फेसबुक फ्रैंडशिप: भाग 1- वर्चुअल दुनिया में सचाई कहां है

शुरुआत तो बस यहीं से हुई कि पहले उस ने फेस देखा और फिदा हो कर फ्रैंड रिक्वैस्ट भेजी. रिक्वैस्ट 2-3 दिनों में ऐक्सैप्ट हो गई. 2-3 दिन भी इसलिए लगे होंगे कि उस सुंदर फेस वाली लड़की ने पहले पूरी डिटेल पढ़ी होगी.

लड़के के फोटो के साथ उस का विवरण देख कर उसे लगा होगा कि ठीकठाक बंदा है या हो सकता है कि तुरंत स्वीकृति में लड़के को ऐसा लग सकता है कि लड़की उस से या तो प्रभावित है या बिलकुल खाली बैठी है जो तुरंत स्वीकृति दे कर उस ने मित्रता स्वीकार कर ली.

यह तो बाद में पता चलता है कि यह भी एक आभासी दुनिया है. यहां भी बहुत झूठफरेब फैला है. कुछ भी वास्तविक नहीं. ऐसा भी नहीं कि सभी गलत हो. ऐसा भी हो सकता है कि जो प्यार या गुस्सा आप सब के सामने नहीं दिखा सकते, वह अपनी पोस्ट, कमैंट्स, शेयर से जाहिर करते हो.

अपनी भावनाएं व्यक्त करने का साधन मिला है आप को, तो आप कर रहे हैं अपने को छिपा कर किसी और नाम, किसी और के फोटो या किसी काल्पनिक तसवीर से. यदि अपनी बात रखने का प्लेटफौर्म ही चाहिए था तो उस में किसी अप्सरा की तरह सुंदर चेहरा लगाने की क्या जरूरत थी? आप कह सकती हैं कि हमारी मरजी. ठीक है, लेकिन है तो यह फर्जी ही. आप साधारण सा कोई चित्र, प्रतीक या फिर कोई प्राकृतिक तसवीर लगा सकते थे.

खैर, यह कहने का हक नहीं है. अपनी मरजी है. लेकिन जिस ने फ्रैंड रिक्वैस्ट भेजी उस ने उस मनोरम छवि को वास्तविक जान कर भेजी न आप को? आप शायद जानती हो कि मित्र संख्या बढ़ाने का यही साधन है, तो भी ठीक है, लेकिन बात जब आगे बढ़ रही हो तब आप को समझना चाहिए कि आगे बढ़ती बात उस सुंदर चित्र की वजह से है जो आप ने लगाई हुई है अपने फेसबुक अकांउट पर.

आप ने अपने विषय में ज्यादा कोई जानकारी नहीं लिखी. आप से पूछा भी मैसेंजर बौक्स पर जा कर. और पूछा तभी, जब बात कुछ आगे बढ़ गई थी. कोई किसी से यों ही तो नहीं पूछ लेगा कि आप सिंगल हो. और आप का उत्तर भी गोलमोल था. यह मेरा निजी मामला है. इस से हमारी फेसबुक फ्रैंडशिप का क्या लेनादेना?बात लाइक और कमैंट्स तक सीमित नहीं थी.

बात मैसेंजर बौक्स से होते हुए आगे बढ़ती जा रही थी. इतनी आगे कि जब लड़के ने मोबाइल नंबर मांगा तो लड़की ने कहा, ‘‘फोन नहीं, मेल से बात करो. फोन गड़बड़ी पैदा कर सकता है. किस का फोन था, कौन है वगैराहवगैरहा.’’अब मेल पर बात होने लगी. शुरुआत में लड़के  ने फेस देखा. मित्र बन जाने पर लड़के ने विवरण देखा उसे पसंद आया.

उसे किसी बात की उम्मीद जगी. भले ही वह उम्मीद एकतरफा थी. उसे नहीं पता था शुरू में कि वह जिस दुनिया से जुड़ रहा है वहां भ्रम ज्यादा है,  झूठ ज्यादा है. पहले लड़की के हर फोटो, हर बात पर लाइक, फिर अच्छेअच्छे कमैंट्स और शेयर के बाद निजी बातें जानने की जिज्ञासा हुई दोनों तरफ से. हां, यह सच है कि पहल लड़के की तरफ से हुई. लड़के ही पहल करते हैं. लड़कियां तो बहुत सोचनेविचारने के बाद हां या नहीं में जवाब देती हैं. बात आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी लड़के पर ही आती है समाज, संस्कारों के तौर पर. तो शुरुआत लड़के ने ही की.

इंटरनैट की दुनिया में आ जाने के बाद भी समाज, संस्कार नहीं छूट रहे हैं यानी 21वीं सदी में प्रवेश किंतु 19वीं सदी के विचारों के साथ. फे  सबुक पर सुंदर चेहरे से मित्रता होने पर लड़के के अंदर उम्मीद जगी. विस्तृत विवरण देख कर उस ने हर पोस्ट पर लाइक और सुंदर कमैंट्स के ढेर लगा दिए. बात इसी तरह धीरेधीरे आगे बढ़ती रही.

लड़की के थैंक्स के बाद जब गुडमौर्निंग, गुडइवनिंग और अर्धरात्रि में गुडनाइट होने लगी तो किसी भाव का उठना, किसी उम्मीद का बंधना स्वाभाविक था. लगता है कि दोनों तरफ आग बराबर लगी हुई है. लड़के को तो यही लगा. लड़के ने विस्तृत विवरण में जाति, धर्म, शिक्षा, योग्यता, आयु सब देख लिया था. पूरा स्टेटस पढ़ लिया था और उस को ही अंतिम सत्य मान लिया था.

जो बातें स्टेटस मेें नहीं थीं, उन्हें लड़का पूछ रहा था और लड़की जवाब दे रही थी. जवाब से लड़के को स्पष्ट जानकारी तो नहीं मिल रही थी लेकिन कोई दिक्कत वाली बात भी नजर नहीं आ रही थी. फेसबुक पर ऐसे सैकड़ों, हजारों की संख्या में मित्र होते हैं सब के. आमनेसामने की स्थिति न आए, इसलिए एक शहर के मित्र कम ही होते हैं. होते भी हैं तो लिमिट में बात होती है. सीमित लाइक या कमैंट्स ही होते हैं खास कर लड़केलड़की के मध्य.लड़का छोटे शहर का था.

विचार और खयालात भी वैसे ही थे. लड़कियों से मित्रता होती ही नहीं है. होती है तो भाई बनने से बच गए तो किसी और रिश्ते में बंध गए. नहीं भी बंधे तो सम्मानआदर के भारीभरकम शब्दों या किसी गंभीर विषय पर विचारविमर्श, लाइक, कमैंट्स तक. ऐसे में और उम्र के 20वें वर्ष में यदि किसी दूसरे शहर की सुंदर लड़की से जब बात इतनी आगे बढ़ जाए तो स्वाभाविक है उम्मीद का बंधना.फोटो के सुंदर होने के साथसाथ यह भी लगे कि लड़की अच्छे संस्कारों के साथसाथ हिम्मत वाली है.

किसी विशेष राजनीतिक दल, जाति, धर्म के पक्ष या विपक्ष में पूरी कट्टरता और क्रोध के साथ अपने विचार रखने में सक्षम है और आप की विचारधारा भी वैसी ही हो. आप जब उस की हर पोस्ट को लाइक कर रहे हैं तो जाहिर है कि आप उस के विचारों से सहमत हैं. लड़की की पोस्ट देख कर आप उस के स्वतंत्र, उन्मुक्त विचारों का समर्थन करते हैं, उस के साहस की प्रशंसा करते हैं और आप को लगने लगता है कि यही वह लड़की है जो आप के जीवन में आनी चाहिए.

आप को इसी का इंतजार था.बात तब और प्रबल हो जाती है जब लड़का जीवन की किसी असफलता से निराश हो कर परिवार के सभी प्रिय, सम्माननीय सदस्यों द्वारा लताड़ा गया हो, अपमानित किया गया हो, अवसाद के क्षणों में लड़के ने स्वयं को अकेला महसूस किया हो और आत्महत्या करने तक का विचार मन में आ गया हो. तब जीवन के एकाकी पलों में लड़के ने कोई उदास, दुखभरी पोस्ट डाली हो. लड़की ने पूछा हो कि क्या बात है और लड़के ने कह दिया हाले दिल का.

लड़की ने बंधाया हो ढांढ़स और लड़के को लगा हो कि पूरी दुनिया में बस यही है एक जीने का सहारा.लड़के ने पहले अपने ही शहर में महिला मित्र बनाने का प्रयास किया था, जिस में उसे सफलता भी मिली थी. लड़की खूबसूरत थी. पढ़ीलिखी थी. स्टेटस में खुले विचार, स्वतंत्र जीवन और अदम्य साहस का परिचय होने के साथ कुछ जबानी बातें भी थीं.

लड़के ने इतनी बार उस लड़की का फोटो व स्टेटस देखा कि दोनों उस के दिलोदिमाग में बस गए. फोटो कुछ ज्यादा ही. अपने शहर की वही लड़की जब उसे रास्ते में मिली तो लड़के ने कहा, ‘‘नमस्ते कल्पनाजी.’’लड़की हड़बड़ा गई, ‘‘आप कौन? मेरा नाम कैसे जानते हैं?’’ लड़के ने खुशी से अपना नाम बताते हुए कहा, ‘‘मैं आप का फेसबुक फ्रैंड.’’और लड़की ने गुस्से में कहा, ‘‘फेसबुक फ्रैंड हो तो फेसबुक पर ही बात करो. घर वालों ने देख लिया तो मुश्किल हो जाएगी.

गर्भावस्था में इसे करें अपनी डाइट में शामिल, स्वस्थ होता है बच्चा

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के खानपान का विशेष ध्यान दिया जाता है. इस दौरान गर्भवती महिला के डाइट का सीधा प्रभाव उसके बच्चे पर भी होता है. इसलिए जरूरी है कि उसके पोषण का खासा ख्याल रखा जाए. जानकारों की माने तो गर्भावस्था के दौरान अंडा खाना बेहद फायदेमंद होता है. अंडे में भरपूर मात्रा में प्रोटीन, सेलेनियम, जिंक, विटामिन A, D और कुछ मात्रा में B कौम्प्लेक्स भी पाया जाता है. जो शरीर की सभी जरूरतों को पूरा करने का सबसे बेहतर सूपर फूड है.

कई तरह के स्टडीज से भी ये बात सामने आई है कि गर्भावस्था के दौरान अंडा खाने से बच्चे का दिमाग तेज होता है. इसके साथ ही उसकी सीखने की क्षमता भी तेज होती है. इस खबर में हम आपको बताएंगे कि गर्भावस्था में अंडा खाना कैसे लाभकारी है और आपके बच्चे पर उसका सकारात्मक असर कैसे होगा.

अंडा प्रोटीन का प्रमुख स्रोत है. इसमें प्रोटीन की प्रचूरता होती है. आपको बता दें कि गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए प्रोटीन बेहद जरूरी तत्व होता है. असल में उसकी हर कोशिका का निर्माण प्रोटीन से होता है. गर्भावस्था में अंडा खाने से भ्रूण का विकास बेहतर होता है.

आपको बता दें कि गर्भवती महिला के लिए एक दिन में दो सौ से तीन सौ तक एडिशनल कैलोरी लेनी चाहिए. इससे उसे और बच्चे, दोनों को पोषण मिलता है. अंडे में करीब 70 कैलोरी होती है जो मां और बच्चे दोनों को एनर्जी देती है.

आपको बता दें कि अंडे में 12 तरह के विटामिन्स होते हैं. इसके अलावा कई तरह के लवण भी इसमे होते हैं. इनमें मौजूद choline और ओमेगा-3 फैटी एसिड बच्चे के संपूर्ण विकास को बढ़ावा देते हैं. इसके सेवन से बच्चे को मानसिक बीमारियां होने का खतरा कम हो जाता है और उसका दिमागी विकास भी होता है.

अगर गर्भवती महिला का ब्लड कोलेस्ट्रौल स्तर सामान्य है तो वह दिन में एक या दो अंडे खा सकती है. अंडे में कुछ मात्रा में सैचुरेटेड फैट भी होता है. अगर महिला का कोलेस्ट्रौल लेवल अधिक है तो उसे जर्दी वाला पीला हिस्सा नहीं खाना चाहिए.

मेरे पिताजी को डायबिटीज है, उन्हें चश्मा से कम दिखता है, क्या ये गंभीर समस्या है

सवाल

मेरे पिताजी को डायबिटीज है. उन्हें चश्मा लगाने के बाद भी धुंधला दिखाई देता है? क्या यह आंखों से संबंधित किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत है?

जवाब

यह समस्या उन्हें डायबिटिक रैटिनोपैथी के कारण हो रही है. रक्त में शुगर के उच्च स्तर के कारण रैटिना क्षतिग्रस्त हो जाता है. अगर समय रहते इस का डायग्नोसिस और उपचार न कराया जाए तो आंखों की रोशनी भी जा सकती है. इसीलिए जिन लोगों को डायबिटीज है, उन्हें हर 6 महीनों में अपनी आंखों की जांच कराने के लिए कहा जाता है. आप तुरंत उन की आंखों की जांच कराएं और रक्त में शुगर के स्तर को भी अनियंत्रित न होने दें.

ये भी पढ़ें…

मैं एक इवेंट मैनेजमैंट कंपनी में काम करती हूं. मैं दूर का चश्मा लगाती है लेकिन मैं इस से छुटकारा पाना चाहती हूं. क्या मैं लैसिक सर्जरी करा सकती हूं?

जवाब

लैसिक यानी लेजर असिस्टेचड इन सिटु केरैटोमिलियोसिस, निकट दृष्टि दोष (मायोपिया) और दूर दृष्टिन दोष (हाइपरमैट्रोपिया) को ठीक करने के लिए उपचार का एक नवीनतम विकल्प है. यह एक बहुत ही आसान प्रक्रिया है, जिसे करने में 15 मिनट से कम का समय लगता है. लैसिक प्रत्येक के लिए उपयुक्त नहीं है और विशेष रूप से उन लोगों के लिए जिन्हें अधिक नंबर के चश्मे लगते हैं और जिन का कार्निया पतला है. आप किसी अच्छे नेत्ररोग विशेषज्ञ से इस बारे में सलाह लें कि लैसिक आप के लिए कितनी उपयुक्त है या आप के लिए उपचार का कोई और विकल्प ठीक रहेगा.

पाठक अपनी समस्याएं इस पते पर भेजें : गृहशोभा, ई-8, रानी झांसी मार्ग, नई दिल्ली-110055. व्हाट्सऐप मैसेज या व्हाट्सऐप औडियो से अपनी समस्या 9650966493 पर भेजें.

टेस्टी मसाला राइस डोनट और कैप्सिकम लौलीपौप घर पर बनाएं

जब हमें शाम को भूख लगती है तो कुछ न कुछ जरुर खाने का मन करता है. ऐसे में कुछ टेस्टी और झटपट बनने वाली डिश देखते है. तो घर में बनाएं टेस्टी मसाला राइस डोनट और कैप्सिकम लौलीपौप. आइए देखिए रेसिपी.

 1. मसाला राइस डोनट

सामग्री

1.  2 कप चावल उबले

 2.  2 बड़े चम्मच कौर्नफ्लोर

 3. 2 आलू उबले 

 4. 1 बड़ा चम्मच प्याज बारीक कटा 

 5.  2 हरीमिर्चें बारीक कटी 

 6.  1 छोटा चम्मच अदरक का लच्छा 

 7.  1/4 छोटा चम्मच अमचूर पाउडर 

 8.  1/4 छोटा चम्मच लालमिर्च पाउडर

 9. 1/2 छोटा चम्मच चाटमसाला 

 10. 1/4 छोटा चम्मच गरममसाला 

 11. थोड़े से छोले उबले और तेल तलने के लिए

12.  नमक स्वादानुसार.

विधि

दोनों आलू छील लें. एक को कद्दूकस करें और दूसरे के छोटे टुकड़े कर लें. चावलों को मैश कर के कद्दूकस किए आलू के साथ मिला लें. तेल, आलू के टुकड़े व उबले छोले छोड़ बाकी सारी सामग्री इन के साथ अच्छी तरह मिला कर डो बना लें. इस डो को तेल लगे सिलीकौन के डोनट मोल्ड्स में भर कर डोनट बना लें.

कड़ाही में तेल गरम करें. सारे डोनट तेल में डाल कर मध्यम आंच पर सुनहरा होने तक तलें. मसाला राइस डोनट आलू के टुकड़े, उबले छोले व टोमैटो कैचअप के साथ सर्व करें.

2. टेस्टी कैप्सिकम लौलीपौप

सामग्री

1.  1 कप सूजी बारीक 

 2. 1/2 कप आलू उबले मैश किए 

 3. 2 बड़े चम्मच अरारोट 

 4. 1/4 हरी शिमलामिर्च

 5.   1/4 पीली शिमलामिर्च द

 6. 1/4  लाल शिमलामिर्च 

 7.  2 हरीमिर्चें 

 8. 1/2 प्याज

 9.  1/4 खीरा 

 10. 2 बड़े चम्मच हरा धनिया

 11.  1 छोटी गांठ अदरक 

 12. 1 छोटा चम्मच रैड चिली फ्लैक्स 

 13.  1 छोटा चम्मच चाटमसाला

 14.  1/4 कप हरी चटनी 

 15.  तलने के लिए तेल तथा कुछ आइसक्रीम स्टिक्स 

 13.  नमक स्वादानुसार.

विधि

सारी सब्जियां बारीक काट लें. हरी चटनी, तेल तथा आइसक्रीम स्टिक्स छोड़ कर बाकी सारी सामग्री एक बाउल में डाल कर अच्छी तरह मिला कर गूंध लें. आवश्यकता हो तो थोड़ा पानी मिला लें. 10 मिनट बाद तैयार मिश्रण से नीबू के आकार की बौल्स बनाएं. इन्हें हथेली से दबाएं और इन में आइसक्रीम स्टिक्स लगा कर लौलीपौप बना लें. पैन में तेल गरम करें. तैयार लौलीपौप्स को मध्यम आंच पर सुनहरा होने तक फ्राई कर के हरी चटनी के साथ गरमगरम सर्व करें.

महंगा पड़ता है कर्ज का जाल

फिल्मों में भव्य सैटों के पीछे बड़ी मेहनत होती है और हर फिल्म में आर्ट डाइरैक्टर का बड़ा काम होता है. नितिन देसाई ने  ‘1942 ए लव स्टोरी,’ ‘हम दिल दे चुके सनम,’ ‘लगान,’ ‘देवदास,’ ‘जोधा अकबर’ जैसी फिल्मों के सैट बना कर फिल्म इंडस्ट्री में उस का बड़ा नाम था. पर सफलता जब सिर पर चढ़ने लगती है तो अकसर अच्छेभले नाक के आगे देखना बंद कर देते हैं.

नितिन देसाई ने 2005 में कर्जत रोड, मुंबई के पास 52 एकड़ जगह में एक भव्य स्टूडियो बनाया और सोचा कि वह जल्द ही मालामाल हो जाएगा. बहुत सी फिल्मों और टीवी धारावाहियों की शूटिंग वहां हुई थी पर हर सफलता के लिए एक व्यावहारिक व व्यावसायिक बुद्धि चाहिए होती है. जिन के सपने ऊंचे होते हैं और कुछ सफलताओं के सर्टिफिकेट हाथ में होते हैं वे अकसर अपनी सीमाएं भूल जाते हैं नितिन देसाई भी उन्हीं में से एक था.

58 साल के नितिन देसाई पर 252 करोड़ का कर्ज चढ़ गया और उसे यह साफ हो गया कि सबकुछ बेचने के बाद भी यह कर्ज चुकाया नहीं जा सकता. इसलिए इस मेधावी, इन्नोवेटिव आर्ट डाइरैक्टर ने तमाशदारों की जिद के कारण अपने को फांसी लगा कर जीवन लीला समाप्त कर ली.

सफलता पर गर्व करना जरूरी है पर उस में अंधा हो जाना भी गलत है. नितिन देसाई जैसे लोग कागजों पर वैसे ही सपनों के महल बना लेते हैं जैसे वे कच्ची लकड़ी, प्लाईबोर्ड और प्लास्टर औफ पैरिस के महल बनाते हैं. कर्ज लेते समय उन्हें सफलता का पूरा अंदाजा होता है. व्यावहारिक बुद्धि काल्पनिक सैंटों में खो जाती है.

यह हर देशप्रदेश में होता है. सैकड़ों लोग केवल ओवर ऐंबीशियन में फिसल जाते हैं. देश के औद्योगिक क्षेत्र आज मरघटों की तरह लगते हैं तो इसलिए कि नितिन देसाई जैसों की कमी नहीं है. बैंक कर्जा दे तो देते हैं पर तब तक वसूली के पीछे पड़े रहते हैं, जब तक कर्ज लेने वाला कंगाल और कंकाल न बन जाए.

क्या है निपल कवर और ब्रैस्ट टेप

कानपुर की रहने वाली श्रुति सक्सेना बैंगलुरु में जौब करने वाली अपनी फ्रैंड ईशा मौर्य के फ्लैट पर आई है. आज श्रुति का 24वां बर्थडे है. वह पार्टी के लिए तैयार हो रही है. लेकिन उस के सामने एक प्रौब्लम आ गई. उस ने ईशा के कहने पर औफशोल्डर बैकलैस ड्रैस ले तो ली, लेकिन अब उसे समझ नहीं आ रहा है कि वह इस ड्रैस को कैरी कैसे करे क्योंकि उस के पास जो भी ब्रा है. वह इस ड्रैस में रिवील हो रही है. परेशान हो कर श्रुति बैड के एक कोने में बैठ गई.

जब ईशा ने श्रुति को पुराने कपड़ों में देखा तो वह हैरान रह गई. ईशा ने श्रुति से रैडी न होने की वजह पूछी. तब श्रुति ने अपनी प्रौब्लम उसे बताई. ईशा कमरे के कबर्ड से एक बौक्स ले आई. फिर उसे श्रुति को देते हुए कहा कि यह लो तुम्हारी प्रौब्लम का सौल्यूशन. बौक्स में स्किन कलर के 2 सौफ्ट पैचिस थे. श्रुति समझ नहीं पा रही थी कि यह क्या है.

श्रुति के पूछने पर ईशा ने बताया कि यह सिलिकौन लिफ्ट निपल कवर है. यह ब्रा का काम करता है, लेकिन बिना स्टैप और दर्द के. तुम इसे अपनी ड्रैस के नीचे ब्रैस्ट पर इस्तेमाल कर सकती हो. श्रुति चेंजिंगरूम में गई और अपनी ड्रैस पहन कर आ गई.

श्रुति ने ऐक्साइटेड हो कर ईशा से कहा, ‘‘यह तो बहुत ही कंफर्टेबल है. मुझे लग ही नहीं रहा कि ब्रैस्ट पर कोई बोझ है. बहुत हलकाहलका लग रहा है.’’‘‘यही तो कमाल है सिलिकौन लिफ्ट निपल कवर का. पहनो भी और लगे जैसे कुछ पहना ही न हो,’’ ईशा बोली.

सिलिकौन लिफ्ट निपल कवरसिलिकौन लिफ्ट निपल कवर ब्रैस्ट को लिफ्ट करने का काम करता है. यह आउटफिट की फीटिंग अच्छी देता है. आजकल लड़कियां और महिलाएं बड़ी संख्या में इस का इस्तेमाल कर रही हैं. यह एक तरह से ब्रा न होते हुए भी ब्रा का काम करता है. यह बैकलैस ड्रैस या टौप, एलाइन ड्रैस या टौप और ब्लाउज के साथ कैरी किया जाता है. यह स्किन और ब्लैक कलर में अवलेबल है.

अगर आप भी शादी या पार्टी में हौट ड्रैस पहनना चाहती हैं और चाहती हैं कि आप की ब्रा की स्टैप भी न दिखे तो आप सिलिकौन लिफ्ट निपल कवर का यूज कर सकती हैं. यह न सिर्फ आप को ब्रा के झंझट से छुटकारा दिलाएगा बल्कि गरमी में ब्रा से होने वाली इरिटेशन से भी बचाएगा.

हालांकि यह अभी औनलाइन ही खरीदा जा सकता है. औफलाइन इस के बारे में अभी कम ही लोग जानते हैं. ये पेयर में आते हैं और कीमत 250 रुपये से 1,000 रुपये तक है.

इसी तरह निपल कवर भी होते हैं जो सिलिकौन बेस्ड होते हैं, इसलिए बहुत सौफ्ट होते हैं और ये स्कीन कलर के होते हैं. इन का इस्तेमाल उभरे हुए निपल को हाइड करने के लिए किया जाता है. इस तरह के निपल कवर को नौन पैडेड ब्रा के साथ कैरी कर सकती हैं.

कौटन या सिंपल ब्रा पहनने वाली लड़कियां और महिलाएं अकसर आउटफिट से उभरते निपल के दिखने से अनकंफर्टेबल हो जाती हैं. ऐसा ज्यादातर ठंड के मौसम में होता है. लेकिन बिग ब्रैस्ट वाली महिलाएं इस प्रौब्लम से हमेशा झिझकती हैं. ऐसे में उन्हें सिलिकौन निपल कवर अजमाना चाहिए जो उन्हें आउटफिट से उभरते निपल से राहत दिलाएगा, साथ ही इस के इस्तेमाल से वे कौन्फिडैंट भी फील करेंगी. इसे कैरी कर के आप केयर फ्री हो कर कोई भी आउटफिट पहन सकती हैं. ध्यान रहे  निपल कवर सिर्फ निपल को कवर करते हैं. उन्हें लिफ्ट नहीं करते हैं.

अलगअलग शेप में  उपलब्ध

गरमियों में निपल कवर या निपल स्टोक का यूज ब्रा से होने वाली इरिटेशन से बचाता है. निपल कवर अलगअलग शेप में भी आते हैं जैसे स्टार शेप, हार्ट शेप. इन की कीमत क्व99 से क्व500 तक है. कीमत निपल कवर की क्वालिटी पर डिपैंड करती है. अगर निपल कवर को साफसफाई के साथ रखा जाए तो एक अच्छी क्वालिटी के निपल कवर को 12 बार यूज किया जा सकता है.

इसी कड़ी में उभरे हुए निपल को हाइड करने के लिए निपल कवर स्टोक को भी अपनाया जा सकता है. निपल स्टोक को निपल पैचेस भी कहते हैं. ये अलगअलग शेप में आते हैं. इन को भी निपल कवर की तरह यूज किया जाता है. ये स्टोक वन टाइम यूज के होते हैं. अगर आप ब्रा नहीं पहनना चाहतीं और चाहतीं कि आप रिविलिंग ड्रैस भी पहन सकें तो आप ब्रैस्ट टेप का इस्तेमाल कर सकती हैं. इस के साथ ही यह नैकलाइन को भी उभारता है जो आप की खूबसूरती में चार चांद लगा देता है.

स्किन टाइप के लिए सूटेबल

सिलिकौन निपल लिफ्ट कवर की ही तरह ब्रैस्ट टेप या बूब टेप भी होती है. यह कौटन और लेटेक्स से बनी टेप होती है, जो हर स्किन टाइप के लिए सूटेबल होती है. यह फैब्रिक और स्किन के लिए डिजाइन की गई है. इस की एक साइड पर ग्लू लगा होता है और दूसरी साइड रूखी  होती है. ग्लू लगी टेप को अपनी ब्रैस्ट के साइज के अकौर्डिंग काटें और आराम से ब्रैस्ट पर पेस्ट करें.

कितनी टेप यूज करनी चाहिए इस का फैसला अपने ब्रैस्ट के साइज के आकौर्डिंग करें.इसे लंबाई या चौड़ाई किसी भी तरह यूज किया जा सकता है. अगर आप इस का इस्तेमाल ब्रैस्ट को लिफ्ट करने के लिए करना चाहती हैं तो इसे लंबाई में लगाएं. ब्रैस्ट टेप के इस्तेमाल से ब्रैस्ट एक ही पोजीशन में रहती है जिस से उस का शेप काफी टोन्ड दिखती है और ब्रैस्ट की शेप थोड़ी सी उठी हुई आती है. इस का इस्तेमाल ब्रैस्ट को हाइड करने के लिए भी किया जा सकता है.

अकसर महिलाओं को अलगअलग तरह की ड्रैस पहनने के लिए अलगअलग तरह की ब्रा खरीदनी पड़ती है जैसे औफशोल्डर ड्रैस के लिए ट्रांसपैरेंट स्टैप वाली ब्रा और अगर बैकलैस ड्रैस पहननी है तो आप सोच में पड़ जाती हैं कि इसे कैरी कैसे करें. नौर्मल ब्रा पहनने पर यह बैकलैस ड्रैस में साफ दिखाई देती है. कोई भी ब्रा पहन लो सभी बैकलैस ड्रैस में रिवील होंगी. अलगअलग ड्रैस के लिए अलगअलग तरह की ब्रा खरीदना आसान नहीं है.

यह महंगा सौदा है. ऐसे में ब्रैस्ट टेप का इस्तेमाल करना बेहद फायदेमंद साबित होगा क्योंकि इस का यूज किसी भी ड्रैस के साथ किया जा सकता है. यह किसी भी तरह की ड्रैस के साथ विजिबल नहीं होती है. अगर आप रिविलिंग ड्रैस पहनना चाहती हैं तो ब्रैस्ट टेप का यूज कर सकती हैं. जिन महिलाओं की ब्रैस्ट फ्लैट या कहें छोटी होती है. उन के क्लीवेज नहीं दिखती है वे इस टेप का इस्तेमाल कर के क्लीवेज क्रिएट कर सकती हैं. इसे बनाने के लिए ब्रैस्ट टेप को दोनों स्तनों पर चौड़ाई में लगा कर पास लाना होता है. ऐसा करने से क्लीवेज नजर आने लगेगी.

बढ़ता है कौन्फिडैंट

अगर आप बूब टेप को लिफ्ट करने के लिए इस्तेमाल करना चाहती हैं तो सब से पहले अपने निपल्स को ढकने के लिए निपल कवर का इस्तेमाल करें. शौयर्टी के लिए इस के ऊपर एक छोटा पैड या रुई रख सकती हैं. इस बात का ध्यान रखें कि टेप को सीधे अपने निपल पर नहीं लगाना है. ब्रैस्ट टेप कई कलर में आती है जैसे स्किन, ब्लैक, सिल्वर. यह किसी भी ड्रैस में विजिबल नहीं होती है. इस का इस्तेमाल किसी भी बैकलैस, औफशोल्डर, स्ट्रैपलैस, डीप नैकलाइन ड्रैस और टौप पहनने से ले कर ब्रैस्ट को लिफ्ट करने तक में किया जाता है. इस के इस्तेमाल से ब्रैस्ट को उभार, सपोर्ट और क्लीवेज मिल जाती है.

उम्र बढ़ने के साथसाथ महिलाओं को ब्रैस्ट में ढीलापन आने की समस्या हो जाती है. वह पहले जैसी अट्रैक्टिव नहीं लगती है. ऐसे में ब्रैस्ट टेप को लंबाई में लगाने पर ब्रैस्ट को लिफ्ट किया जा सकता है. इस से ब्रैस्ट सुडौल नजर आएगी. महिलाएं इस के इस्तेमाल से कौन्फिडैंट फील करती हैं.

ब्रैस्ट टेप लगाते समय रखें ये सावधानियां

  •  ब्रैस्ट टेप का इस्तेमाल करने से पहले पैच टैस्ट जरूर करें.
  • इस बात का ध्यान रखें कि ब्रैस्ट टेप लगाते समय ब्रैस्ट पर बिलकुल गंदगी न हो. ब्रैस्ट टेप को लगाने से पहले बूब्स को टौवेल से अच्छी तरह पोंछ लें. अगर आप ब्रैस्ट टेप लगा रही हैं तो यह देख लें कि बूब्स पर कोई लोशन, क्रीम या औयल न लगा हो.
  •  ब्रैस्ट टेप का इस्तेमाल करने से पहले यह जान लें कि आप की ब्रैस्ट पर बाल न हों. अगर आप की ब्रैस्ट के एरिए पर बहुत ज्यादा पसीना आता है तो ब्रैस्ट टेप का इस्तेमाल करने से बचें या  इसे टाइमटाइम पर निकाल कर पसीना पोंछ कर इस्तेमाल करें. बहुत अधिक पसीना आने पर ब्रैस्ट टेप का ग्लू ढीला हो जाता है.
  •  निपल कवर या ब्रैस्ट टेप लगा कर न सोएं. अच्छी क्वालिटी वाले निपल कवर या ब्रैस्ट टेप ही खरीदें.कैसे रिमूव करेंइस टेप को रिमूव करने के लिए आप इस के ऊपर हलका गरम पानी डाल कर या गरम पानी से नहा कर इसे आसानी से निकाल सकती हैं. अगर टेप को हटाने के बाद आप की स्किन पर चिपचिपाहट रह गई है तो उस पर बेबी औयल से मसाज करें. इस से चिपचिपाहट हट जाएगी.

हैल्थ ऐक्सपर्ट का मानना है कि निपल कवर और ब्रैस्ट टेप के कई नुकसान भी होते हैं. ये नुकसान क्या हैं, आइए जानते हैं:

  1. सांस लेने में दिक्कत

सिलिकौन हमारी हैल्थ के लिए सही नहीं है. इस से बनी बूब टेप और निपल कवर ब्रैस्ट से चिपक जाते हैं, जिस से सांस लेने में तकलीफ हो सकती है भले ही टेप में कोई स्टैप न हो. इस की वजह से स्किन में जलन भी हो सकती है. लंबे समय तक इस का यूज करने पर ब्रैस्ट टेप से बेचैनी हो सकती है क्योंकि वह त्वचा को सांस नहीं लेने देती है. इस से निपल में दर्द भी हो सकता है.

2. इन्फैक्शन

ब्रा टेप का बाहरी हिस्सा प्लास्टिक का बना होता है. यही वजह है कि इस पर आसानी से धूलमिट्टी चिपक जाती है, जिस से बैक्टीरिया जम जाते हैं. अगर आप इसे नियमित यूज कर रही हैं तो इस में से स्मैल भी आ सकती है.स्किन में खुजली या जलन होना़  कभीकभी कंपनियां अपने फायदे के लिए सिलिकौन निपल कवर लो क्वालिटी के सिलिकौन से बनाती हैं. ऐसे में इस के इस्तेमाल से बौडी पर चकत्ते या जलन हो सकती है. इसे लगातार इस्तेमाल कर रही महिलाओं को इस से ऐलर्जिक रिएक्शन भी हो सकता है.

अगर आप बैकलैस, डीप नैकलाइन, औफशोल्डर ड्रैस और टौप पहनने की शौकीन हैं तो निपल कवर और ब्रैस्ट टेप को अपनी सखी बन सकती हैं. लेकिन अगर आप निपल कवर और ब्रैस्ट टेप को दिनरात लगा कर रखने की सोच रही हैं तो ये आप की हैल्थ के लिए बिलकुल सही नहीं हैं. हां, कभीकभी इन का इस्तेमाल किया जा सकता है. लेकिन इन्हें साफ रखना बहुत जरूरी है. जहां अलगअलग ड्रैस के लिए अलगअलग ब्रा पहननी पड़ती है वही ब्रैस्ट टेप अलगअलग ड्रैस के साथ आसानी से कैरी की जा सकती है क्योंकि यह अलगअलग ब्रा के मुकाबले किफायती जो है.

9 टिप्स पति को बनाएं अपना दीवाना

दिव्या ने जब विवाह के बाद अपनी ससुराल में पहला कदम रखा तो अपनी मम्मी की हिदायतों के अनुसार उस ने संजीव पर कम और उस के घर वालों पर अधिक ध्यान दिया. इस का नतीजा यह निकला कि विवाह के कुछ दिनों बाद ही संजीव दिव्या से खिंचाखिंचा सा रहने लगा.

दिव्या की रातदिन की जीहुजूरी के कारण ससुराल वालों की उम्मीदें भी बढ़ती चली गईं और जब दिव्या उन की उम्मीदों को पूरी कर पाने में असमर्थ रहने लगी तो वे उस की संजीव से शिकायतें करने लगे. दिव्या को लगा, संजीव उस का साथ देगा मगर उस ने तो कभी संजीव के साथ ऐसा संवाद ही नहीं रखा था.रश्मि ने भी विवाह होते ही बहू नंबर वन बनने की सोची. वह अपनी ननद, देवर, सासससुर के साथ इतनी घुलमिल गई कि इस बीच उस का पति साकेत कहीं खो सा गया. जब भी घूमनेफिरने की बात होती तो रश्मि अपने साथ अपनी ननद और देवर को भी ले कर जाती. साकेत रश्मि की इन हरकतों से चिढ़ जाता. उसे हर आउटिंग रोमांटिक नहीं बल्कि फैमिली पिकनिक लगती और जल्द ही साकेत अपनी रोमांस की जरूरतों के लिए अपनी सहकर्मी पर निर्भर होने लगा.

विवाह बाद एक महिला अपने नए जीवनसाथी के साथ संयुक्त होती है. महिला के इस नए रूप में दुलहन का एक महत्त्वपूर्ण निर्णय होता है कि उसे किन मानसिक, सामाजिक और पारिवारिक मामलों पर ध्यान देना चाहिए. एक नई शादीशुदा महिला के लिए एक नए परिवार में आधारभूत सामाजिक, मानसिक और पारिवारिक स्थितियां उत्पन्न होती हैं. इस मामले में एक दुलहन का पति पर ध्यान परिवार के अन्य सदस्यों से अधिक होना चाहिए.

ये कुछ कारण दुलहन को अपने पति पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित करते हैं:

  1. पारिवारिक नवजात

जब एक महिला विवाह के बंधन में बंधती है, तो वह नए परिवार की भावनाओं, संस्कृति और प्रथाओं के साथ भी बंधती है. उसे इस नए परिवार की संपूर्णता और विशेषता में सम्मिलित होना चाहिए.

2. साझा बनाए रखें रिश्ते

एक स्वस्थ विवाह में पतिपत्नी के बीच एक अच्छा और स्नेहपूर्ण संबंध होना चाहिए. दुलहन को अपने पति के साथ एक नियमित और सजीला संबंध रखना चाहिए और पति के परिवार के सदस्यों के साथ भी नए और स्वीकार्य संबंध बनाने की कोशिश करनी चाहिए.

3. स्वतंत्रता और स्वाधीनता

एक दुलहन को अपने व्यक्तिगत विकास और स्वतंत्रता की ओर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. जब एक महिला अपने पति के साथ संयुक्त होती है, तो वह मन में अपनी स्वाधीनता के खोने का डर रखती है, लेकिन वास्तविकता यह है कि वह अपने स्वयं के विकास के लिए अपनी अधिकारिता बनाए रख सकती है.

4. विशेष अभिवावक नहीं

जब एक महिला दुलहन बनती है, तो उसे अपने पति के विशेष अभिवावक नहीं, बल्कि एक समान पार्टनर की भूमिका में अपनेआप को स्थापित करना चाहिए. दुलहन को अपने पति के साथ भागीदारी में रहना चाहिए और अपने बीच एक सामंजस्यपूर्ण और समान संबंध बनाना चाहिए.

5. पति के सपोर्ट में रहना

विवाहित जीवन में सफलता के लिए पत्नी को अपने पति की सपोर्ट में रहना जरूरी है. पति की प्राथमिकता को और उन की इच्छाओं को समझना आवश्यक है. आप को उन के सपनों को पूरा करने में उन की सहायता करनी चाहिए.

6.पति के संग वक्त बिताना

नई दुलहन का अपने पति के साथ समय बिताना बेहद महत्त्वपूर्ण है. विवाह के बाद नए परिवार के साथ रहने में वह नई है, लेकिन इस दौरान पति के साथ संवाद में रहने से संघर्षों को सम?ाने मे मदद मिलती है.

7. सामाजिक और पारिवारिक दबावों का सामना करना

नई दुलहन को परिवार के साथ सामाजिक और पारिवारिक दबावों का सामना करना चाहिए. ध्यान रखने योग्य बात है कि उसे अपने पति के साथ संबंधों को बनाए रखने के लिए समय देना चाहिए. इस से खुशहाल और समृद्ध जीवन जीने में मदद मिल सकती है.

8. परिवार के मामूली मुद्दों पर ध्यान न देना

नए दुलहन को पति के साथ विवाहित जीवन का आनंद उठाने के लिए परिवार के मामूली मुद्दों पर ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए. वह अपने पति के साथ रिश्ते को स्थाई बनाने पर ध्यान केंद्रित कर सकती है.

9. संबंधों में संवाद

विवाहित जीवन में संवाद का महत्त्वपूर्ण योगदान होता है. जब आप अपने पति के साथ अच्छे संबंध बनाते हैं और उन्हें अपने मन की बातें बताते हैं तो आप के बीच समझता हो सकता है और इस विवाहित जीवन को खुशनुमा बनाने में मदद मिल सकती है. संबंधों में समझदारी और संवाद समृद्धि के लिए महत्त्वपूर्ण हैं

.एक दुलहन के जीवन का यह समय खास और यादगार होता है. इस महत्त्वपूर्ण अवसर पर एक दुलहन को ध्यान देने की जरूरत है कि वह अपने पति पर ध्यान केंद्रित करे पति के परिवार पर नहीं. एक संतुष्ट और संयुक्त शादीशुदा जीवन के लिए दुलहन को पति और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ स्नेहपूर्ण संबंध बनाने का प्रयास करना चाहिए. इस से अपने नए जीवन को संतुष्ट, सफलतापूर्वक और खुशहाली से जीने में मदद मिल सकती है.

कम शब्दों में बोला जाए तो यह कि अगर आप बीवी नंबर वन बन जाती हैं तो बहू नंबर वन तो अपनेआप ही बन जाएंगी.

रोजाना करेंगे ये काम तो स्किन बनेगी चमकदार

ज्यादातर लड़कियों की यह शिकायत रहती है कि उन की त्वचा ग्लोइंग और चार्मिंग नहीं दिखती. इस की सब से बड़ी वजह यह है कि या तो उन्हें अपनी त्वचा के अनुसार सही स्किन केयर का पता नहीं होता या फिर वे त्वचा के प्रति लापरवाही बरतती हैं.

आइए जानते हैं त्वचा को साफसुथरा व चमकदार बनाए रखने के कुछ टिप्स:

  • त्वचा को हर मौसम में मौइश्चराइज करने की जरूरत होती है, क्योंकि रूखी त्वचा खुजली जैसी समस्याएं पैदा करती है. मौइश्चराइजर का चुनाव करते समय यह ध्यान रखें कि आप की त्वचा औयली है या रूखी.
  • क्लींजिंग के बाद भी यदि त्वचा की गंदगी पूरी तरह साफ न हो तो नियमित तौर पर टोनिंग करनी चाहिए. इस से त्वचा की गंदगी भी दूर होती है और उस में नमी भी बनी रहती है.
  • अगर आप की स्किन ड्राई है तो सौफ्ट क्लींजर ही प्रयोग करें. सैंसिटिव स्किन के लिए माइल्ड क्लींजर इस्तेमाल करें.
  •  त्वचा की टोनिंग और मौइश्चराइजिंग से पहले उसे ऐक्सफौलिऐट करना न भूलें. इस से त्वचा की डैड सैल्स हट जाती हैं और उस का नैचुरल ग्लो उभर कर आता है.
  •  यदि आप के पैर के नाखून साफ नहीं हैं, एडि़यां गंदी व कटीफटी हैं, पैरों पर अनचाहे बाल हैं तो कितनी भी स्टाइलिश ड्रैस व फुटवियर पहन लें, आप के ऊपर जंचेगा नहीं. शौर्ट ड्रैस या डैनिम के साथ ओपन फुटवियर पहनने का शौक है तो अपने पैरों की साफसफाई पर पूरा ध्यान दें. इस के लिए घरेलू उपाय अपनाना ही काफी नहीं है, र्पालर जा कर ऐक्सपर्ट से मैनिक्योर, पैडिक्योर, नेल कटिंग व क्लीनिंग नियमित तौर पर कराती रहें.

अंधविश्वास की दलदल: भाग 3- प्रतीक और मीरा के रिश्ते का क्या हुआ

मुझे कुछ बोलते नहीं बन रहा था. अभी हम एकदूसरे को ठीक से जानतेपहचानते भी नहीं और यह अपनी मां समान सास के बारे में कैसीकैसी बातें बोल रही है. इस के लिए आंटी ने मेरे सहित न जाने कितनी ही लड़कियों को ठुकरा दिया था.

नंदा फिर कहने लगी, ‘‘सच कहती हूं मीराजी, आप बड़ी किस्मत वाली हैं, जो आप की सास नहीं है, वरना मेरी सास तो मेरे लिए पनौती बन कर रह गई हैं. और ये मेरे पति, लगता है जैसे मैं इन के पल्ले जबरदस्ती बांध दी गई हूं.’’

‘‘क्यों?’’ मेरे मुंह से निकल गया.

कहने लगी, अरे, देख रही हैं आप. कभी भी मुझे प्यार भरी नजरों से नहीं देखते. पता नहीं किस के खयालों में खोए रहते हैं?

‘‘तो क्या आज भी प्रतीक के दिल में मैं ही हूं? सोच कर मेरी आंखें नम हो गईं. किसी तरह नंदा से छिपा कर अपने आंसू पोंछ कर बोली, ‘‘ऐसी बात नहीं हैं नंदाजी, मांबाप हों या सासससुर, सब हमारे अपने हैं और जैसे उन्होंने हमें पालापोसा, पढ़ायालिखाया, हमारे सुख को सब से ऊपर रखा, तो हमारा भी फर्ज बनता है कि हम अपने मांबाप को मानसम्मान दें, उन का सहारा बनें.’’ भले ही आंटी ने मेरे साथ जो भी किया पर मैं उन का अपमान कैसे सह सकती थी. लेकिन मेरी एक भी बात उसे अच्छी नहीं लगी. कहने लगी, ‘‘ठीक है जरा मैं आप का घर देख लेती हूं.’’

मैं उसे देख कर सोच में पड़ गई कि इतनी कड़वाहट भरी है इस के दिल में आंटी के लिए.

जातेजाते प्रतीक कहने लगा, ‘‘मीरा, खुश तो हो न अपनी जिंदगी में?’’

‘‘हां, बहुत खुश हूं, और तुम?’’ मेरे पूछने पर वह मेरा मुंह ताकने लगा, जैसे मुझ से ही पूछ रहा हो, क्या तुम्हें मैं खुश दिख रहा हूं? उस ने कुछ न बोला और अपनी नजरें नीची कर कहने लगा, ‘‘पापा नहीं रहे, मां भी शायद ज्यादा दिन न बच पाए. तुम्हें ठुकरा कर आज भी वे पश्चाताप की अग्नि में जल रही हैं. तुम्हारे बारे में बताया था उन्हें. मिलने को तड़प उठी. हो सके तो एक बार मां से मिल लेना,’’ कहतेकहते प्रतीक की आंखें भर आईं. मैं भी अपनी रुलाई कहां रोक पाई.

सोचने लगी, ‘‘आखिर ऐसा हुआ क्यों? क्यों अंधविश्वास की खाई इतनी गहरी हो गई कि आंटी को हमारा प्यार, हमारी खुशी नहीं दिखी.’’ उन्हें यहां से जातेजाते शाम के 5 बज गए थे. रात में खाना खा कर सब सो गए. पर मेरी आंखों से नींद कोसों दूर थी. प्रतीक का मुरझाया हुआ चेहरा, उस की उदासी भरी बातें मेरे मन को तड़पा गईं. स्मृति की सारी पपडि़यां एकएक कर मेरे आंखों के सामने खुलने लगीं…

हम पहली बार तब मिले थे जब प्रोबेशनरी औफिसर की ट्रैनिंग के लिए हम गुड़गांव गए थे.

बातोंबातों में ही जाना की हम एक ही शहर से हैं. ट्रैनिंग के 15 दिन कैसे बीत गए हमें पता ही नहीं चला. यह संयोग ही था कि हमारी पहली पोस्टिंग भी अपने शहर में ही मिल गई. अब तो हमारा मिलनाजुलना अकसर होने लगा. दोस्त तो पहले ही बन चुके थे लेकिन हमें एकदूसरे से प्यार हो गया, यह तब पता चला जब रातरात तक एकदूसरे से फोन पर बातें करने लगे. एक दिन न मिल पाना भी हमे बेचैन कर जाता. हमारे प्यार पर हमारे घर वालों ने भी हरी झंडी दिखा दी. अब हम एकदूसरे के घर भी आनेजाने लगे थे और प्रतीक के मांपापा मुझे अपने घर का सदस्य समझने लगे थे.

प्रतीक के पापा ने तो यहां तक कहा था, ‘‘प्रतीक बेटा, तुम ने अपने वास्ते इतनी सुंदर और गुणी लड़की खुद ही ढूढ़ ली. ऐसी तो शायद हम न ढूंढ़ पाते.’’

ऐसा नहीं था कि मैं आंटी को पसंद नहीं थी पर कोई एक बात उन्हें परेशान कर रही थी. एक रोज मेरे पापा को बुला कर वे बोलीं, ‘‘भाई साहब, हो सके तो मीरा की जन्मकुंडली भेज दीजिएगा.’’

मेरे पापा आश्चर्य से बोले, ‘‘जन्मकुंडली? पर किस लिए? और हम तो इस कुंडली मिलान पर विश्वास ही नहीं करते. इसलिए कभी बनवाने की सोची भी नहीं. हां, पर जब मीरा बहुत छोटी थी तब इस की दादी ने इस की कुंडली बनवाई थी. पर अब पता नहीं कहां होगी.’’

फिर मेरे पापा हंस कर कहने लगे, ‘‘बहनजी, अब हमें ही देख लीजिए, हमारा कोई कुंडली मिलान नहीं हुआ फिर भी क्या मस्त जिंदगी कट रही है हमारी एकदूसरे के साथ.’’

प्रतीक की मां कहने लगीं, ‘‘सब तो ठीक है, लेकिन अपने बच्चों के भविष्य को ले कर थोड़ा सतर्क तो रहना पड़ता है और हरज ही क्या है जो कुंडली मिलान हो जाए तो? हो सके तो भेज दीजिएगा.’’

प्रतीक और उस के पापा इशारों से मना करते रहे पर प्रतीक की मां जिद पर अड़ गईं. अब दादी तो रही नहीं, फिर भी पापा ने कहा ‘‘ठीक है मैं कोशिश करूंगा.’’

प्रतीक की जिद पर हमारी सगाई तो हो गई पर शादी की डेट 6 महीने बाद की रखी गई. धीरेधीरे हम शादी की तैयारियों में जुट गए.

एक रोज प्रतीक के मांपापा ने मुझ से कहा कि मैं प्रतीक के साथ जा कर अपने लिए गहने पसंद कर लूं. हमें लगा अब उन्हें कुंडलियों के बारे में कुछ जानना नहीं है और हमारे रिश्ते से भी उन्हें कोई एतराज नहीं है.

उस रोज जल्दीजल्दी मैं ने अपने बाल संवारे और प्रतीक की पसंद की ड्रैस पहनी. न जाने कितनी बार खुद को आईने में देखा और बारबार घड़ी पर भी नजरें टिकाई थी. मुझे इस बात का खटका लग रहा था कि कहीं घड़ी ही तो अटक नहीं गई? कहीं ज्यादा देर तो नहीं हो गई? जब यह भरोसा भी टूट गया और बहुत देर बाद भी प्रतीक मेरे घर नहीं आया तो मैं ने ही फोन लगाया यह पूछने के लिए कि हमें गहने पसंद करने जाना था तो आए क्यों नहीं? पर प्रतीक तो फोन ही नहीं उठा रहा था. उस के घर के नंबर पर भी फोन लगाया. वहां भी कोई नहीं उठा रहा था. मुझे चिंता होने लगी. सोचा चल कर खुद ही देख आती हूं पर जैसे ही मैं प्रतीक के घर के अंदर जाने लगी, सब की बातें सुन मेरे पांव वहीं बाहर ही रुक गए.

बेटी के हेयरस्टाइल को लेकर ट्रोल हुईं Aishwarya Rai यूजर्स ने कहीं ये बात

गणेश चतुर्थी के अवसर पर, मुकेश अंबानी और नीता अंबानी ने मुंबई में अपने निवास एंटीलिया में उत्सव की मेजबानी की, जिसमें बॉलीवुड के तमाम सितारों ने शिरकत की. शाहरुख खान अपने परिवार के साथ अंबानी के गणपति दर्शन के लिए पहुंचे, जबकि सलमान खान ने अपने ट्रेडिशनल लुक में स्टाइलिश एंट्री मारी. इस जश्न में ऐश्वर्या राय बच्चन अपनी बेटी आराध्या के साथ शामिल हुईं.

आराध्या हुई ट्रोल

दरअसल, ऐश्वर्या राय बच्चन और उनकी बेटी आराध्या भी अंबानी परिवार के गणपति उत्सव में शामिल हुईं. मां-बेटी की जोड़ी ने पटियाला सूट पहनना और वायरल वीडियो में मुस्कुराहट के साथ ऐश्वर्या अपनी बेटी के साथ पोज देना वास्तव में एक प्यारा इशारा था. ऐश्वर्या ने स्काई ब्लू रंग का खूबसूरत सूट पहना था, जबकि आराध्या चमकीले पीले रंग के सूट में बेहद मनमोहक लग रही थीं. अपने आउटफिट को पूरा करते हुए इन दोनों ने पारंपरिक बैग को चुना. अभिनेत्री ने अपने सिग्नेचर पार्टीशन हेयरस्टाइल में नजर आई, जबकि उनकी बेटी ने पूरे कार्यक्रम में सुंदरता बिखेरते हुए बैंग्स बनाए रखे. वीडियो में आराध्या का हेयर स्टाइल हर बार की तरह सेम लग रहा है. उनके वायरल वीडियो में यूजर्स कमेंट कर रहे हैं.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Viral Bhayani (@viralbhayani)

 

यूजर्स ने लिखा

ऐश्वर्या राय अंबानी हाउस में गणेश उत्सव में पहुंची वह अपनी बेटी के साथ नजर आई. वायरल वीडियो में आराध्या ने बैंग्स बनाए रखे है, जिसको लेकर यूजर आराध्या को काफी ट्रोल कर रहे है. एक यूजर ने लिखा है कि, मुझे मरने से पहले आराध्या का फोरहेड देखना है. वहीं दूसरे ने लिखा- लगता है इनको लोहड़ी का इनविटेशन मिल गया था गलती से. वहीं एक ने लिखा- प्लीज इनका हेयरकट चेंज करवा दो.

पहले भी हेयरस्टाइल को लेकर ट्रोल हुई आराध्या

ऐसा पहली बार नहीं है कि आराध्या ट्रोल हुई है. अक्सर आराध्या हेयरस्टाइल को लेकर ट्रोल होती रहती है. यूजर्स हर वीडियो में उनकी हेयरस्टाइल चेंज करने की मांग करते है. तो कभी आराध्या का हाथ पकड़कर चलने की वजह से भी ट्रोल हुई है.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें