क्या है एक्ट्रेस दीया मिर्जा की हाई फैशन ब्रांड को नकारने की वजह क्या है, पढ़े इंटरव्यू

फिल्म इंडस्ट्री की एक खुबसूरत अदाकारा के रूप में जानी जाने वाली अभिनेत्री दीया मिर्जा एक प्रोड्यूसर भी है. उनका जन्म हैदराबाद में हुआ है. उन्होंने वर्ष 2000 को मनीला, फिलीपींस में “मिस इंडिया एशिया पैसिफिक” जीता है.

उनके पिता फ्रैंक हैंड्रिच एक जर्मन ग्राफिक्स कलाकार और इंटीरियर डिजाइनर थे,जबकि उनकी मां दीपा एक बंगाली इंटीरियर डिजाइनर रही है. दीया मिर्जा जब 4 साल की थी तब उनके माता-पिता अलग हो गए और 9 साल की उम्र में उनकी पिता का देहांत हो गया, जिसके बाद दीया मिर्जा की मां ने अहमद मिर्जा से शादी कर ली, लेकिन साल 2004 में अहमद मिर्जा की भी मृत्यु हो गई.दीया मिर्जा ने वर्ष 2014 में साहिल संघा से शादी की, लेकिन रिश्ते में मनमुटाव होने के चलते अगस्त 2019 में दीया उनसे अलग हो गई और 15 फरवरी 2021 को एक व्यवसायी वैभव रेखी से शादी की.

मॉडलिंग ने पूरा किया सपना

दीया मिर्जा ने कॉलेज के मीडिया फॉर्म में मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव के रूप में काम किया और कई ब्रांड के लिए टीवी विज्ञापन के चलते मॉडलिंग की. साल 2000 में मिस इंडिया एशिया पैसिफिक का खिताब जीतने के बाद उन्होंने अपना फिल्मी करियर शुरू किया.उस दौरान उन्हें कई फिल्मों के ऑफर आने लगे, जिसके बाद उन्होंने साल 2001 में ‘रहना है तेरे दिल में’ फिल्म से अपनी फिल्म करियर की शुरुआत की.इस फिल्म में उनके काम को काफी सराहा गया. इससे उन्हें आगे भी काम मिलना आसान हो गया.

उन्होंने वर्ष 2002 में ‘तुमको ना भूल पाएंगे’ फिल्म में मुस्कान का किरदार निभाया. इसके बाद उन्होंने ‘प्राण जाये पर शान ना जाये’, ‘तहजीब’, ‘ब्लैकमेल’, ‘नाम गुम जाएगा’ जैसी कई फिल्मों में काम किया. दमदार अभिनय के चलते दीया मिर्जा बॉलीवुड इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई. गंगा की सीरीज ने उन्हें काफी पॉपुलैरिटी दिलाई और उन्हें ये सीरीज करने में भी काफी अच्छा लगा .

 

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दिया मिर्जा फिल्म में अपनी भूमिका को हमेशा सोच-समझकर करती है. उनका कहना है कि पिछले कुछ सालों से मुझे अलग तरह की फिल्में करने का मौका मिला है, जो मैं चाहती थी. अलग तरह की रियल फिल्में आज बनती है और लोग देखते है, जो पहले कमर्शियल पॉइंट ऑफ़ व्यू से नहीं बनती थी. आज के प्रोड्यूसर डायरेक्टर नए कांसेप्ट पर काम करते है, जिसका फायदा कलाकारों को मिल रहा है. सोशियों पोलिटिकल ड्रामा पर आजकल कोई फिल्मे बनाना नहीं चाहता, क्योंकि उनका मार्केट नहीं है. किसी भी फिल्म के लिए दर्शक मुख्य होते है, उनकी पसंद को निर्देशक पर्दे पर उतारने की कोशिश करते है. जब मैंने काम शुरू किया था, तब ये समझना मुश्किल था कि कौन सी फिल्म मुझे करनी है, लेकिन अब काम करते हुए काफी समय गुजर गया है और मैं समय के हिसाब से फिल्में करना चाहती हूँ.

स्ट्रोंग मेटरनल इंस्टिंक्ट

दिया मिर्जा इन दिनों फिल्म भीड़ में माँ की भूमिका निभाई है और दर्शकों ने उनकी इस भूमिका को पसंद किया है. वह कहती है कि जब मैंने काफिर फिल्म की थी, तब मैं माँ नहीं थी. अभी मैं माँ हूँ और बच्चे को छोड़कर काम पर जाना, समय न दे पाना आदि कई चीजे है. जो मैं नहीं कर पाई. मेरा बेटा अभियान जब 6 महीने का था, तब मैं काम पर जा रही थी,पर मेरे अंदर मेटरनल इंस्टिंक्ट हमेशा रहा है. मुझे याद है जब मैं काफिर फिल्म कर रही थी, तब काफी लोगों ने मुझे इस भूमिका के बारें में पूछा था, माँ की भूमिका के लिए शारीरिक रूप से माँ बनना जरुरी नहीं है, मुझे हमेशा से बच्चे बहुत पसंद है.

पेंडेमिक पर आधारित फिल्म को करते हुए दीया मिर्ज़ा ने महसूस किया कि देशा में कितने ऐसे लोग है, जो मेहनत कर अपनी जिंदगी पालते है, लेकिन मुश्किल घडी में उनके साथ कोई नहीं होता, वे किसी से कुछ नहीं मांगते, पर वे देश के लिए ही काम करते और हम सभी से किसी न किसी रूप में जुड़े हुए होते है. जीवन में आये उतार-चढ़ाव के बारें में पूछने पर दीया का कहना है कि जीवन हमेशा नार्मल चला है, लेकिन लॉकडाउन की वजह से मुझे पति मिले, बेटा मिला और कुछ समस्याएं भी आई, पर उस दौरान हर कोई किसी न किसी रूप में असहाय और असुरक्षित थे, जो मुझे सोचने पर विवश करती थी. फिर चाहे वह सेलेब्रिटी हो या आम आदमी किसी न किसी रूप में परेशान रहा है.

होते है आलोचना के शिकार सेलेब्स

दिया हंसती हुई कहती है कि मैंने हमेशा सिंपल तरीके से इंडस्ट्री में रही खुद में कुछ परिवर्तन के बारें में नहीं सोचा. कंट्रोवर्सी मेरे साथ हुई पर मैं उस बारें में अधिक नहीं सोचती. सोशल मीडिया में इसका रूप अलग-अलग तरीके से दिखता है. आज हर फिल्म को किसी न किसी रूप में आलोचना इस प्लेटफॉर्म पर की जाती है. इससे इंडस्ट्री कई बार डर जाया करती है. असल में विश्व में पॉलिटिक्स की भाषा बहुत भद्दी हो चुकी है. बहुत अधिक नकारात्मकता सभी में है और ये हम सबका दुर्भाग्य है.

स्टोरी टेलर्स के लिए अब समय मुश्किल भरा हो चुका है. फिल्म सेलेब्रिटी इसमें सॉफ्ट टारगेट होते है. ये कुछ लोगों के  समूह ही करते है और ये उनकेकिसी एजेंडे के तहत आता होगा, लेकिन अभी भी देश में अधिक संख्या में ऐसे लोग है, जो सकारात्मक सोच रखते है और उनका प्यार हमारे लिए किसी न किसी रूप में रहता है और यही हमारी ताकत होती है. नहीं तो ट्रोलर्स, इंडिविजुअल एटैक, पर्सनल एटैक, शेमिंग आदि चलता रहता है, क्योंकि अगर कोई महिला किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ रही है और किसी पोलिटिकल एजेंडा के आड़े आती है, तो उसे बदनाम करने के लिए लोग किसी भी हद तक जा सकते है. आजकल ये विकराल होता जा रहा है. इसपर अधिक ध्यान देने की जरुरत नहीं.

 

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इंडस्ट्री में अधिक महिलाओं की है जरुरत

दिया चाहती है कि अधिक से अधिक महिलाएं इंडस्ट्री में काम करें, ताकि अच्छी फिल्में बने और महिलाएं आगे बढे. ओटीटी होने की वजह से सभी पुराने कलाकारों को काम करने का मौका मिला है और ये अच्छी बात है. फैशन स्टेटमेंट्स के बारें में दीया का कहना है कि मैं कपड़ों में भी कहानियों को ढूंडती हूँ, क्योंकि मुझे हैण्ड मेड क्राफ्ट से बने आरामदायक कपडे पहनना पसंद है, जिससे लोकल डिजाईन और डिज़ाइनर को सपोर्ट मिले. मैं हाई फैशन ब्रांड के बारें में नहीं सोचती.

फिल्म रिव्यू: किसी का भाई किसी की जान – बोर व सिरदर्द करने वाली फिल्म

  • रेटिंग: पांच में से आधा स्टार
  • निर्माताः सलमान खान फिल्मस
  • निर्देशक: फरहाद सामजी
  • कलाकार : सलमान खान,पूजा हेगड़े, विनाली भटनागर,शहनाज गिल,पलक तिवारी,सिद्धार्थ निगम,राघव जुएल, जगपति बाबू,वेंक्टेश, भाग्यश्री, भूमिका चाला व अन्य
  • अवधि: दो घंटे 24 मिनट

2014 में तमिल भाषा में एक फिल्म आयी थी-‘‘वीरम’’.इस सफल फिल्म के हिंदी रीमेक के अधिकार खरीदकर फिल्म निर्माता साजिद नाड़ियादवाला इसे ‘‘कभी ईद कभी दीवाली’’ के नाम से बना रहे थे.फिल्म में सलमान खान हीरो थे.लेकिन सलमान खान की अपनी दखलंदाजी के चलते साजिद नाड़ियादवाला ने इस फिल्म को बनाने से मना कर दिया.तब सलमान खान ने स्वयं ‘वीरम’ के रीमेक को ‘किसी का भाई,किसी की जान’ नाम से लेकर आए हैं.जिसमें वह बौलीवुड के साथ ही तेलुगु फिल्म इंडस्ट्ी के जितने भी कलाकार जोड़ सकते थे,उन सभी को जोड़कर ‘‘चॅूं चॅूं का मुरब्बा’’ बना डाला.फिल्म के प्रदर्शन से तीन दिन पहले सलमान खान ने पत्रकारों संग मीट एंड ग्रीट के वक्त कहा था-‘‘मेरा मानना है कि हर कलाकार को सोलो हीरो की बजाय मल्टीस्टार कास्ट वाली फिल्म करनी चाहिए.इससे हर कलाकार के अपने अपने प्रश्ंासक उस फिल्म को देखेंगे और फिल्म सफल होगी.’’ अफसोस 21 अप्रैल को सिनेमाघर में पहुॅची ‘किसी का भाई किसी की जान’’ इतनी सिर दर्द व दर्शक को तनाव देने वाली फिल्म है कि इस फिल्म का कुछ नही हो सकता.इतना ही नही दर्शक को सलमान खान की पिछली ‘जय हो’,‘बजरंगी भाईजान’,‘ट्यूबलाइट’,‘भारत’  जैसी फिल्में याद आएंगी.इस फिल्म से वह लोग जरुर खुश होंगे जो कि सलमान खान के मंुह से ‘‘वंदेमातरम’’ सुनना चाहते हैं.वैसे भी सलमान खान ने ‘वंदेमातरम’ बोलने के साथ ही पूरी फिल्म में उन आदर्शवाद की बात की है,जो कि व्यावहारिक नजर नही आते.सलमान खान ने इस फिल्म में भी बार बार दोहराया है कि इंसानियत, धर्म,जाति व वर्णभेद से परे है.

कहानीः

फिल्म की कहानी के केंद्र में भाईजान(सलमान खान) हैं,जिनकी परवरिश अनाथालय में हुई.अनाथालय में आग लगने पर भाई जान ने तीन लड़कों लव (सिद्धार्थ निगम),इश्क (राघव जुआल) व मोह (जस्सी गिल) को बचाकर अपने साथ रखा और उनकी परवरिश की.अब यह सभी बड़े हो चुके हैं और  दिल्ली की एक अनाम बस्ती (झुग्गी) में रहते हैं.सभी उन्हें प्यार करते हैं.एक स्थानीय राजनेता और गुंडा महावीर (विजयेंद्र सिंह ) इस बस्ती से सभी निवासियों को बेदखल करना चाहता है,लेकिन भाईजान द्वारा उसके प्रयासों को विफल कर दिया जाता है.

भाईजान ने षादी नही की हैं.वह चाहते हैं कि सभी भाई लड़कियो से दूर रहें और कोई शादी नही करेगा.लेकिन लव, इश्क,मोह को क्रमशः चाहत (विनाली भटनागर),सुकून (षहनाज गिल ) व मुस्कान (पलक तिवारी ) से प्यार हो गया है.इसलिए यह तीनों भाई जान के लिए लड़की की तलाश शुरू करते हैं.इसी क्रम में यह तीनों तेलुगु लड़की भाग्यलक्ष्मी (पूजा हेगड़े ) को तलाषते हैं.जो कि पुरातत्वविद हैं.भाईजान व भाग्यलक्ष्मी के बीच प्यार हो जाता है.जब दोनों शादी के लिए तैयार हो जाते हैं,तो पता चलता है कि नागेश्वर (जगपति बाबू ), भाग्यलक्ष्मी के भाई अनन्या (वेंक्टेश) व पूरे परिवार को खत्म करना चाहता है.अब भाईजान अपनी होने वाली ससुराल को बचाने में अपने भाईयों संग लग जाते हैं.

लेखन निर्देशनः

पूरी फिल्म अहिंसा की बात करती है.लेकिन फिल्म में हिंसा ,खून खराबा ही ज्यादा है.रोमंास या प्रेम कहानी या मनोरंजन का घोर अभाव है.फिल्म में सलमान खान का संवाद है-‘‘जब एक हिंसक आदमी एक अहिंसक व्यक्ति को परेशान करता है,तो दूसरे हिंसक आदमी को अहिंसक के आगे खड़ा होना पड़ता है.घटिया कथानक, पटकथा के साथ ही सामजी के अयोग्य निर्देशन के चलते फिल्म में देखने लायक कुछ भी नही है.इंटरवल के बाद फिल्म का पूरा सत्यानाश हो जाता है.हमने दर्शकों को बीच में ही फिल्म छोड़कर जाते हुए देखा.पटकथा लेखक की समझ मे ंनही आ रहा है कि वह किस तरह से किरदारों को गढ़ें.सलमान खान ने अपनी तरफ से देशभक्ति के सारे तड़के भरने की कोशिश की है,पर यह सब कुछ दर्शक के सिर के उपर से गुजर जाता है.एक्शन दृश्यों में भी सलमान खान मात खा गए हैं.यहां तक कि एक्शन के दौरान उनका अपना शर्ट उतारने का चिरपरिचित अंदाज भी दर्शक को पसंद नही आता.वास्तव में फिल्म के कुछ एक्शन दृश्य देखकर एक्शन डायरेक्टर की सोच व समझ पर तरस आता है.फिल्म में भगवदगीता के संस्कृत श्लोक बोलते हुए सलमान खान व पूजा हेगड़े के बीच प्यार हो जाता है.है न कमाल की प्रेम कहानी…

फिल्म के निर्देशक फरहाद सामजी हर जगह हाथ पांव मारते रहे हैं.2006 मे लेखन से शुरूआत की.फिर गीतकार बन गए.गायक भी बन गए.और 2014 की असफल फिल्म ‘‘इंटरटेनमेंट’’ से निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखा.उसके बाद फरहाद ने ‘बेबी कम ना’,‘बू सबकी फटेगी’,‘हाउसफुल 4’,‘बच्चन पांडे’,‘पाप कौन’’ जैसी असफल फिल्में व वेब सीरीज निर्देशित कर चुके हैं.अब तक उन्होने किसी फिल्म मे ंयह साबित नही किया कि उन्हे निर्देशन आता है.इसके बावजूद अक्षय कुमार से लेकर सलमान खान तक फरहाद को ही निर्देशक चुनते हैं..इसकी वजह समझ से परे है.‘‘किसी का भाई किसी की जान’’ देखकर भी नही लगता कि इसे किसी ने निर्देशित किया है.

फिल्म का एक भी गाना कर्णप्रिय नही है.इसके गानों में भी सलमान अजीब-ओ-गरीब अंदाज में थिरकते नजर आते हैं.

अभिनयः

भाईजान के किरदार में सलमान खान ओवर एक्टिंग करने के साथ ही खुद को दोहराते हुए नजर आते हैं.दक्षिण की स्टार की जाने वाली अभिनेत्री पूजा हेगड़े अब तक हिंदी में ‘मोहनजोदाड़ो’, ‘हाउसफुल 4’,‘राधेश्याम’ व ‘ सर्कस’जैसी फिल्मों  में क्रमशः रितिक रोशन,अक्षय कुमार,प्रभास व रणवीर सिंह के साथ अभिनय करते हुए इन कलाकारों के कैरियर पर सवालिया निशान लगा चुकी हैं.पूजा हेगड़े की यह फिल्में बुरी तरह से असफल रही हैं.और अब उन्होने हिंदी में पांचवीं फिल्म ‘किसी का भाई किसी की जान’’, सलमान खान के साथ की है.पर इस फिल्म में भी उम्मीदों पर खरा नही उतरती.

जगपति बाबू,मुक्केबाज विजेंदर सिंह,वेक्टेश,रोहिणी हट्टंगड़ी,भाग्यश्री व भूमिका चावला जैसे अनुभवी व प्रतिभाशाली कलाकारों ने क्या सोचकर यह फिल्म की,यह समझ से परे हैं.निदेश्षक व पटकथा की कमजोरी के चलते किसी का भी अभिनय उभर कर नहीं आता.फिल्म के अन्य कलाकार भी अपना प्रभाव छोड़ने में बुरी तरह से असफल रहे हैं.

Summer Special: केसर और शहद से पाएं बेदाग त्वचा

केसर में विटामिन, मिनरल्‍स और पोटाशियम की प्रचुर मात्रा होती है. इसमें मौजूद एंटी-बैक्‍टीरियल और एंटीआक्‍सीडेंट यौगिक त्‍वचा की रंगत को निखारने के साथ उसे रेजुनवेट कर गहराई से नमी पहुंचाता है. केसर में एंटी-सोलर एजेंट भी होते हैं जो सूर्य की हानिकारक यूवी किरणों से त्‍वचा को बचाती है. इसमें क्रोसिटन जैसे तत्‍व पाए जाते हैं जो त्‍वचा को जवां बनाए रखने में मदद करती है.

शहद एक प्राकृतिक रोधक है जो त्‍वचा में नमी को बनाए रखती है और उसे खोने नहीं देती है. ये एंटीसेप्‍टिक की तरह भी काम करती है. शहद त्‍वचा में कोलाजन का उत्‍पादन बढ़ाकर बढ़ती उम्र के निशानों को दूर करता है. त्‍वचा संबंधित परेशानियों से दूर रहने और बचने के लिए आज हम आपको केसर और शहद से बने कुछ प्राकृतिक नुस्‍खों के बारे में बताने जा रहे हैं.

1 निखार के लिए

एक चुटकी केसर, 2 चम्‍मच दूध, एक चम्‍मच चंदन पाउडर लें. केसर और 2 चम्‍मच दूध को मिलाकर पांच मिनट के लिए छोड़ दें. इसके बाद इस मिश्रण में चंदन पाउडर मिलाकर इसे अच्‍छी तरह से मिलाए और अपनी त्‍वचा पर हल्के हाथॆ से लगाएं. 15 मिनट के बाद इसे पानी से साफ कर लें.

2 मुहांसों के उपचार के लिए

एक चुटकी केसर, एक चम्‍मच शहद, 4-5 तुलसी की पत्तियां लें. अब तुलसी की पत्तियां के साथ केसर को पीस लें. अब इस पेस्‍ट में शहद मिलाएं. इसे चेहरे पर लगाएं और 15 मिनट बाद गुनगुने पानी से धो लें. सप्‍ताह में दो बार इस पैक का इस्तेमाल करें.

3 सनटैन को कम करने के लिए

रातभर एक चम्‍मच मिल्‍क क्रीम में एक चुटकी केसर को भिगोकर रख दें. अगले दिन सुबह इसमें शहद मिलाएं और प्रभावित हिस्‍सो पर लगाएं. 10 मिनट बाद ठंडे पानी से उसे धो लें.

4 बारीक रेखाओं को दूर करें

केसर को बारीक पीसकर पाउडर बना लें, इसमें शहद और एलोवेरा जैल मिलाएं. इसे अच्‍छी तरह से मिक्‍स करने के बाद अपने चेहरे पर लगाएं और 15 मिनट बाद इसे ठंडे पानी से साफ करें. आपको ये नुस्‍खा सप्‍ताह में दो बार करना है. इससे त्‍वचा के बारीक निशान साफ होते हैं और त्‍वचा जवां दिखती है.

5 केसर और शहद का टोनर

रातभर गुलाबजल में केसर को भिगोकर रखें. सुबह इस पानी को किसी स्‍प्रे बौतल में भरकर रख लें. अब आप जब चाहें त्‍वचा पर टोनर की तरह इसका प्रयोग कर सकते हैं. केसर और शहद से बना टोनर आपकी त्‍वचा की मृत कोशिकाओं को बाहर निकाल उसकी सारी गंदगी को भी बाहर निकाल देता है.

अगर केसर का प्रयोग करने के बाद आपके चेहरे पर पीले रंग का दाग रह जाता है तो घबराने की जरूरत नहीं है. ये जल्‍दी ही अपने आप ही ठीक हो जाएगा. एक घंटे के भीतर से दाग अपने आप ही गायब हो जाएगा. चमकदार और मुलायम त्‍वचा पाने के लिए आप केमिकल युक्‍त चीजों की बजाय उपरोक्‍त बताए गए प्राकृतिक नुस्‍खों का प्रयोग करेंगें तो ज्‍यादा बेहतर होगा.

मेरे शरीर पर तिल के आकार के छोटे- छोटे लाल रंग के दाने हैं मैं क्या करुं?

सवाल

मेरे शरीर पर दूरदूर तिल के आकार के छोटेछोटे लाल रंग के दाने हैं. डाक्टर को दिखाया तो दवा का कोई असर नहीं हुआ. क्या आप इस का कोई हल बता सकती हैं?

जवाब

स्किन पर ऐलर्जी या कोई इन्फैक्शन हो जाने के कारण कई बार शरीर पर छोटेछोटे लाल रंग के दाने निकल आते हैं. ये दाने कई बार तो अपनेआप ठीक हो जाते हैंलेकिन कई बार इन के इलाज के लिए ट्रीटमैंट की जरूरत होती है. इस की जांच के लिए किसी अच्छे स्किन स्पैशलिस्ट से संपर्क करें. अगर यह ऐलर्जी नहीं है तो घरेलू उपाय किए जा सकते हैं. अगर ऐलर्जी है तो घर पर कुछ भी नहीं करना चाहिए. वैसे घरेलू उपचार के लिए सब से पहले कच्चे दूध से अपनी स्किन साफ करें.

चुटकीभर बेकिंग सोडा पानी में मिला कर दानों पर लगाएं और कुछ देर बाद साफ कर लें. इस से शरीर पर निकल रहे छोटेछोटे दाने दूर हो जाते हैं. लहसुन की एक कली लें और इसे आधा काट लें. अब इस आधे कटे भाग को तिल पर रख कर बांध लें और रातभर बंधा रहने दें. कुछ दिनों तक इस प्रक्रिया को दोहराने से चेहरे के तिल निकल जाते हैं. केले के छिलके को छिली हुई तरफ से तिल पर रखें और बांध लें. कुछ दिनों के इस्तेमाल के बाद तिल सूख जाएगा और निकल जाएगा. अगर आप की स्किन अधिक सैंसिटिव है तो कोई भी घरेलू उपचार न करें.

मुझे प्रैग्नेंसी में मूड स्विंग्स की प्रौब्लम हो रही है, मैं क्या करूं?

सवाल-

मैं 26 साल की हूं और 3 महीनों से प्रैग्नेंट हूं. मुझे मूड स्विंग्स की समस्या हो रही है. अगर कोई मेरी बात न सुने या मेरे मन का न हो तो मुझे बहुत ज्यादा गुस्सा आता है और मैं किसी से भी लड़ने लगती हूं. यह हरकत मेरे लिए प्रौब्लम क्रिएट कर रही है. प्लीज, बताएं मैं क्या करूं?

जवाब-

प्रैगनैंसी के समय हारमोनल फ्लक्चुएशंस की वजह से मूड स्विंग्स होना नौर्मल है. आप अच्छी नींद लें, अपने को रैस्ट दें, माइल्ड ऐक्सरसाइजेज की मदद लें. तनाव बिलकुल न लें, अपने पार्टनर से बातें शेयर करें, उन की हैल्प लें और पौष्टिक खाना खाएं.

प्रेग्नेंसी का वक्त महिलाओं के लिए बेहद खास होता है. इस दौरान महिलाओं को अधिक देखभाल की जरूरत होती है. इसके अलावा उन्हें अच्छी डाइट की जरूरत होती है ताकि जच्चा और बच्चा दोनों की सेहत पर किसी तरह का बुरा असर ना पड़े. इन्ही सारी जरूरी चीजों में अच्छी और पूरी नींद भी शामिल है.

प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर में ऐसे कई बदलाव होते हैं जो उनकी सेहत पर असर डालते हैं. इस दौरान महिलाओं के हार्मोन्स में भी बहुत से बदलाव होते हैं जो उनकी दिनचर्या पर बुरा असर डालते हैं. इन बदलावों का नतीजा है कि कई बार गर्भवती महिलाओं को घबराहट महसूस होती है. ऐसे में उन्हें नींद नहीं आती, जिसका सीधा असर उनके बच्चे पर भी होता है.

कांसे की मूर्तियों को साफ करने की ये टिप्स

कांसे की मूर्ति की सफाई बिल्कुल आसान नहीं है. मूर्ति को साफ करते समय कुछ चीजों का ध्यान रखना चाहिए. त्यौहारों में पूजा से पहले और पूजा के बाद मूर्तियों को साफ करना आपके लिए एक जरूरी काम है. यदि कांसे की मूर्तियों पर जंग लगा हो और वे काले रंग की हो गई हों, तो आप इन सरल घरेलू उपचारों की मदद से इनसे छुटकारा पा सकते हैं.

आपको सिर्फ नीचे दी गई प्रकृतिक सामग्रियों को किसी मुलायम कपड़े अथवा स्पंज के साथ प्रयोग करें. साथ ही, पूरी तरह से साफ करने से पहले यह जरूरी है कि आप सामग्रियों को कांस्य धातु पर टेस्ट कर लें. कुछ ऐसी धातुएं हैं जिनकी प्रतिकूल प्रतिक्रिया हो सकती है जिससे मूर्तियों की चमक खो सकती है.

आपके घर पर कांस्य की मूर्तियों को साफ करने के लिए कुछ सरल और सबसे अच्छे उपाय यहां दिए जा रहे हैं इन पर एक नजर डालें. आपकी मूर्ति को साफ करने के लिए एक मुलायम कपड़ा अथवा स्पंज का इस्तेमाल करें. धातु पर कोई कड़ा कपड़ा इस्तेमाल न करें क्योंकि इससे मूर्ति पर खरोंच का निशान पड़ सकता है.

दूसरे, कई दरारों और गाढ़े स्पॉट वाली कांस्य वस्तु साफ करने के लिए एक नरम ब्रिसल्स वाले टूथब्रश का उपयोग करना सबसे अच्छा है. ब्रश उन जगहों पर जमी हुई धूल और गंदगी को हटाने में मदद करेगा. साथ ही, आपको नियमित रूप से कांस्य की मूर्तियों को साफ पानी से धोते रहना चाहिए. झाड़पोंछ करने से धूल नहीं जमेगी और आपकी मूर्तियां चमकदार दिखाई देंगी.

बाजार में उपलब्ध पॉलिश से कांस्य की मूर्तियों को पॉलिश करने से बचना चाहिए. अधिक पॉलिश करने से मूर्ति की प्राकृतिक चमक खो सकती है. ध्यान रखने योग्य एक महत्वपूर्ण बात यह है कि कांस्य की मूर्ति को धोने के बाद अवश्य सुखा लें. यदि आपको हानिकारक रसायन पसंद नहीं हों, तो घर पर कांस्य की मूर्तियों को साफ करने के लिए सरल और प्रकृतिक रूप से प्रभावशाली सामग्री जैसे नींबू अथवा साबुन-फ्री डिटर्जेंट का इस्तेमाल करना सबसे अच्छा होता है.

Eid Special: टेस्टी वेज शामी कबाब

इफ्तार के वक्त सबसे पहले स्टार्टर सर्व किया जाता हैं. ऐसे में यदि आप चाहते हैं कि कोई अच्छी सी वेज रेसिपी बनाएं तो वेज शामी कबाब बना सकती हैं. वेज शामी कबाब काले चने को उबाल कर बनाया जाता है. इन्‍हें गरम-गरम सर्व करें और साथ में पुदीने की चटनी देना ना भूलें. इसे बनाने के लिए कुछ खास मेहनत नहीं करनी पड़ेगी.

वेज शामी कबाब बहुत ही कमाल का स्वाद देता है जो बच्चों से लेकर बड़ों तक सबको पसंद आता है. इसे किसी भी तंदूरी स्‍नैक के साथ खाया जा सकता है. इसे बनाने में आपको कोई ज्‍यादा समय नहीं लगेगा. यदि आपके पास काला चना नहीं है तो आप इसके बदले चने की दाल का इस्तेमाल कर सकती हैं.

सामग्री

– 1 कप भिगोया हुआ काला चना

– 2 चम्‍मच बेसन

– बारीक कटा एक  प्‍याज

– एक चम्मच पुदीनी पत्ती

– एक चम्मच हरा धनिया

– एक चम्मच धनिया पाउडर

– आधा चम्मच लाल मिर्च पाउडर

– एक हरी मिर्च कची हुई

– आधा चम्मच अदरक का पेस्ट

– आधा चम्मच गरम मसाला

– आवश्यकतानुसार तेल तलने के लिए

–  स्वादानुसार नमक

ऐसे बनाएं टेस्टी वेज शामी कबाब

– सबसे पहले काले चने को पहले से रख दें. उसके बाद भिगोये हुए काले चने को साफ पानी से धो कर नमक मिला लें. इसे प्रेशर कुकर में पानी डाल कर पका लें. पकने के  बाद इसे एक बर्तन में निकालें और मसल लें. इसे जब मसलें तों इसे दरदरा ही रखें पेस्ट की तरह न बनने दें.

– उसके बाद जितनी सामग्री काट कर रखी है उन सबको इसमें मिक्स करें. यदि कबाब तेल में डालने से टूटने लगे तो, इसमें थोड़ा और बेसन मिला लें. अब इसे गोल-गोल कबाब के रूप में बना कर रख लें.

– इसके बाद कढ़ाई गर्म करें, तेल गर्म करें और इसमें अब कबाब को तल लें. जब कबाब दोनों तरफ लाल हो जाए तो इसे निकाल लें. अब आप कबाब को पुदीने के पत्तों से सजा कर सर्व करें. इसके साथ आप चाहें तो  नींबू की स्‍लाइस, प्‍याज और पुदीने की चटनी भी ले सकती हैं. आप चाहें तो कबाब को ओवन में भी बेक कर सकती हैं.

Summer Special: चंदन फेस पैक से निखर उठेगी आपकी स्किन

चंदन पाउडर और उससे बना फेस पैक चेहरे पर पड़े गहरे दाग धब्बों, झाइयां और झुर्रियों को भी दूर करता है. यह स्‍किन को टाइट बनाता है और त्‍वचा में निखार भर कर उसे चमकदार बनाता है. बहुत सी महिलाओं की त्‍वचा औयली होती है, जिस कारण हर समय उन्‍हें पिंपल का दर्द झेलना पड़ता है. ऐसे में चंदन पाउडर का फेस पैक उनके बहुत काम आ सकता है. अगर आपको सुंदर और गोरी त्‍वचा चाहिये तो अभी से ही चंदन फेस पैक लगाना शुरु कर दें.

अगर आप समझ नहीं पा रही हैं कि चंदन पाउडर को कौन कौन सी सामग्रियों के साथ मिला कर फेस पैक बनाएं तो, नीचे आपकी मदद के लिये ऐसे फेस पैक दिये हुए हैं जो आसानी से घर में बनाए जा सकते हैं और आपको त्वाचा संबंधी समस्याओं से छुटकारा दिला सकते हैं और उनमें बिल्‍कुल खर्च भी नहीं होगा.

1. चंदन पाउडर, हल्‍दी और कपूर

अगर आपके चेहरे पर बुरी तरह से मुंहासे हो गए हैं तो, चंदन पाउडर, हल्‍दी और कपूर को मिला कर एक पेस्‍ट तैयार कीजिये और लगाइये. नियमित लगाने से आपकी यह समस्‍या काफी हल हो जाएगी.

2. गुलाब जल और चंदन पाउडर

गुलाब जल यह बहुत ही साधारण सा फेस पैक है, जिसमें चंदन पाउडर को गुलाब जल के साथ मिला कर प्रयोग किया जाता है. इसे तब लगाएं जब आप बाहर से आई हों, जिससे इसे लगा कर गंदगी और डेड स्‍किन से छुटकारा मिल सके.

3. मुल्‍तानी मिट्टी और दही

आधा चम्‍मच मुल्‍तानी मिट्टी को आधे चम्‍मच चंदन पाउडर के साथ मिलाइये. फिर इसमें या तो दही या फिर दूध की मलाई मिला कर पेस्‍ट बना कर लगाइये. सूख जाने पर पानी से धो लें.

4. बादाम पाउडर और दूध

एक कटोरे में बादाम पाउडर को चंदन पाउडर और हल्‍के से दूध के साथ मिलाइये. इसे चेहरे पर लगा कर सुखा लें और फिर पानी से धो लें.

5. हल्‍दी और नींबू के साथ

आप हल्‍दी और चंदन पाउडर मिला कर चमकदार त्‍वचा पा सकती हैं. इसमें नींबू की भी कुछ बूंदे डालें, जिससे त्‍वचा साफ हो जाए.

6. लेवेंडर का तेल

अपनी थकान भरी त्‍वचा को रिलैक्‍स बनाने और डार्क स्पाट को हटाने के लिये आप लेवेंडर के तेल और चंदन पाउडर को मिला कर पेस्‍ट बनाइये. इससे स्‍किन भी टाइट होती है.

7. टमाटर

टमाटर काट कर उसका पल्‍प निकालिये और उसमें मुल्‍तानी मिट्टी और चंदन पाउडर मिलाइये. इस पैक को लगाने से चेहरे की रंगत में निखार आता है.

8. अंडा और शहद

अगर चेहरे पर झुर्रियां पड़ गई हों तो अंडे को शहद और चंदन पाउडर के साथ मिलाएं और चेहरे पर लगाएं. इससे स्‍किन टाइट बन जाएगी.

9. दही

चंदन पाउडर को दही के साथ मिला कर लगाने से चेहरा गोरा बनता है और सन टैनिंग भी मिटती है.

10. दूध

अगर आपकी त्‍वचा पिंपल होने कि वजह से लाल पड़ चुकी है और उसमें जलन होती है तो, फिर चंदन और दूध मिला कर पेस्‍ट बना कर चेहरे पर लगाइये. इससे आपको काफी राहत मिलेगी.

अपने ब्यूटी टिप्स में अपनाएं नीबू, कई चीजों में है लाभकारी

नीबू एक ऐसा फल है, जिस की खुशबू मात्र से ही ताजगी का एहसास होता है. चाट हो या दाल, कोई भी व्यंजन इस के प्रयोग से स्वादिष्ठ हो जाता है. यह फल खट्टा होने के साथसाथ बेहद गुणकारी भी है. आइए जानते हैं इस के कुछ प्रयोगों के बारे में:

कृमि रोग: 10 ग्राम नीबू के पत्तों के रस (अर्क) में 10 ग्राम शहद मिला कर पीने से 10-15 दिनों में पेट के कीड़े मर जाते हैं. नीबू के बीजों के चूर्ण की फंकी लेने से भी कीड़े मर जाते हैं.

सिरदर्द : नीबू के पत्तों का रस निकाल कर अच्छी तरह सूंघें. जिस व्यक्ति को हमेशा सिरदर्द बना रहता है, उसे भी इस से शीघ्र आराम मिलता है.

चेहरे की सुंदरता के लिए : 10 ग्राम नीबू का रस, 10 बूंदें ग्लिसरीन तथा 10 ग्राम गुलाबजल को मिला कर रख लें. इस लोशन को प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद तथा रात को सोने से पहले चेहरे पर हलकेहलके मलने से चेहरा कोमल बन जाएगा.

नीबू के रस में बराबर मात्रा में गुलाबजल मिला कर चेहरे पर लगाएं. आधे घंटे बाद ताजे पानी से धो लें. चेहरे के मुंहासे बिलकुल साफ हो जाएंगे. यह प्रयोग करीब 10-15 दिनों तक करें.

जीभ विकार : नीबू के रस में थोड़ा सेंहुड़ का दूध मिला कर मुंह में लगाने से जीभ के सभी प्रकार के विकार मिट जाते हैं.

नकसीर : ताजे नीबू का रस निकाल कर नाक में पिचकारी देने से नाक से खून निकलता हो, तो बंद हो जाएगा.

तृष्णा : किसी कारण से बारबार प्यास लगती हो, तो नीबू चूसने या शिकंजी पीने से तुरंत प्यास बंद हो जाती है. इसे तेज बुखार में भी दिया जा सकता है.

बालों का झड़ना व रूसी : नीबू के रस में दोगुना नारियल का तेल मिला कर हलके हाथों से सिर की मालिश करने से बाल झड़ना बंद हो जाते हैं व वे मुलायम भी हो जाते हैं, साथ ही रूसी से भी मुक्त हो जाते हैं. यदि सिर में रूसी हो, तो नीबू के रस में नारियल का तेल मिला कर रात को सिर में मलें और सुबह कुनकुने पानी और रीठे के पानी से सिर को धोएं. 2-4 बार यह क्रिया करने से खुश्की खत्म हो जाती है.

मिरगी : चुटकी भर हींग को नीबू में मिला कर चूसने से मिरगी रोग में लाभ होगा.

पायरिया : नीबू का रस व शहद मिला कर मसूड़ों पर मलते रहने से रक्त व पीप आना बंद हो जाते हैं.

दांत व मसूड़ों का दर्द : दांत दर्द होने पर नीबू को 4 टुकड़ों में काट लीजिए, इस के बाद ऊपर से नमक डाल कर सभी टुकड़े गरम कीजिए, फिर 1-1 टुकड़ा दांत व दाढ़ में रख कर दबाते जाएं व चूसते जाएं. दर्द में राहत महसूस होगी. मसूड़े फूलने पर नीबू को पानी में निचोड़ कर कुल्ले करने से अत्यधिक लाभ होगा.

दांतों की चमक : नीबू के रस व सरसों के तेल को मिला कर मंजन करने से दांतों की चमक निखर जाएगी.

हिचकी : 1 चम्मच नीबू का रस व शहद मिला कर पीने से हिचकी बंद हो जाएगी. इस प्रयोग में स्वादानुसार कालानमक भी मिलाया जा सकता है.

खुजली : नीबू में फिटकरी का चूर्ण मिला कर खुजली वाले स्थान पर रगड़ें. खुजली समाप्त हो जाएगी.

जोड़ों का दर्द : नीबू के रस को दर्द वाले स्थान पर मलने से दर्द व सूजन समाप्त हो जाएगी.

पीड़ारहित प्रसव : गर्भधारण के चौथे माह से प्रसवकाल तक अगर स्त्री 1 नीबू की शिकंजी रोज पिए तो प्रसव बिना कष्ट होता है.

मूत्रावरोध : नीबू के बीजों को महीन पीस कर नाभि पर रख कर ठंडा पानी डालें, रुका हुआ पेशाब खुल कर व साफ आ जाता है.

तपोदिक : नीबू के 25 ग्राम रस में 11 तुलसी के पत्ते तथा जीरा, हींग व नमक सब को गरम पानी में मिला कर पीने से तपेदिक रोग में लाभ होगा.

सांस फूलना : नीबू के रस में शहद मिला कर चाटने से काफी राहत महसूस होगी.

डायबिटीज और प्रजनन: क्या आप डायबिटीज के साथ गर्भधारण कर सकते हैं?

एक परिवार की शुरूआत करना, जीवन के सबसे खुशनुमा सफर में से एक होता है! वैसे यह थकाने वाला भी हो सकता है. इस पर हैरानी होना, स्वाभाविक बात है कि क्या यह पुरानी बीमारी आपकी प्रजनन यात्रा को प्रभावित कर सकती है, खासकर यदि आप टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित हैं.

डायबिटीज आप पर और आपके बच्चे के लिये गंभीर परिणाम खड़ी कर सकती है और इसलिए जानकारी हासिल करना और सावधानी बरतना, आपके प्रजनन को आसान बनाने के लिये बेहद जरूरी हो जाता है. अच्छी बात ये है कि समय से पहले इसके बारे में प्लानिंग करने और अपने डॉक्टर की मदद लेने से इससे जुड़े जोखिमों को काफी हद तक कम करने में मदद मिल सकती है. इसके परिणामस्वरूप, आप हेल्दी प्रेग्नेंसी का अनुभव ले पाएंगी और एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दे पाएंगी.

डॉ.अस्वति नायर,आईवीएफ स्पेशलिस्ट, नोवा साउथेंड आईवीएफ एंड फटिर्लिटी, राजौरी गार्डन की बता रही हैं टाइप 1 या टाइप 2 डायबिटीज के साथ प्रेग्नेंसी के लिये कैसे तैयारी करें.

गर्भधारण करने का प्रयास शुरू करने के कम से कम 6 महीने पहले अपने गाइनकोलॉजिस्ट या फर्टिलिटी विशेषज्ञ से परामर्श लें. उनसे पूछें कि कैसे ब्लड शुगर को अच्छी तरह नियंत्रित रखा जा सकता है, वहीं जरूरी सप्लीमेंट जैसे फोलेट के बारे में पूछें. आपको दवाइयां बदलने को लेकर भी सलाह मिल सकती है.

यदि आपकी सेहत अच्छी है, आप गर्भवती हैं और आपका डायबिटीज पूरी तरह नियंत्रित है तो एक सामान्य प्रेग्नेंसी और प्रसव की बेहतर संभावना है. यदि प्रेग्नेंसी के दौरान डायबिटीज अच्छी तरह नियंत्रित ना हो तो आपको आगे चलकर स्वास्थ्य संबंधी गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं और यह आपके बच्चे के लिये भी खतरनाक हो सकता है.

डायबिटीज किस तरह प्रजनन को प्रभावित करता है?
डायबिटीज, महिलाओं और पुरुषों दोनों में ही प्रजनन को प्रभावित करता है और इसका संबंध खराब स्पर्म क्वालिटी, एम्ब्रयो का क्षतिग्रस्‍त होना और डीएनए के क्षतिग्रस्‍त होने से है. डायबिटीज की वजह से होने वाला हॉर्मोनल अवरोध, इम्प्लांटेशन और गर्भधारण में होने वाली देरी का प्रमुख कारण है.

डायबिटीज, महिला प्रजनन अंगों की नसों और रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करके यौन रोग का कारण बन सकता है.यह मासिक धर्म चक्र में व्यवधान पैदा कर सकता है, जिसके परिणामस्वरूप समय से पहले मोनोपॉज हो सकता है. डायबिटीज, इस प्रकार एक महिला की प्रजनन अवधि को कम कर देता है.इसके अलावा, ब्लड ग्लूकोज का उच्च स्तर और कोलेस्ट्रॉल के स्तर से इरेक्शन की समस्या होती है.इसे इरेक्टाइल डिसफंक्शन कहा जाता है. डायबिटीज मेलिटस, स्पर्म में डीएनए के विखंडन को बढ़ा सकता है, जोकि बेहद खतरनाक है क्योंकि यह गर्भधारण की संभावना को कम कर सकता है और कुछ मामलों में गर्भपात के जोखिम को बढ़ा सकता है. खंडित शुक्राणु द्वारा निषेचित अंडा एक अस्वास्थ्यकर भ्रूण के जन्म का कारण बनता है.

एक स्वस्थ गर्भावस्था का सफर-
टाइप 1 वाली कुछ महिलाओं को उनके इंसुलिन डोज को बदलने या फिर इंसुलिन पंप लेने की सलाह दी जा सकती है. वहीं, टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित महिलाओं को प्रेग्नेंसी के शुरूआती चरणों में बिना किसी दवा के केवल आहार के माध्यम से अपना ब्लड शुगर नियंत्रित करने की सलाह दी जा सकती है. नीचे, लाइफस्टाइल में बदलाव के कुछ और कारक दिए गए हैं जोकि आपको अपने डायबिटीज को नियंत्रित करने में थोड़ी और मदद कर सकते हैं.
1. आहार विशेषज्ञ/डाइटिशियन से सलाह लेना
2. मादक पदार्थ (धूम्रपान, शराब) का इस्तेमाल करने से बचना
3. दवाओं में बदलाव
4.विटामिन और मिनरल सप्लीमेंट लेना

सेहतमंद गर्भावस्था सुनिश्चित करने के लिये नीचे कुछ कारक दिए गए हैं, जिन्हें आपको नियंत्रित करने की जरूरत है.

ब्लड ग्लूकोज का स्तर: हो सकता है आप पहले से ही अपना अच्छी तरह ख्याल रख रहे हों, लेकिन गर्भावस्था के लिये यह और भी जरूरी हो जाता है. यह आपके और आपके बच्चे की सेहत के लिये महत्वपूर्ण है कि आपके ब्लड ग्लूकोज का स्तर स्थिर रहे.उपवास (भोजन से पहले) के दौरान आदर्श ब्लड ग्लूकोज का स्तर 4.0 और 5.5 mmol/L के बीच होता है और भोजन के 2 घंटे बाद 7.0 mmol/L से कम होता है. यदि आपको डायबिटीज है, तो स्वस्थ रहने और स्वस्थ बच्चे को जन्म देने के लिये गर्भावस्था से पहले और गर्भावस्था के दौरान जितना हो सके अपने ब्लड ग्लूकोज के स्तर को सामान्य रखना जरूरी है.

HbA1c स्तर:
आपके प्रजनन के शुरूआत में, आपके HbA1c का स्तर आवश्यक रेंज के अंदर रहना जरूरी है. ऐसा इसलिए है, क्योंकि HbA1c का अधिक स्तर आपके बच्चे के विकास को प्रभावित कर सकता है. खासातौर से गर्भावस्था की पहली तिमाही (पहले आठ हफ्ते) के दौरान यह महत्वपूर्ण है, जब बच्चे के अंगे विकसित हो रहे होते हैं.

HbA1c के स्तर को 48 mmol/mol से नीचे रखना बेहद आवश्यक है.यदि इसका स्तर 48 mmol/mol से अधिक हो जाता है तो खतरे को कम करने के लिये आपको सावधानियां बरतनी चाहिए.

फॉलिक एसिड:
अपने बच्चे के खतरों को कम करने के लिये गर्भधारण करने से पहले कम से कम 12 हफ्तों के लिये हर रोज 5 एमजी डोज लेना जरूरी है.

आहार और एक्सरसाइज:
एक्सरसाइज और संतुलित आहार, ब्लड ग्लूकोज के लक्ष्य तक पहुंचने में आपकी मदद कर सकते हैं. शारीरिक सक्रियता, तनाव को दूर कर, आपके दिल और हड्डियों को मजबूती देकर, मांसपेशियों की ताकत बढ़ाकर और आपके जोड़ों को लचीला बनाए रखकर, एक सेहतमंद ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बनाए रखने में मदद करता है.गर्भावस्था के दौरान हर दिन 30 मिनट का ब्रिस्क वॉक भी रक्तसंचार को नियमित बनाए रखने का एक बेहतरीन तरीका है. अपनी मेडिकल टीम से बात करें कि वो आपको प्रभावी गतिविधियों के बारे में बताएं जोकि गर्भावस्था के दौरान आपके लिये सबसे अच्छे हैं.

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