरा कर भागने की जगह मैं ने दिल खोल कर सामना करने की ठानी.

राघव मुझ से उम्र में काफी छोटा है. यही कोई 10-12 वर्ष. उस की बात ही कुछ और है. उस का जोश, उस की उमंग, उस का जनून – पता नहीं उसे मुझ में क्या दिखाई दिया जो वह मेरी तरफ आकर्षित हुआ. पूछता हूं तो बस मुझे बांहों में कस कर भर लेता है. उस की यही बात तो मेरे दिल को छू जाती है. जब उस के साथ होता हूं तो उस का प्यार देख कर अकसर मेरे नेत्र सजल हो उठते हैं. खुद पर इतराने लगता हूं मैं.

राघव इस शहर में अकेला रहता है. उस का परिवार झांसी में रहता है. एक दिन मैं ने उस से पूछा कि क्या उस के घरवालों को पता है कि वह गे है. उस के हामी भरने पर मुझे हैरानी हुई. लेकिन उस ने जो कुछ आगे कहा उसे सुन कर मेरे होश उड़ गए.

“वहां मुझे कोई नहीं समझ सकता. मैं ने एक बार अपने भाई के मुंह से अपनी सचाई अपने घरवालों को बताने का विफल प्रयास किया था. डैडी तो आक्रामक हो गए थे और ममा न जाने किन स्वामीबाबाओं से मेरा भूत उतरवाने की बात करने लगी थीं. अगले कुछ दिनों में उन्होंने अपनी पूजामंडली की सहायता से एक बाबा को फाइनल कर डाला था और मुझे एक आश्रम में ले गई थीं. वह बाबा मुझे हिजड़ा कह कर एक मोरपंख की मोटी झाड़ू मेरे ऊपर मारने लगा. चोट के कारण मैं रोने लगा. मैं काफी डर गया था.

“उस समय मेरी उम्र केवल 17 वर्ष थी. यह सब होता रहा और मेरी ममा हाथ जोड़ कर सामने बैठी देखती रहीं. मैं किसी तरह भाग कर वहां से घर आ गया था. फिर मेरे डैडी की बारी आई. वे मुझे एक डाक्टर के पास ‘कंवर्जन थेरैपी’ के लिए ले गए. डाक्टर के पूछने पर जब मैं ने बताया कि मुझे मेन परफ्यूम अधिक पसंद हैं तो उस ने मुझे ऐसे स्टोर में अकसर जाने की सलाह दी जहां विमेन परफ्यूम हों. कितना बचकाना था यह सब! मुझे शाकाहारी भोजन खाने की सलाह दी गई. एक कौपी में राम-राम लिखते रहने को कहा गया. कुछ ने तो मुझे सन्यास तक लेने का मशवरा दे डाला,” कह राघव हंसने लगा, फिर बोला, “इसीलिए अपने पैरों पर खड़ा होते ही मैं यहां चला आया, उन सब से दूर. मुझे क्या पता था कि यहां आने से मेरा एक और फायदा हो जाएगा- आप से मुलाक़ात.”

‘Gadar 2’ हिट होते ही Sunny Deol ने बढ़ाई फीस, ‘Border 2’ के लिए वसूलेंगे इतने रकम

बॉलीवुड के दमदार एक्टर सनी देओल अपनी धांसू आवाज और एक्टिंग के लिए जाने जाते है. एक्टर की ‘Gadar 2’ ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाया था. सनी की ‘गदर 2’ के सामने अक्षय कुमार की ‘OMG 2’  कुछ खास प्रर्दशन नहीं कर पाई. वहीं सनी देओल की ‘गदर 2’ ने बॉक्स ऑफिस पर 500 करोड़ से ज्यादा की कमाई की. गदर 2 के बाद से सनी देओल का नाम ‘बॉडर 2’ से जुड रहा है. इसी को लेकर बड़ी खबर सामने आई है कि सनी देओल ‘बॉडर 2’ के लिए कितनी फीस ले रहे है इसका खुलासा हो चुका है. सनी देओल की फीस जानकर आप भी हैरान  हो जाएंगे.

 

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सनी ने ‘बॉडर 2’ के लिए वसूली मोटी रकम

बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता सनी देओल की जबसे ‘गदर 2’ हिट हुई है तभी से वह लगातर सुर्खियों में है. ‘गदर 2’ बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचाने के बाद सनी ने अपनी फीस बढ़ा दी है. अभी हाल ही में मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि सनी देओल अपनी अपकमिंग फिल्म के लिए मोटी रकम ले रहें है. एक्टर ‘बॉडर 2’ के लिए 50 करोड़ से ज्यादा रुपये की मांग कर रहे है. बता दें कि आधिकारिक तौर पर अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई. लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक के सनी देओल ने गदर 2 के बाद से अपनी फीस बढ़ा दी है. इसके साथ ही सनी ने गदर 2 के 20 करोड़ रुपये फीस लिए थे.

 

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कब शुरु होगी ‘बॉडर 2’ की शूटिंग

‘बॉडर 2’ सनी की साल 1975 में आई सुपरहिट फिल्म का दूसरा पार्ट है. इस फिल्म में भारत और पाकिस्तान के बीच जंग दिखाई गई थी. अब फैंस को ‘बॉडर 2’ का काफी इंतजार है लेकिन अभी तक इस फिल्म की रिलीज डेट का खुलासा नहीं हुआ.

Anupamaa: कपाड़िया हाउस को हड़पेगी गुरु मां,वनराज का बिगेड़ा मानसिक संतुलन

टीवी सीरियल अनुपमा में इन दिनों काफी ड्रामा चल रहा है. शो के मेकर्स आए दिन नया ट्विस्ट और टर्न्स लेकर आ जाते है. अनुपमा सीरियल सबसे हिट शो में से एक है. काफी समय से ये टीआरपी दौड़ में काफी आगे बना हुआ है. वहीं इस शो में समर की मौत के बाद से अनुपमा पर दुखों का पहाड़ टूट चुका है. तोषू-पाखी ने समर की मौत का इंसाफ दिलाने से साफ मना कर दिया है. अब अकेले ही अनुपमा और वनराज समर की मौत के बाद कानूनी लड़ाई लड़ रहे है. रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर अनुपमा में आने वाला है ये ट्विस्ट.

कपाड़िया हाउस को अपने हाथ में लेगी गुरु मां

टीवी सीरियल अनुपमा  के अपकमिंग एपिसोड में देखने को मिलेगा कि मालती देवी कपाड़िया हाउस में धीरे धीरे खुद को सेट करने की कोशिश करेंगी. वह छोटी अनु से दोस्ती कर लेती है और उसे अपना पूरा समय देने लगती है. दूसरी तरफ शाह हाउस में वनराज की हालत ठीक नहीं है. वह बेहोश हो जाता है काफी समय बाद उसे होश आता है. इसी बीच अनुज बापू जी से घर जाने की बात करता है, तब अनुपमा उसे इशारे से रोककर कहती है कि वह भी उसके साथ चल रही है. ये देखकर अनुज काफी खुश हो जाता है.

 

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अनुपमा से सावल करेगा अनुज

रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर अनुपमा में आगे देखने को मिलेगा कि अनुपमा और अनुज एक साथ घर आ रहे होते है. तभी अनुपमा अनुज से कहती है कि आपने गुरू मां को घर में रहने की इजाजत दी है, जो बहुत अच्छी बात है. एक मां का अपने बेटे से दूर रहने का दर्द मैं महसूस कर सकती है. आपको और उन्हें एक दूसरे का पूरा साथ मिलेगा.’ अनुपमा की इस बात पर अनुज बोलता है, मुझे अनुपमा का पूरा साथ कब मिलेगा. ये बात सुनकर अनुपमा शात हो जाती है. इसके बाद अनुपमा उस बच्चे से मिलती है जिसे समर के अंग दान किए गए थे. इसके बाद वह अनुज के साथ घर पहुंच जाती है.

 

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फेस्टिवल पर बनाएं बूंदी फ़ज और बूंदी पैना कोटा

फेस्टिवल्स का सीजन प्रारम्भ हो चुका है और हमारे यहां त्योहारों का मतलब ही मीठा होता है. त्योहारों पर घर में यूं ही बहुत सारा काम रहता है इसलिए इन दिनों इस तरह की मिठाइयां बनानी चाहिए जिन्हें बनाने में अधिक परिश्रम भी न लगे और मिठाई बनकर तैयार भी हो जाये. घर पर बनी मिठाइयों का सबसे बड़ा लाभ ये होता है कि उनमें मिलावट नहीं होती साथ ही घर पर बनाई जाने से ये काफी सस्ती भी पड़तीं हैं. आज हम आपको बूंदी से ऐसी ही दो रेसिपी बनाना बता रहे हैं जिन्हें आप झटपट बड़ी आसानी से घर पर बना सकतीं हैं हमने यहां पर बाजार से लायी रेडीमेड बूंदी का प्रयोग किया है आप चाहें तो घर पर भी बूंदी बना सकतीं हैं तो आइये देखते हैं कि इन्हें कैसे बनाते हैं.

  1. बूंदी पेना कोटा

कितने लोगों के लिए   4

बनने में लगने वाला समय  30 मिनट

मील टाइप  वेज

सामग्री

  1. रेडीमेड बूंदी  1 कप

  2. ओवरनाईट भीगे पिस्ता  1 कप

   3. अमूल क्रीम  1 टेबलस्पून

   4. दूध  2 टेबलस्पून

    5. ओलिव आयल  1/2 टीस्पून

    6. पिसी शकर   1/4 टीस्पून

     7. कॉर्नफ्लोर  1/8 टीस्पून

     8. इलायची पाउडर  1/4 टीस्पून

      9. बारीक कटा पिस्ता 1 टीस्पून

     10. हरा रंग  1 बूँद

      11. गुलाब की सूखी पत्तियां    4

विधि-

बनाने से 12 घंटे पहले पिस्ता को भिगो दें सुबह इनके छिल्के निकालकर पिस्ता को तेल के साथ मिक्सी में बारीक पीस लें. अब इसमें दूध और क्रीम डालकर फिर से 2-3 बार ब्लेंड कर लें. पिसे मिश्रण को एक पैन में डालकर शकर, इलायची पाउडर,  हरा रंग, कॉर्नफ्लोर मिलाकर गैस पर लगातार चलाते हुए 10 मिनट तक पकाएं. जब मिश्रण थोडा सा गाढ़ा हो जाये तो गैस बंद कर दें. जब ठंडा हो जाये तो आइसक्रीम बाउल या लम्बे ग्लास में पहले 1 टीस्पून बूंदी फिर पिस्ता का गाढ़ा दूध डालकर ऊपर से फिर बूंदी डालें. कटे पिस्ता और गुलाब की पंखुड़ियों से सजाकर सर्व करें.

 2. बूंदी फ़ज

कितने लोगों के लिए   8

बनने में लगने वाला समय   30 मिनट

मील टाइप  वेज

सामग्री                           

  1. रेडीमेड बूंदी   250 ग्राम
  2. मिल्क पाउडर    1 कप
  3. फुल क्रीम दूध  1 कप
  4. किसी गाजर   500 ग्राम
  5. शकर    2 टेबलस्पून
  6. घी   1/4 टीस्पून
  7. इलायची पाउडर   1/8 टीस्पून
  8. बारीक कटे मेवा  1 टेबलस्पून

विधि

दूध, घी, 1 चम्मच शकर, इलायची पाउडर और मिल्क पाउडर को एक साथ अच्छी तरह मिलाकर गैस पर तब तक पकाएं जब तक कि मिश्रण मावा जैसा गाढ़ा न होने लगे. अब इस तैयार मिश्रण को चिकनाई लगी एक ट्रे में फैला दें. इस मावे के ऊपर बूंदी को इस तरह फैलाएं कि मावा पूरी तरह कवर हो जाए. एक दूसरे पैन में 1/4 टीस्पून घी डालकर किसी गाजर डाल दें.

जब गाजर गल जाये तो बची एक टीस्पून शकर डालकर पकाएं. जब गाजर का पानी पूरी तरह सूख जाये तो गाजर के इस मिश्रण को बूंदी के ऊपर अच्छी तरह फैला दें. ऊपर से कटे मेवा डालकर फ्रिज में 2 घंटे के लिए सेट होने के लिए रख दें. 2 घंटे बाद चौकोर पीसेज में काटकर मेहमानों को सर्व करें.

40 के बाद भी रहें खिलीं खिलीं

महिलाएं अक्सर खुद को सुंदर देखना चाहती है लेकिन कुछ महिलाओं को लगता है कि उम्र बढ़ने के साथ उनका चेहरा खूबसूरत नहीं दिखेगा. अगर आपको भी ऐसा ही लगता है तो परेशान होने की बात नहीं क्योंकि आप अपनी उम्र के हिसाब से मेकअप कर खुद को जवां दिखा सकती हैं. उम्र बढ़ने के साथ आपकी स्किन में कुछ बदलाव आ सकते हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप खूबसूरत नहीं दिखेंगी. आप अपनी स्किन की देखभाल के लिए स्वस्थ आहार और व्यायाम करें. इसके साथ आप मेकअप से भी अपनी खूबसूरती को बढ़ा सकती हैं इसीलिए यहां हम आपके लिए ऐसे ही कुछ मेकअप प्रोडक्ट्स की जानकारी को साझा करेंगे, जो आपको जवानों जैसी खुबसूरती देने में मदद कर सकते हैं. आइए जानते हैं-

  1. प्राइमर

प्राइमर आपकी स्किन को सॉफ्ट और फ्लैट करता है जिससे आप इसके ऊपर प्रोडक्ट लगाएं तो वह अपनी जगह पर टिके रहे और बेहतर दिखे. यह छिद्रों की उपस्थिति को कम और आपकी स्किन की रंगत को एक समान करता है. आपको ऐसा प्राइमर चुनना चाहिए जो आपकी स्किन के लिए हेल्दी हो जिसमें ग्लिसरीन, एलोवेरा जैसे पौष्टिक और हाइड्रेटिंग गुणों वाले तत्व शामिल हो.

2. फाउंडेशन

फाउंडेशन आपके चेहरे के दाग, धब्बों झुर्रियों को छुपाने के लिए काफी जरूरी होता है इसलिए फाउंडेशन के साथ कोई समझौता न करें. ऐसे फाउंडेशन को चुने जो आपकी स्किन टोन को इवन और सॉफ्ट बनाता है.

3. कंसीलर

कंसीलर आपकी आंखों के नीचे काले घेरे, दाग, धब्बे को छुपाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इससे आपके चेहरे की थकान को भी कम किया जा सकता है. कंसीलर का चुनाव करते समय यह ध्यान रखें की यह आपकी स्किन को हाइड्रेटेड और बैलेंस रखें. कंसीलर का लॉन्ग लास्टिंग होना आपका मेकअप के लिए बेहद जरूरी है.

4. ब्लश

ब्लश का इस्तेमाल करना आपकी डेली लाइफ के लिए बेहद आवश्यक है. यह आपकी स्किन को शाइनी बनाता है. गुलाबी रंग सभी स्किन टोन के लिए अच्छा रहता है इसीलिए ज्यादातर महिलाएं गुलाबी रंग के ब्लश का ही इस्तेमाल करती हैं. अगर आप मेकअप कम इस्तेमाल करती हैं तो भी ब्लश लगाना ना भूले.

5. आईलाइनर, मस्कारा और आईशैडो

अगर आप हमेशा थके हुए दिखते हैं तो आपको आंखों के मेकअप पर ध्यान देना चाहिए जिसके लिए आईलाइनर, मस्कारा,आईशैडो का उपयोग करें. आईशैडो का चुनाव करते समय अपनी स्किन टोन का ध्यान रखें. मस्कारा लगाते वक्त अपनी आंखों की पलकों को कर्ल करें.

6. लिपस्टिक

लिपस्टिक आपके लुक को निखारने का सबसे अच्छा तरीका होती है. लिपस्टिक से आपके चेहरे पर अलग ही चमक होती है इसलिए लिपस्टिक का कलर ऐसा चुने जो आपकी स्किन टोन के लिए परफेक्ट हो. लिपस्टिक को लगाने से पहले अपने होठों पर लिप बाम जरूर लगाए. हाइड्रेटेड और लॉन्ग लास्टिंग लिपस्टिक आपके अट्रैक्टिव लुक को पूरा दिन बनाए रखती है.

Festival Special: दिवाली पर इन तरीकों से सजाएं अपना घर

दिवाली आते ही सबसे पहले शुरु होती है घर की साफ-सफाई और सफाई के बाद नंबर आता है घर की सजावट का. अगर आप अपने घर के वही पुराने ओल्ड लुक से बोर हो चुकी हैं तो इस दिवाली अपने घर को दीजिए एक ट्रडिशनल न्यू लुक.

फूलों से सजावट

घर को ज्यादा फूलों से सजाने की बजाएं आप एक या दो लड़ियों को घर के दरवाजे पर लगा दें. इससे आपके घर को सिंपल के साथ-साथ फेस्टिवल डेकोरेशन भी मिल जाएगी.

रंगोली

घर के मुख्य द्वार पर रंगोली बनाने से घर तो सुंदर लगता ही है, आने वाले मेहमान भी इसे देखकर बेहद खुश हो जाएंगे. वैसे तो आप पारंपरिक रंगों और फूलों का इस्तेमाल कर अपने हाथों से रंगोली बना सकती हैं. लेकिन अगर आप ये नहीं कर सकतीं तो बाजार में एक से बढ़कर एक रेडीमेड रंगोली भी मौजूद है जिनका आप इस्तेमाल कर सकती हैं. एंट्रेंस के साथ ही लिविंग रूम के सेंटर में भी रंगोली बनाकर घर की शोभा बढ़ायी जा सकती है.

कार्नर को दीए से सजाएं

ये तो आप भी मानेंगी कि सिर्फ घर की लाइटें बदल देने से ही घर का पूरा लुक चेंज हो जाता है. और इसमें दीए अहम रोल अदा करते हैं. ऐसे में इस दिवाली पर घर को सजाने के लिए आर्टिफिशियल लाइट्स की जगह दीयों का इस्तेमाल करें. और घर के हर एक कार्नर को दीए से सजाएं.

तोरण और कंदील

घर के मुख्य द्वार के साथ ही हर कमरे के दरवाजे पर तोरण लगाएं. इसके लिए आप पारंपरिक पत्तों और फूल के तोरण का भी इस्तेमाल कर सकती हैं. या फिर बाजार में मिलने वाले डिजाइनर तोरण का भी. इसके साथ ही घर के मेन हौल को सजाने के लिए कंदील का भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

कैंडल डेकोरेशन

आजकल तो बजार में कई तरह की कैंडल मिल जाती है. आप उससे घर को डिफरेंट और सिंपल लुक दे सकती हैं. इन कैंडल को आप खिड़की और छतों पर सजा सकती हैं.

टी लाइट्स का करें इस्तेमाल

रंगीन कांच के कंटेनर में टी लाइट्स रखकर उसे ड्राइंग रूम और डाइनिंग रूम की सीलिंग से लटका दें. इससे किसी के इनसे टकराने का खतरा भी नहीं रहेगा और ये घर को बेहद सुंदर लुक भी देंगे.

इन महिलाओं को होती है डाइबिटीज की परेशानी

पुरुष हो या महिलाएं सबके लिए डाइबिटीज किसी चुनौती से कम नहीं है. इस परेशानी से बचने के लिए जरूरी है कि आप शांत रहें, कूल रहें किसी भी तरह की परेशानी में अपना पौजिटिव अप्रोच रखें. आपके स्वभाव में कई तरह की गंभीर बीमारियों का राज झुपा है.

हाल ही में हुई एक स्टडी में ये बात सामने आई है कि जो महिलाएं पौजिटिव अप्रोच के साथ अपना जीवन गुजारती हैं, उनमें टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा बहुत कम होता है. यह दावा मेनोपौज के बाद महिलाओं पर की गई स्टडी में किया गया है.

इस स्टडी में वूमेन हेल्थ इनिशिएटिव के आंकड़ो का इस्तेमाल भी किया गया है. इस शोध में करीब एक लाख तीस हजार महिलाओं को शामिल किया गया था. इन महिलाओं को शुरू में डाइबिटीज की परेशानी नहीं थी. लेकिन बाद में इनमें से कइयों को डाइबिटीज की परेशानी हुई.

स्टडी में सकारात्मक और नकारात्मक स्वभाव की महिलाओं की तुलना की गई. शोध में शामिल एक एक्सपर्ट की माने तो किसी भी व्यक्ति का व्यक्तित्व जीवनभर एक समान ही रहता है. यही कारण है कि नेगेटिव स्वभाव वाली महिलाओं को पॉजिटिव स्वभाओं वाली माहिलाओं के मुकाबले डायबिटीज का खतरा अधिक होता है.

उन्होंने आगे बताया कि महिलाओं के व्यक्तित्व से हमें ये जानने में मदद मिलेगी कि उन्होंने डायबिटीज होने की कितनी संभावना है. स्टडी के नतीजों में यह भी सामने आया कि मेनोपौज के बाद नेगेटिव स्वाभाव और डायबिटीज होने का गहरा संबंध है.

धुआं-धुआं सा: भाग 1- क्या था विशाखा का फैसला

सोचा था जब मैं परिपक्व हो जाऊंगा, तब अपने अंदर चले आ रहे इस द्वंद्व का समाधान भी खोज लूंगा. मुझे हमेशा से एक धुंध, एक धुएं में जीने की आदत सी पड़ गई है. कुछ भी साफ नहीं, न अंदर न बाहर. अकसर सोचता रह जाता हूं कि जो कुछ मैं महसूस करता हूं, वह क्यों. दूसरों की भांति क्यों नहीं मैं. सब अपनी दुनिया में खोए… मग्न… और शायद खुश भी. लेकिन एक मैं हूं जो बाहर से भले ही मुसकराता रहूं पर अंदर से पता नहीं क्यों एक उदासी घेरे रहती है. अब जबकि मेरी उम्र 35 वर्ष के पार हो चली है, तो मुझे अपनी पसंद, नापसंद, प्रेरणाएं, मायूसियों का ज्ञान हो गया है. लेकिन क्या खुद को समझ पाया हूं मैं!

आज औफिस की इस पार्टी में आ कर थोड़ा हलका महसूस कर रहा हूं. अपने आसपास मस्ती में नाचते लोग, खातेगपियाते, कि तभी मेरी नज़र उस पर पड़ी. औफिस में नया आया है. दूसरे डिपार्टमैंट में है. राघव नाम है. राघव को देखते ही भीतर कुछ हुआ. जैसे कुछ सरक गया हो. कहना गलत न होगा कि उस की दृष्टि ने मेरी नज़रों का पीछा किया. कभी जैंट्स टौयलेट में तो कभी बोर्डरूम में, कभी कैफ़ेटेरिया में तो कभी लिफ्ट में – मैं ने हर जगह उस की दृष्टि को अपने इर्दगिर्द अनुभव किया. यह सिलसिला पिछले कुछ दिनों से यों ही चला आ रहा था.

वैसे मुझे यह शक होता भी क्योंकि मैं औरतों में रुचि नहीं रखता जबकि 12वीं में ही मैं ने गर्लफ्रैंड बना ली थी. कालेज में भी एकदो अफेयर हुए. पर मेरा दिल अकसर लड़कों की ओर देख धड़कता रहता. होस्टल में मेरा एक बौयफ्रैंड भी था, सब से छिप कर. तब मुझे लगता था कि मैं इस से प्यार तो करता हूं पर यह बात मैं किसी से कह नहीं सकता. उस जमाने में यह जग उपहास का कारण तो था ही, गैरकानूनी भी था. और फिर हमारा धर्म, और उस के स्वघोषित रक्षक जो इस समाज की मर्यादा बनाए रखने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं, यहां तक कि हिंसा पर भी उतर सकते हैं, उन से अपनी रक्षा कर पाना मेरे लिए संभव न था. चुप रहने में ही भलाई थी. फिर मेरा दिमाग कहता कि यह मेरे दिल की भटकन है. मैं केवल नए पार्टनर टटोल रहा हूं. कभी लड़की की तरफ आकर्षित होता हूं तो कभी किसी लड़के की तरफ आसक्ति हो जाती.

अब तक मुझे लगता था कि मैं बाइसैक्सुअल हूं – मतलब, औरतें भी पसंद हैं और मर्द भी. तभी तो मैं ने शादी की. बाहर से देखने पर मेरी ज़िंदगी हसीन थी – एक खूबसूरत साथ देने वाली बीवी, 2 नन्हेंप्यारे बच्चे. गृहस्थी में वह सब था जिस की कोई कल्पना करता है. मुझे याद है कि जब मातापिता शादी के लिए ज़ोर दे रहे थे, रिश्तों की कतार लगा करती थी, तब मुझे अपने अंदर छाई यह बदली अकसर कंफ्यूज कर दिया करती. मैं किसी लड़की को पसंद नहीं कर पाता. और समय मांगता. लेकिन जब विशाखा से मिला तो लगा जैसे इस से अच्छी दोस्त मुझे ज़िंदगी में नहीं मिल सकती. और मेरा यह निर्णय गलत नहीं रहा. विशाखा मुझे अच्छी तरह समझती है. मेरे मन की तहों में घुस कर वह मेरी हर परेशानी हर लेती है. मेरे लिए उस से अच्छी दोस्त इस संसार में नहीं है. हमारे बच्चों और हमारी गृहस्थी को उस ने बखूबी संभाल रखा है.

मगर जैसे मेरा दिल राघव को देख कर उछलने लगता है, वैसे कभी विशाखा को देख कर नहीं उछला. हां, हम पतिपत्नी हैं. हमारे बीच हर वह संबंध है जो पतिपत्नी के रिश्ते में होता है, परंतु वह जज़्बा नहीं, जो होना चाहिए. हमारे रिश्ते में पैशन नहीं, जनून नहीं, फुतूर नहीं. कभी रहा ही नहीं. एक ड्यूटी की तरह मैं अपने फर्ज़ निभाता रहा हूं. पर विशाखा ने कभी शिकायत नहीं की. शायद हिंदुस्तानी औरतों को यही घुट्टी बचपन से पिलाई जाती है कि पति को खुश रखना उन की ज़िम्मेदारी है, उन्हें खुश करना पति की नहीं. पति की हां में हां मिलाना, पति के हिसाब से जीना, उसे हर सुख देना, उस की परेशानियों को दूर करना – ये सब पत्नी के खाते में आता है.

लोकलाज और मातापिता के अरमानों का खयाल करते हुए मेरी शादी हो गई. तब उम्र कुछ अधिक नहीं थी हम दोनों की. समाज में मुझे वह सब मिला जो कोई चाहता है. स्थिर, आबाद, स्थायी जीवन को जीते हुए धीरेधीरे मैं मरने सा लगा. कहने को मैं हमेशा वफादार रहा, परंतु मेरी नज़रें दूसरे दिलकश मर्दों को चोरी से देखते रहना नहीं छोड़ सकीं. समय बीतने के साथ मुझे अपनी सैक्सुएलिटी पर शक बढ़ता गया. सब के सामने मैं खुश था, एक अच्छा जीवन व्यतीत कर रहा था, मगर मेरा एक हिस्सा सांस नहीं ले रहा था. लगता जैसे मेरे हाथों से सबकुछ छूट रहा है.

लेकिन आज की पार्टी ने जैसे मेरे मन पर जमीं सारी काई धो डाली. पिछले कुछ महीनों से, जब से राघव कंपनी में आया, तब से मेरा दिल इस काई पर अकसर फिसलता रहा था. जब भी राघव मेरे सामने आता, मेरा दिल उस की ओर भागने लगता. और मुझे विश्वास था कि उस के दिल का भी यही हाल है. कई महीनों की लुकाछिपी के बाद, आज राघव ने मुझे अकेले में घेर लिया. उस के हाथ मेरे बदन पर रेंगने लगे. मुझे कुछ होने लगा. ऐसा जैसा आज तक नहीं हुआ. नहीं, नहीं, हुआ है – कालेज में. आज राघव के स्पर्श से एक लंबे अरसे की मेरी तड़प को सुकून मिला. मैं तो इस भावना को भूल ही गया था. विशाखा के साथ जो कुछ होता, उसे केवल कर्तव्यपरायणता का नाम दिया जा सकता है. प्यार का एहसास, इश्क की लालसा और सारे बंधन तोड़ देने की धुन मुझे राघव के साथ अनुभव होने लगी. राघव अविवाहित था. उस के लिए किसी का साथ अपने जीवनसाथी से धोखा न था. मेरे लिए था. मुझे आगे बढ़ने से पहले विशाखा का चेहरा नज़र आने लगा. मुझे कुछ समय रुकना पड़ेगा. लेकिन अब विशाखा को मेरी सचाई से अवगत कराने का वक्त आ गया है. मेरा दिल बारबार मुझे विशाखा को अपनी भावनाएं बताने की ज़िद करने लगा. मैं यह भी समझता हूं कि हो सकता है कि इस सचाई की मुझे एक बड़ी कीमत चुकानी पड़े. इसी डर की वजह से मैं आज तक एक खोल के अंदर दुबका रहा. चुप रहा कि कोई मेरी असलियत जान न पाए, स्वयं मैं भी नहीं. परंतु अब मुझ से रुकना मुश्किल होने लगा.

मैं विशाखा को तकलीफ नहीं पहुंचाना चाहता था. मगर मुझे भी एक ही जीवन मिला है जो तेज़ी से निकलता जा रहा है. यू लिव ओनली वंस – मैं अपने मन में दोहराता जा रहा था. तभी विशाखा कमरे में दाखिल हुई. हर रात काम खत्म कर के हाथों पर लोशन लगाना उसे अच्छा लगता है. ड्रैसर के सामने बैठी वह अब अपने बाल काढ़ कर चोटी बनाने लगी.

“तुम से कुछ बात करनी है,” मैं ने कहा.

“हम्म?” वह बस इतना ही बोली.

अपनी पूरी हिम्मत जुटा कर मैं ने विशाखा के सामने अपनी सैक्सुएलिटी का सच परोस दिया, “मैं स्ट्रेट नहीं हूं, विशाखा…” उस ने कुछ नहीं कहा. ऐसा लगा जैसे उसे इस बात को सुनने की उम्मीद थी, न जाने कब से. शायद वह जानती थी मेरे सच को. बस, मेरे कहने का इंतज़ार कर रही थी. विशाखा ने बिस्तर पर अपनी साइड बैठते हुए मेरी ओर देखा. आंखों में एक सूनापन, एक खामोशी… उस की भावनाहीन शून्य दृष्टि देख कर मुझे अंदर तक कुछ काट गया.

“कुछ कहोगी नहीं?” मैं ने पूछा.

“क्या कहूं, क्या सुनना चाहते हो?”

“विशाखा,” उस का हाथ अपने हाथों में लेते हुए मैं ने कहा, “तुम मेरी सब से अच्छी दोस्त हो, तुम से अधिक मुझे कोई नहीं समझता. यह सचाई मैं ने केवल तुम्हें बताई है. इस पूरी दुनिया में तुम्हारे सिवा कोई मेरा इतना अपना नहीं.”

“मैं समझती हूं, इसीलिए चुप हूं.”

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