Anupamaa: समर-नंदनी के बाद क्या अब राखी दवे भी करेगी शो को अलविदा!

रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर ‘अनुपमा’ शुरुआत से ही लोगों के दिलों पर तो राज कर ही रहा है, साथ ही टीआरपी लिस्ट में भी नंबर वन पर छाया हुआ है. ‘अनुपमा’ में इन दिनों पूरी कहानी माया, छोटी और पारितोष के इर्द-गिर्द घूम रही है, जिसमें अनुपमा और अनुज की जिंदगी भी उलझकर रह गई है. वहीं ‘अनुपमा’ के ही कुछ किरदार ऐसे भी हैं जो बिल्कुल किनारे कर दिये गये हैं. बता दें कि मेकर्स द्वारा किरदारों की अनदेखी करने पर कई सितारों ने शो को अलविदा भी कह दिया था. इस लिस्ट में पारस कलनावत से लेकर अल्मा हुसैन तक का नाम शामिल है. वहीं अब खबर आ रही है कि तसनीम शेख ने भी किरदार में बदलाव न होने पर दूसरे प्रोजेक्ट तलाशना शुरू कर दिया है.

 

 

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1-पारस कलनावत (Paras Kalnawat)

पारस कलनावत ने ‘अनुपमा’ में समर का किरदार निभाया था. उनके किरदार में ज्यादा बदलाव नहीं हो रहा था, जिससे उन्होंने ‘झलक दिखला जा 10’ में हाथ आजमाने का फैसला किया था. हालांकि कॉन्ट्रैक्ट का उल्लंघन करने के लिए मेकर्स ने ही पारस का पत्ता काट दिया था

 

2-अनघा भोसले (Anagha Bhosale)

‘अनुपमा’ में अनघा भोसले ने नंदिनी का रोल अदा किया था. शो में एक पल के लिए वह भी साइड होकर रह गई थीं. वहीं कुछ ही समय बाद अनघा ने ग्लैमर की दुनिया छोड़ ईश्वर की भक्ति की ओर रुख कर लिया.

 

3-अल्मा हुसैन (Alma Hussein)

अल्मा हुसैन ने ‘अनुपमा’ में बरखा की बेटी सारा का रोल निभाया था. शो में उनका किरदार कुछ खास नहीं कर रहा था, ऐसे में अल्मा ने ‘अनुपमा’ को छोड़कर दूसरे प्रोजेक्ट्स में हाथ आजमाने का फैसला किया.

4-अपूर्व अग्निहोत्री (Apurva Agnihotri)

अपूर्व अग्निहोत्री ने ‘अनुपमा’ में अहम रोल अदा किया था. उन्होंने शो में अनुपमा को कैंसर और वनराज को डिप्रेशन से लड़ने में मदद की. लेकिन कुछ ही वक्त बाद अपूर्व ने भी ‘अनुपमा’ को बाय-बाय कह दिया. गौरव खन्ना की एंट्री से पहले अपूर्व के साथ अनुपमा की जोड़ी खूब पसंद की जा रही थी.

 

 

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5-अनेरी वजानी (Aneri Vajani)

अनेरी वजानी ने ‘अनुपमा’ में मालविका का रोल अदा किया था. एक वक्त पर आकर उनका रोल भी बिल्कुल किनारे कर दिया गया. ऐसे में उन्होंने ‘अनुपमा’ को बाय-बाय कहकर ‘खतरों के खिलाड़ी 12’ में हिस्सा लिया.

 

 

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6-वरुण शर्मा (Varun Sharma)

वरुण शर्मा ने अनुपमा में नंदिनी के एक्स बॉयफ्रेंड का रोल अदा किया था. कुछ ही वक्त के बाद वरुण शर्मा को भी मेकर्स ने अहमियत देनी बंद कर दी. ऐसे में उन्होंने रुपाली गांगुली के शो को अलविदा कह दिया.

7-तसनीम शेख (Tassnim Sheikh)

तसनीम शेख ने अपने एक इंटरव्यू में बताया कि वह दूसरे प्रोजेक्ट्स में हाथ आजमाएंगी. उनकी इस बात के बाद से ही यह अटकलें लगनी तेज हो गईं कि वह रुपाली गांगुली के ‘अनुपमा’ को बाय-बाय कहेंगी.

 

क्या सच में ‘अनुपमा’ छोड़ेंगी तसनीम शेख

राखी दवे यानी तसनीम शेख ने इन अटकलों को साफ करते हुए कहा कि उन्होंने भले ही दूसरे प्रोजेक्ट्स में हाथ आजमाने का मन बनाया है. लेकिन वह ‘अनुपमा’ नहीं छोड़ रही हैं. तसनीम शेख ने इस बारे में आगे कहा कि पहले उन्होंने शो में वैंप का किरदार अदा किया था. लेकिन पिछले कुछ महीनों से उनके लिए शो में कुछ खास नहीं बचा है.

 

सेहत का दुश्मन ऑनलाइन फूड

फ्रूड होम डिलिवरी सॢवस स्वीगी का इस साल का नुकसान 3629 करोड़ है. उस के साथ काम कर रही जामाटो भी भारी नुकसान में है और उस से 550 करोड़ की सहायता अभी किसी फाइनैंशियल इनवैस्टर से भी है. स्वीगी को पिछले साल 1617 करोड़ का नुकसान था पर फिर भी उस का मैनेजमैंट धड़ाधड़ पैसा खर्च करता रहा और अब यह नुकसान दोगुना से ज्यादा हो गया.

स्वीगी की डिलिवरी से फूले नहीं समा रहे ग्राहक यह भूल रहे हैं कि इस नुकसान की कीमत उन से आज नहीं तो कल वसूली ही जाएगी. जितनी भी ऐप बेस्ड सेवाएं हैं वे मुफ्त या सस्ती होने के कारण भारी नुकसान कुछ साल चलती हैं पर जब वे मार्केट पर पूरी तरह कब्जा कर लेती हैं तो खून चूसना शुरू कर देती हैं. स्वीगी अब धीरेधीरे छोटे रेस्तरांओं का बिजनैस खत्म कर रही है वह क्लाइड किचनों से काम करा रही है. वह अब डिलिवरी बौयज को दी गई शर्तों पर काम करने को मजबूर कर रही है. स्वीगी से जो रेस्तरां नहीं जुड़ता वह देरसबेर बंद हो जाता है चाहे उस की रेस्तरां की सेवा कितनी ही अच्छी हो. स्वीगी न घरों की औरतों को काम न करने का नशा डाल दिया है और इस के लिए एक साल का 3600 करोड़ रुपए का खर्च सस्ता है. अगर औरतें घरों की किचन में नहीं घुसेंगी तो उन्हें देरसबेर वही खाना पड़ेगा जो स्वीगी या उस जैसा कोई ऐप मुहैया करेगा. घरों में से किचन गायब हो जाएगी तो लोग दानेदाने के लिए किसी ऐप को तलाशेंगे.

जैसे किराने की दुकानों को अमेजन व जियो भारी नुकसान सह कर बंद करा रहे हैं वैसे ही स्वीगी लोगों का स्वाद बदल रही है. आप वह खाइए जो मां या पत्नी ने नही बनाया और डिलिवर हुआ. मां या पत्नी का प्रेम उस खाने से पैदा होता है जो वे प्रेम से बनाती हैं. खिलाती हैं. जब इस प्रेम की ही जरूरत नहीं होगी तो घर की छतें टूटने लगेंगी. यह बड़ी कौरपोरेशनों के लिए अच्छा है. सदियों तक राजा और धर्मों के ठेकेदार घरों से आदमियों को निकाल कर पैसा या धर्म प्रचार में लगाते रहे हैं और दोनों काम करने वालों को जम कर लूटते रहे थे. उन की औरतें बेबस, अनचाही, केवल बच्चे पैदा करने वाली मशीनें बन कर रह जाती थीं. अब इन औरतों को भी कौरपोरेशनों ने खापना शुरू कर दिया है और उन से किचन छीनवा दी है, सैनिकों या धर्म के सेवकों की तरह मैसों व लंगरों में खाना खाना पड़ता था, एक जैसा. वही स्वीगी करेगा. दिखावटी, नकली सुगंध वाला खाना जिस में सस्ती सामग्री लगे लेकिन पैङ्क्षकग बढिय़ा हो और दाम इतने कि न दो तो खाना मिले ही नहीं.

भारत में नए साल पर स्वीगी ने 13 लाख खाने डिलिवर किए क्योंकि इतने घरों की औरतों ने खाना बनाने से इंकार कर दिया. इस डिलिवरी में कौन लगा था. स्वीगी की एलेब लेबर जो भीड़ में गर्म खाना डिलिवर करने में लगी थी. उन के लिए न अब दीवाली त्यौहार रह गया है, न नया साल. 3600 करोड़ का खर्च इतनी बड़ी जनता को घरों में कैद करने में या मोटरबाइक पर गुलामी करने में कुछ ज्यादा नहीं है. इस का फायदा कोई तो उठा रहा है चाहे आप को वह दिखे न.

नई दुल्हन के लिए 10 कुकिंग आइडियाज

शादियों का सीजन प्रारम्भ हो चुका है. नई नवेली दुल्हन से पहली बार आमतौर पर मीठा बनवाने की परंपरा रही है परन्तु आजकल एक पूरा भोजन या थाली बनवाने का फैशन जोरों पर है. आजकल की लड़कियां आमतौर पर कामकाजी होती हैं जिससे उन्हें खाना बनाने या सीखने का अवसर ही प्राप्त नहीं हो पाता. विवाह के बाद ससुराल में अपनी पहली रसोई बनाने में कोई परेशानी न हो इसके लिए आवश्यक है कि आप पहले से ही अपनी कुकिंग की थोड़ी बहुत तैयारी करके जाएं. आज हम आपको ऐसे ही कुछ टिप्स बता रहे हैं जो ससुराल में पहली रसोई बनाने में आपके लिए काफी मददगार साबित होंगे-

1-पहले जमाने में जहां दुल्हन से पहली बार मीठा ही बनवाया जाता था वहीं आजकल कम्प्लीट मील बनवाया जाने लगा है जिसके लिए यह जरूरी है कि आप पहले से अपने दिमाग में एक पूरा मील प्रिपेयर करके जाएं.

2-आमतौर पर टोमेटो सूप सभी को पसन्द आता है, इसे जब आप स्टार्टर के तौर पर बनाएं तो 1 किलो टमाटर के सूप में एक सैशे रेडीमेड नॉर सूप का मिला दें इससे सूप का स्वाद और गाढ़ापन दोनों ही बढ़ जाएंगे. सूप में डालने के लिए सूप स्टिक के स्थान पर ब्रेड के क्यूब्स को रोस्ट करके डालें.

3-स्टार्टर में कोई नया प्रयोग करने के स्थान पर पापड़ मसाला बनाएं. पापड़ को बीच से चार भागों में काट लें फिर इसे तेल में सेंककर या रोस्ट करके सर्व करें. खीरा, टमाटर,प्याज,हरी मिर्च के सलाद को पापड़ के ऊपर रखने के स्थान पर प्लेट के साइड में रख दें इससे पापड़ जल्दी नरम नहीं होगा.

4-मेनकोर्स में एक पनीर की सब्जी का चयन अवश्य करें क्योंकि पनीर की सब्जी अधिकांश लोगों को पसन्द होती है साथ ही सब्जी को गाढ़ा करने के लिए तरबूजे खरबूजे के बीज/काजू/मूंगफली और तिल/भुना बेसन में से किसी एक का प्रयोग करें.

5-सब्जी की ग्रेवी में ग्लेज और तरी लाने के लिए सूखे मसालों को 1 बड़ा चम्मच ताजे दही या मलाई में फेंटकर तेल में डालें.

6-परांठा, पूरी अथवा रोटी में से आप जो भी बनाएं उसमें पालक, बथुआ प्यूरी डालकर दूध से आटा लगाएं इससे पूरी परांठा का रंग और  स्वाद दोनों ही बहुत अच्छे हो जाएंगे.

7-यदि आपका पूरी, परांठा या रोटी गोल नहीं बन पाता तो बेलने के बाद उसे किसी बड़ी गोल कटोरी से काट दें.

8-डेजर्ट में सूजी/गाजर का हल्वा, गाजर/केसर की खीर जैसी आसान चीजें बनाने का प्रयास करें. सूजी को पानी के स्थान पर दूध में पकाएं. इसी तरह खीर को गाढ़ा करने के लिए मिल्क पाउडर का प्रयोग करें इससे हल्वा और खीर दोनों का ही स्वाद लाजबाब और टेक्सचर क्रीमी होगा.

9-प्लेन गाजर, मूली, खीरा का सलाद बनाने के स्थान पर स्प्राउट, या पीनट सलाद बनाने का प्रयास करें. इसके लिए सभी खीरा, गाजर, शिमला मिर्च आदि को 1 टीस्पून ऑलिव ऑइल में 2-3 मिनट रोस्ट कर लें. फिर चाट मसाला, काला नमक, काली मिर्च और नींबू का रस मिलाकर सर्व करें. यदि सम्भव हो तो बीच में टमाटर का एक फूल बनाकर रख दें.

10-बच्चों के लिए नूडल्स, पास्ता जैसी कोई डिश अवश्य बनाएं इससे बच्चे आपके फैन हो जाएंगे. साथ ही यदि परिवार में सादा खाना खाने वाला कोई बुजुर्ग है तो उसकी डाइट का ध्यान रखते हुए दलिया, खिचड़ी जरूर बनाएं.

Holi 2023: सदमा- आखिर कैसा रिश्ता था नेहा और शलभ का? भाग 3

तीसरे दिन जब पीयूष का बुखार उतर गया तो वह औफिस पहुंची. आधा दिन

बीत गया, मगर शलभ ने कोई खोजखबर नहीं ली. पैंडिंग काम ज्यादा होने की वजह से लंच तक वह भी अपनी सीट से उठ नहीं पाई. लंच में जब वह शलभ के कमरे में पहुंची तो वह गायब था. उस के स्टाफ ने बताया कि वह किसी गैस्ट के साथ बाहर गया है. नेहा उदास सी वापस अपनी सीट पर लौट आई. शाम को उस ने शलभ को फोन किया तो उस ने बताया कि वह अभी भी बाहर है सो बात नहीं कर सकता. इसी तरह

2-3 दिन तक वह नेहा को इग्नोर करता रहा. अंत में एक दिन नेहा सुबहसुबह उस के कैबिन में पहुंच कर उस का वेट करने लगी.

शलभ उसे देख कर हौले से मुसकराते हुए हालचाल पूछने लगा. तभी चपरासी 2 कप चाय रख गया.

चाय पीते हुए नेहा ने सवाल किया, ‘‘शलभ याद है उस दिन तुम मु?ो अपने पेरैंट्स से मिलवाने की बात कर रहे थे. आज मेरे पास समय है. शाम वाली मीटिंग कैंसिल हो गई. तुम्हारा भी आज कोई इंगेजमैंट नहीं. कहीं बाहर चलते हैं. मु?ो तुम्हें अपने बारे में कुछ बताना भी था. फिर तुम्हारे पेरैंट्स से भी मिल लूंगी.’’

‘‘सौरी यार पर अब मु?ो तुम्हें अपने पेरैंट्स से मिलवाने में कोई दिलचस्पी नहीं.’’

‘‘मगर क्यों?’’ चौंकते हुए नेहा ने पूछा.

‘‘मैं जिस मकसद से मिलवाना चाहता था वह मकसद ही खत्म हो चुका है,’’ शलभ ने सपाट सा जवाब दिया.

‘‘क्या मैं जान सकती हूं शलभ, तुम मु?ो इस तरह ट्रीट क्यों कर रहे हो? कई दिन से नोटिस कर रही हूं, तुम मु?ो इग्नोर कर रहे हो.’’

‘‘तुम ने मु?ो चीट किया है. मेरे जज्बातों से खेला है. जो बात तुम्हें मु?ो बहुत पहले बता देनी चाहिए थी वह बात मु?ो तुम्हारी सहेली से पता चली…’’ शलभ ने गुस्से में कहा.

‘‘लगता है तुम्हें मेरे बच्चे की बात पता चली है. मगर वह मैं तुम्हें आज खुद बताने वाली थी. जब मैं ने देखा कि तुम मु?ो ले कर सीरियस हो तो मैं खुद…’’

‘‘नहीं नेहा तुम खुद मु?ो कभी नहीं बताती. वैसे भी एक शादीशुदा और बच्चे वाली औरत के साथ मु?ो इस तरह का कोई संबंध नहीं रखना.’’

‘‘शलभ मैं तलाक ले चुकी हूं. मेरी वह शादी बहुत कम उम्र में हुई थी. शादी करने की मेरी उम्र अब है,’’ नेहा ने कहा.

‘‘आप बताएंगी आप के पति ने तलाक क्यों लिया?’’ शलभ का सवाल था.

‘‘क्योंकि मेरा बेटा एक स्पैशल चाइल्ड है और वह उस की जिम्मेदारी नहीं लेना चाहता था,’’ नेहा ने सचाई बताई.

‘‘तो क्या तुम्हें यह लगता है कि मैं इतना मूर्ख हूं कि जिस बच्चे को उस के अपने बाप ने ठुकरा दिया, उस बीमार बच्चे की जिम्मेदारी का बो?ा मैं ढोऊंगा?’’

‘‘अच्छा तो यह बात है. शलभ मेरा पति कायर था इसलिए अपने ही बच्चे को अपना नहीं सका. रही बात तुम्हारी तो तुम मूर्ख तो हो ही नहीं सकते. जो इंसान इतना गुणाभाग कर किसी रिश्ते को देखता है वह मूर्ख कैसे हो सकता है. मूर्ख तो मैं हूं. मैं ही जज्बातों में बह गई. सच्चे प्यार की उम्मीद करने लगी…’’  कहतेकहते नेहा की आंखों में आंसू आ गए.

‘‘ये आंसुओं का खेल मु?ा से मत खेलो नेहा. मैं एक प्रैक्टिकल इंसान हूं. किसी और का बो?ा उठाना मेरी फितरत नहीं. अपने पेरैंट्स को मैं किसी दूसरे शख्स का बीमार बच्चा नहीं सौंप सकता. याद रखना आज के बाद हमारे बीच कोई रिश्ता नहीं. हम दोनों केवल कुलीग हैं और कुछ नहीं,’’ शलभ ने स्पष्ट किया.

‘‘हमारे बीच और कुछ हो भी नहीं सकता. इतना स्वार्थी आदमी मेरे प्यार का हकदार हो ही नहीं सकता…’’ आंखों के आंसू छिपाती नेहा अपने कैबिन में लौट आई.

आज शलभ ने उस का दिल ही नहीं तोड़ा था बल्कि प्यार पर से उस का

विश्वास भी तोड़ दिया था. जिस तरह अचानक शलभ ने उस से हर रिश्ता खत्म कर लिया वह उस के लिए बहुत शौकिंग था. उस से फिर औफिस में बैठा नहीं गया.

नेहा घर आ कर अपना कमरा बंद कर बैठ गई. पीयूष उसे आवाज देता रहा, सूजी उस के लिए चाय बना कर दरवाजा नौक करती रही, फोन बजता रहा, मगर उसे कुछ भी सुनाई नहीं दे रहा था. उस के दिमाग में सिर्फ शलभ की कही बातें गूंज रही थीं. उसे सारी दुनिया उन कुछ पलों में सिमटी नजर आ रही थी. वह एक गहरे सदमे में थी.

Valentine’s Special: नहले पे दहला

पूर्णिमा तुझे मनु याद है?’’ मां ने खुशी से पूछा.

‘‘हां,’’ और फिर मन ही मन बोली कि अपने बचपन के उस इकलौते मित्र को कैसे भूल सकती हूं मां, जिस के जाने के बाद किसी और से दोस्ती करने को मन ही नहीं किया.

‘मनु वापस आ रहा है… किसी बड़ी कंपनी का मैनेजर बन कर…’’

‘‘मनु ही नहीं राघव और जया भाभी भी आ रहे हैं,’’ पापा ने उत्साह से मां की बात काटी.

‘‘मैं ने तो राघव से फोन पर कह दिया है कि जब तक आप का अपना घर पूरी तरह सुव्यवस्थित नहीं हो जाता तब तक रहना और खाना हमारे साथ ही होगा.’’

‘‘तो उन्होंने क्या कहा?’’

‘‘कहा कि इस में कहने की क्या जरूरत है? वह तो होगा ही. बिलकुल नहीं बदले दोनों मियांबीवी. और मनु भी पीछे से कह रहा था कि पूर्णिमा से पूछो कुछ लाना तो नहीं है. तब भाभी ने उसे डांट दिया कि पूछ कर कभी कुछ ले कर जाते हैं क्या? बिलकुल उसी तरह जैसे बचपन में डांटा करती थीं.’’

‘‘और मनु ने सुन लिया?’’ पूर्णिमा ने खिलखिला कर पूछा.

‘‘सुना ही होगा, तभी तो डांट रही थीं और इन सब संस्कारों की वजह से उस ने यहां की पोस्टिंग ली है वरना अमेरिका जा कर कौन वापस आता है,’’ पापा ने सराहना के स्वर में कहा. यह सुन कर पूर्णिमा खुशी से झूम उठी. बराबर के घर में रहने वाले परिवार से पूर्णिमा के परिवार का रातदिन का उठनाबैठना था. वह और मनु तो सिर्फ सोने के समय ही अलग होते थे वरना स्कूल जाने से ले कर खेलना, होमवर्क करना या घूमने जाना इकट्ठे ही होता था. आसपास और बच्चे भी थे, लेकिन ये दोनों उन के साथ नहीं खेलते थे. फिर अचानक राघव को अमेरिका जाने का मौका मिल गया. जाते हुए दुखी तो सभी थे, मगर कह रहे थे कि जल्दी लौट आएंगे पी.एचडी. पूरी होते ही. मौका लगा तो बीच में भी एक चक्कर लगा लेंगे.

लेकिन 20 बरसों में आज पहली बार लौटने की बात की थी. उस समय संपर्क साधन आज की तरह विकसित और सुलभ नहीं थे. शुरूशुरू में राघव फोन किया करते थे. नई जगह की मुश्किलें बताते थे यह भी बताते रहते कि जया और मनु लता भाभी और पूर्णिमा को बहुत याद करते हैं. लेकिन नए परिवेश को अपनाने के चक्कर में धीरेधीरे पुराने संबंध कमजोर हो गए. 10 बरस पहले का दुबलापतला मनु अब सजीलारोबीला जवान बन गया था. वह पूर्णिमा को एकटक देख रहा था.

‘‘ऐसे क्या देख रहा है? पूर्णिमा ही है यह,’’ लता बोलीं.

‘‘यही तो यकीन नहीं हो रहा आंटी. मुझे समझ में नहीं आ रहा कि मुटल्ली पूर्णिमा इतनी पतली कैसे हो गई?’’

‘‘वह ऐसे कि तेरे साथ मैं हरदम खाती रहती थी. तेरे जाने के बाद उस गंदी आदत के छूटते ही मैं पतली हो गई,’’ पूर्णिमा चिढ़ कर बोली.

‘‘यानी मेरे जाने से तुझे फायदा हुआ.’’

‘‘सच कहूं मनु तो पूर्णिमा को वाकई फायदा हुआ,’’ महेश ने कहा, ‘‘तेरे जाने के बाद यह किसी और से दोस्ती नहीं कर सकी. किताबी कीड़ा बन गई, इसीलिए प्रथम प्रयास में आईआईएम अहमदाबाद में चुन ली गई और आज इन्फोटैक की सब से कम उम्र की वाइस प्रैजीडैंट है.’’

‘‘अरे वाह, शाबाश बेटा. वैसे महेश, फायदा मनु को भी हुआ. यह भी किसी से दोस्ती नहीं कर रहा था. भला हो सैंडी का… उस ने कभी इस की अवहेलना का बुरा नहीं माना और दोस्ती का हाथ बढ़ाए रखा. फिर उस के साथ यह भी सौफ्टवेयर इंजीनियर बन गया,’’ राघव बोले.

‘‘वरना इसे तो राघव अंकल की तरह काले कोट वाला वकील बनना था और मुझे भी वही बनाना था,’’ पूर्णिमा बोली. ‘‘अच्छा हुआ अंकल आप अमेरिका चले गए.’’सब हंस पड़े. फिर लता बोलीं, ‘‘क्या अच्छा हुआ, यहां रहते तो तू आज तक कुंआरी नहीं होती.’’

‘‘वह तो है लता,’’ जया ने कहा, ‘‘खैर अब आ गए हैं तो हमारा पहला काम इसे दुलहन बनाने का होगा. क्यों मनु?’’

‘‘बिलकुल मम्मी, नेक काम में देर क्यों? चट मंगनी पट शादी रचवाओ ताकि भारतीय शादी देखने के लालच में सैंडी भी जल्दी आ जाए.’’

‘‘यही ठीक रहेगा. इसी बहाने सभी पुराने परिजनों से एकसाथ मिलना भी हो जाएगा,’’ राघव ने स्नेह से पूर्णिमा के सिर पर हाथ फेरा, ‘‘चल तैयार हो जा बिटिया, सूली पर झूलने को.’’पूर्णिमा ने कहना तो चाहा कि सूली नहीं अंकल, मनु की बलिष्ठ बांहें कहिए. फिर धीरे से बोली, ‘‘अभी तो हम सब को इतने सालों की जमा पड़ी बातें करनी हैं अंकल… आप को यहां सुव्यवस्थित होना है, उस के बाद और कुछ करने की सोचेंगे.’’

‘‘यह बात भी ठीक है, लेकिन बहू के आने से पहले उस की सुविधा और आराम की सही व्यवस्था भी तो होनी चाहिए यानी बहू के गृहप्रवेश से पहले घर भी तो ठीक हो. और भी बहुत काम हैं. तू नौकरी पर जाने से पहले मेरे कुछ काम करवा दे मनु,’’ जया ने कहा.

‘‘मुझे तो कल से ही नौकरी पर जाना है मम्मी पूर्णिमा से करवाओ जो करवाना है.’’

‘‘हां, पूर्णिमा तो बेकार बैठी है न. नौकरी पर तो बस मनु को ही जाना है,’’ पूर्णिमा ने मुंह बनाया, ‘‘मगर आप फिक्र मत करिए आंटी, आप को मैं कोई परेशानी नहीं होने दूंगी.’’

‘‘उस का तो सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि सब से बड़ी परेशानी तो पूर्णिमा आप स्वयं ही हैं,’’ मनु ने चिढ़ाया, ‘‘आप काम में लग जाइए, सारी परेशानी दूर हो जाएगी.’’

‘‘लो, हो गया शुरू मनु महाराज का अपने अधकचरे ज्ञान का बखान,’’ पूर्णिमा ने कृत्रिम हताशा से माथे पर हाथ मारा.

यह देख सभी हंस पड़े.

‘‘इतने बरस एकदूसरे से लड़े बगैर दोनों ने खाना कैसे पचाया होगा? ’’ लता बोलीं.

‘‘सोचने की बात है, झगड़ता तो खैर सैंडी से भी हूं, लेकिन अंगरेजी में झगड़ कर वह मजा नहीं आता, जो अपनी भाषा में झगड़ कर आता है,’’ मनु कुछ सोचते हुए बोला.

पूर्णिमा को यह सुनना अच्छा लगा. मनु का लौटना ऐसा था जैसे पतझड़ और जाडे़ के बाद एकदम बहार का आ जाना और वह भी इतने बरसों के बाद. होस्टल में अपनी रूममैट को कई बार पढ़ते हुए भी गुनगुनाते सुन कर वह पूछा करती थी कि पढ़ाई के समय यह गानाबजाना कैसे सूझता है, सेजल? तो वह कहती थी कि जब तुम्हें किसी से प्यार हो जाएगा न तब तुम इस तरह गुनगुनाने लगोगी. सेजल का कहना ठीक था, आज पूर्णिमा का मन गुनगुनाने को ही नहीं झूमझूम कर नाचने को भी कर रहा था. उस के बाद प्रत्यक्ष में तो किसी ने पूर्णिमा की शादी की बात नहीं की थी, लेकिन जबतब लता और महेश लौकर में रखे गहनों और एफडी वगैरह का लेखाजोखा करने लगे थे. राघव ने भी आर्किटैक्ट बुलाया था, छत की बरसाती तुड़वा कर बहूबेटे के लिए नए कमरे बनवाने को. मनु को नए परिवेश में काम संभालने में जो परेशानियां आ रही थीं, उन्हें मैनेजमैंट ऐक्सपर्ट पूर्णिमा बड़ी सहजता से हल कर देती थी. अब मनु हर छोटीबड़ी बात उस से पूछने लगा था. वह अपने काम के साथ ही मनु के काम की बातें भी इंटरनैट पर ढूंढ़ती रहती थी. एक शाम उस ने मनु को फोन किया कि उसे जो जानकारी चाहिए थी वह मिल गई है. अत: उस का विवरण सुन ले.

‘‘मैं औफिस से निकल चुका हूं पूर्णिमा, तुम भी आने वाली होंगी. अत: घर पर ही बात कर लेंगे,’’ मनु ने कहा.

‘‘मैं तो घंटे भर बाद निकलूंगी.’’

‘‘ठीक है, फिर मिलते हैं.’’

लेकिन जब वह 2 घंटे के बाद घर पहुंची तो मम्मीपापा और अंकलआंटी बातों में व्यस्त थे. मनु की गाड़ी कहीं नजर नहीं आ रही थी.

‘‘मनु कहां है?’’ पूर्णिमा ने पूछा.

‘‘अभी औफिस से नहीं आया,’’ सुनते ही पूर्णिमा चौंक पड़ी कि इतनी देर रास्ते में तो नहीं लग सकती, कहीं कोई दुर्घटना तो नहीं हो गई. मगर तभी मनु आ गया.

‘‘बड़ी देर कर दी आज आने में?’’ जया ने पूछा.

‘‘वह ऊपर के कमरों के ब्लू प्रिंट्स सैंडी को भेजे थे न… उस की टिप्पणी के साथ आर्किटैक्ट के पास गया था. वहीं देर लग गई. अब कल से काम शुरू हो जाएगा.’’

पूर्णिमा यह सुन कर हैरान हो गई कि जिसे उन कमरों में रहना है उसे तो ब्लू प्रिंट्स दिखाए नहीं और सैंडी को भेज दिए. फिर पूछा, ‘‘सैंडी आर्किटैक्ट है?’’

‘‘नहीं, मेरी ही तरह सौफ्टवेयर इंजीनियर है.’’

‘‘तो फिर उसे ब्लू प्रिंट्स क्यों भेजे?’’

‘‘क्योंकि उसे ही तो रहना है उन कमरों में.’’

‘‘उसे क्यों रहना है?’’ पूर्णिमा ने तुनक कर पूछा.

‘‘क्योंकि वही तो इस घर की बहू यानी मेरी बीवी है भई.’’

‘‘बीवी है तो साथ क्यों नहीं आई?’’ पूर्णिमा अभी भी इसे मनु का मजाक समझ रही थी.

‘‘क्योंकि वह जिस प्रोजैक्ट पर काम कर रही है उसे बीच में नही छोड़ सकती. काम पूरा होते ही आ जाएगी. तब तक ऊपर के कमरे भी बन जाएंगे और नए कमरों में बहू का गृहप्रवेश धूमधाम से करवाने की मम्मी की ख्वाहिश भी पूरी हो जाएगी.’’

पूर्णिमा को मनु के शब्द गरम सीसे की तरह जला गए. उस ने अपने मातापिता की तरफ देखा. वे भी हैरान थे.

‘‘कमाल है भाभी, सास बन गईं और हमें भनक भी नहीं लगी,’’ महेश ने उलहाने के स्वर में कहा.

‘‘यह कैसे हो सकता है महेश भैया…’’

‘‘हम अभी तक वर्षों पुरानी बातें करते रहे हैं,’’ राघव ने जया की बात काटी, ‘‘इस बीच खासकर अमेरिका में क्या हुआ, उस के बारे में हम ने बात ही नहीं की.’’

‘‘मगर मैं ने तो पहले दिन ही कहा था कि मुझे बहू के गृहप्रवेश से पहले घर ठीकठाक चाहिए.’’

‘‘हम ने समझा आप हमारी बेटी के लिए कह रही हैं,’’ लता ने मन ही मन बिसूरते हुए कहा.

‘‘विस्तार से इसलिए नहीं बताया कि बापबेटे ने मना किया था कि अमेरिका में क्या करते थे या क्या किया बता कर शान मत बघारना…’’

‘‘सफाईवफाई क्या देनी मम्मी, सब को अपनी शादी का वीडियो दिखा देता हूं लेकिन डिनर के बाद,’’ मनु ने बात काटी, ‘‘तू भी जल्दी से फ्रैश हो जा पूर्णिमा.’’

‘‘मुझे तो खाने के बाद कुछ जरूरी काम करना है. मम्मीपापा को दिखा दे. मुझे सीडी दे देना. फुरसत में देख लूंगी.’’

‘‘मेरी शादी की सीडी है पूर्णिमा तुम्हारे औफिस की फाइल नहीं, जिसे फुरसत में देख लोगी,’’ मनु ने चिढ़ कर कहा, ‘‘जब फुरसत हो आ जाना, दिखा दूंगा. चलो, मम्मी खाना लगाओ, भूख लग रही है.’’ पूर्णिमा के परिवार की तो भूख मर चुकी थी, लेकिन नौकर के कई बार कहने पर कि खाना तैयार है, सब जा कर डाइनिंग टेबल के पास बैठ गए.

तभी मनु आ गया, ‘‘ओह, आप खाना खा रहे हैं, मैं फिर आता हूं.’’

‘‘अब आया है तो बैठ जा, खाना हो चुका है,’’ पूर्णिमा बोली.

‘‘अभी किसी ने खाना शुरू नहीं किया और तू कह रही है कि हो चुका. खैर, खातेखाते जो सुनाना है सुना दे,’’ मनु पूर्णिमा की बगल की चेयर पर बैठ गया.

लता और महेश ने चौंक कर एकदूसरे की ओर देखा.

‘‘क्या सुनना चाहते हो?’’ लता स्वयं नहीं समझ सकीं कि उन के स्वर में व्यंग्य था या टीस.

‘‘वही जो सुनाने को पूर्णिमा ने मुझे फोन किया था.’’

‘‘ओह, राजसंस का फीडबैक? काफी दिलचस्प है और वह इसलिए कि उन्होंने अभी तक किसी राजनेता का संरक्षण लिए बगैर अपने दम पर इतनी तरक्की की है.’’

‘‘यानी उन के साथ काम किया जा सकता है?’’

‘‘उस के लिए उन लोगों के विवरण देखने होंगे जो उन के साथ काम कर रहे हैं. चल तुझे पूरी फाइल दिखा देती हूं,’’ पूर्णिमा ने प्लेट सरकाते हुए कहा.

‘‘पहले तू आराम से खाना खा. बगैर खाना खाए टेबल से नहीं उठते. वह फाइल मुझे मेल कर देना. अभी चलता हूं,’’ मनु ने उठते हुए कहा.

‘‘क्यों सैंडी को फोन करने की जल्दी है?’’ लता ने पूछा.

‘‘नहीं आंटी, सैंडी तो अभी औफिस में होगी. वह आजकल ज्यादातर समय औफिस में ही रहती है ताकि काम पूरा कर के जल्दी यहां आ सके. हमें भी ऊपर के कमरे बनवाने में जल्दी करनी चाहिए. पापा को अभी यही समझाने जा रहा हूं,’’ फिर सभी को गुडनाइट कह कर मनु चला गया.

‘‘यह तो ऐसे व्यवहार कर रहा है जैसे कुछ हुआ ही नहीं है,’’ लता ने मुंह बना कर कहा.

‘‘सच पूछो तो मनु या उस के परिवार के लिए तो कुछ भी नहीं हुआ है और हमारे साथ भी जो हुआ है वह हमारी अपनी सोच, खुशफहमी या गलतफहमी के कारण हुआ है,’’ महेश ने कहा, ‘‘राघव या जया भाभी ने तो प्रत्यक्ष में ऐसा कुछ नहीं कहा. मनु ने तुझ से अकेले में कभी ऐसा कुछ कहा पूर्णिमा?’’

पूर्णिमा ने इनकार में सिर हिलाया.

‘‘आप ठीक कह रहे हैं, गलतफहमी तो हमें ही हुई है. सैंडी को भी तो हम सब लड़का समझते रहे,’’ लता बुझे स्वर में बोलीं, ‘‘लेकिन अब क्या करें?’’

‘‘राघव के परिवार के साथ सामान्य व्यवहार और पूर्णिमा के लिए रिश्ते की बात,’’ महेश का स्वर नर्म होते हुए भी आदेशात्मक था.

पूर्णिमा सिहर उठी, ‘‘नहीं पापा…मेरा मतलब है बातवात मत करिए. मैं शादी नहीं करना चाहती.’’

‘‘साफ कह मनु के अलावा किसी और से नहीं और उस का अब सवाल ही नहीं उठता. मुझे तो लगता है कि न तो राघव और जया भाभी ने तुझे कभी अपनी बहू के रूप में देखा और न ही मनु ने भी तुझे एक हमजोली से ज्यादा कुछ समझा. क्यों लता गलत कह रहा हूं?’’

‘‘अब तो यही लगता है. मनु की असलियत तो पूर्णिमा को ही पता होगी,’’ लता बोलीं.

पूर्णिमा चिढ़ गई, ‘‘या तो हंसीमजाक करता है या फिर अपने काम से जुड़ी बातें. इस के अलावा और कोई बात नहीं करता है.’’

‘‘कभी यह नहीं बताया कि वहां जा कर उस ने तुझे कितना याद किया?’’

‘‘कभी नहीं, अगर ऐसा लगाव होता तो संपर्क ही क्यों टूटता? मनु वहां जा कर जरूर सब से अलगथलग रहा होगा, क्योंकि जितनी अंगरेजी उसे आती थी उस से न उसे किसी की बात समझ आती होगी न किसी को उस की. सैंडी को भी अमेरिकन चालू लड़कों से यह बेहतर लगा होगा, इसलिए दोस्ती कर ली,’’ पूर्णिमा कुछ सोचते हुए बोली.

‘‘यह तो तूने बड़ी समझदारी की बात कही पूर्णिमा,’’ महेश ने कहा, ‘‘अब थोड़ी समझदारी और दिखा. डा. शशिकांत की तुझ में दिलचस्पी किसी से छिपी नहीं है, लेकिन तू उन्हें घास नहीं डालती. हालात को देखते हुए मनु नाम की मृगमरीचिका के पीछे भागना छोड़ कर डा. शशिकांत से मेलजोल बढ़ा ताकि हम भी राघव और जया भाभी को यह कह कर सरप्राइज दे सकें कि हम ने तो पूर्णिमा के लिए बहुत पहले से लड़का देख रखा है, बस किसी को बताया नहीं है. अब आप की बहू आ जाए तो रिश्ता पक्का होने की रस्म पूरी कर दें.’’

‘‘हां, यह होगा नहले पे दहला पापा,’’ पूर्णिमा के मुंह से निकला.

Valentine’s Special: कोई अपना- शालिनी के जीवन में भी कोई बहार आने को थी

मोहब्बत से नफरत

धर्म के नाम पर प्रेम का गला किस तरह घोंटा जा रहा है, उस का एक एक्जांपल दिल्ली के पास नोएड़ा में मिला. एक युवती की दोस्ती जिम मालिक से हुई और दोनों में प्रेम पनपने लगा. लडक़ी की शिकायत है कि उस ने अपना नाम ऐसा बताया जिस से धर्म का पता नहीं चलता था पर वह सच बोल रही है, यह मुश्किल है. जिस से प्रेम होता है उस की बहुत सी बातें पता चल जाती हैं खासतौर पर जब उस के घर तक जाना हो जाए.

अगर युवतियां इतनी अंधी हों कि जिस के फ्लैट में अकेले जा रही हैं, उस का आगापीछा उन्हें नहीं मालूम, तो उस से कोई हमदर्दी नहीं होनी चाहिए. इस मामले में युवती ने बाद में जबरन धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश और शादी का झांसा दे कर रेप करने का चार्ज लगा कर लडक़े को गिरफ्तार करा दिया. पूरा मामला संदेह के घेरे में लगता है. यह तो हो ही सकता है कि जब लडक़ी के घरवालों को पता चले कि लडक़ा पैसे वाला जिम मालिक है पर मुसलमान है तो उन्हें विरादरी से आपत्तियां मिलने लगें. जिस तरह का हिंदूमुसलिम माहौल आज बना दिया गया है, उस से लडक़ेलड़कियों को चाहे फर्क नहीं पड़ता लेकिन उन दोनों के रिश्तेदारों को अवश्य पड़ता है.

आजकल कानून भी ऐसे बना दिए गए हैं कि हिंदूमुसलिम की शादी, जो सिर्फ स्पैशल मैरिज एक्ट में हो सकती है, में मजिस्ट्रेट ही हजार औब्जैक्शन लगा देता है. लडक़ेलडक़ी को कई अवसरों में नो औब्जैक्शन सर्टिफिकेट लाने पड़ेंगे जो बिना परिवार की सहायता से मिलने असंभव हैं. उत्तर प्रदेश तो हिंदूमुसलिम विवाह पर बहुत ही नाकभौं चढ़ाता है. मुसलिम मौलवी भी इस तरह की शादी नहीं चाहते क्योंकि वे भी चाहते हैं कि शादी में उन का कमीशन बना रहे. नए युवा समाज, परिवार व कानून के दबाव को नहीं झेल पाते. दोनों के रिश्तेदारों को धमकियां दी जाने लगती हैं. पुलिस दोनों तरफ के रिश्तेदारों को गिरफ्तार करने की बात करने लगती है. बुलडोजर तो है ही जो शादी के सपनों को कैसे ही एक झपट्टे में तोड़ सकता है.
प्रेम हिंदूमुसलिम दोनों के धर्मों के ठेकेदारों को नहीं भाता. वे चाहते हैं कि शादियां तो धर्म के बिचौलियों से ही तय हों ताकि जिंदगीभर उन्हें घर से कुछ न कुछ मिलता रहे. स्पैशल मैरिज एक्ट में हुई शादी के बच्चों का कोई धर्म नहीं रह जाता है और यह धर्म को कैसे मंजूर होगा. इसलिए वे प्रेम ही नहीं चाहते और शादी पर धर्मांतरण का शिगूफा छेड़ देते हैं.

Mirzapur के एक्टर शाहनवाज का हार्ट अटैक से निधन, शो में बने थे ‘गुड्डू भैया’ के ससुर

बॉलीवुड फिल्मों और टीवी सीरियल्स में काम कर चुके एक्टर शाहनवाज प्रधान अब इस दुनिया में नहीं रहे. महज 56 साल की उम्र में हार्ट अटैक से उनकी जान चली गई. उन्होंने ‘मिर्जापुर’ वेब सीरीज में ‘गुड्डू भैया’ (अली फजल) के ससुर का दमदार किरदार निभाया था. बताया जा रहा है कि वो किसी फंक्शन में थे और वहीं पर उनके सीने में तेज दर्द उठा और वो बेहोश होकर गिर पड़े. उन्हें आनन-फानन में हॉस्पिटल लाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी.

 

शाहनवाज को स्ट्रेचर पर हॉस्पिटल लाया गया था

जिस समय Shahnawaz Pradhan को स्ट्रेचर पर हॉस्पिटल लेकर जाया गया, उसी समय वहां पर टीवी एक्ट्रेस सुरभि तिवारी भी मौजूद थीं. वो अपने भाई के इलाज के लिए वहां पर थीं. उन्होंने नवभारत टाइम्स से बताया, ‘मेरा भाई कल शिवरात्रि के लिए कुछ सामान खरीदने गया था. उसका फोन आया कि उसका एक्सीडेंट हो गया है, इसलिए जल्दी आओ. मैं और मम्मी तुरंत हॉस्पिटल (कोकिलाबेन धीरुभाई अंबानी) पहुंचे. वहां पर मेरे भाई के शोल्डर का एक्सरे होना था. उसमें टाइम लग रहा था। इतने में मैंने देखा कि स्ट्रेचर पर शाहनवाज प्रधान जी को लाया गया. उसमें से मेरे एक या दो ही जानकार लोग थे. उन्हें तुरंत अंदर लेकर गए. मेरे भाई और शाहनवाज जी का बेड एकदम अपोजिट था. बीच में थोड़ा-सा ही पार्टिशन था, इसलिए मैं सारी बात सुन पा रही थी.’

 

कुछ महीने पहले ही हुई थी बाई पास सर्जरी

सुरभि तिवारी ने आगे कहा, ‘डॉक्टर बोल रहे थे कि उनका (शाहनवाज प्रधान) पल्स नहीं मिल रहा है. उनका हार्ट बिल्कुल काम नहीं कर रहा है. फिर उनको अंदर लेकर गए बोला कि हम उनको रिवाइव करने की कोशिश कर रहे हैं. हम देखते हैं कि क्या कर सकते हैं. डॉक्टर ने पूछा कि आप लोग कहां थे? किसी ने बताया कि वो किसी फंक्शन में थे, जहां पर उनको कोलैप्स हुआ. बाद में मैंने पूछा कि कैसे हो गया ये? तो बताया कि उनको हार्ट अटैक आया था. थोड़े महीने पहले उनका बाई पास सर्जरी हुआ था.’ बता दें कि सुरभि तिवारी ने शाहनवाज प्रधान के साथ 2-3 टीवी शोज में साथ काम किया था. उन्होंने बताया कि वो बहुत अच्छे इंसान थे. वो मैसेज करते रहते थे. बताया जा रहा है कि उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार आज (18 फरवरी) होगा.

 

सेलेब्स ने कहा- भाई आखिरी सलाम

शाहनवाज के निधन की खबर सुनकर फिल्म जगत में शोक की लहर है. फेमस एक्टर राजेश तैलंग, जोकि खुद ‘मिर्जापुर’ में अहम किरदार निभा चुके हैं, उन्होंने सोशल मीडिया पर दुख जताते हुए लिखा, ‘शाहनवाज भाई आखिरी सलाम!!! क्या गजब के जहीन इंसान और कितने बेहतर अदाकार थे आप. मिर्जापुर के दौरान कितना सुंदर वक्त गुजरा आपके साथ, यकीन नहीं हो रहा.’

तारक मेहता में हुई नये टप्पू की एंट्री,भड़के दर्शक बोलें- ‘बंद करो इसे’

टीवी सीरियल तारक मेहता का उल्टा चश्मा लगातार किसी न किसी वजह से चर्चा में बना हुआ है. इस सीरियल को टेलीकास्ट होते हुए 14 साल हो गए हैं और इतने समय में इस सीरियल को कई कलाकारों ने अलविदा कह दिया है. एक्टर राज अनादकट (Raj Anadkat) सीरियल में टप्पू का किरदार निभा रहे थे, जो शो को छोड़कर जा चुके हैं और अब तारक मेहता का उल्टा चश्मा में नए टप्पू के रूप में एक्टर नीतीश भलूनी (Nitish Bhaluni) की एंट्री हुई है. कुछ समय पहले ही शो के मेकर्स ने नीतीश की ऑफिशियल एंट्री का ऐलान किया, जिसके बाद से ही सोशल मीडिया पर इस सीरियल के मेकर्स ट्रोल हो रहे हैं.

 

 

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ट्रोल हुए मेकर्स

दरअसल, तारक मेहता का उल्टा चश्मा (Tarak Mehta Ka Ooltah Chashmah) को साल 2017 में दिशा वकानी ने अलविदा कहा था, जिसके बाद इस सीरियल को कई पॉपुलर चेहरों ने टाटा बाय बाय कह दिया है. एक समय पर फैंस तक कलाकारों के जाने पर सवाल उठाने लगे थे और इन सब चीजों के बीच राज अनादकट ने भी शो को छोड़ने का फैसला लिया, जिस वजह से दर्शकों का कहना है कि अब तारक मेहता का उल्टा चश्मा को बंद कर देना चाहिए. सोशल मीडिया पर एक यूजर ने लिखा, ‘कैरेक्टर इतने बदल रहे हैं. शो ही बदल दो यार.’ दूसरे ने लिखा, ‘अरे बंद कर बंद कर शो.’ इसी तरह एक और यूजर ने लिखा, ‘अब कुछ नहीं बचा शो में. बस जेठालाल की वजह से ही टिका हुआ है.’ वहीं, कुछ यूजर्स का यह भी कहना है कि सीरियल कचरा कर दिया.

 

कौन हैं नीतीश भलूनी?

बता दें कि 25 साल के नीतीश भलूनी ने कुछ समय पहले ही एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा है. वह मेरी डोली मेरे अंगना में नजर आए थे. इसके अलावा, उन्होंने पंकज त्रिपाठी की वेब सीरीज क्रिमिनल जस्टिस में भी काम किया है. वह सीरीज के कुछ एपिसोड में थे.

शो में जल्द लौटेगी दयाबेन

इसके आगे असित मोदी ने कहा कि अब उनका एक पारिवारिक जीवन है और वो अपने पारिवारिक जीवन को प्राथमिकता दे रही हैं. इसी वजह से उनका आना मुश्किल लग रहा है। लेकिन अब टप्पू आ गया है. तो अब नई दया भाभी भी जल्दी आएगी. दया भाभी का वही गरबा, डांडिया, सब गोकुलधाम सोसाइटी में शुरू होगा. थोड़ा समय इंतजार कीजिए. दया भाभी के किरदार के लिए कलाकार को ढूंढना भी एक मुश्किल काम है और हमें रोज एपिसोड भी बनाना होता है. इसी वजह से इस पर काम इतना धीरे चल रहा है. लेकिन मैं दर्शकों की मांग को समझता हूं कि दया भाभी को मिस कर रहा हैं. मैं और मेरा परिवार भी मिस करता है. अभी ज्यादा देर नहीं हुई है. अब दया भाभी जल्दी दिखेंगी। बता दें कि दिशा वकानी ने साल 2017 में इस सीरियल को अलविदा कहा था, जिसके बाद से ही वह अपनी निजी जिदंगी में बिजी हैं. एक्ट्रेस दो बच्चों की मां बन गई हैं.

सर्दी में रूखी फेस स्किन की देखभाल

दे खते ही देखते मौसम करवट बदलने लगा है. कड़ाके की ठंड पड़ रही है. बदलाव का यह मौसम हमें सुकून तो देता है पर साथ ही यह चेतावनी भी देता है कि सर्दी में अपनी फेस स्किन की देखभाल करते रहना जरूरी है सर्दी में भी आप का चेहरा रूखेपन का एहसास करा देगा.

घबराने की कोई बात नहीं है. अब बाजार में कई तरह की प्रसाधन सामग्रियां आसानी से मिल जाती हैं जो आप की फेस स्किन के रूखेपन को दूर कर देंगी पर अगर कोरोना के चलते आप बाजार की खाक नहीं छानना चाहती हैं तो घर पर भी कुछ चीजों के इस्तेमाल से अपने फेस की बिगड़ती स्किन को बेहतर बना सकती हैं.

इस बारे में डाइटीशियन और मेकअप आर्टिस्ट नेहा सागर ने बताया, ‘‘हर तरह की फेस स्किन के लिए महिलाएं घर में ही काम आने वाली कई चीजों से फेसमास्क बना सकती हैं.

‘‘अगर आप की औयली स्किन है तो बेसन, हलदी, दही, मुलतानी मिट्टी, टमाटर, खीरा, गुलाबजल और नीबू जैसी चीजों को फेसपैक बनाने के लिए यूज कर सकती हैं.

‘‘मुलतानी मिट्टी या बेसन (1 टेबल स्पून) में कुछ भी सामग्री मिला कर हफ्ते में 2-3 बार लगा सकती हैं. हफ्ते में 2-3 बार एक टमाटर की स्लाइस को फेस पर रब कर के और सूखने पर उसे नौर्मल पानी से धो लें.

‘‘अगर आप की नौर्मल और कौम्बिनेशन स्किन है तो चंदन पाउडर, कच्चा दूध, चावल का आटा, बेसन, गुलाबजल, खीरे के रस या नीबू और दही का इस्तेमाल किया जा सकता है.

‘‘चावल के आटे में बेसन के साथ दूध, दही या गुलाबजल मिला कर हफ्ते में 3-4 बार इस्तेमाल कर सकती हैं.’’

सर्दी आतेआते फेस स्किन सूखी होने लगती है और जिन की स्किन हमेशा सूखी रहती है उन्हें और भी ज्यादा दिक्कत होती है.

ड्राई स्किन के बारे में नेहा सागर ने बताया, ‘‘सूखी फेस स्किन के लिए सब से अच्छा औप्शन शहद होता है. 1-2 टेबल स्पून गुलाबजल, एक टेबल स्पून शहद और 2-3 बूंदें नीबू के रस की (अगर चाहें तो) मिला कर रोजाना 15 मिनट के लिए लगाएं. इस से चेहरे पर चमक आती है और शहद सूखी त्वचा को न्यूट्रिशन देता है.

‘‘इस के अलावा दही में एक चुटकी हलदी मिला कर रोजाना चेहरे पर लगा सकती हैं और बाद में चेहरे को साफ करने के लिए फेसवाश या क्लींजर इस्तेमाल करें या नौर्मल दूध भी यूज कर सकती हैं. इस के अलावा बादाम को दरदरा पीस कर घर में ही स्क्रब बना सकती हैं.

‘‘जिन महिलाओं की सैंसिटिव स्किन होती है उन्हें अपना खास खयाल रखना चाहिए, क्योंकि उन पर बहुत कम चीजें सूट करती हैं. उन्हें भीगे हुए चावल के पानी को टोनर की तरह इस्तेमाल करना चाहिए या चावल के पानी में मुलतानी मिट्टी और चंदन पाउडर मिला कर हफ्ते में 2 बार लगाया जा सकता है.

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