हृदय संबंधी बीमारियों से जल्द पाएं निजात

हाई ब्लडप्रैशर, डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों से ग्रस्त महिलाओं की गर्भावस्था अधिक जोखिम वाली मानी जाती है. इस दौरान ऐसी महिलाओं पर विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत होती है.

अधिक जोखिम वाली गर्भावस्था (हाई ब्लडप्रैशर, गर्भावस्था के दौरान ऐक्लैंसिया) और हार्ट अटैक व स्ट्रोक आने की आशंका बढ़ने (8 से 10) के बीच संबंध पाया गया है. ये आंकड़े सामान्य गर्भावस्था वाली महिलाओं की तुलना में जुटाए गए हैं.

जोखिमभरी गर्भावस्था वाली महिलाओं की पहचान की जानी चाहिए और नियमित तौर पर हाई ब्लडप्रैशर, कोलैस्ट्रौल व डायबिटीज के लिए उन की जांच की जानी चाहिए. अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के दिशानिर्देशों के अनुसार, अधिक जोखिम वाली गर्भावस्था के एक साल के भीतर इन महिलाओं की स्वास्थ्य जांच होनी चाहिए.

आयरन की कमी से हृदय रोग

एनीमिया में रक्त में औक्सीजन ले जाने वाली मौलिक्यूल हीमोग्लोबीन का स्तर कम हो जाता है और इस से सीधे हार्ट अटैक हो सकता है या फिर व्यक्ति की हृदय संबंधी बीमारियों की गंभीरता बढ़ सकती है. विटामिन बी1 की कमी के कारण होने वाले एनीमिया से हार्ट पर सीधे असर हो सकता है जिस से हार्ट फेल भी हो सकता है. हालांकि, तुरंत विटामिन बी1 की डोज देने से इस स्थिति को बदला जा सकता है.

एनीमिया आमतौर पर कंजैस्टिव हार्ट फेल्योर और कोरोनरी आर्टरी डिजीज जैसी हृदय संबंधी बीमारियों को बढ़ा देता है. हार्ट फेल होने या एंजाइना की स्थिति में अगर रोगी का हीमोग्लोबीन स्तर 7-8 ग्राम से कम है तो रोगी के लक्षण और प्रोग्नोसिस को ब्लड ट्रांसफ्यूजन के जरिए सुधारा जा सकता है.

हृदय संबंधी बीमारियों के ज्यादातर रोगी जो दवाएं लेते हैं उन में खून को पतला करने वाले तत्त्व होते हैं, जिस से खून की मात्रा कम हो सकती है. एनीमिक रोग में हृदय संबंधी बीमारी का पता चलने पर इन बातों को ध्यान में रखा जाना चाहिए.

स्वस्थ हृदय के लिए भोजन

हमेशा से ही मनुष्य को होने वाली बीमारियों को उस के द्वारा खाए जा रहे भोजन से जोड़ा जाता रहा है. आधुनिक युग में लोगों को होने वाली हृदय संबंधी सब से आम बीमारी कोरोनरी आर्टरी डिजीज का भोजन के साथ गहरा रिश्ता है. आधुनिक भोजन में फैट की मात्रा बहुत अधिक होती है. विशेषतौर पर, सैचुरेटेड फैट का सीधा संबंध कोरोनरी आर्टरी डिजीज से होता है. वहीं दूसरी ओर, फलों और हरी सब्जियों जैसे स्वस्थ भोजन में कई ऐसे तत्त्व पाए जाते हैं जो हृदय की सुरक्षा में प्रभावकारी होते हैं.

कुछ ऐसे भोजन जो स्वस्थ हृदय के लिए सही हैं. जैसे हरी सब्जियां, फल, अनाज, पौलीअनसैचुरेटेड औयल जैसे सरसों, औलिव और कनोला, मछली विशेषकर समुद्री मछली और नट्स जैसे बादाम, अखरोट इत्यादि.

स्लीप एप्निया

इस से अचानक कार्डियेक डैथ यानी एससीडी (लक्षण दिखने के 1 घंटे के भीतर मौत) का जोखिम बढ़ जाता है. औब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया यानी ओएसए से एससीडी होने की आशंका 2.5 गुना बढ़ जाती है. ओएसए के दौरान रक्त में बारबार औक्सीजन की कमी (हाइपोक्सिया) होती है. हाइपोक्सिया की इस अवधि के दौरान हृदय में हार्ट रिदम संबंधी विकास उत्पन्न होने लगते हैं. इन रिदम डिस्और्डर में से एक वैंट्रिक्यूलर टैकीकार्डिया/ फाइब्रिलेशन सडन कार्डियेक डैथ के लिए जिम्मेदार होता है.

ओएसए को कई बार कार्डिएक जोखिम बढ़ाने वाले कारकों जैसे मोटापा, हाइपरटैंशन, डायबिटीज से भी जोड़ा जा सकता है, जिन की वजह से कोरोनरी आर्टरी डिजीज होती हैं. कोरोनरी आर्टरी डिजीज अपनेआप में सडन कार्डिएक डैथ की बड़ी वजह होती हैं. यह भी देखा गया है कि ओएसए और संबंधित बीमारियों का इलाज कराने से एससीडी के मामलों में गिरावट आई है.

हार्ट अटैक के जोखिम कारक

जोखिम कारक ऐसी क्लीनिकल परिस्थितियां होती हैं जो किसी व्यक्ति या समाज में मौजूद होती हैं, जिन से कोई विशिष्ट बीमारी होने की आशंका बढ़ जाती है. हार्ट डिजीज की बात करें तो इस के लिए कई जोखिम कारकों की पहचान की गई है. जोखिम कारकों के सब से बड़े अध्ययन, जिस में 52 देशों के पुरुषों व महिलाओं समेत 30 हजार से अधिक लोगों ने प्रतिभागिता की, में सामने आया है कि किसी व्यक्ति को हृदय संबंधी बीमारियां होने की मुख्यतया 9 बुनियादी वजहें होती हैं– टोटल कोलैस्ट्रौल, धूम्रपान, हाइपरटैंशन, डायबिटीज, ऐब्डौमिनल औबेसिटी, मनोवैज्ञानिक, आहार यानी फल व सब्जियां, शारीरिक गतिविधियां और मदिरापान.

इन जोखिम कारकों की मौजूदगी के मामले में महिलाएं भी पुरुषों से अलग नहीं होती हैं, सिर्फ इन 2 लिहाज से कि महिलाओं में ट्राइग्लिसराइड्स लिपिड व एस्ट्रोजन और ओरल कंस्ट्रासैप्टिव्स भी भूमिका निभाते हैं. इस के अतिरिक्त कोई अंतर नहीं है.

जिन महिलाओं को मासिकधर्म हो रहा हो, उन्हें इस बीमारी से थोड़ी सुरक्षा रहती है. लेकिन डायबिटीज, हाइपरटैंशन, धूम्रपान और मोटापे जैसी समस्याओं ने इस लाभ को काफी हद तक कम कर दिया है.

साइलैंट हार्ट अटैक

करीब 20 से 25 फीसदी मामलों में हार्ट अटैक का सीने में दर्द जैसा सामान्य लक्षण नहीं दिखता, बल्कि इस में सांस लेने में तकलीफ, अचानक कमजोरी महसूस होना, बेहोशी होना इत्यादि लक्षण दिखते हैं. इस वजह से लोगों का ध्यान इस की तरफ नहीं जाता. इस की तरफ ध्यान तभी जाता है जब व्यक्ति फिजीशियन के पास जा कर ईसीजी और अल्ट्रासाउंड कराता है और उस में हार्ट अटैक होने के लक्षण मिलते हैं. यह सब से ज्यादा डायबिटीज से पीडि़त व्यक्तियों या बुजुर्गों में दिखता है और इसलिए जब इस आबादी में असाधारण लक्षण दिखें तो उन की ध्यानपूर्वक जांच करना बहुत महत्त्वपूर्ण हो गया है. साइलैंट हार्ट अटैक का इलाज भी सीने में दर्द करने वाले सामान्य हार्ट अटैक जैसा ही होता है.

सामान्य गलतफहमियां

मौजूदा समय में सब से अधिक मौतों की प्रमुख वजहों में हार्ट अटैक भी शामिल है. इस बीमारी के कारण बड़ी संख्या में होने वाली मौतों को देखते हुए इसे ले कर गई गलत अवधारणाएं भी बन गई हैं.

भारत में हृदय संबंधी बीमारियों को ले कर शीर्ष 10 गलत अवधारणाएं निम्न हैं-

यह गैस की बीमारी है, इस का हार्ट अटैक से कोई लेनादेना नहीं है. ईनो, एंटासिड लेने से काम चल जाएगा. हृदय संबंधी बीमारियों के प्रति इसी गलत अवधारणा के कारण रोजाना कई रोगी जान गंवा रहे हैं. कोई भी असाधारण लक्षण महसूस हो, विशेषकर सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, बेहोशी, बेहद कमजोरी आदि तो तुरंत फिजीशियन से संपर्क करें.

मुझे पता है कि मैं धूम्रपान करता / करती हूं, हाई ब्लडप्रैशर, डायबिटीज है लेकिन मुझे हृदय संबंधी बीमारी के कोई लक्षण नहीं हैं तो फिर चिंता की क्या बात, ये परिस्थितियां साइलैंट किलर होती हैं. संभव है कि कई वर्षों तक कोई लक्षण नहीं दिखाई दे लेकिन इन्हें नजरअंदाज करना बाद में जानलेवा साबित हो सकता है.

मेरे मातापिता को हृदय संबंधी बीमारियां हैं लेकिन उस के बारे में कुछ नहीं किया जा सकता है. अगर ऐसा है तो आप को भी हृदय संबंधी बीमारियां होने का जोखिम है. लेकिन आप कुछ कदमों का पालन कर इसे रोक सकते हैं, जैसे धूम्रपान नहीं करें और डायबिटीज, हाइपरटैंशन व कोलैस्ट्रौल को नियंत्रित करें. साथ ही, स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं, स्वस्थ भोजन खाएं और वजन नियंत्रित रखें.

हृदय संबंधी बीमारी होने की चिंता करने के लिए मेरी उम्र अभी बहुत कम है. ऐसा ठीक नहीं है क्योंकि आप की कोरोनरी आर्टरीज में फैट इकट्ठा होने की प्रक्रिया बचपन में ही शुरू हो जाती है. इस की रोकथाम के लिए कदम उठाने भी आप को कम उम्र में ही शुरू कर देने चाहिए.

ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम

अगर किसी महिला नहीं, बल्कि किसी और वजह से आप का दिल टूटा है तो यह गंभीर समस्या है. यह ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम साबित हो सकता है. आमतौर पर इस की वजह गंभीर तनाव वाली परिस्थितियां, जैसे किसी प्रिय की मृत्यु होना या तलाक इत्यादि होती है. यह हार्ट अटैक जैसा ही होता है और इस से हार्ट फेल भी हो सकता है. इस की कोरोनरी एंजियोग्राम और हृदय का अल्ट्रासाउंड (ईको) से जांच कराएं. यह पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में अधिक होता है. अच्छी बात यह है कि ज्यादातर मामलों में हृदय कुछ हफ्तों में ही इस से उबर जाता है.

10 बातें जो आप को जाननी चाहिए

जानें कि आप को हृदय संबंधी बीमारियां होने का कितना जोखिम है, यह आप की उम्र, परिवार, पारिवारिक इतिहास, आप के वजन, शारीरिक गतिविधियों के स्तर, धूम्रपान की आदत, डायबिटीज, हाइपरटैंशन और कोलैस्ट्रौल पर निर्भर करती है.

धूम्रपान करते हैं, तो छोड़ दें.

लंबाई के अनुपात में स्वस्थ वजन बरकरार रखें.

खानपान की आदतों की समीक्षा करें और भोजन में फैट, नट्स, फल व सब्जियों, मांसाहारी पदार्थों, अंडों के सेवन पर ध्यान दें. बताई गई डाइट का पालन करें.

किसी भी प्रकार की कोई शारीरिक गतिविधि करना डायबिटीज, कोरोनरी आर्टरी डिजीज, कैंसर या स्ट्रोक जैसी बीमारियों को रोकने या देरी करने में प्रभावकारी होती हैं.

ब्लडप्रैशर पर नजर रखें, अगर आप हाइपरटैंसिव हैं तो ब्लडप्रैशर को दिशानिर्देशों के तहत नियंत्रित रखें.

अगर आप को डायबिटीज है तो अपने ब्लडशुगर को बताई गई सीमा में रखें, आदर्श वजन बरकरार रखें, कोलैस्ट्रौल, ब्लडप्रैशर पर नजर रखें और उन्हें नियंत्रित रखें.

कोलैस्ट्रौल की जांच कराएं.

25 वर्ष से अधिक उम्र के प्रत्येक व्यक्ति को यह पता होना चाहिए कि वे इसे दिशानिर्देशों के अनुसार स्वस्थ स्तर पर बरकरार रखें.

जितनी जल्दी मुमकिन हो, पूरे परिवार को इस से बचाने के लिए रोकथाम के कदम उठाएं.

परिवार में महिलाओं को नजरअंदाज नहीं करें. उन में जोखिम कारकों की पहचान व उन का इलाज भी बेहद महत्त्वपूर्ण है.

आधुनिक जीवनशैली में 30 से 40 वर्ष की उम्र में ही लोगों को दिल के रोग होने लगे हैं. खराब जीवनशैली, तनाव, व्यायाम न करना, खराब खानपान इस के प्रमुख कारण हैं. जोखिमभरी गर्भावस्था वाली महिलाओं की नियमित रूप से हाई ब्लडपै्रशर, कोलैस्ट्रौल व डायबिटीज की जांच की जानी चाहिए.

Bigg Boss 17 Promo: दिल और दिमाग को हिलाकर रख देगा बिग बॉस, 3 अवतार में दिखें सलमान

बॉलीवुड के दबंग एक्टर सलमान खान का कॉन्ट्रोवर्शियल शो ‘बिग बॉस’ टीवी का सबसे हिट शो है. सलमान बिग बॉस 17 के होस्ट के रूप में वापस आ गए हैं. बिग बॉस ओटीटी सीजन 2 खत्म होने के ठीक एक महीने बाद, सलमान ने गुरुवार शाम को रियलिटी शो के एक नए प्रोमो के साथ फैंस को हैरान कर दिया. सलमान ने इंस्टाग्राम पर नए सीज़न का पहला प्रोमो साझा किया.

बिग बॉस 17 का नया प्रोमो

टीवी का कॉन्ट्रोवर्शियल शो ‘बिग बॉस 17’ का प्रोमो आ चुका है. पहले प्रोमो में सलमान कहते हैं कि अब तक दर्शकों को केवल आंखें ही देखने को मिली हैं, लेकिन इस बार सभी को पहली बार तीन अवतार देखने को मिलेंगे. पहला अवतार ‘दिल’ या हार्ट है. प्रोमो में सलमान लाल कुर्ता पहने हुए और कैमरे की ओर देखकर मुस्कुराते हुए नजर आ रहे हैं.

वहीं, दूसरे अवतार में वह ‘दिमाग’ और ब्रेन कहते नजर आ रहे हैं. आख़िर में, सलमान कहते हैं कि तीसरा भाग ‘दम’ या शक्ति है. टीज़र यहां सलमान के कहने के साथ समाप्त होता है, “अभी के लिए इतना ही, प्रोमो हुआ खत्म.

प्रोमो शो के नए लोगो और टैगलाइन, ‘कमिंग सून’ के साथ समाप्त होता है. कैप्शन में सलमान ने लिखा, ‘इस बार बिग बॉस दिखाएंगे एक अलग रंग, जिसे देखकर रह जाएंगे आप सब दंग.’

 

View this post on Instagram

 

A post shared by ColorsTV (@colorstv)

 

फैंस ने दी प्रतिक्रियाएं

बिग बॉस 17 के नए प्रोमो पर फैंस ने प्रतिक्रिया दी. टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया करते हुए, एक प्रशंसक ने कहा, “आखिरकार प्रोमो आ गया, मैं बहुत उत्साहित हूं. दूसरे ने कहा, “वाह, मैं बहुत उत्साहित हूं.” एक टिप्पणी में लिखा था, “मुझे विश्वास नहीं हो रहा! आख़िरकार!” “यह देखने के लिए बहुत उत्साहित हूं कि नया अवतार क्या है!”

बिग बॉस 17 के ये कंटेस्टेंट्स

शो के संभावित कंटेस्टेंट्स को लेकर कई खबरें आईं. मीडिया रिपोर्ट के  मुताबिक एक सूत्र के हवाले से कहा गया है कि कंवर ढिल्लन और ऐलिस कौशिक बिग बॉस 17 में नजर आ सकते है.

Anupama: मालती देवी ने अनुज को लगाया गले, अनुपमा हुई हैरान

रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर अनुपमा में आया जबरदस्त ट्विस्ट मालती देवी ने अनुज को लगाया गले. शो के मेकर्स टीआरपी में नंबर वन बनने के लिए जद्दोजहद में लगे है. अनुपमा के बीते एपिसोड में देखने को मिला कि पाखी सही सलामत घर में पाखी की एंट्री हो जाती है. जिसको लेकर सब परेशान थे. रोमिल के इस प्रैंक से सभी लोग नाराज होते है और उसे जेल भेजना चाह रहे होते है. रोमिल का पक्ष अंकुश लेता है लेकिन पाखी ने रोमिल को माफ कर दिया है.

मालती देवी ने अनुज को लगाया गले

टीवी सीरियल अनुपमा के अपकमिंग एपिसोड में देखने को मिलेगा कि कपाडिया हाउस में मालती देवी से कुछ कांच के पीस टूट जाते है. जिससे वह परेशान हो जाएगी और बार-बार कहेंगी- मैंने कुछ नहीं किया, मैंने कुछ नहीं किया. इस पर अनुपमा कहेंगी कोई बात नहीं टूट गया तो टूट गया. हालांकि इस बीच कांच के ऊपर से गुजर के मालती देवी अनुज को गले लगाती है और कहती, प्लीज मुझे ले जाओ, मुझे यहां नहीं रहना है. अपनी मां को घर ले जा. ये देख के हर कोई हैरान रह जाता है. खुद अनुज भी.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Anupama💟 (@anupamaa2k23)

मालती देवी की वापसी

आपको बता दें, मालती देवी पहले अनुपमा के सपने के लिए उसकी मदद करती थी. तो बाद में उसके खिलाफ हो गई थी और उसे बर्बाद करना चाहती थी. इसके बाद मालती देवी का शो में ट्रैक खत्म कर दिया था. जब उनकी वापसी हुई तो वह शो में बेसुध नजर आई. उनकी याददाश्त जा चुकी थी. अनुपमा को अभी तक पता लग चुका है कि यह सब नकुल की वजह से हुआ है जिसने धोखे से उनकी संपत्ति को हड़प ली. अब अनुपमा मालती देवी का ख्याल रख रहीं है.

बीच राह में: भाग 2- अनिता ने अपना घर क्यों नहीं बसाया

पर डाक्टर आनंद ने कभी उस का प्रेमी बनने की कोशिश नहीं की.डाक्टर आनंद ने जब अपनी शादी की25वीं सालगिरह मनाई तब लगभग पूरे अस्पताल को अपनी कोठी पर दावत में बुलाया. वहांजब अनिता नहीं पहुंची, तो सब को बहुतहैरानी हुई.

अनिता ने अपने न आने की बात डाक्टर आनंद को पहले ही बता दी थी.‘‘तुम पार्टी में क्यों नहीं आओगी?’’ डाक्टर आनंद उस की बात सुन कर उलझन का शिकार बन गए थे.‘‘सर, मेरी और आप की दोस्ती अस्पताल के अंदर ही ठीक है. यहां आप के सब से ज्यादा नजदीक मैं ही हूं.

आप के घर में बात अलग होगी. वहां आप के ऊपर मुझ से ज्यादा अधिकार रखने वाले बहुत लोग होंगे और यह बात मेरा दिल सहन नहीं कर पाएगा,’’ अनिता ने अपने मन की बात साफसाफ बता दी.‘‘यह तो समझदारी वाली बात नहीं हुई,’’ डाक्टर आनंद ने सिर्फ इतना ही कहा औरफिर उस पर पार्टी में शामिल होने को जोरनहीं डाला.

‘‘मैं सिरफिरी लड़की हूं, इतना तो आप मेरे बारे में समझ ही लीजिए,’’ खुल कर मुसकरा रही अनिता की नजरों का सामना नहीं कर पाए थे उस शाम डाक्टर आनंद और सोच में डूबे से वार्ड का राउंड लेने निकल गए.

उन के एक मरीज योगेशजी ने अपने बेटे की शादी में डाक्टर आनंद और अनिता दोनों को बहुत जोर दे कर बुलाया था. वहां से लौटते हुए देर हो गई तो दोनों को अपने घर ले आए थे. उन के रुकने की व्यवस्था उन्होंने 2 गैस्टरूमों में करवा दी थी.

उस रात अनिता उन के कमरे में चलीआई. बोली, ‘‘मैं आज आप से दूरनहीं सोना चाहती हूं,’’ और फिर उन की छाती से जा लगी.डाक्टर आनंद कुछ पलों तक पत्थर की मूर्ति से खड़े रहे. फिर जब अनिता ने उन की आंखों में प्यार से झंका तो उन्होंने उसे अपनी बांहों के मजबूत बंधन में कैद कर लिया.डाक्टर आनंद उस की जिंदगी में आने वाले पहले पुरुष थे.

प्यार की वह रात इस का सुबूत छोड़ गई थी.‘‘आई एम वैरी हैप्पी सर कि आप को मैं वह दे पाई हूं जो दिल के करीबी को ही सौंपना चाहिए. मैं ने जो किया है वह अपनी खुशियों की खातिर किया है,’’ बाद में अनिता ने ऐसा कह कर उन्हें किसी तरह के अपराधबोध में नहीं उलझने दिया था.‘‘मुझे फिर भी बहुत अजीब सा लगरहा है,’’ डाक्टर आनंद काफी बेचैन नजर आरहे थे.‘‘आप अपने को परेशान मत कीजिए, प्लीज.’’‘‘अनिता, तुम ने मुझे अपना सब कुछ सौंप दिया है पर मैं बदले में तुम्हें कुछ नहीं दे सकता हूं… न शादी, न समाज में इज्जत… उलटा मैं तुम्हारी बदनामी का कारण…’’अनिता ने उन के मुंह पर हाथ रख उन्हें आगे नहीं बोलने दिया और खुद भावुक हो कर कहा, ‘‘आप बेकार की बातें सोच कर परेशान मत होइए… जो हुआ है उसे मैं ने चाहा है और तभी वह हुआ है.

मैं आप के साथ जुड़ कर बहुत सुखी और खुश हूं. रोज सुबह उठ कर आप के बारे में सोचती हूं तो मन जीने के उत्साह से भर जाता है. आई लव यू, सर.’’‘‘पता नहीं यह रिश्ता कब तक चलेगा,कैसे चलेगा?’’ डाक्टर आनंद ने उस का माथा चूमने के बाद अपने मन की चिंता व्यक्त की.‘‘मेरी दिली इच्छा है कि हमारा यह रिश्ता मेरी आखिरी सांस तक चले,’’

अनिता ने उन की छाती पर सिर टिकाया और संतुष्ट अंदाज में आंखें बंद कर लीं.‘‘तुम से पहले तो मेरी सांसें बंद होंगी,माई स्वीटहार्ट.’’‘‘आप 100 साल और मैं 80 साल तक जिऊंगी, जनाब और फिर हम दोनों एक ही दिन इस दुनिया से विदा लें, तो कैसा रहेगा?’’ अनिता एकाएक हंस पड़ी तो डाक्टर आनंद भी मुसकराने को मजबूर हो गए. दोनों अब महीने में 1-2 बार योगेशजी की कोठी में ही मिलते.

उन के अलावा उन दोनों के बीच बने प्रेमसंबंध का कोई और राजदार नहींथा. डाक्टर आनंद की पत्नी सीमा भी जबकभी उस से किसी पार्टी में मिलीं, हमेशा हंस कर मिलीं.‘‘मेरी पत्नी कहती है कि मैं धीरेधीरे बूढ़ा होता जा रहा हूं. वह सम?ाती है कि जब तक अंदर ताकत है, मैं उस के साथ खूब मजे कर लूं… मैं क्या बूढ़ा हो गया हूं?’’ एक रात अनिता को जी भर के प्यार करने के बाद डाक्टर आनंद ने उस से हंसते हुए पूछा.

‘‘मुझे किसी और के साथ सोने का तो अनुभव नहीं है पर जो कुछ सहेलियों से सुना है और इंटरनैट पर देखा है, उस के हिसाब से तो आप जवानों को मात कर देने वाली जवानी के मालिक हो,’’ अनिता ने उन की दिल से तारीफ की तो वे बहुत खुश हुए.

डाक्टर आनंद ने 3 बार नए अस्पतालों में काम करना शुरू किया और तीनों बार 2 महीनों के अंदरअंदर ही अनिता ने भी उन्हीं अस्पताल में नौकरी शुरू कर ली.

दिल के औपरेशन के बाद मरीज की देखभाल करने की वह विशेषज्ञा समझ जाती थी, इसलिए अस्पताल वाले उसे खुशी से रख लेते थे. सीनियर होने के साथ उसे रहने केलिए फ्लैट मिलने लगा पर डाक्टर आनंद ने एक रात भी कभी उस के फ्लैट में नहीं गुजारी.

‘‘मैं नहीं चाहता हूं कि मेरे कारण कभी कोई तुम्हारा अपमान करे… अगर कभी ऐसा हुआ तो मु?ो तुम्हारे साथ सारे संबंध तोड़ने पड़ेंगे,’’ डाक्टर आनंद की इस चेतावनी को सुनने के बाद अनिता ने उन पर फिर कभी फ्लैट में आने को दबाव नहीं बनाया.

वह उन के लिए कभीकभी खाने की मनपसंद चीज बना कर ले जाती थी. उन्हें खासकर आलू के परांठे और खीर बहुत पसंद थी.

जब भी कोई खास मौका होता तो डाक्टर आनंद के कक्ष में दोनों इन का लुत्फ उठाते.जिस इंसान को केंद्र मान कर 20 साल से अनिता का सारा जीवन घूम रहा था, उसेअचानक दिल का तेज दौरा पड़ा था. उन की कोठी से रात के 11 बजे उन्हें ऐंबुलैंस से आईसीयू में लाया गया था.

प्रैगनैंसी: भाग 2- अरुण को बड़ा सबक कब मिला

4-5 दिन बाद शिखा अपने पति अरुण को फिर हवाईअड्डे पर छोड़ने गई. इस बार वह कंपनी के कुछ अधिकारियों के साथ अकेली थी. रूपा को उस ने कालेज जाने से रोका था और कहा था कि उस के पिताजी अब की बार लंबे दौरे पर जा रहे हैं, उन को विदा करने के लिए चलना है.

पर रूपा ने स्वयं पिता से जा कर कह दिया, ‘‘पिताजी, आप तो जानते ही हैं, कालेज कितना जरूरी होता है. एक छुट्टी का मतलब है 2 दिन तक लड़कियों से नोट्स मांगते फिरो. फिर आप तो कार से उतरते ही हवाईअड्डे के सुरक्षित भाग में चले जाएंगे. इस से अच्छा है आप हमें यहीं मोटी सी पप्पी दे दो.’’

अरुणा रूपा के सामने कुछ नहीं बोल पाया. रूपा के गाल पर प्यार किया और कंधा थपथपाते हुए बस इतना ही कहा, ‘‘तुम्हारी मां अकेले थोड़ा परेशान हो जाती है, उन का खयाल. रखना मैं अब की बार डेढ़ महीने बाद आऊंगा.’’

रूपा के इस तरह के व्यवहार से अरुण भी थोड़ा हिल गया था. एक क्षण को सोचा भी कि आजकल के बच्चे कितने हृदनहीन होते जा रहे हैं. फिर पुरुष होने के नाते दृढ़ता आ गई और फिर कंपनी के अधिकारियों से बात करने लगा.

इस बार अरुण को भी दुख हो रहा था कि वह शिखा को डेढ़ महीने के लिए अकेली छोड़े जा रहा है पर कर भी क्या सकता था. काम की जिम्मेदारियों का भी जीवन में अलग हिस्सा होता है. आदमी उन में उलझता है तो घर की जिम्मेदारी छोटी लगने लगती है.

अरुण के जाने के बाद शिखा अकेली ही गाड़ी में बैठ कर घर लौट आई. ड्राइंगरूम के सोफे पर वह निढाल सी बैठ गई. उसे को लगा समय जैसे एक क्षण को ठहर गया हो. करने को कुछ काम ही नहीं है. रूपा कालेज चली गई थी.

अरुण के उन शब्दों को याद कर के कि तुम खुश रहोगी तो मुझे भी ताकत मिलेगी, वह थोड़ा संभली. बाहर छज्जे पर जा कर गहरे नीले समुद्र की तरफ देखती रही और सोचती रही कि उसे भी समुद्र की तरह सबकुछ बरदाश्त कर लेना चाहिए. एकाएक उसे समुद्र की लहरों में संगीत की ध्वनि सुनाई देने लगी. वह अरु ण की याद के सुख में खो गई…

एक दिन शिखा अपने पलंग पर लेटी हुई रूपा का इंतजार कर रही थी, 4 बज चुके थे, अकसर रूपा 4 बजे तक कालेज से वापस आ जाती थी. वैसे उस की छुट्टी तो डेढ़ बजे ही हो जाती थी, पर घर पर आतेआते 4 बज जाते थे. शिखा शाम की चाय के लिए बराबर उस का इंतजार करती थी पर उस दिन 4 कभी के बज चुके थे.

वैसे रूपा को लेने के लिए वह गाड़ी भी भेज सकती थी, पर यह रूपा को पसंद नहीं था. उस का कहना था, ‘‘हर समय मेरे पीछे ड्राइवर भागता रहे, यह मुझे पसंद नहीं.’’

शिखा हर तरफ से जैसे मजबूर हो गई थी. दरवाजे की घंटी जैसे उस के कानों में आ कर फिट हो गई थी. हर आवाज उसे दरवाजे की घंटी जैसी लगती. पर फिर वह उदास हो जाती और सोचने लगती कि पति के बिना भी औरत कितनी मजबूर हो जाती है. इस समय कुछ हो जाए तो वह क्या कर सकती है. उस का मन किसी काम में नहीं लग रहा था. छज्जे पर जा

कर वह घूमने लगी. पता नहीं क्यों समुद्र को देख कर  उस के मन में एक अजीब सा साहस आ जाता था.ऐसे घूमतेघूमते 7 बज गए. अंधेरा छाने लगा था, पर रूपा का कहीं पता नहीं था. उस का मोबाइल लगातार बिजी जा रहा था. एक बार मैसेज आया, ‘‘आई बिल वी लेट डौंट वरी लव यू.’’

शिखा नहीं चाहती थी कि नौकरों व ड्राइवर से रूपा को ढूंढ़ने के लिए कहे. उस के मन में घर की इज्जत का पूरा खयाल था. पूरे 8 बजे दरवाजे की घंटी बजीं तो शिखा भाग कर दरवाजे पर पहुंची. वैसे दरवाजा नौकर ही खोलता था, पर आज जैसे उस से रहा नहीं गया.

दरवाजा खोलते ही शिखा ने देखा कि रूपा बहुत उदास है. बिना उस से कुछ बोलेचाले अपने कमरे में चली गई. शिखा को जैसे भय ने डस लिया. किसी तरह अपने को संभाल कर वह चुपचाप रूपा के पीछेपीछे उस के कमरे में आ गई. अंदर आ कर उस ने दरवाजा बंद कर दिया. रूपा किताबें रख कर पलंग पर जा लेटी.

शिखा से नहीं रहा गया. वह उसी के पास पलंग पर बैठ गई. रूपा का उदासी भरा चेहरा देख कर उस का गुस्सा समाप्त हो गया. वह उस की पीठ पर हाथ फेरते हुए बहुत ही प्यार से बोली, ‘‘रूपा बेटी, क्या तुम्हारी तबीयत ठीक

नहीं है? मैं तो कितनी देर से तुम्हारी राह देख रही थी?’’

उत्तर में रूपा ने ठंडी और लंबी सांस ले कर कहा, ‘‘मैं बिलकुल ठीक हूं मां,’’ कह कर उस ने  अपना सिर शिखा की गोदी में रख दिया.

शिखा को एहसास हुआ कि वह रो रही है. शिखा ने उस का चेहरा अपनी तरफ करते हुए पूछा, ‘‘कुछ तो जरूर है. सचसच बताओ?’’

रूपा रोते हुए बोली, ‘‘मां, मैं तुम्हें कैसे बताऊ,’’ कह कर वह फिर रोने लगी.

शिखा के मन में शंका सी उभर आई. वह थोड़ा गुस्से से बोली, ‘‘रूपा, मैं तो पहले ही डरती थी. तू मेरा कहना मानती तो आज ऐसा नहीं होता.’’

‘‘मां, मेरे साथ क्या हुआ, यह आप कैसे जान गईं.’’

‘‘तुम्हारी शक्ल बता रही है कि तुम्हें किसी लड़के ने धोखा दिया है. है न?’’

रूपा कुछ न बोली.

शिखा को भीतर ही भीतर गुस्सा आ रहा था. वह समझ गई थी कि जरूर किसी लड़के ने पहले तो इसे खूब सब्जबाग दिखाए होंगे, विश्वास दिलाया होगा कि जीवनभर प्यार करता रहूंगा. यह भोली लड़की उस पर सबकुछ लुटा बैठी होगी. लड़का जब मन भर गया होगा तो किसी और लड़की के साथ घूमने लगा होगा. पर वह रूपा के ऊपर गुस्सा दिखा भी तो नहीं सकती थी. वह इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां एक जरा सी गलती उस का सारा जीवन बरबाद कर सकती है.

आखिर शिखा ने झंझलाते हुए कहा, ‘‘मैं तुम्हारे पिताजी को फोन करती हूं, वही आ कर संभालेंगे.’’

रूपा ने रोते हुए कहा, ‘‘मां, मैं क्या करूं. मुझे नहीं मालूम था कि संजय मुझे इस तरह धोखा दे जाएगा.’’

संजय का नाम सुन कर शिखा बोली, ‘‘क्या यह संजय तेरे साथ पढ़ता था? तुम ने मुझे पहले तो कभी नहीं बताया?’’

‘‘मां, मैं क्या बताती. मुझे तुम से बड़ा डर लगता था,’’ रूपा की आवाज में बहुत नर्मी थी.

‘‘फिर उस ने तुम्हारे साथ क्या किया?’’

‘‘मां, मैं उसे बिलकुल अपना समझती थी. पर आज उस ने मुझ से मिलने से इनकार कर दिया. वह 2-3 दिन से ऐनी के साथ घूमने लगा है. अब मुझ से बात भी नहीं करता. तुम नहीं जानती मां, वह ऐनी को भी मेरी तरह बरबाद कर देगा. आज ऐनी ने भी मुझ से बात नहीं की.’’

‘बरबाद’ शब्द सुनते ही शिखा के शरीर में जैसे कांटे चुभने लगे. उस का मन किया कि रूपा को जोर से तमाचा मारे और कहे कि जब तुम्हें यह सब मालूम था, फिर उस के साथ तुम इतनी बढ़ी ही क्यों? पर उस के सामने घर की इज्जत का सवाल आ गया.

शिखा सोचने लगी, यदि वह चीखीचिल्लाई तो घर के सभी नौकर उस के कमरे के बाहर जमा हो जाएंगे और घर की बदनामी बाहर तक फैल जाएगी. थोड़ी देर के लिए उस ने अपनी आंखें बंद कर लीं जैसे जहर का घूंट अंदर ही अंदर पी रही हो.

शिखा ने रूपा के पिता को फोन कर के लौटने के लिए कहने का फैसला किया. जब उस ने रूपा को यह बताया तो रूपा फिर रोने लगी. कालेज में जाने के बाद वह पहली बार अपनी मां से कुछ कह नहीं पा रही थी. वह कांटे में फंसी मछली की तरह तड़प रही थी. उस ने कहा, ‘‘मां, मैं तब तक कालेज नहीं जाऊंगी… तुम पिताजी को बुला लो.’’

शिखा को थोड़ा साहस मिला. वह धीरे से उठी और बड़ी मेज पर रखे फोन को उठा लाई. अरुण को फोन किया जो दार्जिलिंग में ही गार्डन सैट करने में लगा था.

अरुण ने फोन तुरंत काट दिया. 12 बजे अरुण का फोन आया.

शिखा ने घबराते हुए कहा, ‘‘सुनो, रूपा के साथ कोई दुर्घटना हो गई है. मैं बहुत घबरा गई हूं, जल्दी चले आओ.’’

दुर्घटना का नाम सुनते ही उस का पति बोला, ‘‘शिखा, घबराना नहीं, मैं आ रहा हूं. कल सुबह बाग डीगरा से जाऊंगा. तुम उस की पूरी तरह देखभाल करना.’’

कौल करने के बाद शिखा को जैसे राहत मिल गई. वह रूपा से बोली, ‘‘अब तुम कुछ खा लो.’’

शिखा ने रूपा का खाना अपने कमरे में ही मंगा लिया था. वह नहीं चाहती थी कि कोई बात उस के नौकरों तक पहुंचे. वैसे नौकरों से उस ने कह दिया कि रूपा का साथ कार ऐक्सीडैंट हो गया है.

मां आनंदेश्वरी: भाग 1- पोस्टर देख के नलिनी हैरान क्यों हो गई

नलिनी लगभग 10 वर्षों बाद अपने ननिहाल बरेली जा रही थी. वह बहुत खुश थी. रास्ते में फरुखाबाद में लगे टैंट की नगरी को देख कर उसे अपना बचपन याद आ गया जब वह अपनी मम्मी और नानी के साथ कई बार रामनगरिया मेला घूमने आया करती थी. उसे हमेशा से मेले की भीड़भाड़ और वहां पर साधु/महात्मा लोगों का जमघट आकर्षित करता रहा है.

उन की अजीबोगरीब वेशभूषा-कहीं नागा बाबा तो कहीं मचान पर बैठा साधु, कोई बाबा एक पैर पर खड़ा रह कर तपस्या करता होता आदिआदि. वह बचपन से इन दृश्यों को देख कर रोमांचित हो उठती थी. हालांकि अब उसे यह सब ढकोसला और पाखंड लगता लेकिन वह अपने को आज भी नहीं रोक पाई थी. मेले में लगने वाले हर माल और तरहतरह के झोले देख वह अपने बचपन के दिनों में खो गई.

तभी एक साधुओं के पंडाल के बाहर एक आदमकद पोस्टर को देख कर वह चौंक पड़ी. यह चेहरा तो पहले कहीं देखादेखा सा और पहचाना सा लग रहा है. बहुत कोशिश के बाद याद कर पाने में असमर्थ हो जाने पर जिज्ञासावश वह उस पंडाल के अंदर पहुंच गई. वहां पर स्टेज पर बहुत बड़ा सा कटआउट लगा था और नाम लिखा था मां आनंदेश्वरी.

वह उलझीउलझी हुई सी एक स्टौल पर गई और चाय पी लेकिन मन उस कटआउट में ही उलझ रहा था. उस ने उस कटआउट का एक फोटो खींच लिया था. वह अपनी मामी से जरूर इस के बारे में पूछेगी, यह सोचती हुई वह बरेली पहुंच गई थी और फिर सबकुछ भूल गई. जिन गलियों में वह इक्खटदुक्खट और आइसपाइस खेल खेला करती थी, अब वहां बड़ीबड़ी अट्टालिकाएं और शोरूम खुल चुके थे.

जहां बड़ेबड़े पेड़ के नीचे से वह नीम की निबौरियां चुनती थी वहां अब सबकुछ बदल चुका था.लंबे अंतराल में सबकुछ कितना बदल चुका था. नानी के जाने के बाद बड़े मामा भरी जवानी में कैंसर जैसी बीमारी के चलते गुंजन मामी की दुनिया सूनी कर के चले गए थे.

गुंजन मामी बंगाली परिवार से थीं. स्कूल के ऐनुअल फंक्शन में स्टेज पर उन का गाना सुन कर मामा उन पर रीझ उठे थे. वे रूपरंग में भी बहुत सुंदर थीं, गोरा चंपई रंग और हिरणी जैसी चंचल आंखें.नानाजी ने बहुत कोशिश की कि इस घर में शादी न हो लेकिन मामा की जिद के आगे उन्हें हार माननी पड़ी थी. गुंजन दुलहन बन कर घर आ गई.

मामी का दुलहन रूप इतना मोहक था कि जो आता वह प्रशंसा किए बिना न रह पाता. उस दौरान पापा के बागेश्वर ट्रांसफर के कारण वह वहीं पर रह कर पढ़ रही थी, इसलिए मामा का संदेसा पहुंचाने के लिए वह कई बार उन के घर जाया करती थी.

नानाजी की निरीह जर्जर काया पलंग के एक कोने में सिमटी हुई थी. उन को इस हालत में देखना उस के लिए सदमा जैसा था. उस को देखते ही उन की आंखों के कोने से आंसू बह निकले थे. जिस नानाजी की एक आवाज पर सारा घर कांप उठता था, उन के ऐसे रूप की तो वह स्वप्न में भी कल्पना ही नहीं कर सकती थी. वह मुंह घुमा कर बरबस अपने आंसू छिपाने की कोशिश कर रही थी.

वह ठीक से संभल भी नहीं पाई थी कि शृंगारविहीन गुंजन मामी सूनी मांग और सूनेसूने माथे के साथ आ कर उस के गले से लग कर सिसक पड़ीं. वह भी अपने को नहीं रोक पाई थीं और अनायास ही अश्रुधारा बह निकली. चंद मिनटों में मामी संभल गईं और उस के लिए उस के मनपसंद आटे के गोंद और मेवे वाले लड्डू व पानी ले कर आ गईं. ‘‘वाउ, मामी, बिलकुल नानी वाला स्वाद है और वह यादों में खो गई…’’मामी रोज सिंदूर से अपनी मांग सजाती थीं. वे कहतीं कि जितनी लंबी मांग का सिंदूर उतना लंबा पति का जीवन. वह हंसा करती थी और मजाक भी बनाती थी लेकिन मामी का विश्वास… सब झूठा ही निकला. फिर खानापीना और पुरानी बातों को याद करते कब रात बीत गई, पता नहीं लगा था.

तभी मुंबई और दूसरी फोटो दिखातेदिखाते उस की उंगली उस पोस्टर की फोटो पर रुक गई थी, ‘‘मामी, इस फोटो को देखो, इस का चेहरा मुझे देखादेखा लग रहा है.’’मामी ने गौर से देखा, फिर बोलीं, ‘‘इस की फोटो तुम्हारे फोन में कैसे?’’जब उस ने मेले की बात बताई तो मामी अपने अतीत में खो गईं और बताने लगीं, ‘‘यह आनंदी है. मां ने बताया था, वह किसी स्वामीजी के साथ रहने लगी है.’’‘‘ओह, अब याद आ गया, इस को आप के घर में ही देखा था,’’ नलिनी बोली.‘‘हां, तुम सही कह रही हो.

जिन दिनों तुम अपने मामा का संदेसा ले कर आया करती थीं, यह मेरे घर पर ही रहा करती थी. लेकिन मेरे यहां इस का मन नहीं लगा था और 6 महीने में ही मेरी बूआ के यहां इलाहाबाद लौट गई थी.‘‘इस की सुंदरता ही इस के लिए अभिशाप बन गई. बदमाशों से बचाने के लिए बूआ ने इसे मेरे घर भेज दिया था. इस के काम करने के ढंग से हम सब बहुत खुश थे. यह बहुत सुंदर और सलीकेदार थी. इस के 2 नन्हे मासूम बाहर बरामदे में बैठ कर सब को टुकुरटुकुर देखते रहते और उन्हें जो दे दिया जाता, चुपचाप खा लेते. आनंदी खाना बहुत अच्छा बनाती, रोटी बहुत मुलायम बनाती और बड़े प्यार से सब को खिलाया करती थी.‘‘एक दिन मां से रोरो कर अपने ऊपर हुए अत्याचार की सारी कहानी सुना रही थी.

जब वह 12 साल की थी तभी मातापिता ने 40 वर्षीय उम्रदराज दिलीप के पल्ले उसे बांध दिया. वह मासूम कली की तरह थी, जो पूरी तरह से अभी खिल भी नहीं पाई थी. दिलीप नशे में डूबा हुआ आया और पहली रात ही नोचखसोट कर उसे लहूलुहान कर दिया था. अब तो वह उस की शक्ल देख कर ही कांप उठती. लेकिन अपना वह दर्द किस से कहती?‘‘उस की सुंदरता ही उस के जीवन के लिए विष बन गई. पति काला और अधेड़, हर घड़ी शक की आग में जलता रहता. रात में पी कर आता और पीटपीट कर लहूलुहान कर के कामांध हो कर अपनी हवस मिटाता.

वह प्रैग्नैंट हो गई थी लेकिन उस की क्रूरता बढ़ती गई थी. आनंदी सबकुछ झेलती रही थी. यह सिलसिला दोतीन साल तक चलता रहा और इस बीच वह 2 बच्चों की मां बन गई थी. लेकिन जब एक दिन दिलीप नशे में उस की 2 साल की अबोध बच्ची के साथ गलत हरकत करने की कोशिश कर रहा था, आनंदी सहन नहीं कर पाई और गुस्से में उस ने सिल का लोढ़ा उस पर फेंक कर मार दिया था.‘‘दिलीप दर्द के मारे बहुत खुंखार हो उठा था लेकिन पड़ोस की काकी सामने आ कर खड़ी हो गईं और आनंदी बच कर बच्चों को ले कर अपने मायके आ गई.

लेकिन यहां भी चैन कहां था? वह बारबार आ कर धमकाता और तमाशा करता लेकिन उस के बापू ने मार कर भगा दिया था. अम्मा 4-6 घरों में बरतनचौका करतीं, उसी से रोटी चलती. बापू रिकशा चलाया करते थे.  ‘‘अब अम्मा ने आनंदी को भी कई घरों में  झाड़ूपोंछा करने के लिए लगा दिया.

उस को शुरू से ही सजधज कर रहने का शौक था. अब जब उस के हाथ में पैसे आने लगे तो वह सस्ते वाले पाउडर, लाली, चिमटी, चूडि़यां आदि खरीद कर ले आती. सुंदर तो वह थी ही. प्रज्ञा दीदी उसे बहुत मानती थीं, उन्होंने अपनी कई सारी साडि़यां दे दी थीं आनंदी को.‘‘प्रमिला आंटी के यहां राधे दूध ले कर आता था. वह आनंदी की मुनिया के लिए दूध बिना पैसे के दे देता था.

वह हर मंगल को मंदिर में जब सुंदरकांड होता तो वह ढोलक बजाया करता था. वह भगवान की सुनी हुई कथा सुनाया करता. वह अपने गुरुजी स्वामी सच्चानंद की बहुत बातें करता रहता. उस का गला भी सुरीला था, जब वह माइक पर गाता तो आनंदी आश्चर्य से उसे देखती रह जाती. राधे उसे प्यारभरी नजरों के साथ ढेर सारा प्रसाद दे देता. राधे ने ही मुनिया का स्कूल में नाम लिखा दिया था.

जब मुनिया स्कूल ड्रैस पहन, बस्ता कंधे पर लटका कर स्कूल जाती तो आनंदी बिटिया के सुखद भविष्य के कल्पनालोक में डूब जाती.  ‘‘आनंदी भी लगभग 20 साल की जवान लड़की और राधे भी गबरू जवान, कहता, ‘मेरी बन जा, तुझे रानी बना कर रखूंगा.’ पूरी चाल में सब को उन दोनों के बीच के नैनमटक्का की बात मालूम हो गई थी. उस ने स्वामीजी से दीक्षा ले रखी थी. उन्होंने राधे को अपने आश्रम में एक कमरा दे रखा था.

वह उसी कमरे में रहा करता था. स्वामीजी उस को अपने बेटे सा मान देते थे, इसलिए उन्होंने उसे बाइक दे रखी थी. सो, वह कई बार उसे बाइक पर बैठा घुमाने के लिए ले जाया करता था.‘‘अम्मा ने उस की सब तरफ होने वाली बदनामी से परेशान हो कर जब बूआ के सामने जब रोना रोया तो उसे बरेली काम करने के लिए भेज दिया. यहां वह 6 महीने भी नहीं रुकी और फिर एक दिन आनंदी चुपचाप राधे के साथ भाग गई थी.

नार्मल या सी-सेक्शन डिलिवरी : आपके बच्चे की सेहत के लिए क्या है बेहतर?

आज कल ज्यादातर बच्चों की डिलिवरी आधुनिक चिकित्सा पद्धति यानि सी-सेक्शन से हो रही है. सेहत के जोखिम, दर्द और भी कई समस्याओं को देखते हुए लोग नार्मल डिलिवरी कराना बेहतर समझते हैं. हाल में एक रिसर्च में यह बात सामने आई कि जिन बच्चों की डिलिवरी नार्मल होती है, यानि औपरेशन के बिना, वो बच्चे ज्यादा स्वस्थ होते हैं.

अध्ययन की माने तो गर्भावस्था और प्रसव के दौरान माइक्रोबायोम वातावारण में गड़बड़ी, विकसित होते बच्चे के शुरुआती माइक्रोबायोम को प्रभावित कर सकती हैं. जिसके कारण बच्चे को भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.

अध्ययन में ये भी बताया गया कि सी-सेक्शन जैसी प्रसव पद्धतियां इन माइक्रोबायोम को प्रभावित करती हैं और बच्चों के इम्यून, मेटाबौलिज्म और तंत्रिक संबंधी प्रणालियों के विकास में नकारात्मक असर डालती हैं. जानकारों की माने तो शिशु के स्वास्थ्य के लिए केवल शिशु की ही नहीं, बल्कि मां के मोइक्रोबायोम की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है. अगर मां के माइक्रोबायोट में किसी प्रकार की गड़बड़ी होती है तो बच्चे को दमा, मोटापा, एलर्जी जैसी कई परेशानियां हो सकती हैं.

अध्ययन में ये बात सामने आई कि सामान्य प्रसव में जन्म के तत्काल बाद मां की त्वचा का शिशु की त्वचा से संपर्क और स्तनपान जैसी पारंपरिक क्रियाएं बच्चे में माइक्रोबायोम के विकास को बढ़ाने और बच्चे के स्वास्थ्य विकास में सकारात्मक प्रभाव डालने में मदद कर सकती हैं.

मूंग स्प्राउट्स डोसा

स्प्राउट्स से बना डोसा हर तरीके से बहुत ही हेल्दी होता है. प्रोटीन से भरपूर इस डिश को आप ब्रेकफास्ट से लेकर लंच में कभी भा खा सकती हैं.

3 लोगों के लिए इसे ऐसे बनाएं :

सामग्री :

अंकुरित मूंग (1 कप)

– चावल का आटा (4 टेबलस्पून)

– नमक स्वादानुसार

– स्टफिंग के लिए करी पत्ते

– हल्दी पाउडर एक चुटकी

– हींग एक चुटकी

– आलू 1/4 कप (उबले)

– गाजर 2 टेबलस्पून (कद्दूकस)

–  टमाटर 1/4 कप (बारीक कटा)

– प्याज 2 टेबलस्पून (बारीक कटा)

– ताजा नारियल 1 टेबलस्पून (कद्दूकस)

–  हरा धनिया 1 टेबलस्पून (बारीक कटा)

– चाट मसाला 1/2 टीस्पून

– औयल 4 टीस्पून

– राई 1/4 टीस्पून

– चुकंदर 2 टेबलस्पून (कद्दूकस)

विधि :

डोसा का बैटर बनाने के लिए एक बाउल में बैटर के सभी इंग्रेडिएंट्स डालें और 3/4 कप पानी डालकर स्मूद पेस्ट बना लें और फरमेंट होने के लिए 15 मिनट तक अलग रख दें.

स्टफिंग बनाने के लिए एक नौन-स्टिक पैन में तेल गरम करें और राई डालें जब राई चटकने लगे तब इसमें करी पत्ते, हल्दी पाउडर, हींग और बाकी के बचे इंग्रेडिएंट्स डालकर अच्छी तरह से मिक्स करें और मीडियम आंच पर एक से दो मिनट तक पका लें और अलग रख दें.

मीडियम आंच पर बनाएं डोसा

अब नौन-स्टिक तवा गरम करें और उसपर 1/4 टीस्पून तेल डालकर चारों तरफ अच्छे से फैला दें.

अब तवे पर चम्मच से बैटर डालें और गोल शेप में अच्छी तरह फैला दें.

फिर किनारों पर 1/2 टीस्पून तेल डालें और मीडियम आंच पर डोसे को सुनहरा होने तक पका लें.

अब इसमें स्टफिंग मिक्सचर अच्छी तरह फैलाकर, डोसे को मोड़ दें.

इसी तरह बाकी के डोसे भी बना लें और नारियल की चटनी के साथ सर्व करें.

मेरी आंखों में खुजली होती है, मुझे कोई उपाय बताएं

सवाल

मैं 42 वर्षीय घरेलू महिला हूं. मुझे अकसर आंखों में सूखापन महसूस होता है. खुजली भी होती है. बताएं मैं क्या करूं?

जवाब

लगता है आप को ड्राई आई सिंड्रोम हो गया है. लगातार स्मार्टफोन के इस्तेमाल, अधिक देर तक कंप्यूटर पर काम करने या बहुत अधिक टीवी देखने से आंखों की टियर फिल्म प्रभावित होती है और आंखें सूखने लगती हैं. इसे ही ड्राई आई सिंड्रोम कहते हैं. इस के कारण आंखों में जलन, चुभन, सूखा लगना, खुजली होना, भारीपन, आंखों में लाली तथा उन्हें कुछ देर खुली रखने में समस्या होना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. कंप्यूटर और मोबाइल फोन का इस्तेमाल कम करें. इन का इस्तेमाल करते समय अपनी पलकों को  झपकाती रहें. इस से आंखों के आंसू जल्दी सूखते या उड़ते नहीं हैं तथा टियर फिल्म कार्निया एवं कंजुंक्टाइवा के ऊपर लगातार बनी रहती है. प्रिजर्वेटिव फ्री आई ड्रौप (लुब्रिकैंट ड्रौप) का इस्तेमाल करें. इस से आंखों में नमी बनी रहती है. ज्यादा परेशानी हो तो किसी नेत्ररोग विशेषज्ञ को दिखाएं.

ये भी पढ़ें…

मेरी 10 साल की बेटी है. उसे 3 सालों से बरसात में कंजक्टिवाइटिस हो जाता है. इस से बचने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं?

जवाब

कंजक्टिवाइटिस जिसे आम बोलचाल की भाषा में आंखें आना भी कहते हैं. इस में आंखों के कंजिक्टिवा में सूजन आ जाती है. यह पलकों की म्यूकस मैंब्रेन में होता है जो इस की सब से भीतरी परत बनाती है. आंखों से पानी जैसा डिस्चार्ज निकल सकता है. सूजन आना, लाल हो जाना और खुजली होना जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं. कंजक्टिवाइटिस का कारण फंगस या वायरस का संक्रमण, हवा में मौजूद धूल या परागकण और मेकअप प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल है. कंजक्टिवाइटिस से बचने के लिए अपनी आंखों को साफ रखें. आंखों को दिन में कम से कम 3-4 बार ठंडे पानी से धोएं. ठंडे पानी से आंखें धोने से रोगाणु निकल जाते हैं. अपनी निजी चीजें जैसे टौवेल, रूमाल किसी से सा झा न करें. स्विमिंग के लिए न जाएं.

पाठक अपनी समस्याएं इस पते पर भेजें : गृहशोभा, ई-8, रानी झांसी मार्ग, नई दिल्ली-110055. व्हाट्सऐप मैसेज या व्हाट्सऐप औडियो से अपनी समस्या 9650966493 पर भेजें.

उसकी गली में : आखिर क्या हुआ उस दिन

Family story in hindi

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें