डिप्रेशन से कैसे करें डील?

WHO के अनुसार, अवसादग्रस्तता विकार (जिसे डिप्रेशन भी कहा जाता है) एक सामान्य मानसिक विकार है. इसमें उदास मनोदशा या लंबे समय तक गतिविधियों में आनंद या रुचि की हानि शामिल है.

डिप्रेशन किसी को भी हो सकता है. जो लोग दुर्व्यवहार, गंभीर नुकसान या अन्य तनावपूर्ण घटनाओं से गुज़रे हैं उनमें अवसाद विकसित होने की संभावना अधिक होती है. पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अवसाद होने की संभावना अधिक होती है.

डिप्रेशन के कुछ लक्षण, जिनमें शामिल हो सकते हैं:

  •  कमज़ोर एकाग्रता
  • कम आत्मसम्मान की भावनाएँ
  •  भविष्य के प्रति निराशा
  • मरने या आत्महत्या के बारे में विचार
  • नींद में खलल
  • भूख या वजन में परिवर्तन
  • बहुत अधिक थकान या ऊर्जा की कमी महसूस होना।

डिप्रेशन या अवसाद से कुछ इस तरह लड़ा जा सकता है:

  1. किसी थेरेपिस्ट से बात करें

एक चिकित्सक के साथ काम करना अक्सर डिप्रेशन को सफलतापूर्वक प्रबंधित करने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है. मनोचिकित्सा लोगों को उनकी जीवनशैली को संभव तरीकों से समायोजित करने, उनके तनाव को कम करने और तनाव से निपटने में मदद करने पर ध्यान केंद्रित करती है.जिन मुद्दों को आप मिलकर संबोधित कर सकते हैं उनमें ये हैं कि अपने आत्म-सम्मान को कैसे सुधारें, नकारात्मक से सकारात्मक सोच की ओर कैसे जाएं और तनाव प्रबंधन का अभ्यास कैसे करें.

2. लेखन में स्वयं को अभिव्यक्त करें 

जर्नल में लिखना एक बेहतरीन थेरेपी है और यह अवसाद को प्रबंधित करने में मदद कर सकता है. आप अपने लेखन में अपने विचारों, भावनाओं और चिंताओं के बारे में खुलकर बात करके तनाव से राहत पा सकते हैं. अपनी निजी पत्रिका में पूरी तरह ईमानदार रहें. अवसाद से जुड़ी अपनी भावनाओं और चुनौतियों को लिखने से दबी हुई भावनाएं दूर हो सकती हैं. आप यह देखकर आश्चर्यचकित रह जाएंगे कि हर दिन बस कुछ मिनटों के लिए कागज पर कलम रखने के बाद आप कितना बेहतर महसूस करते हैं.

3. अपनी आत्म-छवि को बढ़ावा दें

स्ट्रेस और डिप्रेशन से ग्रस्त लोग अक्सर कम आत्मसम्मान का अनुभव करते हैं, इसलिए अपने बारे में बेहतर महसूस करने के तरीके ढूंढना उपचार का एक महत्वपूर्ण पहलू है. अपने विचारों को अपने सर्वोत्तम गुणों पर केंद्रित करके सकारात्मक सोच का अभ्यास करें. आप जीवनशैली में बदलाव भी कर सकते हैं जो आपके आत्म-सम्मान में सुधार कर सकता है, जैसे स्वस्थ आहार खाना, नियमित व्यायाम करना और उन दोस्तों के साथ समय बिताना जो आपको अच्छा महसूस कराते हैं.

4. शामिल रहें 

यदि आप अवसाद का अनुभव कर रहे हैं, तो आपको ऐसा महसूस हो सकता है कि आप कम आत्मसम्मान या रुचि की कमी के कारण सामाजिक रूप से अलग हो जाना चाहते हैं और अपने तक ही सीमित रहना चाहते हैं. लेकिन याद रखें कि सामाजिक जीवन महत्वपूर्ण है. अपने दोस्तों के साथ जुड़े रहने के लिए खुद को प्रेरित करें. सामाजिक संपर्क आपको गहरे डिप्रेशन में जाने से और अकेले होने से बचाने में मदद कर सकता हैं. फ़िल्म देखने जाएँ, सैर करें, या बस किसी करीबी दोस्त से मिलें या बाहर डिनर करने चले जाएं, इससे आपका उत्साह बढ़ेगा और आप बेहतर महसूस करेंगे.

5. दूसरों पर निर्भर रहना 

जब अवसाद आपको उदास कर देता है तो परिवार और दोस्त आपको अपने बारे में बेहतर महसूस करने में मदद कर सकते हैं. जब आपको प्रियजनों की आवश्यकता हो तो स्वयं को उन पर निर्भर रहने दें. वे आपको अपनी उपचार योजना का पालन करने, व्यायाम करने, स्वस्थ आहार खाने और आम तौर पर अपना ख्याल रखने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं. आप अन्य लोगों से बात करने के अवसर के लिए अवसादग्रस्त लोगों के लिए एक सहायता समूह में भी शामिल हो सकते हैं जो समझते हैं कि आप किस दौर से गुजर रहे हैं.

6. भोजन और मनोदशा का संबंध बनाएं 

कुछ अध्ययनों से पता चला है कि ओमेगा-3 का उच्च दैनिक सेवन, जो आपको सैल्मन जैसी मछली से या मछली के तेल की खुराक के माध्यम से मिल सकता है, मूड में सुधार कर सकता है. आहार के तत्वों और अच्छे पोषण और डिप्रेशन के बीच कई संबंध हैं. स्वस्थ आहार खाने से आप स्वस्थ, फिट और आकर्षक महसूस कर सकते हैं, जिससे आपका मूड लाइट होगा और साथ ही आत्म-सम्मान में सुधार भी होता है, जबकि अस्वस्थ महसूस करने से डिप्रेशन बढ़ सकता है और नकारात्मक आत्म-धारणा हो सकती है.

7. व्यायाम करें 

व्यायाम शारीरिक लाभ प्रदान करता है जो स्ट्रेस, एंजाइटी या डिप्रेशन से गुजर रहे लोगों की मदद कर सकता है. शारीरिक गतिविधि तनाव से राहत दिलाती है और आपको अच्छा महसूस करा सकती है. साथ ही, एक आकर्षक और चुनौतीपूर्ण कसरत को पूरा करने से आपको जो संतुष्टि मिलती है, वह आपके आत्म-सम्मान को बढ़ा सकती है क्योंकि आप मजबूत और शारीरिक रूप से अधिक फिट हो जाते हैं. जब आप नियमित व्यायाम से अवसाद से लड़ते हैं, तो आप भावनात्मक और शारीरिक रूप दोनो से ही बेहतर महसूस करेंगे.

8. शराब को कहें ना 

जब आप अवसाद से जूझ रहे हों तो शराब कोई समाधान नहीं है, लेकिन कई लोग प्रोब्लम से दूर भागने के लिए शराब का सहारा लेते है. हालांकि, शराब पीने से अवसाद के लक्षण और भी बदतर हो सकते हैं, और इसको नियंत्रित करने के लिए आप जो दवाएं ले रहे हैं, उन पर शराब का नकारात्मक प्रभाव भी पड़ सकता है. अवसाद को प्रबंधित करने के लिए एक स्वस्थ जीवन शैली की आवश्यकता होती है, और नशीली दवाओं और शराब से बचना एक स्वस्थ जीवन शैली की कुंजी है.

चावल के आटे से बनाएं हैल्दी स्नैक्स

सुबह के नाश्ते, लंच और डिनर के बाद शाम को या फिर चायकौफी के साथ अथवा छोटीमोटी भूख के लिए हमें अकसर किसी न किसी स्नैक्स की आवश्यकता पड़ती है. यों तो बाजार भांतिभांति के स्नैक्स से भरे होते हैं परंतु बाजार में मिलने वाले स्नैक्स उतने स्वास्थ्यवर्धक नहीं होते. इस का कारण है उन्हें बनाने में खराब क्वालिटी का तेल, मैदा, लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए ढेरों प्रिजर्वेटिव और कलरफुल बनाने के लिए भांतिभांति के रंगों का प्रयोग किया जाता है जो सेहत के लिए बेहद नुकसानदेह होते हैं.ऐसे क्यों न घर पर ही थोड़े से प्रयास से हैल्दी स्नैक्स बनाए जाएं. घर पर बनाने से ये हैल्दी होने के साथसाथ बाजार की अपेक्षा बहुत अधिक सस्ते भी पड़ते हैं. हम आप को 2 हैल्दी स्नैक्स बनाना बता रहे हैं जिन्हें मैदे की जगह चावल के आटे से बनाया है. ये बहुत हैल्दी भी हैं. आइए जानते हैं कि इन्हें कैसे बनाया जाता है:

  1. शेजवान राइस रोल

सामग्री

1. 2 कप चावल का आटा 

  2. 1 छोटा चम्मच घी

  3. 1/2 लिटर पानी

   4. 1 शिमलामिर्च बारीक कटी

   5. 1 गाजर 

  6. 1 प्याज बारीक कटा 

   7. 4 हरीमिर्च कटी

    8. 1 टमाटर बारीक कटा 

     9. 1 छोटा चम्मच धनियापत्ती 

     10. 1/4 छोटा चम्मच जीरा 

      11. 1/4 छोटा चम्मच गरममसाला पाउडर 

      12. 1/4 छोटा चम्मच गरम अमचूर पाउडर 

       13. 1 छोटा चम्मच शेजवान चटनी 

        14.  2 छोटे चम्मच तेल 

         15.  नमक स्वादानुसार.

विधि

पानी में 1/2 चम्मच नमक और 1/2 छोटा चम्मच घी डाल कर उबालें. अब पानी को चावल के आटे में धीरेधीरे मिलाएं. केवल उतना ही पानी मिलाएं जितने में आटा मुट्ठी में बंधने लगे. अब इसे आधा घंटे के लिए ढक कर रख दें.आधे घंटे बाद चावल के आटे को शेष घी डाल कर हाथों से मसल कर चिकना कर लें. इस में सभी सब्जियां, शेजवान चटनी और मसाले मिला कर 3-4 मोटेमोटे रोल बना लें. एक भगौने में 2 लिटर पानी गरम करें. उस पर छलनी रख कर तीनों रोल रख दें. 20 मिनट तक ढक कर पकाएं. 20 मिनट बाद इन्हें ठंडा कर के आधे आधे इंच के गोल टुकड़ों में काट लें. एक नौनस्टिक पैन में तेल डाल कर इन रोल्स को तेज आंच पर सुनहरा होने तक शैलो फ्राई करें. टिशू पेपर पर निकाल कर टोमैटो सौस या हरी चटनी के साथ सर्व करें.

2. स्पिनैच राइस नाचोज

सामग्री

1.  250 ग्राम पालक

  2. 1 आलू 

   3. 4 हरीमिर्चें

   4. 1 इंच अदरक 

   5. 1 छोटा चम्मच धनियापत्ती

   6. 2 कप चावल का आटा 

    7. 1/4 छोटा चम्मच अजवाइन 

    8. हींग चुटकी भर द्य तलने के लिए तेल 

     9. नमक स्वादानुसार.

विधि

पालक, आलू, हरीमिर्च, अदरक और धनियापत्ती को 1 छोटा चम्मच पानी के साथ ग्राइंड कर के पेस्ट बना लें. अब चावल के आटे में अजवाइन, नमक, हींग और 1 छोटा चम्मच तेल अच्छी तरह मिलाएं ताकि मोयन और नमक पूरे आटे में मिक्स हो जाए. पालक और आलू की प्यूरी को धीरेधीरे आटे में मिलाते हुए आटा गूंधें. तैयार आटे को दो भागों में बांटें, एक हिस्से को एक पौलिथीन पर रखें. ऊपर से दूसरी पौलिथीन रख कर हलके हाथ से बेलन से रोटी बेल कर तवे पर मध्यम आंच पर दोनों तरफ से सेंक लें. इसी प्रकार अन्य रोटियां भी तैयार कर लें. गरम रोटियों से तिकोनी शेप में नाचोज काट लें. अब इन कटे नाचोज को गरम तेल में मध्यम आंच पर सुनहरा होने तक तल कर बटरपेपर पर निकालें. इसी प्रकार सारे नाचोज तैयार कर लें. नोट : आटे को गूंध कर न रखें वरना पानी छोड़ देगा.

बुरे नहीं दूर रहने वाले बेटेबहू

लखनऊ के फैमिली कोर्ट के अंदर वकीलों और मुकदमा करने वालों की भीड़ लगी थी. जज साहब के कोर्ट के बाहर एक कोने में लड़का अपने पेरैंट्स और लड़की अपने पेरैंटस के साथ अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे. कुछ समय में ही चपरासी ने दोनों के नाम की आवाज दी. लड़कालड़की अंदर गए.जज साहब ने पहले फाइल को उलटापलटा फिर लड़की से सवाल किया, ‘‘तुम इन के साथ क्यों नहीं रहना चाहती?’’लड़की बोली, ‘‘सर मैं भी नौकरी करती हूं. औफिस जाती हूं. वहां से वापस आ कर सारा काम करना होता है.

मैं नौकरानी लगाना चाहती हूं तो सासससुर नौकरानी के हाथ का खाना खाने से मना करते हैं. मैं ने बहुत प्रयास किया कि बात बनी रहे. मैं यह भी नहीं चाहती कि ये अपने मातापिता को हमारी वजह से छोड़े. ऐसे में अलग हो जाना ही एक रास्ता बचता है.’’जज साहब ने लड़के के पेरैंट्स को बुलवाया. उन को सम?ाया कि वे कुछ दिन बेटाबहू को अलग रहने दें. इस बीच अपनी सेवा के लिए नौकर रख लें. यह सोच लीजिए कि बेटाबहू किसी दूसरे शहर में ट्रांसफर हो गए हैं. धीरेधीरे सब ठीक हो जाएगा.जज साहब की बात सुन कर पेरैंट्स राजी हो गए. धीरेधीरे सबकुछ सामान्य हो गया. इस तरह से एक घर टूटने से बच गया.ऐसे बहुत सारे मामले हैं. फैमिली कोर्ट की वकील मोनिका सिंह कहती है, ‘‘तलाक के लिए आने वाले मुकदमों में सब से बड़ी संख्या ऐसे मामलों की होती है जिन में लड़की सासससुर के साथ नहीं रहना चाहती है.’’

जरूरी है प्राइवेसी

लड़कालड़की की शादी की उम्र कानूनी रूप से भले ही 21 और 18 साल हो पर औसतन शादी की उम्र 25-30 साल हो गई है. ज्यादातर लड़कालड़की नौकरी या बिजनैस करने के बाद ही शादी करते हैं. ऐसे में उन को परिवार के साथ रहने में दिक्कत होने लगती है. कई मसलों में विवाद का कारण पति का परिवार के साथ रहना हो जाता है, जिस का खमियाजा लड़के के मातापिता को भी भुगतना पड़ता है.घरेलू हिंसा के कई मामलों में लड़के के मातापिता को जबरन घसीटा जाता है. ऐसे में बुढ़ापे में उन्हें भी कचहरी और थाने के चक्कर काटने पड़ते हैं. दूसरी बात यह भी है कि मातापिता के साथ रहते हुए बच्चे अपनी जिंदगी खुल कर नहीं जी पाते हैं.

एकदूसरे की जरूरत

इन परेशानियों से निबटने के लिए जरूरी है कि युवा कपल खुद अपनी जिम्मेदारी उठाएं. शादी के बाद वे मातापिता के साथ रहने की जगह अलगअलग रहें. जब उन्हें मातापिता की और मातापिता को उन की जरूरत हो तो एकदूसरे की मदद के लिए आ जाएं. इस से दोनों के बीच कोई बिगाड़ भी नहीं होगा और एकदूसरे की जरूरत पर खडे़ भी रहेंगे.

मातापिता को इस में बड़ा मन दिखाते हुए फैसला लेना पडे़गा और बच्चों को यह समझना होगा कि वे अलग नहीं रह रहे केवल दूर रह रहे जैसे दूसरे शहर में नौकरी करते समय अलग रहते हैं.इस में समाज को भी अपना नजरिया बदलना होगा. अलग रहने वाले लड़के और बहू को गलत नजरों से नहीं देखना चाहिए. हमारा समाज मातापिता से अलग रहने वाले बेटाबहू का सब से बड़ा आलोचक होता है. इस तरह की आलोचना से बचना चाहिए. शादी के बाद हर बेटाबहू अपनी प्राइवेसी चाहते हैं. पेरैंट्स को इस का खयाल रखते हुए इस की आजादी देनी चाहिए. इस से उन के आपसी संबंध अच्छे बने रहेंगे.

बुरे नहीं हैं दूर रहने वाले बेटेबहू

हमारे समाज में मुख्य रूप से परिवार के 2 प्रकार होते हैं, जिन में एकल परिवार और संयुक्त परिवार. एकल परिवार यानी सिंगल फैमिली का अर्थ ऐसे परिवार से होता है, जिस में सदस्यों की संख्या संयुक्त परिवार के मुकाबले कम हो. सिंगल फैमिली को पारिवारिक संरचना का सब से छोटा रूप माना जाता है. इस में सिर्फ पतिपत्नी और उन के बच्चे ही शामिल होते हैं.हमारे समाज में एकल परिवार को अच्छा नहीं माना जाता है, जबकि यह परिवार अब समय की जरूरत है. सिंगल फैमिली के लाभ और हानि दोनों ही हैं. अगर प्राइवेसी के हिसाब से देखें तो सिंगल फैमिली सब से अच्छी होती है. इस के कई लाभ हैं:

आज के इस महंगाई भरे दौर में अपनी निजी जरूरतों को पूरा कर पाना भी एक कठिन काम हो गया है. ऐसे हालात में सिंगल फैमिली ही एक बढि़या विकल्प है. सिंगल फैमिली में निजी जरूरतों को पूरा कर पाना थोड़ा सरल हो जाता है. परिवार को चलाने के लिए मातापिता दोनों ही कार्य करते हैं.परिवार में सीमित सदस्य होने के कारण कार्य का ज्यादा बो?ा भी नहीं रहता है.परिवार की सीमित जरूरतों को सरलता से पूरा कर लिया जाता है, जिस से जीवन में उल्लास बना रहता है. सिंगल फैमिली में मातापिता बच्चों को अच्छी शिक्षा के पूरे प्रयास करते हैं.

नई और आशावादी जीवनशैली

सिंगल परिवार में किसी भी महत्त्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा करने के बाद शीघ्रता से निर्णय लिया जाता है. निश्चित सदस्यों के बीच आपस में बातचीत के बाद सरलता से किसी नतीजे पर पहुंचा जा सकता है. सभी के साथ चर्चा के बाद आपस में पारिवारिक कलह होने की संभावना भी कम हो जाती है और सदस्यों में मतभेद भी कम होता है. संयुक्त परिवार में बड़ेबुजुर्ग तथा अन्य लोगों की विचारधारा काफी रूढि़वादी होती है.

संयुक्त परिवार के सदस्य किसी नई विचारधारा को अपनाने के लिए तैयार नहीं रहते हैं. लेकिन एकल परिवार में सभी लोग एक नई और आशावादी जीवनशैली को अपनाने के लिए कभी पीछे नहीं हटते हैं. एकल परिवार के सदस्यों को अपनेअपने ढंग से कार्य और विचार करने की पूरी आजादी होती है.सिंगल फैमिली सभी रूढि़वादी विचारधाराओं को पीछे छोड़ कर समाज में एक नए तरीके से अपना जीवन व्यतीत करती है. अपने जीवन में नए और सकारात्मक बदलाव लाने के लिए नईनई चीजों को सीखती है. आज के समय में लोग इतने व्यस्त हो गए हैं कि उन्हें अपने कार्य के अलावा कुछ और करने का समय ही नहीं बच पाता है.

पारिवारिक कलह

ऐसे में एकल परिवार के सदस्य अपने परिवार के लोगों को भी समय नहीं दे पाते हैं. व्यस्त जीवनशैली के कारण जब प्रत्येक सदस्य अपनेअपने कार्य में बिजी रहेगा तो उसे किसी मुद्दे पर वादविवाद करने का समय ही नहीं मिलेगा.

इसी कारण मतभेद और पारिवारिक कलह की संभावनाएं एकल परिवार में बहुत हद तक घट जाती हैं. संयुक्त परिवार में परिवार के सभी सदस्यों का बो?ा केवल 1 अथवा 2 लोगों पर पड़ जाता है.ऐसी स्थिति में घर के मुखिया पर काम का दबाव तो बढ़ता ही है, साथ ही घर के अन्य सदस्य परिवार के मुखिया पर ही निर्भर रहते हैं. सिंगल फैमिली में प्रत्येक सदस्य घर चलाने के लिए अपना योगदान देता रहता है. जब माता पिता को उन के बच्चे परिश्रम करते देखते हैं, तो उन के मन में भी बड़ा हो कर आर्थिक स्वावलंबी बनने की भावना विकसित होती है.

दूर रहने वाले बेटेबहू नजदीकी बनाए रखें

अब हालात पहले जैसे नहीं रह गए हैं. बदलती लाइफस्टाइल में बुढ़ापा कम हो गया है. 70 साल तक आदमी हैल्दी जीवन जीते हैं. ऐसे में वे अपना ध्यान रखें तो स्वस्थ रह सकते हैं. इस तरह से उन्हें परिवार की बहुत जरूरत नहीं पड़ती है. अगर बेटाबहू दूर भी रहें तो बहुत दिक्कत वाली बात नहीं होती है. दूरदूर रहने से बेटे और बहू के साथ आपसी संबंध अच्छे रहने के चांस ज्यादा होते हैं.

संबंध ऐसे रखने चाहिए कि जब किसी भी तरह से परिवार की जरूरत किसी को महसूस हो तो सब साथ खडे़ हो जाएं. तब परिवार की कमी महसूस नहीं होगी.बाजारवाद के इस दौर में बहुत कुछ पैसे की बदौलत मिलने लगा है. किसी भी तरह की खरीदारी करने के लिए किसी के साथ या बाजार जाने की जरूरत नहीं होती है. कई बेटाबहू ऐसे हैं जो बाहर शहर में रहते हैं. कई तो विदेश में रहते हुए भी वीडियो और दूसरे माध्यमों से एकदूसरे से इतने जुडे़ होते हैं जितने कि पास रह रहे बेटेबहू भी नहीं जुड़ पाते हैं. औनलाइन जरूरत का सामान भेज देते हैं. किसी तरह की मदद की जरूरत हो तो भी मैनेज कर देते हैं.

कभी खुद मिलने चले आते हैं तो कभी पेरैंट्स को बुला लेते हैं.दूर या पास रहना कोई बड़ी बात नहीं होती है. जरूरी यह है कि दिल से बच्चे आप के साथ जुडे़ रहें. समय के साथ परिवर्तित होना अति आवश्यक है. सिंगल फैमिली या अलग रहने वाले बेटेबहू को गलत समझना ठीक नहीं होता है. फैस्टिवल पर पेरैंट्स के साथ रहें. उन के साथ मजे करें. फैस्टिवल में अकेले रहना ठीक नहीं होता. परिवार के साथ खुशियां मनाएं. अलगअलग रहते हुए भी अकेलापन महसूस न हो इस का ध्यान रखें.

कठिन परिस्थितियों में पेरैंट्स के साथ खड़े रहें.आर्थिक और भावनात्मक सहायता देने में पीछे न हटेंकोई भी बड़ा फैसला करना हो तो पेरैंट्स की राय जरूर लें. उन की राय बिना किसी स्वार्थ के होती है. अलग रहते हुए भी कोई ऐसे काम न करें जो उचित न हो. मातापिता अपने बच्चों का पालनपोषण इसीलिए करते हैं कि उन के बच्चे बड़े हो कर वृद्धावस्था में उन्हें सहारा दें. उन से दूर भले ही रहना पडे़ पर उन्हें अकेला न छोड़ें खासतौर पर जब मातापिता में से कोई एक हो. तब बहुत ध्यान रखें. तब अलग रहने पर सवाल नहीं उठेंगे.

कुकिंग काम नहीं कौशल

अकसर हम सभी सुनते हैं कि खाना बनाना लड़कियों का काम है, लड़कों का नहीं, लेकिन खाना पकाना सिर्फ एक काम नहीं बल्कि एक कौशल है, जिसे कोई भी साख सकता है. लड़कों को इसे सीखना क्यों चाहिए और यह कितने काम आता है इस का अंदाजा भी उन्हें नहीं होता.

आइए, जानते हैं इस कौशल को सीख कर आप कितने फायदे में रह सकते हैं:

बराबरी का मामला है

अकसर घर वाले लड़कियों को खाना बनाने, किचन के काम सीखने की सलाह देते हैं, जबकि लड़के भी इस कार्य को बेहतर तरीके से कर सकते हैं. होटल, रेस्तरां में भी हमेशा लड़के ही शेफ की भूमिका में होते हैं. इसलिए यह टैग तो हट ही जाना चाहिए कि यह किस का काम है. इस के साथ ही जब हर बात में बराबरी होती है तो इस में भी बराबर का हक होना चाहिए.

बदलाव अच्छे हैं

घर में हमेशा मां, पत्नी या बहन ही खाना बनाती है. ऐसे में वे भी रोज खाना पका कर ऊब जाती हैं. अगर आप उन्हें अपने हाथ का खाना बना कर खिलाएंगे तो उन्हें भी अच्छा लगेगा. इसी के साथ अगर पूरा खाना नहीं बना रहे, तो उन के खाते समय रोटीपरांठे सेंक दें. आप को वे गरम खिलाती हैं तो आप का भी हक बनता है कि आप उन्हें भी गरम भोजन कराएं. इसलिए कुछ बदलाव लाएं और फिर घर के माहौल को महसूस करें. फर्क आप खुद पाएंगे.

निर्भरता होगी कम

लड़के खानेपीने को ले कर हमेशा निर्भर रहते हैं. फिर चाहे मां पड़ोस में गई हों या पत्नी मायके. ऐसे में खाना बनाना न आने पर दिक्कत आती है. इसलिए थोड़ाबहुत सीख कर दूसरों पर निर्भरता कम कर सकते हैं. इस के अलावा घर पर अकेले रहने पर दोस्तों को बुला कर पार्टी कर सकते हैं, जिस में आप अपने हाथ से बना खाना उन्हें परोस सकते हैं. इस से उन्हें भी साख मिलेगी और आप को खुशी.

वैरायटी मिलती है

सभी के हाथों का स्वाद और बनाने का तरीका अलग होता है. ऐसे में लड़कों को खाना बनाना आएगा तो घर वालों का भी नए स्वाद से परिचय होगा. इस के साथ ही खाने में वैरायटी

भी मिलेगी. इस के अलावा घर में मेहमान आने वाले हों तो पति अपनी पत्नी या मां की खाना बनाने में मदद कर सकते हैं. इस से उन का काम भी कम होगा और भोजन भी आसानी से बन जाएगा.

मिलेगा स्पैशल ट्रीटमैंट

लड़कियों को हमेशा ऐसे लड़के पसंद आते हैं जो उन का खयाल रखें. इसलिए शादी के बाद आप एक दिन रसोई की जिम्मेदारी खुद ले सकते हैं और पत्नी को इस जिम्मेदारी से मुक्त कर सकते हैं. इस से उन्हें भी अलग अनुभव होगा और आपसी तालमेल और प्रेम भी बढ़ेगा. इस के साथ ही दोनों मिल कर भी खाना बना सकते हैं और साथ समय भी बिता सकेंगे तथा काम भी बोझिल नहीं बनेगा.

सेहत के लिए फायदेमंद

आजकल नौकरी या पढ़ाई करने के लिए बाहर दूसरे शहर जाना ही पड़ता है. ऐसे में होस्टल और मैस का खाना खाना मजबूरी बन जाता है और रोज बाहर का खाना महंगा भी पड़ता है. अगर खाना बनाना आता होगा तो आप खुद ही अपने लिए भोजन की व्यवस्था कर सकते हैं. इस से घर का बना सेहतमंद खाना भी खा सकेंगे और स्वस्थ भी रहेंगे.

शुरुआत कैसे करें

अब बात आती है कि लड़के खाना बनाने की शुरुआत कैसे करें? इस का बड़ा आसान सा तरीका है. शुरू में इस्टैट फूड बनाएं जैसे वैज सैंडविच, मैगी आदि, फिर धीरेधीरे पोहा, पुलाव, नूडल्स आदि बनाएं. धीरेधीरे आसान सब्जियां सीखें. फिर आटा बनाना, रोटियां बनाना भी सीख लें. एक बार शुरुआत करेंगे तो फिर मन भी लगेगा और मजा भी आएगा.

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आशीर्वाद- भाग 3 : क्यों टूट गए मेनका के सारे सपने

तभी एक शिष्य अमित के पास आया और बोला, ‘‘आप को गुरुजी ने याद किया है.’’

अमित एकदम उठा और शिष्य के साथ चल दिया.

गुरुजी के कमरे में पहुंच कर अमित हाथ जोड़ कर बैठ गया.

सामने बैठे गुरुजी ने पूछा, ‘‘क्या हुआ अमित? मेनका नहीं आई?’’

‘‘गुरुजी, मैं ने उसे बहुत कहा, पर वह नहीं आई. कहने लगी कि मैं माफी नहीं मांगूंगी. इस पर मैं ने उसे थप्पड़ भी मार दिया और वह गुस्से में बेटी के साथ कहीं चली गई.’’

‘‘चली गई? कहां चली गई? इस तरह अपनी पत्नी से हमें अपमानित करा कर तुम ने उसे जानबूझ कर यहां से भेजा है. यह तुम ने अच्छा नहीं किया,’’ गुरुजी ने अमित की ओर गुस्से से देखा.

अमित घबरा गया. वह गुरुजी के चरणों में सिर रख कर बोला, ‘‘मैं ने उसे नहीं भेजा गुरुजी. मैं सच कह रहा हूं. मेरा विश्वास कीजिए.’’

‘‘विश्वास… कैसा विश्वास? मुझे तुम जैसे अविश्वासी भक्त नहीं चाहिए. जिन की पत्नी अपने पति की बात न मानती हो. हम ने मेनका को इसलिए बुलाया था कि उसे भी आशीर्वाद मिल जाता.’’

‘‘गुरुजी, आप कहें तो मैं उसे छोड़ दूं. उस से तलाक ले लूं.’’

‘‘हम कुछ नहीं कहेंगे. जो तुम्हारी इच्छा हो करो…’’ गुरुजी ने नाराजगी

भरी आवाज में कहा, ‘‘अब तुम जा सकते हो.’’

‘‘गुरुजी, मेनका की ओर से मैं माफी मांगता हूं.’’

‘‘ऐसा नहीं होता कि किसी के अच्छेबुरे कर्मों का फल किसी दूसरे को दिया जाए. तुम अपने कमरे में जाओ,’’ गुरुजी ने अमित की ओर गुस्से से देखते हुए कहा.

अमित चुपचाप थके कदमों से अपने कमरे में पहुंचा.

कुछ देर बाद 2 शिष्य अमित के पास आए और उस के बैग में से कपड़े निकाल कर बाहर डालने लगे मानो कुछ ढूंढ़ रहे हों.

अमित समझ नहीं पाया कि यह क्या हो रहा है? उस ने पूछा, ‘‘भैयाजी, यह क्या कर रहे हो? बैग से कपड़े क्यों निकाल रहे हो?’’

‘‘अभी पता चल जाएगा,’’ कहते हुए एक शिष्य ने बैग में से एक लाल रंग की बहुत सुंदर सी डब्बी निकाल कर खोली. उस में हीरे की एक अंगूठी थी.

दूसरा शिष्य बोला, ‘‘आज ही यह अंगूठी गुरुजी को दिल्लीवासी एक भक्त ने भेंट में दी थी. उस भक्त की आभूषण की दुकान है. यह डब्बी कुछ देर पहले से गायब थी. हमें तुम पर शक था, पर अब तो पता चल गया कि यह चोरी तुम ने ही की है.’’

‘‘नहीं, मैं ने अंगूठी नहीं चुराई. मैं चोर नहीं हूं. मुझे अंगूठी के बारे में कुछ नहीं मालूम. मैं बेकुसूर हूं,’’ अमित घबरा कर बोला.

‘‘अंगूठी तेरे पास से मिली है और तू कहता है कि तू ने चोरी नहीं की,’’ एक शिष्य ने कहा.

तभी 2 शिष्य और आ गए. उन चारों ने अमित के साथ मारपीट शुरू कर दी.

अमित के साथ हो रही मारपिटाई की आवाज सुन आश्रम में कुछ भक्त कमरों से बाहर निकल कर देखने गए. जब उन्हें पता चला कि गुरुजी की अंगूठी चुराने पर उस की पिटाई की जा रही है तो किसी ने भी उसे छुड़ाने की कोशिश नहीं की. सभी नफरत और गुस्से से अमित की ओर देख रहे थे.

सभी का कहना था कि ऐसे चोर की तो खूब पिटाई कर के पुलिस में देना चाहिए.

चारों शिष्यों ने अमित की इतनी पिटाई कर दी कि वह बेहोश हो गया. आश्रम से बाहर उसे सड़क के किनारे फेंक दिया.

गाडि़यां आतीजाती रहीं. लोग देखते रहे कि सड़क के किनारे कोई शख्स पड़ा हुआ है.

पुलिस की गश्ती गाड़ी उधर से जा रही थी. सड़क के किनारे किसी को पड़ा हुआ देख कर गाड़ी रुकी. दारोगा और

2 सिपाही उतरे. उन्होंने अमित को देखा. उस के चेहरे पर मारपिटाई के निशान थे. मुंह व सिर से खून भी निकला था.

पुलिस ने उसे उठा कर जिला अस्पताल में भरती करा दिया. डाक्टर से कह दिया कि जब यह होश में आ जाए तो सूचना दे देना.

सुबह तकरीबन 7 बजे अमित को होश आया तो उस का पूरा शरीर बुरी तरह से दुख रहा था.

डाक्टर ने अमित के पास आ कर पूछा, ‘‘आप का नाम?’’

‘‘अमित.’’

‘‘क्या रात को किसी से झगड़ा हो गया था?’’ डाक्टर ने सवाल किया.

अमित ने सबकुछ बता दिया कि वह गुरुजी का एक भक्त है. पत्नी के साथ यहां आश्रम में आया था. रात पत्नी से कहासुनी होने पर वह चली गई. गुरुजी के शिष्यों ने उस पर चोरी का आरोप लगा कर मारपिटाई कर सड़क पर फेंक दिया.

‘‘तुम्हारा समय अच्छा है अमित कि उन शिष्यों ने तुम्हारी जान नहीं ली. वे तुम्हें बेहोशी की हालत में गंगा में भी फेंक सकते थे. अब उन्होंने तुम्हारा बैग, मोबाइल वगैरह सामान जरूर फेंक दिया होगा गंगा में.’’

अमित चुप रहा.

‘‘अब तुम्हारी पत्नी कहां होगी?’’ डाक्टर ने पूछा.

‘‘पता नहीं. वह बेटी को ले कर चली गई थी कि रात को किसी होटल में रुकेगी. सुबह बस या टे्रन से वापस जाने की बात कह रही थी.’’

‘‘उस के पास मोबाइल फोन होगा. जरा उस का नंबर बताओ.’’

अमित ने मेनका का मोबाइल नंबर बताया. डाक्टर ने नंबर मिलाया तो उधर घंटी बजने लगी.

‘हैलो,’ उधर से आवाज सुनाई दी.

‘‘मैडम मेनका बोल रही हैं?’’

‘हां, बोल रही हूं. आप कौन?’

‘‘मैं यहां सिविल अस्पताल से डाक्टर विपिन बोल रहा हूं. आप के पति अमित यहां अस्पताल में भरती हैं. अब वे काफी ठीक हैं. लीजिए उन से बात कीजिए,’’ कहते हुए डाक्टर ने मोबाइल अमित को दे दिया.

‘‘हैलो,’’ अमित की कराहती सी आवाज निकली.

‘क्या हुआ? तुम ठीक तो हो न? अस्पताल में क्यों? तुम्हारी तो आवाज भी नहीं निकल रही है.’

‘‘तुम यहां आ जाओ मेनका. मैं तुम्हारे बगैर जी नहीं सकूंगा,’’ कहतेकहते अमित को रुलाई आ गई.

‘मैं आ रही हूं. बस अभी पहुंच रही हूं,’ उधर से मेनका की घबराई सी आवाज सुनाई पड़ी.

डाक्टर ने पुलिस को सूचना दे दी कि अमित को होश आ गया है.

कुछ देर बाद चिंतित व डरी सी मेनका पिंकी के साथ अस्पताल में अमित के पास पहुंची. अमित के चेहरे पर चोट के निशान थे. सिर पर पट्टी बंधी हुई थी.

अमित को देखते ही वह कांप उठी. उस ने पूछा, ‘‘यह कैसे हुआ?’’

अमित ने सबकुछ बता दिया.

तभी दारोगा व एक सिपाही उन के पास आए. दारोगा ने पूछा, ‘‘अब कैसे हो आप?’’

‘‘ठीक हूं…’’ अमित ने कहा, ‘‘यह मेरी पत्नी और बेटी हैं.’’

‘‘अच्छा, अब आप यह बताओ कि हमें क्या करना है? आप चाहें तो रिपोर्ट लिखा सकते हो.’’

‘‘नहीं सर, हमें कोई रिपोर्ट नहीं लिखवानी है. हमें यह भी पता चल गया है कि गुरुजी की पहुंच ऊपर तक है. कई मंत्री व बड़ेबड़े नेता भी यहां आश्रम में आते रहते हैं. गुरुजी का कुछ नहीं बिगड़ेगा,’’ अमित ने कहा.

‘‘जिस दिन भी इस शैतान गुरु के पाप का घड़ा भर जाएगा, उस दिन यह भी नहीं बचेगा,’’ मेनका बोली.

कुछ देर तक बातचीत कर के दारोगा सिपाही के साथ वापस चला गया.

पछतावे के साथ अमित बोला, ‘‘कल सुबह अस्पताल से मुझे छुट्टी मिल जाएगी. हम वापस घर चले जाएंगे.

‘‘मेनका, मैं ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि जिस गुरु को मैं भगवान समझता रहा, वह एक शैतान है. इस गुरु की अंधभक्ति में मैं ने जिंदगी के इतने साल बरबाद कर दिए.

‘‘मैं ने हमेशा तुम्हारी कही गई बातों की अनदेखी की. तुम तो इन ढोंगी बाबाओं से नफरत करती थीं, लेकिन मैं उस की वजह नहीं समझ पाया.

‘‘तुम ने इशारोंइशारों में कई बार मुझे समझाने की कोशिश भी की थी, पर मेरी अक्ल पर तो जैसे पत्थर पड़ गए थे. दुख की बात तो यह है कि मैं ही तुम्हें यहां जबरदस्ती लाया था.’’

‘‘पुरानी बातों को सोच कर अपना मन मत दुखाओ. अगर मैं इस शैतान का कहना मान लेती तो कुछ भी न होता. तुम पर कोई आरोप न लगता. मारपिटाई भी न होती और न ही मुझे पिंकी के साथ होटल में जाना पड़ता.

‘‘मैं उन औरतों जैसी नहीं हूं जो अपने पति से विश्वासघात कर ऐसे ढोंगी गुरु की हर बात मान लेती हैं,’’ मेनका बोली.

‘‘मेनका, तुम तो बहुत पहले से ही मुझे समझा रही थीं, पर मैं ही गहरी नींद में आंखें बंद किए हुए था. काश, मैं भी तुम्हारी तरह गुरुजी के जाल में न फंसता.’’

‘‘कोई बात नहीं, जब जागो तभी सवेरा,’’ मेनका ने अमित की ओर देखते हुए कहा.

अमित एक नई सीख ले कर अस्पताल से सीधा अपने घर की ओर चल दिया. उस ने मन में ठान लिया था कि घर जाते ही वह उस ढोंगी गुरु के दिए गए सामान को फिंकवा देगा.

सेलेब्स की नजर में रक्षाबंधन का त्यौहार है क्या, जानें यहां

रक्षाबंधन यानि राखी का त्यौहार केवल आम बहनों के लिए ही नहीं, बल्कि सेलेब्स भाई – बहन भी पूरे साल इसका इंतजार करते है और इसे यादगार बनाना चाहते है. उनके लिए एक दूसरे का प्यार और बॉन्डिंग बहुत अहमियत रखता है. इस प्यारे रिश्ते को वे कैसे नॉरिश करते है, याद करते है और इस अवसर पर उनके गिफ्ट्स क्या होते है, आइये जानें, उनकी खुशियां.

फरनाज शेट्टी

एक वीर की अरदास फेम अभिनेत्री फरनाज शेट्टी कहती है कि मेरा एक छोटा भाई है, जो मुझसे 2 साल का छोटा है, लेकिन मैं उससे छोटी दिखती हूं. पर मैं उससे काफी मैच्योर हूं, स्वभाव से वह अभी भी बच्चा है. उसकी देखभाल करना मुझे पसंद है, लेकिन एक बात उसकी बहुत अच्छी है, जब भी मुझे उसकी जरुरत होती है, एक फ़ोन कॉल पर वह हमेशा हाज़िर रहता है. ये मेरे लिए बहुत सुकून भरी है, क्योंकि जो बातें मैं किसी से शेयर नहीं कर सकती, उसे मैं उससे शेयर कर सकती हूं.

समय के साथ -साथ हम दोनों जितने मैच्योर हो रहे है, हमारी इमोशनल बोन्डिंग उतनी गहरी होती जा रही है. मेरी बिजी सिड्यूल में दोस्त भले ही न हो, एक भाई मेरे लिए काफी है. एक प्यारा रिश्ता जिसे मैं हमेशा बहुत अच्छा फील करती हूं. मेरे आसपास सारे कजिन्स रहते है और मुझे रक्षाबंधन का त्यौहार मनाना बहुत पसंद है, क्योंकि इस त्यौहार पर मैं बचपन की सारी यादों को एक बार फिर से ताजा कर लेती हूं. वैसे तो सारे साल एक दूसरे को गिफ्ट देते रहते है, लेकिन इस दिन का मिला गिफ्ट सबसे खास होता है.

नवीन प्रभाकर

अभिनेता नवीन प्रभाकर कहते है कि बचपन से हम दोनों भाई-बहन के बीच नोंक-झोंक, मजाक चलती रहती थी, जो पूरी ड्रामे की तरह हुआ करती थी, जिसमे हंसी-ख़ुशी के साथ-साथ रोना-धोना सब चलता रहता था. ये सबकुछ हम दोनो को एक अच्छी बोन्डिंग देने में सक्षम रही. रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के बीच ही नहीं, बल्कि हर भाइयों और बहनों के बीच भी एक अच्छे बोन्डिंग का एहसास दिलाती है. ये रिश्ते अनमोल होते है, जिसे बयां करना आसान नहीं.

पहले की सारी नोंक-झोंक समय के साथ एक दोस्ती और अपनेपन का एहसास दिलाती है. विश्व के किसी भी देश में रहने पर भी बहन भाई को राखी भेजती है. आज व्हाट्स एप एक ऐसी तकनिकी सुविधा है, जिसने सारी दूरियों को नजदीकियों में बदल दिया है, जो आज से पहले नहीं था. मैं अपने बहनों और परिवार के साथ इस पर्व को मनाने की इच्छा रखता हूं. उस दिन मैं अपनी बहनों को कुछ स्पेशल गिफ्ट देने की प्लान कर रहा हूँ.

आदित्य देशमुख

पुनर्विवाह फेम अभिनेता आदित्य देशमुख कहते है कि मेरे पास बायोलॉजिकल बहन की कमी है, लेकिन मेरी कजिन्स कई है और उनका प्यार मेरे ऊपर हमेशा बरसता रहता है. ऐसी बोन्डिंग और किसी रिश्ते में नहीं हो सकती, मैं उनके साथ बचपन से जुड़ा हुआ हूं. शूटिंग में अधिक देर होने पर कई बार मुझे बहन के साथ रहना पड़ता है, वह दिन मेरे लिए खास होता है. उनके साथ मेरी बॉन्डिंग मस्ती, जोक्स, नोंक-झोंक आदि के साथ चलती रहती है. मैं उनसे छोटा होने की वजह से मेरे लिए हर बात माफ़ होती है. रक्षाबंधन मेरे लिए बहुत स्पेशल है, उस दिन राखी के साथ प्यार और गिफ्ट्स दोनों ही मुझे मिलने वाला है. इस बार मैं बहनों को गोल्ड या सिल्वर कॉइन से अलग कुछ गिफ्ट्स देने वाला हूं.

रोहित चौधरी

अभिनेता रोहित चौधरी कहते है कि मैं अपने तीन बहनों में सबसे छोटा हूं. मेरी सबसे बड़ी बहन तो मेरी मां की तरह मुझे प्रोटेक्ट करती रहती है. शादी के बाद भी उनका रिश्ता मेरे साथ पहले जैसा ही है. रक्षाबंधन, भाई – बहन के इस रिश्ते को हमेशा मजबूती और प्यार से भर देती है. बहने कितनी भी दूर रहे लेकिन उनका प्यार भाइयों तक हमेशा पहुंचता रहता है. मेरा उनसे रिश्ता मजबूत, ख़ुशी और गम को शेयर करने का है, जो दिन हो या रात है, हमेशा रहता है. वैसे तो सभी बहनों के साथ मेरा अच्छा रिश्ता है, लेकिन बड़ी बहन मेरे लिए सबसे कीमती, दोस्त, मैटरनल फिगर और फॅमिली लिंक है. मैंने उनकी इच्छाओं को पूरा करने के बारें में सोचा है. भाई – बहन एक दूसरे से कितनी भी दूर हो, लेकिन रक्षाबंधन का त्यौहार उनके रिश्ते को मजबूत बनाने का काम करती है.

चारू मलिक

अभिनेत्री चारू कहती है कि बचपन से मुझे एक भाई की बहुत इच्छा रही, और मेरी विश पूरी हुई, जब रक्षाबंधन से पहले मेरे भाई गौरव मलिक का जन्म हुआ और मैंने इस त्यौहार को हर्षोल्लास के साथ मनाया. हालांकि अभी वह अमेरिका में है, लेकिन उसका प्यार मुझ तक हमेशा पहुंचता है. मेरी बहन पारुल मुझे हमेशा राखी बांधती है. इस साल मैं फ़ोन कॉल से राखी को स्पेशल बनाने वाली हूं. हमारे सबसे बड़ी गिफ्ट्स भाई का यहां आना और हम दोनों बहनों का वहां जाना है. समय बदल गया है, लेकिन हमारा प्यार और रिश्ता सादा के लिए एक ही रहेगा. पारुल, गौरव और मैं हमेशा फ़ोन कॉल पर बातचीत करते है, जहां एक दूसरे की बातों को शेयर करते है, जो मुझे बहुत ख़ुशी देती है.

Raksha Bandhan: भाई-बहन आपकी सबसे बड़ी संपत्ति 

टीनएज जीवन का ऐसा पड़ाव होता है, जहां अपने पराए लगने लगते हैं और पराए अपने. इस उम्र में हमारी आंखों पर ऐसी पट्टी पड़ जाती है कि हमें अपने भाईबहन भी अपने जानी दुश्मन लगने लगते हैं. हम उनसे भी अपनी बातें शेयर करना पसंद नहीं करते हैं. यहां तक कि मुसीबत में पड़ने पर भी उन्हें बताने से डरते हैं कि इन्हें बताने से पापामम्मी को पता चल जाएगा और जिससे उन्हें डांट पड़ेगी , जिसका नतीजा यह होता है कि हम गलतियां करते जाते हैं और उनका खामियाजा अकेले ही भुगातना पड़ता है और कई बार तो हमें इसकी वजह से कई मुसीबतों का भी सामना करना पड़ता है. इसलिए ये समझना बहुत जरूरी है कि भाईबहन हमारे दुश्मन नहीं बल्कि हमारी असली संपत्ति होते हैं. जी हां , आइए जानते हैं कैसे.

1. मुसीबत में हमें बचाते

नेहा जो बहुत ही स्मार्ट और पैसे वाली थी, जिसके कारण हर लड़का उससे फ्रेंडशिप करने को उत्सुक रहता था. और जिसके कारण नेहा भी किसी को खुद के सामने कुछ नहीं समझती थी. और उसकी इसी बेवकूफी का फायदा उसके बोयफ्रेंड साहिल ने उठाया. उसने नेहा से पैसे ऐंठने के चक्कर में उससे कुछ न्यूड फोटोज क्लिक करने को कहा. कहते हैं न कि प्यार में सब जायज होता है. उसने बिना सोचेसमझे साहिल को फोटोज भेज दी. अब तो वह उसे इन फोटोज से ब्लैकमेल करके पैसे ऐंठने लगा. जिसके कारण वह परेशान रहने लगी. लेकिन उसके भाई से ये सब देखा न गया और उसने बहन को कसमें देकर उससे परेशानी की वजह को जान ही लिया. और फिर भाई का फर्ज निभाते हुए उसने मम्मीपापा को बताए बिना साहिल को ऐसा सबक सिखाया कि आगे वह कभी नेहा जैसी लड़कियों को धोखा देने के बारे में सोचेगा भी नहीं. इस घटना के बाद नेहा को समझ आ गया कि भाई से प्यारा कोई नहीं. इससे धीरेधीरे दोनों के बीच बोंडिंग स्ट्रोंग बनती चली गई.

2. चीजें शेयर करने में हिचकिचाते नहीं 

भाईबहन का रिश्ता ऐसावैसा नहीं होता है. चाहे आपस में कितनी भी लड़ाई क्यों न हो जाए , लेकिन मुसीबत या फिर एकदूसरे के चेहरे पर खुशी लाने के लिए दोनों एकदूसरे के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं. यहां तक कि अपनी सबसे प्यारी चीज भी शेयर करने से नहीं  हिचकिचाते हैं. शोभा जो पढ़ाई के साथसाथ पार्टटाइम जोब करती थी, क्योंकि एक तो वह खुद कुछ करना चाहती थी और दूसरा पिता के बीमार होने के बाद से उसके घर की हालत भी ठीक नहीं थी. उसने मेहनत करके पैसा कमाया. और फिर घर की जरूरतों को पूरा करते हुए फिर अपने लिए एक लैपटोप भी खरीदा. जिसे खरीदने का वह काफी समय से सपना देख रही थी. इसे पाकर वह बहुत खुश भी थी. लेकिन इस बीच उसके भाई की भी ऑनलाइन क्लासेज शुरू हो गई और उसे भी लैपटोप की जरूरत पड़ी. तो शोभा ने बिना कुछ सोचे अपनी सबसे प्यारी चीज को अपने भाई को दे दिया. ताकि उसे किसी भी तरह की कोई दिक्कत न हो. जो इस बात की और इशारा करता है कि चाहे चीज कितनी भी कीमती व जरूरी  क्यों न हो, लेकिन इस रिश्ते से बड़ी व कीमती नहीं हो सकती.

3. करते हैं  मोटिवेट 

कई बार जीवन में ऐसे पड़ाव भी आते हैं , जिसमें हम हिम्मत छोड़ने लगते हैं. जीवन जीने की इच्छा ही खत्म होने लगती है. हमें ऐसा लगने लगता है कि हम कुछ नहीं कर सकते, बस सामने हार ही हार नजर आती है. ऐसे में भाई हो या बहन एकदूसरे का हौसला बढ़ाकर उसे आगे बढ़ने के लिए मोटिवेट करते हैं. राहुल के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. उसके नौंवी में बहुत कम मार्क्स आए , जिससे उसके मन में ये बात बैठ गई कि उसका कैरियर चौपट सा हो गया है, अब इसकी वजह से न ही घर में उसे प्यार सम्मान मिलेगा और न ही स्कूल में. सब उसका मजाक बनाएंगे. जिसकी वजह से उसके चेहरे की हंसी भी गायब होने लगी थी. ऐसे में उसकी बहन ने उसे समझाया कि जरूरी नहीं कि जो जीवन में एक बार हार जाए या फिर असफल हो जाए , उसे बारबार हार का ही सामना करना पड़ेगा. हमारे सामने है अल्बर्ट अ ाइंटरिन का उदाहरण. जो दुनिया में जीनियस के तौर पर जाने जाते हैं. वे चार साल तक बोल और सात साल तक की उम्र तक पढ़ नहीं पाते थे. जिससे उनके शिक्षक और पेरेंट्स उन्हें सुस्त  छात्र के रूप में देखते थे. जिसके कारण उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया. इन सबके बावजूद वे भौतिक विज्ञान की दुनिया में सबसे बड़ा नाम साबित हुए. तुम्हें  भी इससे सीख लेकर आगे कुछ कर दिखाने के लिए जीतोड़ मेहनत करने की जरूरत है न की आज की परिस्तितियों से हार मानकर बैठ जाने की. और इसमें मैं तुम्हें जितना सपोर्ट कर सकूंगी करूंगी , लेकिन तुम्हें  इस तरह हार नहीं मानने दूंगी. यही होती है भाईबहन के रिश्ते की असली सच्चाई.

4. इमोशनली स्ट्रौंग बनाते

हम जिससे सबसे ज्यादा प्यार करते हैं , कई बार हम उनसे दूर हो जाते हैं. जैसे अचानक से परिवार के किसी प्रिय सदस्य का निर्धन हो जाना , या फिर पढ़ाई या जॉब के कारण अपनों से दूर हो जाना या फिर बेस्ट फ्रेंड का दूर हो जाना, जो हमें अंदर ही अंदर परेशान करके रख देता है. ऐसे में भाईबहन ही वो टूल होते हैं , जो हमें इन परिस्तितियों से लड़कर आगे बढ़ना सिखाते हैं. हमें प्यार से समझाते हैं कि भले ही आज ये वक्त थम सा गया है, लेकिन हमें खुद को अंदर से इतना ज्यादा कमजोर नहीं बनाना है कि हम भी बस इस वक्त के साथ थम कर रह जाएं. बल्कि स्ट्रौंग बनकर आगे बढ़ना सीखना होगा. परिवार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना होगा, एकदूसरे को समझना होगा. अगर खुद को  इमोशनली स्ट्रौंग बनाओगे तो ये वक्त भी गुजर जाएगा. ऐसे समय में भले ही भाईबहन खुद टूट जाए , लेकिन चेहरे पर नहीं दिखाते हैं और अपने भाईबहन को फुल सपोर्ट करके इस परिस्तिथि से लड़कर आगे बढ़ना सिखाते हैं.

5. हमारे लिए लड़ जाते हैं लोगों से 

ये तो दुनिया की रीत है कि आप चाहे लोगों के लिए कितना भी अच्छा कर लो, लेकिन जरूरी नहीं कि वह आपकी तारीफ करे ही. किसी बात पर कोई आपकी तारीफ भी कर सकता है तो कोई आपकी बुराई भी . लेकिन हम किसी का मुंह नहीं रोक सकते. तनवी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. उसने एक बार अपने फ्रेंड के साथ असाइनमेंट क्या शेयर नहीं किया, कि उसके फ्रेंड्स ने उससे बात करनी ही छोड़ दी. और वे  सब यूनिटी बनाकर उसका मजाक बनाने लगे. जिससे परेशान होकर तनवी ने कॉलेज जाना ही छोड़ दिया. ऐसे में उसके भाई ने उसे लोगों का मुकाबला करना सिखाया और यहां तक कि उसके लिए उसके दोस्तों तक से भी लड़ गया. वे ये हरगिज नहीं देख पाया कि किसी और की वजह से उसकी बहन की आंखों में आंसू आए. यही वो रिश्ता है , जिसमें चाहे भाईबहन आपस में कितना भी लड़ लें , लेकिन कोई और उनके अपने को परेशान करे, ये उन्हें गवारा नहीं होता.

6. लाइफ को मेमोरेबल बनाते 

कभी बहन के कपड़े छुपा देना तो कभी भाई का फोन छुपा देना, खाना खाते हुए कोई ऐसी बात कर देना, जिससे भाई या बहन गुदगुदा कर हंस दे. बचपन में तू कैसे कपड़े पहनती थी, कैसी सी लगती थी, बालों में तेल और दो चोटी करके स्कूल जाना, जिसके कारण तेरे फ्रेंड्स तुझे चिपकूचिपकू कहते थे. भाई तू भी कुछ कम नहीं था. याद है मुझे वो श्रुति का किस्सा , जिसके पीछे तूने मम्मीपापा से भी झूठ बोला था. तू कितना उसके पीछे पड़ा था और वो तुझे पतलू कहकर तुझे घास तक नहीं डालती थी. यही सब बातें भाईबहन के रिश्ते को यादगार बनाती है और ताउम्र हसने का मौका देती है.

7. उदासी को पल में दूर भगाते 

तुम मेरे लिए कितने कीमती हो, इसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है. बस इतना कह सकता हूं कि तुझे उदास देख मैं भी हो उठता हूं उदास. ऐसे में भाईबहन एकदूसरे की उदासी को दूर करने के लिए कभी उनकी पसंद की डिश बनाते हैं , तो कभी उन्हें घुमाने के बहाने उनका दिल बहलाने की कोशिश करते हैं. उनके चेहरे की उदासी को दूर करने के लिए उनके लिए गुनगुनाते हैं , क्योंकि संगीत से मन को खुशी जो मिलती है. उनके साथ खेलते हैं , साथ वक्त बिताते हैं , उनकी परेशानी को दूर करने की कोशिश करते हैं. उन्हें कोई कुछ न कहे , और परेशान न करें इसके लिए उनके बॉडीगार्ड बनकर आगे पीछे घूमते रहते हैं. बस इसी प्रयास में लगे रहते हैं कि भाई या बहन के चेहरे की उदासी दूर हो जाए और वह फिर से मुस्कुराने लगे.  इस तरह भाईबहन का रिश्ता बहुत अनमोल होता है, जिसकी हमेशा कद्र करनी चाहिए.

Anupama: अनुज के सामने आया काव्या का राज, बाबूजी ने लगाई बा की क्लास

रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर ‘अनुपमा’ में इन दिनों काफी ड्रामा चल रहा है. ‘अनुपमा’ में इतना ड्रामा देखकर दर्शक के दिमाग का दही कर दिया है. सीरियल में पाखी-अधिक और डिंपल व काव्या  करेंट ट्रेक चल रहा है.

बीते एपिसोड में देखने को मिला था कि बा और डिंपल का झगड़ा देखकर वनराज वहां आ जाता है. वनराज की बाते सुनकर काव्या भी वहां आ जाती है. काव्या बा को शांत कराती है. काव्या जैसे ही बा को पानी पिलाती की है, तो डिंपल उस गिलास को गिराकर वहां से निकल जाती है. उसी गिलास की वजह से काव्या जमीन पर फिसलकर गिर जाती है. काव्या को दर्द में देखकर हर कोई परेशान हो जाता है. वनराज जल्दी से उसे अस्पताल लेकर जाता है.

अनुज को पता चला काव्या का सच

टीवी सीरियल अनुपमा के अपकमिंग एपिसोड में देखने को मिलेगा कि अनुपमा और अनुज घर जाते है तो अनुज, अनुपमा से पूछता है उस दिन आधी रात को वनराज इसलिए आया था. अनुपमा सॉरी बोलती है तो अनुज कहता है सॉरी मत बोलों. मैं बस अनुपमा और काव्या के बारे में सोच रहा हूं. वैसे यह बात अनुपमा किसी को पता है क्या? किसी को कोई शक? अनुपमा बोलती है वनराज ने काव्या को मना किया था. अनुज कहता है लेकिन ये छुपाना गलत है. इस पर अनुपमा कहती है बाबूजी और बा को बुरा लगेगा इसलिए ये बताना उचित नहीं है.

 

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अनुपमा की गुरु मां से होगी मुलाकात

आगे सीरियल में अनुज गाड़ी मंदिर के पास रोकता है वहां एक औरत उनकी गाड़ी से टकराती है वह औरत कोई नहीं बल्कि गुरु मां होती है. गुरु मां की यह हालत देखकर सब हैरान हो जाते है.

 

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बाबूजी ने बा को सुनाया

बा डिंपल को काफी बुरा-बुरा सुनाती है. बा कहती है कि डिंपी की वजह से काव्या की जान खतरे में आ गई. तो डिंपी कहती है कि आप की वजह से कान के पर्दे भी खतरे में आ जाते है. बा की बातें सुनकर बाबूजी गुस्से में बा की क्लास लगा देते है.

राधाकृष्ण फेम मल्लिका सिंह को बिग बॉस 17 के मेकर्स ने किया अप्रोच, जानें एक्ट्रेस का रिएक्शन

बिग बॉस 17 के लिए फैंस का काफी उत्साह बढ़ रहा है, और ऐसा लगता है कि निर्माता आगामी सीजन के लिए तैयार हो रहे हैं. बिग बॉस कंट्रोवर्शियल और कंटेस्टेंट के दिलचस्प मिक्स अप के कारण दर्शकों के बीच एक लोकप्रिय रियलिटी शो है.

हर सीजन में, यह शो अपने मनमोहक कंटेंट से ध्यान खींचने में कामयाब रहता है. सलमान खान द्वारा होस्ट किए जाने वाला रियलिटी शो के 17वें सीज़न की तैयारी शुरु हो चुकी है, ऐसी चर्चा है कि बिग बॉस 17 के लिए कुछ प्रसिद्ध हस्तियों से संपर्क किया जा रहा है.

बिग बॉस 17 के लिए मल्लिका सिंह को किया अप्रोच

टीवी सीरियल  राधाकृष्ण में राधा की भूमिका निभाने वाली मल्लिका सिंह को भी कंट्रोवर्शियल रियलिटी शो में भाग लेने की अफवाह तेजी से फैल रही है. मीडिया से बात करते हुए मल्लिका ने बिग बॉस 17 को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा किया है.

अभिनेत्री ने खुलासा किया कि उन्हें सलमान खान के रियलिटी शो बिग बॉस 17 के लिए संपर्क किया गया था. उन्होंने आगे कहा, ”हां, मुझे शो के लिए अप्रोच किया गया है, लेकिन मैं ऐसा नहीं कर रही हूं.” ऐसे में मल्लिका ने साफ कह दिया है कि वह बिग बॉस 17 का हिस्सा नहीं बनेंगी.

 

राधाकृष्ण फेम सुमेध मुदगलकर किया अप्रोच

ऐसी कई रिपोर्टें थीं जिनमें दावा किया गया था कि राधाकृष्ण फेम सुमेध मुदगलकर को भी बिग बॉस 17 के लिए अप्रोच किया गया है.हालांकि, इस बारे में कोई पुष्टि नहीं हुई है.

 

इन सेलेब्स का भी नाम आया सामने

मल्लिका सिंह के साथ, Soundous Moufakir, Alice Kaushik, कंवर ढिल्लन और पूजा भट्ट जैसे सेलेब्स को कथित तौर पर सलमान खान के रियलिटी शो बिग बॉस 17 में भाग लेने के लिए अप्रोच किया गया है.

मीडिया से बात करते हुए, बिग बॉस ओटीटी 2 फेम बेबिका धुर्वे ने बिग बॉस 17 के लिए संपर्क किए जाने की पुष्टि की, लेकिन उन्होंने साझा किया कि बिग बॉस के अगले सीजन के लिए हामी भरने से पहले उन्हें कुछ समय लगेगा.

इस दिन से शुरु हो रहा है बिग बॉस 17

बिग बॉस 17 में सिंगल बनाम कपल का एक दिलचस्प थीम होगा और इसलिए प्रतियोगियों को उस मानदंड के अनुसार चुना जा सकता है. अफवाहों के मुताबिक, बिग बॉस 17 का प्रीमियर 30 सितंबर को कलर्स टीवी पर होगा. हालांकि, इस बारे में कोई पुष्टि नहीं हुई है.

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