Amir Khan की बेटी Ira Khan इस दिन करेंगी शादी, जानें पूरी डिटेल

आमिर खान और रीना दत्ता की बेटी इरा खान अक्सर अपने मंगेतर नूपुर शिखारे के साथ सोशल मीडिया पर तस्वीरें पोस्ट करती रहती हैं. हाल ही में आई एक रिपोर्ट की मानें तो दोनों जल्द ही शादी के बंधन में बंधने की प्लानिंग कर रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इरा खान 3 जनवरी, 2024 को नुपुर से शादी कर सकती हैं. कथित तौर पर, उनकी शादी परिवार और दोस्तों की मौजूदगी में तीन दिनों तक होगी. खबर आई है कि दोनों राजस्थान के उदयपुर में शाही शादी कर सकते हैं.

उदयपुर में होगी शादी

इरा और नूपुर राजस्थान के उदयपुर में शादी करने की योजना बनाई है. शादी के कार्यक्रम तीन दिनों तक चलेगा और शादी का जश्न उनके दोस्त और करीबी परिवार के सदस्यों के बीच होगा. यह भी एक अंतरंग मामला है कि बॉलीवुड से कोई भी व्यक्ति शामिल नहीं होगा.

नूपुर ने इरा खान को किया था प्रपोज

नूपुर ने सितंबर 2022 में इरा को प्रपोज किया था. नूपुर ने एक अंगूठी पकड़ी और घुटने के बल बैठकर उन्हें प्रपोज किया. बाद में, इरा ने इसे अपने सोशल मीडिया हैंडल पर साझा किया और अपनी आश्चर्यजनक सगाई की कहानी की घोषणा की थी. इरा खान और नुपुर ने बाद में अपने परिवार और दोस्तों के लिए मुंबई में एक सगाई पार्टी भी आयोजित की.

 

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इरा ने एक पोस्ट में लिखा

इरा ने अपने इंस्टा पर एक पोस्ट शेयर की थी जिसमें उन्होंने लिखा था. “इस पल. अनेक अवसरों पर अनेक लोगों ने मुझसे कहा है कि मैं वास्तव में अच्छी पार्टियां देती हूं. मुझे लगता है कि वे मुझे कुछ ज्यादा ही श्रेय देते हैं. मेरी पार्टियों और अन्य लोगों की पार्टियों के बीच मुख्य अंतर अतिथि सूची का है. हमारे जीवन में मौजूद लोग ही इसे ख़ुश, मज़ेदार, विचित्र और बहुत-बहुत स्वस्थ बनाते हैं. वहां मौजूद रहने और हमें एक-दूसरे के प्रति प्रेम की घोषणा में शामिल होने का मौका देने के लिए धन्यवाद. क्योंकि हम बिल्कुल यही करना चाहते थे,”

रेड कार्पेट पर उतरी Rekha, 68 की उम्र में हुस्न का जलवा बिखेरा

मशहूर दिग्गज अभिनेत्री रेखा आज भी किसी भी अभिनेत्री को टक्कर दे सकती हैं. उन्हें हाल ही में ग्लोबल स्पा अवार्ड्स 2023 में देखा गया था, जहां बॉलीवुड इंडस्ट्री के कई सितारों ने शानदार आउटफिट्स में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. पूर्व मिस वर्ल्ड मानुषी छिल्लर और रवीना टंडन से लेकर बिग बॉस ओटीटी 2 फेम जिया शंकर, जरीन खान और सोनाली सेगल समेत अन्य लोग बुधवार रात मुंबई में आयोजित रेड कार्पेट इवेंट में पोज देते नजर आए.

रेखा का आउटफिट

वायरल तस्वीरों में देख सकते है कि एक्ट्रेस रेखा ने क्रीम कलर की साड़ी पहन रखी है जिसमे वह बेहद खूबसूरत नजर आ रही है. इसी के साथ उन्होंने गोल्डन कलर का सूट पहन रखा है. वहीं रेखा ने बालों में गजरा लगा रखा है. साड़ी में सज-धज के बहुत ही खूबसूरत लग रही है रेखा जी. तस्वीरों में देखा जा सकता है रेखा जी रेड कार्पेट पर पोज देती नजर आ रही है.

 

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उफ़! रेखा ने एक आदमी को थप्पड़ मारा

रेखा ने लोगों का अभिवादन करने के बाद एक ऐसे व्यक्ति के साथ तस्वीर खिंचवाई जो रेखा जी के साथ एक सेल्फी लेना चाहता था. तस्वीर खिंचवाने के बाद रेखा ने मजाक में उनके चेहरे पर एक तमाचा जड़ दिया, जिससे अभिनेत्री और तस्वीर खिंचवाने वाले फैंस सहित सभी लोग हंस पड़े. नेटिजेंस ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त की क्योंकि कई लोगों ने अपने सोशल मीडिया पेजों पर वीडियो पोस्ट किया.

 

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रेखा ने अपने दोस्त मनीष मल्होत्रा के साथ दिया पोज

रेखा ने रेशम के चांदी के कुर्ता-चूड़ीदार के ऊपर साड़ी की तरह अपने चारों ओर लपेटा हुआ एक सुनहरा और सफेद दुपट्टा के कैरी किया है उनके पसंदीदा पोटली बैग के साथ उनका गजरा और गोल्डन बेज वेजेज देखना न भूलें. दरअसल, मशहूर डिजाइनर और करीबी दोस्त मनीष मल्होत्रा ​​ने भी रेड कार्पेट पर उनके साथ पोज दिया.

बने एकदूजे के लिए: भाग 3- क्या विवेक और भावना का प्यार परवान चढ़ा

‘‘फिर समय भागता गया. एक दिन अचानक एक संयोग ने एक बार फिर विवेक और भावना को एकदूसरे के सामने ला खड़ा किया. ऐसा हुआ तो दोनों के हृदय का वेग बांध तोड़ कर उष्ण लावा सा बहने लगा. दोनों एक बार फिर सब कुछ भूल कर अपनत्व की मीठी फुहार से भीगने लगे.

कुछ महीनों बाद दोनों विवाह के बंधन में बंध गए, लेकिन शादी के कुछ समय बाद विवेक प्लेन क्रैश में चल बसा. विवेक की मृत्यु की खबर सुनते ही हमारी आंखों के सामने अंधेरा छा गया.

हम दोनों स्तब्ध थे कि उन दोनों का पुनर्मिलन कल ही की तो बात थी.’’इतने में फोन की घंटी बजी. फोन पर मामाजी थे, ‘‘हैलो सुनो, हमें घर पहुंचते पहुंचते 5 बज जाएंगे.

चाय तैयार रखना.’’सर्दियों का मौसम था. वे लोग लौट कर आए तो सब चुप बैठ कर चाय पीने लगे. भावना स्तब्ध, निर्जीव बर्फ की प्रतिमा सी एक तरफ बैठी सोच रही थी कि कितना भद्दा और कू्रर मजाक किया है कुदरत ने उस के साथ.

अभी तक उस की आंखों से एक भी आंसू नहीं छलका था. मानो आंसू सूख ही गए हों. सभी को विवेक के चले जाने के गम के साथसाथ भावना की चिंता सताए जा रही थी.‘‘भावना रोतीं क्यों नहीं तुम? अब वह लौट कर नहीं आएगा,’’ मामीजी ने भावना को समझते हुए कहा.

अंधेरा बढ़ता जा रहा था. भावना गठरी सी बैठी टकटकी लगाए न जाने क्या सोच रही थी. उस की दशा देख सभी चिंतित थे. 4 दिन से उस के गले में निवाला तक न उतरा था. मामीजी से उस की यह दशा और देखी नहीं गई. उन्होंने भावना को झकझोरते, जोर से उसे एक चांटामारा और रोतेरोते बोलीं, ‘‘रोती क्यों नहीं? पगली, अब विवेक लौट कर नहीं आएगा.

तुम्हें संभलना होगा अपने और बच्ची के लिए. यह जीवन कोई 4 दिन का जीवन नहीं है. संभाल बेटा, संभाल अपने को.’’फिर वे भावना को ऊपर उस के कमरे में ले गईं. पोलीन तथा जेम्स अपने कमरे में जा चुके थे. भावना कमरे में विवेक के कपड़ों से लिपट कर फूटफूट कर रोती रही.

इतने में दरवाजे पर दस्तक हुई, ‘‘मे आई कम इन?’’‘‘यस, आओ बैठो पोलीन,’’ भावना ने इशारा करते हुए कहा. दोनों एकदूसरे से लिपट कर खूब रोईं. दोनों का दुख सांझ था. दोनों की चुभन एक सी थी. पोलीन ने भावना को संभालते तथा खुद को समेटते स्मृतियों का घड़ा उड़ेल दिया.

वह एक लाल रंग की अंगूठी निकाल कर बोली, ‘‘मुझे पूरा यकीन है तुम इसे पहचानती होगी?’’भावना की आंखों से बहते आंसुओं ने बिना कुछ कहे सब कुछ कह डाला. वह मन ही मन सोचने लगी कि पोलीन, मैं इसे कैसे भूल सकती हूं? इसे तो मैं ने विवेक को जरमनी जाते वक्त दिया था.

यह तो मेरी सगाई की अंगूठी है. तुम ने इस का कहां मान रखा? फिर धीरेधीरे पोलीन ने एकएक कर के भावना के बुने सभी स्वैटर, कमीजें तथा दूसरे तोहफे उस के सामने रखे. स्वैटर तो सिकुड़ कर छोटे हो गए थे. पोलीन ने बताया, ‘‘भावना, विवेक तुम से बहुत प्रेम करता था.

तुम्हारी हर दी हुई चीज उस के लिए अनमोल थी. 2 औडियो टेप्स उसे जान से प्यारी थीं. उस के 2 गाने ‘कभीकभी मेरे दिल में खयाल आता है…’ और ‘जब हम होंगे 60 साल के और तुम होगी55 की, बोलो प्रीत निभाओगी न तुम भी अपने बचपन की… वह बारबार सुनता था.

ये दोनों गाने जेम्स ने भी गाने शुरू कर दिए थे. तुम्हारी दी हुई किसी भी चीज को दूर करने के नाम से वह तड़प उठता था. जब कभी वह उदास होता या हमारी तकरार हो जाती तो वह कमरे में जा कर और स्वैटरों को सीने से लगा कर उन्हें सहलातेसहलाते वहीं सो जाता था.

कभीकभी तुम्हारे एहसास के लिए सिकुड़े स्वैटर को किसी तरह शरीर पर चढ़ा ही लेता था. घंटों इन चीजों से लिपट कर तुम्हारे गम में डूबा रहता था. जितना वह तुम्हारे गम में डूबता, उतना मुझे अपराधबोध सताता.

मुझे तुम से जलन होती थी. मैं सोचती थी यह कैसा प्यार है? क्या कभी कोई इतना भी प्यार किसी से कर सकता है? मैं ने विवेक को पा तो लिया था, लेकिन वह मेरा कभी न बन सका. जब उस ने तुम से विवाह किया, मैं अपने लिए दुखी कम, तुम्हारे लिए अधिक प्रसन्न थी.

मैं जानती थीकि विवेक अब वहीं है, जहां उसे होना चाहिए था. मैं भी उसे खुश देखना चाहती थी. तुम दोनों बने ही एकदूसरे के लिए ही थे. मुझे खुशी है कि मरने से पहले विवेक ने कुछ समय तुम्हारे साथ तो बिताया.‘‘मुझे अब कुछ नहीं चाहिए.

उस ने मुझे बहुत कुछ दिया है. तुम जब चाहोगी मैं जेम्स को तुम्हारे पास भेज दूंगी. जेम्स बिलकुल विवेक की फोटोकौपी है. वैसा ही चेहरा, वैसी ही हंसी.’’फिर पोलीन और भावना दोनों आंखें बंद किए, एकदूसरे के गले में बांहें डाले, अपनाअपना दुख समेटे, अतीत की स्मृतियों के वे अमूल्यक्षण बीनबीन कर अपनी पलकों पर सजाने लगीं. दोनों का एक ही दुख था. पोलीन बारबार यही दोहरा रही थी. ‘‘आई एम सौरी भावना. फौरगिव मी प्लीज.’’

बीच राह में: भाग 1- अनिता ने अपना घर क्यों नहीं बसाया

सिस्टर अनिता की नजरें बारबार प्राइवेट कमरा नंबर-1 की तरफ उठ जाती थीं. उस कमरे  में इसी अस्पताल के नामी हार्ट सर्जन डाक्टर आनंद भरती थे.‘‘अब आप इतनी चिंता क्यों कर रही हैं? डाक्टर आनंद ठीकहो कर कल सुबह घर जा तो रहे हैं,’’ साथ बैठी सिस्टर शारदा ने अनिता की टैंशन कम करने की कोशिश की.

‘‘मैं ठीक हूं… कई दिनों से नींद पूरी न होने के कारण आंखें लाल हो रही हैं,’’ अनिता बोली.‘‘कुछ देर रैस्टरूम में जाकर आराम कर लो, मैं यहां सब संभाल लूंगी.’’‘‘नहीं, मैं कुछ देर यहीं सुस्ता लेती हूं,’’ कह अनिता ने आंखें बंद कर सिर मेज पर टिका लिया.

डाक्टर आनंद से अनिता का परिचय करीब 20 साल पुराना था. इतने लंबे समय में इकट्ठी हो गई कई यादें उस के स्मृतिपटल पर आंखें बंद करते ही घूमने लगीं…पहली बार वह डाक्टर आनंद की नजरों में औपरेशन थिएटर में आई थी.

उस दिन वह सीनियर सिस्टर को असिस्ट कर रही थी. तब उस ने डाक्टर आनंद का ध्यान एक महत्त्वपूर्ण बात की तरफ दिलाया था, ‘‘सर, पेशैंट का खून नीला पड़ता जा रहा है.’’डाक्टर आनंद ने डाक्टरनीरज की तरफ नाराजगी भरे अंदाज में देखा.डाक्टर नीरज की नजर औक्सीजन सिलैंडर की तरफ गई. पर उस का रैग्यूलेटर ठीक प्रैशर दिखा रहा था.‘‘यह रैग्यूलेटर खराब है… जल्दी से सिलैंडर चेंज करो,’’ डाक्टर आनंद का यह आदेश सुन कर वहां खलबली मच गई.

जब सिलैंडर बदल दिया गया तब डाक्टर आनंद एक बार अनिता के चेहरे की तरफ ध्यान से देखने के बाद बोले, ‘‘गुड औब्जर्वेशन, सिस्टर… थैंकयू.’’औपरेशन समाप्त होने के कुछ समय बाद डाक्टर आनंद ने अनिता को अपने चैंबर में बुला कर प्रशंसा भरी आवाज में कहा, ‘‘आज तुम्हारी सजगता ने एक मरीज की जान बचाई है.’’‘‘थैंकयू, सर.’’‘‘बैठ जाओ, प्लीज… चाय पी कर जाना.’’‘‘थैंकयू, सर,’’ अपने दिल की धड़कनों को काबू में रखने की कोशिश करते हुए अनिता सामने वाली कुरसी पर बैठ गई.

उस दिन के बाद अनिता अपने खाली समय में डाक्टर आनंद के चैंबर में ही नजर आती. वे अपने मरीजों के ठीक होने में आ रही रुकावटों की उस के साथ काफी चर्चा करते. अगर अनिता की सम?ा में उन की कुछ बातें नहीं भी आतीं तो भी वह अपने ध्यान को इधरउधर भटकने नहीं देती.सब यह मानते थे कि उन से अनिता बहुत कुछ सीख रही है.

उस की गिनती बेहद काबिल नर्सों में होती, पर उस की सहेलियां डाक्टर आनंद के साथ उस के अजीब से रिश्ते को ले कर उसका मजाक भी उड़ाती थीं, ‘‘अरे, तुम दोनों केस डिस्कस करने के अलावा कुछ मौजमस्ती भी करते हो या नहीं?’’‘‘वे कमजोर चरित्र के इंसान नहीं हैं,’’ अनिता उन की बातों का बुरा न मान हंस कर जवाब देती.

‘‘चरित्र कमजोर नहीं है तो क्या कुछ और कमजोर है?’’ वे उसे और ज्यादा छेड़तीं.‘‘मु?ा से हर वक्त ऐसी बेकार की बातें न किया करो,’’ कभीकभी अनिता खीज उठती.‘‘सारे जूनियर डाक्टर जिस हसीना के लिए लार टपकाते हैं, वह फंसी भी तो एक सनकी और सीनियर डाक्टर से… अरी, उन के साथ बेकार समय न बरबाद कर… तेरी रैपुटेशन इतनी अच्छी है कि कोई तेरा दीवाना डाक्टर तुझ से शादी करने को भी तैयार हो जाएगा,’’ उन दिनों अनिता को ऐसी सलाहें अपनी सहेलियों व अन्य सीनियर नर्सों से आए दिन सुनने को मिलती थीं.

अनिता के मन में शादी करने का विचार उठता ही नहीं था. शादी को टालने की बात को ले कर उस के घर वाले भी उस से नाराज रहने लगे थे. उस के लिए किसी भी अच्छे रिश्ते का आना उन के साथ तकरार का कारण बन जाता.‘‘आप मेरे लिए रिश्ता न ढूंढ़ो… नर्स के साथ हर आदमी नहीं निभा सकता है. जब कोई अच्छा, सम?ादार लड़का मुझे मिल जाएगा, मैं उसे आप सब से मिलवाने ले आऊंगी,’’ अनिता की इस दलील को सुन उस का भाई व मातापिता बहुत गुस्सा होते.‘‘अब तू 23 साल की तो हो गई है… और कितनी देर लगाएगी उस अच्छे लड़के को ढूंढ़ने में?’’ उन सब के ऐसे सवालों को टालने में वह कुशल होती चली गई थी.

अनिता को अच्छा लड़का तो तब मिलता जब वह डाक्टर आनंद के अलावा किसी और को समय देती. अगर उस की सहेलियां उस की दोस्ती किसी डाक्टर या अन्य काबिल युवकसे कराने की कोशिश करतीं तो अनिता बड़ेरूखे से अंदाज में उस युवक के साथ पेशआती. हार कर वह युवक उस में दिलचस्पी लेना छोड़ देता.

डाक्टर आनंद ने भी एक दिन अपनेचैंबर में उस के साथ चाय पीते हुए पूछ ही लिया, ‘‘तुम शादी कब कर रही हो?’’‘‘मेरा शादी करने का कोई इरादा नहीं है, सर.’’‘‘यह क्या कह रही हो? शादी करने का… मां बनने का तो हर लड़की का मन करता है.’’‘‘मुझे नहीं लगता कि मेरा मनभाता लड़का कभी मेरी जिंदगी में आएगा.’’‘‘जरा मुझे भी तो बताओ कि कैसा होना चाहिए तुम्हारे सपनों का राजकुमार?’’‘‘उसे बिलकुल आप के जैसा होना चाहिए, सर,’’ अनिता ने शरारती मुसकान होंठों पर लाते हुए जवाब दिया.

‘‘क्या मतलब?’’ डाक्टर आनंद चौंक कर उस के चेहरे को ध्यान से पढ़ने लगे.‘‘मतलब यह कि उसे आप की तरह संवेदनशील, समझदार, अपने काम के लिए पूरी तरह समर्पित होना चाहिए.’’‘‘अरे, ज्यादा मीनमेख निकालना छोड़कर किसी भी अच्छे लड़के से शादी कर लो.

तुम बहुत समझदार हो… जिस से भी शादी करोगी, उस में ये सब गुण तुम्हारा साथ पा कर पैदा हो जाएंगे.’’‘‘सौरी सर, मैं इस मामले में रिस्क नहीं ले सकती… वैसे मैं कभीकभी सोचती हूं…’’‘‘क्या?’’ उसे अपनी बात पूरी न करते देख डाक्टर आनंद ने पूछा.‘‘यही कि अगर आप शादीशुदा न होते तो मेरे सामने लड़का ढूंढ़ने की समस्या ही नहींखड़ी होती.’’‘‘अनिता, मैं बस तुम्हें इतना याद दिलाना चाहूंगा कि मैं जब जवान हुआ था तब तुमपैदा भी नहीं हुई थीं,’’ अपने मन की बेचैनी छिपाने को डाक्टर आनंद ने यह बात मुसकराते हुए कही.

‘‘मेरे दिमाग में ही कुछ खोट होगी सर. हमारे बीच उम्र का 20 साल का अंतर होने के बावजूद मैं आप को इस पूरे अस्पताल का सबसे स्मार्ट पुरुष पता नहीं क्यों मानती हूं?’’ अपने चेहरे पर नाटकीय गंभीरता ला कर अनिता नेयह सवाल पूछा और फिर खिलखिला करहंस पड़ी. ‘‘शरारती लड़की, मुझे ही ढूंढ़नापड़ेगा तुम्हारे लिए कोई अच्छा रिश्ता.’’‘‘सर, शीशे के सामने खड़े हो कर इस बारे में सोचविचार करोगे तो मेरी पसंद आसानी से पकड़ में आ जाएगी.’’अनिता की पहल पर उन के बीच ऐसा हंसीमजाक शुरू हो गया.

प्रैगनैंसी: भाग 1- अरुण को बड़ा सबक कब मिला

शिखा के पास क्या नहीं था. जितना उस ने सोचा भी नहीं था. उस से कहीं अधिक उसे मिला था. लंबाचौड़ा फ्लैट, जिस के छज्जे से समुद्र की लहरें अठखेलियां करती दिखाई पड़ती थीं. उस पर रखे सीमेंट के गमलों में उस ने खूब सारी लताएं लगाई थीं, जो सदाबहार फूलों से लदी रहती थीं. इन सब का सुख लेने के लिए उस ने छज्जे पर सफेद बेंत की कुरसियां डलवा रखी थीं. अकसर वह और उस का पति चांदनी रातों में वहां बैठ कर समुद्र की लहरों को मचलते देखा करते थे. ऐसे में किलकारी मारती उन की बच्ची रूपा उन्हें बारबार धरती पर खींच लाया करती थी.

शिखा का ड्राइंगरूम भी कम खूबसूरत नहीं था. ड्राइंगरूम में लगे बड़ेबड़े शीशे के दरवाजे छज्जे पर ही खुलते थे. उन में से भी समुद्र साफ दिखाई देता था. दीवारों पर लगी बड़ीबड़ी मधुबनी कलाकृतियां आने वाले अतिथियों का मन मोह लेती थीं. बढि़या रैक्सीन का सफेद सोफा तो जैसे ड्राइंगरूम की शान था. उस पर वह इधरउधर गुलदस्ते सजा देती थी. नीली लेस लगे सफेद परदों से पूरा ड्राइंगरूम बहुत भव्य लगता था.

इसी तरह शिखा ने अपना शयनकक्ष भी सजाया हुआ था. पूरा हलका गुलाबी. उस की हर चीज में गुलाबी रंग का स्पर्श था. उस से लगा स्नानघर समूचा संगमरमर से बना था. फ्लैट बनवाते समय उस ने स्नानघर और रसोई पर ज्यादा ध्यान दिया था. उस का खयाल है कि यही दोनों चीजें किसी फ्लैट की जान होती हैं. अगर ये दोनों चीजें अच्छी न हों तो सबकुछ बेकार. इसीलिए उस ने अपने बाथरूम का टब सफेद संगमरमर का बनवाया था. उस के एक तरफ हलके रंगों के प्लास्टिक के परदे थे. जब शिखा उस में नहाती थी तो अपने को रानीमहारानी से कम नहीं समझती थी.

अब तो कहते हुए भी शर्म आती है, पर शुरू में उस ने सोचा था कि उस के 4-5 बच्चे होंगे. इसीलिए उस के उस फ्लैट में 5 कमरे थे. पर वह केवल एक ही बच्ची की मां बन कर रह गई. एक बच्ची के साथ यह फ्लैट उस को बहुत बड़ा लगता था. इसलिए उस ने केवल 3 कमरे अपने लिए सजाए थे, शेष 2 को आने वाले मेहमानों के लिए खाली रख छोड़ा था.

जब से शिखा के पति ने ‘शिपिंग’ कंपनी खोली थी तब से तो वह और भी अकेली हो गईर् थी. उस के पति को अकसर बाहर जाना पड़ता था. कुछ कपड़ों तथा जरूरत के सारे छोटेमोटे सामान के साथ उस के पति की अटैची सदा तैयार रहती. उस की बेटी रूपा कुछ साल बाद बड़ी हो गई थी. कालेज में पढ़ने लगी थी. मां के लिए उस के पास ज्यादा टाइम नहीं था. 4 चौकरों के बीच खिलौनों की तरह चक्कर काटती रहती थी. शिखा क्या करे. करने को कुछ काम ही नहीं था.

कभी कुछ भी करने को न होता तो वह नौकरों से पूरा फ्लैट धुलवा डालती. वह सफाई की शुरू से ही शौकीन थी. इस सफाई में उस का आधा दिन निकल जाता था. कभीकभी वह ड्राइंगरूम के शीशे स्वयं साफ करने लगती थी. उस के नौकर जो पुराने हो चुके थे, उसे काम करने से रोकते रहते थे. पर मन लगाने के लिए उसे कुछ काम तो करना चाहिए ही था. वह उपन्यास पढ़पढ़ कर ऊब गई थी क्योंकि उस के पति का स्टेटस देखते हुए उसे इस आयु में कोई जौब नहीं देगा. वैसे भी वह नौकरी करने की बात सोच भी नहीं सकती थी. पैसों कीकोई कमी नहीं थी.

जब मन बिलकुल न लगता तो दोनों मांबेटी कार ले कर खरीदारी के लिए निकल जाती थीं. थोड़े दिन उसी खरीदारी को व्यवस्थित करने में निकल जाते थे. कुछ दिन तो रूपा की पोशाक के लिए नई डिजाइन सोचने तथा कुछ अलट्रेशन कराने की बताने में ही निकल जाते थे. शिखा को बहुत अच्छा लगता जब उस की डिजाइन पर सिला कपड़ा रूपा पर खूब फबता.

पूरी रौनक तो उन दिनों आती थी, जब उस का पति अरुण दौरे से लौट कर घर आता. नौकरों में भी चहलपहल बढ़ जाती थी. 2 नौकर तो रसोई में जुटे रहते थे. अरुण को जोजो चीजें पसंद होतीं वे सब बनतीं. ऐसे में खाने की मेज पर डोंगों और प्लेटों की एक बाढ़ सी आ जाती. तब शिखा सजीसंवरी घूमती रहती थी.

मगर रूपा तब भी अपने में मस्त रहती. उसे अपनी सहेलियों और मित्रों के साथ इतना अच्छा लगता था कि वह घर को भूल ही जाती थी. उसे पता था, पिताजी जैसे आए हैं, वैसे ही चले जाएंगे. शाम को तो उन से मिलना ही है. बस और क्या चाहिए. फिर बड़ों के साथ बैठ कर उसे क्या मिलेगा. केवल प्यार भरी कोई नसीहत कि ऐसा करो, वैसा न करो, लड़कियों को खाना बनाना आना ही चाहिए, लड़कियों का बाहर बहुत नहीं रहना चाहिए आदिआदि.

जब से रूपा कालेज में पढ़ने लगी थी उसे यह सुनना बहुत बुरा लगने लगा था. शिखा जब उस मोबाइल पर फोन कर के कहती कि रूपा घर आने में देर न किया करो तो रूपा झंझाला उठती और कहती कि बताइए, घर आ कर मैं क्या करूं. यहां तो मेरा मन ही नहीं लगता. इसलिए थोड़ा शीला के घर चली जाती हूं.

जब शिखा उस से कहती कि बेटी, लड़कियों का ज्यादा देर बाहर रहना ठीक नहीं है तो रूपा कहती कि मां, पिताजी तो कभी ऐसा नहीं कहते. तुम हो कि सदा मुझे रोकती ही रहती हो. मां, अब दुनिया पहले से बहुत बदल गई है. लड़केलड़कियों में कोई अंतर नहीं होता आदि  कहती हुई दनादन सीढि़यां उतर जाती.

शिखा यह सब सुन कर भी चुप रह जाती थी. वह सोचने लगती कि क्या सचमुच जमाना बदल गया है. अपने जमाने में उसे अपनी मां और दादी से कितना डर लगता था. उसे स्कूल भी घर का नौकर छोड़ने जाता था. छुट्टी होते ही नौकर स्कूल के दरवाजे पर खड़ा मिलता था. एक दिन स्कूल से सीधे वह सहेली के घर चली गई थी. घर आते ही देखा पिता छड़ी ले कर दरवाजे पर चक्कर लगा रहे थे. मां अंदर अलग परेशान हो रह थी. वह डर के मारे सहम गई थी. बस इतना ही कह पाई थी, ‘‘मां, उस सहेली की तबीयत ठीक नहीं थी, इसलिए चली गई थी.’’

मगर आगे के लिए रास्ता बंद हो गया था. पिता बोले थे, ‘‘यदि तुम्हें जाना ही था तो पूछ कर जाती. अब आगे से कभी कहीं नहीं जाना.’’

दादी तो सीधे गालियां ही देने लगी थीं, ‘‘आजकल की लड़कियों को लोकलाज तो है नहीं. जहां चाहे घूमती फिरती हैं.’’

चाहे जो भी हो, वह जमाना था बड़ा अच्छा. लड़कियों में एक सलीका था, लिहाज था. छोटे बड़ों की इज्जत करते थे. पर अब तो हर बात का जवाब उन के पास मौजूद है. वह कैसे सम?ाए रूपा को. उसे लगता है जवानी के तूफान में रूपा बहकती जा रही है. वह कैसे रोके उसे.

एक दिन शिखा ने अरुण से भी कहा, ‘‘अरुण, रूपा को समझओ. तुम तो

बाहर रहते हो, वह दिनभर घर से बाहर रहती है. मेरी एक नहीं सुनती. तुम ने उसे प्यार में सिर पर चढ़ा रखा है. कालेज से भी देर से आने लगी हैं.’’

उत्तर में अरुण ने कहा, ‘‘शिखा, सच कहता हूं तुम अपने दकियानूसी विचारों को छोड़ नहीं पाईं. जमाना देखो, लड़कियां दुनिया नहीं देखेंगी तो सीखेंगी कैसे. फिर तुम किस की पत्नी हो,’’ उस के पति सिर ऊंचा कर के थोड़ा सीना तान कर कहते, ‘‘शिपिंग कंपनी के मालिक की, जिस के 3-3 कारखाने भी हैं. तुम्हें किसी बात की चिंता नहीं करनी चाहिए,’’ अरुण शिखा के कंधे पकड़ मुसकरा दिया.

अरुण उन की बातों से थोड़ा मुसकराने लगती. फिर सोचती, ये सुख के क्षण बेकार की बातों में चले जाएंगे. अरुण 4 दिन के लिए आए हैं, उन को सुख ही सुख देना चाहिए. यह सोच कर वह उन का हाथ पकड़ कर कहने लगती, ‘‘तुम आ जाते हो तो मुझ में नई ताकत आ जाती है. मन कहता है कि तुम से सबकुछ कह डालूं. मेरी आदत तो तुम समझाते ही हो, अकेले में घबरा जाती हूं,’’ कहते हुए वह चुपचाप अपना सिर अरुण के सीने पर रख देती और सुख का एहसास करने लगती.

अरुण भी धीरेधीरे उस के बाल सहलाने लगता और कहता, ‘‘तुम खुश रहती हो तो मुझे भी अच्छा लगता है.’’

मगर शिखा सोचती रहती, कभी आदमी अपना मन खोल कर नहीं रख सकता. रूपा के प्रति हो सकता है वह गलत हो, पर उस की आदतों में जो खुलापन आ रहा है, उसे वह कैसे रोके. अगर उस ने अरुण से कह भी दिया तो उस का क्या अर्थ निकलेगा. इस बात को सोच कर वह सबकुछ भूल कर अरुण के स्पर्श के सुख में खो जाती.

वैवाहिक विज्ञापन वर चाहिए : मेरी बेटी के लिए वर चाहिए

मेरी 25 वर्षीय बेटी कौन्वैंट एजुकेटेड डिगरीधारी है. एक एमएनसी यानी मल्टीनैशनल कंपनी के मैनेजिंग डायरैक्टर की पर्सनल सैक्रेटरी है. उस का सालाना पैकेज 15 लाख रुपए है. रंग गोरा, सुडौल, कदकाठी आकर्षक नयननक्श, कद 5 फुट 5 इंच के लिए गृहकार्य में दक्ष, सरकारी नौकरी करने वाला (प्राइवेट नौकरी वाले कृपया क्षमा करें), पढ़ालिखा, आधुनिक विचारों वाला, सहनशील, गौरवर्ण और कम से कम 5 फुट 9 इंच कद वाला आज्ञाकारी वर चाहिए. जो निम्न शर्तें पूरी करता हो वही संपर्क करें :

–       मेरी बेटी को देररात तक अपने पसंदीदा सीरियल देखने की आदत है. उसे ऐसा करने से रोका न जाए. रविवार या छुट्टी के दिन उसे जीभर कर सोने दिया जाए और उसे डिस्टर्ब न किया जाए.

–       पति स्वयं सुबह की गरमागरम चाय बनाने के बाद ही उसे जगाए.

–       जब वह निवृत्त हो कर बाथरूम से डैसिंगरूम में जाए तो डायनिंग टेबल पर  नाश्ता सर्व करना शुरू कर दिया जाए.

–       नाश्ता करने के बाद औफिस जाते समय उसे लंचबौक्स तैयार मिलना चाहिए.

–       औफिस में बहुत काम होते हैं, इसलिए वापसी में देर होने पर पूछताछ न की जाए.

–       उस का वेतन उस का अपना है, उस पर किसी तरह का अधिकार न जमाया जाए. साथ ही, पति अपना पूरा वेतन उस के हाथ में ला कर देगा क्योंकि पति के वेतन पर पत्नी का ही अधिकार होता है, अन्य किसी का नहीं.

–       हमारी लाड़ली बेटी को खाना बनाना नहीं आता है, इसलिए वह खाना नहीं बनाएगी. उसे खाना बनाने की कला सिखाने के लिए भी बाध्य न किया जाए. वहीं, यह ध्यान रखें कि घर में खाना उसी की पसंद का बनाया जाए.

–       साफसफाई का घर में पूरा ध्यान रखा जाए क्योंकि उसे गंदगी से सख्त नफरत है.

–       उस का बाथरूम कोई अन्य इस्तेमाल न करे. यदि प्रयोग किया है तो उसे पूरी तरह वायपर से रगड़ कर और पोंछा लगा कर साफ किया जाए.

–       हमारी बेटी व्हाट्सऐप और फेसबुक की फैन है. फोन पर व्यस्त रहते समय उसे बिलकुल भी डिस्टर्ब न किया जाए. उस की स्किल के कारण ही सैकड़ों लोग फ्रैंडरिक्वैस्ट भेज रहे हैं और उस की मित्रता पाने को तरस रहे हैं.

–       भूल कर भी उस के मोबाइल फोन को कोई हाथ न लगाए वरना दुष्परिणाम भुगतने के लिए परिवार को ही जिम्मेदार ठहराया जाएगा.

–       वह जो भी सूट या साड़ी पसंद करे उसे पति ही खरीद कर देगा. कोई नानुकुर सहन नहीं होगी.

–       जब भी कभी वह बच्चे को जन्म देगी तो बच्चे के लालनपालन की जिम्मेदारी बच्चे के पिता की ही होगी, मसलन नहलाना, डायपर्स बदलना, कपड़े पहनाना, दूध पिलाना, झूले पर झुलाना आदि. रात के समय बच्चे के रोने के कारण यदि उस की नींद डिस्टर्ब होगी तो इस के लिए सीधेसीधे बच्चे का पिता जिम्मेदार होगा और उसे ही कोपभाजन का शिकार होना पड़ेगा.

–       सास या ननद को उस की निजी जिंदगी में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं होगा.

–       परिवार के किसी भी सदस्य को उस से जिरह करने और किसी तरह का ताना देने का हक नहीं होगा.

शेष शर्तें लड़का पसंद आने पर बता दी जाएंगी.

नोट : हम ने अपनी बेटी को राजकुमारी की तरह पाला है और साथ ही, आधुनिक संस्कार भी दिए हैं. हम दावा तो नहीं करते लेकिन वादा जरूर करते हैं कि यह जिस घर में भी जाएगी वह परिवार ऐसी संस्कारवान वधू पा कर धन्य हो जाएगा.

डायटीशियन, भक्ति सामंत ने पके हुए केले को नियमित डाइट में शामिल करने का राज क्या बताया, जानें यहां

अधिकतर ऐसा माना जाता है कि जिस खाने की चीज का स्वाद अच्छा न हो, वह ज्यादातर हेल्दी ही होती है, लेकिन पके हुए केले के साथ ऐसा नहीं है, क्योंकि बच्चे से लेकर व्यस्क सभी तकरीबन केला खाना पसंद करते हैं. केला स्वाद में जितना अच्छा लगता है उससे कहीं ज्यादा अच्छे उसके फायदे होते हैं.

इस बारें में मुंबई की कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल की चीफ डायटीशियन, भक्ति सामंत कहती है कि मुख्य रूप से दक्षिण पूर्व एशिया का फल केला, दुनिया भर में सभी उष्णकटिबंधीय प्रदेशों में उगाया जाता है. आसानी से मिलने वाले फलों में केले को अपने आहार में कई तरह से इस्तेमाल में लाया जा सकता है. पोषक तत्वों का एक ऐसा किफायती पैकेज, जिसके लाभ सभी ले सकते हैं. अगर आप अपने आहार को बेहतर बनाने, उसमें पोषण और स्वाद जोड़ने के पॉकेट फ्रेंडली तरीके खोज रहे हैं, तो उसके लिए केले को एक बेहतरीन आहार कहा जा सकता है, रोज एक केला खाने से हमारे शरीर को रोगों से लड़ने में काफी मदद मिल सकती है और ये हानिकारक नहीं होता, साथ ही एक सप्लीमेंट का काम करता है.

केला सामयिक पेट भर सकता है, इसलिए राह चलते लोग भूख लगने पर इसे खाना उचित समझते है, क्योंकि छिलके के अंदर पके केले को हायजिनकली भी साफ माना जाता है, लेकिन इसमें इस बात का ध्यान अवश्य रखे कि केला किसी बीमारी का इलाज नहीं है. इसका सेवन बीमारी से बचाव करने और उसके लक्षणों के प्रभाव को कम करने में कुछ हद तक सहायक हो सकता है.

इसके फायदे निम्न है,

  • यह फल फाइबर, पोटेशियम, विटामिन बी 6, विटामिन सी, विभिन्न एंटीऑक्सिडेंट और फाइटोन्यूट्रिएंट्स जैसे आवश्यक पोषक तत्वों का एक समृद्ध स्रोत है.
  • केला स्वादिष्ट होने के साथ ही स्वास्थ्य की कई समस्याओं में फायदा पहुंचाने वाला होता है, केले में भारी मात्रा में पोटेशियम होने के कारण यह रक्तचाप को कम करने में मदद करता है.
  • केला खाने से हृदय प्रणाली पर तनाव कम होने की वजह से हाइपरटेंशन होने का खतरा कम हो सकता है.
  • मधुमेह मरीज़ को आमतौर पर केले से पूरी तरह परहेज करने की सलाह दी जाती है, जो वास्तव में गलत है, केले में प्रोटीन और फाइबर काफी ज़्यादा होता है, उसे कभी – कभी खाने में कोई हर्ज नहीं. इसके अलावा एक मेडिकल रिसर्च की मानें, तो केले को मधुमेह के इलाज के लिए के ट्रेडिशनल मेडिसिन के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है, साथ ही बनाना स्टेम (डंठल) और इसके फूल भी मधुमेह की स्थिति में कुछ हद तक राहत पहुंचा सकता है.
  • केला फाइबर युक्त होता है, इसलिए यह वजन घटाने में भी सहायक होता है. यह शरीर में बिना कैलोरी बढ़ाये पेट भर सकता है, जिससे वजन नियंत्रित रहता है. इसके अलावा केले में रेजिस्टेंस स्टार्च भी रहता है, जो वजन को नियंत्रित कर सकता है.
  • आपने सुना होगा कि पुरानी पीढ़ी के लोग केला खाने से रोकते हैं, खासकर जब खांसी और सर्दी हो. वे कहते हैं कि इससे लक्षण और अधिक बढ़ जाते हैं, लेकिन अध्ययनों के अनुसार केले में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट अस्थमा से पीड़ित बच्चों में घरघराहट के प्रभाव को कम करने में मदद करता हैं.
  • केले का सेवन कैंसर के विकास के जोखिम को कम करने में भी मदद करता है, क्योंकि इसमें मौजूद विटामिन सी और ल्यूसीन के उच्च स्तर के कारण ये मजबूत एंटीऑक्सिडेंट होते हैं, जो कैंसर विरोधी प्रभाव डालने का काम करते हैं.
  • BRAT आहार में ‘बी’ का मतलब केला है, जो दस्त के इलाज के लिए उपयोग में लाया जाने वाला आहार है. लगातार दस्त होने पर कई बार डॉक्टर्स बच्चे या वयस्कों को पके केले खाने की सलाह देते है. इसमें काफी ज़्यादा फाइबर और पानी होता है, जो पाचन तंत्र को नियमित करने में मदद करते हैं और दस्त के दौरान होने वाले इलेक्ट्रोलाइट्स के नुकसान को पूरा करने में मदद करके व्यक्ति को तुरंत ऊर्जा देता हैं.
  • इसमें पेक्टिन भी प्रचुर मात्रा में होता है जो मल को नरम करने और कब्ज को रोकने में मदद करता है.
  • केले में अमीनो एसिड- ट्रिप्टोफैन होने के कारण यह तुरंत मूड बूस्टर भी है, जो यादाश्त, सीखने की क्षमता और मूड में सुधार करने के लिए जाना जाता है.
  • कार्बोहाइड्रेट और फाइबर से भरपूर होने के कारण, केला भूख मिटाने का भी अच्छा स्त्रोत है. यह तुरंत ऊर्जा देता है और इसे स्कूल जाने वाले बच्चों से लेकर एथलीटों तक सभी के लिए एक बहुत ही अच्छा स्नैक विकल्प है.
  • यही नहीं स्वस्थ और चमकती त्वचा भी केले के सेवन के कई लाभों में से एक है, क्योंकि केला एंटीऑक्सिडेंट, विटामिन C और विटामिन A का एक समृद्ध स्रोत है.

कुल मिलाकर, पॉकेट फ्रेंडली केला पर्याप्त पोषक तत्वों, स्वास्थ्य लाभ और सुविधा के साथ एक उत्कृष्ट विकल्प है. इसे नियमित अपने डाइट में शामिल करें.

बेसन की बाटी

अगर आप भी किटी पार्टी में अपनी दोस्तों के लिए हेल्दी और टेस्टी रेसिपी बनाना चाहती हैं तो बेसन की बाटी रेसिपी आपके काम की है. बेसन की बाटी बनाना बेहद आसान है. इसे आप अपनी फैमिली के लिए कभी भी बनाकर परोस सकती हैं.

हमें चाहिए

11/2 कप बेसन

1/2 कप मक्के का आटा

2 बड़े चम्मच घी

1/2 कप पनीर

1 हरीमिर्च कटी

1 बड़ा चम्मच धनियापत्ती कटी

तलने के लिए तेल

नमक स्वादानुसार.

बनाने का तरीका

मक्के के आटे को छान कर बेसन, घी और नमक मिला कर गूंध लें. उबलते पानी में आटे की लोइयां बना कर 8-10 मिनट पकाएं. पानी से निकाल कर अच्छी तरह मसल कर छोटीछोटी बौल्स बनाएं. पनीर को मसल कर उस में धनियापत्ती, हरीमिर्च और नमक मिलाएं. आटे की छोटीछोटी बौल्स के बीच पनीर का मिश्रण भर कर अच्छी तरह बंद कर गरम तेल में सुनहरा होने तक तलें, सरसों के साग के साथ सर्व करें.

मेरे बाल कर्ली हैं, मै इन्हें सीधे करने के लिए क्या करूं?

सवाल

मेरे बाल कर्ली हैं जो देखने में अच्छे नहीं लगते और उन्हें बांधने का कोई नया स्टाइल भी नहीं बन पाता. बालों को सीधा करने का उपाय बताएं?

जवाब

आप के लिए परमानैंट स्ट्रेटनिंग करवाना सही रहेगा क्योंकि कर्ली बालों को टैंपरेरी स्ट्रेटनिंग करने पर यह आप को रोजरोज करनी पड़ेगी और इस से बारबार हीट लगने से बाल खराब भी हो जाएंगेजबकि परमानैंट स्ट्रेटनिंग में यूज होने वाले प्रोडक्ट्स बालों को न्यूट्रिशन प्रदान करेंगे और बाल लंबे समय के लिए सीधे रहने के साथसाथ खूबसूरत भी दिखेंगे. घर में आप बालों में कोई भी तेल लगा थोड़ा पानी लगा कर जूडे़ की तरह बांधें और सुबह खोलेंगी तो भी बाल कुछ हद तक स्ट्रेट हो जाते हैं.

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