सैक्स पर चर्चा: वर्जित क्यों

महानगर में रहने वाली अधेड़ मानसी मध्यवर्गीय गृहिणी है. अपने फक्कड़ प्रोफैसर पति की सीमित आमदनी से उस की और घर की जरूरतें तो जैसेतैसे पूरी हो जाती हैं, लेकिन इच्छाएं और शौक पूरे नहीं होते. पैसों की तंगी अकसर इतनी रहती है कि वह अपनी 8 वर्षीय बेटी के स्कूली जूते भी फटने पर तुरंत नहीं खरीद पाती. इस के बाद भी उसे अपने सीधेसादे पति से कोई शिकवाशिकायत नहीं.

मगर मन में जो असंतुष्टियां पनप रही थीं वे उस वक्त उजागर होती हैं जब अपनी एक परिचित के जरीए वह पैसा कमाने की गरज से शौकिया देह व्यापार करने लगती है. सोचने में यह बेहद अटपटी सी बात लगती है कि सिंदूर से लंबी सी मांग भरने वाली एक भारतीय नारी यह तथाकथित गंदगी भरा रास्ता पैसा कमाने के लिए चुनेगी. वह भी खासतौर से 90 के दशक में जब सामाजिक खुलापन, उदारता या आजादी आज के मुकाबले 25 साल पिछड़े ही थे.

1997 में मशहूर निर्मातानिर्देशक बासु भट्टाचार्य ने एक ऐसी बात ‘आस्था’ फिल्म के जरीए कहने का जोखिम उठाया था जिसे उम्मीद के मुताबिक दर्शकों ने पसंद नहीं किया था, लेकिन कोई बात तो थी ‘आस्था’ में जो लोग उसे एकदम खारिज भी नहीं कर पाए थे और न ही असहमत हो पाए थे.

मानसी की भूमिका में रेखा ने जितनी गजब की ऐक्टिंग की थी उतनी ही अमर के रोल में ओम पुरी ने भी की थी. अभावों से जू?ाते मिडल क्लास पतिपत्नी के तमाम तरह के द्वंद्व उजागर करती इस फिल्म की एक अहम बात सैक्स उन्मुक्तता भी थी. मिस्टर दत्त के रोल में नवीन निश्छल थे जो मानसी के ग्राहक हैं. उन से मानसी की आर्थिक जरूरतें तो पूरी होने लगती हैं, लेकिन हैरतअंगेज तरीके से सैक्स संबंधी जरूरतें कई जिज्ञासाओं के साथ सिर उठाने लगती हैं. असल में दत्त सैक्स के मामले में काफी प्रयोगवादी और सब्र वाला मर्द है. वह मानसी पर भूखे भेडि़ए की तरह टूटता या ?ापटता नहीं है बल्कि बेहद कलात्मक ढंग से सैक्स करता है.

सैक्स पर चुप्पी क्यों

दत्त मानसी को नख से ले कर शिख तक चूमता है, उसे इत्मीनान से उत्तेजित करता है तो सैक्स सुख के समंदर में गोते लगाती मानसी को एहसास होता है कि इस मामले में अमर परंपरावादी और अनाड़ी है. लिहाजा वह दत्त से जो सीखती है उसे अमर पर आजमाने लगती है, जिसे इस तरह के लंबे फोर प्ले वाले सैक्स का कोई खास तजरबा नहीं है. लिहाजा आनंद के क्षणों में वह पत्नी से निहायत भोलेपन और मासूमियत से पूछ बैठता है कि तुम ने ये सब कहां से सीखा. मानसी इस सवाल को टाल जाती है और फिल्म इसी तरह आगे बढ़ती रहती है.

तब फिल्म समीक्षक और बुद्धिजीवी दर्शक यह तय नहीं कर पाए थे कि आखिर इस फिल्म के जरीए बासु भट्टाचार्य असल में कहना या बताना क्या चाह रहे हैं. एक पत्नी की सैक्स सीमाएं और दबी असंतुष्टि या एक गृहिणी का पार्टटाइम कौलगर्ल बन जाना. मुमकिन है ये दोनों ही बातें रही हों, लेकिन यह पहली फिल्म थी जिस में यह प्रमुखता से बताया गया कि एक पत्नी की भी सैक्स संबंधी अपनी चौइस और इच्छाएं होती हैं जो अकसर अव्यक्त रह जाती हैं. इस की अपनी पारिवारिक और सामाजिक वजहें भी हैं जो आखिरकर साबित यह करती हैं कि औरत सैक्स के मामले में भी शोषित और पुरुष पर निर्भर है.

समाज में गुनाह है

दौर कहने को ही नारी सशक्तीकरण का नहीं है बल्कि इस दिशा में बीते सालों में थोड़ा कुछ हुआ भी है. महिलाओं को अधिकार मिले हैं. मिले क्या हैं उन्होंने अपने दम पर हासिल किए हैं, वे अपने पैरों पर खड़ी हुई हैं, जायदाद और अपनी अलग पहचान भी बना रही हैं, अपने फैसले भी खुद ले रही हैं, लेकिन ये सब आधाअधूरा और एक वर्ग विशेष तक सीमित है जिस में सैक्स की चर्चा तक नहीं होती गोया कि वर्जनाओं से भरे समाज में यह अभी भी गुनाह है.

भोपाल की 55 वर्षीय एक सरकारी अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर बताती हैं कि उन की शादी को 28 साल हो गए हैं. अब तो बेटी की भी शादी होने वाली है, लेकिन इन सालों में वे कभी पति को खुल कर अपनी सैक्स इच्छाएं नहीं बता पाईं कि उन्हें किस तरह से सैक्स पसंद है और आनंद देता है.

इन साहिबा को पति से कोई शिकायत नहीं है जो इन्हें बहुत चाहते हैं पर सैक्स के मामले में कुछ ऐसा हुआ कि अकसर सबकुछ पति की मरजी से हुआ और आज भी यही हालत है. ?ि?ाक की मारी औरत तो क्या इन की हालत मानसी जैसी है? तो कहा जा सकता है कि कम से कम पैसों के मामले में तो नहीं है, लेकिन इन्हें बिना किसी बाहरी जानकारी या दखल के यह एहसास तो है कि जिंदगी भले अच्छीखासी गुजरी पर कहीं एक अधूरापन रह गया जिसे पूरा करने के लिए न तो इन्होंने पहल की और न ही पति ने जरूरत महसूसी. इन्हें इस बात का डर था कि अगर सैक्स संबंधी इच्छा जताई तो पति इसे अन्यथा ले सकता है और शक भी कर सकता है.

वह अमर की तरह सहज भाव से नहीं पूछेगा कि ये सब कहां से सीखा बल्कि ताना मार सकता है कि तुम तो बिना मेरे बताए बहुत ऐक्सपर्ट हो गई हो. कोई भी पत्नी अपने वैवाहिक जीवन में इस तरह की कटुता नहीं चाहती इसलिए मशीनी ढंग के सैक्स का शिकार होती रहती है जिसे कहने वाले ड्यूटी सैक्स भी कहते हैं. इसे आनंददायक कहने की कोई वजह नहीं.

समाज की ज्यादती का शिकार तय है ऐसी लगभग 90% महिलाएं रूढि़वादी और सैक्स के मामले में भी पूर्वाग्रही समाज की ज्यादती का शिकार हैं जो महिलाओं को सैक्स संतुष्टि का उन का हक नहीं देता ठीक वैसे ही जैसे कभी शादी, तलाक, जायदाद और वोटिंग तक का नहीं देता था. सैक्स संतुष्टि पर कभी खुल कर बात न होने देना पुरुषों के दबदबे वाले समाज का एक और उदाहरण और मनमानी रही है जो सशक्तीकरण के फैशन और अनुष्ठान से कतई मेल नहीं खाती.

अधिकांश पुरुष भी सैक्स पोर्न फिल्मों से सीखते हैं जिन का सार यह होता है कि महिला आक्रामक और ताबड़तोड़ सैक्स से संतुष्ट होती है इस गलत धारणा का किसी मंच से कोई खंडन आज तक नहीं हुआ.

धर्म की तरह सैक्स भी निहायत जाति मसला है, फर्क इतना है कि धर्म का विस्तार किसी सुबूत का मुहताज नहीं लेकिन सैक्स का सिकुड़ापन कभी विस्तार ले पाएगा ऐसा लगता नहीं. कोई महिला अगर इस बाबत खुल कर बात करेगी तो उसे बिना किसी लिहाज के चालू, बेशर्म और चरित्रहीन तक करार दिया जा सकता है, जबकि दूसरे मामलों पर बोलने में पुरुषों के पास सिवा खामोश रह जाने या सम?ाता कर लेने के कोई और रास्ता नहीं रह जाता. सैक्स पर हल्ले का मकसद सच यह भी है कि तरक्की और अधुनिकता के तमाम दावों के बाद भी परिवारों और समाज में सैक्स पर चर्चा वर्जित है और अगर कोई लीक से हट कर कायदे की या नई पीढ़ी के लिए शिक्षाप्रद बात करता भी है तो उसे समाज संस्कृति और धर्म का दुश्मन घोषित करते हुए लोग उस पर मधुमक्खियों की तरह टूट पड़ते हैं.

इस की ताजी मिसाल सांसद और अपने दौर की कामयाब अभिनेत्री जया बच्चन हैं जिन्होंने एक शो के जरीए अपनी नातिन नव्या नवेली नंदा से यह कहा कि मु?ो कोई समस्या नहीं है अगर तुम्हारे बच्चे बिना शादी के हों. इतना कहना भर था कि भक्तों की नजर में वे धर्म और संस्कृति को नष्टभ्रष्ट करने वाली हो गईं.

सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियोज की बाढ़ आ गई जिन में उन्हें पानी पीपी कर कोसा गया. ये सनातनी लोग कुंती और कर्ण जैसे दर्जनों पौराणिक किस्से और उदाहरण भूल गए जिन में कुंआरी मां बनना आम बात थी. यही बात महिलाओं की सैक्स इच्छाओं पर लागू होती है जिस के तहत उन का अपनी इच्छा जताना एक तरह की घोषित निर्लज्जता है. उन्हें बचपन से ही सिखा दिया जाता है कि सैक्स बुरी बात है और पति के अलावा किसी और से सैक्स करना तो और भी बुरी बात है. यह भी मान लिया गया है कि सैक्स की पहल करना और उस के तरीके तय करना मर्दों की जिम्मेदारी है, फिर चाहे महिला इस से संतुष्ट हो या न हो पर संतुष्टि प्रदर्शित करना ही उस का धर्म है

बराबरी की बात और दर्जा सशक्तीकरण का अहम हिस्सा है, लेकिन सैक्स में इस का न मिलना महिलाओं के पिछड़ेपन की बड़ी वजह है जिस के चलते उन में अपेक्षित आत्मविश्वास नहीं आ पाता. नए कपल्स एक हद तक इस का अपवाद कहे जा सकते हैं, लेकिन उन की संख्या अभी इतनी नहीं है कि किसी क्रांति का जनक उसे कहा जा सके.

घर पर बनाए बेकरी जैसा केक

केक जिसे हम घर पर असान तरीकों से बना सकते है. तो रेडी है कुछ केक की लिस्ट जिसे घर वालों के साथ बनाएं और खाएं भी. 

1- एप्पल  सिनेमन केक

सामग्री

–  3 अंडे

– 3/4 कप चीनी

–  1 छोटा चम्मच वनीला एसेंस

–  1/3 कप मैदा

– 1 छोटा चम्मच बेकिंग पाउडर

– 1 छोटा चम्मच दालचीनी

–  2 सेब

–  1/2 कप बटर

– चुटकी भर नमक.

बनाने की विधि

सबसे पहले अंडे में चीनी मिलाकर उसे फेंटें.

अब इसमें वनीला एसेंस को मिलाएं.

फिर इसमें बटर डालकर मिलाएं.

अब एक अन्य बाउल में मैदा, बेकिंग पाउडर, दालचीनी पाउडर और नमक को डालकर अच्छे से मिक्स करें.

अब मैदा के मिश्रण को अंडे के मिश्रण में मिक्स करें. फिर बैटर में कटे हुए सेब डालें.

अब इस बैटर को फ्रेशरैप एल्युमीनियम बेकिंग फोइल पर डालकर 9-10 इंच के टिन में डालें.

फिर इसे 200 डिग्री सेल्सियस पर पहले से गरम ओवन में सुनहरा होने तक लगभग 40 मिनट तक बेक करें.

फिर इसमें टूथपिक डालकर चेक करें कि केक अच्छे से बेक हुआ है या नहीं. अगर टूथपिक साफ बाहर निकले तो सम?ा जाए कि केक बनकर तैयार है. फिर आप इसे अपने के सामने सर्व कर सकते हैं. (फ्रेशरैप इंटरनेशनल एक्स्ट्रा स्ट्रांग प्रीमियम एल्युमीनियम फॉयल साधारण फॉयल की तुलना में 70 प्रतिशत मोटी है और बेकिंग के लिए उपयुक्त है. इससे केक को सही तरह से बेक करने में मदद मिलती है. साथ ही इस एल्युमीनियम फॉयल को बीआईएस की मान्यता प्राप्त है इसलिए यह इस्तेमाल के लिए सुरक्षित भी है. तो इस क्रिसमस अपना मनपसंद केक बेक करने के लिए फ्रेशरैप इंटरनेशनल एक्स्ट्रा स्ट्रांग प्रीमियम एल्युमीनियम फॉयल का इस्तेमाल करें.)

2- बनाना केक

सामग्री

-1 कप मैदा द्य 1 छोटा चम्मच बेकिंग पाउडर

-1 छोटा चम्मच बेकिंग सोडा द्य 1 बड़ा चम्मच कौर्नफ्लोर द्य 1 बड़ा चम्मच मिल्क पाउडर

-1/4 कप बटर द्य 1 मैश किया केला

-100 ग्राम कंडैंस्ड मिल्क द्य थोड़े से अखरोट

– नमक स्वादानुसार.

विधि

केले को मैश कर लें. उस के बाद मैदा, बेकिंग पाउडर, बेकिंग सोडा, कौर्नफ्लोर, मिल्क पाउडर और नमक को छान लें. इस के बाद उस में केला और कंडैंस्ड मिल्क को मिलाएं. अब बैटर को ग्रीस किए पैन में डाल कर पहले से गरम ओवन में 40 मिनट तक बेक करें. जब यह अच्छी तरह बेक हो जाए तो इसे थोड़ा ठंडा कर सर्व करें.

3- चौकलेट केक

सामग्री

-1 कप मैदा

-1/2 कप कोको पाउडर

– 1 कप योगर्ट

-3/4 कप कैस्टर शुगर

-1/2 छोटा चम्मच बेकिंग सोडा

– 1/2 छोटा चम्मच बेकिंग पाउडर

– 1/2 कप औयल

-1 छोटा चम्मच वैनिला ऐक्सट्रैक्ट.

विधि

ओवन को 200 डिग्री सैल्सियस पर प्रीहीट करें. फिर 8 इंच के टिन को बटर से ग्रीस करें. फिर मैदा और कोको पाउडर को छान लें. इस के बाद योगर्ट, शुगर और वैनिला को डाल कर अच्छी तरह फेंटें. फिर इस में बेकिंग सोडा और बेकिंग पाउडर डाल कर अच्छी तरह मिक्स करें. अब इस में औयल और मैदे का मिक्स्चर ऐड करें. फिर इसे बेकिंग डिश में डाल कर पहले से गरम ओवन में 40 मिनट तक बेक करें. जब केक पक जाए तो इसे 15 मिनट के लिए ठंडा होने के लिए एक तरफ रख दें. फिर सर्व करें.

4- कौफी केक

सामग्री

–  200 ग्राम मैदा

–  1 छोटा चम्मच बेकिंग पाउडर

–  2 छोटे चम्मच कौफी पाउडर

–   4 अंडे

–  200 ग्राम बटर

–  200 ग्राम शुगर

–   2 छोटे चम्मच मिल्क

–   स्वादानुसार.

विधि

ओवन को 160 डिग्री सैल्सियस पर प्रीहीट करें. फिर सारी सामग्री को एक बाउल में मिक्स करें. फिर इसे बटर बेकिंग टिन में डाल कर 40 मिनट तक बेक कर सर्व करें.

5- लैमन केक

सामग्री

– 3 लैमन द्य 180 ग्राम मैदा

–  150 ग्राम शुगर

– 2 अंडे द्य 1 छोटा चम्मच बेकिंग पाउडर

–  125 ग्राम बटर

–  60 मिलीलीटर मिल्क.

विधि

ओवन को 180 डिग्री सैल्सियस पर प्रीहीट करें. फिर एक बाउल में बटर, शुगर और अंडे डाल कर अच्छी तरह फेंटें. फिर इस में लैमन जूस मिक्स करें. अब इस में सारे ड्राई इनग्रीडिऐंट्स मिला कर अच्छी तरह मिक्स करें.

फिर इसे बेकिंग पैन में डालें. अब इसे पहले से प्रीहीट ओवन में 45 मिनट तक बेक करें. जब यह बेक हो जाए तो इसे 5 मिनट तक ठंडा कर प्लेट में निकाल कर सर्व करें.

प्रीमैच्योर बेबी: मिथ्स और फैक्ट्स

वैश्विक स्तर पर पैदा होने वाले 15मिलियन बच्चों में से 1/5 भारत में जन्म लेते हैं और पूरी दुनिया में 5 साल से कम उम्र में बच्चों की मृत्यु का प्रमुख कारण समय से पहले पैदा होना है. इस में कोई संदेह नहीं है कि भारत में इन नवजातों की गहन चिकित्सा और देखभाल की काफी जरूरत है,जो हमारे देश में समय पर संभव नहीं होती.

‘प्रीमैच्योर चाइल्ड बर्थ ऐंड केयर वीक’ पर समय से पहले शिशुओं के जन्म के बारे में नवी मुंबई, कोकिलाबेन, धीरुभाई अंबानी हौस्पिटल की कंसलटैंट, औब्सटेरिक्स और गायनेकोलौजी डाक्टर बंदिता सिन्हा कहती है कि आम तौर पर गर्भावस्था का पूरा समय 40 हफ्तों का होता है, लेकिन कुछ मामलों में अचानक ऐसी जटिलताएं हो जाती हैं कि 37 हफ्तों की गर्भावस्था पूरी होने से पहले ही शिशु का जन्म हो जाता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस स्थिति को प्री टर्म या समय से पहले जन्म कहा है और इस की 3 उप श्रेणियां बताई हैं:

द्य अत्यधिक अपरिपक्व (28 हफ्तों से कम),

द्य बहुत अपरिपक्व (28 से 32 हफ्तों के बीच पैदा होने वाले शिशु),

द्य मध्यम से देर से अपरिपक्वता (32 से 37 हफ्तों के बीच पैदा होने वाले शिशु).

अगर शिशु गंभीर रूप से अस्वस्थ हो, तो पूरे परिवार के लिए बेहद तनावपूर्ण हो सकता है. इस समस्या के बारे में जानकारी या पूर्व अनुभव न होने की वजह से निओनेटल यूनिट में शिशु के मातापिता को बड़े संकट से गुजरने की भावना महसूस होती है. सी सैक्शन या सिजेरियन सैक्शन के जरीए कराए गए समय से पहले जन्म में, माताओं का जन्म के बाद पहले कुछ दिनों तक अपने नवजात शिशु के साथ बहुत कम या कोई संपर्क नहीं होता है.

इस से मातापिता पर तनाव और भी ज्यादा बढ़ जाता है. चिंता, डिप्रैशन, पोस्ट ट्रामैटिक स्ट्रैस डिसऔर्डर और कुल स्वास्थ्य पर असर पड़ने का खतरा रहता है. सिंगल साइट्स या अस्पतालों में किए गए अध्ययनों में पाया गया है कि यह गर्भावस्था पूरी होने के बहुत पहले जन्म पैदा होने वाले तनाव व लंबे समय तक बना रह सकती है.

मिथ ऐंड फैक्ट

मातापिता को अकसर यह लगता है कि प्रसव के पहले की देखभाल ठीक से न किए जाने की वजह से उन के शिशु का जन्म समय से पहले हुआ है.

फैक्ट

विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि समय से पहले होने वाली प्रसूतियों में लगभग आधी प्रसूतियों के कारण अज्ञात रह जाते हैं. करीब 30% मामलों में मैमब्रैंस का समय से पहले टूटना पीपीआरओएम कारण होता है, जबकि 15-20% मामलों में प्रीक्लैंपसिया, प्लेसैटल ऐब्रप्शन, गर्भाशय के भीतर विकास को प्रतिबंध आईयूजीआर और इलैक्टिव प्रीटर्म बर्थ आदि कारण होते हैं.

मिथ

समय से पहले पैदा हुए बच्चों का मातापिता के साथ जुड़ाव नहीं हो पाता है.

फैक्ट

शिशु के साथ जुड़ाव बनाने के कई तरीके हैं. एनआईसीयू दिनचर्या में शिशु के साथ जुड़ाव बनाने के नए रास्ते मातापिता को खोजने चाहिए. कंगारू केयर यानी त्वचा से त्वचा का संपर्क करें, डायपर बदलें, शिशु का टैंपरेचर जांचें और अगर संभव हो तो स्तनपान कराएं.

मिथ

2 साल की आयु तक शिशु अपने विकास के पड़ाव पार करेगा.

फैक्ट

भाषा विकास, संतुलन और समन्वय जैसे मोटर कौशल और फाइन मोटर कौशल मसलन पैंसिल पकड़ पाना, पजल के टुकड़े जोड़ना आदि विकसित होने में देरी हो सकती है. करीब 40% प्रीमैच्योर शिशुओं में मोटर कौशलों में जरा सी कमी देखी जा सकती है और माताओं को इन शिशुओं के साथ व्यवहार में कुछ कठिनाइयां महसूस हो सकती हैं.

योनि प्रसूति के फायदे

योनि प्रसूति होने से आप बड़ी सर्जरी या सी सैक्शन से जुड़े जोखिमों से बच जाती हैं जैसेकि गंभीर रक्तस्राव, निशान रह जाना, संक्रमण, ऐनेस्थीसिया के प्रभाव और सर्जरी के बाद का दर्द आदि.

द्य स्तनपान जल्दी शुरू हो जाता है.

द्य सांस की बीमारियों का खतरा कम रहता है.

द्य शरीर की रोग प्रतिरोध प्रणाली अच्छे से काम कर पाती है.

द्य स्तनपान कराने की अधिक प्रवृत्ति अधिक होती है हालांकि जब अनिवार्य हो तब सी सैक्शन की सलाह दी जाती है.

प्राथमिक सिजेरियन (सी सैक्शन) डिलिवरी के लिए सब से आम संकेत हैं:

द्य आईवीएफ प्रैगनैंसी.

द्य ऐल्डरली प्राइमिग्रेविडा.

द्प्रसवपीड़ा.

द्भ्रण की हृदयगति का पता न लगाना, फीटल मालप्रेजैंटेशन.

द्स्पैक्टेड मैक्रोसोमिया.

जुर्माना: क्या थी वजह

रविवारकी सुबह मेरी नींद मां व अंजु के ?ागड़ने की आवाजें सुन कर टूटी. मेरे छोटे भाई संजय की पत्नी से मां का अब लगभग पूरा दिन ?ागड़ा होता है. सिर्फ 1 साल के अंदर इन दोनों के संबंध बहुत खराब हो गए हैं. कुछ देर बाद मु?ो चाय का कप देते हुए मां ने रोआंसी आवाज में कहा, ‘‘समीर, मैं अंजु के साथ नहीं रह सकती हूं. तू शादी क्यों नहीं कर लेता. मैं तेरे घर में नौकरानी बन कर भी रहूंगी तो मु?ो यहां से ज्यादा इज्जत मिलेगी.’’ ‘तुम चुप रहोगी तो क्लेश नहीं होगा. तुम फालतू की बहस में उस के साथ क्यों उल?ाती हो?’’ उन के आंसुओं ने मु?ो दुखी किया तो मेरी आवाज में चिड़चिड़ाहट पैदा हो गई. ‘‘देख, सीमा अच्छी लड़की है. तू इस रिश्ते के लिए ‘हां’ कह दे,’’ मां ने आंखों में आंसू ला कर वार्त्तालाप को इच्छित दिशा में मोड़ दिया. ‘‘यों आंसू वहां कर मु?ा से जबरदस्ती हां कहलाने की कोशिश मत करो,’’ मैं चाय का कप लिए ही उठ कर बाथरूम में घुस गया.

जिस सीमा का रिश्ता मेरे लिए आया है, उस से मैं पिछले रविवार को अपनी बूआ के घर मिला था. वह अपने मम्मीपापा के साथ वहां आई थी. बूआ ने अगर मु?ो पहले बता दिया होता तो मैं शायद उन के यहां जाना ही टाल देता क्योंकि किसी लड़की से मैं उसे धोखे में रख शादी नहीं कर सकता था. बूआ की जिद के सामने मजबूर हो कर मैं ने सीमा से कुछ इधरउधर की बातें करने के बाद पूछा, ‘‘तुम ने अब तक शादी क्यों नहीं करी है?’’ मेरे इस सवाल को सुन उस ने गंभीर स्वर में मु?ो जानकारी दी, ‘‘मेरे बड़े भाई और मंगेतर की अब से 5 साल पहले सड़क हादसे में एकसाथ मौत हो गई थी. अब मेरे अलावा मम्मीपापा की देखभाल करने वाला और कोई नहीं है. मां का सूजा हुआ बांया घुटना तो अब बहुत तकलीफ देने लगा है.

‘‘अभी तक मैं ने शादी इसलिए नहीं करी है क्योंकि अपने मंगेतर से जुड़ी यादों के धूमिल होने में काफी वक्त लगा है. दूसरी बात यह कि अभी तक ऐसा कोई युवक नहीं मिला जो मेरे मातापिता की आजीवन देखभाल करने में मेरा हाथ बंटाने को खुशीखुशी राजी हो.’’

‘‘कोई न कोई ऐसा सम?ादार और संवेदनशील इंसान तुम्हें जरूर मिल जाएगा,’’ मैं ने उस का हौसला बढ़ाने को जवाब दिया.

‘‘मै ने भी उम्मीद नहीं छोड़ी है,’’ उस की मुसकराती आंखों में मु?ो जिंदगी के प्रति किसी तरह की कड़वाहट या शिकायत नजर नहीं आई.

‘‘तुम चाहो तो अपनी मम्मी को मेरे दोस्त रवि के पिताजी को दिखा सकती हो. वह बहुत अच्छे और जानेमाने और्थोपैडिक सर्जन हैं.’’ ‘क्या तुम उन के साथ हमारी मुलाकात का समय तय करा दोगे?’’

‘‘श्योर. मैं रवि से बात करने के बाद तुम्हें फोन करता हूं.’’

मेरी बात सुन कर वह धन्यवाद देने वाले अंदाज में मुसकराई और फिर उस ने अपना मोबाइल नंबर मु?ो नोट करा दिया.

मु?ो सीमा सम?ादार और आत्मविश्वास से भरी लड़की लगी. उस की इस बात ने मु?ो प्रभावित किया कि वह अपने मातापिता की देखभाल के सवाल को अनदेखा कर अपना घर नहीं बसाना चाहती. अब बूआ और मां इस रिश्ते के लिए हां कहने को मु?ा पर बहुत जोर डाल रहे थे. मु?ो शादी करनी नहीं थी पर फिर भी मैं इन दोनों को न नहीं कर पा रहा था. ‘‘मैं सोच कर जवाब देता हूं,’’ बारबार ऐसा बहाना बना कर मैं फिलहाल अपनी जान बचा रहा था. मैं तैयार हो कर घर से निकला तब सुबह के 10 बज रहे थे. कार से मैं सीधा महक से मिलने उस के घर पहुंचा. महक मेरे बचपन के दोस्त नीरज की पत्नी है. हम तीनों साथसाथ कालेज में पढ़ा करते थे. मैं ने जो अभी तक शादी नहीं करी है, उस का कारण महक है. मैं उस से प्रेम करता हूं और इसी कारण अब तक किसी अन्य लड़की को अपनी जीवनसंगिनी बनाने का कदम नहीं उठाया है. नीरज मु?ा से हाथ मिलाने के बाद नहाने के लिए बाथरूम में घुस गया. उन का बेटा मयंक टीवी पर कार्टून चैनल देख रहा था. मौके का फायदा उठा कर मैं ने रसोई में काम कर रही महक को अपनी बांहों में भर कर कहा, ‘‘बहुत दिन हो गए हैं तुम्हें जी भर कर प्यार किए हुए और कितने दिनों तक मु?ो प्यासा रखोगी, मेरी जान?’’

‘‘ज्यादा दिन नहीं,’’ उस ने बड़ी अदा से मेरे होंठों पर छोटा सा चुंबन अंकित कर खुद को मेरी बाहों के घेरे से आजाद कर लिया. ‘‘सच कह रही हो?’’

‘‘हां, नीरज 2 दिनों के लिए अपने चचेरे भाई की शादी में शामिल होने कानपुर जा रहे हैं.’’

‘‘कब?’’ ‘‘कल रात को.’’ ‘‘मैं 2 दिन की छुट्टी ले कर सारा समय तुम्हारे साथ यहीं गुजारूंगा,’’ खुशी के मारे मेरा मन नाच उठा. ‘ओके, पर फिलहाल ड्राइंगरूम में जा कर बैठो. नीरज को हमारे ऊपर कभी शक नहीं होना चाहिए,’’ उस ने मु?ो धकेल कर रसोई से बाहर कर दिया. कुछ देर बाद चाय पीते हुए उस ने ?ि?ाकते स्वर में मु?ा से कहा, ‘‘समीर, अगले सोमवार तक हमें 50 हजार रुपए चाहिए होंगे.’’ ‘‘वह किसलिए?’’ मैं ने चैंक कर पूछा. ‘‘मयंक का नए स्कूल में ऐडमिशन होना है. वे लोग डोनेशन मांग रहे हैं.’’ मैं जवाब देने में कुछ ?ि?ाका तो उस ने भावुक हो कर कहा, ‘‘तुम से रुपए मांगने में हमें शर्म आ रही है क्योंकि अभी तक हम ने पिछले 50 हजार ही नहीं लौटाए हैं.’’ नीरज ने मेरे कुछ कहने से पहले ही परेशान लहजे में कहा, ‘‘हम दोनों कमाते हैं पर फिर भी कुछ जुटा नहीं पाते है. छोटी बहन की शादी में लिया कर्जा उतरा नहीं था कि पिताजी के दिल का औपरेशन कराना पड़ा. तुम से 50 हजार रुपए न मिलते तो किसी और के सामने हाथ फैलाना पड़ता. अब मैं इसे कहता हूं कि किसी सस्ते स्कूल में मयंक का दाखिला करा दो, पर यह मानती नहीं है.’’ ‘‘अगर 50 हजार का इंतजाम नहीं हुआ तो करा देंगे उस का एडमिशन किसी घटिया स्कूल में,’’ महक रोआंसी सी हो उठ थी. ‘‘मैं कर देता हूं 50 हजार का इंतजाम. तुम दिल छोटा न करो, महक,’’ मेरी बात सुन कर उन दोनों के चेहरे खुशी से खिल उठे थे. ‘‘तुम्हारे ये सारे एहसान हम जिंदगीभर नहीं भूलेंगे,’’ नीरज बहुत भावुक हो उठा. ‘‘दोस्त हो कर ऐसी घटिया बात मुंह से मत निकालो,’’ मेरा यह उलाहना सुन नीरज ने उठ कर मु?ो अपने गले लगा लिया. महक की आंखों में अपने लिए प्यार के गहरे भाव देख कर मेरा दिल खुश हो गया. उस के दिल में अपने प्रति प्यार की जड़ें मजबूत रखने के लिए मु?ो फिर से उन्हें 50 हजार रुपए देना जरा भी नहीं खल रहा था.

रात मैं उत्तेजना के मारे ढंग से सो नहीं सका. कुछ समय बाद महक को मैं जीभर कर प्यार कर सकूंगा, इस विचार ने मेरी नींद को अनगिनत रंगीन व मादक सपनों से भर दिया. इंसान सोचता कुछ है और होता कुछ और है. महक ने अगले दिन शाम को मु?ो फोन पर जो खबर दी, उसे सुन कर मेरा दिमाग बुरी तरह से भन्ना गया.

‘‘नीरज जिद कर के मु?ो भी अपने साथ शादी में शामिल होने को ले जा रहे हैं. आई एम सौरी,’’ उस की आवाज में अफसोस के भाव साफ ?ालक रहे थे.

‘‘ऐसा मत करो, यार. तुम किसी भी तरह से अपना जाना टालो,’’ अपने रंगीन सपनों की दुनिया को उजड़ते देख मु?ो गुस्सा आ गया था.

‘‘मैं उन की जिद के सामने मजबूर हूं समीर, पर यह पक्का वादा करती हूं कि मैं वापस आते ही तुम से अकेले में मिलने की कोई न कोई तरकीब जरूर निकालूंगी.’’

‘‘मु?ो बहुत जोर से गुस्सा आ रहा है.’’

‘‘गुस्सा मत करो, स्वीटहार्ट. वापस आ कर मैं तुम्हें इतना प्यार करूंगी कि तुम्हारा दिल खुश हो जाएगा.’’

‘‘पक्की बात?’’

‘‘बिलकुल पक्की.’’

उस के इस आश्वासन ने मु?ो जरा सी भी खुशी नहीं दी थी. फोन रखने के बाद मेरा मन बहुत चिड़चिड़ा और अकेला सा हो गया. गुस्से में आ कर मैं ने उसे मन ही मन काफी भलाबुरा कहा.

मैं सारी रात ढंग से सो नहीं पाया. बारबार मन महक के खूबसूरत बदन की महक व स्पर्शसुख की मांग उठाता रहा. उस ने मेरी भावनाओं को आंदोलित करने के बाद मु?ो प्यासा छोड़ कर बिलकुल अच्छा नहीं किया. सुबह औफिस न जा कर मैं सिटी अस्पताल पहुंच गया. मु?ो यह याद था कि सीमा अपनी मम्मी का रवि के चाचाजी से चैकअप कराने के लिए मंगलवार की सुबह वहां आने वाली है. इस मुलाकात का समय मैं ने ही तय कराया था. मु?ो अचानक सामने देख कर सीमा और उस के मातापिता चौंक पड़े. मैं ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘सीमा, तुम्हें अब रुकने की जरूरत नहीं है. मैं यहां सब संभाल लूंगा. तुम्हारा क्लोजिंग टाइम चल रहा है, इसलिए तुम औफिस चली जाओ. कुछ नानुकुर करने के बाद सीमा औफिस चली गई. विदा लेते समय उस की आंखों में मेरे व्यवहार से उपजे अजीब सी उल?ान के भावों को पढ़ कर मैं मन ही मन हंस पड़ा रवि के चाचाजी ने सीमा की मम्मी को अच्छी तरह से देख कर कुछ दवाइयां लिख दीं. उन के मुंह से यह सुन कर कि घुटने के औपरेशन की जरूरत नहीं है, सीमा की मम्मी ने बहुत राहत महसूस करी. मैं ने उन दोनों को अपनी कार से उन के घर छोड़ा. मेरा धन्यवाद करते हुए उन की जबान थक नहीं रही थी. मैं घर लौटा तो पाया कि मां और अंजु के बीच तकरार चल रही है. मां ने मु?ा से अंजु की शिकायत करनी शुरू करी पर मैं उन के पास रुका नहीं.

‘‘सब जल्दी ही ठीक हो जाएगा,’’ बस इतना कह कर मैं अपने कमरे में जाने को सीढि़यां चढ़ने लगा. पलंग पर आराम करते हुए शाम तक मैं ने अपना घर बसाने का महत्त्वपूर्ण फैसला कर लिया. यह बात मु?ो सम?ा में आ गई थी कि अपनी जिंदगी में खुशियां भरने का सब से ज्यादा बड़ा उत्तरदायित्व खुद मेरा ही है. मैं अब ऐसा जीवनसाथी चाहता था जिस की जिंदगी में मैं सब से प्रमुख स्थान रखता हूं, जो मेरे सुख और खुशियों को सर्वोपरि माने और मेरे सुखदुख बांटने को हमेशा मेरे पास रहे. मैं समाज में उस के साथ सिर ऊंचा कर के जीना चाहता था.

‘शादीशुदा महक के प्यार में पागल हो कर मैं अपने भविष्य की खुशियां और सुरक्षा कभी सुनिश्चित नहीं कर सकता हूं. उस की जिंदगी में मैं नीरज के पीछे हमेशा नंबर 2 पर आऊंगा. उस का दिल दुखाने के ऐवज में मैं 50 हजार का जुरमाना भर दूंगा. उस के साथ जुड़े रह कर मु?ो अपना भविष्य बरबाद नहीं करना है,’ ऐसा फैसला करने के साथ ही मेरे मन का सारा बो?ा व कड़वाहट समाप्त हो गई. मैं शाम को सीमा से मिलने उस के औफिस के बाहर पहुंच गया. यह देख कर मु?ो खुशी हुई कि वह मु?ो देख कर खुश हुई. हम दोनों कौफी पीने के लिए एक रेस्तोरां में आ बैठे. ‘‘मैं तुम्हें एक खास बात बताने के लिए आया हूं,’’ मैं ने गंभीर लहजे में वार्त्तालाप शुरू किया. जवाब में उस ने मुंह से कुछ कहने के बजाय अपना पूरा ध्यान मेरे ऊपर केंद्रित कर लिया था. ‘‘मैं तुम्हारे मातापिता की देखभाल की जिम्मेदारी उठाने में तुम्हारा हाथ बंटाने को तैयार हूं,’’ मैं ने उसे अपना जीवनसाथी बनाने की इच्छा इन शब्दों में जाहिर कर दी.

‘‘क्या तुम मु?ा से शादी करने के इच्छुक हो?’’ उस ने चौंक कर पूछा. ‘हां, मैं यही इरादा मन में ले कर तुम से मिलने आया हूं.’’ ‘‘तुम्हारी बात सुन कर मु?ो हैरानी हुई है,’’ उस की आवाज में अचानक बेचैनी के भाव उभरे.

‘‘क्यों?’’ ‘‘मेरे सुनने में आया है कि महक और तुम्हारे बीच कुछ चक्कर…’’ उस ने अपना वाक्य शायद जानबू?ा कर अधूरा छोड़ दिया. ‘‘हमारे बीच ऐसा चक्कर था, पर अब नहीं है. मैं ने उस की जिंदगी से हमेशा के लिए निकल जाने का फैसला कर लिया है,’’ मैं ने उसे सच्चाई बता दी. ‘‘कब किया है तुम ने यह फैसला.’’

‘‘आज ही किया है.’’ ‘‘और तुम्हारा यह फैसला कितना मजबूत है, समीर.’’ ‘‘मैं तुम से वादा करता हूं कि  उस रास्ते पर जिंदगी भर नहीं लौटूंगा.’’ ‘‘तब मु?ो तुम्हारे इस अतीत से कुछ लेनादेना नहीं है. मेरा दिल कहता है कि तुम बहुत अच्छे दिल वाले इंसान हो और मेरे मन में तुम्हारे लिए बहुत इज्जत है. एकदूसरे को सम?ा लेने के बाद अगर हम शादी करने का फैसला करते हैं तो मु?ो बहुत खुशी होगी.’’

‘‘मु?ो बस एक बात और कहनी है. मां हमेशा हमारे साथ रहेंगी. उन की मेरे छोटे भाई की पत्नी से बिलकुल नहीं पटती है.’’

‘‘नो प्रौब्लम.’’

‘‘थैंक यू. अब बताओ कि क्या खाओगी?’’

‘‘हम जीवनसाथी बनना चाहते हैं और यह खुशी की बात है, इसलिए मुंह मीठा कर लेते हैं. अगर तुम्हें ऐतराज न हो तो कौफी पीने के बजाय आइसक्रीम खा लें?’’

‘श्योर,’’ मैं उठ कर खड़ा हुआ और अपना हाथ सीमा की तरफ बढ़ा दिया. सीमा शरमाई सी कुछ पलों तक ?ि?ाकी पर फिर उस ने मेरा हाथ थाम लिया. उस के हाथ का स्पर्श मेरे मन को अंदर तक गुदगुदा गया. इस स्पर्श में महक के स्पर्श से पैदा होने वाली उत्तेजना के नहीं बल्कि दिल को भाने वाली गर्लफ्रैंड के स्पर्श से मिलने वाले रोमांस के भाव मौजूद थे.

दोस्ती लड़के और लड़की के बीच

साल 1989 की ब्लॉकबस्टर हिंदी फिल्म ‘ मैं ने प्यार किया ‘ में लीड एक्टर सलमान खान और हीरोइन भाग्यश्री के रिश्ते की शुरुआत दोस्ती के जरिए हुई थी जो आगे चल कर प्यार में बदल गई. इस फिल्म का एक फेमस डायलॉग है जो विलेन मोहनीश बहल ने कहा था कि एक लड़का और लड़की कभी दोस्त नहीं हो सकते. भले ही उस दौर में यह बात काफी हद तक सही थी मगर अब तीन दशक से अधिक का समय बीत चुका है. लोगों की खासकर यंग जेनरेशन की सोच काफी हद तक बदल चुकी है. अब लड़केलड़कियां न केवल दोस्त होते हैं बल्कि बेस्ट फ्रेंड भी बनते हैं. बदलते दौर में हम ऐसी कई मिसालें देखते हैं कि मेल और फीमेल न सिर्फ अच्छे दोस्त रहे हैं बल्कि इस खूबसूरत रिश्ते को जिंदगी भर निभाया भी है. आयरलैंड के मशहूर कवि ऑस्कर वाइल्ड ने कहा था, ‘दोस्ती प्यार के मुकाबले ज्यादा ट्रैजिक होती है. यह लंबे वक्त तक टिकती है’. जब मेल फीमेल के बीच दोस्ती का रिश्ता होता है तो यह और भी ज्यादा समय तक टिकता है. इस दोस्ती में कभीकभी रोमांस की भी एंट्री हो सकती है. हालांकि ज्यादातर मामले में

यह प्यार एकतरफा होता है.

याद कीजिए फिल्म ‘ ऐ दिल है मुश्किल’ के रणवीर कपूर को जो अनुष्का शर्मा को दोस्त से बढ़ कर मानते थे. मगर अनुष्का उन्हें केवल दोस्त बनाए रखना चाहती थी. वह दोस्ती के प्यार को महसूस करना चाहती थी. ऐसा ही कुछ फिल्म बेफिक्रे के रणबीर सिंह के साथ भी हुआ. बेफिक्रे फिल्म में रणवीर कहता है, ‘ वह डेट पर जाती तो मुझ से पूछती क्या पहनूं. हर एडवाइस मुझ से लेती और अब शादी किसी और से कर रही है.’

आज के युवाओं की भाषा में इसे फ्रेंडजॉन नाम दिया जाता है. कई बार एक लड़की और लड़के के केस में महज दोस्त भर रह जाना लड़के को कंफ्यूज कर जाती है. एक लड़के के तौर पर आप कन्फ्यूज हो जाते हैं कि आखिर यह लड़की चाहती क्या है. क्या बस एक कंधा जो उसे हर इमोशनल परिस्थिति में सहारा दे? कहीं वह सिर्फ अपनी इमोशनल जरूरतों के लिए ‘यूज’ तो नहीं कर रही?

दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है जिस के बिना कोई भी व्यक्ति नहीं रह सकता पहले के समय में अधिकतर लड़कियों की दोस्ती लड़कियों से और लड़कों की समान उम्र के लड़कों से होती थीं लेकिन आज के समय में लड़कालड़की की दोस्ती होना सामान्य बात है और इस में कोई बुराई भी नहीं है स्कूल कॉलेज में लड़के लड़कियां मिल कर मस्ती करते हैं और दोस्तों की तरह पढ़ाई के साथ साथ जिंदगी के उतार चढ़ाव में एकदूसरे की मदद भी करते हैं. दुनिया के अधिकतर रिश्ते तो हमें जन्म के साथ ही मिलते हैं लेकिन दोस्ती के रिश्ते में सामने वाले व्यक्ति को हम स्वयं चुनते हैं किसी से दोस्ती करते समय नहीं देखा जाता कि वह लड़का है या लड़की या फिर उस का रंगरूप या धर्म क्या है दोस्ती के लिए सामने वाले व्यक्ति का अच्छा इंसान होना और आपस में विचार मिलना जरूरी है किसी भी दोस्ती की शुरुआत तब होती है जब हालात या फिर इंट्रेस्ट एक जैसे हों. इस दोस्ती में भी अपने फ्रेंड को वैसे ही ट्रीट किया जाता है जैसा कि आप सेम जेंडर के फ्रेंड्स को करते हैं. हालांकि ज्यादातर पुरुष दोस्त अपनी फीमेल फ्रेंड्स से ज्यादा रिस्पेक्टफुली बात करते हैं क्योंकि महिलाएं असल में मर्दों के मुकाबले ज्यादा सेंसिटिव होती है. किसी भी दोस्ती में सब से जरूरी है भरोसा इस के साथ ही ये रिश्ता तब तक चलेगा जब तक कि दोनों के बीच में किसी तरह का स्वार्थ न पैदा हुआ हो. लड़कियों को ये भरोसा होना चाहिए कि वे अपने पुरुष मित्र के साथ सेफ हैं. वहीं मेल फ्रेंड को भी इस बात का यकीन रहे कि वो दोस्ती के नाम पर इस्तेमाल तो नहीं किए जा रहे. यही विश्वास फ्रेंडशिप को पक्का करता है.

क्यों मजबूत होती है ये दोस्ती

विश्वास

लड़कियां अपनी सहेलियों की बजाय पुरुष मित्रों पर अधिक विश्वास करती हैं इस के पीछे एक वजह यह भी है कि लड़कियां अन्य लड़कियों पर ज्यादा विश्वास नहीं कर पाती हैं कई बार उन में आपस में जलन की भावना भी उत्पन्न हो जाती है लेकिन लड़के और लड़की की दोस्ती में ऐसा कभी नहीं होता है. जलन के बजाए आकर्षण सदैव बना रहता है. नकारात्मक भाव न होने के कारण विश्वसनीयता भी बनी रहती है

लगाव और आकर्षण

आकर्षण होने का मतलब जरूरी नहीं कि प्रेम ही हो. हमें किसी की कोई बात पसंद आती है उस की ओर मित्रता का हाथ बढ़ाते हैं. विपरीत लिंग के लोगों में वैसे भी अधिक आकर्षण होता है. आकर्षण वाला यह लगाव एकदूसरे को एक मजबूत बंधन में बांधता है.

केयर करना

यदि आप का दोस्त कहता है कि घर पहुंच कर मैसेज करना, समय से घर पहुंचना, अपना ख्याल रखना तो बहुत अच्छी फीलिंग आती है. लगता है जैसे घरवालों के अलावा भी कोई है जिसे आप की इतनी फ़िक्र है. दो लड़कियां भी बातोंबातों में एक दूसरे की फिक्र जताती हैं लेकिन लड़के के फ़िक्र जताने का तरीका अलग होता है. वह अपनी दोस्त के प्रति बहुत केयरिंग होते हैं. इसी तरह लड़कियां भी लड़के दोस्त के लिए खास तौर पर केयरिंग होती हैं.

आखिर क्यों होनी चाहिए हर लड़के के पास एक अच्छी फीमेल दोस्त

अंडरस्टैंडिंग

आप की फीमेल दोस्त आप को बाकी दोस्तों से बेहतर तरीके से समझ पाती है अक्सर देखा जाता है कि लड़को को सिर्फ उतना ही समझ आता है जितना उन्हें कुछ बताया जाता है लेकिन अगर आप के पास कोई महिला मित्र है तो वह आप के मूड को देख कर ही भांप जाएगी कि आप के दिमाग में आखिर क्या चल रहा है आपकी दोस्त न केवल आप को बेहतर समझती है बल्कि यह भी जानती है कि आप को कौन सी बात खुश करेगी और कौन सी बात से आप उदास हो सकते है इतना ही नहीं वह आप के साथ शॉपिंग पर जाने से कभी बोर भी नहीं होगी

रोने के लिए कन्धा

लोग कहते है कि पुरुष कभी नहीं रोते हालांकि इस बात में बिल्कुल भी सच्चाई नहीं है अक्सर देखा गया है कि पुरुष महिलाओं से ज्यादा इमोशनल होते हैं कोई परेशानी आने पर अक्सर लड़के बहुत अकेला महसूस करते है ऐसे में अगर कोई फीमेल फ्रेंड होगी तो उस के सामने रोकर आप अपना दुख हलका कर सकते हैं ऐसा करने पर वह दूसरे लड़के की तरह आप का मजाक नहीं उड़ायेगी

शॉपिंग गाइड

बाज़ार जाने के नाम से ही लड़कों की शक्ल बन जाती है. ऐसे में ज़रा सोचिये कि आप को अपनी गर्लफ्रेंड या फिर बहन या माँ के लिए कुछ तोहफा लेना हो तो क्या करेंगे? ऐसे मौके पर काम आती है आप की लड़की दोस्त. लड़कियों को खरीददारी का बहुत शौक होता है और अक्सर वे जानती है कि कौन सी चीज़ किस मार्किट में अच्छी मिलती है. उन्हें नए नए फैशन का भी ध्यान होता है. कीमत का भी सही अंदाजा होता है. इसलिए तोहफे खरीदने के लिए ही नहीं आप उन की मदद अपने मेकओवर में भी ले सकते है. इस के विपरीत अगर आप अपने किसी लड़के दोस्त के साथ शॉपिंग करने जाते हैं तो आप को यकीनन काफी परेशानी होती है क्यों कि शॉपिंग के मामले में लड़के कच्चे होते हैं इसी तरह बीवी या गर्लफ्रेंड के साथ जाने का मतलब है उन के लिए ही शॉपिंग करते रहना और बैठेबिठाए जेब खाली हो जाना. लेकिन अगर एक लड़की आप की दोस्त है तो उस के साथ आप का शॉपिंग एक्सपीरियंस काफी अच्छा होता है आप उस के साथ कई दुकानों पर जा कर अपने लिए वह खरीद सकते हैं जो आप पर सब से ज्यादा सूट करता हो साथ ही वह आप को कुछ अच्छे आईडियाज भी देती रहेगी कि आप पर क्या अच्छा लगेगा

रिलेशनशिप गाइड

कई बार ऐसा होता है कि आप की लव लाइफ सही नहीं चल रही होती है. उस समय आप को समझ नहीं आता कि आप क्या करें और किस से मदद लें इस स्थिति में एक लड़की दोस्त से बेहतर दूसरा कोई सहारा नहीं हो सकता एक लड़की होने के नाते

आप की दोस्त आप की स्थिति को बेहतर तरीके से समझ सकती है अक्सर लड़के लड़कियों की बातें या इशारे नहीं समझ पाते. अगर आप को भी अपनी गर्लफ्रेंड को समझने में दिक्कत आती है तो इस मामले में भी लड़की दोस्त आप की मदद कर सकती है वह बता पायेगी कि आप की गर्लफ्रेंड की हर बात का सही मायनों में मतलब क्या है लड़की दोस्त के साथ समय बिताने पर आप समझने लगते है कि लड़कियों का व्यवहार कैसा होता है. उन्हें क्या पसंद आता है क्या नहीं, किस तरह उन्हें खुश किया जा सकता है. यही नहीं आप की दोस्त गर्लफ्रेंड से मिलाने में आप की मदद भी करती है.

हमराज

एक लड़की बेस्टी होने का मतलब है कि आप उसे बिना झिझक के कुछ भी आसानी से बता सकते हैं वैसे तो एक लड़के दोस्त से भी बातें शेयर की जा सकती हैं लेकिन वह आप की फीलिंग को उस तरह नहीं समझ सकता जिस तरह एक लड़की समझ सकती है लड़कों के साथ इमोशनल टॉक करना उतना अच्छा आईडिया नहीं है लेकिन जब एक लड़की दोस्त की बात आती है तो आप उस से अपने डीप सीक्रेट आसानी से बता सकते हैं कभीकभी लड़के दोस्त किसी संजीदा बात को भी मजाक में उड़ा देते है लेकिन अगर वही बात आप अपनी लड़की दोस्त को बताते है तो वह सुनती है. सुनने के साथसाथ अक्सर लड़कियां समस्या का हल भी बता देती है. आप बेहिचक उन से अपनी ख़ुशी, सपने, दुःख या डर के बारे में बात कर सकते है.

बुरे वक्त का सहारा

जिंदगी में बहुत बार ऐसे मौके आते है जब हम किसी बात से परेशान होते है. ऐसे वक्त में अगर कोई लड़की आप की दोस्त है तो उस से अच्छा सहारा कोई नहीं हो सकता. वो आप की बात को समझती है खासकर अगर मामला प्रेम प्रसंग का हो.

हर जगह साथ

एक लड़की दोस्त जीवन के हर पहलू में आप की ताकत बन कर खड़ी होती है आप उस के साथ मस्ती भी कर सकते हैं और गंभीर बातें भी. आप उस के साथ हंस भी लेते हैं और रो भी सकते हैं. उन के साथ बाहर घूमनेफिरने के लिए भी आप को ज्यादा सोचना नहीं पड़ता इसी तरह मुश्किल वक्त में या दुखी होने पर एक लड़की अच्छी दोस्त के रूप में आप का साथ देती है और आप से इमोशनली कनेक्ट होती है.

एक लड़की से दोस्ती मतलब उस की सहेलियों से भी दोस्ती

अगर आप की कोई लड़की दोस्त नहीं है तो किसी लड़की से बात करना थोड़ा मुश्किल होता है. लेकिन अगर आप की बेस्ट फ्रेंड कोई लड़की है तो किसी और लड़की से बात करना बहुत ही आसान हो जाता है क्योंकि आप की एक पहचान होती है कि आप फलां लड़की के दोस्त है. इस से काम आसान हो जाता है.

एक लड़की को मिलते हैं लड़के दोस्त से ये फायदे

आप के लिए हमेशा तैयार

अगर आप के पास एक लड़का दोस्त है जो आप का बेस्ट फ्रेंड है तो फिर आप को यह चिंता करने की जरुरत नहीं होगी कि कहीं आप गलत समय पर तो फोन नहीं कर रहीं? दिन हो या आधी रात, आप उसे बेफिक्र हो कर कभी भी फ़ोन कर सकती हैं और अपना दुखड़ा सुना सकती हैं. आप किसी प्रॉब्लम में हाँ तो वह आप की सहायता के लिए पहुँच जाएगा कहीं ट्रैफिक, बारिश या किसी मुसीबत में फंस गई है तो वह बाइक लेकर हाजिर हो जाएगा. इस तरह किसी गंभीर रिलेशनशिप में न होते हुए भी वह गंभीरता से आप की केयर करेगा.

नखरे कम करते हैं लड़के

लड़कियां लड़को को फ्रेंड बनाना इसलिए पसंद करती हैं क्यों कि लड़के बहुत कम नखरे करते हैं उन के साथ कोई प्रोग्राम बनाना या कुछ काम करना बहुत आसान होता है और वे हेल्प करने के लिए भी हमेशा तैयार रहते हैं. आधी रात में भी अपनी मदद करने के लिये बुलाएंगी तो भी वे हंसतेमुसकुराते आपकी मदद के लिए पहुंच जाएंगे न वे खाने में चूजी होते हैं और न कपड़ों में न मेकअप में समय लगाते हैं और न कहीं जाने में आनाकानी करते हैं. उन्हें जैसे चाहो वैसे घुमाया जा सकता है.

अपने बारे में कुछ नहीं छिपाते

एक लड़का आप का दोस्त बनने के बाद अपने बारे में आप से कभी कुछ नहीं छिपाता कोई राज नहीं रखता. वह आप से हर बात शेयर कर लेता है. इस से आप पुरुषों के व्यवहार के बारे में अच्छी तरह से जान सकती हैं और यही बात आगे चल कर पति के साथ आप के रिश्ते को रोमांटिक बनाने के काम आ सकती है

प्रॉब्लम सॉल्वर

एक लड़के दोस्त के पास आप की हर समस्या के लिए समाधान होता है और आप के गुस्से को शांत करने के लिए वह किसी भी हद तक जा सकता है लड़कों को टेक्निकल नॉलेज भी ज्यादा होता है और वे स्ट्रांग भी होते हैं. वे आप को कार या बाइक चलाना भी सिखा सकते हैं और तैराकी या सेल्फ डिफेन्स भी. आप की समस्याओं का हल वे चुटकियों में निकाल सकते हैं.

जनसुनवाई में दिया कंबल

गोंडा । ज़िले में जनसुनवाई के दौरान जब एक बुजुर्ग आया तो वहाँ के डीएम उज्ज्वल कुमार ने ना केवल बुजुर्ग की समस्या का समाधान किया बल्कि बुजुर्ग को जाड़ा ना लग जाये इसलिए एक कंबल भी दिया. उज्ज्वल कुमार बेहद संवेदनशील अधिकारी है जहां भी उनको इस तरह की सेवा का मौक़ा मिलता है आगे बढ़ कर समाज की सेवा करते है.

तमिल सुपरस्टार थलापित विजय पत्नी से लेंगे तलाक, क्या टूटेगा एक और घर!

साउथ सुपरस्टार थलापति विजय को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो कॉलीवुड स्टार थलापति विजय और उनकी पत्नी संगीता की शादीशुदा जिंदगी में कुछ ठीक नहीं चल रहा है. जिसकी वजह से ये स्टार कपल जल्दी ही अलग हो सकता है. इन रिपोर्ट्स के सामने आने के बाद कॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री में तहलका मच गया. थलापति विजय और संगीता तमिल फिल्म इंडस्ट्री की पावर कपल माने जाते हैं. दोनों की शादी को करीब 24 साल होने वाले हैं. ऐसे में इस स्टार कपल की तलाक की खबरों ने इंडस्ट्री में हंगामा मचा दिया है.

 

झूठी निकली विजय और संगीता के तलाक की खबर

अब एंटरटेनमेंट पोर्ट्ल पिंकविला की एक रिपोर्ट की मानें तो ये खबर गलत हैं. इन खबरों के वायरल होने के बाद थलापति विजय और संगीता से जुड़े एक करीबी सूत्र ने बताया, ‘विजय और संगीता के तलाक की खबरें आधारहीन हैं. किसी को नहीं पता कि ये खबरें कहां से शुरू हुईं.

 

ऐसे लगी विजय और संगीता के तलाक की खबरों को चिंगारी

दरअसल, हाल ही में थलापति विजय की अपकमिंग फिल्म वरिसु के ऑडियो लॉन्च के वक्त उनकी पत्नी संगीता मौजूद नहीं थीं वहीं, जवान फिल्म के निर्देशक एटली कुमार की प्रेग्नेंट पत्नी प्रिया के बेबी शॉवर पार्टी में भी संगीता नहीं आई थीं. जिसके बाद इन खबरों को हवा मिली थी. जबकि, रिपोर्ट के मुताबिक उस वक्त संगीता अपने बच्चों के साथ अमेरिका में छुट्टियां बिता रही थी। यही वजह है कि विजय और संगीता साथ नहीं स्पॉट हुए. रिपोर्ट की मानें तो जल्दी ही विजय भी अमेरिका अपने परिवार से मिलने पहुंचने वाले हैं. हालांकि अभी तक इन रिपोर्ट्स पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है.

संगीता और विजय की हुई थी लव मैरिज

साउथ सुपरस्टार विजय और संगीता ने एक दूसरे से लव मैरिज की थी. संगीता सुपरस्टार विजय की बहुत बड़ी फैन थी. जो लंदन से सिर्फ विजय से मिलने के लिए चेन्नई आई थीं. संगीता श्रीलंकन तमिल हैं और उनके पिता एक बड़े बिजनेसमैन थे. ऐसे में जब दोनों सितारों की पहली मुलाकात हुई तो ये दोस्ती में बदल गई. बाद में दोनों ने एक दूसरे से शादी रचा ली थी.

सावधान! खतरा है खतरा! ‘ज़ूम’ से प्राइवेसी हो जाएगी जूम

कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लागू किए गए लौकडाउन के चलते तकरीबन पूरी दुनिया के इंसान घरों में कैद की सी हालत में हैं. कर्मचारी वर्क फ्रौम होम कर रहे हैं. औफिसों के बौस अपने अधिकारियों व कर्मचारियों से वीडियो कौन्फ्रैंसिंग के जरिए जुड़ते हैं, रणनीति पर चर्चा करते हैं और दिशानिर्देश देते हैं.

स्टाफ के घर से ड्यूटी करने के चलते वीडियो कौन्फ्रैंसिंग ऐप की डिमांड बहुत बढ़ गई है. इस बाबत सभी देशों के ज्यादातर संस्थान ज़ूम ऐप का इस्तेमाल कर रहे हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक, ज़ूम ऐप भारत में सबसे ज्यादा बार डाउनलोड किया जाने वाला ऐप बन गया है.

लेकिन, ज़ूम ऐप पर प्राइवेसी को लेकर आजकल कई सवाल खड़े किए जा रहे हैं. ऐप की प्राइवेसी और सिक्योरिटी में कई खामियां देखी गई हैं. ब्लीपिंग कंम्पयूटर की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक तो पांच लाख से ज्यादा ज़ूम अकाउंट्स को हैक कर डार्कवैब पर बेचा जा रहा है.

ये कोई आरोप नहीं हैं. ज़ूम के सीईओ एरिक एस. युआन ने स्वीकार करते हुए कहा है, “हमने कुछ गलतियां की थीं लेकिन हमने इससे सीख ले ली है और अब हम प्राइवेसी और सिक्योरिटी पर ध्यान दे रहे हैं”. वे आगे कहते हैं, “यह एक कौमन वैब सर्विस है जिसकी मदद से कंज्यूमर को टारगेट किया जा रहा है.”

इसी बीच, भारत के गृह मंत्रालय ने साफ ऐलान कर दिया है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ऐप ज़ूम सेफ नहीं है. कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (सीईआरटी) की ओर से ज़ूम ऐप को लेकर आगाह किए जाने के बाद सरकार ने एडवाइजरी जारी की है. सीईआरटी भारत की राष्ट्रीय साइबर सिक्योरिटी एजेंसी है.

सीईआरटी ने इससे पहले भी कहा था कि डिजिटल एप्लीकेशन के बहुत ज़्यादा इस्तेमाल से आप साइबर हमले के शिकार हो सकते हैं और आपके ऑफ़िस की अहम जानकारियां अपराधियों के हाथ लग सकती हैं. गौरतलब है कि दुनियाभर की तरह ही भारत में भी बड़ी संख्या में लोग इस ऐप का इस्तेमाल कर रहे हैं. कोरोना वायरस के कारण लागू किए गए लॉकडाउन की वजह से प्रोफ़ेशनल घर से काम कर रहे हैं, ऐसे में बीते कुछ दिनों में बड़ी संख्या में लोगों ने इस ऐप को डाउनलोड किया है.

मालूम हो कि टिकटौक ऐप की तरह ज़ूम ऐप का सर्वर भी चीन में है. लौकडाउन के दौरान ज़ूम की तरह कुछ दूसरी ऐप का भी इस्तेमाल किया जा रहा है.

15 पैसे में बेची जा रही है जानकारी:

साइबर सिक्योरिटी इंटेलिजेंस फर्म साइबल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक हैकर फोरम पर 1 अप्रैल को कई जूम अकाउंट्स डीटेल्स को बेचने के लिए अपलोड किया गया था. साइबल के मुताबिक, 5.30 लाख यूजर्स की डीटेल्स 0.002 डॉलर (करीब 15 पैसे) प्रति यूजर के हिसाब से बेची जा रही थीं. हैरानी की बात तो यह है कि कई अकाउंट डीटेल्स को फ्री में भी शेयर किया जा रहा था. इन जूम अकाउंट्स में ईमेल ऐड्रेस, पासवर्ड्स, पर्सनल मीटिंग यूआरएल, होस्टकीज समेत अन्य कई डीटेल्स शामिल हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से 290 अकाउंट कॉलेज और यूनिवर्सिटी से जुड़े हैं. जिन यूजर्स का डाटा लीक हुआ है उनमें यूनिवर्सिटी ऑफ वर्मोंट, डार्टमाउथ, लाफयेते, फ्लोरिडा विश्वविद्यालय, कोलोराडो विश्वविद्यालय और सिटीबैंक जैसी कंपनियों के नाम शामिल हैं.

राष्ट्रीय चिंता की बात यह है कि देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक अप्रैल को जूम ऐप से ही चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ जनरल बिपिन रावत के अलावा आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के चीफ से मीटिंग की थी. ऐसे में हालात बेहद चिंताजनक हो जाते हैं. यह बात केवल राजनाथ सिंह ही नहीं, उन सभी भारतीयों पर लागू होती है जो इसका इस्तेमाल करते हैं. वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल भी एप्पल के मैकबुक एयर लैपटौप से इसी ऐप से वीडियो कान्फ्रेंसिंग करते दिखे थे.

एक ब्रिटिश रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी एंजेसी के पूर्व हैकर पैट्रिक वार्डले ने बताया है कि इस ऐप को इस्तेमाल करने वाले मैक यूजर्स का वैबकैम और माइक्रोफोन तक हैक किया जा सकता है.

यह भी जान लें कि हाल ही में गूगल, नासा, स्पेस एक्स, ऐपल समेत कई बड़ी दिग्गज कंपनियों ने जूम ऐप को बैन किया है. कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को जूम ऐप का इस्तेमाल नहीं करने का आदेश दिया है.

देश के गृह मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि जो लोग ज़ूम ऐप का इस्तेमाल करना चाहते हैं उन्हें कुछ बातों का ध्यान रखना होगा, जैसे कि अपने कौन्फ्रैन्सरूम में किसी को भी बिना इजाजत के न आने दें. मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि ज़ूम ऐप में यूज़र की प्राइवेसी और उनकी सुरक्षा को ख़तरा है.

कहीं आप सेक्स एडिक्टेड तो नहीं?

सेक्स ऐडिक्शन  एक खतरनाक डिसऑर्डर है, जिसमें आदमी अपनी सेक्शुअल नीड्स पर कंट्रोल नहीं कर पाता. यह है कि यह बेहद खतरनाक डिसऑर्डर है और अडिक्टेड आदमी की जिंदगी बर्बाद भी कर सकता है.

क्या है सेक्स ऐडिक्शन ?  

सेक्स ऐडिक्शन  आउट ऑफ कंट्रोल हो जाने वाली सेक्शुअल ऐक्टिविटी है. इस स्थिति में सेक्स से जुड़ी हर बात आती है चाहे पॉर्न देखना हो, मास्टरबेशन हो या फिर प्रॉस्टिट्यूट्स के पास जाना, बस यह एक ऐसी ऐक्टिविटी होती है जिस पर इंसान का कंट्रोल नहीं रहता.

क्या हैं लक्षण?

सेक्स थेरेपिस्ट के साथ रेग्युलर मीटिंग्स के बिना यह बताना बहुत मुश्किल है कि किसे यह डिसऑर्डर है लेकिन कुछ लक्षण है जिनसे आप अंदाजा लगा सकती हैं और फिर डॉक्टर से कंसल्ट कर सकती हैं. जैसे, बहुत सारे लोगों के साथ अफेयर होना, मल्टिपल वन नाइट स्टैंड, मल्टिपल सेक्शुअल पार्टनर्स, हद से ज्यादा पॉर्न देखना, अनसेफ सेक्स करना, साइबर सेक्स, प्रॉस्टिट्यूट्स के पास जाना, शर्मिंदगी महसूस होना, सेक्शुअल नीड्स पर से नियंत्रण खो देना, ज्यादातर समय सेक्स के बारे में ही सोचना या सेक्स करना, सेक्स न कर पाने की स्थिति में तनाव में चले जाना.

ऐसे पायें छुटकारा

सेक्स ऐडिक्शन  के शिकार लोगों को फौरन साइकॉलजिस्ट या साइकायट्रिस्ट के पास जाना चाहिए. साइकॉलजिस्ट काउंसिलिंग और बिहेवियर मॉडिफिकेशन के आधार पर इस ऐडिक्शन का इलाज करते हैं और मरीज के विचारों में परिवर्तन लाने की कोशिश करते हैं. ऐसे लोगों को दूसरे कामों में व्यस्त रहने की सलाह दी जाती है. उन्हें समझाया जाता है कि वे संगीत, लॉन्ग वॉक आदि का सहारा लें और अपने परिवारवालों के साथ ज्यादा से ज्यादा वक्त बिताएं. साइकायट्रिस्ट दवाओं के माध्यम से इलाज करता है.

सेक्स ऐडिक्शन  एनोनिमस (एसएए) सेक्स ऐडिक्शन   के शिकार लोगों का संगठन हैं. यहां कोई फीस नहीं ली जाती और न ही दवा दी जाती है. मीटिंग में इसके सदस्य जीवन के कड़वे अनुभवों, इससे जीवन में होने वाले नुकसान और काबू पाने की कहानी शेयर करते हैं. मीटिंग में आने वाले नए सदस्यों को इससे छुटकारा दिलाने के लिए मदद भी करते हैं. इससे पीड़ितों का आत्मबल बढ़ता है और उनमें इस बुरी आदत को छोड़ने की शक्ति विकसित होती है.

अनुज-अनुपमा के बीच आया नया शख्स, काव्या करेगी नई शुरुआत

टीवी का धमाकेदार शो ‘अनुपमा’ इन दिनों खूब धूम मचा रहा है. रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर ‘अनुपमा‘ (Anupama) में आए दिन ऐसे-ऐसे ट्विस्ट और टर्न्स देखने को मिल रहे हैं, जिसने फैंस को भी इस हैरत में डाल दिया है कि आगे क्या होने वाला है. ‘अनुपमा’ (Anupama) में दिखाया गया था कि नए साल की शुरुआत से पहले न केवल सबमें झगड़ा होता है, बल्कि सबके दिल का गुबार भी निकल जाता है. बीते दिन ‘अनुपमा’ के एपिसोड में देखने को मिला कि अनुज रो-रोकर अनुपमा और शाह परिवार के सामने दर्द बयां करता है और कहता है कि अब मुझसे नहीं हो पाएगा. दूसरी तरफ वनराज दिल्ली की नौकरी स्वीकार करने से इंकार कर देता है. लेकिन रुपाली गांगुली के ‘अनुपमा’ में आने वाले ट्विस्ट और टर्न्स यहीं नहीं रुकते हैं.

 

 

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नए साल के साथ नई शुरुआत करेगी अनुपमा

रुपाली गांगुली (Rupali Ganguly) के शो में देखने को मिलेगा कि नए साल के साथ हर कोई नई शुरुआत करता है. जहां अनुपमा, अनुज से अपने किये की माफी मांगती है और कपड़े पहनने में उसकी मदद करती है. तो वहीं बा को भी अपनी गलतियों का एहसास होता है और वह कहती हैं कि अनुपमा के साथ मैंने जो कुछ किया वो गलत किया. इससे इतर वनराज भी अपने कंधों पर सारी जिम्मेदारी लेता है और तोषू भी अपनी पुरानी गलतियों को भूलकर आगे बढ़ता है.

 

 

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वनराज से रिश्ता तोड़कर अनिरुद्ध के पास वापस लौटेगी काव्या

अनुपमा‘ (Anupama) में काव्या को समझ आ जाता है कि वनराज का पूरा ध्यान केवल उसके परिवार पर लगा रहता है और वह चाहे कुछ भी कर ले, उसके परिवार का हिस्सा नहीं बन सकती है. ऐसे में वह अनिरुद्ध को फोन करती है. इस चीज को लेकर माना जा रहा है कि काव्या न केवल दिल्ली की नौकरी स्वीकार कर लेगी, बल्कि पहले पति अनिरुद्ध के पास वापस लौट जाएगी.

अनुज को मनाने के लिए रोमांटिक नाइट प्लान करेगी अनुपमा

रुपाली गांगुली स्टारर ‘अनुपमा’ में एंटरटेनमेंट का डोज यहीं खत्म नहीं होता है। शो में जल्द ही दिखाया जाएगा कि अनुपमा, अनुज को मनाने के लिए रोमांटिक नाइट प्लान करती है। वह पूरे घर को खूबसूरती से सजाती है और जैसे ही अनुज आता है, उसके गले लग जाती है। लेकिन अनुपमा को धक्का तब लगता है, जब वह देखती है कि अनुज अपने साथ-साथ एक क्लाइंट को घर ले आया है

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